11-biology

bihar board class 11 biology | प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

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bihar board class 11 biology | प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

             (STRUCTURAL ORGANISATION IN ANIMALS)
                                          अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
1. पेशी ऊतक की क्रियात्मक इकाई का नाम बतायें।
उत्तर-सार्कोमियर (Sarcomere)।
2. जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें ऊतकों का अध्ययन किया जाता है, क्या
कहलाता है?
उत्तर-औतिकी (Histology)।
3. सिनैप्स (Synapse) पर तंत्रिका आवेगों (Nerve Impulses) के संचरण में सहायता
करने वाले रसायन का नाम बतायें।
उत्तर-एसीटाइलकोलीन (Acetylcholin)।
4. उस कोशिका का नाम बतायें जो थ्रोम्बोसाइट उत्पन्न करते हैं।
उत्तर-Megakaryocytes.
5. कोई व्यक्ति जिसका RBC संख्या में असामान्य वृद्धि दर्शाता है, किस बीमारी से
ग्रसित है।
उत्तर-Polycythemia.
6. निम्नलिखित कार्य को सम्पन्न करने वाले ऊतकों का नाम बतायें।
(क) रक्त निर्माण, (ख) प्रतिजीवी निर्माण, (ग) स्कंदन, (घ) गमन, (ङ) संदेशों
का संवहन, (च) यांत्रिक झटकों से बचाव, (छ) मृत कोशिकाओं का निस्तारण।
उत्तर-(क) रक्त निर्माण-अस्थि मज्जा।
(ख) प्रतिजीवी निर्माण-लिम्फोसाइट एवं रक्त।
(ग) स्कंदन (Coagulation)-रक्त बिम्बाणु (Platlets)।
(घ) गमन (Locomotion)-पेशी एवं संयोजी ऊतक
(ङ) संदेशों का संवहन (Transmission of message)-तंत्रिका उत्तक (न्यूरॉन)।
(च) यांत्रिक झटकों से बचाव (Protection against mechanical shocks)-
संयुक्त उपकला (Compound epithelium)।
(छ) मृतकोशिकाओं का निस्तारण (Clearing dead cells)- रक्त/मोनोसाइट्स
संयोजी ऊतक)।
7. निम्न शृंखलाओं में सुमेलित न होने वाले अंशों को इंगित करें-
(क) एरिओलर ऊतक, रुधिर, तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन), कंडरा (टेंडॉन)
                                                                  [N.C.E.R.T. (Q.10)]
उत्तर-तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन)।
(ख) लाल रुधिर कणिकाएँ, सफेद रुधिर कणिकाएँ, प्लेटलेट, उपास्थि।
उत्तर-उपास्थि।
(ग) वाहिर्स्रावी, अतःस्रावी, लारग्रंथि, स्नायु (लिगामेंट)
उत्तर-स्नायु (लिगामेट)।
(घ) मैक्सिला, मैडिबल, लेनम, “श्रृंगिका (एंटिना),
उत्तर-श्रृंगिका (एंटिना)।
(ङ) प्रोटोनेमा, मध्यवक्ष, पश्चवक्ष तथा कक्षांग (Coxa)।
उत्तर-कक्षांग (Coxa)।
8. एक शब्द या एक पंक्ति में उत्तर दीजिए-      [N.C.E.R.T. (Q.1)]
(i) पेरिप्लेनेटा अमेरिकाना का सामान्य नाम लिखें।       उत्तर-कॉकरोच।
(ii) केंचुए में कितनी शुक्राणुधानियाँ (Spermathecae) पाई जाती हैं?
 उत्तर-चार जोड़ी (5-6, 6-7,7-8, एवं 8-9वे) खंड के इंटर सेप्टम पर दोनों किनारे में।
(iii) तिलचट्टे में अंडाशय की स्थिति क्या है?
उत्तर-कॉकरोच का अंडाशय 4,5 एवं 6 वें खंड में स्थित होता है।
(iv) कॉकरोच के उदर में कितने खंड पाये जाते हैं?   उत्तर-10 खंड।
(v) मैलपिगी नलिकाएँ कहाँ पायी जाती हैं?
  उत्तर-मध्यांत्र (Midgut) एवं पश्चांत्र (Hindgut) के संधिस्थल (Junction) पर।
9. रुधिर के कणीय अवयव क्या हैं?               [N.C.E.R.T.(Q.6)]
उत्तर-रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। इसमें उपस्थित कणीय अवयव है-लाल
रक्तकण (R.B.C.), श्वेत रक्त कण (W.B.C.) एवं बिम्बाणु (Platlets)।
                                         लघु उत्तरीय प्रश्न
1. निम्न प्रश्नों का उत्तर दें-
(i) वृक्कक (Nephridia) का क्या कार्य है?      [N.C.E.R.T. (Q.2)]
उत्तर-वृक्कक केंचुआ का उत्सर्जी अंग है जो शारीरिक द्रव (Body fluids) के
आयतन एवं संघटन (Composition) को नियंत्रित करता है।
(ii) अपनी स्थिति के अनुसार केंचुए में कितने प्रकार के वृक्कक पाये जाते हैं?
उत्तर-केंचुआ में तीन प्रकार के वृक्कक पाये जाते हैं-
(a) पटीय वृक्कक (Septal nephridia)-यह 15 वें खंड से अंतिम खंड के दोनों
ओर अंतर खंडीय पटों पर पाए जाते हैं तथा ये आंत में खुलते हैं।
(b) अध्यावरणी वृक्कक (Integumental Nephridia)-यह शरीर की देह भित्ति
के आंतरिक अस्तर पर तीसरे खंड से अंतिम खंड तक चिपका रहता है तथा शरीर की सतह
पर खुलते है।
(c) ग्रसनीय वृक्कक (PharyngealNephridia)-यह चौथे, पाँचवें एवं छठे खंड
में तीन युग्मित गुच्छों के रूप में पाए जाते हैं।
2. केंचुए के जननांगों का नामांकित चित्र बनायें।            [N.C.E.R.T.(Q.3)]
उत्तर-
3. तिलचट्टे के आहारनाल का नामांकित चित्र बनायें।   [N.C.E.R.T.(Q.4)]
उत्तर-
4. निम्न में विभेद करें-
(क) पुरोमुख एवं परितुंड, (ख) पटीय और ग्रसनीय वृक्क।  [N.C.E.R.T.(Q.5]
उत्तर-(क) पुरोमुख एवं परितुंड में अंतर-
(ख) पटीय और ग्रसनीय वृक्कक में अंतर-
5. निम्न क्या हैं तथा प्राणियों के शरीर में कहाँ मिलते हैं? [N.C.ER.T.(Q.7]
(क) उपास्थि-अणु (कोंड्रोसाइट), (ख) तंत्रिकाक्ष ऐक्सॉन, (ग) पक्ष्माभ उपवाला।
उत्तर-(क)उपास्थि-अणु (कोंड्रोसाइट)-उपास्थि (Cartilage) को बनाने वाली
कोशिका को उपास्थि अणु कहते हैं। प्राणियों के शरीर में यह नाक की नोंक, बाह्यकर्ण, मेरुदण्ड
की आसपास की अस्थियों के मध्य तथा पैर और हाथ में पायी जाती है।
(ख) तंत्रिकाक्ष (ऐक्सॉन)-यह तंत्रिका ऊतक की कोशिका न्यूरॉन का एक भाग है।
यह मुख्यत: हमारे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के अलावे शरीर के अन्य भागों में भी पाया
जाता है।
(ग) पक्ष्माभि उपकला (Ciliated epithelium)-यह एक प्रकार का उपकला ऊतक
है, इसकी कोशिकाओं के बाहरी सतह पर छोटे-छोटे सिलिया पाये जाते हैं. यह मुख्यत:
श्वसनिका (Broncheol) तथा डिम्बवाहिनी नलिकाओं (Fallopian tubes) जैसे खोखले
अंगों की भीतरी सतह में पाये जाते हैं।
6. स्तंभ -I और स्तंभ -II को सुमेलित करें।
स्तंभ-I                              स्तंभ-II
(क) संयुक्त उपकला              (i) आहारनाल
(ख) संयुक्त नेत्र                     (ii) तिलचट्टा
(ग) पट्टीय वृक्कक                 (iii) त्वचा
(घ) खुला परिसंचरण तंत्र        (iv) किरि दृष्टि
(ङ) आंत्र वलय                      (v) केंचुआ
(च) अस्थि अणु                      (vi) शिश्न खंड
(छ) जननेन्द्रिय                      (vii) अस्थि                 [N.C.E.R.T. (Q.11)]
उत्तर-(क)-(iii); (ख)–(iv): (ग)-(v); (घ)-(ii);
(ङ)-(i); (च)-(vii); (छ)-(vi).
