10TH SST

bihar board class 10 geography notes – निर्माण उद्योग

निर्माण उद्योग

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bihar board class 10 geography notes

class – 10

subject – geography

lesson 3 – निर्माण उद्योग

निर्माण उद्योग

महत्त्वपूर्ण तथ्य – विनिर्माण उद्योगों के अंतर्गत लौह – इस्पात उद्योग , चीनी उद्योग , कपड़ा उद्योग , एल्युमीनियम उद्योग जैसे बड़े स्तर के उद्योग शामिल होते हैं जो देश की अर्थव्यवस्था के विकास में सहायक है । यही कारण है कि आज इन उद्योगों को किसी भी देश को सम्पन्नता का सूचक माना गया है ।
देश में आधुनिक उद्योग के विकास की नींव मुंबई में सूती कपड़े को मिल की स्थापना के साथ 1854 में रखी गई । इसी समय 1855 में कोलकाता के पास रिसड़ा में लगाया गया । लेकिन भारत में उद्योगों का योजनाबद्ध विकास स्वतंत्रता के बाद पंचवर्षीय योजनाओं के साथ होने लगी और 1991 के बाद उदारीकरण , वैश्वीकरण तथा निजीकरण के कारण उद्योगों के विकास को और बल मिला है ।
किसी भी उद्योग के विकास के लिए कई कारकों का योगदान होता है । इनमें कुछ मुख्य हैं कच्चा माल , शक्ति के साधन , जल की उपलब्धता , श्रमिकों को उपलब्धता , बाजार , परिवहन , पूँजी , तकनीक , बैकिंग सुविधाएँ सरकारी नीतियाँ ।
उद्योग कई प्रकार के होते हैं । इनके वर्गीकरण के कई आधार हैं-
1. श्रम के आधार पर उद्योगों को बड़े पैमाने , मध्यम पैमाने एवं लघु पैमाने के उद्योगों में जाता है ।
2. कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को भारी उद्योग एवं हल्का उद्योग में बांटा जाता है
3. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को सार्वजनिक उद्योग , संयुक्त उद्योग एवं निजी उद्योग कहा जाता है । 4. कच्चे माल के स्रोत के आधार पर भी उद्योगों को कृषि आधारित उद्योगों ( वस्त्र उद्योग , जूट उद्योग चीनी इत्यादि में ) खनिज आधारित उद्योगों , संरचनात्मक एवं उपकरण उद्योग , फूटलूज उद्योग में बाँटा जाता है ।
( 1 ) कृषि आधारित कच्चा माल उद्योग की दृष्टि से देश में सूती वस्त्र उद्योग , ऊनी वस्त्र उद्योग , रेशमी वस्त्र उद्योग , कृत्रिम वस्त्र उद्योग , चीनी उद्योग विकसित हैं ।
भारत में सूती वस्त्र उद्योग का पहला कारखाना 1818 में कोलकाता के निकट फोर्ट – ग्लोस्टर में स्थापित किया गया था । कालांतर में 1854 में मुंबई में स्थापित मिल से सफलतापूर्वक उत्पादन आरंभ हुआ । वर्तमान समय में देश में सूती और कृत्रिम वस्त्र बनाने की 1600 मिले हैं जिनमें Is0 % मिलें निजी क्षेत्र में हैं । इस क्षेत्र में भारत के कुल श्रम का 20 % भाग लगा हुआ है तथा औद्योगिक उत्पादन में इसका योगदान 14 % है , सूती वस्त्र के कारखाने महाराष्ट्र , पश्चिम बंगाल , मध्य प्रदेश , तमिलनाडु , उत्तर प्रदेश में है । वजन हास कच्चा माल नहीं होने के कारण देश में इस उद्योग का विकेन्द्रीकरण हुआ है ।
जूट उद्योग दूसरा महत्वपूर्ण उद्योग है । कच्चे जूट और इसके सामान के उत्पादन में भारत का विश्व में पहला स्थान है । देश में जूट के लगभग 17 कारखाने हैं , इनमें से 69 मिलें पश्चिम बंगाल में हैं । जूट के सामानों के अन्य उत्पादक राज्यों में आंध्र प्रदेश , बिहार , उत्तर प्रदेश , उड़ीसा , असम एवं त्रिपुरा शामिल हैं । देश के जूट उद्योग में लगभग 2.6 लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं ।
ऊनी वस्त्र उद्योग का केन्द्रीकरण पंजाब , जम्मू – कश्मीर , महाराष्ट्र , उत्तर प्रदेश , गुजरात , हरियाणा एवं राजस्थान में है । पसमीना ऊन बकरी के बालों से प्राप्त होता है । जबकि अंगोरा का ऊन खरगोश के रोएँ से प्राप्त होता है । 2005-06 में 5500 मिलियन किलोग्राम ऊन का उत्पादन हुआ जो विश्व के कुल उत्पादन का 1.8 % है ।
रेशमी वस्त्र उद्योग के अंतर्गत रेशम मलवरी , तसर , ईरी और मूंगा प्रकार की पैदा की जाती है । भारत में रेशम की लगभग 90 मिलें हैं जिससे लगभग 8.5 लाख किलोग्राम रेशम धागा तैयार होता है । 90 % से अधिक रेशम का उत्पादन कर्नाटक , तमिलनाडु , पश्चिम बंगाल और जम्मू -कश्मीर राज्यों में होता है । भारतीय रेशम उद्योग को चीन , थाईलैंड एवं इटली के रेशम उद्योग के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है ।
कृत्रिम वस्त्र उद्योग कृत्रिम रेशा या धागों से तैयार किया जाता है । ये धागे रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से लुग्दी , कोयला तथा पेट्रोलियम से प्राप्त किया जाता है । इस उद्योग से कारखाने केरल , तमिलनाडु , कर्नाटक , महाराष्ट्र , गुजरात , राजस्थान एवं मध्य प्रदेश राज्यों में विकसित है ।
चीनी उद्योग का विकास 1903 में बिहार के सारण जिले में मढ़ौरा में स्थापित मिल से माना जाता है । वर्तमान समय में देश में चालू मिलों की संख्या लगभग 615 है जिसमें 4 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं इन मिलों में से 134 केवल महाराष्ट्र में हैं । महाराष्ट्र के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश , कर्नाटक , तमिलनाडु , आंध्र प्रदेश , गुजरात , पंजाब , हरियाणा एवं मध्य प्रदेश में है ।

