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bseb 8th class science notes | सूक्ष्मजीवों का संसार

bseb 8th class science notes | सूक्ष्मजीवों का संसार

अध्ययन सामग्री-सजीवों का एक ऐसा अद्भुत संसार भी है जिसे हम अपनी नंगी आँखों
से नहीं देख पाते हैं। सूक्ष्मजीवों की बड़ी ही रोचक एवं अद्भुत दुनिया है। जैसा कि नाम से
ही विदित है, सूक्ष्मजीव (सूक्ष्म + जीव) अत्यंत छोटे जीव होते हैं। ये हमारे चारों ओर की वायु,
मिट्टी तथा जल में पाए जाते हैं। सूक्ष्मजीव का आकार 1 मिलीमीटर की हजारवाँ भाग के बराबर
यो इससे भी छोटे होते हैं। इन्हें देखने के लिए और इनका अध्ययन करने के लिए विशेष यंत्र
की आवश्यकता होती है जिसे सूक्ष्मदर्शी कहते हैं इसलिए इन जीवों को सूक्ष्मजीव कहा जाता है।
सूक्ष्मजीवों का अध्ययन करनेवाली विज्ञान की शाखा को सूक्ष्मजीव विज्ञान कहते हैं।
अध्ययन की सुविधा के लिए सूक्ष्मजीवों को चार प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है परन्तु
कहीं-कहीं पाँच प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है। विषाणु को पांचवें वर्ग में रखा गया है।
(i) जीवाणु (Bacteria), (ii) कवक (Fungi), (iii) प्रोटोजोआ (Protozoa), (iv) शैवाल
(Algae), (v) विषाणु (Virus) |
जीवाणु-जीवाणु एककोशिकीय होते हैं। जीवाणु सर्वव्यापी है। इनकी कई हजार प्रजातियाँ
हैं जो हवा, पानी, मिट्टी, भोज्य पदार्थों में तथा प्राणियों के शरीर के अंदर विद्यमान होते हैं। कुछ
जीवाणु मनुष्यों, जंतुओं तथा पौधों में रोग उत्पन करते हैं जबकि कुछ अन्य प्रकार के जीवाणु
हमारे लिए अत्यंत लाभदायक हैं।
जीवाणु बहुत जल्दी-जल्दी गुणन करते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में प्रत्येक आधे घंटे की अवधि
में ये दो में विभाजित हो जाते हैं। इस प्रकार यदि रोग उत्पन्न करनेवाला एक अकेला रोगाणु भी
मानव शरीर में प्रवेश करता है तो एक या दो दिन में ही वह करोड़ों की संतति अध्ययन कर सकता है।
जीवाणु से होने वाले प्रमुख रोग-प्लंग, हैजा, टायफाइड, क्षय रोग, डिप्थीरिया, टेटनस आदि ।
कवक-कवक इतने साधारण रूप से हर जगह व्याप्त होते हैं कि हम उन्हें सहज ही देख
सकते हैं। वे सड़ते हुए खाद्य पदार्थों और फलों, बासी डबलरोटी, पुराने चमड़े के जूतों तथा वृक्षों
के नम तनों पर उग जाते हैं। प्राय: ये काले-हरे मखमली धब्बों के रूप में या सफेद काली रूई
के समान दिखाई देते हैं।
कवक का हमारे दैनिक जीवन में काफी महत्व है। कवक, खाद्य पदार्थ जैसे इडली, डोसा,
शराब आदि बेकरी उत्पाद पनीर बनाने, प्रति जैविक दवाईयाँ बनाने में प्रयोग किया जाता है। बेकरी तथा खाद्य उत्पादन में यीस्ट (खमीर) का बड़ा महत्व है। खमीर द्वारा किण्वन की क्रिया से
एल्कोहल उत्पन्न होता है जिससे शराब, बीयर आदि पेय पदार्थ बनते हैं।
कवक जनित रोग-एथलीट फूट, दाद, गेहूँ का रस्ट इत्यादि ।
शैवाल-शैवाल नम स्थानों तथा जल में पाए जाते हैं। शैवाल का शरीर जड़, तना और