7. निम्न वा कार्य बतायें-                           [N.C.E.R…(Q.14)
(क) मेढ़क की मूत्रवाहिनी, (ख) मैलपिगी नलिका, (ग) केंचुए की देहभित्ति।
उत्तर-(a) मेढ़क की मूत्रवाहिनी (Urinogenitalduct) -यह मूत्र एवं जननपदार्थों
दोनों को बाहर निकालने का कार्य करती है क्योंकि वृक्क से निकलने वाली मूत्रनली एवं वृषण
से निकलने वाली जनन दोनो एक ही साथ मिली रहती है और क्लोएका में खुलती है।
(b) मैलपिगी नलिका (malpighian tubules)-यह कॉकरोच के मध्यांत्र एवं
पश्चात्र के जंक्शन पर उपस्थित पीले रंग की नली है जो हीमोलिंफ से उत्सर्जी पदार्थों के
उत्सर्जन में सहायक होती हैं।
(c) केंचुए की देहभित्ति (Bodywallof Earthworm)-केंचुआ का शरीर एक पतली
अकोशिकीय परत से ढंका रहता है जिसे उपत्वचा कहते हैं, इसके नीचे अधिचर्म, दो पेशी
परतें तथा सबसे अंदर की ओर देहगुहीय उपकला पाई जाती है। इसके आंतरिक स्तर में
तीसरे से अंतिम स्तर तक अध्यावरणी वृक्कक पाया जाता है। अत: देहभित्ति शरीर की सुरक्षा
एवं उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकलने में सहायक होती है।
8. नर व मादा कॉकरोच में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-नर व मादा कॉकरोच में अंतर-
9. मेढ़क के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनायें।        [N.C.E.R.T.(Q.13)]
उत्तर-
                                        दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. रेखांकित चित्र की सहायता से विभिन्न उपकला उत्तकों का वर्णन करें। [N.C.E.R.T. (Q.8)]
उत्तर-
सरल उपकला : (अ) शल्की, (ब) घनाकार, (स) स्तंभाकार,
(द) पक्ष्माभ धारी स्तम्भाकार कोशिका।
यह ऊतक शरीर के विभिन्न अंगों के बाहरी तथा भीतरी तल को बनाती है। इसकी
कोशिकाएँ एक दूसरे से अत्यंत सटी हुई पायी जाती है जिससे उनके बीच रिक्त स्थान नहीं
पाया जाता है। इसीलिए इस ऊतक में ऊतक द्रव (Tissuefluid) बहुत कम पाया जाता है।
उपकला ऊतक निम्नलिखित दो प्रकार का होता है-
(A) सरल उपकला ऊतक (Simple epithelial tissue)-यह सामान्यतः गीली
रहने वाली सतहों पर पाया जाता है। यह निम्न प्रकार का होता है-
(i) शल्की (Squamous) उपकला ऊतक-यह चपटी कोशिकाओं के पतले स्तर से
बनता है जिसके किनारे अनियमित होते है। यह रक्त वाहिकाओं के भीतरी भाग में तथा
फेफड़ों के वायुकोष में पाया जाता है।
(ii) घनाकार (Cuboidal) उपकला ऊतक-यह घनाकार कोशिकाओं के एक स्तर
द्वारा बना होता है। यह वृक्क के नेफ्रॉन में थॉयरॉयड फॉलिकिल में, जनन एपिथिलियम में
पाया जाता है।
(iii) स्तंभाकार (Columnar) उपकला ऊतक-यह लंबी एवं पतली कोशिकालों के
एक ही स्तर का बना होता है। यह आंत के म्यूकस स्तर में, पित्ताशय के पित्त वाहिनी इत्यादि
में पाया जाता है।
(iv) पक्ष्माभि (Ciliated) उपकला ऊतक-इसकी कोशिकाएँ भी लंबी होती है जिसपर
सीलिया उपस्थित होती है। यह श्वासनली, डिंगवाहिनी, मूत्रनली में पाया जाता है।
(v) ग्रंथिल (Glandular) उपकला ऊतक-कोशिकाएँ स्तंभाकार होती हैं परन्तु यह
विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ को सावति करती हैं। यह एककोशिकीय ग्रंथि जैसे
आहारनाल की Goblet celi तथा बहुकोशिकीय ग्रंथि जैसे-लार ग्रंथि इत्यादि में पायी जाती है।
(B) संयुक्त (Compound) उपकला ऊतक-यह कोशिकाओं के एक से ज्यादा स्तर
का बना होता है और शरीर की उन जगहों पर पाया जाता है जिन पर प्राय: नमी की कमी
होती है और घर्षण के कारण नष्ट हो जाती है।
              ग्रंथिल उपकला (अ) एककोशिकीय, (ब) बहुकोशिकीय।
यह भी तीन प्रकार का होता है-
(i) संयुक्त शल्की ऊतक-यह त्वचा के Stratum corneum ग्रासनली, मुख गुहा
की नम सतह इत्यादि में पाया जाता है।
(ii) संयुक्त घनाकार ऊतक-यह शुक्र जनन नलिका, ग्राफियन फॉलिकिल में पाया
जाता है।
(iii) संयुक्त स्तंभाकार ऊतक-यह एपिग्लॉटिस एवं लैरिक्स में पाया जाता है।
2. केंचुए के परिसंचरण तंत्र का संक्षेप में वर्णन करें। [N.C.E.R.T. (Q.12)]
ऊतर-केंचुए का रुधिर परिसंचरण तंत्र बंद प्रकार का होता है, जिसमें रुधिर वाहिकाएँ,
कोशिकाएँ, हृदय सम्मिलित होता है।
केंचुए के रक्त परिवहन तंत्र के अंतर्गत निम्न रचनाएँ पायी जाती है-
(i) पृष्ठीय रक्त वाहिनी (Dorsal blood vessel)-यह सबसे बड़ी रक्त वाहिनी है
जो आहार नाल के मध्य पृष्ठ रेखा पर स्थित शरीर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक फैली रहती
है इसमें रक्त पीछे से आगे की ओर बहती है।
(ii) अधरीय रक्त वाहिनी (Ventral blood vessel)-यह आहारनाल और Sub
neural Chord के बीच में शरीर के दूसरे खंड से अंतिम खंड तक फैला होता है। इसमें
प्रथम सात खंडों में रक्त का प्रवाह पीछे से आगे की ओर और शेष खंडों में रक्त का प्रवाह
आगे से पीछे की ओर होता है।
