12-geography

bihar board class 12th geography notes | द्वितीयक क्रियाएँ

bihar board class 12th geography notes | द्वितीयक क्रियाएँ

[ Secondary Activities ]
भौगोलिक शब्द तथा परिभाषाएँ
●औद्योगिक प्रदेश अथवा संकुल (Industrial regions or complex)-जब एक जैसे
अथवा एक-दूसरे से अंत: संबंध उद्योगों का एक गुच्छा या समूह विकसित होता है तो उसे
औद्योगिक संकुल कहते हैं ।
●उद्योग (Industy)-वे क्रियाएँ जिनमें प्राथमिक व्यवसाय (कृषि, पशुपालन, खनन, मत्स्य
ग्रहण) के उत्पादों को तकनीकी का प्रयोग करके संसाधित किया जाता है और अधिक
उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है ।
●पूँजीवादी अर्थव्यवस्था (Capitalist Economy)-इस अर्थव्यवस्था के अंतर्गत उतपादन
के साधनों पर वैयक्तिक स्वामित्व होता है ।
●साम्यवादी अर्थव्यवस्था (Socialist Economy)-इस अर्थव्यवस्था में स्वामित्व सार्वजनिक
होता है । अतः उद्योगों पर भी स्वामित्व सरकार का होता है ।
●मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy)-इस अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक एवं निजी
क्षेत्रों का सह-अस्तितव माना जाता है ।
●विनिर्माण (Manufacturing)-हाथों अथवा मशीनों द्वारा वस्तुओं को बनाने का प्रक्रम ।
●उत्पादन लागत (Input)-श्रम, पूँजी, शक्ति और कच्चे माल के रूप में होने वाले व्यय
को लागत मूल्य या उत्पादन लागत कहते हैं ।
उत्पादन (Output)-किसी उद्योग के अंदर तैयार किए गए पदार्थ को उत्पादन कहते हैं।
●पेट्रो कैमिकल (Petro chemicals)-रासायनिक पदार्थ जो कि कोयला, प्राकृतिक गैस या
पेट्रोल पर अवलंबित होते हैं, उन्हें पेट्रो कैमिकल कहते हैं ।
●निजी क्षेत्र (Private Sector)-धन, संपत्ति या उद्योग, जिस पर किसी व्यकित विशेष का
स्वामित्व होता है।
●सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector)-धन-संपत्ति या उद्योग, जिस पर समस्त समाज का
स्वामित्व होता है।
●राष्ट्रीय उद्योग (National Industries)-उद्योग जो कि किसी देश की सरकार द्वारा
स्थापित किए जाते हैं।
●बहुराष्ट्रीय उद्योग (Multinational Industries)-ऐसे उद्योग जो कि विदेशी सहायता
द्वारा चलाए जाते हैं।
● कृषि-आधारित उद्योग (Agro-based Industries)-ऐसे उद्योग जो कृषि से प्राप्त कच्चे
माल पर आधारित रहते है।
● लघु उद्योग (Small Scale Industries)-उद्योग जो कि छोटी पूँजी व मशीनों द्वारा चलाए
जाते हैं।
● कुटीर उद्योग (Cottage Industries)-यह उद्योग मानव श्रम व स्थानीय कच्चे माल पर
आधारित होते हैं।
●भारी उद्योग (Heavy Industries)-वे उद्योग जो कि प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त माल रे
बड़े-बड़े कारखानों में बड़े-बड़े विशेषज्ञों द्वारा चलाए जाते हैं ।
●आधारभूत उद्योग (Basic Industries)-जिन उद्योगों के उत्पादों (मशीनों,उपकरणों) को
अन्य उद्योगों में प्रयोग किया जाता है, आधारभूत उद्योग कहलाते हैं । जैसे लोहा-इस्पात
उद्योग रासयन उद्योग।
●विनिर्माण उद्योग (Manfacturing Industries)- श्रम विभाजन तथा मशीनों के
अधिक-से-अधिक प्रयोग द्वारा उत्पादन ।
●पेट्रो रसायन उद्योग (Petro Chemical Industries)-वे उद्योग जिनमें अशुद्ध पेट्रोलियम
के शोधन से विभिन्न उत्पादन बनाए जाते हैं ।
●विनिर्माण (Manufacturing) -संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विनिर्माण जैविक तथा अजैविक
पदार्थों का एक नये उत्पाद के रूप में यांत्रिक तथा रासायनिक परिवर्तन है चाहे यह कार्य
शक्तिचालित मशीन से अथवा हाथ से सम्पन्न किया गया हो ।
●उपभोक्ता वस्तु उद्योग (Consumer Goods Industries) : वे उद्योग जिनका तैयार माल
सीधे उपभोग किया जाता है, जैसे- चीनी, खाद्य तेल, चाय, ब्रेड आदि उद्योग।
●संयुक्त क्षेत्र के उद्योग (Joint Sector Industries)-इसमें निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों का
सहअस्तित्व होता है।
●हल्के उद्योग (Light Industries)-वे उद्योग जिनमें कच्चे माल की आवश्यकता कम होती
है तथा उनका कच्चा माल हल्का व कम परिमाण वाला होता है। जैसे- घड़ी उद्योग, खिलौना
उद्योग।
पाठ के कुछ तथ्य
●इन उद्योगों को प्रशिक्षित और अत्यन्त कुशल श्रमिक तथा प्रतिभाशाली व्यक्ति चलाते हैं व
कहीं भी स्थापित किए जा सकते हैं -स्वच्छंद
●नगरों के बाहर बनाई गई बस्तियों को कहते हैं -औद्योगिक बस्तियाँ
●वे उद्योग जिनके उत्पादों का प्रयोग अन्य उद्योगों द्वारा अन्य प्रकार के उत्पादन प्राप्त करने
के लिए किया जाता है । -आधारभूत उद्योग
●उच्चावच, जलवायु, कच्चा माल, ऊर्जा स्त्रोत तथा परिवहन उद्योगों की अवस्थिति के
कौन-से कारक हैं? -भौतिक कारक
●ऐसे रसायन जिसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस या इन दोनों के उत्पादों से प्राप्त किया
जाता है। -पेट्रो रसायन
●जिस उत्पादन में कम्प्यूटर से डिजाइन बनाए जाते हैं तथा उसमें परिवर्तन भी जल्दी जल्दी
किए जाते हैं उसे कहते हैं-लोचनीय उत्पादन
●दो उद्योग जो कृषि से प्राप्त उत्पादों पर निर्भर करते हैं -चीनी तथा सूती वस्त्र उद्योग
●उद्योग जो उन उतपादों का निर्माण करते हैं जिन्हें सीधे उपभोग के लिए प्रयोग किया
जाता है।-साबुन, टेलीविजन, वस्त्र निर्माण आदि
●विकास की प्रक्रिया में किस विद्वान ने सबसे पहले पाँच घटी आकृतियों की बात की ?
-डब्ल्यू. ओलोन्सो, 1980
●अल्पविकसित तथा विकासशील देशों की ओर किस प्रकार के उद्योगों का स्थानान्तरण हो
रहा है?-निम्न प्रौद्योगिकी युक्त श्रम प्रधान उद्योगों का
●एक प्रौद्योगिक नगर जो फ्रेंडरिक र्टमन के कार्यों का प्रतिफल है जहाँ उच्च प्राद्योगिक युक्त
पार्क का विकास हुआ ।-सिलिकान घाटी संयुक्त राज्य अमेरिका में
एन. सी. ई. आर. टी. पाठ्यपुस्तक एवं कुछ अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Question)
प्रश्न 1. निम्नलिखित पर लगभग 30 शब्दों में टिणणी लिखिए :
(i) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग, (ii) विनिर्माण, (iii) स्वच्छंद उद्योग।
Write a short note on the following in about 30 words:
(i) High-Tech industry, (ii) Manufacturing, (iii) Footloose industries.
