10TH SST

bihar board class 10 history notes – यूरोप में राष्ट्रवाद

यूरोप में राष्ट्रवाद

bihar board class 10 class history notes – यूरोप में राष्ट्रवाद

class – 10

subject – history

lesson 1 – यूरोप में राष्ट्रवाद

यूरोप में राष्ट्रवाद अध्याय की मुख्य बातें – राष्ट्रवाद की भावना का आगमन यूरोप में पुनर्जागरण काल ऐसी भावना है जो एक ही सास्कृतिक , भौगोलिक एवं सामाजिक परिवेश में रहने वाले ध्यक्तियों द्वारा सामूहिक रूप से राजनैतिक जागृति को जन्म देता है । यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करने में नेपोलियन के आक्रमणों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया । इस बीच जनतंत्र एवं राष्ट्रवाद की नई शक्तियाँ राजनीति को निर्धारित करने वाले नये तत्त्वों के रूप में उभरने लगी थीं ।
चार्ल्स दसम के निरंकुश एवं प्रतिक्रियावादी शासन के विरुद्ध फ्रांस में राष्ट्रीयता की भावना उभर रही थी । उसके कार्यों से उदारवादियों और जनता में गहरा आक्रोश पैदा हुआ और 28 जून 1830 ई ० को फ्रांस में महायुद्ध शुरू हो गया । इसे ही जुलाई 1830 की क्रांति कहते है । इंटली तथा जर्मनी का एकीकरण तथा यूनान , पोलैंड एवं हंगरी में भी तत्कालीन व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन उठ खड़े हुए । 19 वीं सदी के आरम्भ में इटली कई छोटे- छोटे स्वतंत्र राष्ट्रों में विभक्त था और अलगाव की भावना थी । आस्ट्रिया और फ्रांस जैसे राष्ट्र इटली के एकीकरण का विरोध करते थे । परन्तु इसके बावजूद इटली में राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ । इसी बीच इटली में मेजनी का प्रार्दुभाव हुआ । वह एक साहित्यकार , गणतांत्रिक विचारों का समर्थक एवं योग्य सेनापति था । उसने इटली के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इटली के एकीकरण के द्वितीय चरण में काउंट काबूर आया । उसने 1853-54 में फ्रांस से मित्रता कर आस्ट्रिया जो इटली के एकीकरण का विरोधी था , अपनी स्थिति सुदृढ़ की । इसके बाद गैरी बाल्डी ने इस काम को आगे बढ़ाया । इस प्रकार 1871 ई 0 में इटली का एकीकरण मेजनी कावूर और गैरी बाल्डी जैसे नेताओं के प्रयास से पूर्ण हुआ ।
इटली के एकीकरण के दौरान जर्मनी में भी एकीकरण का प्रयास जारी था । वहाँ भी जर्मनी अनेक स्वतंत्र राज्यों में विभक्त था । वहीं प्रशा सबसे शक्तिशाली राष्ट्र था । 1848 ई ० में फ्रांसिसी क्रांति ने जर्मन राष्ट्रवाद को हवा दी । यह निर्णय लिया गया कि प्रशा ही जर्मन एकीकरण का नेतृत्व करेगा । परन्तु . फेडरिक जो कि एक निरंकुश शासक था , ने इस आंदोलन को दबा दिया । फ्रेडरिक के देहान्त के बाद उसका भाई विलियम सत्ता में आया । वह राष्ट्रवादी विचारधारा का था । विलियम ने जर्मन एकीकरण को ध्यान में रखकर विरमार्क को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त किया । विस्मार्क ने अपनी राजनैतिक सूझबूझ और कर्मठता का परिचय देते हुए अनेक ऐसे निर्णय लिये जिससे एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ और अंततः 1871 ई 0 में जर्मनी एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में यूरोप के मानचित्र पर आया । इस राष्ट्रवाद से यूरोप में राजनैतिक उथल – पुथल का दौर शुरू हो गया । यूनान , हंगरी और बोहेमिया में स्वतंत्रता आंदोलन इसी राष्ट्रवाद का परिणाम था । इसी के प्रभाव ने आटोमन राज्य के पतन की कहानी लिखी । यूनान में तुर्की से स्वतंत्रता के लिए आंदोलन चल पड़ा । यूरोप की अस्मिता के सवाल पर इंग्लैंड , फ्रॉस और रूस ने एक साथ मिलकर तुर्की एवं मिस्र के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया । फलस्वरूप यूनान को तुर्की की गुलामी से मुक्ति मिली । यूनान एक स्वतंत्र राष्ट्र बना ।
हंगरी भी कैसे अछूता रहता । उस पर आस्ट्रिया का पूर्ण प्रभाव था । हंगरी में कोसूथ तथा फ्रांसिस डिक इस क्रांति का नेतृत्व कर रहे थे । कोसूथ ने आस्ट्रियाई आधिपत्य का विरोध करना शुरू किया और व्यवस्था में बदलाव की मांग करने लगा । जनता उसके साथ थी । अंततः 31 मार्च 1848 ई 0 को आस्ट्रिया में हंगरी की कई बातें मान ली और स्वतंत्र मंत्रिपरिषद का गठन किया । प्रेस की स्वतंत्रता दी और राष्ट्रीय सुरक्षा सेना की स्थापना की गयी । सामंती प्रथा समाप्त हुई और हंगरी को राष्ट्रीय अस्मिता प्रदान की गयी । पोलैंड में भी राष्ट्रवादी भावनाओं के कारण रूस के विरुद्ध विद्रोह शुरू हुए परन्तु इंग्लैंड और फ्रांस से सहायता नहीं मिलने के कारण इसे रूस ने दबा दिया ।
बोहेमिया में भी हंगरी के घटनाक्रम का प्रभाव पड़ा । परन्तु आस्ट्रिया ने क्रांतिकारियों का सख्ती से दमन किया और यह आंदोलन स्थाई न रह सका ।
अतः यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना फ्रांसिसी क्रांति से ही उत्पन्न हुआ । इस क्रांति ने ( राष्ट्रवाद ने ) यूरोप ही नहीं पूरे विश्व को जागरूक बना दिया । जिसके कारण एशिया और यूरोप में भी साम्राज्यवाद के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ ।

