11-biology

bihar board class 11 biology | कोशिका-संरचना एवं कार्य

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bihar board class 11 biology | कोशिका-संरचना एवं कार्य

            (UNIT 3 : CELL-STRUCTURE AND FUNCTIONS)
                                8. कोशिका : जीवन की इकाई
                            (CELL : THE UNIT OF LIFE)
                                      अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
1. निम्न का जोड़ा बनायें-                     [N.C.E.R.T. (Q.3)]
(क) क्रिस्टी                      (i) पीठिका में चपटे कलामय थैली
(ख) कुंडिका                    (ii) सूत्रकणिका में अंतर्वलन
(ग) थाइलोक्वॉयड            (iii) गॉल्जी उपकरण में बिंब आकार की थैली
              उत्तर-(क)-(ii): (ख)-(iii); (ग)-(iii).
2. प्रोकैरियोटिक कोशिका में क्या मीसोसोम होता है?
उत्तर-हाँ।
3. Exocytosis क्या है?
उत्तर-कोशिकाओं द्वारा पदार्थों को स्रवण (Secretion) क्रिया द्वारा बाहर निकालने की
क्रिया को एक्सोसाइटोसिस कहते हैं।
4. प्रोटीनयुक्त विस्तृत जालिकावत तंतु जो कोशिकाद्रव्य में मिलता है, क्या
कहलाता है।
उत्तर-साइटोपंजर।
5. डिक्टियोसोम (Dictyosomes) क्या है?
उत्तर-एक प्रकार का गॉल्जीकाय जो अकशेरुकी जंतुओं एवं पौधों की कोशिका में
एक कुंड (Single Cisternae) के रूप में रहता है।
6. माइटोकाँड्रिया की निष्क्रिय स्थिति क्या है?
उत्तर-माइटोकाँड्रिया की वह रचनात्मक स्थिति जो ATP सान्द्रण के न्यून होने पर
अथवा श्वसन शृंखला बाधित होने पर दिखाई देता है।
7. मिसोसोम (Mesosome) क्या है?
उत्तर-असीमकेन्द्रकी जीवों का कोशिका कला भीतर की ओर पट्टिकाओं (vesicles),
नली (Tubules) एवं पट्टलिकाओं (Lamellae) के रूप में निकले होते हैं, मीसोसोम
कहलाता है।
8. PPLO का पूरा नाम बतायें।
उत्तर-Pleuropneumoniae like organism
9. कोशिका का इंजन (Engine of the cell) किसे कहा जाता है?
उत्तर-राइबोसोम।
10. फ्लैजियम (Flagellum) के तीन भाग कौन-कौन होते हैं?
उत्तर-तंतु (Filament), अंकुश (hook) एवं आधारीय शरीर (Basal body)।
11. सिम्प्लाज्म (Symplasm) क्या है?
उत्तर-यह एक Plasmodesmata है जो जीवित पदार्थ एवं कोशिकाद्रव्य के बीच
निरंतरता को बनाये रखता है।
12. डायनिन (Dynein) कहाँ पाया जाता है?
उत्तर-फ्लैजिला के माइक्रोट्यूबुल्स में।
13. Sarcoplasmic Reticulum RIT?
उत्तर-Endoplasmic Raticulum जो रेखित पेशी में पाया जाता है।
14. कोशिका विज्ञान (Cytology) में ल्यूवेनहाँक का क्या योगदान है?
उत्तर-सूक्ष्मदर्शी (Microscope) का आविष्कार एंटॉनी वॉन ल्यूवेनहाँक ने ही किया
था।
15. कोशिका झिल्ली का यूनिक मेम्ब्रेन मॉडल किसने दिया था?
उत्तर-राबर्टसन ने।
16. Pili क्या है?
उत्तर-ग्राम निगेटिव (Gram-ve) जीवाणु में पाया जाने वाला लम्बवत नलिकाकार
(Elongated tubular) रचना।
17. गॉल्जी कॉम्पलेक्स की उत्पत्ति किस रचना से होती है?
उत्तर-चिकनी अंत:प्रद्रव्यी जालिका (Smooth Endoplasmic Reticulum) से
18. थाइलेकॉइड (Thyllakoid) किस कोशिकांग में पाया जाता है?
उत्तर-हरितलवक (Chloroplast) में।
19. वीलवकों में पाये जानेवाले वसा विलेय कैरोटिनॉइड कौन-कौन होते हैं?
उत्तर-कैरोटीन, जैथोफिल।
20. दो कोशिकांगों के नाम बतायें जिसमें केन्द्रक के अलावे DNA पाया जाता है?