2. खनिज आधारित उद्योगों में लोहा एवं इस्पात उद्योग , सीमेंट उद्योग एवं रसायन उद्योग शामिल हैं ।
लोहा एवं इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है , जो कई अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराता है । देश में आधुनिक लोहा एवं इस्पात उद्योग की वास्तविक शुरुआत 1864 में कुल्टी ( पं . बंगाल ) में स्थापित कारखाने से माना जाता है । 1907 में टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी द्वारा साकची नामक स्थान पर कारखाना लगाया गया । वर्तमान समय में लोहा एवं इस्पात – उद्योग के 10 वृहत् स्तरीय कारखाने तथा 200 छोटे संयंत्र कार्यरत हैं । इनसे लगभग 8 मिलियन टन इस्पात का उत्पादन होता है । फलतः इस्पात उत्पादन में भारत का विश्व में 5 वाँ स्थान है l जमशेदपुर को भारत का बनिंघम ‘ कहा जाता है सार्वजनिक क्षेत्र के सभी लौह – इस्पात संयंत्र भारतीय इस्पात प्राधिकरण ( SAIL ) के प्रबंधन एवं नियंत्रण में है ।
एल्युमीनियम उद्योग के अंतर्गत एक टन एल्युमीनियम उत्पादन हेतु 6 टन बॉक्साइट एवं 18600 किलोवाट विद्युत की आवश्यकता होती है । देश में एल्युमीनियम के 8 संयंत्र कार्यरत हैं । जिनसे 2007-08 में 6 लाख टन एल्युमीनियम का उत्पादन हुआ । इस उद्योग के कारखाने उड़ीसा , पश्चिम बंगाल , केरल , उत्तर प्रदेश , छत्तीसगढ़ , महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु में है ।