(iii) Sub neural blood vessel-यह 14वें खंड से पिछले सिरे तक फैली हुई
रक्त वाहिनी है जो Sub neural chord के ठीक नीचे रहती है। इसमें रक्त का प्रवाह आगे
से पीछे की ओर होता है।
(iv) Lateral oesophageal vessels -ऊपर से 13वें खंड तक यह रक्त वाहिनी
पायी जाती है जो आहारनाल के अधरपार्श्व (venterolatera) तल पर स्थित होता है। इसमें
भी रक्त आगे से पीछे की ओर ही प्रवाहित होता है।
(v) Supra oesophageal blood vessel-यह 10वें से 13वें खंड तक फैला
होता है। यह Lateral oesophageal vessels से रक्त प्राप्त करता है और 10वें एवं 11वें
खंड में स्थित अग्रलूप (Anterior loop) द्वारा आपस में जुड़ा रहता है।
(vi) Heart (हृदय)-केंचुआ में दो जोड़ा हृदय पाया जाता है।
(a) पार्श्व हृदय (Lateral Heart) यह 7वें और 9वें खंड में स्थित होता है। यह
पृष्ठरक्त वाहिनी (Dorsal blood vessel) का रक्त अधर रक्त वाहिनी (ventral blood
vessel) में ले जाता है।
(b) Supra oesophageal Heart-यह 12वें और 13वें खंड में आहारनली के
दोनों पार्श्व भाग पर स्थित होता है। यह Dorsal एवं Supra oesophageal vessel का
रक्त ventral vessel में ले जाता है।
(vii) रक्तग्रंथियाँ (Blood Glands)-4th, 5th एवं 6th खंडों में आहारनाल के
पृष्ठ भाग पर छोटी-छोटी लाल रंग की ग्रंथियाँ होती हैं जिसे रक्त ग्रंथि कहते हैं। यह
हिमोग्लोबीन तथा रक्त कणों का निर्माण करती है।
3. निम्न में विभेद करें-                            [N.C.E.R.T. (Q.9))
(a) सरल उपकला एवं संयुक्त उपकला ऊतक-
उत्तर-
(b) हृदय पेशी और रेखित पेशी-
उत्तर-
(c) सघन नियमित एवं सघन अनियमित संयोजी ऊतक-
उत्तर-
(d) वसामय एवं रुधिर ऊतक-
उत्तर-
(e) सामान्य तथा संयुक्त ग्रंथि-
उत्तर-
(f) अस्थि एवं उपास्थि-
उत्तर-
(g) रक्त एवं लसिका-
उत्तर-
(h) टेंड्रॉन एवं लिगामेंट-
उत्तर-
4. Connective tissue proper के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करें।
उत्तर- इसे सामान्य तौर पर Packing Tissue भी कहा जाता है। यह त्वचा के नीचे
या विभिन्न अंगों के बीच खाली स्थानों में पाया जाता है। इस ऊतक को तीन भागों में बाँटा
जाता है।
(A) AreolarConective Tissue (अवकाशी संयोजी ऊतक)-यह ऊतक Blood
vessels और तंत्रिकाओं के चारों ओर घेरा बनाता है तथा रिक्त स्थानों को भरता है, जैसे
stroma of ovary। इस ऊतक में निम्नलिखित रचनाएँ पायी जाती हैं।
(i) Histocytes of Phagocytes -आनयामत आकार का बड़ा अधिक संख्या में
श्वेत कोशिकाएँ मैट्रिक्स में पायी जाती हैं, इन्हें Macrophages भी कहते हैं। जब कभी
शरीर के किसी अंग में चोट लगने के कारण कीटाणुओं का संक्रमण होने लगता है तो ये
कोशिकाएँ उनका भक्षण करने लगती हैं, अत: यह शरीर को स्वस्थ बनाने में सहायक होती है।
(ii) Plasma cells-यह cell histocytes से छोटी, अंडाकार या अनियमित आकार
की होती है। यह एंटीबॉडी का निर्माण करती है।
(iii) Mast cell-यह cells, Blood vessels के चारों ओर पायी जाती है। इसका
जीवद्रव्य कणिकामय होता है तथा यह रक्त को जमने से रोकने के लिए Heparin तथा
Histamine पदार्थ उत्पन्न करती है।
(iv) Lymphoid cells-इन कोशिकाओं का आकार भी निश्चित नहीं होता है। यह
भी Histocytes की ही भांति शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है।
(v) Fibroblast या Fibrocytes-यह दो प्रकार की होती है। प्रथम वे जो कि लम्बी
तथा पतली होती हैं और White fibres के गुच्छों से चिपकी रहती हैं, इन्हें white
fibroblast कहते हैं। दूसरी वे जो कि अनियमित आकार की होती हैं और Matrix में बिखरी
रहती हैं इन्हें yellow fibroblast कहते हैं। ये Fibres का निर्माण करती हैं।
Areolar Connective Tissue में निम्नलिखित दो प्रकार के Fibres भी पाये जाते
हैं
(i) श्वेत तंतु (White fibres)-यह मोटे, रेखित, शाखाहीन, दृढ़ तथा लोच रहित
होते हैं। इन्हें Collagen fibres भी कहा जाता है क्योंकि यह Collagen Protein का बना
होता है।
(i) पीत तंतु Yellow fibres) यह संख्या में कम, शाखायुक्त बिखरे हुए पाये
जाते हैं, इन्हें Elasticfibres भी कहा जाता है क्योंकि यह Elastin Protein का बना होता है।
(B) Fibrous या Dense Connective Tissue-इस ऊतक में बहुत ही सघन तंतु
पाये जाते हैं जो निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-
(i) Irregular- इसमें मुख्यत: Collagen Fibres पाये जाते है परन्तु Elastic
Fibres भी रह सकता है। यह Dermis, Testis के Tunica albuginea, Periosteum
एवं Perichondrium में पाया जाता है।
(ii) Regular-इसमें तंतु अत्यंत सघन और समांतर होते है। यह ऊतक Tendons
एवं Ligament में पाया जाता है-
Tendons- ये White fibres के बने होते हैं जो हड्डियों को पेशियों से जोड़ता है। .