उत्तर-माइटोकाँड्रिया एवं हरितलवक।
                                     लघु उत्तरीय प्रश्न
1. प्रोकैरियोटिक कोशिका में क्या मीसोसोम होता है? इसके कार्य का वर्णन करें।
                                                                       [N.C.E.R.T.(Q.5)]
उत्तर-प्रोकैरियोटिक कोशिका में मीसोसोम पाया जाता है। मीसोसोम एक विशेष
झिल्लीमय संरचना है जो जीवद्रव्य झिल्ली के कोशिका में फैलाव से बनती है। यह
कोशिकाभित्ति निर्माण, डीएनए प्रतिकृति व इसके संतति कोशिका में वितरण को सहायता
देता है या श्वसन, सावी प्रक्रिया जीवद्रव्य झिल्ली के पृष्ठ क्षेत्र, एंजाइम मात्रा को बढ़ाने में
भी सहायता करता है।
2. कैसे उदासीन विलेय, जीवद्रव्य झिल्ली से होकर गति करते हैं? क्या ध्रुवीय अणु
उसी प्रकार से इससे होकर गति करते हैं? यदि नहीं तो इनका जीवद्रव्य झिल्ली से
होकर परिवहन कैसे होता है?                                   [N.C.E.R.T. (C.6)]
उत्तर-उदासीन विलेय सांद्र प्रवणता के अनुसार जैसे―उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर साधारण विसरण द्वारा इस झिल्ली से होकर जाते हैं। जल भी इस झिल्ली से उच्च सांद्रता से निम्न सान्द्रता की ओर गति करता है। इस क्रिया को परासरण (osmosis) कहते हैं।
ध्रुवीय अणु जो अधुवीय लिपिड सतह से होकर नहीं जा सकते, उन्हें झिल्ली से होकर
परिवहन के लिए झिल्ली की वाहक प्रोटीन की आवश्यकता होती है।
कुछ आयन या अणुओं का झिल्ली से होकर परिवहन उनकी सांद्रता प्रवणता के विपरीत
जैसे निम्न से उच्च सांद्रता की ओर होता है। इस प्रकार के परिवहन हेतु ऊर्जा आधारित
प्रक्रिया होती है, जिसमें एटीपी का उपयोग होता है जिसे सक्रिय परिवहन कहते हैं।
3. प्रोकैरियोटिक कोशिका की क्या विशेषताएँ हैं?         [N.C.E.R.T. (Q.8)]
उत्तर-प्रोकैरियोटिक कोशिका के अन्तर्गत जीवाणु नीलहरित शैवाल, माइक्रोप्लाज्मा,
और PPLO सम्मिलित होता है। इसकी विशेषताएँ निम्न है-(i) यह सामान्यतया
यूकैरियोटिक कोशिकाओं से बहुत छोटी होती है। (ii) सभी प्रोकैरियोटिक में कोशिकाभित्ति
होती है जो कोशिकाझिल्ली से घिरी रहती है। (iii) इसमें कोई स्पष्ट विभेदित केन्द्रक नहीं
पाया जाता है। (iv) आनुवांशिक पदार्थ मुख्य रूप से नग्न व केन्द्रक झिल्ली द्वारा परिबद्ध
नहीं होता है। (v) इसमें 70s राइबोसोम पाया जाता है। (vi) इसमें उपस्थित DNA वृत्ताकार
होता है।
4. बहुकोशीय जीवों में श्रम विभाजन की व्याख्या कीजिए।     [N.C.E.R.T.(Q.9)]
उत्तर-बहुकोशीय जीवों का शरीर कई प्रकार के अंगतंत्रों द्वारा बना होता है जो श्रम
विभाजन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
प्रत्येक बहुकोशीय जीवों का निर्माण एक कोशिका से होती है जिसे भ्रूण (Zygote)
कहते हैं। जो धीरे-धीरे विभाजित होकर कई नई कोशिका का निर्माण करता है, समान प्रकार
के कोशिकाओं का समूह एक साथ मिलकर ऊतक का निर्माण करता है। कार्य के आधार पर
ऊतक अलग-अलग हो जाते हैं जो अंग का निर्माण करता है, अंग विशेष कार्य करने वाले
कोशिका के समूह को ऊतक कहते हैं। जब एक विशेष कार्य में सहयोग करने वाले अंग एक
साथ एकत्रिक होते हैं तो अंगतंत्र का निर्माण होता है जैसे-पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र परिसंचरण
तंत्र, पेशी तंत्र इत्यादि। ये सभी अलग-अलग कार्य के लिए जिम्मेवार होते है।
5. कोशिका जीवन की मूल इकाई है, इसका संक्षिप्त वर्णन करें। [N.CER.T. (Q.10)]
उत्तर-जीव शरीर की सबसे छोटी रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को कोशिका कहा
जाता है। सभी जीवधारी कोशिकाओं से बने होते हैं। इनमें से कुछ जीव एक कोशिका से बने
होते हैं जबकि कुछ बहुत सारे कोशिका से। एक जीव के शरीर में नई कोशिकाओं का निर्माण
भी उपस्थित पुरानी कोशिका के द्वारा ही होता है। जीव शरीर के आनुवांशिक गुण भी कोशिका
के द्वारा नियंत्रित होते हैं और यह गुण भी जीव के शरीर में पुरानी कोशिकाओं से ही प्राप्त
होता है। जीवन के लिए आधारभूत उपापचयी क्रियाएँ भी कोशिका के ही भीतर सम्पन्न
होती हैं।
श्लाइडेन और श्वान में भी अपने कोशिका सिद्धान्त में कहा था-(i) सभी जीव
कोशिका व कोशिका उत्पाद से ही बने होते है। (ii) सभी कोशिकाएँ पूर्व स्थित कोशिकाओं
से निर्मित होती है।
6. केन्द्रक छिद्र क्या है? इसके कार्य बतायें।                 [N.C.ER.T.(Q.11]
उत्तर-केन्द्रक के चारों ओर एक झिल्ली पाई जाती है जिसे केन्द्रक आवरण (Nuclear
Envelope) कहते है। केन्द्रक आवरण दो सामानांतर झिलियों से बना होता है जिनके बीच
10-50 नैनोमीटर का रिक्त स्थान पाया जाता है जिसे परिकेंद्रकी अवकाश कहते हैं। केन्द्रक
आवरण में चारों और अनेक सूक्ष्मछिद्र पाये जाते हैं, जिन्हें केन्द्रक छिद्र कहते हैं। यह छिद्र केन्द्रक आवरण की दोनों झिलियों के संगलन से बनता है। इन छिद्रों से होकर RNA व प्रोटीन अणु केन्द्रक से कोशिकाद्रव्य में व कोशिकाद्रव्य से केन्द्रक की ओर आते-जाते रहते हैं।
7. साइटोपंजर (साइटोस्केलेटन) क्या है?