रसायन उद्योग देश में तेजी से उभरने वाला उद्योग है । भारत का पहला उर्वरक उद्योग संयंत्र 1906 में तमिलनाडु के रानीपेट में लगाया गया था । परंतु इस उद्योग का वास्तविक विकास 1951 में भारतीय उर्वरक निगम द्वारा सिंदरी में स्थापित कारखाने से माना जाता है । इस उद्योग के कारखाने गुजरात , तमिलनाडु , उत्तर प्रदेश , पंजाब , केरल , आंध्र प्रदेश , उड़ीसा , राजस्थान , बिहार , महाराष्ट्र , असम , गोवा , पश्चिम बंगाल एवं दिल्ली में है । 2006-07 में 150 लाख टन नाइट्रोजन , 50 लाख टन फॉस्फेट तथा 20 लाख टन पोटाश उर्वरक का उत्पादन हुआ ।
सीमेंट उद्योग का कच्चा माल जैसे चूना पत्थर , कोयला , सिलिका , एल्युमीनियम , जिप्सम इत्यादि वजन ह्रास वाले हैं । इसलिए यह उद्योग कच्चे माल के निकट स्थापित हैं । सीमेंट उद्योग का पहला संयंत्र 1904 में चेन्नई में स्थापित हुआ । आज देश में 159 बड़े एवं 332 छोटे सीमेंट संयंत्र कार्यरत हैं । इस समय देश में प्रतिवर्ष 20 करोड़ टन से अधिक सीमेंट का उत्पादन किया जाता है ।
3. तैयार माल आधारित संरचनात्मक एवं उपकरण निर्माण उद्योगों में रेलवे परिवहन उपकरण उद्योग , मोटरगाड़ी उद्योग , पोत – निर्माण उद्योग एवं वायुयान उद्योग शामिल हैं ।
रेलवे परिवहन उपकरण उद्योग के अंतर्गत यात्री डब्बे , माल डब्बे , विभिन्न प्रकार के इंजनों का निर्माण , पहिया निर्माण , रेल लाइन का निर्माण इत्यादि शामिल हैं । चितरंजन लोकोमोटिव वर्स में बड़ी लाईन हेतु रेल इंजन बनाए जाते हैं । वाराणसी में डीजल इंजन बनाने का कारखाना है । कपूरथला , पैरावूर , बेंगलुरु तथा कोलकाता में सवारी डब्बे बनाए जाते हैं । पटना जिला के मोकामा में रेलवे वैगन तैयार किया जाता है । मुंगेर के जमालपुर में रेलवे वर्कशाप है । छपरा में रेलवे पहिया तथा नालंदा के हरनौत में सवारी गाड़ी के रेल डब्बे बनाने कारखाना निर्माणाधीन है ।
मोटरगाड़ी उद्योग के अंतर्गत ट्रक , बस , कारें , ऑटो , रिक्शा , मोटरसाइकिल , स्कूटर इत्यादि के निर्माण शामिल हैं । ऑटो रिक्शा के निर्माण में भारत का विश्व में पहला स्थान है । मोटर साइकिल बनाने के कारखाने लखनऊ , सतारा , कानपुर , अहमदाबाद एवं पिंपरी में है । मारुति के उद्योग गुड़गाँव में विकसित है । टाटा , महिन्द्रा , अशोकालिलैंड , बजाज इत्यादि निजी क्षेत्र के प्रमुख कारखाने हैं ।
पोत निर्माण उद्योग के पाँच प्रमुख केन्द्र हैं जो विशाखापत्तनम , कोलकाता , कोच्चि , मुंबई एवं मझगाँव में हैं ।
वायुयान उद्योग पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में है । इसका पहला कारखाना 1940 में बेंगलुरु में लगाया गया था । कानपुर , नासिक , कोरापुट और हैदराबाद में भी वायुयान निर्माण के कारखाने हैं ।

4. फूटलूज उद्योग के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग , रेडीमेड गारमेंट उद्योग , सौंदर्य प्रसाधन उद्योग एवं खिलौना उद्योग इत्यादि शामिल हैं । सूचना प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को ज्ञान आधारित उद्योग भी कहा जाता है । इसके अंतर्गत ट्रांजिस्टर , टेलीविजन , टेलीफोन , पेपर , राडार , मोबाइल फोन , लेजर , जैव प्रौद्योगिकी यंत्र , अंतरिक्ष उपकरण , कम्प्यूटर इत्यादि का निर्माण शामिल है । बेंगलुरु को इलेक्ट्रॉनिक उद्योग की राजधानी या सिलिकन सिटी भी कहा जाता है इसके अन्य केन्द्र मुंबई , दिल्ली , हैदराबाद , पुणे , चेन्नई , कोलकाता , कानपुर तथा लखनऊ है । इसके अतिरिक्त देश में 20 सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क है ।

रेडीमेड गारमेंट उद्योग लखनऊ , लुधियाना , कोलकाता , जयपुर , श्रीनगर , चंडीगढ़ , सूरत , शाहादरा , मऊ , मेरठ , मुरादाबाद , आगरा , मथुरा , बुलंद शहर इत्यादि जगहों में विकसित हैं ।

