Biography

R Venkataraman Biography in hindi | रामास्वामी वेंकटरमण जीवनी

R Venkataraman Biography | रामास्वामी वेंकटरमण की जीवनी

R Venkataraman Biography in hindi

जन्म: 4 दिसम्बर 1910

निधन: 27 जनवरी 2009

कार्य: भारत के पूर्व राष्ट्रपति

आप रामस्वामी वेंकटरमण जी  भारत के (8th) आठवें राष्ट्रपति चुनें गए थे।

जब इनका निधन हुआ, भारत सरकार ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सात दिनों का शोक घोषित किया। यह एक ऐसे व्यक्ति के लिए उचित श्रद्धांजलि थी, जिन्होंने देश और उसके लोगों की सेवा में अपना पूरा जीवन व्यतीत कर दिया था। एक सच्चे देशभक्त, वेंकटरमण के पास किसी भी पद या संगठन की अग्रणी प्रतिष्ठा थी जिसकी शक्ति से वह आगे बढ़ रहे थे।

उनके शानदार जीवन में उन्होंने कई संस्थानों का सच्चे राजनेता और बुद्धिमानी के साथ नेतृत्व किया। जब वह भारत के राष्ट्रपति थे तब उन्होंने मलयाला और सिंगापुर में हिरासत में रखने वाले भारतीयों की रक्षा की और गठबंधन की राजनीति की उथलपुथल की अध्यक्षता की। एक ही अवधि, जिसमें दो साल में तीन प्रधानमंत्रियों को देखा गया था, उन्होंने, केवल राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक भूमिका निभाई

वेंकटरमण शायद आदर्श लोक सेवकों में से सबसे अंतिम थे, जिन्हें उनके काम, अखंडता और प्रतिबद्धता के लिए उल्लेख किया गया था न कि बयानबाजी और उग्रता के लिए, जो कि आजकल के तथाकथित राजनेताओं की विशेषता है। वे नेहरू-गांधी परंपरा के एक सख्त अनुयायी थे, उनका जीवन और काम इस तथ्य का सबूत है कि उन्होंने कभी भी दो महानतम राजनेताओं को कोई दोष नहीं दिया।

पूर्व राष्ट्रपति आर.वेंकटरमन का जन्म 04 दिसम्बर 1910 को तमिलनाडू राज्य के तंजौर जिले के राजामादम नामक ग्राम में हुआ था | इनके पिता का नाम श्री रामास्वामी था | आर.वेंकटरमन  उच्चकोटि के वकील थे |

वेंकटरमन बड़े प्रतिभाशाली छात्र थे | उन्होंने 23 वर्ष की आयु में ही मद्रास विश्वविद्यालय से M.A. तथा L.L.B. की परीक्षाये पास कर ली | उनकी पत्नी का नाम जानकी है जो एक धार्मिक स्वभाव की महिला है | पति सेवा ही उनके जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य था | आर.वेंकटरमन की तीन पुत्रिया है |उनके पिता श्री के.रामास्वामी अय्यर राष्ट्रभक्त थे | पिता का प्रभाव उन पर बचपन से ही पड़ा था |

आर.वेंकटरमन सफल वकील थे | उनकी वकालत इमानदारी की वकालत थी | इस पेशे में रहकर उन्होंने धन और यश खूब प्राप्त किया | वो अपनी योग्यता और परिश्रमशीलता के कारण वकील संघ के सचिव चुने गये | किसान-मजदूरों के प्रति उनकी विशेष सहानुभूति थी | किसान-मजदूरों की सेवा में लगातार लगे रहने के कारण वेंकटरमन को उनकी यूनियनो ने नेता चुन लिया |

क्रमांक जीवन परिचय बिंदु  आर. वेंकटरमण जीवन परिचय
1. पूरा नाम रामास्वामी वेंकटरमण
2. जन्म 4 दिसम्बर 1910
3. जन्म स्थान पट्टुकोट्टय, तंजौर जिला, तमिलनाडु
4. पिता के रामास्वामी अय्यर
5. पत्नी जानकी वेंकटरमण (1938)
6. राजनैतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
7. मृत्यु 27 जनवरी 2009 दिल्ली

