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Vikram Sarabhai Biography in Hindi – विक्रम साराभाई का जीवनी

Vikram Sarabhai Biography in Hindi – विक्रम साराभाई का जीवनी

Vikram Sarabhai Biography in Hindi

विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने ८६ वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं ४० संस्थान खोले। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन १९६६ में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। डॉ. विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया।

भारतीय वैज्ञानिक (Indian scientist) और खोजकर्ता विक्रम साराभाई जो ज्यादातर भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक के नाम से जाने जाते है 12 अगस्‍त काेे पूूरे भारत में उनका जन्‍म दिन मनाया जाता है तो आइये जानते हैं Biography of Vikram Sarabhai in Hindi – विक्रम साराभाई का जीवन परिचय:-
  1. विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai) का पूरा नाम विक्रम अम्बालाल साराभाई था
  2. इनका जन्‍म 12 अगस्त 1919 काेे गुजरात (Gujarat) के अहमदाबाद (Ahmedabad) शहर में हुआ था
  3. इनके पिता का नाम श्री अम्बालाल साराभाई और माता का नाम श्रीमती सरला साराभाई था
  4. उनके पिता अंबालाल साराभाई एक संपन्न उद्योगपति थे
  5. भारत में इंटरमीडिएट विज्ञान की परीक्षा उत्‍तीर्ण करने के बाद विक्रम साराभाई इंंग्‍लैंड चले गये और ‘केम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ के सेंट जॉन कॉलेज में भर्ती हुए
  6. लेकिन ‘द्वितीय विश्वयुद्ध’ के बढ़ने के साथ साराभाई भारत लौट आये थेे
  7. और वहॉ से लौटनेे के बाद बैंगलोर (Bangalore) के ‘भारतीय विज्ञान संस्थान’ में भर्ती हुए
  8. वर्ष 1947 में उन्हें उष्णकटिबंधीय अक्षांश में कॉस्मिक किरणों की खोज शीर्षक वाले अपने शोध पर उन्‍हें पी.एच.डी की डिग्री से सम्मानित किया गया था
  9. अहमदाबाद में ‘भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला’ की स्थापना में उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
  10. ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (Indian Space Research Organisation) की स्थापना विक्रम साराभाई की महान उपलब्धियों में एक थी
  11. इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था
  12. इस महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की मृत्यु 30 दिसम्बर, 1971 को कोवलम, तिरुवनंतपुरम, केरल में हुई थी
  13. वर्ष 1972 में ने उन्‍हें मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा पद्मविभूषण सम्‍मान से सम्‍मानित किया गया था
  14. इस महान वैज्ञानिक के सम्मान में तिरूवनंतपुरम में स्थापित थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लाँचिंग स्टेशन (Thumba Equatorial Rocket Launching Station) और सम्बध्द अंतरिक्ष संस्थाओं का नाम बदल कर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र (Vikram Sarabhai Space Centre) रख दिया गया |

विवाह और संतान – Vikram Sarabhai personal life

सितम्बर 1942 को विक्रम साराभाई – Vikram Sarabhai का विवाह प्रसिद्ध क्लासिकल डांसर मृणालिनी साराभाई से हुआ। उनका वैवाहिक समारोह चेन्नई में आयोजित किया गया था जिसमे विक्रम के परीवार से कोई उपस्थित नही था। क्योकि उस समय महात्मा गांधी का भारत छोडो आंदोलन चरम पर था।

जिसमे विक्रम का परीवार भी शामिल था। विक्रम और मृणालिनी को दो बच्चे हुवे- कार्तिकेय साराभाई और मल्लिका साराभाई। मल्लिका साराभाई अपनेआप में ही एक प्रसिद्ध डांसर है जिन्हें पालमे डी’ओरे पुरस्कार से सम्मानित कीया गया।

भौतिक अनुसन्धान प्रयोगशाला – Scientist Vikram Sarabhai

इंग्लैंड जाके के बाद सन् 1947 में विक्रम फिर स्वतंत्र भारत में लौट आये। और अपने देश की जरुरतो को देखने लगे, उन्होंने अपने परीवार द्वारा स्थापित समाजसेवी संस्थाओ को भी चलाना शुरू किया। अहमदाबाद के ही नजदीक अपनी एक अनुसन्धान संस्था का निर्माण कीया।

