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9th class hindi notes | सूखी नदी का पुल

सूखी नदी का पुल

9th class hindi notes

वर्ग – 9

विषय – हिंदी

पाठ 11 – सूखी नदी का पुल

सूखी नदी का पुल
                                                                 -रामधारी सिंह दिवाकर
                   लेखक – परिचय

रामधारी सिंह दिवाकर रेणु की परंपरा के कथाकार हैं । दिवाकर ने हिंदी कथा साहित्य में आंचलिकता को नये रूप से सृजित किया । कहानियों को अपनी मनोरम कलाकृतियों से दिवाकर गाँव की धरती का जो चित्र खींचा है , वह अमिट छाप छोड़ जाता है । देश के स्वतंत्र हो जाने बाद नेताओं और कार्यकत्ताओं का ध्यान ग्रामोत्थान की ओर गया । दिवाकर की कहानियाँ अपनी गहरी संवेदना का परिचय देते हुए गाँवों से संपूर्ण अंतर्विरोधों और अंगड़ाई लेती हुई चेतना को जीवंत कथा – रूप दिया । गाँवों के बदलते हुए स्वरूप पर दृष्टिपात कर दिवाकर गाँव का असली चेहरा दिखलाते हैं । उनकी रचनाओं में माटी – पानी कहानी संग्रह आदि हैं ।

कहानी का सारांश :-

‘ सुखी नदी का पुल ‘ रामधारी सिंह दिवाकर आंचलिक कहानी है जिसमें उत्तर बिहार के गाँवों के बदलते हुए स्वरूप पर प्रकाश डाला गया है । लीलावती को इस कहानी की नायिका कह सकते हैं और कहानी उसी के इर्द – गिर्द घूमती नजर आती है । लीलावती मुंबई जैसे बड़े महानगर में रहती है । वह अपने गाँव आती है यह सोचकर कि गाँव गाँव जैसा होगा । जैसे ही वह स्टेशन से बाहर आती है तो बाहर बैलगाड़ी की जगह जीप देखकर आश्चर्यचकित होती है । उसके मन में ठेस – सी लगती है । गाँव के बदलते हुए स्वरूप को देखकर चौंक जाती है । अपने खादी पहननेवाले भाई की जेब में पिस्तौल देखती है । भाई कहता है , समय ऐसा आ गया है बुच्चीदाय ! अपनी सुरक्षा के लिए यह सब अब रखना पड़ता है । गाँव अब पहले वाला गाँव नहीं रहा । जब से आरक्षण लागू हुआ है , बैकवार्ड – फारवार्ड की दुर्भावना बुरी तरह फैल गई है । गाँव में जातियों के अलग – अलग संगठन हो गए हैं , निजी सेनाएँ हो गई हैं ।
लीलावती यह सब सुनकर सन्न रह गयी । गाँव की वातावरण जो मेल – जोल से जीवन – यापन करता था , ‘ सभी एक – दूसरे के भाई – बहन थे , वे सब एक – दूसरे के जान के दुश्मन बने हुए हैं । वह इन तेरह – चौदह वर्षों में गाँव में बदले हुए स्वरूप पर अचरज करती है । लीलावती की कन्यादान में मिली हुई जमीन पर लीलावती की धाय माँ का बेटा कलेसर ने दावा ठोक दिया था , जिससे गाँव दो फाँक हो गया था । लीलावती ने इस विवाद का हल करते हुए जमीन की रजिस्ट्री अपने धाय माँ के नाम कर दी । जब जीप दरवाजे पर लगी तो लीलावती देखती है कि एकदम बदल गया है घर – दुआर । खपरैल की जगह पक्के का मकान । दरवाजे पर जीप ट्रैक्टर , थ्रेसर मशीन और जेनरेटर । बिजली के पोल गाँव तक आ गए हैं । फोन , फ्रीज , टीवी , वीसीपी , सब कुछ । लीलावती यह सब नहीं देखने आयी थी । वह पहलेवाली असुविधाओं के लिए तरस रही है । सखी – सहेलियाँ , नदी – पोखर , खेत – खलिहान , टोले – पगडडियाँ , नाथ बाबा का थान्ह , राजा सल्हेज का गहबर , बुड़िया बाड़ी , बरहर बाया का मंदिर कैसे कहे कि क्या देखना चाहती है बुआ । लीलावती ने अपना कर्ज उतारने के लिए जमीन की रजिस्ट्री सहेलिया माय के नाम कर दोनों टोले खवासटोली और बबुआन टोली में मेल – मिलाप करवा लेती है ।