आर. वेंकटरमण का स्वतंत्रता की लड़ाई में साथ –

वकालत के साथ साथ आर. वेंकटरमण  भारत देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में हिस्सेदार रहे, वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक्टिव मेम्बर बने. वकालत के दौरान आर. वेंकटरमण  ने 1942 में भारत की स्वतंत्रता के लिए महात्मा गाँधी जी के साथ भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लिया. अंग्रेज सरकार ने इन्हें गिरिफ्तार कर लिया और इन्हें दो वर्ष कारावास की सजा हो गई. 1944 में अपनी रिहाई के बाद वे फिर से अंग्रेजो के विरुद्ध आन्दोलनों से जुड़ गए. देश के प्रति उनका स्नेह अपार था. 1944 में ही उन्होंने तमिलनाडु कांग्रेस समिति में श्रमिक प्रभाव का गठन किया और प्रभारी के रूप में कार्य संभाला. थोड़े समय बाद ही वे “ट्रेड यूनियन लीडर” के रूप में स्थापित हो गए. श्रमिक एवं मजदूरों के लिए वे हमेशा कम करते थे. उनकी समस्याओं को दूर करना वेंकटरमण जी की पहली प्राथमिकता होती थी. वे आपसी बातचीत एवं तालमेल से समस्या दूर करते थे. कोई और विकल्प न होने पर ही वे कानून का सहारा लेते थे और मजदूरों के हित के लिए लड़ते थे. 1949 में उन्होंने ‘श्रमिक कानून’ पत्रिका शुरू की.

आर. वेंकटरमण का राजनैतिक सफर (R Venkataraman political career) –

स्वतंत्रता प्राप्ति पश्चात् वकालत में उनकी श्रेष्ठता एवं ज्ञान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के उत्कृष्ट वकीलों की टीम में स्थान दिया. सन 1947 से 1950 तक वे ‘महाराष्ट्र बार एसोसिएशन’ के सचिव रहे. राजनीती में आते ही उन्हें 1950 में स्वतंत्र भारत की अस्थाई संसंद का सदस्य बनाया गया. 1951 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का वकील बनकर कार्यभार संभाला. तत्पश्चात 1952 में जब देश की प्रथम संसद का गठन हुआ उस समय भी आर. वेंकटरमण जी को उसका सदस्य बनाया गया. 1957 तक वे इसके सदस्य रहे. 1953 से 54 तक उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सचिव के रूप में कार्यभार संभाला.

1957 में जब लोकसभा चुनाव हुए, तो एक बार फिर से आर. वेंकटरमण जी  को सांसद के रूप में चुना गया, किन्तु पद की लालसा न दिखाते हुए उन्होंने इस पद को त्याग दिया और मद्रास राज्य के मंत्रीपरिषद का पद ग्रहण किया.  उस समय वहां के मुख्यमंत्री के कामराज ने उनकी राजनैतिक  प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1957 से 1967 तक आर. वेंकटरमण जी ने मद्रास राज्य में सहकारिता,  वाणिज्यिक कर,  श्रम, उद्योग,  यातायात तथा ऊर्जा जैसे कार्यो को सफलतापूर्वक संभाला.

1967 में तमिलनाडु में सत्ता कांग्रेस के हाथों से चली गई.  तत्पश्चात आर. वेंकटरमण जी दिल्ली आ गए और उन्हें योजना आयोग का सदस्य चुन लिया गया. इस दौरान वे उद्योगों, समाज, यातायात, अर्थव्यस्था से जुड़े कार्य संभालते थे. 1971 तक उन्होंने इस पद की गरिमा बढाई. 1980 में वे पुनः लोकसभा चुनाव जीते और सांसद बन गए. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जी ने वेंकटरमण जी को वित्त मंत्री बना दिया. 1982 से 1984 तक वेंकटरमण जी को रक्षा मंत्री का भार सौंपा गया. 22 अगस्त 1984 में उन्होंने उपराष्ट्रपति का कार्य संभाला. उसी दौरान वे राज्यसभा के अध्यक्ष भी रहे. 24 जुलाई 1987 को इन्होंने उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दे दिया और 25 जुलाई 1987 को आठवें राष्ट्रपति के रूप में शपत्र ली.

जीवन के अंतिम दिन

12 जनवरी 2009 को उन्हें Urosepsis नामक बीमारी के चलते आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया | 20 जनवरी को उनकी हालत Low BP की वजह से नाजुक होने लगी थी | इस तरह बीमारियों से लड़ते हुए 27 जनवरी 2009 को Multiple Organ Failure की वजह से नई दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में देहांत हो गया | गणतन्त्र दिवस के दुसरे दिन उनका देहांत होने से उस दिन होने वाले आयोजनों को पूर्व राष्ट्रपति की याद में रद्द कर दिया गया  | राजघाट के निकट एकतास्थल पर उनका विधि-विधान से दाह संस्कार किया गया | ऐसे राष्ट्रपति के रहने से देश की उन्नति होती है |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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