सौंदर्य प्रसाधन उद्योग के अंतर्गत साबुन , तेल , पाउडर , लिपस्टिक , नेलपॉलिश , कृत्रिम ज्वेलरी इत्यादि का निर्माण किया जाता है । देशभर में इस उद्योग के कारखाने फैले हुए हैं ।

खिलौना उद्योग भी रोजगार प्रदान करनेवाला उद्योग है । भारत के शिवकाशी , वाराणसी कोलकाता , दिल्ली , चेन्नई , हैदराबाद , मदुरई , भोपाल इत्यादि में इसके कारखाने स्थापित हैं भारतीय खिलौना उद्योग को चीन और जापान से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है ।
विनिर्माण उद्योग के विकेन्द्रीकरण के कारण क्षेत्रीय असमानताएँ कम हुई हैं । इस उद्योग पर वैश्वीकरण , निजीकरण एवं उदारीकरण का जबरदस्त प्रभाव पड़ा है । बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने के कारण उच्च स्तरीय सामान उपभोक्ताओं को मिल रहे हैं परंतु देशी उद्योग पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है ।
इन उद्योगों के प्रसार के कारण वायु प्रदूषण , जल प्रदूषण , ध्वनि प्रदूषण , तापीय प्रदूषण में वृद्धि आई है । अतः प्रदूषण को नियंत्रित किया जाना आवश्यक है ।

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न :

1. इनमें से कौन औद्योगिक अवस्थिति का कारक नहीं माना जाता है ?
( क ) बाजार ( ख ) पूँजी ( ग ) जनसंख्या ( घ ) ऊर्जा
उत्तर- ( ग )
2 . भारत में सबसे पहला स्थापित लौह – इस्पात कम्पनी का नाम क्या है ?
( क ) भारतीय लोहा एवं इस्पात कंपनी ( इस्को ) ( ख ) बोकारो स्टील सिटी ( ग ) विशाखापत्तनम लोहा और इस्पात उद्योग ( घ ) टाटा लोहा एवं इस्पात कंपनी ( टिस्को )
उत्तर- ( क )
3. मुंबई में पहला आधुनिक सूती मिल स्थापित किया गया है क्योंकि
( क ) मुंबई एक पत्ता है ( ख ) मुंबई में पूँजी उपलब्ध थी ( ग ) कपास उत्पादक क्षेत्र निकट स्थित है । ( घ ) उपर्युक्त सभी सही हैं
उत्तर- ( घ )
4. निम्नलिखित कौन उद्योग कृषि आधारित नहीं है ? ( क ) सीमेंट ( ख ) सूती वस्त्र ( ग ) चीनी ( घ ) जूट वस्त्र
उत्तर- ( क )
5. हुगली – औद्योगिक प्रदेश का केन्द्र है ?
( क ) कोलकाता – रिसड़ा ( ख ) कोलकाता – हावड़ा ( ग ) कोलकाता – कोलागरि ( घ ) कोलकाता – मिदनापुर
उत्तर- ( घ )
6. निम्नलिखित कौन सार्वजनिक क्षेत्र में स्थित उद्योग है ?
( क ) जे . के . सीमेंट उद्योग ( ख ) टाटा लोहा एवं इस्पात उद्योग ( ग ) बोकारो लौह – इस्पात उद्योग ( घ ) रेमंड वस्त्र उद्योग
उत्तर- ( ग )
7. इनमें कौन उपभोक्ता उद्योग है ?
( क ) इंजन उद्योग ( ख ) चीनी उद्योग ( ग ) लौह – इस्पात उद्योग ( घ ) पेट्रो – रसायन उद्योग
उत्तर- ( घ )
8. निम्नलिखित में कौन छोटे पैमाने का उद्योग है ?  ( क ) चीनी उद्योय ( ख ) कागज उद्योग ( ग ) खिलौना उद्योग  (घ ) विद्युत उपकरण उद्योग
उत्तर- ( ग )
9. भोपाल त्रासदी में किस गैस का रिसाव हुआ था ?  ( क ) कार्बन डाइऑक्साइड ( ख ) मिथाईल आइसोसाइनाइट ( ग ) कार्बनमोनोऑक्साइड ( घ ) सल्फर डाइऑक्साइड
उत्तर– ( ख )

II.लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर :

1. विनिर्माण उद्योग किसे कहा जाता है ?
उत्तर – रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल में आनेवाले वस्तुओं के उत्पादन से संबंधित उद्योगों को विनिर्माण उद्योग कहा जाता है । जैसे — रेडियो , बल्ब , वनस्पति तेल , सीमेंट , माचिस , मोटरसाइकिल , वाहन , दवाइयाँ , पेट्रोल इत्यादि से संबंधित उद्योग ।

2. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योगों में अंतर कीजिए ।
उत्तर– सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग सरकार अथवा सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित एवं संचालित होता है । जैसे — भेल , सेल आदि । दूसरी ओर , निजी क्षेत्र के उद्योग का प्रबंधन एवं स्वामित्व किसी एक व्यक्ति के हाथों में होता है । जैसे टिस्को , बजाज , डाबर , गोदरेज इत्यादि ।
3. उद्योगों के स्थानीयकरण से संबंधित तीन कारकों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर — उद्योगों के स्थानीयकरण से संबंधित तीन महत्वपूर्ण कारक हैं ( i ) कच्चा माल , ( ii ) शक्ति के साधन , ( ii ) बाजार ।
4. कृषि आधारित उद्योग और खनिज आधारित उद्योगों में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर – कृषि आधारित उद्योगों के कच्चे माल कृषि क्षेत्र से प्राप्त होते हैं । जैसे — चीनी उद्योग , सूती वस्त्र उद्योग , जूट उद्योग , वनस्पति तेल उद्योग इत्यादि । जबकि खनिज आधारित उद्योगों के लिए कच्चा माल खनिज संसाधनों के रूप में उपयोग किए जाते हैं । जैसे – लौह इस्पात उद्योग , एल्युमीनियम उद्योग , सीमेंट उद्योग , उर्वरक उद्योग इत्यादि ।
5. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण उदाहरण के साथ कीजिए ।
उत्तर – स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को चार वर्गों में बाँटा जाता है
( क ) निजी क्षेत्र के उद्योग ऐसे उद्योगों का स्वामित्व किसी एक व्यक्ति के हाथों में तथा प्रबंधन उसके द्वारा संचालित एक व्यक्ति या समूह में होता है । जैसे – टिस्को , बजाज उद्योग , डाबर उद्योग , गोदरेज उद्योग , महिंद्रा उद्योग इत्यादि ।
( ख ) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग – ऐसे उद्योगों का स्वामित्व सरकारी एजेंसियों के हाथों में तथा प्रबंधन समूह के पास होता है । जैसे — भेल , सेल आदि । ( ग ) संयुक्त उद्योग – ऐसे उद्योग निजी और सरकारी क्षेत्र के संयुक्त प्रयास से चलाए जाते हैं । जैसे – आयल इंडिया लिमिटेड अमूल उद्योग आदि ।
( घ ) सहकारी उद्योग ऐसे उद्योगों का स्वामित्व कुछ लोगों अथवा श्रमिकों के हाथों में होता है । जैसे – महाराष्ट्र के चीनी उद्योग , केरल के नारियल उद्योग , महाराष्ट्र का पापड़ उद्योग इत्यादि ।

III . दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

1. उदारीकरण , निजीकरण और वैश्वीकरण से क्या समझते हैं ? वैश्वीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है ? व्याख्या कीजिए ।
उत्तर – उदारीकरण का तात्पर्य उद्योग एवं व्यापार को सरकार को लालफीताशाही के अनावश्यक प्रतिबंधों से मुक्त कर अधिक प्रतियोगी बना दिया जाता है ।
जबकि निजीकरण के अंतर्गत देश के अधिकतर उद्योगों के स्वामित्व का नियंत्रण तथा प्रबंधन निजी हाथों में देकर सरकारी एकाधिकार को कम या समाप्त किया जाता है ।
इसी तरह , वैश्वीकरण के द्वारा देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना है । फलतः पूँजी , तकनीक एवं व्यापारिक आदान – प्रदान दूसरे देशों के साथ बिना किसी प्रतिबंध के होने लगता है ।
1991 के बाद भारत सरकार ने भी देश में उदारीकरण , निजीकरण एवं वैश्वीकरण की नीति अपनाई है । परिणामस्वरूप , कई विदेशी कंपनियाँ देश में अपना उद्योग लगा रही हैं अथवा अपना उत्पाद बेचने आ रही है । इसके कारण भारतीय उपभोक्ताओं को विश्वस्तरीय उत्पाद इस्तेमाल करने को मिलने लगे हैं । यही नहीं , रोजगार के अवसरों में वृद्धि से बेरोजगारी भी कम हुई है तथा लोगों की आय में काफी वृद्धि होने से जीवन स्तर में क्रांतिकारी सुधार आया है जिसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकास की ओर अग्रसर कर रहा है । परंतु , वैश्वीकरण की नीति से स्वदेशी उद्योगों विशेषकर लघु एवं कुटीर उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है ।

