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bseb 9th hindi note | निम्मों की मौत पर

निम्मों की मौत पर 

bseb 9th hindi note

वर्ग – 9

विषय – हिंदी

पाठ 10 – निम्मों की मौत पर

 ‘ निम्मों की मौत पर ‘
                                    -विजय कुमार
                   कवि – परिचय

विजय कुमार समकालीन कवि हैं । फिलहाल वे मुंबई में रहते हैं और उन्होंने झुग्गी – झोपड़ियाँ में रहनेवालों के लिए अनेक कल्याणकारी कार्य किये हैं । उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ रात – पाली ‘ है । उनकी कविताएँ जीवन और अनुभव के अप्रत्याशित विस्तारों में जाने की एक उत्कट कोशिश है । पिछले दशकों से अपने काव्य वैविध्य , भाषिक प्रयोगशीलता के कारण विजय कुमार की कविताएँ हमेशा अपने समय में उपस्थिति दर्ज कराती रही है और उसमें समकालीनता का इतिहास दर्ज होता दिखता है । समय और समकाल , भौतिक , अधिभौतिक प्रकृति और बाजार , शोषक और शोषित , पृथ्वी और उसमें अदृश्य कीड़े तक का अस्तित्व उनकी कविता में परस्पर आते – जाते , हस्तक्षेप करते , खलबली मचाते , उलट – पुलट करते एक ऐसे विस्मयकारी लोक की रचना करते हैं , जिसे देखकर पहला आश्चर्य तो यही होता है कि यहाँ कितने स्तरों पर कैसा जीवन संभव है , उसमें कितने ही आयाम हैं ।

कविता का भावार्थ

‘ निम्मो की मौत पर ‘ शीर्षक कविता समकालीन हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर विजय कुमार द्वारा रचित है । विजय कुमार उत्कट संवेदनशील और अंतर्मुखी प्रतिभा के धनी कवि हैं । इनकी कविताएँ अपने समय की उदासी , निराशा , पीड़ा से जुझती मानव मन की कविताएँ हैं । पठित कविता गहरी मानवीय करुणा उपजी कविता है ।
कवि ने महानगरों में काम करने वाली घरेलू नौकरानी की दुःख भरी मौत का चित्रणं इस कविता में किया है । कवि नौकरानी की तुलना भीगी हुई फुदकती चिड़ियाँ से करता है । नौकरानी गरीबी के कारण अंधेरे कोने में चोरों की तरह छिप कर एक सूखी रोटी तीन दिन पहले बने साग से खाती थी । कई वर्षों से उसने अपनी माँ को चिट्ठी नहीं लिखी थी । टेलीफोन के पास जाने की उसे मनाही थी ।
कवि को उसकी प्रताड़ना गाली , पिटाई , ठठे फर्श पर रात में सोना याद है । वह कहता है कि जब वह नींद में सोती थी तो मानो धरती काँप जाती थी । रोते समय वह हिचकियाँ लेती थी , उसके दुःख से उसके मायके के लोग जानते थे ।
उसे इतना कष्ट था कि हर रोज एक घाव उसके देह में कही लगता होगा जो दिखाई नहीं देता था । वह अपना दुःख किसी से नहीं कहती थी । वह प्रार्थना भी नौंद में ही करतो होगी ।
वह मात्र तीस वर्ष में इस संसार से विदा हो गई । यह उन उसे संसार से जाने को नहीं थी । उसे कम से कम अभी तीस वर्ष और जीवित रहना था । परंतु वह एक दिन रेत की दीवार को तरह भरभरा कट कर गिर गई । वह गरीबी के कारण मरी । उसके मरने में कोई रहस्य नहीं था ।
एक नौकारानी को मृत्यु पर कति ने पुरी संवेदनशीलता से चित्रित किया है । यह उसके गहरी मानवीयता का परिचय देता है ।

कविता के साथ

प्रश्न 1. निम्मी समाज के किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है ?

उत्तर – निम्मों समाज के सबसे निम्न वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है जो श्रमिक है । उसे अपने श्रम के बदले में कुछ नहीं मिलता है बल्कि यातनाएँ हो मिलती हैं । श्रमिक वर्ग को काम के बदले पूरा पारिश्रमिक तो नहीं मिलता है साथ ही कार्य में थोड़ी – सी भी गलती होने पर लानते , गाली , लात , घूसे इत्यादि खाने पड़ते हैं । निम्मों शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हुई एक नौकरानी है जिसे श्रम का उचित मूल्य नहीं मिलता ।

प्रश्न 2. कवि ने निम्मों की तुलना भीगी हुई चिड़िया से क्यों की है ?