उत्तर-(i) उच्च प्रोद्यौगिकी उद्योग : उच्च तकनीक विनिर्माझा में सबसे नवीन विधि है। गहन
खोज और विकास के द्वारा अग्रिम इंजनियरिंग को समझा जाता है।
व्यवसायिक (सफेद कालर) कामगार कुल कार्यशक्ति का एक बड़ा भाग है। ये उच्च
विशेषज्ञ वास्तविक उत्पादक है। रावोटिक, कम्प्यूटरजीवन आकृति और विनिर्माणशोधन प्रक्रिया का इलैक्ट्रोनिकस नियंत्रणमय रसायनिक और फार्मास्युटिल उत्पाद उच्च तकनीक उद्योग के उदाहरण है।
उच्च तकनीक उद्योग जो प्रादेशिक रूप से स्थापित है सतत पोषणीय और उच्च विशिष्ट
को टेकनोपोलस कहते हैं । सिलीकन घाटी इसका उदाहरण हैं ।
(ii) विनिर्माण-वं क्रियाएँ जिनमें प्राथमिक व्यवसाय जैसे कृषि, पशुपालन, खनन आदि के
उत्पादों को तकनीकों का प्रयोग करके संसाधित किया जाता है और अधिक उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है । ऐसी प्रक्रियायें विनिर्माण उद्योग कहलाती हैं । उदाहरण के लिए, कपास को कच्चे माल के रूप में सूती वस्त्र उद्योग में प्रयोग करके वस्त्र उत्पादन किया जाता है ।
संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार, विनिर्माण उद्योग में शक्तिचालित मशीनों अथवा हाथ
द्वारा जैविक तथा अजैविक पदार्थों का एक नए उत्पादन के रूप में यांत्रिक तथा रासायनिक
परिवर्तन है।
(iii) स्वच्छंद उद्योग-विगत कुछ दशकों में उच्च प्रौद्योगिक क्रियाओं का तीव्रता से विस्तार
हो रहा है । अत्यंत परिष्कृत उत्पादों को विकसित करने में वैज्ञानिक शोध का बहुत योगदान होता है । ये उद्योग अपने उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप बड़ी तेजी से सुधारते हैं तथा उच्च कुशलता प्राप्त श्रमिकों को भर्ती करते हैं । ऐसे उद्योगों को स्वच्छंद उद्योग कहते हैं क्योंकि वे अवस्थिति का चुनाव करने में अपेक्षाकृत स्वतंत्र होते हैं ।
स्वच्छंद उद्योगों की अवस्थिति के चुनाव के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं :
(i) स्वच्छंद उद्योग सामान्यतया कच्चे माल के स्थान पर वस्तुओं का उत्पादन अवयवों का
उपयोग करके करते हैं । ये हल्के उद्योग होते हों।
(ii) इन उद्योगों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता सामान्य विजली में पूर्ण हो जाती है।
(iii) इन उद्योगों से प्राप्त अंतिम उत्पाद छोटे आकार के होते हैं ।
(iv) इन उद्योगों की अवस्थिति परिवहन के साधन विशेषकर सड़क मार्ग के समीप होती है।
(v) इन उद्योगों को आवासीय क्षेत्र के निकट स्थापित किया जा सकता है।
प्रश्न 2. औद्योगिक ध्रुव किसे कहते हैं ?
(What is technopole ?)
उत्तर : उच्च प्रौद्योगिक क्रियाकलापों के अवस्थितिकी प्रभाव विकसित औद्योगिक प्रदेशों में
पहले ही देखने को मिल रहे हैं । सर्वाधिक ध्यान देने योग्य प्रौद्योगिक संकुल या प्रौद्योगिक ध्रुव
का उदय होना । एक प्रौद्योगिक ध्रुव एक संकेन्द्रित क्षेत्र के भीतर अभिनव प्रौद्योगिकी व उद्योगों से सम्बन्धित उत्पादन नियोजित विकास है।
एक प्रौद्योगिकी ध्रुव में विज्ञान अथवा प्रौद्योगिकी पार्क, विज्ञान नगर तथा दूसरे उच्च तकनीकी
औद्योगिक संकुल सम्मिलित किए जाते हैं ।
प्रश्न 3. बड़े पैमाने पर लगाए जाने वाले उद्योग विभिन्न स्थितियों का चुनाव क्यों करते हैं ?
(Why do large-scale industries choose different locations ?)
उत्तर-बड़े पैमाने के उद्योगों में उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है । कच्चा माल भी अधिक
मात्रा में तथा भारी होता है । इसलिए इन उद्योगों की अवस्थिति कच्चे माल के समीप ही होती
है । उत्पादन की दृष्टि से भी ये उद्योग बाजार के समीप होते हैं जिससे भारी सामान के परिवहन में खर्च कम आए । शक्ति के साधनों की उपलब्धता भी इन उद्योगों की अवस्थिति को प्रमाणित करती है।
प्रश्न 4. द्वितीयक क्रियाकलाप किसे कहते हैं ?
(What is meant by secondary/ activities ?)
उत्तर-वे आर्थिक क्रियाएँ जिनमें प्राथमिक व्यवसाय जैसे कृषि, पशुपालन, खनन आदि से
प्राप्त उत्पादों को शक्तिचालित मशीनों द्वारा अथवा हाथ द्वारा अधिक उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित किया जाता है। इन्हें द्वितीयक क्रियाकलाप इसलिए कहा जाता है कयोंकि द्वितीयक क्रियाकलापों द्वारा प्राथमिक उत्पादों का कच्चे माल के रूप में प्रयोग करके द्वितीयक प्रकार के उत्पाद प्राप्त किए जाते हैं।
प्रश्न 5. उद्योगों के वर्गीकरण के आधार क्या हैं ?
(What are the bases of classifying Industries ?)
उत्तर-उद्योगों के वर्गीकरण के आधार निम्नलिखित हैं :
(i) आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण-कुटीर उद्योग, छोटे पैमाने के उद्योग तथा
बड़े पैमाने के उद्योग ।
(ii) उत्पादों के स्वरूप के आधार पर-आधारभूत उद्योग तथा उपभोक्ता उद्योग ।
(iii) कच्चे माल के उपयोग के आधार पर-कृषि पर आधारित उद्योग तथा खनिजों पर
आधारित उद्योग ।
(iv) स्वामित्व के आधार पर-निजी उद्योग, सार्वजनिक उद्योग तथा संयुक्त प्रबंध के उद्योग ।
प्रश्न 6. आधारभूत तथा उपभोक्ता उद्योग के दो-दो उदाहरण दीजिए।
(Give two examples each of basic and consumer goods industries.)
उत्तर-आधारभूत उद्योग-लोहा तथा इस्पात व मशीनी उपकरण उद्योग ।
उपभोकता उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक के रूप में आर्थिक
दूरी का क्या महत्त्व है ? आर्थिक दूरी को निर्धारित करने वाले तीन कारक बताएँ ।
(What is the importance of economic distances in the form of a factor to affect the location of industries? Name three factors determining the economic distances.)
उत्तर-उद्योगों की स्थापना करना आसान नहीं है। यह सिर्फ कि.मी. के रूप में दिखाई जाने
वाली भौतिक दूरी का ही प्रश्न नहीं है । यह वस्तुओं के स्थानान्तरण में लगने वाली परिवहन लागत तथा समय से सम्बन्धित प्रश्न है । आर्थिक दूरी निम्नलिखित कारकों से निर्धारित होती है-
1. परिवहन के साधन, 2. माल का प्रकार, 3. मालभाड़ा ।
एक निर्माणकर्ता का प्राथमिक कार्य आर्थिक दूरी को कम करना होता है । इसलिए परिवहन
के साधन उद्योगों की अवस्थिति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Question)
प्रश्न 1. लोहा तथा इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहा जाता है ?
(Why is iron and steel industry called a basic industry ?)
उत्तर-लोहा इस्पात उद्योग आधुनिक सभ्यता की आधारशिला है । लोहा तथा इस्पात से बने
विभिन्न उत्पादों का उपयोग मशीन तथा औजार बनाने के लिए किया जाता है जो अन्य उद्यागों
में प्रयोग किए जाते हैं । देश में यातायात तथा परिवहन के साधन, रेलगाड़ियाँ, पानी के जहाज
तथा मोटर गाड़ियाँ, लोहा व इस्पात से बनाई जाती हैं । भारी तथा हल्के हर प्रकार के उद्योगों
में लोहे और इस्पात का प्रयोग होता है । किसी देश के उद्योग के विकास का मापदंड लौह तथा
इस्पात उद्योग है । इसलिए इस उद्योग को आधारभूत उद्योग कहते हैं ।
प्रश्न 2. छोटे पैमाने के उद्योग पर एक टिप्पणी लिखो।
(Write a short note on small sxale industries.)