पाठ के साथ :-

प्रश्न 1. स्टेशन के बाहर लगी जीप को देखकर लीलावती के मन को क्यों ठेस – सी लगी ?

उत्तर – लीलावती मुम्बई शहर में रहती थी । वह शहर से गाँव आई थी , तो उसके मन उसके जमाने की बैलगाड़ी छप्पर वाली या ओहार वाली की लालसा थी । उस बैलगाड़ी में गांव की मिठास घुली होती है । लेकिन जीप को देखकर उसके मन को ठेस – सी लगी । शहर का आधुनिकता से तो वह परिचित थी ही , गाँव की मिठास वह महसूस करना चाहती थी , लेकिन जीय होने के कारण बैलगाड़ी का स्निग्ध आनंद छूट रहा था । इस कारण उसके मन को ठेस – सी लगी |

प्रश्न 2. गाँव शहर से किस प्रकार भिन्न होता है ? वर्णन करें ।

उत्तर – गाँव और शहर में जो सबसे मूलभूत अन्तर है , वह है आपसी प्रेम । गाँव किसी एक का नहीं होता है , वरन् उस गाँव का हर निवासी गाँव के हर परिवार का अंग होता है । शहर में पड़ोसी यह जानता भी नहीं कि उसके पड़ोस में रहता कौन है ? गाँव में एक का दुःख सबका दुःख होता है , एक की खुशी में सब शरीक होते हैं । शहर में पड़ोसी के यहाँ किसी की मौत हो जाए तो किसी को कोई अन्तर नहीं पड़ता । शहर में आधुनिकता है , सुख – सुविधाओं का अंबार है तो गाँव में प्रेम की पवित्र निष्छल विराट नदी । गाँव में गरीबी है , निरक्षरता है , सुविधाओं का अभाव है , अब वर्तमान में गाँवों में भी गन्दी राजनीति होती है । गन्हें राजनीति से सबसे प्रभावित गाँव होता है । शहर के लोग बुद्धिजीवी होतं हैं , उन्हें बेकार की ओछी राजनीति प्रभावित नहीं कर पाती ।

प्रश्न 3. ‘ बुच्चीदाय ‘ सुनने में लीलावती को आनंदातिरेक की अनुभूति क्यों होती है |

उत्तर – ‘ बुच्चीदाय ‘ लीलावती के बचपन का नाम था । किसी के बचपन का नाम जो प्यार से रखा जाता है , कोई अभिन्न व्यक्ति ही कह सकता है । ‘ बुच्चीदाय ‘ संबोधन लीलावती को भैया के प्यार की याद दिलाता है । बुच्चीदाय संबोधन मात्र से वह अपने बचपन के दिनों में चली जाती हैं , उन्हें गाँव के हर चीज , हर आदमी जो उनसे स्नेह करता था , उस परिधि में बँध जाती है प्यार से कहा गया एक वचन किसी को भी बाँधने की क्षमता रखता है , तो उनके भैया द्वारा दिया गया संबोधन क्या उन्हें आनंदातिरेक की अनुभूति नहीं कराएगा ।

प्रश्न 4. बुच्चीदाय को सबसे ज्यादा किसकी याद आती है और क्यों ?

