10TH SST

bihar board 10th class geography notes – कृषि

कृषि 

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bihar board 9th class geography notes

class – 10

subject – geography

lesson 2 – कृषि

 कृषि 

महत्वपूर्ण तथ्य – भारत एक कृषि पर आधारित देश है । यहाँ विविध प्रकार की उपजाऊ मिट्टी वर्ष भर पर्याप्त तापमान तथा फसलों के लिए लंबा काला वर्धन मिलता है । हिमालय से निकलने वाली नदियों में ग्लेशियर पिघलने से वर्षभर पानी रहता है तथा भूमिगत जल भी मौनसूनी वर्षा के कारण उपस्थित रहता है । अधिकांश भागों में वर्षा भर में 3-4 महीने ही होती है । 15 % क्षेत्र में एक ही फसल उगाई जाती है लेकिन जहाँ सिंचाई की सुविधा है वहाँ साल में दो से अधिक फसलें उगाई जाती हैं ।
भारत में कृषि का महत्व कई कारणों से हैं जैसे भारत में 2/3 लोगों की जीविका कृषि पर आधारित हैं । यहाँ की जनसंख्या का भोजन कृषि से ही प्राप्त होता है । कई उद्योगों को कच्चा माल मिलता है । धरातलीय विविधता के कारण भारत में त्रिविध फसलें पाई जाती हैं । देश की 24 % आय कृषि से ही प्राप्त होती है ।
भारत में कृषि के लिए भूमि अत्यंत ही आवश्यक है क्योंकि यह भूमि पर निर्भर है । स्थायी सम्पत्ति होने के कारण भूमि का सामाजिक महत्व भी है ।
कृषि योग्य भूमि में चार प्रकार की भूमि आती है-
( i ) शुद्ध बोया गया क्षेत्र । ( ii ) चालू परती भूमि । ( iii ) अन्य परती । ( iv ) कृषि योग्य व्यर्थ भूमि ।
जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि योग्य भूमि पर दबाव बढ़ गया है । ऐसी परिस्थिति में उत्पादन को दो ही रूपों में बढ़ाया जा सकता है-
1. प्रति हेक्टेयर उपज में वृद्धि ।
2. एक ही कृषि वर्ष में एक ही भूमि में अधिकाधिक फसलों को उपजाकर इसे शस्य गहनता कहते हैं । शस्य गहनता की दृष्टि से पंजाब भारत का अग्रणी राज्य है ।
शस्य गहनता को प्रभावित करने वाले कारकों को पूँजी लगाकर प्राप्त की जा सकती है । इसलिए शस्य गहनता और निवेश उपयोग में गहरा संबंध है ।
शस्य गहनता को प्रभावित करने वाले कारकों में सिंचाई , उर्वरक , उन्नत बीज , यंत्रीकरण , कीटनाशक , कृषि उत्पादों का उचित मूल्य आदि प्रमुख है |
उष्ण कटिबंधीय जलवायु होने के कारण भारत में पर्याप्त तापमान और प्रकाश रहता है । जब फसल केवल वर्षा द्वारा प्राप्त नमी के आधार पर की जाती है तो उसे वर्षा पोषित कृषि कहते हैं । यह दो प्रकार की होती है-
शुष्क भूमि कृषि एवं आर्द्र भूमि कृषि ।
75 सेमी . से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में होने वाली कृषि को ” शुष्क भूमि ” एवं 75 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में होने वाली कृषि को ” आर्द्र ” भूमि कृषि कहते हैं । भारत की अधिकांशतः कृषि वर्षाधीन है ।
विभिन्न भौगोलिक परिवेशों एवं सांस्कृतिक परिवेशों के आधार पर यहाँ कई प्रकार की कृषि की जाती है-
( i ) प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि — इसके परंपरागत तरीके से भूमि पर खेती की जाती है । खेती के औजार भी परंपरागत होते हैं ।
( ii ) गहन जीविका कृषि – जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है वहाँ इस कृषि को अपनाया जाता है । इसमें परंपरागत कृषि कौशल के साथ – साथ तरीकों का भी प्रयोग किया जाता है ।
( iii ) व्यापारिक कृषि — इसमें फसलें व्यापार के लिए उपजाई जाती हैं । इस कृषि में अधिक पूँजी , आधुनिक कृषि तकनीक , अधिक पैदा देने वाले परिष्कृत बीज , रासायनिक खाद , सिंचाई , रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग होता है ।
भौगोलिक तथा सांस्कृतिक निर्विधता के कारण उनके प्रारूप तथा पद्धतियों में विभिन्नता होती है । यहाँ ऋतु से संबंधित तीन प्रकार की फसलें हैं
( i ) रबी फसल ( ii ) खरीफ फसल ( iii ) जायद / गामा फसल ।
रबी फसल को जाड़े के महीने में अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य में उपजाया जाता है जिसमें गेहूँ , जौ , चना , मटर , मसूर , सरसों आदि की खेती होती है ।
खरीफ फसल वर्षा ऋतु में बोई जाती है और सितम्बर , अक्टूबर में काट ली जाती है । इसके अंतर्गत धान , मकई , ज्वार , बाजरा , अरहर , मूंग , उरद , मूंगफली आदि आते हैं ।
खरीफ और रबी फसल के बीच ग्रीष्म ऋतु में जो फसल उपजाई जाती है उसे जायद या गरमा फसलें कहते हैं । इसके अंतर्गत मकई , धान तथा सब्जियों की खेती की जाती है ।
भारत में वर्षा की मात्रा , मिट्टी के प्रकार , कृषि – पद्धति के आधार पर विविध फसलें उपजाऊ जाती हैं ।
( i ) चावल -यह भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है । विश्व का 22 % चावल क्षेत्र भारत में है तथा भारत की कुल कृषि भूमि का 23 % इसके कृषि के अंतर्गत है । इसके लिए 20 ° से ग्रा . तापमान की आवश्यकता है । इसकी फसल के लिए 125-200 सेमी . वर्षा की आवश्यकता होती है । इसके लिए जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है । इसकी कृषि में मानव श्रम की अत्यंत आवश्यकता होती है । इसकी अधिकांश खेती जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र में डेल्टाई एवं तटीय भागों में तथा हिमालय पर्वत की निचली घाटियों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर किया जाता है ।
(ii) गेहूँ — गेहूँ हमारे देश की दूसरी प्रमुख खाद्यान्न फसल है । भारत विश्व के कुल गेहूँ उत्पादन का 8 % उत्पादन करता है । यह जाड़े की ऋतु में उगाया जाता है । इसके लिए 50-75 सेमी ० वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है । देश के कुल गेहूँ उत्पादन का 2/3 हिस्सा पंजाब हरियाणा और उत्तर प्रदेश से प्राप्त किया जाता है ।

