8TH SST

bihar board 8 geography solution | एशिया

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bihar board 8 geography solution | एशिया

एशिया
पाठ का सारांश:-  आकाशवाणी के प्रसारण में नारायण मित्तल समाचार सुना रहे थे “विश्व के नक्शे पर दक्षिणी सूडान नामक एक सम्प्रभु देश का उदय हुआ है। यह अफ्रीका महादेश का 54वाँ देश है।” राजू ने जैसे ही यह समाचार रेडियो पर सुना, उसके मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे। वह तुरंत अपनी दीदी से तरह-तरह के सवाल पूछने लगा—यह महादेश क्या होता है और भारत किस महादेश में है ? दीदी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया-विशालतम भू-भाग जहाँ विभिन्न प्रकार की भौगोलिक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं-महादेश कहलाता है।
सामान्यत: कई देश इसके अन्तर्गत आते हैं। हमलोग एशिया महादेश में रहते हैं। एशिया विश्व का सबसे बड़ा महादेश है । इस महादेश में विश्व की सर्वाधिक आबादी रहती है। पृथ्वी के स्थल भाग का लगभग 30% हिस्से पर एशिया महादेश का विस्तार है। विश्व की आबादी की 60% जनसंख्या यहाँ रहती है। इतनी जानकारी हासिल करने के बाद राजू अपनी ऊँगलियों पर जोड़-घटाव कर उसने विश्व की सर्वाधिक आबादी लगभग 400 करोड़ बताया। फिर राजू की दीदी ने इन बातों की जानकारी के लिए उसे काफी सराहा और तब फिर एशिया के मानचित्र को दिखाकर उसकी चौहदी के बारे में पूछने लगी। राजू दीवार पर टंगे मानचित्र के पास जाकर खडा हो गया और बताया कि एशिया के पूरब में प्रशांत महासागर, पश्चिम में यूरोप और अफ्रीका महादेश तथा दक्षिण में हिन्द महासागर और उत्तर में आर्कटिक महासागर है। इस पर राजू की दीदी ने शबाशी देते हुए उसे आगे बताने को कहा। राजू भी उत्साहपूर्वक बताने लगा-“लाल सागर और स्वेज नहर एशिया को अफ्रीका महादेश से अलग करते हैं। यूरोप से यह प्रधानतः यूराल पवर्तमाला द्वारा अलग होता है। एशिया को यूरोप से अलग करने वाले में डारडानोलिस जलसंधि, बास्पोरस जलसंधि, मारमारा सागर, काला सागर, कैस्पियन सागर, यूराल नदी आदि हैं।” एशिया महादेश पूर्वी गोलार्द्ध में भूमध्य रेखा से उत्तरी आर्कटिक महासागर तक फैला हुआ है। यह 10° दक्षिण से 80° उत्तर अक्षांश तथा 20° पूर्वी देशान्तर से पूरब दिशा की ओर अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पार करते हुए 170° पश्चिमी देशांतर तक फैला है। एशिया महादेश का आकार विशालकाय है, इसलिए यहाँ भौतिक और जलवायु संबंधी विविधता पायी जाती है।
यही कारण है कि यहाँ सांस्कृतिक-विविधता को प्राचीनकाल से ही पनपने और विकसित होने का मौका मिला है। एशिया महादेश की जलवायु में काफी विविधता है। समुद्र से अधिक दूरी के कारण समुद्र के सम प्रभाव का अभाव महाद्वीपता कहलाती है। इसमें जाड़ा अधिक ठंढा और गरमी अधिक गरम होती है । इसमें दैनिक व वार्षिक तापान्तर अधिक होता है तथा समुद्र से दूरी के कारण नमी युक्त हवाएँ यहाँ तक पहुँचते-पहुँचते शुष्क हो जाती है, इसलिए यहाँ वर्षा अपेक्षाकृत कम होती है।
अभ्यास के प्रश्न
I. बहुवैकल्पिक प्रश्न-
सही विकल्प को चुनें-
(i) एशिया के पूरब में है-
(क) प्रशांत महासागर   (ख) यूरोप
(ग) हिंद महासागर
(घ) लाल सागर
(ii) संसार की छत कहलाती है-
(क) तिब्बत का पठार (ख) माउंट एवरेस्ट
(ग) पामीर का पठार
(घ) यूराल पर्वतमाला
(iii) एशिया के दक्षिणी भाग की जलवायु है-