2. भारत में सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग का विवरण दीजिए ।
उत्तर – सूचना – प्रौद्योगिकी उद्योग का संबंध ज्ञान से है । अत : इस उद्योग को ज्ञानाधारिता उद्योग भी कहा जाता है । यह उद्योग एक प्रकार का फुटलूज उद्योग है जो कहीं भी लगाये जा सकते हैं । किसी भी उद्योग के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विशिष्ट नवीन ज्ञान , उच्च प्रौद्योगिकी   से हो सकती है । इस प्रौद्योगिी के आने से देश के आर्थिक ढाँचे एवं लोगों के जीवन पद्धति में काफी विकास हुआ है । इस उद्योग के अंदर आने वाले उत्पाद ट्रांजिस्टर , टेलीविजन , टेलीफोन , पेजर , रडार , सेल्यूलर टेलीकाम , लेजर , जैस – प्रौद्योगिकी , अंतरिक्ष उपकरण , कम्प्यूटर की सामग्रियाँ हैं । भारत में दूसरे प्रमुख उत्पादकों में बंगलौर , मुम्बई , दिल्ली , हैदराबाद , पूणे , चेन्नई , कोलकाता , कानपुर , लखनऊ आदि प्रमुख हैं । इस उद्योग के विकास से कई सूचना प्रौद्योगिकी पार्क की स्थापना हो चुकी है । जो एकल – विंडो , एवं उच्च – आंकड़े संचार जैसे सुविधाएँ प्रदान कर रही हैं । इससे रोजगार का भी  सृजन हुआ है ।
3. भारत में सूती वस्त्र उद्योग के वितरण का विवरण दीजिए ।
उत्तर – भारत में सूती वस्त्र उद्योग कृषि के बाद दूसरा सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाला उद्योग है । यह कृषि आधारित कच्चा माल उपयोग करने वाला वृहत् उद्योग है , यह कृषि आधारित कच्चा माल उपयोग करनेवाला वृहत् उद्योग है । जिसकी पहली आधुनिक मिल 1818 में कोलकाता के निकट फोर्ट – ग्लोस्टर में स्थापित की गई थी । जबकि वास्तविक सफल मिल मुंबई में 1854 में काबस जी डाबर द्वारा लगाया गया । इसके बाद धीरे – धीरे सूती वस्त्र मिलों की संख्या बढ़ने लगी । देश में आज लगभग 1600 सूती और कृत्रिम वस्त्र बनानेवाली मिले हैं । इनमें 80 % मिलें निजी क्षेत्र में , शेष सार्वजनिक एवं सहकारी क्षेत्र में है ।
वितरण — आरंभिक वर्षों में सूती वस्त्र उद्योग की अधिकांश मिलें महाराष्ट्र और गुजरात में लगाई गई थी । परंतु आज इस उद्योग का जबरदस्त विकेन्द्रीकरण हुआ है ।
महाराष्ट्र में इस उद्योग की मिलें मुंबई , शोलापुर , पुणा , वर्धा नागपुर , औरंगाबाद और जलगाँव में है । गुजरात में अधिकांश सूती वस्त्र मिलें अहमदाबाद , बडोदा , सूरत , राजकोट , पोरबंदर इत्यादि जगहों में केन्द्रित हैं । पश्चिम बंगाल में इसकी मिलें हावड़ा , मुर्शिदाबाद , हुगली और श्रीरामपुर में है|
उत्तर प्रदेश में कानपुर , मुरादाबाद , आगरा और मोदीनगर इसके प्रमुख केन्द्र हैं ।
मध्य प्रदेश का ग्वालियर , उज्जैन , इंदौर , देवास सूती वस्त्र मिलों के लिए प्रसिद्ध है ।
तमिलनाडु में इसकी मिलें कोयंबटूर , चेन्नई और मदुरई में है ।
वजन ह्रास कच्चा माल नहीं होने के कारण इस उद्योग का राष्ट्रव्यापी वितरण या विकेन्द्रीकरण हुआ है । 2006-07 में भारत में 36 लाख वर्ग मीटर कपड़ा तैयार किया गया । जिनमें से कुछ का निर्यात अमेरिका , ब्रिटेन , रूस , फ्रांस , नेपाल , सिंगापुर , श्रीलंका , अफ्रीकी देशों को किया जाता है ।

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