मोटे अनाज ( Millete )
ज्वार , बाजरा और रागी देश के प्रमुख मोटे अनाज हैंl

•  ज्वार — ज्वार वर्षा पर निर्भर कृषि है । भारत में महाराष्ट्र 51 % ज्वार पैदा करता है । भारत का 75 % ज्वार पठारी भागों में पैदा किया जाता है ।
• बाजरा — यह कृषिगत भूमि के 7 % भूमि पर उपजाया जाता है । यह बलुआ और उजली काली मिट्टी पर उगाया जाता है । बाजरा का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य गुजरात , राजस्थान , उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र है ।
• रागी — यह लाल , काली बलुआ दोमट और उजली मिट्टी पर उगाया जाता है । कर्नाटक इसका सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है । इसके बाद तमिलनाडु , हिमाचल प्रदेश , उत्तराखंड उत्तरांचल , सिक्किम आदि प्रमुख हैं ।
• मकई इसका प्रयोग मनुष्य के भोजन एवं पशुओं के चारा के रूप में किया जाता है । इसमें ग्लूकोज तथा मंड होता है । यह एक खरीफ फसल है तथा इसे 21 ° -27 ° तापमान तथा 75cm . वर्षा की आवश्यकता होती है । भारत में 3.6 % कृषिगत भूमि पर उपजाया जाता है ।
• दालें – अरहर , उड़द , मूंग , मसूर , मटर और चना मुख्य दलहनी फसलें हैं । दालों को कम नमी की आवश्यकता होती है । अतः इन्हें शुष्क परिस्थितियों में उगाया जा सकता है । इसकी 90 % खेती शुष्क कृषि तकनीक के अंतर्गत की जाती है । दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि को उर्वर बनाती हैं । दालें खरीफ तथा रबी दोनों ही ऋतुओं में उगाई जाती है ।
• गन्ना – यह बाँस की प्रजाति का पौधा है जिससे मीठा रस निकलता है और इसे गुड़ तथा चीनी बनता है । यह एक उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल है । यह 21 ° C से 27 ° C तापमान और 75 cm . – 100 cm . वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में होता है । गहरी दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती हैl