उत्तर-ससीमकेन्द्रकी कोशिकाओं के अकारिक परिवर्तन एवं सर्वदिशीय संचलन हेतु
इनमें प्रोटीन तंतु उपस्थित होता है जिसे कोशिका कंकाल (Cytoskeleton) कहते हैं। इसकी
संरचना में निम्नलिखित भाग होते हैं-
(i) सूक्ष्मतंतु (Microfilament)-यह मैट्रिक्स में बिखरा होता है अथवा जाल या
समांतर क्रम में सज्जित होता है।
(ii) सूक्ष्म नलिकाएँ (Microtubules)-यह गोल, नलिकाकार अणुओं की बनी
खोखली नली है।
(iii) मध्यवर्गीय तंतु (Intermediate fibrils)- यह दृढ़ एवं टिकाऊ होता है।
साइटोपंजर, यांत्रिक सहायता, गति व कोशिका के आकर को बनाए रखने में उपयोगी
होता है।
8. जंतु कोशिका व पादप कोशिका में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
9. प्रोकैरिओटिक एवं धूकैरियोटिक कोशिका में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
10. ग्राम पॉजीटीव एवं ग्राम निगेटिव जीवाणु में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
11. निम्न में अंत स्पष्ट करें-
(क) सूक्ष्मनलिकाएँ एवं सूक्ष्मतंतु (ख) प्राथमिक व द्वितीयक कोशिकाभित्ति
(ग) रंग विहीन व वर्णकयुक्त लवक (घ) माइटोकॉड्रिया व हरितलवक
उत्तर-(क) सूक्ष्मनलिकाएँ एवं सूक्ष्मतंतु-
(ख) प्राथमिक व द्वितीयक कोशिकाभित्ति-
(ग) रंग विहीन व वर्णकयुक्त लवक-
(घ) माइटोकॉड्रिया व हरितलवक-
                                             दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. लाइसोसोम व रसधानी (Vacuoles) दोनों अंत: झिल्लीमय संरचना हैं, फिर भी
कार्य की दृष्टि से ये अलग होते हैं। इस पर टिप्पणी लिखें।     [N.C.ER.T.(Q.12)]
उत्तर-लाइसोसोम झिल्ली से बंधी हुई संरचना है जो संवेष्टन (Packaging) विधि
द्वारा गॉल्जीकाय से बनते हैं। लाइसोसोम के भीतर जल-अपघटकीय एंजाइम जैसे-
हाइड्रोलेज, लाइपेज, प्रोटीएजेज, कार्बोहाइड्रेजेज इत्यादि मिलते है जो अम्लीय परिस्थितियों
में अधिक सक्रिय हो जाता है। यह एंजाइम काबोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा इत्यादि के पाचन में
सक्षम होता है।
इसी प्रकार कोशिकाद्रव्य में झिल्ली से घिरी हुई एक दूसरी रचना भी होती है जिसे
रसधानी कहते हैं। इसमें पानी, रस, उत्सर्जित पदार्थ उपस्थित होते हैं जो कोशिका के लिए
उपयोगी नहीं होता है। रसधानी के चारों ओर टोनोप्लास्ट नामक झिल्ली पायी जाती है। पौधों
में बहुत से आयन व दूसरे पदार्थ सांद्रता प्रवणता के विपरीत टोनोप्लास्ट से होकर रसधानी
में जाते हैं। इस कारण इसकी सांद्रता रसधानी में कोशिकाद्रव्य की अपेक्षा काफी अधिक
होती है।
अमीबा में यह संकुचनशील रसधानी उत्सर्जन के लिए महत्त्वपूर्ण होती है। कुछ
कोशिकाओं में यह खाद्य रसधानी का निर्माण कर खाद्य पदार्थों को निगलने में सहायक
होता है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि दोनों लाइसोसोम एवं रसधानी अंत: झिल्लीमय संरचना है
परंतु कार्य की दृष्टि से दोनों अलग-अलग होते हैं।
2. रेखांकित चित्र की सहायता से निम्नलिखित की संरचना का वर्णन करें-
(i) केन्द्रक, (ii) तारककाय।                                [N.C.E.R.T.(Q.13)]
उत्तर-(I) Nucleus (केन्द्रक)-यह कोशिका के केन्द्र में स्थित एक गोलाकार या
अंडाकार रचना है, जो कोशिका के सभी कार्यों को control एवं Regulate करती है। इसके
भीतर आनुवांशिक पदार्थ DNA पाया जाता है। इसकी खोज सर्वप्रथम 1831 में Robert
Brown ने किया था। उसके पश्चात् कोशिका विज्ञान में केन्द्रक के अध्ययन के लिए एक
नयी विशेष शाखा KARYOLOGY की स्थापना की गयी।
केन्द्रक का आकार (Shape of Nucleus)-गोलाकार और अंडाकार आकृतियों के
अलावे केन्द्रक वृक्क, घोड़े के पैर इत्यादि आकार का होता है। केन्द्रक की आकृति भिन्न हो
सकती है परन्तु Nucleocytoplasmic Ratio हमेशा स्थिर होता है। NC अनुपात जितना अधिक होगा, कोशिका की क्रियाशीलता भी उतनी ही अधिक होगी। अत: केन्द्रक की आकृति उसके कोशिका क्रिया पर निर्भर करता है।
संख्या (Number)- साधारणतः प्रत्येक कोशिका में एक ही केन्द्रक होता है ऐसे
कोशिका को एक केन्द्रीय कोशिका कहते हैं, परन्तु कई कोशिकाओं में दो या अधिक केन्द्रक
होता है, जिसे बहुकेन्द्रीय कोशिका कहते हैं जैसे-रेखित पेशी की कोशिका, पैरामीशियम,
ओपेलाइना इत्यादि।
कुछ कोशिकाएँ केन्द्रक विहीन भी होती हैं जैसे-RBCof Mammals.
रचना-केन्द्रक की रचना का अध्ययन साधारणत: कोशिका विभाजन के Interphase
के दौरान किया जाता है। इस समय केन्द्रक में निम्नलिखित चार रचनाएँ दिखाई पड़ती हैं-
(i) Nuclear Envelope, (ii) Nucleoplasm,
(iii) Chromatin Network, (iv) Nucleolus.
                               प्रारूपिक केंद्रक की संरचना।
(i) Nuclear Envelope or Nuclear Membrane -Nuclear Membrane.
