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Vinod Khanna Biography In Hindi – विनोद खन्ना की जीवनी

Vinod Khanna Biography In Hindi – विनोद खन्ना की जीवनी

Vinod Khanna Biography In Hindi

आज बात करने जा रहे है विनोद खन्ना की ,विनोद का जन्म पाकिस्तान के अब पेशावर में किशनचंद खन्ना (पिता) और कमला (मां) के घर में 6 अक्टूबर 1946 को हुआ।

उनके पिता एक व्यवसायी थे। विनोद खन्ना ने क्वीन मैरीज़ स्कूल और सेंट जेवियर्स के हाई स्कूल में अध्ययन किया और सिडनहैम कॉलेज से अपनी स्नातक की डिग्री समाप्त कर ली।

विनोद खन्ना ने एक पारसी लड़की, गीतांजलि तलेरखान से शादी की, जो कि उनके परिवार की बहुत ही ख़ासियत थी। इस युगल के दो बेटे- राहुल खन्ना और अक्षय खन्ना थे, दोनों अब अभिनेता हैं।

हालांकि, उनकी शादी लंबे समय तक नहीं टिक पायी कुछ सालों बाद तलाक से समाप्त हुई।1990 में, विनोद खन्ना को कविता दफ्तरी से प्यार हो गया और उन्होनें कविता दफ्तरी से दूसरी शादी की। उनकी दो बेटिया साक्षी और श्रद्धा हैं।

फ़िल्मी सफ़र:

अपने पहले फ़िल्मी की शुरुआत 1968 में सुनील दत्त की आई फिल्म “मन का मीत” से की और इस फिल्म में विलेन का रोल निभाया.
और इसी के साथ इनके अभिनय की चारो तरफ सराहना होने लगी और साथ ही इन्हें कई फिल्मो का ऑफर भी मिल गया और इन्होने एक साथ 15 फ़िल्में साइन कर ली.  जिसमे पूरब और पश्चिम, आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश जैसी  सुपरहिट फिल्में शामिल थीं.
फिर इन्होने सन 1971 में फिल्म “हम तुम” और “वो” में बतौर सोलो हीरो बन के काम किया.फिर सन 1973 में गुलज़ार जी की फिल्म “मेरे अपने” में अभिनय किया और यह फिल्म भी कामयाब हुई. और फिर इनकी फिल्म “अचानक” आई और इस फिल्म में विनोद खन्ना ने एक मौत की सजा पाए आर्मी अफसर का रोल निभाया था जिसकी तारीफ दर्शकों ने बहुत की,  इसी के साथ वो बन गए एक कामयाब हीरो.
सन 1977 में अमिताभ बच्चन के साथ अभिनय किया फिल्म “परवरिश” में और यह सुपरहिट फिल्म साबित हुई. कई फिल्मे अमिताभ बच्चन के साथ के साथ की अमर अकबर एंथनी, खूनपसीना, हेराफेरी और “रेशमा और शेरा” जैसी फिल्मे साथ साथ की.विनोद खन्ना उन बहुत कम अभिनेताओ में हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत विलेन के किरदार से की, और कालांतर में नायक के रूप में स्थापित हुए. हालाँकि फ़िल्म इंडस्ट्री में ये बहुत ही मुश्किल है. विनोद खन्ना को सन 1971 में आई फ़िल्म ‘हम, तुम और वो’ में लीड रोल में काम करने का मौक़ा मिला. इस सिनेमा में वे भारती विष्णुवर्धन के साथ नज़र आये. इसी साल इन्हें गुलज़ार साहब की फ़िल्म ‘मेरे अपने’ में भी देखा गया. ये फ़िल्म एक बंगाली फ़िल्म ‘आपनजन’ की रीमेक थी. इसके बाद सन 1973 में इन्हें पुनः गुलज़ार द्वारा लिखित और निर्देशित फ़िल्म ‘अचानक’ में देखा गया. इस फ़िल्म को लोगों और फ़िल्म समीक्षकों द्वारा खूब सराहा गया.फ़िल्म ‘हम, तुम और वो’ में विनोद खन्ना का रोमांटिक रूप लोगों को खूब पसंद आया और उसके बाद कई फिल्मों में विनोद खन्ना का ये रूप देखा गया. साल 1973 से 1982 के दौरान इन्होने कई फ़िल्मों में सोलो हीरो की भूमिका निभाई. इन फ़िल्मों में फरेबी, हत्यारा, क़ैद, ज़ालिम, इनकार आदि है. इन फिल्मो ने लोगों के बीच इनकी अलग पहचान कायम कर दी. इन फ़िल्मों को करने के दौरान इनके साथ मौसमी चटर्जी, लीना चंदावरकर, विद्या सिंह आदि अभिनेत्रियाँ काम करती हुईं दिखीं. इन फ़िल्मों के बाद विनोद खन्ना के खाते में कई ब्लॉकबस्टर फ़िल्में भी आयीं. इन फ़िल्मों में गद्दार, आप की खातिर, मैं तुलसी तेरे आँगन की, खून की पुकार, शौक़, आधा दिन और आधी रात, आरोप, जेल यात्रा, ताक़त, दौलत आदि फिल्में की. कई अभिनेता ऐसे होते हैं, जो एक बार हीरो वाले किरदार की लाइन पकड़ लेने पर सपोर्टिंग रोल में नहीं आते, किन्तु विनोद खन्ना ने कई सपोर्टिंग रोल भी निभाए. इन सपोर्टिंग रोल से इनके स्टारडम में चार चाँद लग गये. सपोर्टिंग रोल करने के दौरान इन्होने आन मिलो सजना, सच्चा झूठा, कुदरत, राजपूत, प्रेमकहानी आदि फ़िल्मों में राजेश खन्ना के लिए सपोर्टिंग रोल में नज़र आये.विनोद खन्ना ने कई मल्टी हीरो फ़िल्में भी की. मल्टी हीरो यानि एक साथ एक से अधिक सुपरस्टार का होना. इन फ़िल्मों में भी विनोद ने अपने अभिनय की गहरी छाप छोड़ी. इन फिल्मों में शंकर शम्भू, चोर सिपाही, एक और एक ग्यारह, हेरा- फेरी, खून पसीना, अमर अकबर अन्थोनी, ज़मीर, परवरिश, मुक़द्दर का सिकंदर, हाथ की सफ़ाई, आखिरी डाकू आदि में इनके काम को आज भी याद किया जाता है. सुपरस्टार जीत्रेन्द्र के साथ इनकी फिल्मो में एक हसीना दो दीवाने, एक बेचारा, परिचय, इंसान, अनोखी अदा और जन्म कुंडली है. विनोद खन्ना के अपने करियर में एक लम्बा समय बेहतर स्टारडम के साथ गुज़ारा है. इनके करियर में ऐसा दौर भी आया जब इन्हें जीतेन्द्र, अमिताभ, ऋषि कपूर आदि सुपरस्टार से भी अधिक पैसे दिए गये|इस दौरान विनोद खन्ना की रूचि आध्यात्म की तरफ गयी और वे फ़िल्म इंडस्ट्री से कुछ समय के लिए कट गये. इस दौरान इन्होंने किसी भी फ़िल्म में काम नहीं किया.साल 1987 में पुनः एक बार विनोद खन्ना ने फिल्मो की तरफ रुख किया. इस दौरान इन्होने अपना रुका हुआ फ़िल्मी सफ़र पुनः फ़िल्म इन्साफ से शुरू किया. इस फिल्म में इनके साथ डिंपल कपाडिया नज़र आयीं. इसके बाद इन्हें कई रोमांटिक किरदार भी करने के मौके मिले, लेकिन अधिकतर समय इन्हें एक्शन थ्रीलर ही मिलते थे. रोमांटिक फिल्मो में इस दौरान इन्हें जुर्म और चांदनी फिल्म मिली थी. नब्बे के दशक के दौरान इन्हें मुक़द्दर का बादशाह, सीआईडी, रिहाई, लेकिन और हमशकल में देखा गया. इस समय कई मल्टी स्टार एक्शन फ़िल्में बन रही थीं. ऐसी फ़िल्मों में विनोद खन्ना का होना जैसे अनिवार्य हो गया था. वे फिल्मे आखिरी अदालत, खून का क़र्ज़, महासंग्राम, पुलिस और मुजरिम, क्षत्रिय, इंसानियत के देवता, एक्का राजा रानी, इना मीका डीका आदि थीं. साल 1997 में विनोद खन्ना ने अपने बेटे अक्षय खन्ना को हिमालय पुत्र में अपने साथ अभिनय के लिए तैयार किया. ऐसी फ़िल्मों में इनकी जोड़ी मिनाक्षी के साथ खूब देखी गयी. लोगों ने भी इस जोड़ी को खूब पसंद किया. इसके बाद इन्हें कुछ समय पहले सलमान खान के वांटेड, दबंग आदि फ़िल्मों में देखा गया था.