भारत में यह दक्षिण में कन्या कुमारी से लेकर उत्तर में पंजाब में गुरुदासपुर तक उगाया जाता है ।
• तिलहन – देश में कुल कृषिगत भूमि के 12 % पर कई प्रकार की तिलहन फसलें उपजाई जाती हैं जैसे – मूंगफली , सरसों , नारियल , तिल , सोयाबीन , अरंडी , बिनैला , अलसी , सूरजमुखी आदि प्रमुख हैं । इनका इस्तेमाल भोजन में प्रयुक्त होने वाले तेल , साबुन , प्रसाधन और उबटन में होता है ।
• मूंगफली – मूंगफली एक खरीफ फसल है । यह देश के कुल कृषिगत भूमि के 3.6 % पर पैदा किया जाता है । गुजरात इसके उत्पादन में सर्वप्रथम है । अन्य उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश , कर्नाटक तथा महाराष्ट्र हैं ।
इसके अतिरिक्त राई , सरसों , तारामीरा आदि भी आते हैं । पाला कृषि के लिए हानिकारक है । इसके उत्पादन में वृद्धि के लिए नर प्रौद्योगिकी का विकास किया गया है जिसमें उन बीजों का प्रयोग तथा सिंचाई शामिल है । इसके उत्पादन का 1/3 भाग राजस्थान द्वारा प्राप्त होता है । तीसी एक अन्य रबी तिलहन फसल है ।
सोयाबीन तथा सूरजमुखी भारत के अन्य महत्वपूर्ण तिलहन है । मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र मिलकर 10 % सोयाबीन का उत्पादन करते हैं ।
• चाय — यह भारत की महत्वपूर्ण पेय फसल है । यह सदाबहार झाड़ी होती है जिसकी पत्तियों को सुखाकर चाय बनाई जाती है । चाय उष्ण तथा उपोष्ण कटिबंधीय पौधा है । इसके लिए 200 -250 सेमी ० वर्षा तथा ढालुवा जमीन आवश्यक है । सुबह का कुहासा तथा प्रतिदिन की बौछार पत्तियों की उपज में सहायक है । मिट्टी में फॉस्फोरस , पोटाश , लोहांस तथा ह्यूमस पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए । झाड़ियों की निराई , गुड़ाई के लिए काफी मानव श्रम की आवश्यकता होती है । प्रमुख रूप से असम की ब्रह्मपुत्र एवं सूरजा घाटी , पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग तथा जलम्पईगुड़ी की पहाड़ियाँ एवं तमिलनाडु में नीलगिरी की पहाड़ियाँ हैं ।
•  कॉफी — कॉफी एक पेय पदार्थ है । यह एक प्रकार की झाड़ी पर लगे हुए फल के बीजों द्वारा प्राप्त किया जाता है ।
कॉफी की तीन प्रमुख फसलें हैं –
1 . अरोबिका , 2. लिबेरिका , 3. रोबस्ता ।
भारत में उत्तम किस्म की अरेविका कॉफी उपजाऊ जाती है जिसकी पूरे विश्व में माँग है । चाय के लिए मिट्टी में ह्यूमस अवश्य चाहिए । कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा दामी उत्पादक राज्य है । तमिलनाडु में नीलगिरी की पहाड़ियों पर कॉफी की खेती की जाती है ।
• बागवानी फसलें-  बागवानी फसलों के अंतर्गत विविध फल , सब्जियाँ , कंदमूल , मसालं , औषधीय एवं सुगंधदायक पौधे आते हैं । भारत उष्ण एवं शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों ही प्रकार के फलों का उत्पादक है । यहाँ अनगिनत किस्म के आमों का उत्पादन होता है । उत्तर प्रदेश , आंध्र प्रदेश , महाराष्ट्र , पश्चिम बंगाल और नागपुर केले के लिए , बिहार और उत्तर प्रदेश लीची , मेघालय अन्नानास , आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र अंगूर के लिए , हिमाचल प्रदेश और जम कश्मीर सेव , नाशपाती , खूबानी और अखरोट के लिए प्रसिद्ध है । काली मिर्च केरल के पश्चिम घाट में तथा नारियल केरल , तमिलनाडु , आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में होता है ।