Plasmamembrane के ही समान प्रोटीन एवं वसा के दो स्तरों की बनी होती है, जिसमें
अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं जिन्हें Nuclear Pore कहा जाता है। इन छिद्रों के जरिए केन्द्रक
एवं कोशिका द्रव्य के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान होता है। Nuclear Membrane
Enloplasmic Reticulum से जुड़ा रहता है।
(ii) Nucleoplasm or karyolymph-यह केन्द्रक में पाया जाने वाला जीवद्रव्य
है जिसमें Phosphorus प्रोटीन, DNA तथा RNA पाया जाता है।
(iii) Chromatin Network-Nucleoplasm में धागे जैसी रचना उपस्थित रहती
है जो कोशिका विभाजन के समय स्पष्ट दिखाई देता है जिसे क्रोमोसोम कहते हैं। यह
Histone तथा Nonhistone Protein DNA एवं RNA के द्वारा निर्मित होता है।
(iv) केन्द्रिका (Nucleolus) केन्द्रक के भीतर एक या अनेक गोलाकार रचनाएँ
उपस्थित होती है जिसे केन्द्रिका कहते हैं। इसकी खोज फॉन्टाना नामक वैज्ञानिक ने की थी।
कम क्रियाशील कोशिकाओं में यह छोटी या अनुपस्थित होती है परंतु सक्रिय कोशिकाओं में
यह बड़े होते हैं।
(II) तारककाय (Centiosome) -वित्रामावस्था में केन्द्रक के निकट एक गोलाकार
संरचना पायी जाती है जिसे Centrosome कहते हैं। इसकी खोज सर्वप्रथम वोभेरी नामक
वैज्ञानिक ने किया था। कोशिका विभाजन के एनाफेज तथा टेलोफेज अवस्था में इलेक्ट्रॉन
माइक्रोस्कोप द्वारा इसका अध्ययन किया जाता है। इसके भीतर दो बेलनाकार रचनाएँ पायी
जाती है जिसे Centriole कहते हैं जो एक-दूसरे पर समकोण बनाते हुए व्यवस्थित होता है।
प्रत्येक Centriole में Cillia के आधारकण की तरह नौ (9) Peripheral fibrils होते
हैं, प्रत्येक Fibrils में तीन Sub-fibrils होते हैं।
Centriole की रचना प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, RNA तथा थोड़ी मात्रा में DNA
से होती है। DNA संभवतः नये centriole के निर्माण के लिए आवश्यक प्रोटीन संश्लेषण
में भाग लेता है। वैज्ञानिकों का ऐसा मानना था कि Metaphase के दो centriole एक
centriole के विभाजन से ही बनते हैं, लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक इसे नहीं मानते। इनके
अनुसार दूसरा कोशिका विभाजन के समय Centrosome के चारों ओर Astral Rays बन
जाती है जो centrosme की spindle fibres को जोड़ते हैं।
3. गुणसूत्रबिन्दु क्या है? किसी गुणसूत्रबिन्दु की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र का
वर्गीकरण किस रूप में होता है। अपने उत्तर को देने हेतु विभिन्न प्रकार के गुणसूत्रों
पर गुणसूत्र विन्दु की स्थिति को दर्शाने हेतु चित्र बनायें।    [N.C.ER.T. (Q.14)]
उत्तर-प्रत्येक गुणसूत्र में एक प्राथमिक संकीर्णन मिलता है जिसे गुणसूत्र बिन्दु
(सेंट्रोमियर) कहते है। इस पर बिंब के आकार की संरचना मिलती है जिसे काइनेटोकोर
कहते हैं।
गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति के आधार पर गुणसूत्रों को चार प्रकारों में विभाजित किया जा
सकता है-
(i) मध्यकेंद्रकी (Metacentric)- जब गुणसूत्र बिन्दु गुणसूत्र के बीचों बीच स्थित
होती है जिससे गुणसूत्र की भुजाएँ दो बराबर भाग में बँट जाती है मध्यकेन्द्रकी कहलाती है।
(ii) उपमध्यकेंद्रकी (Sub-Metacentric)-गुणसूत्रबिन्दु गुणसूत्र के एक किनारे के
पास स्थित होती है जिससे गुणसूत्र की एक भुजा छोटी व एक भुजा बड़ी होती है।
(i) अग्रबिन्दु (Acrocentric)-जब गुणसूत्रबिन्दु इसके बिल्कुल किनारे पर स्थित
होती है जिससे एक भुजा अत्यंत छोटी व एक भुजा बहुत बड़ी होती है।
(iv) अंत:केंद्री (Fibocentric) or Telocentric-जब गुणसूत्रबिन्दु गुणसूत्र के शीर्ष
पर स्थित होता है।
कभी-कभी एकाघ गुणसूत्र में निश्चित स्थानों पर अरंजित द्वितीय संकीर्णन भी मिलता
               गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति के आधार पर गुणसूत्रों के प्रकार
है जो गुणसूत्र के छोटे से अंश के रूप में दिखाई पड़ता है जिसे अनुसंगी (Satellite)
कहते हैं।
4. एक प्रारूपिक पादप एवं जंतु कोशिका का नामांकित चित्र बनायें।
उत्तर-
5. कोशिका भित्ति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर-सभी पादप कोशिका एवं जीवाणु हमेशा एक मोटे स्तर द्वारा घिरा रहता है,
जिसे कोशिका भित्ति (cellwall) कहते हैं। जीवाणु की कोशिकाभित्ति में जहाँ प्रोटीन, लिपिड,
पॉलीसैकेराइड के संयुक्त यौगिक रहते हैं, वहीं पादप कोशिका की भिति में सेलुलोज,
हेमीसेलुलोज एवं पेक्टिक अम्ल के यौगिक उपस्थित होते हैं। कोशिका भिति की उपस्थिति
या अनुपस्थिति पादप कोशिका एवं जंतु कोशिका के बीच विभेद स्पष्ट करता है।
कोशिका भित्ति की रचना में निम्नलिखित चार भाग होते हैं-
(i) मिडिल लैमेला (Middle Lamella)-यह कोशिका भित्ति का सबसे बाहरी भाग
है जो दो कोशिका के बीच स्थित होता है। प्राथमिक रूप से इसमें पेक्टिन पाया जाता है।
कोशिका विभाजन के पश्चात जीवद्रव्य मध्यवर्ती भाग में एकत्र होकर cell plate बनाता है
जो भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों द्वारा Intercellularsubstance में परिवर्तित हो जाता
है, इसे ही मिडिल लैमेला कहते हैं। यह जेली की तरह पेक्टिन के यौगिकों, सेलुलोज
