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Osho Rajneesh Biography in Hindi – आचार्य ओशो रजनीश जीवनी

Osho Rajneesh Biography in Hindi – आचार्य ओशो रजनीश की जीवनी

Osho Rajneesh Biography in Hindi

ओशो एक भारतीय रहस्यवादी, गुरु और शिक्षक थे जिन्होंने ध्यान के लिए अध्यात्मिक अभ्यास बनाया था। वे एक विवादित नेता तो हैं पर पुरे विश्व में उनके लाखों अनुयायी हैं और हजारों की तागाद में उनके विरोधी भी थे।

वे एक प्रतिभाशाली वक्ता थे और किसी भी प्रकार के विषयों में अपने विचार व्यक्त करने में थोडा भी नहीं झिजकते थे। यहाँ तक की उन्हें रूढ़िवादी समाज द्वारा निषेध भी माना जाता है।

उनका जन्म चन्द्र मोहन जैन के नाम से दिसम्बर 11, 1931 को कुच्वाडा, मध्यप्रदेश में हुआ था। अपने 11 भाई बहनों में वे सबसे बड़े थे। उनके माता का नाम सरस्वती जैन और पिता का नाम बाबूलाल जैन था। उनके पीर एक कपड़ों के व्यापारी थे। उन्होंने अपना बचपन अपने दादा-दादी के साथ बिताया।

वे जबलपुर के हितकारिणी कॉलेज में पढाई कर रहे थे और उन्होंने एक प्रशिक्षक के साथ बहस किया जिसके कारण उन्हें वहां से निकाल दिया गया। उसके बाद 1955 में उन्होंने डी. एन. जैन कॉलेज से फिलोसोफी में B.A पूरा किया।

अपने छात्र जीवन से ही वे लोगों के समक्ष भाषण देना शुरू कर दिया था। उन्होंने बाद में 1957 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ सागर से 21 वर्ष की आयु में फिलोसोफी में M.A डिस्टिंक्शन के साथ साथ पास किया।

उनका जन्म एक उच्च परिवार में हुआ था और बाद में वे अपने दादा-दादी के साथ रहने लगे। उनके दादा-दादी से ही उनके मन में एक नेतृत्व और नेता बनने का विचार उत्पन्न हुआ।

वे एक विद्रोही किशोर के रूप में बड़े हुए और समाज के मौजूदा धर्मों, संस्कृतियों और समाज पर कई सवाल उठाये। वे सर्व धर्म सम्मलेन में सार्वजानिक रूप से बोलने की रूचि रखते थे और हर बार ओपने विचार व्यक्त करते थे।

उन्होंने  21 वर्ष की आयु में रहस्यमयी तरीके से अध्यात्मिक ज्ञान के अनुभव का दावा भी किया और उसी के बाद उन्होंने अपने प्रोफेसर की नौकरी छोड़ दी और उन्होंने अध्यात्मिक ज्ञान के गुरु के रूप में अपना कार्य शुरू कर दिया। ना सिर्फ भारत में बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने एक लोकप्रिय अध्यात्मिक गुरु के रूप मैं स्वयं को साबित किया।

पूरा नाम चन्द्र मोहन जैन (Chandra Mohan Jain)
अन्य नाम  आचार्य रजनीश, भगवान् श्री रजनीश (Acharya Osho Rajneesh)
जन्म दिनांक 11 दिसम्बर, 1931
जन्म भूमि जबलपुर, मध्य प्रदेश
मृत्यु 19 जनवरी 1990, पुणे, महाराष्ट्र
पिता का नाम बाबूलाल जैन
माता का नाम सरस्वती जैन
कर्म-क्षेत्र आध्यात्मिक गुरु
नागरिकता भारतीय
शिक्षा स्नातकोत्तर
प्रसिद्धि के कारण अध्यात्मिक जगत मे क्रांति

भगवान रजनीश बनने का सफ़र (Osho Life Story in Hindi)

  • 70 के दशक में वो नौकरी छोड़कर पूरे देश में घूम-घूम कर अपनी विचारधारा लोगों के साथ बांटने लगे थे. वो धर्म और नास्तिकता पर लोगों के साथ खुलकर बात करते थे. उन्होंने गाँधीवाद और समाजवाद पर भी पूरे देश में प्रवचन दिए.
  • ओशो के तर्क और प्रवचन बहुत प्रभावी और तेज थे जिसकी वजह से उनके अनुयायिओं की संख्या दिनों-दिन बढ़ रही थे. लोग उन्हें अब भगवान रजनीश बुलाने लगे थे.
  • 1969 में रजनीश को दूसरे ‘विश्व हिन्दू कांफ्रेंस’ में बोलने के लिए बुलाया गया जहां उन्होंने कहा था कि कोई भी ऐसा धर्म जो मनुष्य के जीवन को व्यर्थ बताता हो वो धर्म नहीं है. इस बात के बाद ही कई हिन्दू धार्मिक संस्थाएं उन्हें नापसंद करने लगी थी.
  • मुंबई में उन्होंने अपने साथ जुड़े लोगों का एक समूह बनाया और नव-संन्यास आन्दोलन की शुरुआत की. इसके बाद ही उन्होंने अपने आपको ‘ओशो’ कहना शुरू किया. ओशो एक लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘सागर में विलीन हो जाना’.