पत्तियों में नहीं बँटा रहता है। इसके शरीर को थैलस कहते हैं। शैवाल एक कोशिकीय तथा
बहु-कोशिकीय होते हैं। शैवाल समुद्र, पोखर, तालाब, गड्ढे, नम मिट्टी, वृक्षों की छाल, पुराने
घरों की नम दीवारों में मिलते हैं। सभी शैवाल में पर्णहरित पाया जाता है। ये अपना भोजन स्वयं
बनाते हैं। अतः इन्हें आत्मपोषी कहा जाता है।
शैवाल दवाइयाँ, कृषि, उद्योग तथा भोजन के रूप में इसका बड़ा महत्व है।
उदाहरण—प्यूकस, स्पाइरोगायरा आदि ।
प्रोटोजोआ-प्रोटोजोआ का शाब्दिक अर्थ है-प्रथम जंतु । प्रोटोजोआ सरल संरचना वाले,
सूक्ष्म तथा एककोशिकीय जंतु होते हैं। ये अकेले अथवा निवह में पाए जाते हैं। ये स्वतंत्र जीवी,
परजीवी या सहजीवी अवस्था में रह सकते हैं। इसका कोई निश्चित आकार नहीं होता है। अमीबा, कोसोडिगा, जियार्डिया आदि प्रोटोजोआ के उदाहरण हैं। यह नम तथा गीले स्थानों, जैसे मिट्टी, समुद्री वातावरण तथा तालाब आदि में पाए जाते हैं। सभी प्रोटोजोआ में अमीबा सबसे आसानी से मिलने वाला प्राणी है।
प्रोटोजोआ आहार श्रृंखला की कड़ी, पशिष्ट पदार्थों का अपघटन, सहजीवी के रूप में उपयोग
होता है। अतः यह हमारे लिए उपयोगी है।
प्रोटोजोआ जनित रोग-मलेरिया, कालाजार, अमीबा पेचिश इत्यादि।
विषाणु-विषाणु अथवा वाइरस शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द से हुई है। जिसका अर्थ विष
होता है। विषाणु सबसे अधिक सूक्ष्म होते हैं। इन्हें सजीवों तथा निर्जीवों के बीच की सीमा रेखा
पर रखा गया है। विषाणु अकोशिकीय संरचनाएँ हैं और ये केवल जीवित कोशिकाओं में ही वृद्धि
करते हैं।
विषाणु गोलीय, आयताकार, लंबे, पतले एवं बेलनाकार होते हैं।
विषाणु जनित रोग-चेचक, चिकेनपॉक्स, गलफुली, पीत ज्वर डेंगू ज्वर, इनफ्लूएंजा,
हाइड्रोफोबिया आदि पोलियो।
तालिका – मानव में सूक्ष्मजीव जनित कुछ सामान्य रोग
तालिका : सूक्ष्मजीव जनित पौधों के सामान्य रोग
खाद्य विषाक्तता-खासकर गर्मी एवं वर्षा के मौसम में पकाए गए भोज्य पदार्थ जल्दी खराब
हो जाते हैं उनसे गंध आने लगती है। स्वाद खट्टा हो जाता है। ऐसा भोजन ग्रहण करने पर हम
उल्टी, डायरिया आदि के शिकार हो जाते हैं। इसी स्थिति को खाद्य विषाक्तता कहते हैं।
खाद्य पदार्थों का संदूषण सूक्ष्मजीवों के कारण होता है। सूक्ष्मजीव खाद्य सामग्रियों में विषैले
पदार्थ उत्पन्न करते हैं। इससे भोजन विषाक्त हो जाते हैं।
पॉश्चरीकरण-वैसी प्रक्रिया जिसके माध्यम से दूध में उपस्थित सूक्ष्मजीव को नष्ट कर दिया
जाता है तथा दूध सुरक्षित हो जाता है। इस प्रक्रिया की खोज लुई पॉश्चर ने किया था। पैकेट
में दूध मिलना इसी प्रक्रिया का उदाहरण है।
                                              अभ्यास
1. सही विकल्प के आगे (√) का निशान लगाइए।
(क) सूक्ष्मजीव जो परपोषी में गुणन करता है-
(i) जीवाणु
(ii) कवक
(iii) प्रोटोजोआ
(iv) विषाणु
(ख) दूध को दही में बदलने वाला सूक्ष्मजीव है-