पॉलीसेकराइड्स और कभी-कभी Woody Lignin की बनी होती है। यह Strong acid में
घुलनशील होता है।
(ii) प्राथमिक भित्ति (Primary wall)-मिडिल लैमेला के दोनों ओर स्थित स्तर को
प्राथमिक भित्ति कहते हैं। इसकी स्थिति को छोड़कर प्राथमिक एवं द्वितीयक भित्ति की
अलग-अलग पहचान मुश्किल है, क्योंकि दोनों स्तर मिलकर एक हो जाते हैं। इनकी पहचान
सिर्फ इसके ontogeny द्वारा ही किया जा सकता है। जीवद्रव्य लगातार सक्रिय होकर मिडिल
लैमेला पर एक स्तर बनाता है, इसे ही प्राथमिक भित्ति कहते हैं। यह मुलायम, लचीली तथा
कोमल सेलुलोज एवं पेक्टिन यौगिकों की बनी होती है। कुछ पौधे जैसे कवक में यह काइटिन
की बनी होती है।
(ii) द्वितीयक भित्ति (Secondarywall)-प्राथमिक भित्ति की वृद्धि के साथ जीवद्रव्य
द्वारा इसकी सतह पर एक मोटी परत बनती है जिसे द्वितीयक भित्ति कहते हैं।
(iv) तृतीयक भित्ति (Tertiary wall)-इसकी उपस्थिति अभी भी विवाद का विषय
है। यह साधारणत: द्वितीयक भित्ति के भीतर पाया जाता है। वास्तविक में यह degenerated
Plasmalining का dried up, residue होता है।
इलेक्ट्रॉन सुक्ष्मदर्शी से देखे जाने पर यह पता चलता है कि Primary wall,
Mictrofibrils की बनी होती है जो 1mm तक लम्बी होती है परन्तु इसका Section 250
+ 60A° का होता है। Microfibriis इसमें उसी प्रकार व्यवस्थित होता है जैसे-प्लाई की
लकड़ी में उपस्थित प्लाई के रेशे।
6. गॉल्जी कम्पलेक्स का वर्णन करें।
उत्तर-कुछ Eukaryoticcells को छोड़कर शेष सभी Eukaryoticcells में Golgi
complex पाया जाता है। mammals के R.B.C. Bacteria एवं Blue green Algae में
यह नहीं पाया जाता है। सर्वप्रथम Italian Neurologist Camillo Golgi ने 1898 में
Barnowl के Nerve cell में केन्द्रक के चारों ओर इसे देखा था। 1957 में बेकर ने इसे
Lipochondria की संज्ञा दी।
स्थिति (Position)-Golgibody, cells में प्राय: निश्चित स्थान पर पाया जाता है।
Plant cells तथा Invertebrates की कोशिकाओं में यह छोटी-छोटी रचनाओं के रूप में
कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते हैं इन्हें Dictyosanes कहते है।
आकार और आकृति (Shape and Size)-अलग-अलग cells में इसका shape
and size भिन्न-भिन्न होता है और एक ही कोशिका के विभिन्न क्रियाशील अवस्था में भी
भिन्न होते हैं। अधिक क्रियाशील कोशिका में यह भली-भाँति विकसित रहता है, किन्तु पुराने
व कम क्रियाशील कोशिका में लुप्त हो जाता है। पेशी कोशिका में यह छोटा रहता है किन्तु
ग्रन्थिल एवं तंत्रिका कोशिका में यह काफी बड़ा होता है।
Golgi complex का Ultrastructure का वर्णन सर्वप्रथम Dalton एवं Felix ने
किया था। गॉल्जीकाय झिल्लीदार विभागों का बना होता है, जो निम्नलिखित है-
(i) Cisternae of Flattened sacs-यह गॉल्जीकाय का सबसे मुख्य भाग है जो
कणरहित या चिकनी एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम के समान होता है। ये लंबी नली जैसी चिपटी
थैलियाँ हैं जो समूह में एक-दूसरे से समानान्तर सजी रहती हैं, इसका अंतिम दोनों सिरा फूला
हुआ होता है।
गॉल्जीकाय में उपस्थित सिस्टरनी के निकटतम आधे भाग को Forming face कहा
जाता है जो अंत: प्रद्रव्यी जलिका से जुटा रहता है। इसके विपरीत दिशा के आधे भाग को
Maturing Face कहा जाता है। कभी-कभी Cisternae में छिद्र रहता है, ऐसी स्थिति में
इन्हें Fenestration कहते हैं। Cisternae के बीच में कुछ घना पदार्थ रहता है जिसे Inter
Cisternal Matter कहते है।
(ii) Vesicles-ये छोटी-छोटी सूक्ष्म थैलियाँ है जो cisternae की चिपटी थैलियों के
दोनों सिरों के टूटने से बनती है। इसका व्यास 400-800 होता है।
(iii) Vacuoles-यह बड़ी गोलाकार थैली जैसी रचनाएँ है जो cisternae की नत्तोदर
सतह की ओर पायी जाती है। यह सिस्टरनी की चिपटी थैलियों के फैलने से बनती है जिसमें
थैली की दोनों झिल्लियाँ दूर फैल जाती है।
रासायनिक संरचना (Chemical composition)-Golgicomplex की झिल्लियों
में वसा, प्रोटीन तथा अनेक एन्जाइम्स बहुतायत में मिलते हैं। वसा में Phaspholipid की
मात्रा अधिक होती है। बेकर ने Nervecells के Golgicomplex में Lecithin तथा Cephalin की उपस्थिति का वर्णन किया है।
कार्य-(i) साव में भाग लेता है। (ii) शुक्राणु का एक्रोसोम बनाता है। (iii) पादप
कोशिका के विभाजन के समय कोशिकाभित्ति का निर्माण करता है। (iv) लाइसोसोम के निर्माण
में सहायक होता है। (v) काबोहाइड्रेट का संश्लेषण करता है।
7. Ribosome (राइबोसोम) का वर्णन करें।
उत्तर-ये अत्यन्त ही सूक्ष्म (150-200A°) घने कण है जो बहुत बड़ी संख्या में
अंत:प्रद्रव्यी जालिका की झिल्ली की सतह से चिपके रहते हैं या स्वतंत्र रूप से कोशिका
द्रव्य में बिखरे रहते है। सर्वप्रथम Brown एवं Robinson ने पादप कोशिका में तथा पैलेड
ने जंतु कोशिका में इसे देखा था तथा राबर्ट ने इसका नामाकरण किया था।
परिपक्व स्तनीय लाल रक्त कोशिका में यह नहीं पाया जाता है। इसका कण अत्यंत
महत्त्वपूर्ण होता है, क्योंकि विभिन्न प्रकार के प्रोटीनों के संश्लेषण का निर्देशन इन्हीं के द्वारा
होता है। ये Ribonucleoprotein के बने होते है जिनमें प्रोटीन और RNA की मात्रा लगभग
