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BSEB class 9th hindi notes | लालपान की बेगम

BSEB class 9th hindi notes | लालपान की बेगम

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BSEB class 9th hindi notes

वर्ग – 9

विषय – हिंदी

पाठ 4 – लालपान की बेगम

 लालपान की बेगम
           -फणीश्वरनाथ रेणु          –                   लेखक – परिचय

फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म औराही हिंगना नामक गाँव , जिला अररिया ( बिहार ) में 4 मार्च 1921 ई . को हुआ था । उनकी प्रारंभिक शिक्षा गढ़वनैली , सिमरधनी , अररिया और फारबिसगंज में तथा माध्यिमक शिक्षा विराटनगर ( नेपाल ) के विराटनगर आदर्श उच्च विद्यालय में हुई । रेणु ने 1942 ई . के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रमुख सेनानी की भूमिका निभाई । 1950 ई . में नेपाली जनता को राजशाही के दमन और अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए वहाँ सशस्त्र क्रांति और राजनीति में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया । वे दमन और शोषण के विरुद्ध आजीवन संघर्षरत रहे । सत्ता के दमनचक्र के विरोध में उन्होंने पद्मश्री की उपाधि का त्याग कर दिया था । 11 अप्रैल , 1977 ई . को उनका देहावसान हो गया ।
हिंदी कथा साहित्य में जिन कथाकारों ने युगांतर उपस्थित किया है , फणीश्वरनाथ रेणु उनमें से एक हैं । उन्होंने कथा साहित्य के अतिरिक्त संस्मरण , रेखाचित्र , रिपोर्ताज आदि विधाओं को | नई ऊंचाई दी । उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं – ‘ मैला आँचल ‘ , ‘ परती परिकथा ‘ , ‘ दीर्घतपा ‘ , ‘ कलंक मुक्ति ‘ , ‘ जुलूस ‘ , ‘ पल्टू बाबू रोड ‘ ( उपन्यास ) , ‘ ठुमरी ‘ , ‘ अगिनखोर ‘ , ‘ आदिम रात्रि की महक ‘ , ” एक श्रावणी दोपहरी की धूप ‘ , ‘ अच्छे आदमी ‘ , ( कहानी संग्रह ) , ‘ ऋणजल – धनजल ‘ , ‘ वन तुलसी की गंध ‘ ‘ श्रुत – अश्रुत – पूर्व ‘ ( संस्मरण ) ; ‘ नेपाली क्रांतिकथा ‘ ( रिपोर्ताज ) आदि ।
कहानी का सारांश
‘ लालपान की बेगम ‘ फणीश्वरनाथ रेणु रचित ग्रामीण परिवंश से जुड़ी एक चर्चित कहानी है । इस कहानी में रेणुजी ने ग्रामीण जीवन के सुख – दुख के चित्र को बड़ी खूबी के साथ अंकित किया है । कहानी की नायिका – बिरजू की माँ । कहानी के प्रारंभ में उसे एक झगड़ालू तथा क्रोधि त मनःस्थितिवाली महिला के रूप में दिखाया गया है । उसके पति ने उससे पहले ही कहा था कि आज शाम को उसे परिवार के साथ बैलगाड़ी पर बैठाकर बलरामपुर का नाच दिखाने ले जाएगा । उस दिन मीठी रोटी बनेगी । परिवार के सभी लोग बढ़िया – बढ़िया कपड़ा पहनकर नाच देखने चलेंगे । भोली – भाली बिरजू माँ काफी उल्लासित मन : स्थिति में आज के इस नाच देखने की तिथि और समय की प्रतीक्षा में थी । अब वही दिन और समय आ गया है । सरल हृदया बिरजू की माँ शकरकंद उबालकर मीठी रोटी बनाने की तैयारी कर रही है । समय निकलता जा रहा है । बिरजू के बाप के पास बैल तो है पर गाड़ी नहीं । वह गाड़ी मांगने के लिए पास के गाँव आया है । उसके लौटने में अनावश्यक विलम्ब हो रहा है । बिरजू की माँ अब सब्र खो रही है । उसकी प्रतीक्षा की मनः स्थिति अब क्रोध और खीझ में बदल रही है । वह सहुआइन के यहाँ से गुड़ लेने गई और वहाँ से लौटी अपनी बेटी पिया पर यूँ ही बिगड़ने लगती है । मखनी फुआ की पुकार भरी आवाज पर झल्लाकर उसे भला – बुरा कह बैठती है । इस गुस्से की मन : स्थिति में वह बेटे बिरजू और वहीं बँधी अपने बाँगड़ को भला – बुरा कह बैठती है । बिरजू की माँ तुनुकमिजाज है । वह गुस्से को उस मन : स्थिति में अपने दोनों बच्चों को डाँट – फटकारकर भूखे सोने की क्रोध – भरी आज्ञा देती है । वह अपने पति को भी कोसने लगती है- ” उसका भाग हीखराब है जो एसा गोबर गणेश धरवाला उसे मिला , उसे कौन – सा सुख – मौज दिया है , उसके मई ने । कोल्हू के बैल की तरह खटकर सारी उम्र बिता दी । इसके यहाँ कभी एक पैसे की जलेबी भी लाकर दी है उसके खसम ने ? उसे रह – रहकर अपने ऊपर भी गुस्सा आता है- “ वह भी कम नहीं । उसकी जीभ में आग लगे । ”
कुछ ही देर में बिरजू का बाप बैलगाड़ी लेकर आता है । बच्चे अपनी माँ के साथ तो प्रतीक्षा में थे ही । बिरजू का बाप अपनी पत्नी से इस विलंब का कारण बताता है और उसे नाच में चलने के लिए तैयार कर लेता है । बिरजू की माँ सरल हृदय महिला है । उसका क्रोध तुरंत काफूर हो जाता है । बिरजू का बाप उसके उस रूप को एकटक देखता रहता है । मानो वह लालपान को बेगम हो । चलने के क्रम में बिरजू की माँ गाँव की कुछ बहुओं को भी जो उससे डाह करती है – बैलगाड़ी पर बैठा ले जाती है । उसके मन में किसी तरह का किसी के लिए कोई मैल नहीं रह जाता । उसके मन में कोई लालसा अब नहीं ।

