History

E M S Namboodiripad | ई. एम. एस. नंबूदरीपाद

Biography of E M S Namboodiripad in Hindi
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जन्मः 13 जून 1909, मलप्पुरम, केरल

मृत्युः 19 मार्च 1998

कॅरिअरः राजनीति

एलमकुलम मनक्कल सनकरन नंबूदरीपाद एक कम्यूनिस्ट नेता और केरल के पहले मुख्यमंत्री थे। वो किसी भी भारतीय राज्य के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। उन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसके लिए कई बार जेल भी गए। वह देश की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं में से एक थे, जिन्हें आज भी याद किया जाता है। इनके नेतृत्व में पहली बार कम्यूनिस्ट पार्टी को साल 1957 के विधानसभा चुनाव में केरल की सत्ता में आने का अवसर मिला। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा और भूमि समयावधि प्रणाली में बड़ा बदलाव किया तथा केरल में प्रबल हो चुके जातिवाद तंत्र के खिलाफ भी संघर्ष किया। इस कारण ई. एम. एस. का नाम भारतीय राजनीति के  इतिहास में स्वर्णिम पन्नों पर दर्ज हो गया और राज्य के लिए किए गए उनके कार्यों को आज भी याद किया जाता है।

प्रारंभिक जीवन

एलमकुलम मनक्कल शंकरन अथवा ई. एम. एस. नंबूदरीपाद का जन्म 13 जून 1909 को केरल के मलप्पुरम में हुआ था। उनका जन्म उच्च जाति के नंबूदरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका जन्म स्थान एलमकुलम पैरिनथलमन्नातुलक था, जो वर्तमान में मलाप्पुरम जिले में है। छोटी सी आयु में वह नंबूदरी समुदाय में जातिवाद तंत्र और रूढि़वाद के खिलाफ लड़ने वाले वीटी भट्टाथिरिपाद, एम आर भट्टाथिरपाद और ऐसे ही अन्य लोगों से प्रभावित हो गए। अपने कॉलेज के दिनों में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में सक्रिय भाग लिया।

कॅरिअर

वर्ष 1931 में ईएमएस कॉलेज छोड़कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए।  सत्याग्रह आंदोलन के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उन्हें 1934 में कांग्रेस समाजवादी पार्टी में ऑल इंडिया ज्वाइंट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया।  इस दौरान नंबूदरीपाद पहली बार मार्क्स के सिद्धांतों से अवगत हुए। 1936 में पांच सदस्यों के साथ मिलकर उन्होंने केरला कम्यूनिस्ट पार्टी के संस्थापक समूह की स्थापना की। बाद में उन्होंने केरल में सामंतवाद विरोधी और साम्राज्यवाद विरोधी शक्तिशाली आंदोलन की नींव रखी। उन्होंने केरल को एक भाषाई राज्य के तौर पर एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई।

वर्ष 1939 में ईएमएस मद्रास प्रांतीय विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 1941 में उन्हें भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के केंद्रीय समिति में शामिल किया गया। 1950 में वह सीपीआई के पोलिट ब्यूरो के सदस्य बने और इसके सचिवालय के लिए चुने गए। केरल राज्य बनने के बाद राज्य के पहले चुनाव में कम्यूनिस्ट पार्टी प्रमुख दल के तौर पर उभरी। चुनाव में जीत का श्रेय ईएमएस को मिला और वह राज्य के मुख्यमंत्री बने। वह 1957-59 तक ही कुर्सी पर रह पाए क्योंकि उन्हें जब उन्हें गलत तरीके से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद 1962 में उन्हें यूनाइटेड सीपीआई का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और इसके बाद केंद्रीय समिति और 1964 में सीपीआई एम के पोलित ब्यूरो में शामिल हुए। 1967 में नंबूदरीपाद दोबारा मुख्यमंत्री बने और 1969 तक सत्ता में रहे। वर्ष 1977 में भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी एम के महासचिव निर्वाचित हुए। उन्हें एक विख्यात पत्रकार के तौर भी जाना जाता था – उन्होंने अपने अनुभवों और विचारों पर कई किताबें भी लिखीं, जो केरल के लोगों के लिए हमेशा उपयोगी बनी रहेंगी। उनकी किताबें मलयालम और अंग्रेजी भाषा में थीं और उनका प्रकाशन ‘‘ ईएमएस संचिका‘‘ के नाम से ‘ चिंथा प्रकाशन‘ द्वारा किया गया।

योगदान

ईएमएस ने अपना जीवन कम्यूनिस्ट आंदोलन को मजबूत करने में गुजार दिया। उन्होंने लगभग 70 साल देश और समाज की सेवा में बिताये। वह एक विख्यात मार्क्सवादी तथा लेनिनवादी थे। उन्होंने इन सिद्धांतों का उपयोग देश और समाज सेवा में किया। भूमि संबंधों, समाज, राजनीति, केरल, इतिहास और मार्क्सवाद दर्शन के संबंध में उनका साहित्यिक कार्य भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मृत्यु

19 मार्च 1998 को ईएमएस परलोक सिधार गए। उस समय वह 89 वर्ष के थे।

टाइमलाइन (जीवन घटनाक्रम)

1909: केरल के मलप्पुरम जिले में जन्म हुआ।

1931: स्वतंत्रता संघर्ष में भाग लिया।

1934: कांग्रेस समाजवादी पार्टी के अखिल भारतीय ज्वाइंट सेक्रेटरी बने।

1936: केरल में कम्यूनिस्ट पार्टी के संस्थापक समूह की स्थापना की।

1939: मद्रास प्रांतीय विधानसभा के लिए चुने गए।

1941: भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के लिए चुने गए।

1950: सीपीआई के पोलिट ब्यूरो के सदस्य बने।

1957: केरल के पहले मुख्यमंत्री बने।

1962: यूनाइटेड सीपीआई के महासचिव बने।

1967: दोबारा केरल के मुख्यमंत्री बने।

1977: कम्यूनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव चुने गए।

1998: केरल के तिरुअनंतपुरम में मृत्यु हो गई

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