बराबर या किसी-किसी में 40-60% तक घटती-बढ़ती रहती है। जब राइबोसोम के कण
कोशिकाद्रव्य में समूह के रूप में पाया जाता है तो इसे पॉलीसोम या पॉलीराइबोसोम कहते
हैं। पॉलीसोम के सभी कण एक दूसरे से धागे जैसी रचना से जुड़े रहते हैं जो संभवतः
mRNA होता है।
राइबोसोम के प्रकार-परिमाण और अवसादन (sedimentation co-efficient) के
आधार पर राइबोसोम दो प्रकार का होता है-
(1) 70s Ribosome-यह अपेक्षाकृत छोटे परिमाण का होता है। यह राइबोसोम
मुख्यतः प्रोकैरियोटिक कोशिका जैसे-बैक्टिरिया, नील हरित शैवाल में पाया जाता है।
इसकी दो उपइकाइयाँ होती है-50s एवं 30s या 70s राइबोसोम में 53 विभिन्न प्रकार के
प्रोटीन, तीन श्रेणी के RNA(16sr RNA केवल 30s subunit में एवं 5sr RNA एवं 23r
RNA केवल (50s subunit में) होते हैं।
(2) 80s Ribosome-ये अपेक्षाकृत बड़े परिमाण के होते है। इसके दो Subunit
हैं-40s एवं 60s इसमें 18 S-RNA एवं 33 प्रकार के प्रोटीन तथा 60s में 5s,5.8s एवं
28s-RNA के प्रत्येक के एक-एक अणु तथा 49 प्रकार के प्रोटीन होते हैं। राइबोसोम की
दोनों उपइकाइयाँ Mg के कारण जुड़ी रहती है। Mg की मात्रा घटने पर दोनों उपइकाई अलग
हो जाती हैं। Mg की मात्रा बढ़ने पर दो राइबोसोम आपस में जुड़कर डाइमर बनाते हैं।
Functions -(i) राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण में भाग लेता है।
(ii) यह टेम्पलेट जैसा कार्य करता है क्योंकि प्रोटीन संश्लेषण में आवश्यक सामग्रियों
को इकट्ठा करता है।
8. अंतः प्रद्रव्यी जालिका का वर्णन करें।
उत्तर-अंत:प्रद्रव्यो जालिका को Ergastoplasm भी कहा जाता है। यह
interconnected महीन नलिकाओं का एक जाल जैसा तंत्र है जो सम्पूर्ण कोशिकाद्रव्य में
विद्यमान रहता है। Endoplasmic Reticulum की थैलियों और नलिकाएँ आपस में जुड़ी
हुई रहती है। कहीं-कहीं ये कोशिका झिल्ली और केन्द्रक झिल्ली की सतह पर खुलती हैं। ये जीवाणु परिपक्व R.B.C तथा भ्रूणीय कोशिकाओं में अनुपस्थित होती हैं।
सन् 1945 में सर्वप्रथम K.R.Porter ने अंत:प्रद्रव्यी जालिका की संरचना एवं कार्य के
बारे में वर्णन किया।
Ultra Structure of Endoplasmic Reticulum-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप द्वारा
इसका अध्ययन करने पर Endoplasmic Reticulum में निम्नलिखित तीन रचनाएँ पायी
जाती हैं-
(i) Cisternae-इसे Lamellae भी कहते हैं। ये लंबा; चिपटा एवं अशाखित
tubules से बनती हैं। यह यकृत एवं अग्नाशय कोशिकाओं में पाया जाता है।
(ii) Tubules-ये चिकना शाखित एवं छोटे-छोटे वसायुक्त नलिकाओं से बनती हैं।
कोलेस्टेरॉल एवं हॉर्मोन का संश्लेषण करने वाले कोशिकाओं में यह अधिक पाया जाता है।
(iii) Vesicles-यह साधारणत: गोलाकार एवं अण्डाकार होता है। प्रोटीन-संश्लेषित
कोशिकाओं में यह अधिक संख्या में पाये जाते हैं।
Endoplasmic Reticulum एक ही cells में या विभिन्न cells में निम्नलिखित दो
प्रकार की होती हैं-
(i) Granular or Rough E.R-जब EndoplasmicReticulum की झिल्ली पर
Ribosome के कण चिपके रहते है, तो उन्हें Granuler या Rough Endoplasmic
Reticulum कहते है।
(ii) Agranular or Smooth E.R-जब इसकी झिल्लियों कोई कण नहीं पाये
जाते हैं तो उन्हें Agranular या smooth Endoplasmic Reticulum कहते हैं।
Functions of Endoplasmic Reticulum:
(i) Mechanical support to cells
(ii) Helpsin Glycogenesis and Glycogenolysis.
(iii) Synthesis of cholesterol.
(iv) Synthesis of Steroid Hormones.
(v) Helps in Protein synthesis.
(vi) Lipid Synthesis.
9. माइटोकॉड्रिया की रचना और कार्य का वर्णन करें।
उत्तर-अधिकांश कोशिका के Cytoplasm में अत्यन्त ही सूक्ष्म रचनाएँ पायी जाती
है, जिन्हें माइटोकाँड्रिया कहते हैं।
Mitochondria (Mito-thread, chondrion-Granule)
इतिहास (History)-Mitochondria को सबसे पहले Koliker ने सन् 1850 ई.
में striped musclescell में देखा था। इसके बाद Fleming ने इसे Fila,Allman ने Bioplast नाम दिया। वर्तमान नाम Mitochondria 1897-98 में ‘बेन्डा’ नामक वैज्ञानिक ने दिया।
आकार (Shape) -Mitochondria का आकार परिवर्तनशील होता है। यह कोशिका
में कण, छड़ सूत्र या गोलक के रूप में पाया जाता है अर्थात् विभिन्न कोशिकाओं में इसका
आकार भिन्न होता है। माइटोकाँड्रिया अपनी आकृति को तुरंत परिस्थिति के अनुसार ताप,
अम्ल, रसायनों एवं हाइरो या हाइपरटॉनिक माध्यम में बदल सकता है।
आकृति (Size)-माइटोकोड्या का size भी परिवर्तनशील होता है। इसकी चौड़ाई
या व्यास 2um से 2um और लंबाई 7um या अधिक होती है। स्तनियों के आनाशय के
sixecrinecells में इसकी लंबाई लगभग 10um तथा उभयचरों के oocytes में इसकी लंबाई 20-40am होती है।
संख्या (Number)-Mitochondria की संख्या Higher Metabolic Activity
वाले cells में अधिक तथा Lowver Metabollic Activity वाले कोशिकाओं में कम होता
है। इसकी संख्या प्रत्येक कोशिका में प्राय: 500-2000 तक होती है। परंतु Sea Urchin के
oocytes में 140000 से 150000 तक तथा अमीबा में लगभग 50,000 होती है।
Ultra structure of Mitochondria-Palade और slostrand ने सर्वप्रथम