उत्तर – कवि ने निम्मों की तुलना भीगी हुई चिड़िया से इसलिए की है क्योंकि जिस तरह भीगी हुई चिड़िया उड़ने में असमर्थ होती है , वह पंख सूखने के बाद ही अच्छी तरह से उड़ पाती है , उसी तरह की स्थिति निम्मों की है जो कितनी भी कोशिश करके भी उस दलदल से बाहर नहीं आ सकती । इसलिए कवि ने निम्मों की तुलना भीगी हुई चिड़िया से की है ।

प्रश्न 3. निम्मों को जो यातनाएं दी जाती थीं उसे कविता के आधार पर अपने शब्दों में व्यक्त करें ।

उत्तर – निम्मों को जो यातनाएं दी जाती थीं उससे महानगरों के असंवेदनशीलता का पता चलता है । निम्मों अंधेरे कोने में दुबक कर सूखी रोटी और तीन दिन पुराना साग चोरों की तरह खाती थी । उचित कार्य के बदले उचित पारिश्रमिक न मिलना शोषण है । निम्मों के साथ प्रतिदिन यही होता था । कई सालों तक उसने अपनी माता को चिट्ठी नहीं लिखी थी , न ही टेलीफोन से बात करने दिया जाता था । सभी भौतिक सुविधाएँ रहते हुए भी उससे वंचित रखना पूँजीपति वर्ग का सोच है । उसे सब काम करने के बावजूद लानतें , गालियाँ , लात , घुसे सहने पड़ते थे । मालिक गद्दी पर सोता है , उसके लिए एक चादर भी मौजूद नहीं है , वह ठण्डे फर्श पर सोती है । वह सामान्य उम्र भी नहीं जी पाती उन यातनाओं के कारण । वह रेत की दीवार की तरह भरभराकर गिर जाती है । कवि कहता है कि महानगरों में उसकी मृत्यु का कोई मतलब नहीं है । क्योंकि वह निम्नवर्ग से आती है ।

प्रश्न 4. ‘ थमी हुई हिचकियाँ उसके पीहर तक चली आती थीं ‘ से कवि का क्या अभिप्राय है ?

उत्तर – निम्मों को जो यातनाएँ , कष्ट दिये जाते थे उस कष्ट की सिसकियाँ , आवाज उसके ससुराल तक पहुँचती है । जब मनुष्य को कोई भारी दुख होता है तब हिचकियाँ आती हैं , जिसमें न ठीक से रोने की आवाज निकलती है , न ठीक से रो पाती है । उसे सब काम करने के बावजूद लानतें , गालियाँ , चूंसे सहने पड़ते थे । शहरों में निम्नवर्ग के प्रति खास दृष्टिकोण है जिसके कारण शोषण होता है । उसे न चिट्ठी लिखने दिया जाता था , न टेलीफोन करने दिया जाता था । संवादहीनता की स्थिति में व्यक्ति और कमजोर हो जाता है , वह न ठीक से रो पाता , न ठीक से कुछ कह पाता है ।

प्रश्न 5. इस कविता के माध्यम से कवि ने समाज के किस वर्ग के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट की है ?

उत्तर – शोषित वर्ग के प्रति । मुम्बई जैसे महानगरों में एक ऐसा वर्ग है जो नौकर ( दाई ) का काम करता है और पूँजीपति वर्ग को भौतिक लाभ पहुंचाता है । निम्मों जैसे नौकरानी के लिए उनके दिल में कोई जगह नहीं है । इसीलिए इनका खूब शोषण करते हैं । शोषण के कारण कईबार तो मर भी जाते हैं परन्तु उसकी मृत्यु पर कुछ असर नहीं होता । वह कौड़े – मकोड़े को मौत की तरह भुला जाती है । कवि ने इस वर्ग के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए इनकी नोटिस ली है।