    पाठ के साथ

प्रश्न 1. बिरजू की माँ को ‘ लालपान की बेगम ‘ क्यों कहा गया है ?

उत्तर – बिरजू की माँ बहुत गुस्सैल प्रवृत्ति की थी ; वह दोपहर दिन और चौपहर रात बिजली की बत्ती की तरह भक – भक कर जलती है । इसीलिए जंगी को पतोहू ने बिरजू की माँ की बोली का स्वाद लेकर कमर पर घड़े को सँभालते हुए मटककर बोलती है , ‘ चल दिदिया चल । इस मुहल्ले में लालपान की बेगम बसती है । नहीं जानती – दोपहर दिन और चौपहर रात बिजली की बत्ती की तरह भक – भक कर जलती है । गुस्सैल प्रवृत्ति के कारण पान की तरह लाल हो जाती है । इसीलिए बिरजू की माँ को लालपान की बेगम कहा गया है ।

प्रश्न 2. “ नवान्न के पहले ही नया धान जुठा दिया ” इस कथन से बिरजू की माँ का कौन – सा मनोभाव प्रकट हो रहा है ?

उत्तर – गाँव – देहात में यह परंपरा है कि जब नयी फसल तैयार होती है तो सबसे पहले उसे देवी – देवताओं को चढ़ाया जाता है परन्तु बिरजू ने धान की एक बाली से एक धान लेकर मुँह में डाल लिया और उसकी माँ ने एक हल्की डाँट दी – ‘ कैसा लुक्कड़ है रे तू ! इन दुश्मनों के मारे कोई नेम – धरम जो बचे ‘ । नवान्न के पहले ही नया धान जूठा दिया । उसकी मान्यता है कि नया धान देवी – देवताओं को चढ़ाने से फसल अगले साल अच्छी होती है ।

प्रश्न 3. बिरजू की माँ बैठी मन – ही – मन क्यों कुढ़ रही थी ?

