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Chandra Shekhar Singh Biography in hindi | चंद्रशेखर सिंह जीवनी

Chandra Shekhar Singh Biography in hindi | चंद्र शेखर सिंह की जीवनी

Chandra Shekhar Singh Biography in hindi

चंद्र शेखर सिंह का जन्म 17 अप्रैल 1927 को उत्तर प्रदेश के बल्लिया जिले के इब्राहिमपट्टी गाँव में हुआ था। वे एक खेती करने वाले परिवार से सम्बन्ध रखते थे। सतीश चंद्र पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में उन्हें बैचलर ऑफ़ आर्ट डिग्री देकर सम्मानित भी किया गया है।विद्यार्थी राजनीती में वे जल्दी उत्तेजित होने वाले इंसान के रूप में जाने जाते है और डॉ. राम मनोहर लोहिया के साथ मिलकर उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद अपने राजनैतिक करियर की शुरुवात की थी। बहुत कम भारतीय राजनेता देश की समस्याओं को समझ पाते है और उसी के लिए समाधान खोजने में सफल हो पते हैं. ऐसा ही एक विजयी राजनीतिज्ञ चंद्रशेखर सिंह जी है, जो वी.पी.सिंह के बाद, भारत देश के 8 वें प्रधानमंत्री बने. इनका कार्यकाल छोटा जरुर रहा, लेकिन इनको एक मजबूत प्रधानमंत्री व इनके कार्यकाल को भारत देश की राजनीती में असरदार कार्य के लिए याद किया जाता है. पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकाल में बहुत अधिक अविश्वास उत्पन्न हो जाने के कारण देश की हालत बहुत नाजुक दौर से गुजर रही थी, उस वक्त ऐसे लीडर की जरुरत थी, जो निज़ी स्वार्थों से उपर राष्ट्रहित में कार्य करे . चंद्रशेखर ने इन परिस्थितियों  में एक अच्छी राजनीति देश को दी. एक छोटी अवधि के लिए कार्यालय में होने के बावजूद, वे पूर्णता और राजनीतिमत्ता के साथ अपने नेतृत्व के गुणों को प्रदर्शित करते थे.

1. पूरा नाम चंद्रशेखर सिंह
2. जन्म 1 जुलाई 1927
3. जन्म स्थान इब्राहीमपट्टी, उत्तरप्रदेश
4. मृत्यु 8 जुलाई 2007 (दिल्ली)
5. राजनैतिक पार्टी समाजवादी जनता पार्टी

राजनीतिक करियर –

वे सामाजिक आंदोलन में शामिल होते थे और बाद में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, बल्लिया से वे सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त हुए। एक साल के भीतर ही, उनकी नियुक्ती उत्तर प्रदेश राज्य में PSP के जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर की गयी। 1955-56 में वे राज्य में पार्टी के जनरल सेक्रेटरी बने।

1962 में उत्तर प्रदेश के राज्य सभा चुनाव से उनका संसदीय करियर शुरू हुआ। अपने राजनीतिक करियर के शुरुवाती दिनों में वे आचार्य नरेंद्र देव के साथ रहने लगे थे। 1962 से 1967 तक शेखर का संबंध राज्य सभा से था। लेकिन जब उस समय आनी-बानी की घोषणा की गयी थी, तब उन्हें कांग्रेस पार्टी का राजनेता माना गया था और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर पटियाला जेल भी भेजा था।

1983 में उन्होंने देश की भलाई के लिए राष्ट्रिय स्तर पर पदयात्रा का भी आयोजन किया था, उन्हें “युवा तुर्क” की पदवी भी दी गयी थी।

चंद्र शेखर सोशलिस्ट पार्टी के मुख्य राजनेता थे। उन्होंने बैंको के राष्ट्रीयकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाद में 1964 में वे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में शामिल हो गए। 1962 से 1967 तक वे राज्य सभा के सदस्य बने हुए थे। सबसे पहले 1967 में वे लोक सभा में दाखिल हुए थे। कांग्रेस पार्टी के सदस्य रहते हुए, उन्होंने कई बार इंदिरा गांधी और उनके कार्यो की आलोचना की थी।

इस वजह से 1975 में उन्हें कांग्रेस पार्टी से अलग होना पड़ा था। इसी कारणवश आनी-बानी की परिस्थिति में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। आनी-बानी के समय में उनके साथ-साथ मोहन धारिया और राम धन जैसे नेताओ को भी गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने कांग्रेस पार्टी में “जिंजर ग्रुप” की शुरुवात भी की थी, जिसके सदस्य अविभाजित कांग्रेस पार्टी के समय में खुद फिरोज गाँधी और सत्येन्द्र नारायण भी थे।

आनी-बानी के तुरंत बाद, चंद्रशेखर 1977 में स्थापित जनता पार्टी के अध्यक्ष बन गये और उन्होंने राज्य में पहली अकांग्रेस सरकार बनायी। जिसमे उन्हें सफलता भी मिली।

आनी बानी के बाद वे जनता पार्टी के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद संसदीय चुनाव में जनता पार्टी ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया और फिर उन्होंर मोरारी देसाई के साथ एक संगठन भी बनाया।