Ligaments- यह yellow fibres के बने होते है जो हड्डियों के हटियों से जोड़ता है।
(C) एडायपोज संयोजी ऊतक (Adipose connective tissue)- भी लगभग
अवकाशी ऊतक के ही समान होता है, इस ऊतक में श्वेत कोशिकाओं के बीच में वसा से
भरी हुई बड़ी-बड़ी कोशिकाएँ पायी जाती हैं। वसा की ये बड़ी-बड़ी कोशिकाएँ छोटी-छोटी
वसा बिन्दुओं के मिलने से बनता है। यह ऊतक त्वचा के नीचे तथा अन्य स्थानों में वसा
संचय करता है और भोजन में काम आता है। यह शरीर के ताप को बनाये रखता है। यह
शरीर के विभिन्न अंगों को बाहरी आघातों से भी बचाता है।
5. कंकाल संयोजी ऊतक का वर्णन करें।
उत्तर-Vertebrates or chordates के शरीर की आकृति निश्चित बनाये रखने के
लिए इनमें एक ढाँचा पाया जाता है, इसी ढाँचे को कंकाल कहते हैं जिसकी रचना दो प्रकार
की वस्तुओं से होती है-
(a). Cartilage (उपास्थि), (b) Bone (हड्डी)।
(a) उपास्थि (Cartilage)-यह ऊतक कोशिका, तंतु और अपाती से निर्मित होती
है। इसके matrix में Chondrin नामक प्रोटीन पाया जाता है तथा इसके cells को
chondrioblast कहते है। chondrioblast चारों ओर से Matrix से बनी थैलियों से घिरा
रहता है। जिसे Lacunae कहते हैं। प्रत्येक Lacunae में भी एक तरल पदार्थ भरा रहता है।
प्रत्येक Lacunae में एक से चार तक कोशिकाएँ पायी जाती हैं। जब ये कोशिकाएँ एक से
अधिक होती हैं तो इसमें विभाजन होने लगती है और प्रत्येक कोशिका के चारों ओर एक
Lacunae बन जाती है। अब इन कोशिकाओं को chondriocytes कहते हैं।
अधात्री (matrix) की बाहरी सतह एक पतली झिल्ली से घिरी रहती है जिसे
Perichondrium कहते हैं। इस झिल्ली में अनेक महीन रक्तवाहिनी होती है जो उपास्थि
के कोशिका को निरन्तर भोजन और O2 पहुंँचाती है।
उच्च कशेरुकी जन्तुओं के कई अंग उपास्थि के बने होते हैं जबकि स्कॉलियोडॉन जैसे
मछलियों का पूरा कंकाल ही उपास्थि का बना होता है।
अधात्री और तंतु की प्रकृति के आधार पर उपास्थि चार प्रकार का होता है-
(i) Hyaline cartilage-इसे Non fibrous cartilage भी कहते हैं। इसका
Matrix स्वच्छ, अर्धपारदर्शक, हल्के नीले रंग का होता है; इसीलिए इसका रंग भी नीला
होता है। यह लचीली होती है। यह श्वास नली, Hyoid. sternum तथा लम्बी हड्डियों के
शिराओं पर पाया जाता है।
(ii) Elastic Cartilage-इसमें yellow fibres पाये जाते हैं, जिसके कारण यह
लचीला होता है। यह हमारे External Ear, Epiglottis,Nose और स्वरयंत्र में पाया जाता
है।
(iii) Fibrous Cartilage-इसके Matrix में white fibres पाया जाता है। अत:
यह कड़ा होता है। यह Mammalian vertebrae के Intervertebral disc के बीच तथा
PelvicGirdle में पाया जाता है।
(iv) Calcified Cartilage-इसके Matrix में Caco, के कण पाये जाते हैं जिनके
कारण यह हड्डी के समान कड़ी हो जाती है तथा शेष रचना Hyaline cartilage के समान
होता है। यह मेढ़क की Pectoral Girdle के supra-scapula एवं Pelvic Girdle के
Pubis में पाया जाता है।
(b) Bone-कुछ जन्तुओं के अतिरिक्त सभी जन्तुओं का अन्त:कंकाल अस्थि का
ही बना होता है। इसमें भी मैट्रिक्स पाया जाता है जिसमें कैल्सियम और मैग्नीशियम के
कानिट और फॉस्फेट पाये जाते हैं। इसीलिए यह कड़ी होती है। मैट्रिक्स में एक प्रकार का
लचीला प्रोटीन ओसीन पाया जाता है। अस्थि की रचना में कार्बनिक तथा अकार्बनिक दोनों
प्रकार के पदार्थ होते हैं।
अस्थि की Histology का अध्ययन करने के लिए इसे Decalcified किया जाता है।
अर्थात् अस्थि को HCI (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) में डालने पर वह मुलायम हो जाती है क्योंकि
Ca तथा Mg के CO3 एवं PO4 अम्ल में घुल जाते हैं तथा CO2 गैस बाहर निकलती है,
इस प्रक्रिया को ही Decalcification कहते हैं।
शरीर में ऐसी बहऊत-सी अस्थियांँ पाया जाता ह जा खाखलो होती हैं। खाली स्थान
को मज्जागुहा कहते हैं जिसमें एडिपोज कोशिका, तंत्रिका तंतु व रक्तवाहिनी पायी जाती है।
ये सभी सम्मिलित रूप से अस्थि के मध्य भाग में पीली अस्थि मज्जा (Yellow Bone
Marrow) का निर्माण करती हैं। अस्थि के दोनों सिरों पर लाल अस्थि मज्जा पायी जाती
है, जिनसे रक्त कोशिका का निर्माण होता है।
अस्थि के ठोस भाग में संकेन्द्रित (Concentric) धारियाँ पायी जाती हैं जिन्हें Lamellae
कहते हैं। प्रत्येक अस्थि कोशिका में एक बड़ा केन्द्रक तथा कोशिकाद्रव्य प्रवों के रूप में
पाया जाता है। उपास्थि कोशिकाओं की ही भांति अस्थि कोशिकाओं के चारों ओर भी Lacunae पाया जाता है। Lacunae से कई पतली नलिकाएँ निकलती हैं जिसे Canaliculi कहते हैं, यह एक दूसरे से जुड़कर जाल बनाती हैं जिससे पोषक पदार्थों के परिवहन में सुविधा होती है।
प्रत्येक अस्थि के चारों ओर Fibrous Membrane पायी जाती है जिसे Periosteum
कहते हैं। इसी प्रकार की एक झिल्ली मज्जा गुहा के चारों ओर भी रहती है जिसे Endosteum
कहते हैं।
स्तनधारी की अस्थि की रचना इससे कुछ भिन्न होती है। मेढ़क में पोषक पदार्थ लाने
वाली रक्तवाहिनी मज्जा गुहा या Periosteum में फैली रहती है परन्तु स्तनियों में यह
वाहिनियाँ अस्थियों के बीच में प्रवेश करके मज्जा गुहा और अधात्री तक पायी जाती हैं।
इन रक्त वाहिनियों के लिए अधात्री में बहऊत सी नलियाँ बन जाती हैं जिन्हें हैवर्सियन
कैनाल कहते हैं। ये कैनाल अस्थि लैमेली से घिरी रहती है। कैनाल तथा लैमेली सम्मिलित
रूप से हैवर्सियन तंत्र (Haversian system) का निर्माण करती हैं। कुछ Bone Lamellae,
Periosteum तथा Endosteum के बाहरी तल पर स्थित होती है जो कि परिधि लैमेली
कहलाती कुछ स्थान ऐसे भी होते हैं जहाँ हैवर्सियन कैनाल नहीं होती केवल लैमेली ही
पायी जाती है ऐसी Lamellae को Interstitial Lamellae कहते हैं।
यद्यपि सभी अस्थियाँ भौतिक रचना में लगभग समान ही होती हैं परन्तु भ्रूणीय विकास
के दौरान इनके बनने की विधि दो प्रकार की होती है। इसी आधार पर अस्थियों को निम्नलिखित
दो श्रेणियों में बाँटा जाता है-
(i) Membranous Investing Bone,
(ii) Cartilaginous T Replacing Bone.
