History

Sai baba history in Hindi – शिर्डी साईं बाबा का इतिहास

Sai baba history Hindi – शिर्डी साईं बाबा का इतिहास

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Sai baba history in Hindi

साईं बाबा जिन्हें शिरडी के साईं बाबा भी कहते है एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु थे जिनको उनके भक्त फ़कीर या सतगुरु कहकर बुलाते थे | उनके भक्त हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के थे जबकि वो स्वय हिन्दू थे आय मुस्लिम ये अभी भी रहस्य है | उन्होंने सच्चे सतगुरु या मुर्शिद की राह दिखाई और आध्यात्मिकता का पाठ पढ़ाया | साईं बाबा  के चमत्कारों की वजह से दूर दूर से लोग मिलने आते थे और धीरे धीरे वो एक प्रसिद्ध संत के रूप में जाने जाने लगे | साईं बाबा को आज पुरे विश्व में पूजा जाता है और प्रतिदिन अनेको लोग शिरडी के साईं बाबा मन्दिर में उनके दर्शन करने आते है |

प्रारंभिक जीवन 

साईं बाबा एक जन्म ब्राह्मण जोड़े के यहाँ पथरी गाँव में हुआ था, जो ब्रिटिश भारत के निजाम राज्य में था। जहां उसके माता-पिता ने उन्हें फकीर को सौंप दिया था। ये उनके आखिरी दिनों में बाबा द्वारा बताये गये शब्द थे। लेकिन जन्म की तारीख अभी भी दुनिया के लिए अज्ञात है। बाबा पहली बार 16 साल की उम्र में महाराष्ट्र में शिरडी गांव आये थे।लोग उसे देखकर आश्चर्यचकित हुये कि एक लड़का बहुत ही कम उम्र में एक नीम के पेड़ के नीचे आसन में बैठकर गहरा ध्यान कर रहा है, बिना भोजन और बिना पानी के। इसके बाद लोग इस युवा बाबा पर बहुत आस्था करने लगे। गांव प्रमुख की पत्नी बयाजाबाई ने बचपन में साई बाबा के कल्याण के बारे में पूछताछ की। धीरे-धीरे वे बाबा के लिये खाना लाने लगी।

शिक्षाएं 

१ – साईं बाबा ने हर जाति और धर्म के लोगों को एकता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने सदा ही सभी से एक ही बात कही- सबका मालिक एक।

२ – जाति, धर्म, समुदाय, इत्यादि व्यर्थ बातों में ना पड़कर आपसी मतभेद को दूर कर आपस में प्रेम और सद्भावना से रहना चाहिए, क्योंकि सबका मलिक एक है। यह साईं बाबा की सबसे बड़ी शिक्षा और संदेश है।

३ – साईं बाबा ने यह संदेश भी दिया कि हमेशा श्रद्धा, विश्‍वास और सबूरी (सब्र) के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए।

४ – लोगों में मानवता के प्रति सम्मान का भाव पैदा करने के लिए साईं ने संदेश दिया है कि किसी भी धर्म की अवहेलना नहीं करें। उन्होंने कहा है कि सर्वधर्म सम्मान करते हुए मानवता की सेवा करनी चाहिए, क्योंकि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।

Sai baba history Hindi

५ – साईं सदैव कहते थे कि जाति, समाज, भेदभाव को भगवान ने नहीं बल्कि इंसान ने बनाया है। ईश्वर की नजर में कोई ऊंचा या नीचा नहीं है।

अत: जो कार्य स्वयं ईश्वर को पसंद नहीं है, उसे इंसानों को भी नहीं करना चाहिए, अर्थात जाति, धर्म, समाज से जुड़ी मिथ्या बातों में ना पड़कर प्रेमपूर्वक रहें और ग़रीबों और लाचार की मदद करें, क्योंकि यही सबसे बड़ी पूजा है।

६ – बाबा जी का यह कहना था कि जो व्यक्ति ग़रीबों और लाचारों की मदद करता है, ईश्वर स्वंय उसकी मदद करते हैं।

७ – साईं बाबा ने सदैव माता-पिता, बुजुर्गों, गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करने की सीख दी। उनका कहना था कि ऐसा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे हमारे जीवन की मुश्किलें आसान हो जाती हैं।

८ – साईं के सिद्धांतों में दया और विश्वास अंतर्निहित है। उनके अनुसार अगर इन दोनों को अपने जीवन में समाहित किया जाए, तभी भक्ति का अनुराग मिलता है।

