9th hindi

Folk songs of Bihar | बिहार के लोक गीत

बिहार के लोक गीत

Folk songs of Bihar

वर्ग – 9

विषय – हिंदी

पाठ 1 – बिहार के लोक गीत

बिहार का लोकगायन

सारांश

बिहार की धरती लोक गीतों की अकूत सम्पदा से भरपूर है । यहाँ अनेक गायक एवं वादक पैदा हुए हैं । विभिन्न उत्सवों , त्योहारों , गृह कार्यों तथा कृषि कार्यों के समय औरतों द्वारा गाये गये गीतों में लोकगायन का वास्तविक स्वरूप दिखाई पड़ता है । इन गीतों में स्वाभाविकता का पूर्ण समावेश है । साथ ही ग्रामीण कृषि संस्कृति की झलक मिलती है । इन गीतों में हमारी पुरानी संस्कृति का इतिहास जुड़ा हुआ है । मैथिली गीतों की मोहक परंपरा भी बिहार की मूल्यवान निधि है ।
बिहार के लोक गीतों को पाँच भागों में बाँटा गया है- ( 1 ) संस्कार गीत– जन्म , जनेऊ , तिलक , विवाह आदि को संस्कार गीत के अन्तर्गत रखा गया है । ( ii ) पर्व गीत – पर्व गीत में छठ गीत की प्रधानता है
( iii ) श्रम गीत – श्रम करने वाली महिलाएं इस तरह के गीत को गाकर अपनी थकान को दूर करती है इसमें गाने वाले गीतों में जैत साद , रोपनी गीत शामिल है ।
( iv ) प्रेम – मनोरंजन गीत – इस तरह के गीत श्रमशील पुरुषों द्वारा गया जाता है । इस श्रेणी में बिरहा , लोरिकायन आदि आते हैं ।
( v ) ऋतु गीत — इसमें खास कर होली और चैता गाया जाता है । इन गीतों के अलावे निरगुण तथा सगुण भक्तिपक्ष के गीत भी गाई जाती है ।
गीत गायन में वादन का भी महत्वपूर्ण स्थान है । उनमें ढोलक , झाल , डुगी , डंका आदि बजा बजाकर आनन्द और मस्ती भरी जाती है । इसमें सभी वर्ग के स्त्री , पुरुष , अलग – अलग समूह बनाकर अच्छे गायन और वादन का नमूना पेश करते हैं । विहार में भाषा के विविधता के बावजूद भी ये गीत समान भाव से गाये जाते हैं । संस्कार गीतों में भाषा – भेद के अन्तर्गत भावना तथा विषय की समानता लोगों को आन्तरिक एकसूत्रता के प्रमाण देखने को मिलता है । संस्कार गीतों में राम , कृष्ण , शंकर भक्ति गीतों में गंगा और देवी का गायन पारिवारिक पृष्ठभूमि में ही होता है ।
जनेऊ संस्कार में जनेऊ अधिकारी को ‘ वरुआ ‘ कहा जाता है जिस तरह विवाह में लड़के को दुल्हा तथा लड़की को दुल्हन नाम दिया जाता है । तिलकोत्सव लड़का पक्ष के घर पर सम्पन्न होता है । यहाँ गीतों के माध्यम से लड़का की बड़ाई तथा लड़की पक्ष की शिकायत की जाती है।
बारात जब द्वार पर लगाया जाता है पहले द्वार पूजा होती है । बाद में बारातियों को खिलाने के समय गालियाँ दी जाती है इनमें औरतें उम्र का ख्याल नहीं रखती बल्कि बाराती में आए सभी लोगों को चाहे किसी भी रूप में छोड़ा नहीं जाता है ।
गीतों में करुण भाव खासकर सिन्दूर दान तथा विदाई गीतों में समाहत है । सभी की आँखें नम हो जाती है । इन गीतों से सम्बन्ध की पवित्रता , सर्वमान्यता , मांगलिक तथा आर्शीवचनों के साथ विछोह की धारा फूटती है ।
पर्व गीतों में ग्राम देवी , शंकर – पार्वती , गंगा तथा छठ के गीत शामिल है । छठ पर्व बिहार का मुख्य पर्व है । इसके गीत का लय धुन और गीतों से सर्वथा भिन्न होता है ।
श्रम गीतों में जैतसारी , रोपनी के अलावा हलबाहे , चरवाहे , विरहा , लोरिका नैका जैसे प्रेम गीत गाकर अपनी थकान दूर करते हैं ।
होली चैता उत्सव गीत के साथ ऋतु गीत के रूप में गाया जाता है होली का प्रारम्भ बसन्त पंचमी से होता है तथा इसका अंत चैत परिवा के दिन समाप्त होता है चैता तो पुरुष के अलावा औरते भी वादन के साथ गाती है । यह गीत पूरे चैत माह तक गाया जाता है ।
लोकगायन का आनन्द ढोलक के साथ लिया है । ढोलक वादन में प्रमुख नाम रामकृतार्थ मिश्र जो बक्सर जिला के बराठी गाँव के निवासी एवं किसुनदेव राय , कंठासुर राय भोजपुर जिला निवासी लोकगायन की रेडियो , दूरदर्शन के द्वारा विस्तार एवं प्रसार में विध्यावासिनी देवी , भरत सिंह भारती , शारदा सिन्हा का नाम अग्रणी है । युवा पीढ़ी में अजित कुमार अकेला , भरत शर्मा व्यास तथा मनोज तिवारी ने लोक गायन की प्रतिष्ठा चार चाँद लगाया है ।

अभ्यास

प्रश्न 1. लोक गीत किसे कहते हैं ?

