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bihar board 9th class science solutions | गुरुत्वाकर्षण

bihar board 9th class science solutions | गुरुत्वाकर्षण

                                 क्रियाकलाप 10.1
● धागे का एक टुकड़ा लीजिए। इसके एक सिरे पर एक छोटा पत्थर बाँधिए।
● धागे के दूसरे सिरे को पकड़िए और पत्थर को वृत्ताकार पथ में घुमाइए जैसा कि
चित्र 10.1 में दिखाया गया है।
चित्र: पत्थर के टुकड़े को धागे में बांँधकर घुमाता हुआ एक लड़का।
उत्तर-●धागे को छोड़े जाने से पूर्व पत्थर स्थिर चाल से वृत्तीय कक्षा में गति करता है
तथा अपनी कक्षा के प्रत्येक बिंदु पर उसकी गति की दिशा बदलती रहती है। दिशा में परिवर्तन
के कारण उसके वेग तथा त्वरण में भी परिवर्तन होता है। इस त्वरण को आकर्षित करने तथा
पत्थर को वृत्तीय कक्ष में घुमाते रहने वाला बल उसकी केंद्र की ओर कार्य करता है। इस बल
को केंद्राभिसारी बल कहते हैं।
● जब धागा को छोड़ दिया जाता है अर्थात्, केंद्राभिसारी बल की अनुपस्थिति में पत्थर
सीधी रेखा में गति शुरू कर देता है। यह सीधी रेखा वृत्तीय पथ पर एक स्पर्श रेखा होती है।
                         पाठ्य पुस्तकीय प्रश्नों के उत्तर (पृष्ठ 149)
प्रश्न 1. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम बतावें।
उत्तर-गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम-
विश्व का प्रत्येक पिंड हर एक अन्य पिंड को एक बल से आकर्षित करता है। यह बल
दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफलों के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के
व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है।
   चित्र : किन्हीं दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल उनके केन्द्रों को मिलाने
                      वाली रेखा की दिशा में निदेशित करता है।
जहाँ M तथा m पिंड A तथा B का द्रव्यमान है, एक-दूसरे से दूरी; F दोनों पिंडों के बीच
आकर्षण बल; और G एक आनुपातिकता स्थिरांक है।
प्रश्न 2. पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले
गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
                            Mxm
   उत्तर-        F= G ——–
                             d×d
यह वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र है।
                                क्रियाकलाप 10.2
प्रश्न-● एक पत्थर लीजिए।
● इसे ऊपर की ओर फेंकिए।
(i) पत्थर का क्या होता है? क्यो?
(ii) स्वतंत्र रूप से गिरना क्या है ?
उत्तर-(i) जब पत्थर को ऊपर फेंका जाता है तो एक खास ऊंँचाई प्राप्त करने के बाद
यह गिरना शुरू कर देता है। ऐसा गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है।
(ii) जब कोई वस्तु पृथ्वी की और गिर रही होती है तो उसे हम स्वतंत्र रूप से गिरना कहते हैं।
                                 क्रियाकलाप 10.3
प्रश्न-कागज की एक शीट तथा एक पत्थर लीजिए। दोनों को किसी इमारत की पहली
मंजिल से एक साथ गिराइए। देखिए, क्या दोनों धरती पर एक साथ पहुंँचते हैं।
(i) आप क्या देखते हैं? अपने निरीक्षण का कारण दीजिए।
(ii) एक शीशे की जार जिससे हवा को पूरी तरह निकाल दिया गया है, उसमें इस
प्रयोग को दोहराने पर क्या होगा?
उत्तर-(i) हम देखते हैं कि पत्थर से कुछ देर बाद कागज का टुकड़ा जमीन पर पहुंँचती
है। ऐसा हवा से होकर गिरने के कारण होता है। वस्तु के साथ घर्षण के कारण, हवा वस्तु की
गति का विरोध करती है। यह विरोध पत्थर की तुलना में कागज के टुकड़े के प्रति अधिक है।
साथ ही हवा टुकड़े को इधर-उधर घुमा भी सकती है।
(ii) यदि इस प्रयोग को हवा रहित किसी शीशे की जार में दोहराया जाय तो कागज का
टुकड़ा तथा पत्थर दोनों समान दर से नीचे गिरेंगे।
                        पाठ्य पुस्तकीय प्रश्नों के उत्तर (पृष्ठ 152)
प्रश्न 1. मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-जब भी कोई वस्तु गिरती है वह वस्तु मुक्त पतन में होती हैं। क्योंकि वे पृथ्वी के
आकर्षण अर्थात् गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी की ओर खींचती है। ऐसी वस्तु पर गुरुत्वीय त्वरण करता है।
प्रश्न 2. गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-जब वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है तो, त्वरण कार्य करता है। यह त्वरण पृथ्वी के
गुरुत्वीय बल के कारण होता है। अतः इस त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।
                     (पाठ्य पुस्तकीय प्रश्नों के उत्तर (पृष्ठ 153)
प्रश्न 1. किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अन्तर है?