उत्तर-छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industries)-वे उद्योग जो कम पूँजी द्वारा
छोटे आधार पर चलाए जाते हैं, छोटे पैमाने के उद्योग कहलाते हैं । ये उद्योग कुटीर उद्योग की
अपेक्षा अधिक स्थान घेरते हैं । इन उद्योगों में आधुनिक मशीनों के प्रयोग के साथ-साथ मानवीय श्रम भी प्रयोग किया जाता है परंतु बड़े पैमाने के उद्योगों की अपेक्षा यहाँ पूँजी व श्रम का उपयोग कम होता है । ये उद्योग कम मात्रा में कच्चे माल का प्रयोग करते हैं और तैयार माल भी कम मात्रा में ही बाहर निकालते हैं । स्थानीय क्षेत्र से कच्चा माल उपलब्ध न होने पर दूर स्थित स्थानों से प्राप्त किया जाता है । तैयार उत्पाद को बाहर के बाजार में भेजा जाता है। विकासशील देशों में इन उद्योगों का महत्त्व काफी अधिक है क्योंकि ये उद्योग बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं। भारत व चीन जैसे देशों में कपड़े, खिलौने, फर्नीचर, खाद्य तेल तथा चमड़े की वस्तुएँ इन्हीं उद्योगों में तैयार की जाती हैं ।
प्रश्न 3. संयुक्त राज्य अमेरिका में पेट्रो रसायन संकुल अधिकतर तटों पर स्थित क्यों हैं ?
(Why petro chemical complexes in the USA are located on the coasts ?)
उत्तर-पेट्रो रसायन उद्योग अधिकतर परिष्करणशालाओं के समीप ही स्थापित किए जाते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका अधिकतर परिष्करणशालाएँ तटों के समीप ही स्थित हैं कयोंकि यहाँ
इनको सभी सुविधाएँ जो ढाँचागत होती हैं मिल जाती हैं । बड़े-बड़े टैंकरों के आविष्कार तथा
पाइप लाइनों द्वारा पेट्रोलियम के परिवहन में सुविधा के कारण पेट्रोल परिष्करणशालाएँ तथा पेट्रो रसायन उद्योग बाजार के निकट तथा पत्तनों पर स्थापित हो रहे हैं । संयुक्त राज्य अमेरिका में तेल टैंकरों द्वारा विदेशों से आयात किया जाता है । ये टैंकर समुद्र तट पर ही ठहर सकते हैं।
इसलिए इन टैंकरों से तेल लेने के लिए परिष्करणशालाएँ भी तट पर स्थापित की जाती हैं ।
प्रश्न 4. धातु उद्योगों तथा अधातु उद्योगों में क्या अंतर है ?
(Distinguish between metallic industries and non-metallic industries.)
उत्तर-धातु उद्योगों तथा अधातु उद्योगों में निम्न अंतर है-
धातु उद्योग (Metallic Industries)-जिन उद्योगों में विभिन्न प्रकार की धातुओं को कच्चे
माल के रूप में प्रयोग किया जाता है, धातु उद्योग कहलाते हैं । ये दो प्रकार के होते हैं : लौह
धातु तथा अलौह धातु उद्योग।
अधातु उद्योग (non-metallic industries)-ऐसे उद्योग जो अधात्विक खनिजों पर
आधारित होते हैं उन्हें अधातु उद्योग कहते हैं । कोयला, पेट्रोलियम, गंधक आदि इसके
उदाहरण हैं।
प्रश्न 5. कुटीर उद्योग तथा बड़े पैमाने के उद्योगों में क्या अन्तर है ?
(Distinguish between cottage industry and large sclae industry.)
उत्तर-
             कुटीर उद्योग (Cattage Industry)
(i) कुटीर उद्योग दक्षता के आधार पर परिवार के सदस्यों द्वारा चलाए जाते हैं । यह दक्षता
पारिवारिक सम्पत्ति होती है।
(ii) इसके उत्पादों से परिवार की आवश्यकता पूरी की जाती है । अधिशेष उत्पादों को
स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है ।
(iii) इनमें स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग किया जाता है । तथा इनमें उत्पादन भी छोटे स्तर पर होता है।
(iv) इनमें उत्पादन साधारण औजार एवं उपकरणों की सहायता से किया जाता है परंतु अब
सुधरे एवं सक्षम उपकरणों का प्रयोग होने लगा है।
(v) ये उधोग किसानों की आय के स्त्रोत होते हैं। इनको किसान कृषि कार्यो से फुर्सत के
समय करता है।
(vi) इन उद्योगों का स्थापन घर में ही होता है जो ऊर्जा साधन एवं परिवहन साधन से प्रभावित नहीं होता।
(vii) कुटीर उद्योग आज के औद्योगीकरण की  आधारशिला माने जाते हैं।
(viii) रस्सी बनाना,टोकरी बनाना, ऊन कातना, चटाई बनाना आदि कुटीर उद्योगों के उदाहरण हैं।
               बड़े पैमाने के उद्योग (Large Scale Industry)
(i) इस प्रकार के उद्योग बहुत बड़े आकार में अधिक पूँजी लगाकर स्थापित किए जाते है।
(ii) इन उद्योगों में भारी मशीनों का प्रयोग किया जाता है तथा श्रमिक भी अधिक होते हैं।
(iii) इनका प्रबन्धन पदानुक्रम आधारित तथा जटिल होता है।
(iv) इन उद्योगों में बहुत बड़े संसाधन आधार की आवश्यकता होती है।
(v) इनमें वस्तुओं का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
(vi) इन उद्योगों में बने उत्पादों का बाजार न केवल उस देश में ही होता है अपितु इसका
विदेशो को निर्यात किया जाता है ।
(vii) इन उद्योगों में विकास के लिए अनेक ढाँचागत सुविधायें जैसे रेल परिवहन की
सुविधा, बैकिंग सुविधा आदि का होना आवश्यक है।
(viii) लोहा तथा इस्पात उद्योग, मोटरकार उद्योग आदि इसके उदाहरण हैं ।
प्रश्न 6. निरूद्योगीकरण एवं पुनरूद्योगीकरण में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
(Distinguish between dindustrialisation and reindustrialisation.)
उत्तर-निरूद्योगीकरण (Dindustrialisation)-विनिर्माण उद्योगों के ह्रास को निरूद्योगीकरण
कहा जाता है । निरुद्योगीकरण की प्रक्रिया विकसित देशों में अनेक कारकों का परिणाम है।
(i) विनिर्माण उद्योगों में मनुष्य के स्थान पर मशीनों का प्रयोग बढ़ना ।
(ii) विदेशों में अत्यंत सस्ती दरों पर उत्पन्न औद्योगिक उत्पादों की प्रतिस्पर्धा ।
(iii) नई मशीनों के निवेश में कमी के कारण इन उतपादों का मूल्य अधिक होना ।
(iv) उच्च योग्यता प्राप्त लोगों द्वारा तृतीयक तथा चतुर्थक क्षेत्र के कार्यों को वरीयता देना ।
(v) उच्च ब्याज दर तथा विदेशों से खरीदी जाने वाली वस्तुओं का और अत्यधिक
महँगा होना।
पुनरूद्योगीकरण (Reindustrialisation)-इससे तात्पर्य नए उद्योगों के कुछ खंडों का
विकास करना है । विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ उद्योगों का ह्रास हुआ है । अत्यधिक विकसित
देशों में पुनरूद्योगीकरण की निम्न विशेषताएँ हैं-
(i) उच्च प्रौद्योगिक फर्मो जैसे इलैक्ट्रोनिक्स के सामान का उत्पादन करने वाली फर्मो की वृद्धि।
(ii) ऐसी नई फर्म जो बहुधा उच्च कुशलता वाले कम श्रम के आधार पर विनिर्माण की
स्थापना करती हैं।
(iii) नई फर्म जो अपेक्षाकृत अल्प औद्योगिक क्षेत्रों में अथवा महानगरों के सीमांतों पर
आधारित है।
प्रश्न 7.निरूद्योगीकरण के क्या प्रभाव हैं ?