विनोद खन्ना को मिले हुए पुरस्कार:-

  • 1974 – “हाथ की सफाई” के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार
  • 1999 – फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
  • 2007 – लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए ज़ी सिने पुरस्कार

विनोद खन्ना की कुछ चुनिंदा फिल्मे:-

  • मन का मीत – Man ka Meet (1968)
  • पूरब और पश्चिम – Purab Aur Paschim (1970)
  • मेरे अपने – Mere Apne (1971)
  • मेरा गांव मेरा देश – Mera Gaon Mera Desh (1971)
  • अचानक – Achanak (1973)
  • हाथ की सफाई – Haath Ki Safai (1975)
  • हेरा फेरी – Hera Pheri (1976)
  • खून पासीना – Khoon Pasina (1977)
  • परवरिस – Parvarish (1977)
  • अमर अकबर एंथनी – Amar Akbar Anthony (1978)
  • इंकार – Inkaar (1978)
  • मुक्कदर का सिकंदर – Muqaddar Ka Sikandar(1978)
  • लहू के दो रंग – Lahu Ke Do Rang(1979)
  • कुर्बानी – Qurbani (1980)
  • द बर्निंग ट्रेन – The Burning Train (1980)
  • सत्यमेव जयते – Satyamev Jayate( 1987)
  • हेरा फेरी – Hera Pheri (1988)
  • चांदनी – Chandni (1989)
  • जुर्म – Jurm (1990)
  • लेकिन – Lekin (1990)
  • इंसानियत के देवता – Insaniyat Ke Devta (1993)
  • क्षत्रिय – Kshatriya (1993)

राजनीतिक कैरियर

1997 में बीजेपी में शामिल हो गए और 1999 में पंजाब के लोकसभा सीट गुरदासपुर से जीत भी गए। 2002 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पर्यटन और सांस्कृतिक मंत्री बनाया गया।

लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में हार गए पर 2014 के मोदीलहर में जीत गए।

विनोद खन्ना की मृत्यु

अप्रैल 2 2017 को Vinod Khanna की तबीयत बिगड़ गई। जिससे उन्हें हॉस्पिटल में एड्मिट कराया गया। पर हालत उनके ठीक नहीं हुए और 27 अप्रैल 2017 को 11:20 बजे अंतिम सांस लिए और सबको सदा के लिए छोड़ गए।

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