उत्तर – लोक गीत में भाषाओं के माध्यम से क्षेत्रीय लोकाचार , परम्पराओं को गीत के रूप में गाया जाता है । जैसे – जन्म , जनेऊ , विवाह , कटनी , पीसनी , रोपनी आदि ।

प्रश्न 2. लोक गीत के प्रमुख भेद का परिचय दें ।

उत्तर — लोक गीतों को पाँच प्रमुख भेद होता है । ( i ) संस्कार गीत — जन्म , जनेऊ , तिलक , विवाह के विभिन्न प्रसंगों में गाया जाने वाला गीत संस्कार गीत कहलाता है ।
( ii ) पर्व गीत – पर्व – त्योहारों के अवसर पर गाया जाने वाला गौत पर्व गीत कहलाता है । जैसे – छठ , रामवनमी , कृष्ण जन्माष्टमी आदि ।
( iii ) श्रम गीत – कार्य करते हुए गाये जाने वाला गीत श्रम गीत कहलाता है । जैसे – रोपनी , कटनी , पिसनी आदि ।
( iv ) प्रेम – मनोरंजन गीत – इस प्रकार के गीत में अक्सर चरवाहे , हलवाहे , गाड़ीवान पुरुषों द्वारा गाये जाने वाले गीतों का समावेश किया गया है ।
( v ) गाथा गीत – लोरिका , भरथरी , नैका आदि नामों की गाथा गायी जाती है । इसमें बारहमासा गीत भी शामिल है ।
( vi ) ऋतु गीत – होली , चैता , ऋतु , गीत से सम्बन्ध रखता है ।

प्रश्न 3. संस्कार गीत किसे कहते हैं ?

उत्तर – जन्म , जनेऊ , तिलक , विवाह के अवसर पर गाया जाने वाला गीत संस्कार गीत कहलाता है ।

प्रश्न 4. विवाह के गीतों में से किन्हीं पाँच का परिचय दें ।

उत्तर – विवाह संस्कार में गीतों का प्रारम्भ तिलकोत्सव से होता है ।
1.” मोर बाबु पढ़ला पॉडतवा तिलक बड़ा थोड़ बांटे जी ।”
2. ” ठग लिया लड़का हमारी जी समधी वैमाना ।”
3.हल्दी क्लश गीत- ” हरदी , हरदी जिरवा पातर ना ।”
4. द्वार पूजा गीत- ” आपन खोरिया बाहार ए कवन देवा । ”
5. विदाई गीत — “बाबाऽ बाऽया पुकारीला बाबा ना बोलले हो । ”

प्रश्न 5. आपके अपने क्षेत्र में विवाह के किस – किस प्रसंग के गीत गाये जाते हैं ?

उत्तर – हमारे क्षेत्र में विवाह के गीतों का प्रारम्भ तिलकोत्सव से होता है । मण्डपाच्छादन हल्द कलश , द्वार पूजा , सिन्दुर दान , भोजन के समय तथा दुल्हन विदायीं की गीत गायी जाती है । साथ ही गुरहली , मंगढ़की के गीत में भसुर और श्वसुर को मांगलिक गालियाँ सुनाई जाती है ।

प्रश्न 6. किस पर्व का गीत आपको सबसे अधिक अच्छे लगते हैं और क्यों ?

उत्तर — बिहार में अनेक पर्व होता है । जिसमें ग्राम देवी , शंकर – पार्वती , गंगा की भक्ति गीत शामिल है । बिहार का एक पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण है वह है ” छठ ” ।
छठ पर्व के गीतों का अनोखा लय – धुन होता है । बिहार के संस्कृति वाले परिवार को समर्पित सूर्य भक्ति गीत मुझे बहुत भाता है । क्योंकि इस पर्व में सादगी , समर्पण की भावना होती है । इसके गीत का धुन , लय ” काँच ही बाँस के बहाँगया बहँगी लचकत जाय । ” ” उगी ना सुरज देवा लीही ना अरगीया ” बड़ा ही मनमोहक और लोमहर्षक है ।

प्रश्न 7. शास्त्रीय गीत तथा लोक गीत का सामान्य अन्तर स्पष्ट करें ।

उत्तर – शास्त्रीय गीत – सर्वकालिक और सर्वदेशिक होता है । यह शास्त्रानुसार यानि नियमों में बांधकर वाद्य – वादन किया जाता है । लोक गीत क्षेत्रीय परम्परा रीति – रिवाज , परिस्थितियों से सम्बन्धित होता है । इसे क्षेत्रीय भाषा में गाया जाता है । इसमें गीत के साथ वाद्य यंत्रों को बजाया जाता है ।

प्रश्न 8. अपने वर्ग में विभिन्न लोक गीतों के महत्व पर एक परिचर्चा आयोजित करें ।

उत्तर – स्वयं करें ।

प्रश्न 9. अपने क्षेत्र में प्रचलित लोक गीतों की एक अलग पुस्तिका तैयार करें ।

उत्तर – स्वयं करें ।

प्रश्न 10. अपने गाँव या नगर के लोकगायकों की एक सूची बनाएँ और उनके परिचय लिखें । .

उत्तर – स्वयं करें ।

 

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