साई बाबा का शिरडी दुबारा लौटना

1858 में साईं बाबा Shirdi Sai Baba फिर शिरडी लौटे |  इस बार उन्होंने वेशभूषा का अलग तरीका अपनाया जिसमे उन्होंने घुटनों तक एक कफनी बागा और एक कपड़े की टोपी पहन रखी थी | उनके एक भक्त रामगिर बुआ ने बताया कि जब वो शिरडी आये तब उन्होंने खिलाड़ी की तरह कपड़े और कमर तक लम्बे बाल थे जिन्होंने उसे कभी नही कटवाए | उनके कपड़ो को देखकर वो सूफी संत लग रहे थे जिसे देखकर गाँव वालो ने उन्हें मुस्लिम फकीर समझा |  इसी कारण एक हिन्दू गाँव होने के कारण उनका उचित सत्कार नही किया गया था |

लगभग 5 वर्षो तक वो नीम के पेड़ के नीचे रहे और अक्सर लम्बे समय तक शिरडी के पास के जंगलो में घूमते रहते थे | वो किसी से ज्यादा बोलते नही थे क्योंकि उन्होंने लम्बे समय तक तपस्या की थी |अंततः उन्होंने एक जर्जर मस्जिद को अपना घर बनाया और एकाकी जीवन बिताने लगे | वहा पर बैठने से आने जाने वाले लोग उनको भिक्षा दे देते थे जिससे उनका जीवन चल जाता था |उस मस्जिद में उन्होंने एक धुनी जलाई जिससे निकली राख को उनसे मिलने वालो को देते थे | ऐसा माना जाता है कि उस राख में चिकत्सीय शक्ति थी |

वो अब गाँव वालो के लिए एक हकीम बन गये थे जो राख से उनकी बीमारी दूर करते  थे |साईं बाबा उनसे मिलने वालो को आध्यात्मिक शिक्षा भी देते थे और उन्हें पवित्र हिन्दू ग्रंथो के साथ कुरान भी पढने को कहते थे |वो ईश्वर के अटूट स्मरण के लिए अपरिहार्यता के लिए प्रेरित करते और अक्सर गुप्त तरीको दृष्टान्तों, प्रतीक और रूपक से खुद को व्यक्त करते थे | 1910 ईस्वी के बाद साईं बाबा की प्रसिधी मुंबई तक फ़ैल गयी | अनेक लोग उनसे मिलने आने लगे क्योंकि उनके चमत्कारी तरीको की कारण उन्हें संत मानते थे |

साईं बाबा ने “सबका मालिक एक ” का नारा दिया था जिससे हिन्दू मुस्लिम सदभाव बना रहे | उन्होंने अपने जीवन में हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मो का अनुसरण किया | वो अक्सर कहा करते थे “मुझ पर विशवास करो , तुम्हारी प्रार्थना का उत्तर दिया जाएगा ” | वो हमेशा अपनी जबान पर “अल्लाह मालिक ” बोलते रहते थे |

साईं बाबा ने अपने पीछे ना कोई आध्यात्मिक वारिस और ना कोई अनुयायी छोड़ा  | इसके अलावा उन्होंने कई लोगो के अनुरोध के बावजूद किसी को दीक्षा दी | उनके कुछ अनुयायी अपने आध्यात्मिक पहचान की वजह से प्रसिद्ध हुए जिनमे सकोरी के उपासनी महाराज का नाम आता है

शिर्डी का साईं बाबा मंदिर – Shirdi Sai Baba Temple

महाराष्ट्र के अहमदजिले में स्थित शिर्डी गांव में बने साईं मंदिर से आज लाखोँ – करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। इस मंदिर में दर्शन के लिए दुनिया के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं।

यह आज भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जो कि लोगों को दया, प्रेम, करुणा एवं सदभाव का पाठ पढा़ने वाले साईं बाबा की समाधि के ऊपर बनाया गया है।

साईं बाबा की शिक्षाएं और उनके लोक कल्याणकारी कामों को आगे बढ़ाने के लिए उनके इस मंदिर का निर्माण साल 1922 में किया गया है। ऐसा माना जाता है कि साईं बाबा ने अपने जीवन का ज्यातादर समय शिर्डी में ही व्यतीत किया है और लोगों को आपस में मिलजुल कर रहने, भक्ति करने आदि का पाठ पढ़ाया।

साईं को लोग आध्यात्मिक गुरु, संत, ईश्वरीय अवतार मानते हैं। शिर्डी के साईं मंदिर सुबह 4 बजे खुल जाता है, और रात के सवा 11 बजे इस मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं।