11 नवंबर 1947 को उन्होंने भौतिक अनुसन्धान प्रयोगशाला (Physical Research Laboratory) की स्थापना की। उस समय वे केवल 28 साल के थे। वे अपनी अनुसन्धान प्रयोगशाला के कर्ता-धर्ता थे।

विक्रम साराभाई की मृत्यु – Vikram Sarabhai Death

Dr Vikram Sarabhai की मृत्यु 30 दिसंबर 1971 को केरला के थिरुअनंतपुरम के कोवलम में हुआ था। वे थुम्बा रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिये थिरुअनंतपुरम गये थे।

उनके अंतिम दिनों में, वे काफी मुश्किलो में थे। अंतिम दिनों में ज्यादा यात्राये और काम के बोझ की वजह से उनकी सेहत थोड़ी ख़राब हो गयी थी। और इसी वजह को उनकी मृत्यु का कारण भी बताया जाता है।

एक नजर में विक्रम साराभाई की जीवनी – इतिहास – Vikram Sarabhai Information

1. जिस समय भारत को आज़ादी प्राप्त हुई थी उसी समय साराभाई भारत वापिस आये थे। उन्होंने भारत में वैज्ञानिक सुविधाओ को विकसित करने की जरुरत समझी। इसे देखते हुए उन्होंने उनके परीवार द्वारा स्थापित कई समाजसेवी संस्थाओ को सहायता की, और अहमदाबाद मे 1947 में भौतिक अनुसन्धान प्रयोगशाला की स्थापना की।

2. विक्रम साराभाई, एक वायुमंडलीय वैज्ञानिक थे। साथ ही वे PRL के संस्थापक भी थे जिनके मार्गदर्शन में उनकी प्रयोगशाला में अंतरिक्ष किरणों से सम्बंधित कई प्रयोग किये गये। और उन्ही के मार्गदर्शन में उनकी संस्थाओ ने कई सफल प्रयोग किये जैसे की अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष किरणे।

3. साराभाई IIM, अहमदाबाद (इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट) के संस्थापक अध्यक्ष थे। दो देश का दुसरा IIM था। अपने दुसरे व्यापारी कस्तूरभाई लालभाई के साथ मिलकर उन्होंने 1961 में शिक्षा के क्षेत्र में विकास के कई काम किये।

4. 1962 में अहमदाबाद में प्राकृतिक योजना एवं तंत्रज्ञान विश्वविद्यालय (CEPT University) को स्थापित करने में उनका अतुल्य योगदान रहा है। जो शिल्पकला, योजना और तंत्रज्ञान में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट के कई प्रोग्राम उपलब्ध करवाती थी।

5. 1965 में उन्होने नेहरू विकास संस्था (NFD) की स्थापना की। जिसका मुख्य केंद्र बिंदु देश में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र का विकास करना था।

6. 1960 की कालावधि में उन्होंने विक्रम ए. साराभाई कम्युनिटी साइंस सेन्टर (VASCSC) की स्थापना की ताकि वे विज्ञान और गणित के प्रति लोगो की रूचि बढ़ा सके, और विद्यार्थियो को इसका ज्ञान दे सके। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य देश में विज्ञान के प्रति लोगो की रूचि को बढाना था।

7. अपने उपक्रम में साराभाई ने डॉ. होमी भाभा को पूरी सहायता की थी। जो न्यूक्लिअर अनुसन्धान करने वाले पहले भारतीय थे। भाभा ने भी साराभाई को पहले राकेट लॉन्चिंग स्टेशन, थुम्बा की निर्मिति में सहायता की थी। जिसका उदघाटन 21 नवंबर 1963 को कीया गया था।

8. भारत में उनका सबसे बडा और महत्वपुर्ण योगदान 1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संस्था (ISRO) की स्थापना में रहा है। इस संस्था का मुख्य उद्देश् देश में तंत्रज्ञान के उपयोग को बढाना और देश की सेवा करना ही था।

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