उत्तर – बुच्चीदाय को सबसे ज्यादा सहेलिया माय याद आती है । सहेलिया माय ही बुच्चीदाय की दूसरी माँ हैं । बुच्चीदाय की माँ को बुच्चीदाय के जन्म के समय दूध नहीं उतरता था बुच्चीदाय को गाय , बकरी , भेड़ किसी का दूध नहीं पचता था तब सहेलिया माय ने ही अपने स्तनों का दूध पिलाकर जिंदा रखा । और , कोई भी अपनी माँ को कैसे भूल सकता है । अपने पुत्र के रहते हुए भी उसने बुच्चीदाय को दूध पिलाकर जिन्दा रखा । क्या यही बुच्चीदाय सहेलिया माय को सबसे ज्यादा याद करना काफी नहीं है ।

प्रश्न 5. गाँव में लीलावती फोन , फ्रीज , टीवी , वीसीडी की जगह क्या देखना चाहती है ?

उत्तर – लीलावती गाँव में फोन , फ्रिज , टीवी , वीसीडी नहीं देखने आयी थी बल्कि वह नैहर की पहलेवाली असुविधाओं के लिए तरस रही थी । इस भौतिक विलास की सामग्री तो ही उसके पास । वह गाँव का जो स्वरूप होता है वह देखने आयी थी । सखी – सहेलियाँ नदी – पोखर , खेत – खलिहान , टोले – पगडंडियाँ , नाथ बाबा का थान्ह , राजा सल्हेस का गहबर , बुढ़िया बाड़ी , बरहम बाबा मंदिर यह सब देखना चाहती है लीलावती ।

प्रश्न 6. प्रस्तुत कहानी में प्रयुक्त उन तथ्यों को एकत्र करें जिससे ग्रामीण जीवन का चित्र उभरता है ?

उत्तर – गाँव में लीलावती जो चीजें देखना चाहती है उनमें सखी – सहेलियाँ , नदी – पोखर खेत – खलिहान , टोले – पगड़ियाँ , नाथ बाबा का थान , राजा सल्हेस का गहबर , बुढ़िया बाड़ी बरहम बाबा मंदिर इत्यादि जो शहर में नहीं मिलते ।ढेर – सारी कटीली जंगली – झाड़ियाँ उग आई थीं । बगल के किसी पेड़ से पंडुकी पक्षी की आवाज आ रही थी तू – तुस्स । तू – कहाँ।तु कहाँ । पोखर के मोहार पर खड़ी लीलावती हसरत भरी आँखों से पश्चिम की तरफ देखने लगी । 57 सदन के तीसरे पहर घर के पिछड़वाड़े कमलपोखर की तरफ निकल गई । एकदम सुनसान इन पंक्तियों में जो छवि दिखती है पूर्णत : ग्रामीण जीवन का चित्र है । शहरों में झाड़ियाँ , पोखर , पगडड़ियाँ इत्यादि नहीं होते हैं । इस तरह पूरी कहानी ही ग्रामीण जीवन का प्रकटीकरण है ।

प्रश्न 7. बुच्चीदाय जब सहेलिया माय से मिलने पहुंची तो सबको अचरज क्यों हुआ वहाँ के दृश्य का वर्णन करें ।