(i) प्लैज्मोडियम
(ii) यीस्ट
(iii) शैवाल
(iv) लैक्टोबैसिलस
(ग) मलेरिया रोग का कारण है-
(i) प्रोटोजोआ
(ii) विषाणु
(iii) जीवाणु
(iv) कवक
(घ) चीनी को एल्कोहल में परिवर्तित करनेवाला प्रक्रम है-
(i) संदूषण
(ii) किण्वन
(iii) परिरक्षण
(iv) संक्रमण
(ङ) पावरोटी या इडली के फूलने का कारण है-
(i) नमी (ii) ऊष्णता (iii) यीस्ट (iv) जल
उत्तर-(क) (iv), (ख) (iv), (ग) (i), (घ) (ii), (ङ) (iii) |
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(क) विशेष यंत्र…………. का उपयोग सूक्ष्मजीवों को देखने के लिए किया जाता है।
(ख) दलहनी पौधों की जड़ों में ……………जीवाणु रहता है।
(ग) पोलियो……………. के कारण होता है।
(घ) मलेरिया परजीवी का वाहक…………… मच्छर है।
(ङ) सिरका का उत्पादन…………. नामक सूक्ष्मजीव की सहायता से किया जाता है।
उत्तर-(क) सूक्ष्मदर्शी, (ख) राइजोबियम, (ग) विषाणु, (घ) मादा एनोफिलीज, (ङ) यीस्ट ।
3. निम्न पर (√) या (x) का निशान लगाइए।
उत्तर-(i) सूक्ष्मजीव केवल मिट्टी में मिलते हैं।                                              (×)
(ii) सूक्ष्मजीवों को हम नंगी आँखों से देख सकते हैं।                                   (×)
(iii) डेंगू मादा मच्छर एडिस के काटने से होता है।                                      (√)
(iv) मादा एनोफिलिस मच्छर मलेरिया परजीवी का वाहक है।                      (√)
(v)  यीस्ट एक शैवाल है।                                                                       (×)
(vi)चेचक के टीके को खोज एडवर्ड जेनर ने की थी।                                   (√)
(vii) वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण से मिट्टी की उर्वरता घटती है।       (×)
(viii) टायफाइड विषाणु से होनेवाला रोग है।                                             (×)
4. मिलान कीजिए
कॉलम-1                               कॉलम-II
(i) राइजोबियम                     (क) दही का जमना
(ii) प्लैन्मोडियम                    (ख) जन्तु रोग
(iii) लैक्टोबैसिलस                 (ग) नाइट्रोजन स्थिरीकरण
(iv) किण्वन                          (घ) मलेरिया
(v) एंथ्रेक्स                            (ङ) सिरका निर्माण
उत्तर-(i) (ग), (ii) (घ), (iii) (क), (iv) (ङ), (v) (ख)।
5. सूक्ष्मजीवों को देखने के लिए विशेष यंत्र सूक्ष्मदर्शी की जरूरत होती है। क्यों?
उत्तर-हम, आप अपनी नंगो आँखों से, अधिक से अधिक मिली मीटर के दसवें भाग के
बराबर तक की वस्तुओं को देख सकते हैं। जबकि सूक्ष्मजीव मिलीमीटर के हजारवें, लाखवें भाग या उससे भी छोटे होते हैं। अतः इन सूक्ष्मजीवों को देखने के लिए एक विशेष प्रकार के यंत्र
की जरूरत होती है। जिसे सूक्ष्मदर्शी कहते हैं। सूक्ष्मदर्शी ऐसा यंत्र है जिसकी सहायता से हम
सूक्ष्मजीव या वस्तु को उसके वास्तविक आकार से कई गुना बढ़ाकर देख सकते हैं।
6. सूक्ष्मजीव हमारे मित्र हैं कैसे?