उत्तर-
प्रश्न 2. किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का 1/6 गुणा भार क्यों
होता है?
उत्तर-माना कि किसी वस्तु का द्रव्यमान m है। अत: पृथ्वी पर उस वस्तु का भार,
अतः चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार पृथ्वी पर उसके भार का वा हिस्सा होता है।
                                   क्रियाकलाप 10.4
प्रश्न- ● प्लास्टिक की एक खाली बोतल लीजिए। बोतल के मुंह को एक वायुरुद्ध
डाट से बंद कर दीजिए। इसे एक पानी से भरी बाल्टी में रखिए। आप देखेंगे कि बोतल
तैरती है।
● बोतल को पानी में धकेलिए। आप ऊपर की ओर एक धक्का महसूस करते हैं।
इसे और अधिक नीचे धकेलने का प्रयल कीजिए। आप इसे और अधिक गहराई में धकेलने
में कठिनाई अनुभव करेंगे। यह दिखाता है कि पानी बोतल पर ऊपर की दिशा में एक बल
लगाता है। जैसे-जैसे बोतल को पानी में धकेलते जाते हैं, पानी द्वारा ऊपर की ओर लगाया
गया बल बढ़ता जाता है जब तक कि बोतल पानी में पूरी तरह न डूब जाए।
● अब बोतल को छोड़ दीजिए। यह उछलकर सतह पर वापस आती है।
● क्या पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल इस बोतल पर कार्यरत है? यदि ऐसा है तो
बोतल छोड़ देने पर पानी में डूबी ही क्यों नहीं रहती? आप बोतल को पानी में कैसे डुबो
सकते हैं?
उत्तर- ● छोड़े जाने पर डिब्बा ऊपर की ओर वापस उछलता है।
● पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण लगने वाला बल डिब्बे पर नीचे की ओर कार्य करता
है। किन्तु, पानी द्वारा डिब्बे पर ऊपर की ओर एक बल आरोपित होता है। फलतः डिब्बा वापस
ऊपर की ओर उछलता है।
● किसी वस्तु का भार, उस पर पृथ्वी द्वारा आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल के बराबर होता
है। जब डिब्बे को पानी में डुबाया जाता है तो पानी द्वारा डिब्बे पर ऊपर की ओर लगाया गया
बल डिब्बे की भार से अधिक होता है। यही कारण है कि डिब्बा छोड़े जाने पर, ऊपर की ओर
वापस उछलता है।
● डिब्बे को पानी में पूर्णतः डुबा हुआ रखने के लिए, पानी द्वारा डिब्बे पर ऊपर की
ओर लगने वाले बल को संतुलित करना होगा। ऐसा नीचे की आरोपित किसी बाह्य बल के द्वारा
संभव है। इस बल का मान डिब्बे के ऊपर आरोपित बल तथा डिब्बे के भार के बीच अंतर के
बराबर होना चाहिए।
                          क्रियाकलाप 10.5
प्रश्न- ● पानी से भरा एक बीकर लीजिए।
● एक लोहे की कील लीजिए और इसे पानी की सतह पर रखिए।
● देखिए क्या होता है?
उत्तर-लोहे की काँटी पानी में डूब जाती है। अर्थात् पृथ्वी द्वारा काँटी पर आरोपित
गुरुत्वाकर्षण बल इसे नीचे खींच लेता है। पानी द्वारा आरोपित उत्प्लावक बल इसे ऊपर की ओर धकेलता है। किन्तु, काँटी पर नीचे की ओर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उस पर ऊपर की ओर लगने वाले उत्प्लावक बल से अधिक होता है फलतः पानी में डूब जाती है।
                                  क्रियाकलाप 10.6
प्रश्न-● पानी से भरा बीकर लीजिए।
● एक कील तथा समान द्रव्यमान का एक कॉर्क का टुकड़ा लीजिए।
● इन्हें पानी की सतह पर रखिए।
● देखिए क्या होता है?