                        प्रश्नोत्तर 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न :
     नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर में चार विकल्प दिये गए हैं । जो सर्वाधिक उपयुक्त लगे उनमें सही का चिह लगावें ।
1. इटली एवं जर्मनी वर्तमान में किस महादेश के अंतर्गत आते हैं ?
( क ) उत्तरी अमेरिका ( ख ) दक्षिणी अमेरिका
( ग ) यूरोप ( घ ) पश्चिमी एशिया
उत्तर– ( ग ) यूरोप
  2. फ्रांस में किस शासक वंश की पुनस्थापना वियना कांग्रेस द्वारा की गई थी ?
( क ) हैपसवर्ग ( ख ) ऑर्लिया वंश
( ग ) बूढे वंश ( घ ) जार शाही
उत्तर– ( ग ) बूढे वंश
  3. मेजनी का संबंध किस संगठन से था ?
( क ) लाल सेना ( ख ) कार्बोनरी
( ग ) फिलिक हेटारिया ( घ ) डायट
उत्तर– ( ख ) कार्बोनरी
4. इटली एवं जर्मनी के एकीकरण के विरुद्ध निम्न में कौन था ?
( क ) इंग्लैंड ( ख ) रूस ( ग ) ऑस्ट्रिया ( घ ) प्रशा
उत्तर– ( ग ) ऑस्ट्रिया
5. ‘ काउंट काबूर को विक्टर इमैनुएल ने किस पद पर नियुक्त किया ?
( क ) सेनापति ( ख ) फ्रांस में राजदूत
( ग ) प्रधानमंत्री ( घ ) गृहमंत्री
उत्तर– ( ग ) प्रधानमंत्री
  6. गैरीवाल्डी पेशे से क्या था ?
( क ) सिपाही ( ख ) किसान
( ग ) जमीन्दार ( घ ) नाविक
उत्तर– ( घ ) नाविक
7. जर्मन राईन राज्य का निर्माण किसने किया था ?
( क ) लाई 18 वाँ ( ख ) नेपोलियन बोनापार्ट
( ग ) नेपोलियन III ( घ ) विस्मार्क
उत्तर– ( ख ) नेपोलियन बोनापार्ट
   8. ” जालवेरिन ” एक संस्था थी ?
( क ) क्रांतिकारियों की ( ख ) व्यापारियों की
( ग ) विद्वानों    ( घ ) पादरी सामंतों की
उत्तर– ( ख ) व्यापारियों की
  9. ” रक्त एवं लौह ‘ की नीति का अवलम्बन किसने किया था ?
( क ) मेजनी ( ख ) हिटलर
( ग ) विस्मार्क ( घ ) विलियम -1
उत्तर– ( ग ) विस्मार्क
  10. चार्टस्ट आंदोलन कहाँ सम्पन्न हुआ ?
( क ) ऑस्ट्रिया ( ख ) इटली ( ग ) जर्मनी ( घ ) इंग्लैंड उत्तर– ( घ ) इंग्लैंड
11. यूरोपवासियों के लिए किस देश का साहित्य एवं ज्ञान – विज्ञान प्रेरणास्रोत रहा ?
( क ) जर्मनी ( ख ) यूनान  ( क ) तुर्की ( घ ) इंग्लैंड
उत्तर– ( ख ) यूनान
12. 1829 ई ० की एड्रियानोपुल की संधि किस देश के साथ हुई ?
( क ) तुर्की ( ख ) यूनान ( ग ) हंगरी ( घ ) पोलैंड
उत्तर– ( क ) तुर्की