(What are the effects of deindustrialisation ?)
उत्तर-(i) विनिर्माण उद्योग का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान कम होने लगता है ।
(ii) विनिर्माण उद्योग में उत्पादन, निर्यात, पूंजी निवेश और सेजगार के अवसर कम हो जाते हैं।
(iii) सबसे अधिक प्रभाव रोजगार पर पड़ता है ।
(iv) यू. के. में निर्यात के स्थान पर वस्तुओं का आयात बढ़ाया ।
(v) बड़े नगरों के उत्पादन केन्द्रों का महत्त्व घट गया ।
(vi) अर्थव्यवस्था में बहुराष्ट्रीय और राष्ट्रीय निगमों का महत्त्व घट गया ।
(vii) पूर्णकालिक नौकरियों के स्थान पर अल्पकालिक नौकरियों के अवसर बढ़ गए ।
(viii) प्रशिक्षित लोग अर्थव्यवस्था के तृतीयक और चतुर्थक क्षेत्रों में अधिक रोजगार पाने लगे।
प्रश्न 8. सिलिकॉन घाटी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।
(Write a short note on Silicon Valley.)
उत्तर-सिलिकॉन घाटी का विकास फ्रेडरिक टर्मन के कार्यों का प्रतिफल है । फ्रेडरिक टर्मन
एक प्रोफेसर थे। बाद में वे कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष बने । वर्ष
1930 में टर्मन ने अपने इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को उसी क्षेत्र में रहकर अपने कारखानों को स्थापित करने को प्रोत्साहित किया । आज यह विश्व की सबसे बड़ी इलैक्ट्रॉनिक फर्म है।
सन् 1950 के दशक के अंत में टर्मन ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय को ऐसी ही नवीन उच्च
तकनीकी फर्मों के लिए एक विशेष औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए राजी किया । इसमें उच्च तकनीकी इलैक्ट्रोनिक्स का सतत् सम् जारी है । उदाहरण के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में जैव प्रौद्योगिकी में कार्यरत संपूर्ण रोजगार का एक-तिहाई भाग कैलिफोर्निया में स्थित है।
सिलिकॉन घाटी प्रौद्योगिक ध्रुवों का विकास दूसरे देशों में भी हुआ है । ये प्रौद्योगिकी ध्रुव इन
विभिन्न देशों में वृहत महानगरों-नगरों के आसपास ही केंद्रित हैं।
सफलता की कुंजी-(i) सिलिकॉन घाटी में उच्च तकनीकी उद्योगों की सफलता का रहस्य
विश्वविद्यालयों में शोधकार्य तथा उच्च तकनीकी क्रियाओं के मध्य गहरा सम्बन्ध है।
(ii) नवीन उच्च प्रौद्योगिकी जहाँ आपस में एक-दूसरे से सहजीव सम्बन्ध बनाती हैं वहीं
विश्वविद्यालयों के शोध विभागों में भी उनके गहरे सम्बन्ध होते हैं।
(iii) मुख्य कार्यकर्ता भी शीर्प विश्वविद्यालयों, प्राद्योगिक संकुलों को सहयोग प्रदान करते हैं।
(iv) इससे नए उद्योगों को रोजगार, बाजार तथा सामाजिक सांस्कृतिक क्रिया-कलापों का
अवसर भी मिलता है।
प्रश्न 9. लचीला उत्पादन और लचीला विशिष्टीकरण में क्या अन्तर है ?
(Dsitinguish between flexible production and Flexible specialisation.)
उत्तर-
              लचीला उत्पादन (Flexible production)
(i) इसमें स्वचालित मशीनों का उपयोग किया जाता है जिनकी सहायता से किसी डिजाइन
में तीव्र परिवर्तन करना संभव होता है।
(ii) लोचयुक्त उत्पादन कुछ ऐसे उत्पादनों की विशेषता है जिसमें उत्पादन संगठन अधिक
लचीले तरीके से होता है।
(iii) इसमें कम्प्यूटर द्वारा मशीनें नियंत्रित की जाती हैं जिससे समय के साथ निर्माण में
परिवर्तन किया जा सके।
(iv) लोचदार उत्पादन का एक बहुत प्रचलित स्वरूप ‘जस्ट इन टाइम’ प्रणाली है। इसमें
उत्पादन के अवयवों को कारखानों में एकत्रित नहीं किया जाता अपितु उन्हें माँग
के अनुसार कारखानों में लाया जाता है ताकि अगले कुछ समय में ही उत्पादन की
आवश्यकता पूरी की जा सके।
(v) जापान के टोयोटा नगर में टोयोटा कार विनिर्माण उद्योग इस प्रकार के लोचयुक्त
उत्पादन का विशिष्ट उदाहरण है।
                लचीला विशिष्टीकरण (Flexiblespecilistion)
(i) यह एक ऐसा लोचदार उतपादन तंत्र है जिसमें ऊर्ध्वाकार और क्षैतिज दोनों ही
प्रकार की सहलग्नता सम्मिलित है । अर्थात् पहले स्तर पर अवयवों का उत्पादन है
तथा दूसरे स्तर पर उनका संकलन है ।
(ii) लोचयुक्त विशिष्टीकरण से तात्पर्य क्षतिज तथा ऊर्ध्वाकार दोनों ही प्रकार की सहलग्नता
है जिसमें सहलग्नताओं का एक अंर्तफर्म जाल है । इस प्रकार यह एक जटिल प्रक्रिया है।
(iii) इस प्रकार की प्रणाली में एक प्रकार के उद्योग की अनेक इकाइयाँ कुछ विशिष्ट
वस्तुओं के उत्पादन में संलग्न होती हैं ।
(iv) इस प्रणाली में अधिक लोचनीयता कार्य के विभिन्न विशिष्ट फर्मो में गतिमान करने
की सुविधा के कारण आती है। जैसे व्यापार करने वाली किसी एक निजी इकाई
को सामान की आपूर्ति करने का एक आर्डर मिला है और वह इकाई एक साथ
सारा सामान देने में असमर्थ है तो वह आपनी सहयोगी इकाई से सामान लेकर
आर्डर की आपूर्ति कर सकती है।
(v) इस प्रकार लोचयुक्त विशिष्टीकरण में एक संस्था अपने अनुबंध के आधार पर
अपनी सहयोगी संस्था से अनुबन्ध के लिए स्वतंत्र होती है।
प्रश्न 10. संसार के उद्योगों को उनके आकार के आधार पर किन तीन वर्गों में वर्गीकृत
किया गया है ? प्रत्येक वर्ग की एक विशेषता लिखिए ।
(Name three groups of industries of the world classified on the basis of
their size and write one characteristic of each group. )
उत्तर-आकार के आधार पर उद्योगों को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-
(i). छोटे पैमाने के उद्योग (small scale industries)
(ii) बड़े पैमाने के उद्योग (Large scale industries)
(iii) कुटीर उद्योग (Cottage industries)
विशेषताएँ(Characteristics)-
(i) छोटे पैमाने के उद्योगों में कम पूँजी की आवश्यकता होती है तथा मानवीय श्रम अधिक प्रयोग किया जाता है ।
(ii) बड़े पैमाने के उद्योगों में भारी उत्पाद तैयार किए जाते हैं । अधिक पूँजी और मशीनों
की आवश्यकता होती है।
(iii) कुटीर उद्योगों में स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग करके उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया
जाता है।
प्रश्न 11. कुटीर तथा लघु उद्योगों में अंतर बताइए ।
(Distinguish between cottage and small scale industries.)