अखाद्य फसलें रबर – रबर भूमध्यरेखीय जलवायु की फसल है और इसे उत्पादन के लिए अधिक तापमान तथा आर्द्रता को आवश्यकता होती है । यह मुख्य रूप से केरल , तमिलनाडु , कर्नाटक , अंडमान निकोबार द्वीपसमूह और मेघालय में गारों की पहाड़ियों में उगाया जाता है ।

रेशेदार फसलें कपास , जूट , सन और प्राकृतिक रेशम फसलें मुख्य रूप से भारत में उगाई जाती हैं ।
कपास – भारत को कपास का मूल स्थान कहते हैं । यह उपोष्ण तथा उष्ण कटिबंधीय पौधा है तथा इसे 210 दिन माला रहित मौसम की आवश्यकता होती है l  पकते समय इसे शुष्क वातावरण की आवश्यकता होती है एवं तैयार होने में 6-8 महीने लगते हैं ।

• जूट – इसे सुनहरा रेशा भी कहते हैं । इसके लिए चीकायुक्त मिट्टी , गर्म एवं आर्द्र जलवायु को आवश्यकता होती है । रेशा तैयार होने के बाद इसे सड़ाने के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है ।

•  प्रौद्योगिकीय एवं संस्थागत सुधार – परंपरागत तरीके से कृषि करने की वजह से कृषि में काफी पिछड़ापन पाया जाता है । अधिकांश कृषि मॉनसून पर निर्भर करती है और सिंचाई का भी कम विकास हुआ है । अत : कृषि को अर्थव्यवस्था का विकसित अंग बनाने के लिए इसमें तकनीकी एवं संस्थागत सुधार लाने की आवश्यकता है क्योंकि इसके बिना कृषि में सुधार लाना संभव नहीं ।
स्वतंत्रता के बाद जोतों की चकबंदी , जमींदारी प्रथा की समाप्ति एवं सहकारिता को विकसित करने का प्रयास किया गया है । हरित क्रांति में एक मील का पत्थर साबित हुई तथा खेत क्रांति ने दुग्ध उत्पादन ने भी अप्रत्याशित वृद्धि की ।

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न :
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें
( क ) भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण अनाजों के नाम बताएं ।
उत्तर — भारत के प्रमुख महत्वपूर्ण अनाज हैं चावल , गेहूँ ।
( ख ) भारत में कौन – से तीन प्रमुख मोटे अनाज उगाए जाते हैं ?
उत्तर – भारत में तीन प्रमुख मोटे अनाज हैं — ज्वार , बाजरा और रागी ।
( ग ) भारत की तीन नकदी फसलों के नाम बताएँ । उत्तर – भारत की तीन नकदी फसलों के नाम हैं चाय , कहवा तथा कपास ।
( घ ) हमारे देश की सबसे प्रमुख रोपण फसल कौन – सी है ?
उत्तर – हमारे देश की सबसे प्रमुख रोपण फसल है चाय ।
2. अंतर बताएँ –
( क ) नगदी फसल और रोपण फसल ।
उत्तर – रोपण फसल — यह एक प्रकार की व्यापारिक कृषि है । इस कृषि में उद्योग की भाति मैनेजर एवं मजदूर की व्यवस्था होती है और मिल मालिक की तरह इसमें कृषक की स्थिति होती है । इसका उत्पादन उद्योग में कच्चे माल की भांति उपयोग किया जाता है । नकदी फसल इस कृषि में किसान अधिक पूंजी , कृषि तकनीक का निवेश किया जाता है । इसमें अधिक पैदा देनेवाले परिष्कृत बीज , रासायनिक बीज , सिंचाई , रासायनिक खाद का उपयोग किया जाता है ।
( ख ) व्यापारिक कृषि और निर्वाहक कृषि ।
उत्तर – व्यापारिक कृषि में फसलें व्यापार के लिए उपजाई जाती हैं । इस कृषि में अधिक पूँजी , आधुनिक कृषि तकनीक का निवेश किया जाता है । इस कृषि में अधिक पैदावार देने वाले परिष्कृत बोज , रासायनिक खाद , सिंचाई , रासायनिक कीटनाशक आदि का उपयोग किया जाता है । इसलिए , किसान अधिक लाभ प्राप्त करने की कोशिश करते हैं । इस कृषि पद्धति को भारत में बड़े स्तर पर पंजाब एवं हरियाणा में अपनाया गया । इस कृषि पद्धति के अन्तर्गत मुख्य रूप से गेहूँ की खेती की जाती है । पंजाब और हरियाणा में इस पद्धति के अन्तर्गत बासमती चावल की खेती भी होती है ।
निर्वाह – कृषि — यह प्राचीन काल की कृषि का तरीका है । इसमें परंपरागत तरीके से खेती की जाती है । इसमें खेती करने के लिए परंपरागत औजार जैसे – खुरपी , हल , कुदाल आदि का उपयोग किया जाता है । इसमें जमीन की जुताई गहराई से नहीं हो पाने के कारण बीजों को जैसे – तैसे बो दिया जाता है और फसल पकने पर कताई कर ली जाती है । इस कृषि में आधुनिक तरीके का प्रयोग नहीं किया जाता है , जिसकी वजह से उपज कम होती है । इसमें भूमि की उत्पादकता कम होने के कारण प्रति इकाई उत्पादन भी कम होता है । इसमें फसल उत्पादन मुख्यतः जीविका निर्वाह के लिए किया जाता है । मणिपुर में इस कृषि को ” पामलू ” अंडमान निकोबार तथा छत्तीसगढ़ के बक्सर जिले में ‘ दीपा ‘ कहते हैं । उत्तर पूर्वी राज्य में असम और मेघालय , मिजोरम और नागालैंड में इसे ‘ झूम ‘ कहते हैं ।

3. निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए एक शब्द लिखें ।
( क ) हमारे देश में मॉनसून के आरंभ में बोई जाने वाली और शरद ऋतु में काटी जाने वाली फसल । उत्तर – खरीफ फसल ।
( ख ) वर्षा के पश्चात् जाड़े में बोई जाने वाली और बसंत में काटी जाने वाली फसलें ।
उत्तर – रबी फसल ।
( ग ) भूमि जिसे खेती कर के छोड़ दिया गया है ताकि उर्वरता लौट सके और उस पर पुनः खेती हो सके । उत्तर – चालू परती भूमि ।
( घ ) कारखाने के उत्पादन से मिलती – जुलती वैज्ञानिक तथा व्यापारिक ढंग से की जाने वाली एक फसल खेती ।
उत्तर – व्यापारिक कृषि ।
II. लघु उत्तरीय प्रश्न :
1 . भारत में उपजने वाली दो खाद्य , नकदी एवं रेशेवाली फसलों के नाम लिखिए ।
उत्तर – भारत में उपजने वाली दो खाद्य फसल हैं , चावल और गेहूँ , नकदी फसल हैं — चाय , कहवा , रेशेवाली फसल हैं – कपास और जूट ।
2. उपर्युक्त फसलों के उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों के नाम लिखें ।
उत्तर-
उपर्युक्त फसल.               राज्यों के नाम
चावल                           पं . बंगाल , बिहार
गेहूँ                              उत्तर प्रदेश , पंजाब
चाय                             हिमाचल प्रदेश , आंध्र प्रदेश कहवा                          कर्नाटक , तमिलनाडु
कपास                          महाराष्ट्र , गुजरात
जूट            नदियों का डेल्टा , गंगा का निचला मैदान

