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Aam Aadmi Party History in Hindi – आम आदमी पार्टी का इतिहास

Aam Aadmi Party History in Hindi – आम आदमी पार्टी का इतिहास

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Aam Aadmi Party History in Hindi

आम आदमी पार्टी का संक्षिप्त नामआप  है।इसका गठन केजरीवाल और अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन से जुड़े सहयोगियों द्वारा 26 नवम्बर 2012 को किया गया था। वास्तव में यह 2011 में अन्ना के नेतृत्व में इंडिया अगेंस्ट करप्‍शन नामक संगठन द्वारा चलाए गए जन लोकपाल आंदोलन की उपज है।आम आदमी पार्टी को सन 2013 में भारत के चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक पार्टी के रूप में मंजूरी मिल जाने के बाद इस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में अपने समर्थन जुटाने के लिए रैलियों का आयोजन कर दिल्ली में कांग्रेस सरकार पर हमला बोल दिया था.

आम आदमी पार्टी का परिचय:-

परिचय बिंदु पार्टी का परिचय
पूरा नाम आम आदमी पार्टी
अन्य नाम आप (AAP)
चिन्ह झाड़ू
अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल
संस्थापक अरविन्द केजरीवाल एवं उनके कुछ साथी
अधिकारिक लांच 26 नवंबर, 2012
विचारधारा लोकतांत्रिक समाजवादी एंटी – करप्शन पोपुलिस्म
रंग हरा
छात्र खंड छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस)
युवा खंड आम आदमी पार्टी युवा खंड
महिला खंड आप महिला शक्ति
श्रमिक खंड श्रमिक विकास संगठन (एसवीएस)
ईसीआई स्टेटस स्टेट पार्टी
राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल
हेडक्वार्टर 206, रोउस एवेन्यु, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, आईटीओ, नई दिल्ली, इंडिया – 110002

आम आदमी पार्टी के संस्थापक:-

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को हरियाणा के सिवानी में हुआ था। इनके पिता गोविंद राम केजरीवाल इंजीनियर थे और गोविंद राम जिंदल स्ट्रिप्स में बतौर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर काम करते थे। एक साधारण परिवार के मुखिया गोविंद राम के तीन बेटे और बेटियां हैं। अरविंद केजरीवाल के माता का नाम गीता देवी है। इन्होने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में अपनी सेवा दी हैं. इमर्जेंट लीडरशिप के लिए रेमोन मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त करने वाले अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपनी एक बड़ी जीत हासिल थी. हालाँकि इस जीत से अधिक उन्हें इस बात का श्रेय दिया जाता है कि आम आदमी पार्टी के निर्माण में केजरीवाल को सिर्फ एक साल लगा और उन्होंने पूरे देश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस आईआईटीयन ने नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में कई बड़े बड़े राजनेता और यहां तक कि 3 बार निर्वाचित हो चुकी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी इन्होने हराया. फिर विधानसभा चुनाव के फैसले के बाद केजरीवाल ने 28 दिसंबर 2013 को दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला. हालाँकि उनके द्वारा प्रस्तावित जन लोकपाल बिल को जब कांग्रेस और भारतीयजनता पार्टी के द्वारा रोक दिया गया था, तब उन्होंने 49 दिनों में ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद सन 2014 के आम चुनाव में उन्होंने बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ने का फैसला किया और नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव में लड़ने के लिए उतर गए, लेकिन वे मोदी जी के सामने टिक नहीं पाए और बुरी तरह से हार गए थे.

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