उत्तर – बबुआन से पहले से ही दुश्मनी चल रही थी । आना – जाना टोका चाली सब बंद था । इसके बावजूद बुच्चीदाय अन्हरिया रात में गिरती – पड़ती सहेलिया माय के घर उससे मिलने आती है । इसी कारण लोगों को आश्चर्य होता है । लोग उमड़ पड़ते हैं लीलावती को देखने । बूढ़े सोनेलाल दौड़ते आए दरवाजे से । बुच्चीदाय को देख आँखों में आँसू आ गए । आशीष के लिए उठे दाहिने लूले हाथ को अपलक देखती रही लीलावती । ओसारे पर बैठते हुए भर्राई आवाज में कहने लगे सोनेलाल , तुम आ गई बुच्चीदाय । जिंदगी का सफल मिल गया । विश्वास नहीं हो रहा कि अपने आँगन में बुच्चीदाय को देख रहा हूँ । लगता है कोई सपना है । बोलते – बोलते रोने लगे सोनेलाल । तभी दौड़ता – दौड़ता कलेसर आ गया और एकदम से लीलावती के पैरों पर गिर गया । रोता रहा देर तक । विवाह के उल्लास भरे वातावरण में आँसुओं की यह गंगा – जमुनी बाढ़ । इस बाढ़ में कितना कुछ डूबा , बहा , कौन जाने । लीलावती के सामने दोनों हाथ जोड़े प्रायश्चित के दलदल से उबरने की कोशिश में बोलने लगा । ‘ भूल – चूक ‘ माफ कर देना दीदी । अब ये हाथ किसी पर कभी नहीं उठेंगे । लीलावती कलेसर की पीठ थपथपाती रही । उस आँगन में कुछ देर के लिए सब कुछ ठहर – सा गया था । लगता था , समय ही रूक गया है ।

प्रश्न 8. लीलावती खवासटोली और बबुआन टोली को तबाह होने से किस प्रकार बचा पाती है ?

उत्तर – खवासटोली और बबुआन टोली के बीच झगड़ा का मूल कारण था बुच्चीदाय की पाँच एकड़ जमीन , जिसपर कलेसर ने अपना हक जताया था । इसी लड़ाई को देखकर दोनों टोली बर्बाद हो रहे थे । उनका अमन – चैन छिन गया था । बुच्चीदाय ने अपनी जमीन सहेलिया माय के नाम रजिस्ट्री कर उनसे मेल – मिलाप करवा खवासटोली और बबुआन टोली को बर्बाद होने से बचा लेती है ।

प्रश्न 9. लीलावती अपनी पाँच एकड़ जमीन भैया को न देकर सहेलिया माय के नाम करने का फैसला क्यों करती है ?

उत्तर – लीलावती की पाँच एकड़ जमीन पर कलेसर ने अपना हक जताया था । इसी को लेकर खवासटोली और बबुआन टोली में आए दिन संघर्ष होते रहते थे । सहेलिया माय का लीलावती पर दूध का कर्ज था और सहेलिया माय लीलावती के भैया से आर्थिक रूप से कमजोर भी थी । यदि वह अपनी जमीन भैया के नाम कर देती तो लड़ाई की जस की तस बनी रहती । लड़ाई – झगड़े मिटाने एवं अपना कर्ज उतारने के ख्याल से अपनी जमीन वह सहेलिया माय के नाम कर देती है ।

प्रश्न 10. गाँव में दंगा भड़कने का मुख्य कारण क्या है ?

उत्तर – गाँव में दंगा भड़कने का मुख्य कारण है आरक्षण का लागू होना एवं लीलावती की जमीन । लीलावती के भैया उससे कहते हैं कि “ जबसे आरक्षण लागू हुआ है पिछड़ी जातियों के लोग हमलोगों को अपना दुश्मन समझने लगे हैं । साफ – साफ दो फाँक हो गया है गाँव । खवासटोली और पूरे पछियारी टोले से तुम्हारी वाली जमीन के मामले के बाद से ही आना – जाना , न्योता – पिहानी बंद है । खूनी राजनीतिक पार्टी को खवासटोली वाले चढ़ाते हैं कि सामंती जात के हैं हमलोग । ” यही दंगा गडकने जे हो मुख्य कारण थे ।

प्रश्न 11. भाव स्पष्ट करें :