उत्तर-कार्क का टुकड़ा पानी में तैरेगा जबकि, लोहे की काटी डूब जायेगी। ऐसा उनके घनत्व
में अंतर के कारण होता है। (किसी पदार्थ का घनत्व, प्रति इकाई आयतन में उपस्थित पदार्थ की
मात्रा होता है) कार्क का घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है। अर्थात् पानी द्वारा आरोपित
उत्प्लावक बल, कार्क के भार से अधिक होता है। फलतः कार्क का टुकड़ा पानी में तैरता है। लोहे
की काँटी का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होता है। अर्थात् पानी द्वारा आरोपित उत्प्लावक
बल काँटी के भार से कम होता है फलतः, लोहे की काटी पानी में डूब जाती है।
                        पाठ्य पुस्तकीय प्रश्नों के उत्तर (पृष्ठ 157)
प्रश्न 1. एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को
उठाना कठिन होता है, क्यों?
उत्तर-स्कूल बैग की पट्टी पतली होने से बैग का भार कंधे के एक बहुत कम क्षेत्र पर
पड़ता है जिससे बैग उठाना मुश्किल हो जाता है।
प्रश्न 2. उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-तरल पदार्थ (गैस तथा द्रव) का वह गुण जिसके कारण किसी वस्तु को उसमें डुबाये
जाने पर वह वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल आरोपित करता है, उत्प्लावकता कहलाता है।
प्रश्न 3. पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु क्यों तैरती या डूबती है?
उत्तर-पानी के घनत्व से कम घनत्व वाली वस्तुएँ पानी की सतह पर तैरेगी जबकि, पानी
के घनत्व से अधिक घनत्व वाली वस्तुएँ पानी में डूब जायेंगी।
                                   क्रियाकलाप 10.7
प्रश्न-एक पत्थर का टुकड़ा लीजिए और इसे कमानीदार तुला या रबड़ की डोरी के
एक सिरे से बाँधिए। तुला या डोरी को पकड़ कर पत्थर को लटकाइए जैसा कि चित्र 10.3
(a) में दिखाया गया है। पत्थर के भार के
कारण रबड़ की डोरी की लंबाई में वृद्धि
या कमानीदार तुला का पाठ्यांक नोट
कीजिए। अब पत्थर को एक बर्तन में रखे
पानी में धीरे से डुबोइए जैसा कि चित्र
103 (6) में दिखाया गया है। प्रेक्षण कीजिए
कि डोरी की लंबाई में या तुला की माप
में क्या परिवर्तन होता है।
उत्तर-हम देखते हैं कि जैसे-जैसे पत्थर
के टुकड़े को पानी में धीरे-धीरे डुबाया जाता
है, तुला का पठन अथवा रबड़ की लंबाई
कम होती जाती है। हालांँकि एक बार पत्थर
का पानी में पूरी तरह डूब जाने के बाद रवड़
की लंबाई अथवा तुला के पठन में कोई
चित्र-10.3 (a) तथा (क): पत्थर लटकाने से रबड की लंबाई में आई वृद्धि, पत्थर को पानी में डुबाने
बदलाव नहीं आता। पर कम होती जाती है।
                           पाठ्य पुस्तकीय प्रश्नों के उत्तर (पृष्ठ 158)
प्रश्न 1. एक तुला (weighing machine) पर आप अपना द्रव्यमान 42kg नोट करते
हैं। क्या आपका द्रव्यमान 42kg से अधिक है या कम?
उत्तर-द्रव्यमान 42kg ही होगा क्योंकि किसी दिए हुए स्थान पर भार को ही द्रव्यमान(w∞m)
के रूप में उपयोग करते हैं।
प्रश्न 2. आपके पास एक रुई का बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने
पर दोनों 100 kg द्रव्यमान दर्शाते हैं। वास्तविकता में एक-दूसरे से भारी है और क्यों?
उत्तर-लोहे की छड़।
कारण-लोहे का घनत्व (किलोग्राम प्रति घन मीटर) (kg m-3) रुई के घनत्व से अधिक है।
                                           अभ्यास
प्रश्न 1. यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए तो उनके बीच
गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा?
उत्तर-गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियमानुसार दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण
बल उनके बीच दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
अतः वस्तु के बीच दूरी आधा करने पर उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल चार गुना
हो जाता है।
प्रश्न 2. सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती
होता है। फिर एक भारी वस्तु हलकी वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती?