वहीं इस मंदिर में लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए लोग अपनी श्रद्धा के मुताबिक यहां चढ़ावा भी चढाते हैं, यह मंदिर अपने रिकॉर्ड तोड़ चड़ावे के लिए भी हमेशा खबरों में रहते हैं।

वहीं इस मंदिर से जुड़ी यह मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से साईं भगवान के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं, उनकी सभी मुरादें पूरी होती हैं।

पानी से दिया जलाना Lighting lamps with water

Shirdi Sai Baba साईं बाबा को उनकी मस्जिद और दुसरे मन्दिरों में दिया जलाने का बहुत शौक था लेकिन तेल के लिए उनको वहा के बनियों पर आश्रित रहना पड़ता था | वो प्रत्येक शाम को दिया जलाते और बनियों से दान ले जाते | बनिये साईं बाबा को मुफ्त का तेल देकर थक गये थे और एक दिन उन्होंने साईं बाबा से माफी मांगते हुए तेल देने से मना कर दिया और कहा कि उनके पास तेल नही बचा | बिना किसी विरोध के साईं बाबा वापस अपने मस्जिद में लौट गये | अब उन मिटटी के दियो में उन्होंने पानी भरा और बाती जला दी | वो दिया मध्यरात्री तक जलता रहा |जब इसकी सुचना बनियों तक पहुची तो साईं बाबा के पास विपुल क्षमायाचना के लिए आये | साईं बाबा ने उन्हें क्षमा करदिया और कहा कि दुबारा झूठ मत बोलना | इस तरह साईं बाबा ने अपना चमत्कार दिखाते हुए पानी से दिया जला दिया |

बारिश रोकना Stopping the rain

एक बार राय बहादुर नाम का व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ साईं बाबा के दर्शन के लिए शिरडी आया |  जैसे ही वो पति पत्नी बाबा के दर्शन करवापस जाने लगे ,मूसलाधार बारिश शुरु हो गयी | जोरो से बिजलिया कडकने लगी और तूफ़ान चलने लगा | साईं बाबा ने प्रार्थना की “हे अल्लाह , बारिश को रोक दो , मेरे बच्चे घर जा रहे है  उन्हें शांति से घर जाने दो ” | उसके बाद बारिश बंद हो गयी और वो पति-पत्नी सकुशल घर पहुच गये |

डूबती बच्ची को बचाना Saving a child from drowning

एक बार बाबु नामक व्यक्ति की तीन साल की बच्ची कुंवे में गिर गयी और डूबने लगी | जब गाँव वाले कुए के पास दौड़े उन्होंने देखा बच्ची हवा में लटक रही थी जैसे किसी अदृश्य हाथ ने उसे पकड़ रखा हो और उसे उपर तक खीच लिए |साईं बाबा को वो बच्ची बहुत प्यारी थी जो अक्सर कहा करती  थी “मै बाबा की बहन हु ” | इस घटना के बाद गाँव वालो ने कहा “ये सब बाबा की लीला है “| इसके अलावा इस चमत्कार को ओर कोई स्पष्टीकरण नही हुआ था |

साईं बाबा के अनमोल वचन 

१ – आने वाला जीवन तभी शानदार हो सकता है, जब तुम ईश्वर के साथ पूर्ण सद्भाव में जीना सीख जाओगे।

२ – मनुष्य अपने स्वाद की तृप्ति के लिए प्रकृति में उपलब्ध खाद्य पदार्थों में बदलाव चाहता है, जिससे उनमें निहित जीवन के बहुत सार अंत को प्राप्त होते हैं।

३ – तुम्हें एक कमल की तरह होना चाहिए, जो सूर्य के प्रकाश में अपनी पंखुड़ियों को खोल देती है। कीचड़ में जन्म लेने या अपने अन्दर जलकी उपस्थिति से अप्रभावित जो इसे जीवित रखता है।

४ – मनुष्य अनुभव के माध्यम से सीखता है, और आध्यात्मिक पथ विभिन्न प्रकार के अनुभवों से भरा है। उसे कई कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करना होगा, और वे सारे अनुभव जो उसे प्रोत्साहित करने और सफाई की प्रक्रिया पूरा करने लिए ज़रूरी हैं।