3. भारत में उपजाए जाने वाले वर्षाधीन फसलों के नाम लिखें ।
उत्तर – भारत में उपजाए जाने वाले वर्षाधीन फसलों के नाम हैं धान , मकई , ज्वार , बाजरा , अरहर , मूंग , उरद , कपास , तिल , जूट , मूंगफली ।
4. शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में कृषि का योगदान की चर्चा कीजिए ।
उत्तर – हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है । यहाँ की जनसंख्या का 2/3 भाग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर आधारित है । यहाँ की कृषि नौनसून है । यहाँ सिंचाई का बहुत अधिक विकास नहीं हुआ है , अतः यहाँ की मात्रा का कृषि पर बहुत प्रभाव पड़ता है । यहाँ की शुद्ध राष्ट्रीय आय में 24 % आय कृषि से प्राप्त होती है ।
5. भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के कारणों को संक्षेप में लिखिए ।
उत्तर – भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के निम्नलिखित कारण हैं –
( क ) सिंचाई की समुचित व्यवस्था का अभाव । ( ख ) परंपरागत तरीके से की गई कृषि ।
( ग ) उन्नत बीजों का अभाव ।
( घ ) मौनसून पर आधारित कृषि ।
( ङ ) आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीकों का अभाव । ( च ) जनसंख्या का दबाव ।
6. हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – गेहूँ की कृषि में हरित क्रांति की शुरूआत हुई । यह 1960-70 के दशक में हुआ । इसके अंतर्गत संकरित उन्नत बीज , सिंचाई , रासायनिक खाद , कीटनाशक आदि का प्रयोग कर खाद्यान्नों के उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि की गई ।
7. भारतीय कृषि की पाँच प्रमुख विशेषताओं को लिखिए ।
उत्तर – भारतीय कृषि की पाँच प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
( क ) भारत एक कृषि प्रधान है और कृषि यहाँ की जनसंख्या की लगभग 2/3 लोगों के आजीविका के साधन है
( ख ) कृषि से यहाँ के लोगों के लिए भोजन प्राप्त होता है ।
( ग ) उद्योगों को कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है । जैसे – जूती वस्त्र उद्योगों के लिए कपास , चीनी उद्योगों के लिए गन्ना आदि ।
( घ ) भारत की जलवायु और मिट्टी में विविधता पाई जाती है , जिस कारण फसलों की विविधता भी पाई जाती है ।
( ङ ) देश की राष्ट्रीय आय में कृषि का 24 % योगदान है ।
8 . भारत में उपजाए जाने वाले प्रमुख खाद्य एवं व्यावसायिक फसलों के नाम लिखिए ।
उत्तर – भारत में उपजाए जाने वाले प्रमखु खाद्य एवं व्यावसायिक फसलों के नाम-
खाद्य फसल – धान , गेहूँ , मक्का , ज्वार , बाजरा ।
व्यावसायिक फसल – कॉफी , चाय , गन्ना , कपास ।

कारण बताओ
1. कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी में अधिकांशतः होती है ।
उत्तर – कपास की खेती दक्कन प्रदेश की काली मिट्टी में अधिकांशतः की जाती है , क्योंकि टक्कन प्रदेश की मिट्टी लावा निर्मित काली मिट्टी होती है जिसमें अधिक समय तक नमी बनाने की क्षमता होती है ।
2. गन्ने की उपज उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिण भारत में अधिक है ।
उत्तर — गन्ना बाँस प्रजाति का एक पौधा है जिससे मीठा रस निकलता है । इस गुड़ से चीनी तथा गुड़ मिलता है । यह एक उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय फसल है । यह 21 ° से 27 ° C तापमान और
75 cm – 100 cm . वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है । कम वर्षा वाले प्रदेश में इसकी खेती नहीं होती है ।
इसकी खेती उत्तरी भारत की अपेक्षा दक्षिण भारत में अधिक है क्योंकि दक्षिण भारत में उत्तर मारत की अपेक्षा अनुकूल परिस्थितियाँ पाई जाती है|
3. भारत कपास का आयात एवं निर्यात दोनों करता है ?
उत्तर – भारत को कपास का मूल स्थान कहा जाता है । सूती वस्त्र उद्योग के लिए कच्चा माल प्रदान करता है । यह उपोष्ण एवं उष्ण कटिबंधीय पौधा है तथा इसे 210 दिन माला रहित 1 मौसम की आवश्यकता होती है ।
भारत उच्च कोटि के कपास का उत्पादन करता है अत : वह कपास का आयात एवं निर्यात दोनों करता है ।
4. भारत विश्व का अग्रणी चाय निर्यातक देश है ।
उत्तर – चाय एक सदाबहार झाड़ी है जिसकी पत्तियों को सुखाकर चाय बनाई जाती है । इसमें थीन नामक एक पदार्थ होता है जिसके कारण इसे पीने पर ताजगी महसूस होती है भारत इसके उत्पादन में विश्व में द्वितीय स्थान पर है तथा यह उत्तम किस्म की चाय का उत्पादन करता है जिसकी पूरे विश्व में मांग होती है । इसलिए यह विश्व का अग्रणी चाय निर्यातक देश है ।

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