( क ) तुम्हारी जो पाँच एकड़ जमीन है वह तो समझो गिद्धों के लिए मांस का लोथ बनी हुई है ।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ रामधारी सिंह दिवाकर रचित कहानी ‘ सुखी नदी का पुल ‘ से उधत है । कहानी में खवासटोली और बबुआन टोली में इसी जमीन को लेकर संघर्ष है । यह जमीन लीलावती की है जो उसके पिता ने कन्यादान के समय लिख दी । उसपर लीलावती की चाय माता का बेटा कलेसर ने उसपर अपना दावा ठोंक दिया था । इस कारण लीलावती के भैया और कलंसा में खूब केस – मुकदमा हाईकोर्ट तक चला परन्तु कलेसर केस हार गया । इसी समय आरक्षण का दौर आया जिसमें गाँव दो फाँक में बँट गया । “ गाँव में जातियों के अलग – अलग संगठन हो गए हैं , निजी सेनाएं हो गई हैं । जमीन जायदाद को बचा पाना मुश्किल हो गया है । तुम्हारी वाली जी पाँच एकड़ जमीन है वह तो समझो गिद्धों के लिए मांस का लोथड़ा बनी हुई है । ” लीलावती इस झगड़ों को मिटाने के लिए जमीन सहेलिया माय के नाम पर देती है ।

( ख ) “ समय ही ऐसा आ गया है बुच्चीदाय । अपनी सुरक्षा के लिए यह सब रखना पड़ता है । गाँव अब पहले वाला गाँव नहीं रहा । “

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ रामधानी सिंह दिवाकर रचित ‘ सूखी नदी का पुल ‘ से उद्धृत हैं । इन पंक्तियों के माध्यम से कहानीकार गाँव के बदलते हुए स्वरूप पर प्रकाश डालना चाहता है । वह दिखलाता है कि पहले वाला गाँव अब नहीं रहा । जहाँ प्रेम – भाईचारा हो । आरक्षण के कारण या लोगों में जागरूकता आ जाने के कारण किसी खास वर्ग के लोगों द्वारा शोषित न होकर उनके खिलाफ आवाज उठने लगे । लोक हथियार रखने लगे । लोग एक – दूसरे के जान के दुश्मन बन गए । इन कथन के आलोक में कहानीकार कहता है कि समय ही ऐसा आ गया है बुच्चीदाय । अपनी सुरक्षा के लिए यह सब रखना पड़ता है । गाँव अब पहले वाला गाँव नहीं रहा ।