  निम्नलिखित में रिक्त स्थानों को भरो !

1. सेडान के युद्ध में ही एक महाशक्ति के पतन पर दूसरी यूरोपीय महाशक्ति जर्मनी का जन्म हुआ था ?
2. सेडोवा का युद्ध फ्रांस और प्रशा के बीच हुआ था ।
3. 1848 ई 0 की फ्रांसीसी क्रांति ने पुरातन युग का भी अंत कर दिया ।
4. बेटीकन सिटी के राजमहल जहाँ पोप रहते थे जो इटली के प्रभाव से बचा रहा ।
5. यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने के बाद बबेरिया के शासक ‘ ओटो ‘ को वहाँ का राजा घोषित किया गया ।
6. हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट है ।

निम्नलिखित समूहों का मिलान करें :
( i ) समूह ‘ अ ‘           समूह ‘ ब
1. मेजनी  ‘                ( क ) दार्शनिक
2. हीगेल                    ( ख ) इटली
3. विस्मार्क                 ( ग ) राजनीतिज्ञ
4. विक्टर इमैनुएल.       ( घ ) जर्मन चांसलर
उत्तर – समुह ‘ अ’.              समुह ‘ ब
1 . मेजनी                 ( ख ) इटली
2 . हीगेल                  ( क ) दार्शनिक
3 विस्मार्क.              ( घ ) जर्मन चांसलर
4. विक्टर इमैनुएल.    ( ग ) राजनीतिज्ञ

(ii)समूह ” अ ‘             समूह ‘ ब
1 . वियना सम्मेलन     ( क ) 1817 ई ०
2 मेटरनिक का पतन  ( ख ) 1870 ई ०
3. इटली एकीकरण    ( ग )  1848 ई ०
4. सेडना यूद्ध            (घ ) . 1814-15 ई ०
उत्तर – समूह ‘ अ.         समूह ‘ ब
1 वियना सम्मेलन.     ( घ ) 1814-15 ई ०
2 मेटरनिक का पतन ( ग ) 1848 ई ०
3 . इटली एकीकरण ( क ) 1817 ई ०
4 सेडना यूद्ध.          ( ख ) 1870 ई ०

( iii )     समूह ‘ अ ‘                     समूह ‘ ब ‘
1.कोसुथ.                      ( क ) 1863 ई ०
2 . एड्रियानोपल की संधि ( ख ) हंगरियन राष्ट्रवादी नेता
3. यूनान की स्वतंत्रता      ( ग ) 1829 ई ०
4 पोलैण्ड में आन्दोलन.   ( घ ) 1832 ई ०
उत्तर – समूह ‘ अ        समूह ‘ ब ‘
1. कोसुथ.               ( ख ) हंगरियन राष्ट्रवादी नेता
2. एड्रियानोपल की संधी ( ग ) 1829 ई ०
3 यूनान की स्वतंत्रता ( घ ) 1832 ई ०
4 . पोलैण्ड में आन्दोलन ( क ) 1863 ई ०

अति लघु उत्तरीय प्रश्न ( 20 शब्दों में उत्तर दें ) :

  1 . राष्ट्रवाद क्या है ?
उत्तर – किसी विशेष भौगोलिक , सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों में उत्पन्न होने वाली राजनैतिक चेतना ( जागृति ) ही राष्ट्रया है ।
  2. मेजनी कौन था ?
उत्तर – मेजनी इटली का एक साहित्यकार , गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य रोनापति था । वह सम्पूर्ण इटली का एकीकरण करना चाहता था ।
  3. जर्मनी के एकीकरण की बाधाएँ क्या थी ?
उत्तर – जर्मनी करीब 300 छोटे राज्यों में विखंडित था और उनमें राजनीतिक , सामाजिक तथा धार्मिक विषमताएँ थीं । राष्ट्रवाद की भावना की भी कमी थी ।
   4. मेटरनिक युग क्या है ?
उत्तर – मेटरनिक आस्ट्रिया का चासलर था । इसके शासन काल को मेटरनिक युग कहा जाता है । इसने इटली के एकीकरण का विरोध किया था । ( 1830-1848 ) .