उत्तर-
             कुटीर उद्योग (Cattage Industries) )
(i) कुटीर उद्योग दक्षता के आधार पर परिवार के सदस्यों द्वारा चलाए जाते हैं । यह
दक्षता परिवारिक सम्पत्ति होती है।
(ii) इनके उत्पादों से परिवार की आवश्यकता पूरी की जाती है । अधिशेष उत्पादों को
स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है।
(iii) इनमें स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग किया जाता है।
(iv) इनमें उत्पादन छोटे स्तर पर होता है ।
(v) इनमें उत्पादन साधारण औजार एवं उपकरणों की सहायता से किया जाता है परंतु अब
कुछ सुधरे एवं सक्षम उपकरणों का प्रयोग होने लगा है।
(vi) ये उद्योग किसानों की आय के स्रोत होते हैं । इनको किसान कृषि कार्यों से फुर्सत
के समय करता है।
(vii) इन उद्योगों का स्थापन घर में ही होता है जो ऊर्जा साधन एवं परिवहन साधन से
प्रभावित नहीं होता।
(viii) कुटीर उद्योग आज के औद्योगीकरण की आधारशिला माने जाते हैं ।
(ix) रस्सी बनाना, टोकरी बनाना, ऊन कातना, चटाई बनाना आदि कुटीर उद्योगों के
उदाहरण हैं।
                लघु उद्योग (Small Scale Industries)
(i) लघु उद्योग श्रमिकों की सहायता से चलाए जाते हैं।
(ii) इनके उत्पादों को व्यापारी के माध्यम से बाजारों में बेचा जाता है ।
(iii) इनमें स्थानीय कच्चा माल उपलब्ध न होने पर दूर से मँगाया जाता है ।
(iv) इनमें उत्पादन मध्यम स्तर पर होता है।
(v) इनमें उत्पादन छोटी-छोटी ऊर्जा चालित मशीनों से किया जाता है।
(vi) ये उद्योग छोटे-छोटे उद्योगपतियों द्वारा चलाए जाते हैं।
(vii) इन उद्योगों का स्थापन घर से बाहर किया जाता है जो ऊर्जा साधन एवं परिवहन
साधनों से प्रभावित होते हैं।
(viii) लघु उद्योग कुटीर उद्योग का विस्तृत रूप हैं।
(ix) कपड़े बनाना, कागज का सामान, मिट्टी के बर्तन, खिलौने, बिजली एवं इलैक्ट्रॉनिक का
सामान आदि लघु उद्योग के उदाहरण हैं।
प्रश्न 12. आधुनिक औद्योगिक विकास की प्रक्रिया के संदर्भ में सन 1980 में डब्ल्यू.
अलोंसो द्वारा अवलोकित किन्हीं चार लक्षणों की व्याख्या कीजिए ।
(Explain any four features of the process of modern industrial develop-
ment as observed by W. Alonso in 1980.)
उत्तर-डब्ल्यू. अलोंसो ने 1980 में आधुनिक उद्योगों की प्रक्रिया के संबंध में पाँच आकृतियों
की बात की है । उनका अवलोकन था कि विकास की अवधि में बहुत से लक्षण एक दिशा में
बढ़ते हुए पहले शीर्ष तथा फिर गर्त बनाते हैं । ये लक्षण इस प्रकार हैं-
(i) आर्थिक विकास दर,
(ii) सामाजिक असमानता का स्तर,
(iii) क्षेत्रीय असमानता,
(iv) स्थानीय या भौगोलिक संकेंद्रण,
(v) जनांकिकीय संक्रमण में जनसंख्या की वृद्धि ।
विकास की अवधि में ये लक्षण बढ़ते हुए शीर्ष पर पहुँच जाते हैं और फिर नीचे की ओर खिसक आते हैं । यह सही है कि ये पाँचों लक्षण एक-दूसरे से जुड़े हैं लेकिन इनमें एक साथ चढ़ाव और उतार नहीं होता । औद्योगिक विकास की पहली प्रक्रिया भौगोलिक संकेन्द्रण थी । इसके बाद आर्थिक विकास हुआ तथा इसके बाद सामाजिक और प्रादेशिक असमानताएँ दिखाई पड़ी।
प्रश्न 13. आधुनिक विनिर्माण उद्योगों की विशेषताएँ बताइए । आकार के आधार पर
उद्योगों के वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए ।
(Describe the features of modern manufacturing industries. Mention the classification on the basis of size of the industries.)
उत्तर-विशेषताएँ (Features)-(i) एक जटिल संगठन, (ii) विशिष्टीकृत श्रम, (iii) मशीनों
का उपयोग, (iv) अजैव ऊर्जा का उपयोग, (v) बड़े पैमाने का उत्पादन ।
आकार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण-(i) कुटीर उद्योग, (ii) छोटे पैमाने के उद्योग,
(iii) बड़े पैमाने के उद्योग ।।
1. कुटीर उद्योग (Cotuge industries)-यह निर्माण की सबसे छोटी इकाई है। इसमें
परिवार के सदस्य मिलकर काम करते हैं । स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग होता है तथा साधारण उपकरण प्रयोग में आते हैं । उत्पादन छोटे पैमाने पर होता है । कुम्हार, बढ़ई, लोहार आदि के कार्याकलाप कुटीर उद्योगों की श्रेणी में आते हैं ।
2. छोटे पैमाने के उद्योग (Small scale industries)-तकनीकी के आधार पर ये उद्योग
कुटीर उद्योग से भिन्न हैं । इसमें ऊर्जा से चलने वाली मशीनों तथा श्रमिकों की सहायता ली जाती है। ये उद्योग कच्चा माल बाहर से मँगाते हैं । उत्पादन अधिक होता है । माल बाहर भी भेजा जाता है । फर्नीचर, खिलौने, खाद्य तेल आदि उद्योग इसी श्रेणी में आते हैं।
3. बड़े पैमाने के उद्योग (Large scale industries)-इन उद्योगों के लिए अधिक मात्रा
में पूँजी तथा श्रम की आवश्यकता होती है । ये पूँजी प्रधान उद्योग भी कहलाते हैं । इन उद्योगों
में उत्पादन की गुणवत्ता तथा विशिष्टीकरण पर बल दिया जाता है। इनमें लोहा तथा इस्पात, पेट्रो रसायन, वस्त्र उद्योग आदि सम्मिलित हैं।
प्रश्न 14.संसार में उद्योगों की अवस्थिति के लिए कच्चा माल, श्रम तथा ऊर्जा के स्रोतों
की भूमिका स्पष्ट कीजिए ।
(Explain the role of raw material, labour and energy sources in the location of industries in the world.)
उत्तर-कच्चा माल (Raw Material)-उद्योगों की स्थापना के लिए कच्चा माल उनका
आधार है। भारी कच्चे माल के समीप ही उद्योग लगाए जाते हैं । जैसे-चीनी उद्योग, इस्पात उद्योग आदि ।
श्रम (Labour)-उद्योगों के लिए श्रमिक अनिवार्य हैं । कुछ उद्योग श्रम प्रधान होते हैं तथा
कुशल श्रम की आवश्यकता होती है । उदाहरण के लिए, मुरादाबाद का वर्तन उद्योग, एम्सटरडम का हीरा उद्योग, स्वीडन का मशीन-उपकरण उद्योग आदि ।
ऊर्जा (Energy)-मशीनों को चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा की नियमित आपूर्ति
आवश्यक है। उद्योगों को ऊर्जा के स्रोतों के निकट ही लगाया जाता है ।
प्रश्न 15. भारी रसायन उद्योगों तथा पेट्रो रसायन उद्योगों में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
(Distinguish between heavy chemical and petro chemical industries.)
उत्तर-भारी रसायन उद्योग (Heavy Chemical Industries)
रासायनिक पदार्थ जो कि खनिज अथवा औद्योगिक गौण पदार्थों पर निर्भर रहते हैं, भारी
रसायन कहलाते हैं।
उदाहरण-सल्फ्यूरिक, हाइड्रोक्लोरिक ।
पेट्रो रासायनक उद्योग (Petro Chemical Industries)
जो रसायन कोयला, प्राकृतिक गैस या पेट्रालियम पर निर्भर रहते हैं, वे पैट्रो-कैमिकल
कहलाते हैं।
उदाहरण-रासायनिक खाद, प्लास्टिक सामग्री आदि ।
प्रश्न 16. उपभोक्ता वस्तु उद्योग तथा उत्पादक वस्तु उद्योग में अंतर बताइए ।
(Distinguish between consumer goods industries and producer goods
industries.)