(i) Membranous or Investing one-ऐसी अस्थि भ्रूण में त्वचा के पास स्थित
संयोजी ऊतक की झिल्लियों में कुछ परिवर्तनों के फलस्वरूप बनती है। परिवर्तनों के दौरान
सबसे पहले संयोजी ऊतकों में अनेक रक्तवाहिनी घुसकर शाखान्वित हो जाती है। इसके बाद
कुछ Osteogenic (अस्थि जनक) तंतु के गुच्छे दिखाई देने लगते हैं। शीर ही इन गुच्छों
के चारों ओर Ca के लवणों का आवरण बन जाता है। संयोजी ऊतक के इन हिस्सों को
Osteogenic Centre कहते हैं। इन भागों में ऊतक की कोशिकाएँ एकत्र होकर विभाजित
होने लगती हैं और साथ ही साथ ये Ossein का स्रवण करने लगती हैं। अतः इनसे
osteoblasts का निर्माण हो जाती है। धीरे-धीरे इसमें लैकुनी का निर्माण भी हो जाता है।
बाद में भीतरी स्तर Endosteum बाहरी स्तर Periosteum भी बन जाता है। इस प्रकार
से बनी अस्थियाँ त्वचा से दूर भीतर की ओर फँसकर कंकाल के कोमल भागों अर्थात् उपास्थि
पर जमा हो जाती हैं। खोपड़ी की समस्त हड्डियाँ इसी प्रकार की होती हैं। ये प्राय: स्पंजी होते
हैं परन्तु धीरे-धीरे ठोस हो जाती हैं।
(ii) Cartilaginous orReplacing Bone – ऐसी हड्डियाँ भ्रूण के किसी Hyaline
cartilage को नष्ट कर उसके स्थान पर बनती है। इसलिए इसके बनने की क्रिया को
Endochondrial ossification कहते हैं। Skull का कुछ भाग तथा Limbs एवं
vertebral column की सभी हड्डियाँ इसी प्रकार की होती हैं।
6. केंचुआ के पाचन तंत्र का वर्णन करें।
उत्तर-
                           केंचुए का आहारनाल
केंचुए का आहारनाल शरीर के प्रथम से अंतिम खंड तक फैली एक लंबी सीधी नली
है। इसमें निम्नलिखित भाग पाये जाते हैं
(i) मुख गुहा (Buccal cavity)-प्रथम खंड पर मुख तथा प्रथम से तृतीय खंड तक
मुख गुहा स्थित होती है। इसमें Protractor (अनाकर्षक) एवं Retractor (प्रत्याकर्षक) पेशी
जुड़ी होती है जो मिट्टी को निगलने में मदद करती है।
(ii) ग्रसनी (Pharynx) -यह नाशपाती के आकार की रचना है जो चौथे खंड में स्थित
होता है।
(iii) ग्रासनली एवं पेषणी (oesophagus and Gizzard)-ग्रसनी एक छोटी नली
में खुलती है जिसे ग्रासनली कहते हैं। यह 5-7वें खंड तक फैली रहती है तथा 8वें खंड में
एक पेशीय रचना में खुलती है, जिसे पेषणी कहते हैं। यह सड़ी गली पत्तियाँ और मिट्टी के
कणों को पिसने में मदद करता है।
(iv) अमाशय (Stomach)-यह 9-14वें खंड तक स्थित होता है। अमाशय में स्थित
कैल्सीफेरस ग्रंथियाँ ह्यूमस में उपस्थित ह्यूमिक अम्लों को उदासीन बना देता है।
(v) आंत (Intestine)-यह पंद्रहवें खंड से शुरू होकर अन्त के 23 खंडों को छोड़कर
पूरी शरीर में फैली रहती है। 26वें खंड में आंत से एक जोड़ी छोटी और शंक्वाकार आंत्रिक
अंधनाल (Intestinal Caecum) निकलती है। आंत का विशिष्ट गुण 26 से 35 खंड में आंत्र
की पृष्ठ सतह में आंतरिक वलन, भित्तिभंज का पाया जाता है जिसे टाइफ्लोसोल
(Typhlosole) कहते हैं। यह वलन आंत्र में अवशोषण के प्रभावी क्षेत्र में वृद्धि करता है।
(vi) मलाशय (Rectum)-यह अंतिम के 23 खंडों में स्थित होता है तथा आंत के
पिछले सिरे से शुरू होकर गुदा (Anus) तक फैला रहता है। इस भाग में मल छोटी-छोटी
गोलियाँ Castings का रूप धारण कर भरी होती है जो गुदा द्वार से बाहर निकलता है। केंचुआ
कार्बनिक पदार्थों से भरपूर मृदा को भोजन के रूप में लेता है। आहार नाल से गुजरते समय पाचक रस एंजाइमों का स्राव होता है जो कि पदार्थों के साथ घुल मिल जाता है। ये एंजाइम जटिल भोजन कणों को सरल अणुओं में परिवर्तित कर अवशोषण के योग्य बना देता है।
7. केंचुआ के प्रजनन अंग का वर्णन करें।
उत्तर-केंचुआ एक उभयलिंगी (Bisexual) जन्तु है। इसमें नर (Male) एवं मादा
प्रजनन तंत्र (Female Reproductive organs) के अतिरिक्त सहायक प्रजनन अंग
(Accessary Reproductive organs) भी पाये जाते हैं।
(i) Testis-Earthworm में दो जोड़ा वृषण होता है जो 10 और खंडों में रहता
है। यह क्रमश: 9/10 तथा 10/11 Intersegmental septum से जुड़ा रहता है। प्रत्येक
वृषण 3-5 Foilicles का बना होता है। यह अंगुली जैसा होता है, जिसका ऊपरी भाग पतला
रहता है जो धीरे-धीरे पीछे की ओर चौड़ा हो जाता है। वृषण Telogenic होता है क्योंकि
sperm का निर्माण वृषण के केवल एक क्षेत्र में ही होता है।
(ii) Testis Sac-प्रत्येक Testis के चारों ओर एक-एक सफेद थैली रहती है जिसे
Testis Sac कहते हैं। इसकी दीवार पतली. उजली तथा लचीली होती है।
(iii) Seminal Vesicle-11वें और 12वें खंडों के एक-एक जोड़ा शुक्राशय
(Seminal vesicle) पाया जाता है जो venterolateralside में होता है। प्रत्येक vesicle
छोटा अंडाकार तथा थैले के समान होता है। यह एक संकीर्ण Duct द्वारा Testis sac से
जुड़ा रहता है। 11वें खण्ड का vesicle 10वें खण्ड के Testis sac से इसी प्रकार 12वें खण्ड
का vesicle 11वें खण्ड के Testis sac से जुड़ा रहता है। वृषण से अपरिपक्व शुक्राणु इसी
vesicle में पहुँचता है जहाँ उसका परिपक्वन होता है।
(iv) Spermaducal Fannel or Ciliated Funnel-यह भी दो जोड़ा होता है
जो 10वें और 11वें खण्ड में Testis के नीचे रहता है। Funnel का मुख चौड़ा होता है
इसके किनारे पर सिलिया पाया जाता है। परिपक्व शुक्राणु धीरे-धीरे इसी Funnel में प्रवेश
करता है।
(v) शुक्र वाहिका (Vas deferens)-Ciliated Funnel पीछे की ओर एक पतली
तथा लम्बी नलिका से जुड़ा होता है जिसे Vas deferens कहते हैं। दायाँ और बायाँ दोनों
vas deferens आपस में एक दूसरे से चिपका रहता है। बाहर से यह एक नली के समान