(क) शीतोष्ण
(ख) उष्ण
(ग) मरुस्थलीय
(घ) विषुवतरेखीय
(iv) सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है-
(क) ब्रुनेई
(ख) ईरान
(ग) कम्बोडिया
(घ) इंडोनेशिया
(v) हांगहो नदी घाटी सभ्यता विकसित हुई-
(क) चीन में
(ख) भारत में
(ग) ईरान-इराक में
(घ) मिस्र में
उत्तर-(i) (क) प्रशांत महासागर
(ii) (क) तिब्बत का पठार
(iii) (ख) उष्ण
(iv) (ख) ईरान
(v) (क) चीन में।
II. सही मिलान करें-
(1) रेडियर                           फिलीपीन
(2) कोणधारी वृक्ष                  क्यूराइल
(3) ठंडी जलधारा                 टुंड्रा प्रदेश
(4) त्योहारों का देश             उत्तर एशिया
(5) घास का मैदान                  टैगा
(6) साइबेरिया                      स्टेपी
उत्तर-
(1) रेडियर                   टुंड्रा प्रदेश
(2) कोणधारी वृक्ष          टैगा
(3) ठंडी जलधारा          क्यूराइल
(4) त्योहारों का देश       फिलीपीन
(5) घास का मैदान           स्टेपी
(6) साइबेरिया              उत्तर एशिया
III. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें (अधिकतम 50 शब्दों में)-
1. एशिया महादेश की चौहद्दी बताएँ।
उत्तर-एशिया के पूरब में प्रशांत महासागर, पश्चिम में यूरोप और अफ्रीका महादेश तथा दक्षिण में हिन्द महासागर और उत्तर में आर्कटिक महासागर है।
2. एशिया को यूरोप से अलग करने वाले प्राकृतिक कारकों के नाम लिखें।
उत्तर-एशिया को यूरोप से अलग करने वाले प्राकृतिक कारक हैं—डारडानेलिस जलसंधि, बास्पोरस जलसघिं, मारमारा सागर, काला. सागर, कैस्पियन सागर, यूराल नदी ।
3. ‘सभ्यताओं का पलना’ एशिया को क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-दजला-फुरात नदी घाटी में मेसोपोटामिया की सभ्यता (इराक), सिंधुघाटी की सभ्यता (भारत, पाकिस्तान), हांगहो नदी घाटी सभ्यता (चीन), ये सभी एशिया महादेश में ही विकसित हुए । इतनी सारी सभ्यताओं का एक महादेश में उत्थान और पतन एक अभूतपूर्व घटना है इसलिए एशिया को ‘सभ्यताओं का पलना’ कहा जाता है।
4. एशिया महादेश में कृषि निर्वहन का प्रमुख साधन है। कैसे?
उत्तर-एशिया महादेश में कृषि निर्वहन का प्रमुख साधन है। क्योंकि यहाँ कृषक समाज ने परम्परागत कृषि और आधुनिक कृषि के तरीकों को समन्वित रूप से अपनाया है। धान यहाँ की प्रमुख फसल है।
IV. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें। (अधिकतम 200 शब्दों में)-
1. एशिया विविधताओं से भरा प्रदेश है। कैसे?
उत्तर-एशिया महादेश की जलवायु में काफी विविधता है। इसी महादेश में सर्वाधिक ठंडा प्रदेश और सर्वाधिक गर्म प्रदेश तो पड़ता ही है। सबसे आई और सबसे शुष्क क्षेत्र भी पाये जाते हैं। इस महादेश का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार बहुत अधिक है। समुद्र तट से स्थलीय भाग की दूरी काफी है। इसलिए महाद्वीपता की स्थिति पाई जाती है। एशिया के उत्तरी भाग की जलवायु अत्यंत ठंडी है। रूस में स्थित बरखोयान्सक का तापमान तो -90° तक पहुँच जाता है।
सबसे गर्म प्रदेश मित्रावा, कुवैत एशिया में ही है, लेकिन दक्षिणी क्षेत्र की जलवायु खुशनुमा है। यहाँ अधिकांशतः गर्मी का मौसम रहता है। दक्षिण-पूर्व एशिया में मानसूनी जलवायु पायी जाती है। जबकि दक्षिण में भूमध्य रेखा के समीप विषुवतीय जलवायु पायी जाती है। सितम्बर में यहाँ भीषण तूफान चलते हैं, जिसे ‘टायफून’ कहते हैं।
2. एशिया महादेश की आबादी विशाल है। क्यों?