उत्तर-उपभोक्ता उद्योग तथा उत्पादक वस्तु उद्योग में निम्न अंतर है-
          उपभोक्ता वस्तु उद्योग (Consumer Goods Industries)
1. हम अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार की वस्तुओं का उपभोग करते हैं।
2. उद्योग जो वस्तुओं का उत्पादन प्राय: लोगों के दैनिक उपयोग के लिए करते हैं, उन्हें
उपभोक्ता उद्योग कहते हैं; जैसे-खाने के तेल, चाय, कॉफी, रेडियो, टी.वी., वस्त्र, चीनी, वनस्पति घी उद्योग आदि ।
3. इनके उत्पादों का प्रयोग सीधा उपभोग के काम आता है । उपभोक्ता उद्योग प्राय: छोटे
पैमाने तथा हल्के वर्ग के होते हैं।
          उत्पादक वस्तु उद्योग (Producer Goods Industries)
1. इन उद्योगों के उत्पादों का प्रयोग अन्य प्रकार के उत्पादन प्राप्त करने के लिए किया जाता
है; जैसे-लोहा-इस्पात उद्योग, भारी मशीनरी उद्योग ।
2. इन उद्योगों से प्राप्त मशीनें अन्य उत्पादों को बनाने के लिए प्रयोग की जाती हैं। इसलिए
इन्हें आधारभूत उद्योग भी कहते हैं ।
3. इन उद्योगों के उत्पादों का प्रयोग उसी समय नहीं होता, बल्कि वह भविष्य में उत्पादन
प्रक्रम में योगदान देता है।
प्रश्न 17. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग तथा निजी क्षेत्र के उद्योग में अंतर बताइएँ ।
(Distinguish between public sector and private sector industries.)
उत्तर-सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग तथा निजी क्षेत्र के उद्योग में अंतर
           सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग (Public Sector Industries)
1. इन उद्योगों का स्वामित्व सरकार या सरकार के किसी संगठन के पास होता है।
2. उत्पादन तथा व्यापार पर सरकार का नियंत्रण होता है।
3. इसमें पूँजी प्रायः सार्वजनिक या सरकारी होती है । ऐसे उद्योग भारतीय रेल, भिलाई,
राउरकेला, दुर्गापुर स्थित, जलयान निर्माण आदि हैं ।
4. इसमें बड़े पैमाने के उद्योग लोहा तथा इस्पात संयंत्र, एच.एम.टी. या आधारभूत उद्योग
आते हैं।
            निजी क्षेत्र के उद्योग (Private Sector Industries)
1. इन उद्योगों का स्वामित्व व्यक्ति विशेष, कुछ व्यक्तियों या कंपनी के पास होता है।
2. उत्पादन, व्यापार तथा वितरण पर व्यक्ति विशेष, फर्म या कंपनी का नियंत्रण होता है।
3. ये सरकारी हस्तक्षेप के बिना चलते हैं, इनमें अधिकतर निजी या उधार ली हुई पूँजी
होती है।
4. इसमें छोटे और बड़े सभी प्रकार के उद्योग आते हैं; जैसे, टाटा लोहा तथा इस्पात कंपनी,
बाटा शू कंपनी, बी.पी.एल. आदि उद्योग ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Question)
प्रश्न 1. अधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिधि क्षेत्रों में
ही क्यों विकसित हो रहे हैं । व्याख्या कीजिए ।
(Explain why high-tech industries in many countries are being attracted to the peripheral areas of major metropolitan centres.)
उत्तर-उच्च प्रौद्योगिक उद्योग औद्योगिक क्षेत्र अथवा प्रौद्योगिक पार्को के रूप में नगरों की
ओर आकर्षित हो रहे हैं । लंदन, पेरिस, मिलान, टोकियो आदि इसके उपरान्त हैं । महानगरों के परिधीय क्षेत्र में इनके आकर्षित होने के निम्न कारण है :
1. नगरों तथा महानगरों के सीमांत क्षेत्र में उपलब्ध विस्तृत भूमि पर एकजिली कारखानों
को स्थापित किया जा सकता है तथा भविष्य में इसके विस्तार के लिए स्थान प्राप्त हो सकता है।
2. नगरों की बाह्य सीमाओं पर भूमि का मूल्य कम होता है ।
3. बाह्य परिधि के क्षेत्र सड़क मार्गों से जुड़े होते हैं जिससे वाहनों की कारखानों तक गम्यता
रहती है।
4. बाह्य नगर परिधि पर प्रदूषण रहित पर्यावरण तथा हरित क्षेत्र का अतिरिक्त लाभ प्राप्त
होता है।
5. निकटवर्ती आवासीय क्षेत्रों से प्रतिदिन आने-जाने वाले लोगों से श्रम आपूर्ति हो जाती है
जो सस्ता भी होता है।
प्रश्न 2. प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में क्या अंतर है ?
(Dicfferentiate between primary and secondary activities.)
उत्तर-प्राथमिक गतिविधियाँ (Primary activities)
(i) प्राथमिक क्रियाकलाप प्राकृतिक पर्यावरण से प्राप्त संसाधनों के विकास से सम्बन्धित हैं।
(ii) मानव प्राथमिक क्रियाकलापों के द्वारा प्रत्येक रूप में वस्तुएँ प्राप्त करता है ।
(iii) धरातल से प्राप्त ये पदार्थ कच्चे माल के रूप में भोजन सामग्री बनाने, वस्त्र बनाने
तथा अन्य उपयोगी सामान बनाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ।
(iv) आखेट, संग्रहण, पशुचारण, खनन, मछली पकड़ना, लकड़ी काटना, कृषि आदि
प्राथमिक क्रियाकलाप हैं।
द्वितीयक गतिविधियाँ (Secnondary activities)
(i) द्वितीयक क्रियाकलापों से तात्पर्य मनुष्य द्वारा कच्चे माल को संसाधित करके उसे नई
वस्तुओं में परिवर्तन करने से है।
(ii) इस प्रकार के क्रियाकलापों में उद्योगों को सम्मिलित किया जाता है जो विभिन्न वस्तुओं
का निर्माण करते हैं।
(iii) इस प्रकार के क्रियाकलापों के द्वारा उत्पादों की उपयोगिता में वृद्धि होने के साथ-साथ
उनके मूल्य में भी वृद्धि होती है।
(v) विनिर्माण उद्योग, डेयरी उद्योग, कुटरी उद्योग आदि सभी क्रियाएँ द्वितीयक क्रियाकलाप हैं।
प्रश्न 3. विश्व के विकसित देशों के उद्योगों के संदर्भ में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं
की मुख्य प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए ।
(Discuss the major trends of modern industrial activities especially in the developed countries of the world.)