उत्तर-स्वतंत्र रूप से गिरते समय प्रत्येक वस्तु त्वरण ‘g’ अनुभव करती है। इसे
        GM
 g = ——– द्वारा व्यक्त किया जाता है जहाँ, G = सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक तथा R = पृथ्वी
       R × R
 की त्रिज्या है। अतः स्वतंत्र रूप से गिरते समय, भारी वस्तु अपेक्षकृत तेजी से नहीं गिरती है।
प्रश्न 3. पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी 1kg की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल
प्रश्न 4. पृथ्वी तथा चंद्रमा एक-दूसरे को गुरुत्वीय बल से आकर्षित करते हैं। क्या
पृथ्वी जिस बल से चंद्रमा को आकर्षित करती है वह बल, उस बल से जिससे चंद्रमा पृथ्वी
को आकर्षित करता है बड़ा है या छोटा है या बराबर है? बताइए क्यों?
उत्तर-पृथ्वी चंद्रमा को उसी बल से अपनी ओर आकर्षित करती है जिस बल से चंद्रमा
पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है। क्योंकि, गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम के अनुसार, अंतरिक्ष में प्रत्येक वस्तु का दूसरे उसी बल से आकर्षित करता है जो उन वस्तुओं की मात्रा के गुणनफल का समानुपाती तथा उनके बीच दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
प्रश्न 5. यदि चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, तो पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति
क्यों नहीं करती?
उत्तर-न्यूटन की गति के तीसरे नियम के अनुसार, चंद्रमा भी पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित
करता है। किन्तु, न्यूटन की गति के दूसरे नियम के अनुसार त्वरण, वस्तु के द्रव्यमान के
व्युत्क्रमानुपाती होता है। चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी से बहुत कम है। अतः हम पृथ्वी को चंद्रमा की
ओर गति करते नहीं देखते हैं।
प्रश्न 6. दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा, यदि
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए?
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
(iii) दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दोगुने कर दिए जाएँ?
उत्तर-गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक नियम से,
                             Gxm1xm2
                         F=—————-
                                  r × r
जहाँ, m1 तथा m2 = दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान
                          r = वस्तुओं के बीच की दूरी
(i) किसी एक वस्तु के द्रव्यमान को दो गुना करने पर वस्तुओं के बीच लगने वाला बल
भी दोगुना हो जाता है।
(ii) जब वस्तुओं के बीच दूरी को दोगुना किया जाता है तो उनके बीच लगने वाला बल
एक चौथाई रह जाता है। दूरी तीन गुना करने पर बल का मान घटकर 9वांँ भाग रह जाता है।
(iii) यदि दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान दोगुना किया जाता है तो उनके बीच लगने वाला बल
चार गुना हो जाता है।
प्रश्न 7. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्व हैं?
उत्तर-सार्वत्रिक नियम के महत्त्व-
(i) हमें पृथ्वी से बाँधे रखने वाला बल है।
(ii) पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा को गति,
(iii) सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति,
(iv) चंद्रमा तथा सूर्य के कारण ज्वार-भाटा।
प्रश्न 8. मुक्त पतन का त्वरण क्या है?
उत्तर-जब भी कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है तो त्वरण उत्पन होता है। यह त्वरण
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन होता है। यही कारण है कि इसे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न त्वरण या गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। इसे ‘g’ द्वारा सूचित किया जाता है।
प्रश्न 9. पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे?
उत्तर-पृथ्वी तथा आदमी के शरीर के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल, आदमी का भार
कहलाता है।
प्रश्न 10. एक व्यक्ति A अपने एक मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना
खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत वृत्त पर अपने मित्र को देता है। क्या उसका मित्र खरीदे
हुए सोने के भार से संतुष्ट होगा? यदि नहीं, तो क्यों? (संकेत : ध्रुवों पर g का मान विषुवत
वृत्त की अपेक्षा अधिक है।)
उत्तर-नहीं, उसका दोस्त खरीदे गये सोने के भार को सही नहीं मानेगा क्योंकि, किसी वस्तु
का भार ‘g’ के मान पर निर्भर करता है। ध्रुवों पर ‘g’ का विषुवत् रेखा पर उसके मान से अधिक
होता है। अत: विषुवत् रेखा पर सोने का भार, ध्रुव पर उसके भार से कम होगा।
प्रश्न 11. एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मरोड़ कर बनाई गई गेंद से
धीमी क्यों गिरती है?