माइटोकाँड्रिया के सूक्ष्मसंरचना का अध्ययन किया था। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखने पर
माइटोकाँड्रिया में निम्न रचनाएँ दिखाई पड़ती हैं-
(i) माइटोकाँड्रिया Lipoproteins की बनी दोहरी झिल्लियों से घिरा होता है,
outermembrane लचीली होती है। inner membrane में भीतर की ओर अनेक उभार
निकले रहते हैं। दोनों membranes की मुटाई 60-70A° होती है, दोनों रचना एवं कार्य में
भिन्न होते हैं।
(ii) दोनो झिल्लियों के बीच के स्थान को outer chamber कहते हैं, इसकी चौड़ाई
40-70A° होती है। इसमें Adenylate kinase और Nucleoside diphosphokinase
एंजाइम भरा रहता है।
(iii) Inner membrane द्वारा घिरे स्थान को Innerchamber कहते हैं, इसमें Matrix
भरा रहता है।
(iv) Matrix में Ribosome DNA, RNA के कण, Mg एवं Ca के आपनों और
जटिल एंजाइम्स भरे रहते हैं।
(v) Inner membrane में भीतर की ओर जो अंगुलीनुमा ऊभार होता है उसे Cristae
(क्रिस्टी) कहते हैं।
(vi) भीतरी झिल्ली की भीतरी सतह से छोटे-छोटे कण जुड़े रहते हैं। इन कणों का
व्यास 70 से 100 A° तक होता है और नियमित रूप से दो कणों के बीच की दूरी 100A°
होती है इन कणों को Primany Particles,F1 Particles या Elementary Particles भी
कहते हैं।
(viii) इन कणों का वर्णन सर्वप्रथम Fernandez moren ने किया था, इसीलिए इन्हें
Sub-Units of Fernandaz moren या Oxysomes भी कहते हैं।
(ix) प्रत्येक कण के तीन भाग होते है-Head, Stalk एवं Base
(x) पहले ऐसा माना जाता था कि इन कणों में Electron Transport system तथा
oxydative Phosphorylation के लिए सभी इन्जाइम्स मौजूद हैं और इसीलिए इन्हें
Electron Transport Particles (ETP) कहा जाता था, किन्तु 1947 में रैकर ने बताया
कि इन कामों में ATP संश्लेषक इन्जाइम पाया जाता है जो oxidation और
Phasphoryiation की क्रिया से संबंधित होता है।
(xi) आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार इन कणों के सिर खंड में AT Pase, वृन्त में
OSCP (oligomycin Sensitivity conferring Protein) और आधार में Proton
channel रहता है। श्वसन श्रृंखला के लिए आवश्यक एन्जाइम्स भीतरी झिल्ली के अन्दर
मौजूद रहते हैं।
(xii) फर्नाण्डेज मोरेन ने बताया था कि बाहरी झिल्ली पर 100 A° व्यास वाला stalkless
Particles पाया जाता है, परन्तु वर्तमान में ऐसे किसी कण की उपस्थिति नहीं बनाई जाती है।
रासायनिक संरचना (Chemical composition)-Mitochondria की रासायनिक
बनावट पादप और प्राणि कोशिका में भिन्न-भिन्न होती है, किन्तु साधारणत: इसमें 65-70%
प्रोटीन, 25-30% वसा, 0.5% RNA और थोड़ी मात्रा में DNA पाये जाते हैं। वसा में 90%
Phaspholipids (lecithin and cephalin),5% cholesterol और 5% स्वतंत्र Fatty acid तथा Trliglyceride पाया जाता है।
कार्य (Functions)-
(i) ऊर्जा का उत्पादन (Production of energy)-Mitochondria के अन्दर अनेक
Enzymes पाये जाते है जो स्वांगीकृत पोषक तत्व कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन तथा वसा के
ऑक्सीकरण में मदद करते है जिससे kinetic Energy उत्पन्न होती है। इस क्रिया के लिए
Cytoplasm में Glucose, Pyruvic Acid में, Protein Amino Acids में और वसा
Fattyacid एवं Glycerol में टूट जाते हैं जो Mitochondria में प्रवेश कर जाते हैं और
krebs cycle और Electron Transport system द्वारा जल, CO2 तथा ऊर्जा का निर्माण
करते हैं। यह ऊर्जा Phosphorylation की क्रिया द्वारा ADP अणु और अकार्बनिक फॉस्फेट
अणु को जोड़कर ऊर्जायुक्त ATP अणु का निर्माण करता है। इसीलिए माइटोकाँड्रिया को
कोशिका का ऊर्जागृह कहते हैं।
(ii) यॉक का संग्रह (Storage of yolk)।
(iii) वसा का संश्लेषण एवं अमीनो अम्ल का दीर्घीकरण।
10. को.शका झिल्ली की रचना एवं कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर-कोशिका झिल्ली एक जीवित लचीली, छिद्रयुक्त, अर्द्धपारगम्य चलनात्मक
और अत्यन्त ही पतली झिल्ली है जो सिर्फ इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में ही दिखाई देती है।
सर्वप्रथम इस झिल्ली को Nageli और Cramer (1885) ने देखा था, जिसे E.overton
(1899) ने Confirm किया तथा बताया कि यह वसा की दो परतों का बना होता है।
रचना-इसकी रचना के संबंध में निम्नलिखित प्रकार के मत दिये गये हैं-
(i) गार्टर एवं ग्रेण्डेल का त्रिस्तरीय मॉडल-सर्वप्रथम 1925 ई. में R.B.C के झिल्ली
का अध्ययन करके यह मत गार्टर एवं ग्रेण्डेल ने दिया था और बताया कि कोशिका झिल्ली
वसा की दो परतों की बनी होती है बाहरी परत ध्रुवीय एवं भीतरी परत अध्रुवीय वसा
कहलाती है।
(ii) डैनिएली तथा डैवसन का त्रिस्तरीय मॉडल (Trilaminar Model of Danielli
and Davson) -सन् 1935 ई. में डैनिएली और डेवसन ने कोशिका-झिल्ली की त्रिस्तरीय
रचना प्रस्तावित किया। सन् 1938 ई. में डैनिएली और हार्वे (Harvey) ने भी इसी तरह की
रचना का मॉडल प्रस्तुत किया। इस मत के अनुसार कोशिका-झिल्ली में वसा-अणुओं के दो
स्तर होते हैं और इनके बाहर तथा अन्दर प्रोटीन-अणुओं का एक स्तर होता है (Theplasma