दिखाई देता है परन्तु भीतर से दो भागों में बँटा रहता है। दोनों vas deferens एक दूसरे के
समानान्तर venterolateral wall पर रहता है और 18वें खण्ड के अधर सतह पर नर जनन
छिद्र द्वारा शरीर से बाहर खुलता है।
(vi) पुरस्थ ग्रंथि (Prostrate Gland)-Vasdeferens 18वें खण्ड में जाकर
Prostaticduct की सहायता से अनियमित आकार की सफेद ग्रंथी से जुड़ी रहती है जिसे
ProstrateGland कहते हैं, जो आंत के पार्श्व भाग (Lateral side) पर 16 या 17वें खण्ड
से 21वें खण्ड तक फैली रहती है। Prostrate Gland अनेक छोटे-छोटे Lobes का बना
होता है। इस ग्रंथी से एक वाहिनी निकलती है जिसे Prostratic Duct कहते हैं, यह वाहिनी
vas deferens से एक पेशीय आवरण द्वारा लिपटकर और भीतर तथा पीछे की ओर जाकर
18वें खण्ड की venterolateralwall पर स्थित नर जनन छिद्र द्वारा शरीर से बाहर खुलती है।
नर जनन छिद्र दो होते हैं। एक बाई ओर एक दाई ओर। प्रत्येक नर जनन छिद्र में तीन
छिद्र होते हैं-एक Prostratic Duct के लिए और दो शुक्र वाहिका के लिए।
Prostrate gland से एक अम्लीय स्रवण स्रावित होता है जो शुक्राणु को तैरने के लिए
एक माध्यम देता है।
(vii) Genital Papilla-17वें और 19वें खण्ड के बाहर venterolateral भाग
पर दो जोड़ा जनन पैपिला रहता है। प्रत्येक पैपिला छोटा तथा पेशीय होता है। इसपर
Adhesive Pad रहता है। यह संयुग्मन के समय विपरीत पार्टनर को पकड़ने का कार्य करता
है।
         FEMALE REPRODUCTIVE ORGANS (मादा प्रजनन अंग)
(i) वृषण अंडाशय (Ovary)-Earthworm के 13 खंड में एक जोड़ा ovary रहता
है जो 12/13 Intersegmental septum से जुड़ा रहता है। यह भी venterolateral भाग
पर रहता है। यह भी Telogonic होता है अर्थात् पुराना तथा बड़ा ova Apex पर तथा नया
एवं छोटा ova Base पर रहता है। प्रत्येक ovary में Fingerlike 5-8 Projections रहते हैं।
जिन्हें Follicles कहते हैं। Follicle के प्रस्फुटन से ovum बाहर निकलता है।
(ii) Oviducal Funnel or Ciliated Funnel-प्रत्येक ovary के ठीक पीछे एक
Oviducal Funnel रहता है। इसका Margin हमेशा सीधा तथा Smooth रहता है। इस
पर cilia नहीं रहता है। यह हमेशा खुला रहता है। अत: ovary से निकलने वाला ovum
सीधे इसमें प्रवेश कर जाता है।
(iii) Oviduct-प्रत्येक Oviducal Funnel के पीछे एक छोटा Oviduct रहता
है। इसका उपरी भाग चौड़ा होता है जो धीरे-धीरे पीछे की ओर पतला हो जाता है। दोनों
oviduct 13 खंड के मध्य से आरंभ होकर 14वें खण्ड की मध्य की ओर मुड़ता है और एक
साथ मिलकर Female Gonopore द्वारा शरीर के बाहर खुलता है।
(v) Spermatheca-यह सुराही के आकार की चार जोड़ी रचनाएँ हैं जो 6,7,8,
और 9वें खण्डों के venterolateral part पर रहता है। यह क्रमश: 5/6,6/7,7/8 तथा
8/9 Intersegmental septum से जुड़ा रहता है। प्रत्येक spermatheca छोटा, लाल
तथा Lobular होता है। इसमें दो मुख्य भाग Ampulla तना Diverticulam रहता है।
Ampulla बड़ा तथा थैले के समान रहता है। इसमें जमा भोज्य पदार्थ जाता है जो
 sperms द्वारा व्यवहार में आता है। Diverticulum पदार्थ जाता है जो sperm द्वारा व्यवहार में आता है। Diverticulum एक छोटे से Lateralbranch के समान रहता है। इसमें sperms जमा रहता है जो स्वयं इसका नहीं होता बल्कि copulation के समय दूसरे Earthworm से प्रवेश करता है। Ampulla तथा Diverticulum छोटे तथा पतले spermathecal duct में खुलता है। आगे चलकर यह Intersegmental septum के ventral भाग पर शरीर से बाहर खुलता है। अत: ventral surface पर 5/6, 6/7,7/8, तथा 8/9 Intersegmental septum के venterolateral भाग पर spermathecal Pore पाया जाता है।
8. कॉकरोच के मुखांग का वर्णन करें।
उत्तर-तिलचट्टे से सिर के नीचले भाग में मुख पाया जाता है जो कई जोड़े Cephallic
Appendages से घिरा रहता है इन Appendages को Mouth parts कहा जाता है
जिनका काम है भोजन का संग्रह कर मुख को अंदर जमा कर देना। मुखांग Biting and
chewing type का होता है इसीलिए इसे Mandibulate type भी कहते हैं।
इसमें पाये जाने वाले मुखांग निम्नलिखित हैं-
(i) Maxillae                             ―       One pair
(ii) Labium                              ―       One
(iii) Mandible                          ―       One pair
(iv) Labrum or Epiphary        ―       One
(v) Hypopharynx                     ―      One
(i) Maxillae-यह mouth का Lateral part है जो दो शाखाओं में बँटा रहता
है। प्रत्येक maxilla तीन भागों का बना होता है।
(a) Protopodite-इसमें दो खंड होते-Stipes and Cardo
(b) Endopodites-इसके अंदर भी दो खंड होते हैं जिसमें अंदरवाले को Lacinea
एवं बाहरवाले को Galea कहते हैं।
(c) Exopodite-यह Maxilla का सबसे बाहरी खंड है जो maxillary palp का
निर्माण करता है, जिसमें 5 खंड होते हैं।
     Function of Maxilla :
(i) Maxilla मुख का पार्श्व घेरा बनाता है।
(ii) Maxillary palp, Antenna के साथ भोजन को ढूँढने में मदद करता है।
(iii) Galea एवं Lacinia भोजन को मुख के अंदर Deposit कने का कार्य
करते हैं।
 (2) Labium -इसे Lower lip या 2nd pair of Maxilla भी कहते हैं। यह भी
Maxilla की तरह Protopodite endopodite एवं Exopodite का बना होता है।
जिसमें―(i) Protopodite:Divides into three pairs prementum, mentum, sub
mentum. (ii) Endopodite : Split longitudinally and form Glossa and
Paroglossa together known as lingula(iii) Exopodite: It forms Labial palp,
which has 3 segments.