उत्तर-विकसित औद्योगिक देशों में आधुनिक औद्योगिक क्रियाकलापों में परिवर्तनशील
प्रवृत्तियाँ देखी गई हैं । ये परिवर्तनशील प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं :
1. उद्योगों की अवस्थिति के लिए उत्तरदायी कारकों के महत्त्व में निरंतर कमी आती जा
रही है।
2. विकसित अर्थव्यवस्था में विकास तथा वैज्ञानिक तकनीक की उन्नति के परिणामस्वरूप
उद्योगों की संरचना एवं स्वरूप में परिवर्तन आया है । निरूद्योगीकरण की प्रवृत्तियाँ उत्पन्न हो
रही हैं।
3. आधुनिक औद्योगिक क्रियाकलापों में भी कई प्रकार के परिवर्तन हुए हैं । उद्योगों में
उत्पादन के लिए उच्च तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
4. कारखानों के स्थान पर छोटी इकाइयों का बिखराव बहुत बड़े क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
विकास की प्रक्रिया में हुए परिवर्तनों की डब्ल्यू.ओलोंसो नामक अर्थशास्त्री ने 1980 में
विकास के संदर्भ में पाँच घंटी आकृतियों (five bell shapes) की बात की है । ये पाँच
आकृतियाँ हैं-
(क) आर्थिक विकास दर,
(ख) सामाजिक असमानता का स्तर,
(ग) क्षेत्रीय असमानता,
(घ) स्थानीय सकेन्द्रण का स्तर,
(ड.) जनांकिकीय संक्रमण ।
ओलोंसो के मतानुसार विकास की प्रक्रिया में पहले भौगोलिक संकेन्द्रण की प्रक्रिया थी।
इसके बाद आर्थिक विकास तथा उसके बाद सामाजिक तथा प्रादेशिक असमानता की प्रक्रिया में उतार-चढ़ाव आए ।
उद्योगों की संरचना तथा स्वरूप में परिवर्तन-
(i) अर्थव्यवस्था में विकास व प्रौद्योगिक उन्नति के फलस्वरूप उद्योगों की संरचना में परिवर्तन
आया है। उदाहरण के लिए विकासशील देशों जैसे भारत में सस्ता श्रम होने के कारण उद्योगों
का विस्तार हुआ है।
(ii) 1980 के बाद निम्न प्रौद्योगिकी युक्त श्रमिक प्रधान औद्योगिक इकाइयों को अल्पविकसित देशों की ओर निर्यात किया गया तथा विकसित देशों में उन्नत प्रौद्योगिक युक्त पुर्जे वाले उद्योगों का विकास हो रहा है । इस प्रकार के औद्योगिक परिवर्तन को नवीन अन्तर्राष्ट्रीय श्रम विभाजन कहा गया है।
प्रारम्भ में ब्राजील जर्मनी के लिए लौह अयस्क निर्यात करता था किन्तु अब ब्राजील में ही
वह उद्योग विकसित हो रहा है और जर्मनी उसके आधार पर कार जैसे उद्योग विकसित कर
रहा है।
(iii) आधुनिक औद्योगिक उत्पादनों में एक नई प्रवृत्ति लोच पूर्ण उत्पादन तथा लोचपूर्ण
विशिष्टीकरण की है।
प्रश्न 4. लोहा तथा इस्पात उद्योग तथा पेट्रो रसायन उद्योग के विश्व वितरण का वर्णन
कीजिए।
(Discribe the distribution of iron and steel and petro chemical industries in the world.)
उत्तर-लोहा तथा इस्पात उद्योग (Iron and Steel Indusry)
विवरण-लोहा तथा इस्पात उद्योग निम्नलिखित क्षेत्रों में विकसित हुआ है-
संयुक्त राज्य अमेरिका में यह उद्योग महान झीलों के क्षेत्र तथा अटलांटिक तटीय प्रदेश
में स्थित है।
पश्चिमी यूरोप में यह उद्योग सबसे पहले आरंभ हुआ । प्रमुख क्षेत्र हैं-
1.यू. के.- उत्तरी-पूर्वी तथा मध्य क्षेत्र ।
2.फ्रांस तथा बेल्जियम-लारेन क्षेत्र ।
3.जर्मनी – रूस तथा सार क्षेत्र ।
4. रूस के यूराल, कुजवास तथा मास्को-तुला क्षेत्र
5. स्वतंत्र राष्ट्रकुल के देश-यूक्रेन
6. भारत -छोटा नागपुर
7. जापान -होन्शू द्वीप तथा क्यूशू का उत्तरी भाग
पेट्रो रसायन उद्योग (Petro chemical industry) )
वितरण (Distribution):
संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.)-इस उद्योग के संकुल समुद्री तट पर स्थापित किए गए
हैं । ये फिल्डेल्फिया, शिकागो, टोलेडो डेलावेयर तथा एंजिल्स में हैं।
यूरोप (Europe)-यूरोप में पेट्रो रसायन उद्योग निम्न स्थानों पर स्थापित हैं-1. उत्तरी सागर
तथा इंगलिश चैनल के तटीय क्षेत्र : एंटवर्प, रोटरडम तथा साउथैम्पटन । 2. जर्मनी में रूर, सार, हैनोबर 3. फ्रांस : पेरिस ली हार्वे तथा मोर्सेल
अन्य क्षेत्र (Other Regions): 1. पश्चिमी एशिया : ईरान, सउदी अरब तथा कुवैत
2. भारत : वड़ोदरा, ट्राम्बे तथा बोंगई गांव । 3. स्वतंत्र राष्ट्रकुल के देश : रूस तथा मध्य एशियाई गणराज्य में भी पेट्रो रसायन संकुल स्थापित किए हैं।
प्रश्न 5. उद्योगों की परम्परागत अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।
(Discuss the major factors influencing the classical location of industries.)
उत्तर-उद्योगों की परम्परागत अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक :
1. भौगोलिक कारक (Geographical factors)-ये कारक निम्नलिखित हैं-
(i) भू-रचना । (ii) जलवायु । (iii) शक्ति के साधन । (iv) प्राकृतिक वनस्पति ।
2. आर्थिक कारक (Economic factors)-
(i) श्रम । (ii) कच्चा माल । (iii) पूँजी। (iv) यातायात के साधन ।
3.सामाजिक कारक (Social factors):
4.राजनैतिक कारक (Political factors):
(i) उद्योगों की सुरक्षा । (ii) सरकार की नीति ।
5. अन्य कारक।
इसका विस्तृत विवरण निम्नलिखित है-
(i) भू-रचना (Relief)-उद्योग समतल भूमि या मैदानी भागों में ही स्थापित किए जा सकते
हैं । यहाँ ऊबड़-खाबड़ भागों की अपेक्षा यातायात के साधनों की व्यवस्था अच्छी होती है।
(ii) जलवायु (Climate)-उद्योगों की स्थापना पर जलवायु का विशेष प्रभाव पड़ता है।
अधिक गर्म या अधिक ठंडे अथवा अधिक वर्षा वाले भाग उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल नहीं होते । यही कारण है कि सहारा अथवा भूमध्य रेखीय प्रदेशों में उद्योग स्थापित नहीं हो पाए।
गुजरात व महाराष्ट्र की आई जलवायु वस्त्र उद्योगों के लिए उपयुक्त जबकि लांस एंजिल्स में
फिल्म उद्योग स्थापित है।
(iii) शक्ति के साधन (Power Resources)-जिन स्थानों पर शक्ति के साधन कोयला
या पेट्रोलियम उपलब्ध हैं उनके समीप ही उद्योग स्थापित होते हैं । पिट्सवर्ग व जमशेदपुर के
इस्पात के कारखाने शक्ति के साधनों के समीप ही स्थापित हैं।
(iv) प्राकृतिक वनस्पति (Natural Vegetation)-उद्योगों के स्थानीयकरण में प्राकृतिक
वनस्पति का भी योगदान रहता है। कनाडा के कागज उद्योगों में वनस्पति का बड़ा योगदान है।
(v) श्रम (Labour)-किसी भी उद्योग के लिए श्रम आवश्यक है । श्रम की उपलब्धता पर
उद्योग स्थापित होते हैं । मुम्बई और अहमदाबाद के उद्योगों की स्थापना श्रम की उपलब्धि पर
ही निर्भर है । स्विट्जरलैंड में घड़ी उद्योग वहाँ के कुशल श्रम पर ही निर्भर करता है।
(vi) कच्चा माल (Raw Material)-उद्योगों के लिए कच्चा माल एक आधारभूत
आवश्यकता है। कच्चे माल की उपलब्धता पर ही उद्योग विकसित होते हैं। जैसे पश्चिम बंगाल
का जूट उद्योग।
(viii) यातायात के साधन (Means of Transport)-यातायात के साधन उद्योगों के लिए
एक जीवन रेखा की तरह कार्य करते हैं कच्चे माल अथवा तैयार माल को एक स्थान से दूसरे
स्थान ले जाने के लिए प्रचुर यातायात के साधन आवश्यक हैं । यातायात के साधनों के कारण
जापान, पश्चिमी यूरोप तथा संयुक्त राज्य अमेरिका आदि में औद्योगिक प्रगति हुई है ।
(ix) बाजार की सुविधा (Market Facility)-उत्पादित वस्तु को उपभोक्ता तक पहुँचाने
के लिए बाजार का होना आवश्यक है। ब्रिटेन तथा जापान इस प्रकार के उदाहरण प्रस्तुत करते
हैं । इनके उद्योग विशेषकर विदेशी बाजार पर ही टिके हैं ।
(x) देश में प्रचलित दशाएँ (Conditions prevailing in the country)-उद्योगों का
विकास उस देश की साकाजिक दशाओं पर भी निर्भर करता है । उदाहरण के लिए भारत में
महिलायें साड़ी पहनती हैं । इसलिए साड़ियों के कारखाने अधिक हैं।
(xi) राजैतिक स्थिरता भी उद्योगों के विकास में आवश्यक है।
प्रश्न 6. अफ्रीका में अपरिमित प्राकृतिक संसाधन हैं फिर भी औद्योगिक दृष्टि से यह
बहुत पिछड़ा महाद्वीप हैं समीक्षा कीजिए ।
(Africa has immense natural resources and yet it is industrially the most backward continent. Comment.)