प्रश्न 12. ‘ सुखी नदी का पुल ‘ कहानी का सारांश लिखें ।

उत्तर – ‘ सुखी नदी का पुल ‘ रामधारी सिंह दिवाकर रचित आँचलिक कहानी है जिसमें उत्तर बिहार के गाँवों के बदलते हुए स्वरूप पर प्रकाश डाला गया है । लीलावती को इस कहानी की नायिका कह सकते हैं और कहानी उसी के इर्द – गिर्द घूमती नजर आती है । लोलावतो मुंबई जैसे बड़े महानगर में रहती है । वह अपने गाँव आती है यह सोचकर फि गाँव गाँव जैसा होगा । जैसे ही वह स्टेशन से बाहर आती है तो बाहर बैलगाड़ी की जगह जीप देखकर आश्चर्यचकित होती हैं । उसके मन में टेस – सी लगती है । गाँव के बदलते हुए स्वरूप को देखकर चौंक जाती है । अपनी खादी पहननेवाले भाई को जेब में पिस्तौल देखती है । भाई कहता है , समय ही ऐसा आ गया है बुच्चीदाय । अपनी सुरक्षा के लिए यह सब अब रखना पड़ता है । गाँव अब पहले वाला गाँव नहीं रहा । जब से आरक्षण लागू हुआ है , बैकवार्ड – फारवाडं की दुर्भावना बुरी तरह फैल गई है । गाँव में जातियों के अलग – अलग संगठन हो गए हैं , निजी सेनाएँ हो गई हैं । लीलावती यह सब सुनकर सन्न रह गयी । गाँव की वातावरण जो मेल – जोल से जीवन – यापन करता था , सभी एक – दूसरे के भाई – बहन थे , वे एक एक – दूसरे के जान के दुश्मन बने हुए हैं । वह इन तेरह – चौदह वर्षों में गाँव के बदले हुए स्वरूप पर अचरज करती है । लीलावती की कन्यादान में मिली हुई जमीन पर लीलावती की धाय माँ का बेटा कलेसर ने दावा ठोक दिया था , जिससे गाँव दो फाँक हो गया था । लीलावती ने इस विवाद को हल करते हुए जमीन की रजिस्ट्री अपने धाय माँ के नाम कर दी । जब जीप दरवाजे पर लगी तो लीलावती देखती है कि एकदम यदल गया है घर – दुआर । खपरैल की जगह पक्के मकान । दरवाजे पर जीप – ट्रैक्टर , थ्रेसर मशीन और जेनरेटर । बिजली के पोल गाँव तक आ गए हैं । फोन , फ्रीज , टीवी , वीसीपी , सब कुछ । लीलावती यह सब नहीं देखने आयी थी । वह पहलेवाली असुविधाओं के लिए तरस रही है । सखी – सहेलियाँ , नदी – पोखर , खेत – खलिहान , टोले पगडियाँ , नाथ बाबा का थान्ह , राजा सल्हेसका गहवर , बुदिया , वहम बाया का मंदिर कैस कई कि क्या देखना चाहती है बुआ । लीलावती ने अपना कर्ज उतारने के लिए जमीन की रजिस्ट्री सहेलिया माय के नाम कर दोनों टोले खवासटोली और बबुआन टोली में मेल – मिलाप करवा देती है ।

भाषा की बात

प्रश्न 1. वाक्य – प्रयोग द्वारा निम्नांकित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करें ।

उत्तर – नौ – छौ करना – अब इस समस्या का नौ – छौ करना आवश्यक हो गया है ।
जी का जंजाल होना – आजकल धन संग्रह करना भी जी का जंजाल हो गया है ।
होश उड़ना – राम के हाथ में पिस्तौल देखकर उसके होश उड़ गये ।
पीठ धपधपाना – परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने पर पिता ने पुत्र की पीठ थपथपा दी ।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के मानक रूप यताएं ।

उत्तर – अचरज -आश्चर्य
दैव -देव
जिनगी- जिंदगी
अन्हरिया -अंधेरा
अजगैवी -गजब
सादी – वियाह –शादी – विवाह ।

प्रश्न 3. निर्देशानुसार उत्तर दें ।

उत्तर– ( क ) लीलावती के विवाह के समय कन्यादान करते हुए पिता जी ने बेटी को पाँच एकड जमीन दान में दी थी ( विशेषण बताएँ ) -पांच एकड़ ।
( ख ) हमलोगों की भी अपनी सेना है बुआ ( अव्यय बताएँ ) -अपनी ।
( ग ) पता नहीं फिर कब लौट कर आना हो नहर- ( देशज शब्द वताएँ ) -नैहर ।
( घ ) लीलावती उछाह भरे मन से प्लेटफार्म की तरफ देखने लगी ( विदेशज ) -प्लेटफार्म ।
( ङ ) भाई – भौजाई ( समास बताएँ ) -द्वन्द्व समास ।
( च ) देहातिन ( प्रत्यय बताएँ ) -इन प्रत्यय ।

प्रश्न 4. विपरीतार्थक शब्द लिखें ।

उत्तर – अपना -पराया
उग्र- शांत
पुराना -नया
सच -झूठ ।

प्रश्न 5. प्रस्तुत कहानी में कुछ सहचर शब्द आए हैं , जैसे – खेत – खलिहान , डागडर – बैद । पाठ से इसी तरह का कुछ सहचर शब्द चुनें ।

उत्तर – भाई- भौजाई
नौ -छौ
ओझा -गुनी
पाला- पोसा

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