Function-(i) यह मुख के नीचले सतह का निर्माण करता है। (ii) जो भोजन को
तिलचट्टा के सिर का क्षेत्र (अ) सिर क्षेत्र को दर्शाते हुए, (ब) मुख भाग।
मुख से सीधे गिरने से रोकता है।
(iii) Mandible-Mandibles एक दृढ तथा Sclerotised रचना है जिसकी संख्या
एक जोड़ा होता है। प्रत्येक Mandible जबड़े का कार्य करता है जिसके भीतरी सतह पर
teethlikestructure पाया जाता है जिसका कार्य भोजन को चबाना या काटना है। इसीलिये
तिलचट्टा के मुख को Mandibulate type or Bitting and chewing type भी कहा
जाता है।
प्रत्येक Mandible में दो तरह की दो-दो Muscles पाई जाती है जिसे क्रमश:
Adductor एवं Abductor muscles कहा जाता है।
Adductor muscles का कार्य है दोनों mandible को एक साथ लाना तथा
Abductor muscles का कार्य है इसे अलग करना। इसी के कारण Mandible द्वारा भोजन
पीसा जाता है।
(4) Labrum or Epipharynx-यह एक Broad Cuticular plate के समान की
रचना है जो मुख के ऊपर Clypeus के सहारे लगा रहता है। यह Upper lip के जैसा कार्य
करता है। अत: Upper lip कहा जाता है।
9. कॉकरोच के संयुक्त नेत्र का वर्णन करें।
उत्तर-Cockroach में head के Lateral side में kidney के आकार के दो
Compound eyes पाये जाते हैं जिसका उपरी भाग नीचले भाग की अपेक्षा अधिक चौड़ा
होता है।
प्रत्येक Compound eye बहुत से visual units का एक aggregation होता है
जिसमें प्रत्येक Unit अपने आप में एक Complete structure होता है जो स्वयं एक
प्रतिबिम्ब बनाता है। प्रत्येक visual units को Ommatidium कहा जाता है। प्रत्येक
Compound eye लगभग 2000 ommatidia रखता है जो Redially arranged रखता
है और बाहर से एक Transparent Cuticular Cover से ढंका रहता है जो Hexagenal
Facets का निर्माण करता है।
Structure of an Ommatidium-प्रत्येक Ommatidium में निम्नलिखित
रचनायें पाई जाती हैं।
(i) सबसे बाहर की ओर Ommatidium में Cuticular, Biconvex Transparent
एवं hexagonal facets वाला Lens या Cornea पाया जाता है जिसे Corneal lens भी
कहते हैं। lens की संख्या दो होती है।
(ii) Corneal lens के नीचे दो Cornegean cells पायी जाती है जो ectodermal
cells का modified form है। Cornegean cells का कार्य lens का निर्माण करना है।
(iii) कार्निजियन कोशिका के नीचे Transparent Cylindrical Crystal like एक
रचना रहती है जिसे Crystalline Cone कहते है। यह दूसरे lens का कार्य करता है जो
चारों तरफ से Vitrellaecr Cone cells से घिरा रहता है। Cone cells की संख्या 4 होती
है। इसका कार्य Crystallire Cone का निर्माण करना है।
(iv) Crystalline Conc के नीच spindle shaped, Rhabdom पाया जाता है जो
बाहर से 7photorecepto Retinular cells or Retinulae से घिरा रहता है। Rhabdom
का निर्माण Retinulae, के द्वारा ही होता है।
प्रत्येक Retinular ce’s का संबंध Nerve fibre से होता है जो Brain के optic
nerve के साथ जुड़े रहते है।
Retinular cells सबसे नीचे Basement membrane पर स्थित रहते हैं।
प्रत्येक दो Ommatidium एक-दूसरे से Pigmental cells के द्वारा अलग रहते हैं
जो दो समूह में पाया जाता है। Cone cells के चारों ओर iris peigment sheath एवं
Rhabdom के चारों ओर Retinal Pegment sheath रहता है।
Lens cornegean cells va crystalline Cone Ommatidium a Dioptic
Part एवं Retinular cells एवं Rhabdom का Receptive Part कहते हैं।
10. मेढ़क के नर एवं मादा जननांगों का वर्णन करें।
उत्तर-मेढक का नर जनन तंत्र-
मेढ़क के नर जननांग में दो Testis, vassa efferentia, Bidder’s canal,
Transverse and Longitudinalcollecting tubules और ureter इत्यादि पाया जाता है।
(i) वृषण (Testis)-Testis एक हल्की पीली रंग की अंडाकार रचना है जो
Mesorchium नामक झिल्ली द्वारा अपनी ओर के वृक्क के ventral side से जुड़ा रहता है।
वृषण के अगले सिरे से पीली तथा Branched fat bodies जुड़ी रहती है।
प्रत्येक वृषण अनेक सूक्ष्म शुक्र जनन नलिका का बना होता है जो संयोजी ऊतक द्वारा
आपस में जुड़ा रहता है। Testis चारों ओर से Tunica albuginea नामक connective
tissue के आवरण से घिरा होता है। इस आवरण में Blood vessels,Nerve fibres तथा
Interstitial cells पाये जाते हैं। Interstitial cells, Endocrine gland का कार्य करता
है जिससे male sex harmones उत्पन्न होता है। प्रत्येक शुक्र जनन नलिका की भीतरी
सतह Germinal epithelium की बनी होती है जो आधारीय झिल्ली से लगा रहता है।
Germinal epithelium की कोशिकाएं शुक्राणु जनन द्वारा विभाजित होकर शुक्राणु का
निर्माण करती है। शुक्राणु का अगला सिरा बेलनाकार और मोटा, पिछला सिरा पतला, लम्बा
एवं नुकीला तथा बीच का भाग छोटा एवं संकरा होता है जिसे सिर, पुछ एवं गर्दन कहते हैं।
(ii) Vassa efferentia-प्रत्येक Testis के भीतरी सतह से 10-12 बहुत ही पतली
अनुप्रस्थ नलिकाएँ निकलती हैं जिन्हें efferent duct or vasa efferentia कहा जाता है।
सभी vassa efferentia kidney के भीतर किनारे पर स्थित Bidder’s canal में खुलती
है I Bidder’s canal, Longitudinal collecting duct के साथ अनेक Transverse
collecting tubules के द्वारा जुड़ी रहती है। संग्राहक नलिका मूत्रनली एवं मूत्रनली क्लोएका
में खुलती है।
(iii) मूत्रजनन नली (Urinogenitalduct)-नर मेढ़क के शरीर में जनन कोशिकाओं
को बाहर निकलने के लिए अलग से कोई नली नहीं होती। अतः हर मेढ़क में एक ही प्रकार
की सामान्य नली होती है जिसे मूत्रजनन नली कहते हैं। यह vas deferens एवं मूत्रनली
दोनों का कार्य करती है।
मूत्रजनन नली वृक्क के निकट जाकर थोड़ी फैल जाती है और शुक्राशय का कार्य करती
है। जो शुक्राणु के अस्थायी भंडारण का कार्य करता है। यह नली आगे जाकर cloacal
apertune द्वारा बाहर खुलती है।
प्रारंभिक अवस्था में विडर नली नर एवं मादा दोनों मेढक में उपस्थित रहता है जो वयस्क
होने पर मादा में समाप्त हो जाता है एवं नर में आकार में छोटा होकर अंत तक उपस्थित
रहता है। Frog के मादा जननतंत्र में निम्नलिखित अंग होते हैं-ovary (-2), oviduct
(-2) uterus (-2), ureter (-2) एवं ostim.