५ – सभी कार्य विचारों के परिणाम होते हैं, इसलिए विचार मायने रखते हैं।

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६ – मनुष्य खो गया है और एक जंगल में भटक रहा है, जहाँ वास्तविक मूल्यों का कोई अर्थ नहीं है। वास्तविक मूल्यों का मनुष्य के लिए तभी अर्थ हो सकता है, जब वह आध्यात्मिक पथ पर कदम बढ़ाये। यह एक ऐसा पथ है, जहाँ नकारात्मक भावनाओं का कोई उपयोग नहीं।

७ – तुम्हें अपने दिनों को गीतों में बिताना चाहिए। तुम्हारा संपूर्ण जीवन एक गीत की तरह हो।

८ – यह दुनिया प्यार के प्रवाह से शुद्ध हो। तब आदमी, उथल-पुथल की स्थिति जो उसने अपने जीवन के पिछले तरीकों के द्वारा, उन सभी सामग्री, हितों और सांसारिक महत्वाकांक्षा के साथ बनाया है कि बजाय शांति से रह सके।

९ – ब्रह्मांड की तरफ देखो और ईश्वर की महिमा का मनन करो। सितारों को देखो, उनमें से लाखों, रात को आसमान में चमकते, सब एकता के संदेश के साथ, ईश्वर के स्वभाव के अंग हैं।

१० – आप अपने चारों ओर देखते हो, इससे गुमराह मत हो, या आप जो भी देखते हो, उससे प्रभावित होते हो। आप एक ऐसी दुनिया में रहते हैं, जो गलत रास्ते, झूठे मूल्यों और झूठे आदर्शों से भरा भ्रम का एक खेल का मैदान है। लेकिन आप उस दुनिया का हिस्सा नहीं हो।

११ – एक घर ठोस नींव पर बनाया जाना चाहिए, यदि इसे टिकाऊ बनाना है। यही सिद्धांत आदमी पर लागू भी होता है, अन्यथा वह भी नरम जमीन में वापस धंस जायेगा और भ्रम की दुनिया द्वारा निगल लिया जायेगा।

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१२ – दुनिया में क्या नया है? कुछ भी नहीं। दुनिया में क्या पुराना है? कुछ भी नहीं। सब कुछ हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा।

१३ – जीवन एक गीत है, इसे गाओ। जीवन एक खेल है, इसे खेलो। जीवन एक चुनौती है, इसका सामना करो। जीवन एक सपना है, इसे अनुभव करो। जीवन एक यज्ञ है, इसे पेश करो। जीवन प्यार है, इसका आनंद लो।

१४ – एक दूसरे से प्रेम करो और उच्च स्तर तक जाने के लिए दूसरों की मदद करो, सिर्फ प्यार देकर। प्रेम संक्रामक और घावों को भरने वाली सबसे बड़ी ऊर्जा है।

१५ – वर्तमान में जीना सबसे ज्यादा मायने रखता है, इस क्षण को जियो, हर पल अभी है। यह इस क्षण के तुम्हारे विचार और कर्म हैं, जो तुम्हारे भविष्य को बनाते हैं। तुम अपने अतीत से जो रूपरेखा बनाते हो, वही तुम्हारे भविष्य के मार्ग की रूपरेखा बनाते हैं।

साईं बाबा पर फ़िल्में Movies on Shirdi Sai Baba

साईं बाबा को लेकर कई फिल्में बनाई गई है। इन फिल्मों के मुख्य उद्देश्य केवल पैसे कमाना नहीं हैं बल्कि लोगों को साईं बाबा के बारे में बताना है, जिससे उनके भक्त शिरडी के साई बाबा की ओर उनके विश्वास और भक्ति को बढ़ाबा मिले। उनमें से कुछ फ़िल्में शिरडी के साईं बाबा के जीवन के इतिहास चित्रित की गई है।

ये फिल्में कई कई भाषाओँ में जैसे – शिरीद चे साईं बाबा (मराठी), शिरडी के साईं बाबा (हिंदी), श्री शिरडी साईं बाबा महाथीम (तेलुगू), भगवान श्री साईं बाबा (कन्नड़), साईं बाबा (मराठी), श्री साईं महिमा (तेलुगू), शिरडी साईं बाबा (हिंदी), ईश्वर्या अवतार साईं बाबा (हिंदी), मलिक एक (हिंदी), शिरडी साई (तेलुगु) आदि। ये फिल्मे साईं बाबा के द्वारा किये गये चमत्कार, साईं बाबा के जीवन, इतिहास को स्पष्ट रूप से समझाती हैं।