उत्तर – बिरजू की माँ नाच देखने की तिथि और समय की प्रतीक्षा में थी परन्तु समय निकलता जा रहा है । बिरजू के बाप के पास बैल तो है परन्तु गाड़ी नहीं । वह गाड़ी माँगने के लिए पास के गाँव गया है । उसके लौटने में अनावश्यक विलंब हो रहा है । बिरजू की माँ सब्र खो रही है । उसकी प्रतीक्षा को मन : स्थिति अब क्रोध और खीझ में बदल रही है । अनावश्यक विलंब होने के कारण वह बैठी मन – ही – मन कुढ़ रही थी । वह सहुआइन के यहाँ से गुड़ लेने गई और वहाँ से लौटी अपनी बेटी पिया पर यूँ ही बिगड़ने लगती है । मखनी फुआ की पुकारभरी आवाज पर वह झल्लाकर उसे भला – बुरा कह बैठती है । इस गुस्से की मन : स्थिति वह अपने बेटे बिरजू और वहीं बंधी अपने बाँगड़ को भला – बुरा कह बैठती है ।

प्रश्न 4. लालपान की बेगम शीर्षक कहानी की सार्थकता स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर – ‘ लालपान की बेगम ‘ शीर्षक कहानी में कहानी की नायिका है बिरजू की माँ । गुस्सैल प्रवृत्ति के होने के कारण वह हमेशा बिजली की बत्ती के समान भुक – भुक करती है । उसके आँख , होठ , गाल गुस्से से हमेशा लाल रहते हैं क्योंकि वह तुनुकमिजाजी भी है । लोग इसीलिए उसे लालपान की बेगम कहते हैं । चूँकि कहानी उसी के इर्द – गिर्द घूमती है इसलिए कहानी का शीर्षकउसके उपनाम पर रखा गया है जो किसी खास प्रवृत्ति का द्योतक है । गरीबी की दुखभरी , दर्द भरी जिंदगी के बीच भी मनोरंजन प्राप्त करना , आनंदपूर्ण जीवन जीना उसका लक्ष्य है । इस दृष्टि से लालपान की बेगम नाम सार्थक जान पड़ता है ।

प्रश्न 5. सप्रसंग व्याख्या करें :

” चार मन पाट ( जूट ) का पैसा क्या हुआ है , धरती पर पाँव ही नहीं पड़ते।”

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारे पाठ्य – पुस्तक गोधूलि में फणीश्वरनाथ रेणु रचित कहानी लालपान की बेगम से ली गयी हैं । इस पंक्ति का आशय यह है कि अपनी अच्छी फसल देखकर अत्यधिक खुश होना । एक तरह से यह वाक्य ईष्या और द्वेष के भाव से कहा गया वाक्य है । बिरजू की माँ के मन में रह – रहकर जंगी की पतोह की बातें चूमती हैं , भक – भक बिजली – बत्ती । चोरी – चमारी करने वाली की बेटी – पतोहू जलेगी नहीं । पाँच बीघा जमीन क्या हासिल की है बिरजू के बप्पा ने , गाँव की भाईखौकियों की आँखों में किरकिरी पड़ गई है । चूंकि कहानी के केन्द्र में गाँव है और जहाँ गरीबी है वहाँ किसी व्यक्ति की खुशी बढ़ने पर दूसरों को ईर्ष्या होना स्वाभाविक है ।   प्रश्न 6. दस साल की चंपिया जानती है कि शकरकंद छीलते समय कम से कम बारह बार माँ उसे बाल पकड़कर झकझोरेगी , छोटी – छोटी खोट निकालकर गालियाँ देगी । इस कथन से चंपिया के प्रति माँ के किस मनोभावना की अभिव्यक्ति होती है ?
उत्तर – यह कथन बिरजू की माँ की तुनुकमिजाजी एवं गुस्सैल प्रवृत्ति को दर्शाता है । जब व्यक्ति गरीबी से जूझता रहता है तो उसके लिए क्रोध कुंडली मारे हुए साँप की तरह हमेशा बैठा रहता है । तनिक भी गलती होती है तो वह तुरंत निकल पड़ता है । क्रोध एक प्रकार से अपनी कमी को दूसरों पर थोपना भी है । दूसरी तरफ चंपिया को सुधर नेक बनाने हेतु , कोई आगे गलती न करे इस हेतु भी उसपर बार – बार क्रोध करती है ।

प्रश्न 7. बिरजू की माँ का भाग ही खराब है जो ऐसा गोबर गणेश घरवाला उसे मिला , कौन – सा शौख – मौज दिया है उसके मर्द ने ? कोल्हू के बैल की तरह खटकर सारी उम्र काट दी । इसके यहाँ प्रस्तुत कथन से बिरजू के माँ और पिता के संबंधों में कड़वाहट दिखाई पड़ती है । कड़वाहट स्थाई या अस्थाई ? इसके कारणों पर विचार कीजिए ।