प्रश्न 6. पूरी धरती पर कम्पन पसर जाने का क्या कारण है ? स्पष्ट करें ।

उत्तर – निम्मों को काम करने के बावजूद उसे लात , घूसे , गाली , बात , लानतें सहनी पड़ती थी । वह ठण्डे फर्श पर सोती थी । रात जब बीतता था तो उसका कष्ट पूरी धरती पर कम्पन की तरह मानो पसर गया हो । उसकी निरीहता , उसकी गुलामी , उसका शोषण पूरी धरती पर कम्पन पसर जाने का कारण था ।

प्रश्न 7. ‘ वह चोरों की तरह खाती रही कई बरस ‘ में कवि ने चोरों की तरह का प्रयोग किस उद्देश्य से किया है ?

उत्तर – कवि नै चोरों को तरह का प्रयोग निम्मों की निरीहता दिखलाने के उद्देश्य से किया है । निम्मों जिस घर में काम करती थी उस घर के खाने में उसे तीन दिन पुराना साग मिलता था , सूखी रोटी मिलती थी जिसे वह प्रकाशित कमरे में नहीं बल्कि अंधेरे कोने में दुबक कर खाती थी । शायद यह अपने मालिक के डर से ।

प्रश्न 8. ‘ और शायद कुछ अनकही प्रार्थनाएँ नींद में ‘ – इस पंक्ति में प्रार्थनाओं को अनकही क्यों कहा गया है ?

उत्तर – निम्मों प्रार्थना भी करती तो भी उसकी प्रार्थनाएँ सुननेवाला कोई नहीं था । वे प्रार्थनाएँ नौद में अनकही रह जाती हैं । क्योंकि उसका शोषण उसको मर्मातक पीड़ा उसके जमीर को अनुपस्थित घाव की तरह टीस देता है । वह प्रार्थना करने के लिए सोचती भी है पर वह अंदर ही रह जाती है इसलिए प्रार्थनाओं को अनकही कहा गया है ।

प्रश्न 9. ” और तीस बरस उसे रहना था यहाँ ‘ कहकर कवि हमें क्या बताना चाहता ।

उत्तर – किसी भी व्यक्ति की सामान्य आयु साठ वरस होती है परन्तु निम्मों का इतना शोषण होता है , उसे तरह – तरह की यातनाएँ दी जाती हैं कि वह तीस बरस ही जी पाती है । यह महानगरीय जीवन शैली में मनुष्य के प्रति मनुष्य का शोषण , मानव को मानव न समझने की भूल का सबसे बड़ा उदाहरण है । इसलिए कवि हमें यह बताना चाहता है कि यदि सामान्य मनुष्य को तरह निम्मों को भी सबकुछ मिलता तो वह भी तीस बरस और जीती न कि तीस बरस में ही मर जाती ।

प्रश्न 10. रेत की दीवार की तरह सहसा गिरने की क्या वजह हो सकती है ?

उत्तर – रेत की दीवार का कोई वजूद नहीं होता है क्योंकि उसमें गारा और चूना नहीं मिलाया जाता । हवा के झोंकों से ही इसका अस्तित्व बनते – बिगड़ते रहता है । निम्मों भी इसी तरह के जीवन जीने को अभिशप्त है । न उसे ठीक से भोजन मिलता है , न उसे फोन करने दिया जाता है , बस काम करते रहना ही उसकी जिंदगी है । उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं है , इसलिए वह पौड़ा सहन करते , कमजोर होकर जिस तरह रेत की दीवार भरभराकर गिर जाती है , उसी तरह निम्मों भी मर जाती है ।

प्रश्न 11. ‘ निम्मों की मौत पर ‘ शीर्षक कहाँ तक सार्थक है ? तर्क सहित उत्तर दें ।

उत्तर – ‘ निम्मों ‘ एक आर्थिक विपन्न औरत है जो मुंबई जैसे महानगर में दाई ( नौकरोनी ) का काम करती है । वह जिस मालिक के यहाँ काम करती है वह निम्मों का भरपूर शोषण करता है ।न उसे ठीक से खाना देता है , न ही किसी से मिलने देता है । काम करने के बावजूद उसे तरह – तरह के जुल्म सहने पड़ते हैं । लानत , घूसे , गालियाँ तो उसकी जीवन सौगनी बन गयी हैं । इन यातनाओं के कारण निम्मों सामान्य मनुष्य की औसत आयु साठ बरस भी नहीं जी पाती है और तीस बरस में ही मौत हो जाती है । कवि को महानगर की असंवेदनशीलता में ‘ निम्मों की मौत ‘ नागवार गुजरती है । वह उसके श्रद्धांजलि में कविता लिखता है । इस तरह ‘ निम्मों की मौत पर ‘ शीर्षक सार्थक है ।