पुणे प्रवास और विदेश में लोकप्रियता (Osho in Pune)

  • 1970 के बाद ओशो ने पुणे के कोपरगाँव में अपने आश्रम की स्थापना की, जहां वो रोज़ाना अपने भक्तों को प्रवचन देते थे और आध्यात्म पर चर्चा करते थे.
  • ओशो ने पुणे आश्रम में अलग-अलग तरह की ध्यान पद्दतियां विकसित की और आद्यात्म के साथ अनेकों तरह के प्रयोग किये.
  • ओशो के पुणे आश्रम की ख्याति दूर विदेशों में भी फैलने लगी थी, ओशो के आश्रम में एक अलग तरह का आकर्षण था जिसकी वजह से अनेक देशों से लोग वहाँ खिंचे चले आते थे.
  • उनके आश्रम का माहौल बहुत खुला और उन्मुक्त था, वहाँ सेक्स, समाज और धर्म पर बे-रोकटोक चर्चा होती थी. इस सब से आश्रम धार्मिक कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गया था.
  • ओशो पर भारतीय संस्कृति को बदनाम करने और सनातन धर्म को बर्बाद करने के आरोप लगे. विदेशी अनुयायिओं की बढ़ती संख्या और कट्टरपंथियों के दबाव में ओशो की सरकार के साथ भी बिगड़ने लगी थी.

अमेरिका प्रवास और विवादों का सफ़र (Osho in America)

  • 1981 में ओशो को उनके अनुयायिओं ने अमेरिका बुला लिया जहां उनके भक्तों ने अमेरिकी प्रांत ‘ऑरेगोन’ में 65 हज़ार एकड़ में फैला भव्य आश्रम बनवाया था. इस आश्रम को ‘रजनीशपुरम’ के नाम से जाना गया.
  • अमेरिका में ओशो की दीवानगी अपने चरम पर थी, लोगों को उनके रहस्यमयी आध्यात्म और स्वतंत्र जीवन शैली का चस्का लग गया था.
  • धार्मिक कट्टरपंथियों ने यहाँ भी ओशो का पीछा नहीं छोड़ा और उन पर अमेरिकी संस्कृति को बर्बाद करने के आरोप लगे. उनके आश्रम पर ड्रग्स देने और देह व्यापार के भी आरोप लगे.
  • अमेरिकी सरकार ने ओशो को बहुत सारे आरोपों में गिरफ्तार कर लिया, उनकी सेक्रेटरी शीला माँ पर भी बायो टेरर जैसे संगीन आरोप लगाए गये.
  • दुनिया के कई देशों ने ओशो के अपने यहाँ आने पर प्रतिबंध लगा दिया. अंततः ओशो 1985 में वापस पुणे लौट आए.

अभी हाल ही में रजनीश (Osho) के अमेरिका प्रवास पर आधारित Netflix की वेब सीरीज Wild Wild Country रिलीज़ की गई थी जो बहुत ही लोकप्रिय और विवादित रही.

पुणे वापसी, बीमारी और रहस्यमय मृत्यु (About Osho Death)

  • 1985 में पुणे वापसी के बाद ओशो के तेवर और तेज हो गये थे, वो अब स्थापित धर्मों और भगवान के रूप पर पहले से ज्यादा प्रखर होकर बोलने लगे थे.
  • ओशो को शक़ था कि अमेरिका में जेल जाने के बाद उन्हें जहर दिया गया था जिससे कि उनका शरीर लगातार कमजोर होता चला गया था. 19 जनवरी 1990 को ओशो की मौत हो गयी.
  • उनकी मौत को लेकर कई बातें की जाती हैं, खुद ओशो ने अमेरिका में जहर दिए जाने की बात कही थी तो कुछ लोग कहते हैं कि उनके ही आश्रम के लोगों ने उनकी संपत्ति हड़पने के लालच में ओशो को मार दिया.
  • ओशो के उस समय के डॉक्टर ने भी उनकी मौत पर सवाल उठाये हैं कि उनसे गलत ब्योरे देकर मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का दबाव डाला गया था और उन्हें अंतिम समय में ओशो को देखने नहीं जाने दिया गया था.
  • ओशो की माँ भी कई बार ये कह चुकी हैं कि लोगों ने धन के लालच में उनके बेटे को मार डाला.
  • ओशो की मृत्यु के बाद भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा, उनकी वसीयत और संपत्ति को लेकर अब भी कोर्ट में केस चल रहा है.

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