उत्तर- यह कड़वाहट अस्थाई है । बिरजू की माँ तुनुकमिजाजी है । वह गुस्से की उस मन : स्थिति में अपने दोनों बच्चों को डाँट – फटकारकर भूखे सोने की क्रोध – भरी आज्ञा देती है । वह अपने पति को भी कोसती है । उसे रह – रह कर अपने ऊपर भी गुस्सा आता है- “ वह भी कुछ कम नहीं । बिरजू के बाप पर गाड़ी के विलंब से लाने पर गुस्साती है । बिरजू का बाप उसे विलंब का कारण बताता है और उसे नाच के लिए तैयार कर लेता है । बिरजू का बाप उसके रूप को एकटक देखता रहता है मानो वह लालपान की बेगम हो । इस तरह का कड़वाहट ग्रामीण परिवेश में पति – पत्नी के बीच होती है और यह अस्थाई होती है । जीवन के निजी कार्य के कारण एक – दूसरे पर झिड़की , मन के कुत्सित आवेगों को शांत करना है । बिरजू को माँ से बिरजू का बाप भी बहुत प्रेम करता है।

प्रश्न 8. गाँव की गरीबी तथा आपसी क्रोध और ईर्ष्या के बीच भी वहाँ एक प्राकृतिक प्रसन्नता निवास करती है । पाठ के आधार पर बताएँ ।

उत्तर – ‘ लालपान की बेगम ‘ शीर्षक कहानी में गाँव की गरीबी के बीच क्रोध तथा ईर्ष्या का चित्रण है । गाँव के लोग गरीबी के कारण शकरकंद उबालकर खाते हैं , घास – फूस से बने मकान में रहते हैं तथा लालटेन की जगह ढिबरी जलाते हैं । गरीबी के कारण व्यक्ति में चिड़चिड़ापन , क्रोध का होना आवश्यक है । बिरजू की माँ क्रोध में मखनी फुआ से उलझ पड़ती है । अपने बेटे बिरजू तथा बेटी पिया को क्रोध में ही डाँटती तथा भला – बुरा कहती रहती है । वह क्रोध में बाँगड़पर भी उबलती रहती है । गाँव में ईर्ष्या – द्वेष भी कम नहीं । गाँव की औरत विरज की माँ से ईयां करती हैं । ईष्यां तथा चिढ़ के वश ही उसे ‘ लालपान की बेगम ‘ कहती है । फिर भी इस गरीबो , क्रोध और ईष्या के बीच गाँव में एक प्रकार की आंतरिक और प्राकृतिक प्रसन्नता वास करती है । लोगों में मेल तथा प्रेम का भाव बना रहता है । बिरजू के बाप के माँगने पर मलदहिया टोली के मियाँ – जान से गाड़ी मिल जाती है । जमींदार का बेटा बिरजू की माँ को आदर के साथ मौसी कहकर संबोधित करता है । मखनी फुआ दूसरे का घर अगोड़ देती है । बिरजू की माँ खुशी के कारण गाँव की बहू – बेटियों को गाड़ी पर बैठाकर नाच दिखाने के लिए ले जाती है । इस तरह हम देखते हैं कि गाँव की गरीबी , क्रोध और ईर्ष्या के बीच भी प्राकृतिक प्रसन्नता निवास करती।

प्रश्न 9. कहानी के पात्रों का परिचय अपने शब्दों में दीजिए ।

उत्तर – 1 . बिरजू का बाप ‘ लालपान की बेगम ‘ शीर्षक कहानी का नायक है । वह एक साधारण और सीधा – सादा किसान है । वह एक पली – भक्त , सरल हृदय पति तथा स्नेहिल पिता है । वह अपनी पत्नी की हर इच्छा की पूर्ति में तत्पर रहता है । अपने बाल – बच्चों को भी वह काफी प्यार करता है । गाँव में वह सबसे मिलकर रहता है ।
2. कहानी की नायिका है – बिरजू की की माँ । कहानी के प्रारंभ में उसे एक झगड़ालू तथा क्रोधित मन : स्थितिवाली महिला के रूप में दिखाया गया है । बात – बात पर ही गुस्सा हो जाती है वह तुनुकमिजाजी है । वह गुस्से की उस मन : स्थिति में अपने दोनों बच्चों को डाँट – फटकार कर भूखे सोने की क्रोध – भरी आज्ञा देती है । वह अपने पति को भी कोसने लगती है – उसका भाग ही खराब है जो ऐसा गोबर गणेश घरवाला उसे मिला । बिरजू की माँ सरल हृदय की महिला है । उसका क्रोध तुरंत काफूर हो जाती है । उसके मन में किसी के लिए कोई मैल नहीं है । सचमुच बिरजू को माँ एक सरल हदया ग्रामीण पत्नी , माँ तथा पड़ोसिन है ।