उत्तर-यह सही है कि अफ्रीका प्राकृतिक साधनों में धनी है लेकिन औद्योगिक दृष्टि से वह
पिछड़ा हुआ है । खनिज पदार्थों में उत्तरी अफ्रीका में अल्जीरिया मोरक्को तथा टूयूनिशिया में लोहा मिलता है। जिम्वावे में लोहा के भंडार हैं । इसी प्रकार जायरे जाम्बिया में विश्व के सबसे अधिक ताँबे के भंडार हैं । अफ्रीका में वन क्षेत्र भी विस्तृत है लेकिन खनिज भंडार अथवा अन्य प्राकृतिक साधनों में धनी होने के कारण अफ्रीका महाद्वीप उद्योग दृष्टि से पिछड़ा हुआ है । इसके कई कारण हैं।
1. जलवायु (Eliments)-अफ्रीका के अधिकतर भाग में विषम जलवायु पाई जाती है ।
सहारा मरूस्थलीय जलवायु में आने वाले देश अधिक तापमान तथा गर्म पवनों के कारण पिछड़े हुए हैं । इसी प्रकार जिन भागों में भूमध्यरेखीय जलवायु मिलती है उन क्षेत्रों में विषम परिस्थितियों के कारण उद्योग विकसित नहीं हो पाये । जायरे तांबा धनी है लेकिन वह अपने खनिज का निर्यात करता है।
2. उच्च प्रौद्योगिकी की अनुपलब्धता के कारण भी अफ्रीका के देशों में उद्योग विकसित नहीं
हो पाये । दक्षिणी अफ्रीका अपने खनिज हीरों का निर्यात करता है। अन्य देशों में ऊर्जा के साधन होते हुए भी ये देश अपने संसाधनों को उच्च प्रौद्योगिकी की कमी के कारण विकसित नहीं कर पाये ।
3. परिवहन साधनों का अर्थ (Means of Transport)-अफ्रीका देशों में विषम जलवायु,
उच्चावच के कारण परिवहन साधन विकसित नहीं हैं।
4. कुशल श्रम (Skilled Labour) अफ्रीका के जिन देशों में खनिज पदार्थों की अधिकता
है। उन क्षेत्रों में कुशल श्रमिक की अनपलब्धता के कारण वे देश अपने उद्योगों को विकसित
नहीं कर पाये।
प्रश्न 7. “संसार के अधिकांश लोहा तथा इस्पात केंद्र समुद्रतटीय भागों में स्थित हैं।”
यह बात कहाँ तक सत्य है?
(“Most of the iron and steel centres of the world are located near the
coasts.” How far this statement is true ?)
उत्तर-लोहा तथा इस्पात उद्योग के लिए धातु पिटने, साफ करने और उसे विभिन्न आकारों
में बदलने के लिए काफी मात्रा में कोयले की आवश्यकता पड़ती है। कोयला भारी और वजनी
 पदार्थ है । इसको लौह अयस्क के स्थान पर ले जाकर इस्पात बनाने से इस्पात का उत्पादन मूल्य बढ़ जाता है । इसलिए कोयले को लोहा क्षेत्र में भेजकर उद्योग चालू करने की अपेक्षा लोहे को कोयला क्षेत्र से स्थानांतरति करके उद्योग की स्थापना की गई। इसके अतिक्ति इस्पात निर्माण के लिए लोहे की अपेक्षा कोयले की उससे लगभग ढाई गुना अधिक आवश्यकता पड़ती है । अत: लोहे को कोयला क्षेत्र में पहुँचाकर उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता पड़ी।
कार्बोनीफैरस युग में अटलांटिक व प्रशांत महासागरों के तटीय भाग जंगलों से आच्छादित
थे। कालांतर में ये जंगल चट्टानों की तहों के अंदर दब गए और आंतरिक गर्मी और दबाव के
कारण ये जंगल चट्टानों की तहों के अंदर कोयले में परिवर्तित हो गए । इसी कारण से संसार
के कोयला प्रदेश समुद्रतटीय भागों में पाए जाते हैं । ये ही कोयला प्रदेश आर्थिक लाभ की भावना के कारण इस्पात के औद्योगिक केंद्र बन गए ।
कोयले के समुद्रतटीय भागों में निक्षेप के अलावा वर्तमान समय तटीय भागों की ओर
उद्योगों के स्थानांतरण का एक कारण यह भी है कि ये भाग विदेशी बाजार के विस्तार में सहायक होते हैं । उत्पादित माल को समुद्री यातायात द्वारा बाहर भेजा जा सकता है और कच्चा माल आदि मँगाया जा सकता है क्योंकि समुद्री यातायात स्थलीय यातायात से सस्ता और सरल है । ग्रेट ब्रिटेन के न्यूकैसिल, साउथ वेल्स, स्काटलैंड व बर्मिघम क्षेत्रों में स्थापित उद्योग समुद्री यातायात का पूरा-पूरा लाभ उठा रहे हैं । यही बात जापानी उद्योगों के लिए भी लागू है । जापान के सभी औद्योगिक संकुल समुद्रतटीय भागों में स्थित हैं ।
अमेरिका के झील प्रदेश के इस्पात केंद्र जैसे : शिकागो, गेरी, डेट्रायट आदि झील तथा सेंट
लारेंस मार्गो द्वारा अटलांटिक महासागर से संयुक्त हैं । इसी प्रकार हडसन-मोहन गैप द्वारा पिट्सबर्ग व क्लीवलैंड आदि औद्योगिक नगरों को भी अटलांटिक से मिला दिया गया है ।
इसके अलावा चीन में शंघाई, आस्ट्रेलिया में न्यूकासिल, कनाडा में हेमिल्टन, यू.एस.ए. में
सेन फ्रांसिस्को व ग्रेट ब्रिटेन में न्यूकासिल, ग्लास्गो और एडिनबरा आदि ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि संसार के अधिकांश इस्पात उद्योग समुद्रतटीय भागों में ही स्थापित हो गए हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Answer Type Question)
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए :
(Choose the right answer from the four alternatives given below):
प्रश्न 1. निम्न में से कौन-सी एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत
होता है?
(क) पूँजीवाद
(ख) मिश्रित
(ग) समाजवाद
(घ) इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 2. निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है ?
(क) हुगली के सहारे जूट के कारखाने सस्ती जल यातायात की सुविधा के कारण
स्थापित हुए।
(ख) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग हैं ।
(ग) खनिज तेल एवं जल विद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों को अवस्थिति कारक के
रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है।
(घ) पत्तन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है।
प्रश्न 3. निम्न में से कौन सा एक प्रकार का उद्योग अन्य उद्योग के लिए कच्चे माल
का उत्पादन करता है?
(क) कुटीर उद्योग
(ख) छोटे पैमाने के उद्योग
(ग) आधारभूत उद्योग
(घ) स्वच्छंद उद्योग ।
उत्तर
1. (क) 2. (ग) 3. (ग)
भौगोलिक कुशलताएँ
प्रश्न 1. मानचित्रावली की सहायता से संसार के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित की
स्थिति दिखाईए : (With the help of an atlas, locate the following places on an outline map of the world 🙂
(i) ग्रेट लेक क्षेत्र में लौह एवं इस्पात केंद्र ।
(The iron and steel centres in the Great Lakes region)
(ii) एंटवर्प, रोटरडम तथा साउथैम्पटन के पेट्रो रसायन संकुल ।
(The petrochemical complexes at Antwerp, Rotterdam and Southampton. )
(iii) सिलिकॉन घाटी । (The Silicon Vallay.)
उत्तर-

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