उत्तर-ऐसा हवा द्वारा घर्षण के द्वारा गिरते हुए वस्तु को गति का विरोध करने के कारण
होता है। कागज के टुकड़े के प्रति यह विरोध गोले की अपेक्षा अधिक होता है। साथ ही हवा
कागज के टुकड़े को इधर-उधर घुमा भी सकता है।
प्रश्न 12. चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की
अपेक्षा 1/6 गुणा है। एक 10 kg की वस्तु का चंद्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या
होगा?
उत्तर-किसी वस्तु का द्रव्यमान हमेशा स्थिर होता है। यह पृथ्वी अथवा चंद्रमा पर नहीं
बदलता है। अर्थात् चंद्रमा तथा पृथ्वी दोनों जगहों पर वस्तु का द्रव्यमान 10 kg होगा।
पृथ्वी पर-
अतः पृथ्वी पर वस्तु का भार 98N तथा चंद्रमा पर इसका भार 16.3 N होगा।
प्रश्न 13. एक गेंद ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 49 m/s के वेग से फेंकी जाती
है। परिकलन कीजिए।
(i) अधिकतम ऊंँचाई जहाँ तक कि गेंद पहुंँचती है।
(ii) पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया कुल समय।
.: वस्तु द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँँचाई 122.5m है। धरती पर वापस लौटने में वस्तु द्वारा लिया
गया कुल समय = 5s+5s=10s
प्रश्न 14. 19.6m ऊंँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर
पहुंँचने से पहले इसका अंतिम वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर- मीनार की ऊंँचाई = 19.6m
प्रश्न 15. कोई पत्थर ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 40 m/s के प्रारंभिक वेग से फेंका
गया है। g=10 m/s2 लेते हुए ग्राफ की सहायता से पत्थर द्वारा पहुंँची अधिकतम ऊंँचाई ज्ञात
कीजिए। नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गई कुल दूरी कितनी होगी?
उत्तर-ग्राफ से.
(i) पत्थर द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊंँचाई = 80m
(ii) वस्तु का कुल विस्थापन = 0(चूँकि वस्तु वापस धरती पर लौट आती है।)
(iii) वस्तु द्वारा तय की गई दूरी = 80 m+ 80m = 160 m
प्रश्न 16. पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है,
प्रश्न 17. कोई पत्थर 100 m ऊंँची मीनार की चोटी से गिराया गया था। उसी समय
कोई दूसरा पत्थर 25 m/s के वेग से ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका गया। परिकलन
कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहांँ मिलेंगे?
उत्तर-माना कि दोनों पत्थर । सेकंड के बाद पृथ्वी की सतह से xm की ऊंँचाई पर मिलते हैं।
मीनार के ऊपरी सिरे से गिर रहे पत्थर द्वारा तय की गई दूरी,
प्रश्न 18. ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंकी गई एक गेंद 6s पश्चात् फेंकने वाले
के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए
(i) यह किस वेग से ऊपर फेंकी गई; (ii) गेंद द्वारा पहुँची गई अधिकतम ऊंँचाई तथा
(iii) 4s पश्चात् गेंद की स्थिति।
प्रश्न 19. किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है।
उत्तर-उत्प्लावक बल वस्तु पर उदग्रतः ऊपर की ओर कार्य करता है।
प्रश्न 20. पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के गुटके को छोड़ने पर यह पानी की सतह
पर क्यों आ जाता है?
उत्तर-किसी वस्तु का भार पृथ्वी द्वारा उस पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल होता है। पर
प्लास्टिक के टुकड़े को पानी में डुबाया जाता है तो पानी द्वारा टुकड़े पर आरोपित उत्प्लावक बल
टुकड़े के भार से अधिक होता है। यही कारण है कि प्लास्टिक का टुकड़ा पानी की सतह पर
आ जाता है।
चूँकि पदार्थ का सापेक्षिक घनत्व 1 से अधिक है अतः पदार्थ पानी में डूब जायेगी।
चूँकि(पैकेट का सापेक्षिक घनत्व 1 से अधिक है अतः यह पानी में डूब जायेगा)।
(iii) ठोस वस्तु अपनी आयतन (अर्थात् 350 cm-3) के बराबर पानी विस्थापित करेगी। 350
cm3 पानी का भार 350g-wt है। अत: विस्थापित पानी का भार 350g-wt होगा।
                                                 ◆◆◆

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