लघु उत्तरीय प्रश्न ( 60 लगभग शब्दों में उत्तर दें ) :

1 .   1848 के फ्रांसीसी क्रांति के कारण क्या थे ?

उत्तर -1848 ई 0 का फ्रांसीसी क्रांति शासक वर्ग की निरंकुशता और अभिजात्य वर्ग की तानाशाही का परिणाम था । फ्रांसीसी जनता पर पुरातनपंथी विचार एवं प्रतिक्रियावादी विचारों को थोपने का प्रयास किया गया । फलस्वरूप मध्यम वर्ग जिसमें कि राष्ट्रीयता की भावना जागृत हो चुकी थी , ने इसका विरोध किया और इस विरोध ने 1848 ई ० में एक आन्दोलन का रूप ले लिया जिसे हम 1848 ई 0 का क्रांति कहते हैं जिसके दूरगामी परिणाम हुए ।

2. इटली , जर्मनी के एकीकरण में आस्ट्रिया की भूमिका क्या थी ?

उत्तर – इटली और जर्मनी के एकीकरण में आस्ट्रिया की भूमिका रचनात्मक नहीं थी । आस्ट्रिया इटली के एकीकरण का विरोधी था और प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से भी नहीं चुकता था । 13 काबूर के सरम नेपोलियन ii से भी संधि कर ली । उत्तर और मध्य इटली की जनता आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख ने इटली के राष्ट्रवादी आन्दोलनों को दबा लिया । जर्मनी एकीकरण में इटली और आस्ट्रिया के बीच युद्ध हुआ तथा आस्ट्रिया ने 1866 ई . में प्र के साथ भी युद्ध छेड़ दिया । इस प्रकार दोनों तरफ से युद्ध में फंसकर आस्ट्रिया की पराजय हुई । इस तरह जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ ।
3. यूरोप में राष्ट्रवाद फैलाने में नेपोलियन बोनापार्ट किस तरह सहायक हुआ ?

उत्तर– यूरोप में राष्ट्रवाद फैलाने में नेपोलियन बोनापार्ट का अहम रोल था । जर्मनी में यूरोप में राष्ट्रवाद की भावना का घोर अभाव था , जिसके कारण एकीकरण का मुद्दा नागरिकों के समक्ष नहीं था । वस्तुतः जर्मनी एकीकरण की पृष्ठभूमि का निर्माण का श्रेय नेपोलियन बोनापार्ट को ही जाता है । इस प्रकार जर्मनी में राष्ट्रवाद के उदय के बाद हंगरी , यूनान , पोलैंड में राष्ट्रीयता की भावना का उदय हुआ और मूर्तरूप में यूरोपीय राज्यों में एकीकरण के रूप में सामने आया ।
4. गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा करें ।
उत्तर – गैरीबाल्डी एक राष्ट्रीय नेता था । उसने अपनी सेना बनाकर ब्रूर्वो राजवंश को हराकर सिसली तथा नेपल्स में अपनी सत्ता स्थापित की । गैरीबाल्डी ने मि पर आक्रमण करने की योजना बनाई लेकिन काबूर से मेंट होने पर इस योजना को त्याग दिया । दक्षिणी इटली के शासक बनने का प्रस्ताव भी उसने अस्वीकार कर दिया । गैरीबाल्डी ने अपनी सारी सम्पत्ति राष्ट्र को सौप दिया और साधारण किसान की भाँति जीवन जीने लगा । इस तरह वह त्याग और बलिदान का प्रतिमूर्ति था ।
5. विलियन I के बगैर जर्मनी का एकीकरण विस्मार्क के लिए असंभव था कैसे ?