मृत्यु

साईं बाबा अपनी घोषणा के अनुरूप 15 अक्टूबर, 1918 को विजया दशमी के विजय-मुहू‌र्त्त में शारीरिक सीमा का उल्लंघन कर निजधाम प्रस्थान कर गए। इस प्रकार ‘विजया दशमी’ उनका महासमाधि पर्व बन गया। कहते हैं कि आज भी सच्चे साईं-भक्तों को बाबा की उपस्थिति का अनुभव होता है।

शिरडी मंदिर कैसे पहुंचे

यह गाँव महाराष्ट राज्य में अहमदनगर जिला के रहता तहसील के अंतर्गत आता है | इस गाँव में साई बाबा ने कई चमत्कार किये और आज लाखो भक्तो उनके दर्शन करने यहा के प्रसिद्ध समाधी मंदिर में आते है |

शिर्डी गावं ( साईं नगर )  SNSI अच्छी तरह सडको रेलमार्गों से जुड़ा  हुआ है जो  कोपर्गावं १५ किमी की दुरी पर है शिर्डी गावं से जिस पर दिल्ली  से बंगलौर कर्नाटका एक्सप्रेस आती है

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ट्रेन

मुंबई से शिरडी पहुंचने के लिए जनशताब्दी स्पेशल (01037), शिरडी फास्ट पैसेंजर (51033) ट्रेन प्रतिदिन चलती है. इसके अलावा अगर मनमाड स्टेशन पहुंचना हो तो मुंबई सीएसटी, लोकमान्य टर्मिनल और दादर से करीब 50 ट्रेनें उपलब्ध हैं. अगर आप पुणे से ट्रेन के जरिए शिरडी पहुंचना चाहते हैं तो प्रतिदिन तीन ट्रेनें उपलब्ध हैं.

दिल्ली से ट्रेन के जरिए मनमाड (Manmad) स्टेशन पहुंचे. दिल्ली से मनमाड पहुंचने के लिए प्रतिदिन ट्रेने चलती हैं. पंजाब मेल (12138), स्वर्ण जयंती (12782), झेलम एक्सप्रेस (11078), गोवा एक्सप्रेस (12780), कर्नाटक एक्सप्रेस (12628) समेत कई ट्रेने नई दिल्ली से प्रतिदिन मनमाड के लिए चलती हैं.

अगर आप चेन्नई से शिरडी पहुंचना चाहते हैं तो बुधवार और गुरुवार के दिन चेन्नई सेंट्रल से साईं नगर शिरडी सुपरफास्ट ट्रेन (22601) चलती है जबकि शुक्रवार और शनिवार को साईं नगर शिरडी-चेन्नई सेंट्रल सुपरफास्ट (22602) चलती है.

हैदराबाद से मनमाड जंक्शन के लिए दो ट्रेनें (17058 देवगिरी एक्सप्रेस और 17064 अजंता एक्सप्रेस) प्रतिदिन चलती हैं इसके अलावा पांच अन्य ट्रेनें भी उपलब्ध हैं जो अलग-अलग दिन मनमाड के लिए रवाना होती हैं.

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सड़क

बई से शिरडी और शिंगणापुर के लिए प्रतिदिन बसें चलती हैं. रात दस बजे के आसपास बोरीवली से बस सेवा शुरू होती है जो अगले दिन सुबह शिरडी पहुंचती है. दिन में साईं के दर्शन और शाम तक शनि शिंगणापुर के दर्शन कर आप राज 10 बजे वापस बस पकड़ लें जो आपको अगले दिन सुबह मुंबई पहुंचा देगी. बस का किराया सुविधाओं के अनुसार 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक हो सकता है.

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वायु मार्ग

2007 से शिर्डी में एयरपोर्ट बना दिया गया है जिससे मुंबई और हैदराबाद से हवाई जहाज सीधे शिरडी आ सकते है | इसके अलावा पास के शहरो में नाशिक ७५ किमी की दुरी पर है शिर्डी से औरंगाबाद १५० किमी और मुबई २९६ किमी पर है |

अगर आप देश के दूसरे प्रांत से हवाई मार्ग के जरिए शिरडी पहुंचना चाहते हैं तो मुंबई या पुणे उतर कर यहां से टैक्सी, बस या ट्रेन के जरिए शिरडी (या मनमाड) पहुंच सकते हैं.

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शिर्डी से मुख्य शहर से दुरी

कोपरगाँव – १५ किमि
मनमाड – ५८किमि
मुंबई – २६६ किमी
दिल्ली -1166 किमी
सूरत – ३७३ किमी
नागपुर – ६१८किमि
नासिक – ९० किमी
हैदराबाद – ६१० किमी
पुणे –  २०७ किमी

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