1988 में यह पार्टी दूसरी पार्टियों में मिल गयी और फिर व्ही.पी. सिंह के नेतृत्व में एक नयी सरकार का गठन किया गया। इसके कुछ समय बाद एक बार फिर चंद्रशेखर ने संगठित होकर, जनता दल सोशलिस्ट नाम के पार्टी की स्थापना की। फिर कांग्रेस की सहायता से, विशेषतः राजीव गाँधी के सहयोग से वे नवम्बर 1990 में व्ही.पी. सिंह की जगह प्रधानमंत्री बने।

1984 के चुनाव को छोड़कर वे लोक सभा के सभी चुनावो में जीते, क्योकि इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने पोल को घुमा दिया था।

चंद्रशेखर के अनुसार व्ही.पी.सिंह और देवी लाल के समझौते ने ही उन्हें प्रधानमंत्री के पद से वंचित किया था और इसी वजह से 1990 में उनकी पार्टी को बुरी तरह से निचे गिरना पड़ा था।

चंद्र शेखर सिंह प्रधानमंत्री के रूप में 

चंद्र शेखर सात महीनो तक प्रधानमंत्री भी बने थे, चरण सिंह के बाद वे दुसरे सबसे कम समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री थे।

अपने कार्यकाल में उन्होंने डिफेन्स और होम अफेयर्स के कार्यो को भी संभाला था। उनकी सरकार में 1990-91 का खाड़ी युद्ध भी शामिल है।

इतना ही नहीं बल्कि उनकी सरकार पूरा बजट भी पेश नही कर पायी थी क्योकि कांग्रेस ने उनका साथ देने से मना कर दिया था।

1991 की बसंत ऋतू में भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने दुसरे चुनाव में हिस्सा लेने की ठानी थी।

और इसके चलते 6 मार्च 1991 में ही चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

Chandra Shekhar Singh Biography

पी.व्ही. नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री का पद सौपने के बाद, चंद्र शेखर का राजनीतिक महत्त्व काफी कम हो गया था, लेकिन फिर भी लोक सभा में वे काफी सालो तक अपने सीट बचाने में सफल रहे।

उन्होंने देश के बहुत से भागो में भारत यात्रा सेंटर की स्थापना की और ग्रामीण विकास पर ज्यादा ध्यान देने लगे थे।

प्रधानमंत्री के बाद का कार्यकाल –

पी.व्ही. नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री का पद सौपने के बाद, चंद्र शेखर का राजनीतिक महत्त्व काफी कम हो गया था, लेकिन फिर भी लोक सभा में वे काफी सालो तक अपने सीट बचाने में सफल रहे। उन्होंने देश के बहुत से भागो में भारत यात्रा सेंटर की स्थापना की और ग्रामीण विकास पर ज्यादा ध्यान देने लगे थे।

चंद्रशेखर सिंह रचनाएँ  (Chandra Shekhar singh books) 

इनके विचारों में बहुत गहराई थी जिसे उन्होंने अपने लेखन के जरिये उजागर किया. उस वक्त विचारो की अभिव्यक्ति सामान्यतः पत्र-पत्रिकाओं के जरिये की जाती थी. यह एक बहुत प्रभावशाली तरीका होता था. इस प्रकार चंद्रशेखर जी ने भी अपने विचारों को एक उड़ान दी . राजनीति एवम समाज से जुड़े मुदो को उन्होंने इसी तरह सबके सामने रखा उनकी शैली इतनी तीव्र थी कि उनका विरोध करने का सामर्थ्य किसी में नहीं था . इन्होने “Young India” नामक समाचार पत्र का सम्पादन किया, इनके समाचार पत्रों में यह जनता को जगाने वाली शैली को अपनाते थे. यह बोद्धिक वर्ग में भी प्रिय रहे. यह बेखोफ और निष्पक्ष नेता थे, जिन्होंने कलम को अपना हथियार बनाया और क्रांति का आव्हाहन किया . आपातकाल के दौरान इन्हें भी जेल जाना पड़ा था जहाँ इन्होने अपने विचारो और आपबीति को एक डायरी में संग्रहित किया, जो बाद में “मेरी जेल ” के नाम से प्रकाशित की गई . “डायनमिक्स ऑफ चेंज” नामक पुस्तिका के रचियता भी थे, जिसमें इनके विचारों और young India के इनके अनुभवों को भी प्रकाशित किया . इनके लेखन में एक प्रकार का भाव होता था, जो पाठक को शुरु से अंत तक बांधे रखता था .

बहुत वक्त बाद भारत को एक ईमानदार और कर्मवान हाथों ने सम्भाला था, उनके इन्ही गुणों के कारण वो निष्पक्ष भाव से प्रेम पाते भी थे. प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद वे भोड़सी में अपने आश्रम में रहे, इनसे इनकी पार्टी के आलावा विपक्षी भी सलाह करते थे .

चंद्र शेखर सिंह की मृत्यु 

उनके 80 वे जन्मदिन के एक हफ्ते बाद ही 8 जुलाई 2007 को चंद्रशेखर की मृत्यु हो गयी थी।

बहुत समय पहले से ही वे बहुत सी बीमारियों से जूझ रहे थे और मई महीने से ही वे नयी दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती थे।

उनके कुल दो बेटे थे।बहुत सी भारतीय पार्टियों और भारत सरकार ने उन्हें श्रद्धांजलि भी डी और देश में सात दिनों तक का शोक जारी रखने का आदेश भी दिया।

उनकी मृत्यु के बाद पुरे सम्मान के साथ 10 जुलाई को यमुना नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

अगस्त में उनकी अस्थियो को सिरुवनी नदी में विसर्जित किया गया था।

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