उत्तर-सूक्ष्मजीव हमारे मित्र ही नहीं अति उपयोगी मित्र है। यह हमारे दैनिक जीवन में, घरेलू
से लेकर औद्योगिक उत्पादन प्रक्रियाओं में सूक्ष्मजीवों का महत्वपूर्ण स्थान है। औषधि निर्माण, रोग प्रतिरोधक टीका कृषि, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, पर्यावरण की साफ-सफाई आदि में सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस प्रकार सूक्ष्मजीव हमारे जिन्दगी में अति महत्वपूर्ण एवं उपयोगी सहयोगी के रूप में कार्य करता है। इसलिए सूक्ष्मजीव हमारे, आपके तथा मानव जाति के मित्र हैं।
7. यीस्ट और चीनी के साथ मैदे को गूंथकर कुछ देर छोड़ देने के बाद, मैदे का आयतन
क्यों बढ़ जाता है?
उत्तर-यीस्ट कवक वर्ग का सूक्ष्मजीव है। जब हम चीनी तथा मैदा के साथ यीस्ट को गूंथते
हैं तो अनुकूल परिस्थिति पाकर वह तेजी से गुणन (जनन) करने लगता है। साथ ही उसके श्वसन
के कारण काफी मात्रा में CO2 निकलता है। इसके कारण मैदा में खमीर बनता है और उसका
आयतन बढ़ जाता है।
8. सूक्ष्मजीवों द्वारा होनेवाली हानियों का विवरण दीजिए।
उत्तर-कुछ सूक्ष्मजीव हमारे मित्र हैं यानि हमारे लिए लाभदायक हैं तो कुछ सूक्ष्मजीव ऐसे
हैं जो हमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हानि पहुंचाते हैं। ये मनुष्य, जीव-जन्तुओं, पेड़-पौधों आदि के अनेक रोगों के कारण हैं। ये हमारे भोजन, पानी तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं को दूषित कर देते हैं। रोगकारक सूक्ष्मजीव हमारे श्वास, भोजन, पानी आदि के द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करते
हैं तथा रोग उत्पन्न करते हैं। जल, वायु, भोजन, वस्त्र या शारीरिक संपर्क के फलस्वरूप एक
संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति तक सूक्ष्मजीवों के फैलाव के कारण होने वाले रोगों को
संचरणीय रोग कहते हैं।
मानव में सूक्ष्मजीव जनित रोग-क्षय रोग, खसरा, पोलियो, हैजा, टाइफाइड, मलेरिया,
चिकन पॉक्स इत्यादि।
पौधों में सूक्ष्मजीव जनित रोग-गेहूँ का रस्ट, नींबू का कैंसर, भिंडी का पीत रोग इत्यादि ।
जानवरों में सूक्ष्मजीव जनित रोग-एंथ्रेक्स, खुर तथा मुंहपका रोग इत्यादि ।
9. नाइट्रोजन चक्र कैसे संचालित होता है ?
उत्तर-नाइट्रोजन चक्र के संचालन को भली-भाँति हम नाइट्रोजन चक्र से समझ सकते हैं।
10. पॉश्चरीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर–पाँचरीकरण एक प्रक्रिया है जिसकी खोज लुई पॉश्चर ने किया था। उन्हीं के नाम
पर इस प्रक्रिया को पॉश्चरीकरण कहते हैं। इस प्रक्रिया में दूध को 70°C पर 15-30 सेकेण्ड
के लिए गर्म किया जाता है। इसके अलावे भी दूध को अनेक स्तरों से गुजारा जाता है ताकि
दूध सूक्ष्मजीवों से मुक्त हो जाए। पॉश्चरीकरण एक प्रक्रिया है जिसमें दूध को सूक्ष्मजीवों से मुक्त
कराकर सुरक्षित कर दिया जाता है। फिर उसे थैलियों में बंद कर आम लोगों के लिए बाजार
में उपलब्ध करा दिया जाता है।
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