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संसद भवन के बारे में कुछ रोचक जानकारी

संसद भवन के बारे में कुछ रोचक जानकारी

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संसद भवन के बारे में कुछ रोचक जानकारी

भारतीय लोकतंत्र में संसद सर्वोचम संस्था है। जिस भवन परिसर में हमारे देश की संसद देश हित में निर्णायक आधिकारिक फ़ैसले लेती है उसे हम संसद भवन कहते है। संसद भवन को भारतीय लोकतंत्र का हृदय कहा जाता है। आइए जानते है सबसे पहले संसद भवन परिसर के बारे मे:

संसद भवन परिसर संसद भवन, संसदीय सौध औऱ संसदीय ज्ञानपीठ(library) को मिलना से बनता है। तीनो भवनों को जानने की कोशिश करते है।

संसद भवन

संसद भवन का डिजाइन दो मशूहर वास्तुकार एडविन लूट्यन्स और हर्बर्ट बेकर ने तैयार किया था। इस डिजाइन को संजीव रूप देने के लिए 12 फरवरी 1921 को” द डयूक ऑफ कनडा” ने संसद भवन की पहली ईंट रखी थी। संसद भवन को बनाने के लिए 6 साल का समय लगा।और निर्माण कार्य मे 83 लाख पाउंड का खर्च आया। संसद भवन का उद्घाटन 18 जनवरी 1927 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इर्विन ने किया। संसद भवन के सम्पूर्ण परिसर को लाल बलुआ पथरो और संगमरमर के टुकड़ों से तैयार किया गया है। लाल बलुआ पथरो पर भारत के प्राचीन स्मारकों को उकेरा गया है जो भारतीय वास्तुशिल्प की गहरी छाप छोड़ते है। संसद भवन में कुल 12 प्रवेश दरवाजे हैं पर दरवाजा NO.1 मुख्य प्रवेश दरवाजा है। संसद भवन एक गोलाकार सरंचना में निर्मित है इसकी यह गोलाकार सरंचना निरन्तरता का प्रतीक है। जो दर्शाती है कि भारत की सत्ता निरन्तर बनी रहेगी जो कभी भी समाप्त नहीं होंगीं।

संसद भवन के विशाल वृत्ताकार भवन का व्यास 560ft हैं तथा परिधि 536.33 M है जो 6 एकड़ भूमि पर फैला है। संसद भवन के प्रथम तल पर बालुई पथरो से बने 144 स्तभ है जिसमे प्रत्येक स्तभ की ऊंची 27 ft है।

संसद भवन की सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका केंद्रीय कक्ष है जो वृत्ताकार भवन के बीचों-बीच एक गुम्बद के आकार का है। इसके गुम्बद की ऊंचाई 98ft है जो इसे विश्व के भव्य गुम्बदों में से एक बनाती है। इसी गुम्बदा नुमा भवन बीचों-बीच केंद्रीय कक्ष है जो एक विशाल गोलाकार कक्ष है।

इसी केंद्रीय कक्ष में 15 अगस्त 1947 को ब्रितानी सरकार ने भारतीयों को सत्ता सौंपी थी। आज़ादी के पहले औऱ बाद, जब तक सुप्रीम कोर्ट के लिए अलग से भवन नहीं बनाया गया । तब तक इसी केंद्रीय कक्ष को सुप्रीम कोर्ट के कार्यालय के रूप में रखा गया था। अब इस केंद्रीय कक्ष का प्रयोग दोनों सदनों की सयुंक्त बैठके कराने के लिए सरकार द्वारा किया जाता है।

केंद्रीय कक्ष के तीनों ओर लोकसभा कक्ष, राज्यसभा कक्ष औऱ ग्रन्थालय भवन है।लोकसभा के मुख्या कक्ष में 550 लोगो के बैठने की व्यवस्था है वहीं राज्य सभा कक्ष में 250 लोगो की बैठने की व्यवस्था है। दोनो कक्षो का आकार घोड़े की नाल के जैसा है। लोकसभा कक्ष में जनता द्वारा निर्वाचित सदस्यों की पहली बैठक 1952 को हुईथी । वहीं राज्यसभा कक्ष में पहला सभा सत्र 13 may 1952 को हुआ था।

संसदीय सौद

इसे साल 1970 में संसद सदस्यों की सुविधा के लिए बनाया गया था। यह बहुत बड़ा भवन है इसके अंदर ससद सदस्यों के लिए बैंक सुविधा,विश्राम कक्ष, सुपर मार्केट, मनोरंजन सुविधा और केंटीन सुविधाओं की व्यवस्था एक साथ एक ही परिसर में दी गई है। आप को यह जान कर आश्चर्य होंगा की पूरे भारत देश मे सबसे सस्ता भोजन इस सौद भवन की केंटीन में मिलता है। मात्र 12 रुपये के बिल पर मनचाहा भोजन करने की सुविधा। तथा दूसरा सभी प्रकार का समान भी बाजार कीमत के 10% पर ससद सदस्यों को यहां मुहैय्या करवाया जाता है।

संसदीय ग्रन्थालय या ज्ञानपीठ

यह बहुत ही आधुनिक किस्म की लाइब्रेरी है। यहां देश-विदेश की सभी भाषाओं के समाचार पत्र-पत्रिका, किताबे और शोध रिपोर्टर उपलब्ध रहती है। यह आकर में भारत की नेशनल लाइब्रेरी कोलकाता के बाद दूसरी सबसे बडी लाइब्रेरी है। जबकि किकबो के भण्डारण में देश की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है।

इसमे देश विदेश की सभी भाषाओं को रूपांतर की भी सुविधा संसद सदस्यों के लिए दी है। इसी लाइब्रेरी का एक हिस्से को संसदीय संग्रहालय का रूप दिया गया है जिसमे उन सभी विभूतियों के लेख, भाषण ओर प्रतिमाएं सुरक्षित है जिन्होंने देश के लिए बलिदान किया है। इसी संग्रालय में भारत के हस्तलिखित सँविधान को नाइट्रोजन गैस के एक चैंबर में सुरक्षित रख गया है।

ससद भवन की अभिकल्पना मशूहर वास्तुकार एडविन लुटियन ने मध्यप्रदेश के मुनैर में स्थित 64 योगनियों के मंदिर से की थी । संसद भवन उसकी हूब-हुव कॉपी है।

जानकारी अच्छी लगी हो तो एक अप वोट करा देना।

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