10th sanskrit

matric ka sanskrit ka question – शुकेश्वराष्टकम्

शुकेश्वराष्टकम्

matric ka sanskrit ka question – शुकेश्वराष्टकम्

class – 10

subject – sanskrit

lesson 13 – शुकेश्वराष्टकम्

शुकेश्वराष्टकम्

सनातनं पुरातनं परोपकार साधनम्
जनस्य कामपूरक मनोजगवखर्वकम् ।
शुकश्वरं नमाम्यहं शुकेश्वरं नमाम्यहम्
शुकेश्वरं नमान्यहं शुकेश्वरं नमाम्यहम् ।।
जगतमोविनाशकं सदाऽव्ययपदाकम्
सदाशयं सहायक , सदाशिवं सुनायकम् शुकेश्वर……. सतां सदा सुरक्षक , दुराशयप्रबाधकम् भजन्मनोविहारिणं , सदारिवृन्दपीडकम् । शुकेश्वर……
उमापितं सत्तीपति , नमामि तं महागतिम्
नमामि कालिकापति , नमामि तारिकापतिम् शुकेश्वर जटायुतं त्रिलोचनं त्रिमार्गगामस्तकम्
गजस्य चर्मधारिणं त्रिशूलशस्त्रधारिणम् । शुकेश्वर …
नवेन्दुना सुभोभितं सुदिव्यपुष्पपूजितम्
मयूरगीततोषितं , सुभक्तिगीतकीतितम् । शुकेश्वर…. जलप्रियं महेश्वर कृपः फलप्रदायकम्
जनेश्वरं शुकश्वरं , सुभूमनित्यपालकम् । शुकेश्वर …… सुबोधदं सुभक्तिपदं सुभुक्तिमुक्तिदायकम् चतुष्फलप्रदायक , विशालरूपधारकम् । शुकेश्वर…. इदं शुकेश्वराष्टकं तु वैद्यनाथकीर्तितम्
पठन्नरः सभक्ति यः , शिवो ददाति वाञ्छितम् । शुकश्वर …….

सनातन स्वरूप , पुरातन स्वरूप परोपकार को साधने वाले भक्तों की इच्छा पूरा करने वाले और कामदेव के गर्व को चूर करने वाले शुकेश्वर महादेव मैं प्रणाम करता हूँ । शुकेश्वर को मैं प्रणाम करता हूँ , शुकेश्वर को प्रणाम करता , शुकेश्वर को प्रणाम करता हूँ ।
जगत के अज्ञानतारूपी तम को विनाशकरने वाले , सदैव को प्रदान करने वाले सत्याचरण करने वालों के सहायक , सदाशिव , सुनायक शुकेश्वर को मैं प्रणाम करता हूँ ।
उमापति , सतीपत्ति तथा महागति देने वाले
भगवान शंकर को प्रणाम है । कालिकापति तारिकापति भगवान शुकेश्वर शिव को प्रणाम करता हूँ ।
जटाधारी , त्रिलोचन , गंगा जल से जिनका मस्तक गौला रहता है , हाथी को खाल को धारण करने वाले , त्रिशूल नामक शस्त्र धारण करने वाले भगवान शुकेश्वर शिव को प्रणाम करता हूँ ।
द्वितीया के चन्द्रमा से शोभित सुन्दर दिव्य पुणों से पूजित होने वाले , मयूर के गीत से संतुष्ट होने वाले भक्ति के सुन्दरगायन करने वाले , भगवान शुकेश्वर शिव को प्रणाम करता हूँ ।
जल के प्रिय , महेश्वर , कृषि में फल देने वाले मनुष्य के ईश्वर , शुक के ईश्वरा सहपात्रों को सदैव पालन करने वाले भगवान् शुकेश्वर शिव को मैं प्रणाम करता हूँ ।
सुन्दर ज्ञान देने वाले , सुन्दर भक्ति देने वाले , सुन्दर भोग देने वाले , भक्ति देनेवाले , धर्म – अर्थ , काम मोक्ष ( चतुष्फल ) को प्रदान करने वाले , विशाल रूप धारण करने वाले भगवान शुकेश्वर शिव को मैं प्रणाम करता हूँ ।
वैद्यनाथ के द्वारा गाया गया यह शुकेश्वर अष्टक जो व्यक्ति भक्तियुक्त होकर पाठ करेगा उसे भगवान शिव मनोकामना पूरा कर देते हैं ।

अभ्यास

प्रश्न : 1. ” मनोजगर्वखर्वकः ” कः ?
उत्तरम्- “ मनोजगर्वखर्वकः ” भगवान शंकरः ।
प्रश्न : 2 , अस्य पाठस्य सरलार्थ लिखत् ।
उत्तरम् – अर्थ को ही सरलार्थ समझे जो ऊपर लिखे गये हैं ।

 

 

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