उत्तर – विलयम । राष्ट्रवादी विचारों का पोषक था । उसने अनेक सुधार किये फलस्वरूप जर्मनी में औद्योगिक क्रांन्ति की हवा तेज हो गयी । विलियम के प्रयासों से ही जर्मन राष्ट्रों को एकता के सूत्र में बाँधने का प्रयास तेज हुआ । इस प्रकार विलियन के राष्ट्रवादी नीतियों और कार्यों के बाद ही विस्मार्क जर्मनी का एकीकरण करने में सफल हो पाया ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ( लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें ) :

1. इटली के एकीकरण में मेजनी , कापूर और गैरीवाल्डी के योगदानों को बतावें ?

उत्तर – इटली के एकीकरण में मेज़नी काबूर और गैरीवाल्डी तीनों का महत्त्वपूर्ण योगदान था । सर्वप्रथम मेजनी ने 1820 में इसके लिये प्रयास शुरू किया और एक गुप्तदल काब्रोनारी का गठन किया , जो राष्ट्रवादियों का दल था और छापामार शुद्धकर एक गणराज्य की स्थापना करने की कोशिश की । मेजनी को आस्ट्रिया के विरोध का सामना करना पड़ा . और वह दो बार आस्ट्रिया के शासकों से हार गया । परन्तु भेजनी के प्रयासों से इटली में राष्ट्रभावना का उदय हो चुका था । काबूर एक सफल कूटनीतिज्ञ एवं राष्ट्रवादी था । वह इटली के एकीकरण में सबसे बड़ी बाधा आस्ट्रिया को मानता था , इसके लिये उसने फ्रांस से हाथ मिलाया । काबूर ने अपने कूटनीति से इटली के एकीकरण को पूरे यूरोप की समस्या बना दिया । काबूर मे नेपोलियन II से भी संधि कर ली । उत्तर और मध्ये इटली की जनता के समर्थन में एकीकरण के लिये प्रयासरत थी और इस प्रकार एक बड़े राज्य के रूप में इटली सामने आया । परन्तु काबूर का ध्यान मध्य और इटली के एकीकरण पर था । गैरीवाल्डी महान क्रांतिकारी था । परन्तु उसके विचार काबूर से नहीं मिलते थे । उद्देश्य एक होने की वजह से दोनों में समझौता हो गया परन्तु तब तक राष्ट्रवादी चेतना अपने चरम सीमा पर थी । इस प्रकार 1871 ई 0 में इटली का एकीकरण मेजनी , काबूर और गैरीवाल्डी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के योगदान के कारण पूर्ण हुआ ।

3. जर्मनी के एकीकरण में विस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें ।

उत्तर – विस्मार्क एक सफल कूटनीतिज्ञ और सेनापति था । जर्मन डायट में प्रशा का प्रतिनिधि रहते हुए उसने अपनी सफल कूटनीति का परिचय दिया । वह जर्मन एकीकरण में सैन्य शक्ति के महत्त्व को समझता था । अतः इसके लिये उसने रक्त और लौह नीति का अवलम्बन किया । उसने अपने देश में अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दिया । विस्मार्क ने अपनी नीतियों से प्रशा का सुदृढ़ीकरण किया और इस कारण प्रशा उस समय के सबसे मजबूत आस्ट्रिया से किसी मामले में कम न नहीं था । विस्मार्क ने इटली से संधि कर आस्ट्रिया के खिलाफ युद्ध लड़ा और आस्ट्रिया को पराजित किया . इससे आस्ट्रिया का जर्मन क्षेत्रों से प्रभाव खत्म हो गया और जर्मनी एकीकरण का दो तिहाई कार्य पूरा हो गया । शेष के लिये उसे फ्रांस से युद्ध करना पड़ा और सेडान की लड़ाई में फ्रांसीसियों की जबर्दस्त हार हुई । अंततोगत्वा जर्मनी 1871 ई 0 तक एकीकृत राष्ट्र के रूप में आया ।

3. राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं प्रभाव की चर्चा करें ।