प्रश्न 12. ‘ यह शरीर जो तीस बरस से
               इस दुनिया में था
               और तीस बरस
               उसे रहना था यहाँ । “
कवि का अभिप्राय है कि निम्मों एक सामान्य मनुष्य की औसत आयु भी नहीं जी पाती , इसके पीछे क्या कारण है ? यहाँ निम्मों का कौन – सा दर्द अभिव्यक्त होता है ?
उत्तर – इसके पीछे सबसे बड़ा कारण शोषण है । निम्मों को न ठीक से खाना दिया जाता था , न किसी से मिलने दिया जाता था । वह तीन दिन की सूखी रोटी और तीन दिन पुराना साग खाती है परन्तु वह भी संतुष्ट होकर नहीं बल्कि चोरों की तरह । उसे लानत , गालियाँ , लात , चूंसे रोज पड़ते थे । भोजन एवं स्वस्थ मन के अभाव में कोई भी अपनी पूरी आयु नहीं जी सकता । निम्मों के साथ ऐसा ही हुआ । निम्मों की आर्थिक विपन्नता उसे गुलामी शोषित होने पर मजबूर करती है इसलिए वह एक सामान्य मनुष्य की औसत आयु भी नहीं जी पाती है ।

प्रश्न 13. कविता में किन पंक्तियों से निम्नलिखित भाव व्यंजित होते हैं – निम्मों एक ऐसे तबके का प्रतिनिधित्व करती है जिसकी समाज में अपनी कोई पहचान नहीं है , अस्तित्व का संकट है । ऐसे लोगों की अचानक मृत्यु पर किसी तरह का प्रश्न नहीं किया जाता ।

उत्तर – पर एक दिन रेत की दीवार की तरह
    गिरी वह सहसा
   उसके चले जाने में
कोई रहस्य नहीं था ।

भाषा की बात

प्रश्न 1. वचन बदलें ।

उत्तर – चिड़ियाँ -चिड़िया
रोटी- रोटियाँ
गाली -गालियाँ
रात -रातें
चिट्ठी -चिट्ठियाँ
आँखें -आँख
हिचकियाँ -हिचकी
प्रार्थनाएँ -प्रार्थना ।

प्रश्न 2. विलोम शब्द लिखें ।

उत्तर – अंधेरा- उजाला
सूखा -भींग
पुराना -नया
रात -दिन
अनुपस्थित- उपस्थित
भीतर- बाहर
निषिद्ध -प्रवेश ।

प्रश्न 3. ‘ रेत की दीवार की तरह गिरना , मुहावरे का वाक्य – प्रयोग करते हुए अर्थ स्पष्ट करें ।

उत्तर – भरभरा कर गिरना – निम्मों सहसा रेत की दीवार की तरह गिर पड़ी ।

प्रश्न 4. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची बताएँ ।

उत्तर – धरती -वसुंधरा , भू , भूमि , इला , धरणी , वसुधा ।
आँख -नेत्र , नयन , चक्षु ।
चिड़ियाँ -खग , विहग , विहंग , द्विज ।
रात -निशा , माया , रजनी , यामिनी , क्षणदा , विभावरी ।
शरीर -काया , बदन ।
दुनिया- संसार , विश्व , भूमंडल ।
रेत- बालू , कण ।

प्रश्न 5. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखें ।

उत्तर– ( i ) जो उपस्थित नहीं है ‘ अनुपस्थित
( ii ) जो कहा न जा सके अकथ्य ।

प्रश्न 6. उद्गम की दृष्टि से शब्द – भेद स्पष्ट करें ।

उत्तर – चिड़िया -देशज
पुरानी -तद्भव
रोटी- देशज
टेलीफोन- विदेशज
निषिद्ध -तत्सम
फटकना -देशज
पीहर -देशज
मूँदती- देशज
दुनिया -विदेशज
शायद -विदेशज
सहसा- देशज । ।।

 

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