उत्तर-एशिया महादेश में सर्वाधिक जनसंख्या पाये जाने के कारण ही इसे ‘मानव का घर’ (Home of man) कहा जाता है। जीवन प्रत्याशा भी एशिया महादेश के जापान में सबसे अधिक पायी जाती है। इस महादेश में विश्व की सर्वाधिक आबादी रहती है । पृथ्वी के स्थल भाग का लगभग 30% हिस्से पर एशिया महादेश का विस्तार है । विश्व की आबादी की 60% जनसंख्या यहाँ रहती है।
3. एशिया की सांस्कृतिक प्रदेशों के बारे में लिखिए।
उत्तर–विभिन्न धर्मावलंबी दर्शन और सम्प्रदाय यहाँ की संस्कृति की विशेषता है। विश्व के सभी धर्मों की उत्पत्ति इसी महादेश की धरती से हुई है। हिन्दू-मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध मतावलंबियों की प्रमुखता, विश्व की प्राचीन सभ्यताओं का विकास इसी महादेश की नदी-घाटियों में हुआ है। दजला-फुरात नदी घाटी में मेसोपोटामिया की सभ्यता (इराक), सिंधु घाटी की सभ्यता (भारत, पाकिस्तान), हांगहो नदी घाटी सभ्यता (चीन) ये सभी एशिया महादेश में ही विकसित हुए। इतनी सारी सभ्यताओं का एक महादेश में उत्थान और पतन एक अभूतपूर्व घटना है इसलिए तो एशिया महादेश को सभ्यताओं का पलना कहा जाता है। इस महादेश को कई सांस्कृतिक प्रदेशों में बाँटा गया है।
(i) पूर्वी एशिया—इसके अंतर्गत, चीन, जापान, उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया जैसे महत्वपूर्ण देश हैं । ऐतिहासिक रूप से इस सम्पूर्ण इलाके में चीन का प्रभाव रहा है। यहाँ बौद्ध धर्म और माओवाद की प्रभुता है।
(ii) दक्षिण एशिया-इस क्षेत्र के प्रमुख देश भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान एवं श्रीलंका है। यहाँ लोगों की वेशभूषा एवं खान-पान में भी अन्तर देखा जाता है।
(iii) दक्षिण-पूर्वी एशिया:-इसके अंतर्गत म्यांमार, फिलीपीन, थाइलैंड, लाओस, कंपूचिया, मलेशिया, सिंगापुर, पूर्वी तिमूर, ब्रूनेई और इंडोनेशिया आता है। दक्षिण-पूर्वी एशिया से यह प्रदेश इस्लाम और इसाई धर्म से बहुत अधिक प्रभावित है।
(iv) पश्चिम एशिया-यह क्षेत्र इस्लाम, ईसाई, जूडिज्म का ऐतिहासिक जन्म-स्थल रहा है। यहाँ का खाना विविध और गरिष्ठ है। यहाँ का साहित्य भी बहुत धनी है।
(v) मध्य एशिया-इस प्रदेश में मुख्यतः पहले के सोवियत समाजवादी गणराज्य के पाँच प्रदेश सम्मिलित हैं—कजाकिस्तान, खिराजिस्तान, ताजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तर्कमेनिस्तान ।
मध्य एशिया का ऐतिहासिक महत्व सिल्क रूट के कारण बढ़ जाता है।
उत्तर एशिया:-यह साइबेरिया का भौगोलिक, क्षेत्र है। यहाँ प्रतिकूल स्थिति के कारण जनसंख्या विरल है। ट्रांस-साइबेरियन रेलवे और खनन कार्यों से यहाँ पर आधुनिक जीवन-शैली का प्रभाव पड़ा है।

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