प्रश्न 10. रेणु वातावरण और परिस्थिति का सम्मोहक और जीवंत चित्रण करने में निपुण हैं । इस दृष्टि से रेणु की विशेषताएँ अपने शब्दों में बताइए ।

उत्तर – रेणुजी हिंदी के आंचलिक कथाकार तथा विशिष्ट कथा – शिल्पी के रूप में हमारे सामने उपस्थित होते हैं । उपन्यास और कहानी दोनों कथारूपों को अपनी मनोरम कलाकृतियों से रेणु ने गाँव की धरती का जो चित्र खींचा है वह अमिट छाप छोड़ जाता है । देश के स्वतंत्र हो जाने के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान ग्रामोत्थान की ओर गया । रेणु ने अपनी गहरी संवेदना का परिचय देते हुए गाँवों के सम्पूर्ण अंतर्विरोधों और अंगड़ाई लेती हुई चेतना को जीवंत कथा का रूप दिया है । उनके गाँव में एक तरफ पुरातन जड़ता और नवीन गत्यात्मकता की टकराहट है , विभिन्न राजनीतिक आन्दोलनों के अंतर्विरोध हैं , विरादरीवाद की कड़वाहट है तो दूसरी तरफ इनके बीच बजती हुई लोक संस्कृति की शहनाई है । रेणु ने ग्रामीण जीवन में व्याप्त हास्य और करुण , क्रूरता और सहानूभुति की मनोवृत्तियाँ , संगीतात्मकता को एक साथ समाविष्ट किया है । तुलनात्मक रूप से कहा जा सकता है उनमें एक ओर बंगला साहित्य की उच्छ्ल भावुकता है तो दूसरी ओर हिंदी क्षेत्र की ठेठ वस्तून्मुखता । यही वजह है कि जैसे सहज आत्मविश्वास से सुंदर और भदेस को रेणु ने मिलाया है वह अन्य कथा – साहित्यकारों के यहाँ दुर्लभ है ।
भाषा की बात

प्रश्न 1. निम्नलिखित लोकोक्तियों का अर्थ बताते हुए स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग करें ।

उत्तर- ( i ) आगे नाथ न पीछे पगहिया ( स्वतंत्र होना या कोई न होना ) -बिरजू की माँ के साथ आगे नाथ न पीछे पगहिया वाली कहावत चरितार्थ है।
( ii ) कथरी के नीचे दुशाले का सपना ( गरीबों के लिए सुखी जीवन की कल्पना ) -अरे ! रोटी की उम्मीद नहीं , दही कहाँ से लाएँ . ठीक ही कहा गया है कि कथरी के नीचे दुशाले का सपना ।
( iii ) धरती पर पाँव न पड़ना ( अत्यधिक खुश होना ) -उसको नौकरी क्या हो गयी उसके पाँव धरती पर न पड़ते हैं ।
प्रश्न 2. सहुआइन में ‘ आइन ‘ प्रत्यय लगा हुआ है ? आइन प्रत्यय से शब्द बनाएँ ।
उत्तर – सेठाइन , मास्टराइन ।

प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों का प्रत्यय बताएँ ।

उत्तर – पडोसिन- इन
पगहिया- इया
मुरलिया -इया
खिलखिलाहट- आहट ।

प्रश्न 4. निम्नलिखीत शब्दों के समास निर्धारित करें ।

उत्तर – रसोई – पानी –द्वन्द्व समास
पचकौड़ी –द्वन्द्व समास
मान – मनौती –द्वन्द्व समास
दीया – बाती –द्वन्द्व समास
बेटी – पतोहू– द्वन्द्व समास ।

प्रश्न 5. ” जोरू जमीन जोर के नहीं तो किसी और के ” कहावत का वाक्य – प्रयोग द्वारा अर्थ स्पष्ट करें ।

उत्तर – जमीन और सुंदर पत्नी , बल है तभी अपने पास रखें नहीं तो वह किसी शक्तिशाली के हाथ चला जाता है । विरजू ने अपने भाई की जमीन पर कब्जा कर लिया इसे ही कहते हैं जोरू जमीन जोर के नहीं तो किसी और के ।

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