(i) Ovary-Female frog Testis की जगह पर kidney से mesovarium
द्वारा जुड़े हुए दो ovary पाये जाते हैं। परन्तु इनका kidney से कोई संबंध नहीं रहता है।
Testis की तरह इनसे भी Fat bodies जुड़े रहते हैं।
Histological structure-प्रत्येक ovary एक saclike रचना है जो बहऊत सारे
ovarion follicles का बना होता है। प्रत्येक ovarion follicles अनगिनत संख्या में काला
और उजला ova रखता है, जो Breeding season के समय काफी बड़े-बड़े हो जाते हैं
और ovary body cavity के एक सिरे से दूसरे सिरे तक फैल जाता है।
प्रत्येक ovary के बाहरी स्तर connective tissue का बना होता है जो Germinal
epithelium के द्वारा घिरा रहता है I Germinal epithelium. Mitosis एवं Meiosis
Division द्वारा विभाजित होकर ova का निर्माण करता है। जननकाल में प्रत्येक ovary,
ovum से भर जाता है तो ovum इस समय विकास की विभिन्न अवस्थाओं में इसमें मौजूद
रहता है। Germinal epithelium में बार-बार विभाजन होने से कोशिकाओं के एक समूह
का निर्माण होता है जिसे ovarian Follicle कहते हैं।
इसी Follicle में से एक cell बड़ा होकर Follicular egg cell का निर्माण करता है
और शेष कोशिकाएँ चपटी होकर Egg cells के चारों ओर एक झिल्ली का निर्माण करती हैं
जिसे Vitelline membrane कहते हैं।
Eggs के परिपक्व हो जाने पर Follicular layer फट जाता है और अंडे Body
cavity में फैल जाते हैं और वहाँ से oviduct होते हुए uterus में जाकर जमा हो जाते है
जहाँ से मैथुन के समय ही बाहर निकलता है।
(ii) Oviduct -प्रत्येक ovary के दोनों तरफ से दो सफेद रंग की लम्बी कुंडलित
नली निकलती है जिसे Mullerianductoroviduct कहते हैं। प्रत्येक oviuduct Body
cavity में एक कीप समान की रचना द्वारा खुलती है जिसे ostiumorcilliated Funnel
कहते है जो Lungs एवं Liver के बीच में स्थित होता है।
(iii) Uterus-oviduct ही पीछे की ओर चौड़ा होकर एक अन्य रचना का निर्माण
करता है जो uterus कहलाता है, जिसकी दीवार पतली एवं लचीली होती है।
(iv) Ureter-Uteruscloaca के Dorsalsurface पर जिस दो नली की सहायता
से खुलता है उसे ureter कहते हैं।
मैथुन के समय Body cavity में स्थित अंडे ostium से होकर oviduct द्वारा Cloaca
में चले जाते हैं।
                                           वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उनके उत्तर
1. उपास्थि (Cartilage) की कोशिका को कहा जाता है-
(क) कॉन्ड्रियोब्लास्ट
(ख) ऑस्टियोब्लास्ट
(ग) फाइब्रोब्लास्ट
(घ) ऑस्टियोब्लास्ट                                    उत्तर-(क)
2 अस्थि (Bone) की कोशिका को कहा जाता है
(क) कॉन्ड्रियोब्लास्ट
(ख) ऑस्टियोब्लास्ट
(ग) फाइब्रोब्लास्ट
(घ) ऑस्टियोब्लास्ट                                    उत्तर―(ख)
3. निकटवर्ती Epithellial cells आपस में किसके द्वारा जुड़े रहते हैं
(क) डेस्मोसोम
(ख) ऑक्सीसोम्स
(ग) स्फेरोसोम
(घ) तारककाय                                                 उत्तर-(क)
4. लिगामेंट जोड़ता है-
(क) पेशी को पेशी से
(ख) अस्थि को अस्थि से
(ग) त्वचा को पेशी से
(घ) सभी                                                           उत्तर-(ख)
5.टेंड्रॉन जोड़ता है-
(क) पेशी को पेशी से
(ख) अस्थि को अस्थि से
(ग) अस्थि को पेशी से
(घ) तंत्रिका से अस्थि से                                          उत्तर-(ग)
6. मानव का अधिकांश न्यूरॉन होता है-
(क) Unipolar (एक ध्रुवीय)
(ख) Bipolar (द्विध्रुवीय)
(ग) Multipolar (बहुध्रुवीय)
(घ) Pseudounipolar (कुट एक ध्रुवीय)                  उत्तर-(ग)
7. अवकाशी (Areolar) ऊतक का मैट्रिक्स किसके द्वारा स्रावित होता है-
(क) मास्ट कोशिका
(ख) हिस्टोसाइट
(ग) प्लाज्मा कोशिका
(घ) कोई नहीं                                                             उत्तर-(क)
8. फेफड़े के वायुकोश (Airsac) में कौन-सा ऊतक पाया जाता है-
(क) स्कवायमस एपिथिलियल (ख) घनाकार एपिथेलियल
(ग) स्तंभाकार एपिथिलियल (घ) सीलियायुक्त एपिथेलियल       उत्तर-(क)
9. ऊँट के कुबड़ (Camel’s hump) में कौन-सा ऊतक पाया जाता है-
(क) Areolar (अवकाशी)
(ख) Adipose (एडिपोज)
(ग) Fibrous (तंतुमय)
(घ) Muscular (पेशी)                                              उत्तर-(ख)
10. निसिल कण (Nissil’s granules) किसमें पाया जाता है?
(क) पेशी तंतु
(ख) उपास्थि कोशिका
(ग) तंत्रिका तंतु
(घ) ये सभी                                                        उत्तर-(ग)
11. अस्थि के अघात्री (Matrix) में कौन-सा प्रोटीन पाया जाता है-
(क) इलास्टिन
(ख) हिस्टोन
(ग) ओसीन
(घ) कॉन्ड्रिन                                                     उत्तर-(ग)
12. केंचुआ के ग्रंथिल ऊतकों वाले खंड को कहते हैं-
(क) क्लाइटेलम
(ख) रोस्टेलम
(ग) पेरिऑस्टियम
(घ) कोई नहीं                                                   उत्तर-(क)
13. कॉकरोच में किस प्रकार का मुखांग पाया जाता है-
(क) Bitting and chewing type
(ख) Piercing and sucking type
(ग) Lapping type
(घ) Siphoning type                                      उत्तर-(क)
14. मेढ़क होता है-
(क) यूरियोटेलियम
(ख) यूरिकोटेलिक
(ग) अमीनोटेलिक
(घ) इनमें से कोई नहीं                                          उत्तर-(क)
15. मेढक के मस्तिष्क से कितनी जोड़ी कपाल तंत्रिकाएँ (Cranial Nerves) निकलती
हैं-
(क) 10 जोड़ी
(ख) 12 जोड़ी
(ग) 9 जोड़ी
(घ) 8 जोड़ी                                                     उत्तर-(क)
16. निम्न में से कौन कॉकरोच का उत्सर्जी अंग है-
(क) Malpighian tubules (मालपीघी नलिका)
(ख) Kidney (वृक्क)
(ग) Skin (त्वचा)
(घ) Testis (वृषण)                                 उत्तर-(क)
17. केंचुआ में रुधिर ग्रंथियाँ पायी जाती हैं-
(क) 4th,5th एवं 6th खंडों में
(ख) 8th,9th एवं 10th खंडों में
(ग) 14th, 15th एवं 16th खंडों में
(घ) नहीं पायी जाती हैं।                               उत्तर-(क)
18. कॉकरोच के लार्वा को कहते हैं-
(क) कैटरपिलर
(ख) सिस्टीसरकस
(ग) निम्फ
(घ) रेडिया                                                    उत्तर-(ग)
19. केंचुआ का नर जनन छिद्र उपस्थित होता है-
(क) 14वें खंड में
(ख) 18वें खंड में
(ग) 16वें खंड में
(घ) 28वें खंड में                                             उत्तर-(ख)
                                               □□□

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