उत्तर – राष्ट्रवाद एक भावना है जो किसी विशेष भौगोलिक , सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों की एकता एवं राजनैतिक जागृति का प्रतिफल है । यूरोप में राष्ट्रवाद के कारण भी यथेष्ट थे और इसके प्रभाव भी युगान्तकारी हुए । यूरोप में राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने में नेपोलियन के आक्रमणों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया । फ्रांसीसी क्रांति ने राजनीति को अभिजात्यवर्गीय परिवेश से बाहर कर उसे सड़कों और सर्वसाधारण की वस्तु बना दिया । उसके फलस्वरूप प्रतिक्रियावादी एवं सुधारवादी शक्तियों का विकास हुआ । इस बीच शासक वर्ग निरंकुश एवं जनभावनाओं को दबाने वाले थे । इन्ही सब कारणों की वजह से राष्ट्रवाद का प्रादुर्भाव हुआ और उसका मूर्तरूप यूरोपीय राज्यों के एकीकरण के रूप में आया । इसके फलस्वरूप कई बड़े और छोटे राज्यों का उदय हुआ । इस राष्ट्रवाद ने यूरोप को ही नहीं वरन पूरे विश्व को चैतन्य बनाया जिसके कारण अफ्रीकी और एशियाई राज्यों में विदेशी सत्ता के खिलाफ मुक्ति के लिये राष्ट्रीयता की लहर उपजी । इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि यूरोपीय राष्ट्रवाद के उपरान्त पूरे विश्व के मानचित्र में बदलाव आ गया ।

4. जुलाई 1830 की क्रांति का विवरण दें ।

उत्तर – फ्रांस में उभर रही राष्ट्रीयता की भावना जन – जन तक पहुंच चुकी थी और उसका समर्थन अनेक उदारवादी एवं सुधारवादी लोग कर रहे थे । परन्तुं चार्ल्स दशम जो निरंकुश एवं प्रतिक्रियावादी शासक था , ने उसको दबाने का कार्य किया । संवैधानिक लोकतंत्र की स्थापना न हो इस राह में उसने कई गतिरोध उत्पन्न किये । उसके प्रधानमंत्री पॉलीगेनिक  ने समान नागरिक संहिता के स्थान पर शक्तिशाली अभिजात्य वर्ग की स्थापना की तथा उन्हें विशेषाधिकार प्रदान किये । उसके इस कार्य से उदारवादियों में पोलिग्नेक के विरुद्ध 28 जुलाई 1830 ई 0 को चार अध्यादेशों के द्वारा उदार तत्वों का गला घोट दिया । फलस्वरूप फ्रांस में 28 जून 1830 ई ० से गृहयुद्ध आरम्भ हो गया इसे ही जुलाई 1830 ई 0 की क्रांति कहते हैं । इसका प्रभाव पूरे यूरोप पर पड़ा और राष्ट्रीयता की भावना का प्रस्फुटन हुआ उसमें सभी यूरोपीय राष्ट्रों के राजनैतिक एकीकरण संवैधानिक सुधारों तथा राष्ट्रवाद के विकास का मार्ग प्रशस्त किया ।

5. यूनानी स्वतंत्रता आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण दें ।

उत्तर – यूनान का अपना गौरवमय इतिहास रहा है । जिससे उसे पाश्चात्य का मुख्य सोत माना जाता रहा है । यूनानी सम्यता की साहित्यिक प्रगति विचार दर्शन , कला , चिकित्सा विज्ञान आदि क्षेत्रों की उपलब्धियों उनके प्रेरणास्रोत थे । इसके बाद भी के अधीन था । फ्रांसीसी क्रांति से संस्कृति के आधार पर जिसका उद्देश्य तुर्की शासन से यूनान को स्वतंत्र करना था । यूनान सारे यूरोपवासिया के लिये प्रेरणा एवं सम्मान का पर्याय की स्वतंत्रता के पक्ष में था । 1827 में लंदन में एक सम्मेलन हुआ जारवाही का निर्णय लिया । नेतृत्व में यूनान में विद्रोह शुरू हो गया । रूस का जार भी व्यक्तिगत रूप से यूनान तुर्की के समर्थन में सिर्फ मिश्र था । युद्ध में तुर्की की सेना बुरी तरह पराजित हुई । जिसके फैलस्वरूप यूनान को स्वायतता देने की बात हुई । फलतः 1832 ई ० में यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया और बवेरिया का शासक ‘ ओटो को राजा बनाया गया ।

वर्ग परिचर्या

1.राष्ट्रवाद के कारण यूरोप के मानचित्र में आये बदलाव का अध्ययन करें ।
उत्तर – छात्र शिक्षक की मदद से स्वयं करे । 2. शिक्षक के साथ राष्ट्रवाद के विकास की परिचर्या कर पूरे विश्व में इसके प्रसार को समझाएँ ।
उत्तर – छात्र , शिक्षक की मदद से स्वयं करें ।

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