membrane has a bimolecular lipid structure sandwiched by an inner and an outer layers of protein molecules)। इलेक्ट्रॉन-माइक्रोस्कोप द्वारा कोशिका-झिल्ली का अध्ययन भी प्रोटीन-वसा-प्रोटीन वाली व्यवस्था (Protein-lipid-Protein arrangement) की पुष्टि करता है। डैनिएली (1938) के अनुसार (a) कोशिका झिल्ली में दो प्रकार के प्रोटीन पाये जाते है-अवशोषित प्रोटीन (absorbed protein) जो स्पर्श-रेखीय रूप से (tangentially) व्यवस्थित होता है और दूसरा गोलाकार प्रोटीन और (b) कोशिका-झिल्ली
में अनेक सूक्ष्म छिद्र (Pores) पाये जाते हैं जिसका व्यास 7 होता है और है और जो प्रोटीन
अणुओं से घिरा रहता है। इन छिद्रों के जरिये जल और आयन (ions) कोशिका के आरपार
होते रहते हैं।
(iii) इकाई-झिल्ली (unit membrane)- रॉबर्टसन (Robertson, 1960) ने पाया कि
अधिकांश कोशिकीय अणु अंगों (cell organelles) की झिल्लियों में त्रिस्तरीय बनावट मौजूद
है और इसलिये सन् 1959 ई. में उन्होंने ‘इकाई-झिल्ली’ की परिकल्पना प्रतिपादित किया।
इकाई-झिल्ली, कोशिका-झिल्ली, केन्द्रक-कला, एन्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम, गॉल्जी
                       Unit membrane model of Robertson
कम्प्लेक्स, लाइसोसोम, प्लास्टीड और माइटोकॉडिया की बाहरी तथा भीतरी झिल्लियों में
पायी जाती है। इकाई झिल्ली में प्रोटीन-वसा प्रोटीन वाली व्यवस्था होती है। बाहरी तथा
भीतरी प्रोटीन की तह में से प्रत्येक 20A° मोटी होती है। वसा-अणु दो तहों में सजी होती है और दोनों तहों की मोटाई ध्रुवीय समूह सहित 35A होती है। वसा अणुओं के प्रत्येक ध्रुवीय समूह 5A° मोटी होती है जो प्रोटीन के साथ जुड़ा रहता है। दोनों तहों के वसा अणु जलविरोधी (hydrophobic) अधुवीय समूहों के जरिये वन्डरवाल-शक्ति (Vanderwaal’s forces) के
कारण आपस में जुड़े रहते हैं। इकाई झिल्ली को कभी-कभी दोहरी या द्विस्तरीय (double layered) झिल्ली भी कहते हैं जिसमें से प्रत्येक स्तर बाहर की ओर प्रोटीन अणु से और अन्दर की ओर वसा-अणु से बना होता है। रॉबर्टसन के अनुसार इकाई-झिल्लीयुक्त सभी कोशिका-रचनाओं (Nuclear membrane, Endoplasmic Reticulum, Mitochondria, Golgicomplex, lysosomes, etc.) की उत्पत्ति कोशिका-विकास की प्रथम अवस्था में कोशिका-झिल्ली के अन्तर्वेशन (invagination) के द्वारा होती है।
(iv) दात् झिल्ली मॉडल (Greater Membrane model)-इस मॉडल में प्लाज्मा
झिल्ली त्रिस्तरीय होती है और इकाई की तरह प्रोटीन-वसा-प्रोटीन अणुओं से बनी होती है।
झिल्ली की भीतरी सतह पर असंयुग्मी (non-conjugated) प्रोटीन की एक तह होती है।
झिल्ली की बाहरी प्रोटीन की तह से ग्लाइको-प्रोटीन के अणु जुड़े रहते हैं और इलाइको-
कैलिक्स (glycocalyx) कहलाते हैं। ग्लाइको-प्रोटीन (glycoprotein) से ओलिगोसैकेराइड
की पार्श्व-श्रृंखला और सियालिक अम्ल (Sialic acid) के शीर्ष जुड़े रहते हैं। कार्बोहाइड्रेट
प्रोटीन से जुड़कर दृढ़ता प्रदान करता है। प्रोटीन के कारण झिल्ली लचीली और मजबूत बनी
रहती है।
Greater membrane model of Plasma membrane
(v) प्रोटीन अन्तर्वेधी वसा मॉडल (Protein Penetrating Lipid Model) – इस
मत के अनुसार प्रोटीन अणु वसा-अणुओं के बीच-बीच में मौजूद रहते हैं।
(4.) बेन्सन का मॉडल (3enson’s model)-बेन्सन (1966) के अनुसार
कोशिका झिल्ली में प्रोटीन एवं वसा का जलविरोधी साहचर्य (Hydrophobic association)
वसा का शीर्ष झिल्ली की सतह पर रहता है और इसकी पूंँछ का जलविरोधी अंश प्रोटीन
के अन्दर जलविरोधी पूरक (Complementary) अंश से जुड़ा रहता है।
                   Benson’s model of cell membrane.
(ख) तरल मोजेक मॉडल (Fluid Mosaic Model)-सन् 1972 ई. में सिंगर एवं
निकॉल्सन (SingerandNicolson) ने यह मॉडल प्रस्तुत किया। इसके अनुसार फॉस्फोलिपिड अणुओं के बीच-बीच में गोलाकार प्रोटीन अणु (Globularprotein molecules) बिखरे रहते हैं और मोजेक का रूप प्रस्तुत करते हैं। गोलाकार प्रोटीन दो प्रकार होते हैं-परिधीय बाहरी प्रोटीन (Peripheral extrinsic Protein) तथा आन्तर प्रोटीन (Intrinsic Protein)।
बाहरी प्रोटीन घुलनशील होता है और वहा अणुओं के बाहर स्थिर रहता है। आन्तर प्रोटीन
घुलनशील होता है और वसा की एक या दोनों परतों को भेदता है। इसका जलप्रेमी
(hydrophilic) अंश कोशिका-झिल्ली के बाहर और जलविरोधी (hydrophobic) अंश मध्य
भाग में रहता है।
             Fluid mosaic model of singer & nicolson
कोशिका झिल्ली (Plasma Membrane) के कार्य-
(i) कोशिका को एक निश्चित आकृति प्रदान करना
(ii) गहरी आवातों से कोशिका को सुरक्षित रखना
(iii) विभिन्न कोशिकाओं के बीच पदार्थों के आवागमन में सहायता करना
(iv) Pinocytosis (cell drinking) एवं Phagocytosis (cell eating) में सहायता
करना।
                                            वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. इनमें से कौन सही नहीं है?                  [N.C.E.R.T.(Q.1)]
(क) कोशिका की खोज रॉबर्ट ब्राउन ने की थी।
(ख) श्लाइडेन और श्वान ने कोशिका सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
(ग) वर्चाव के अनुसार कोशिका पूर्व स्थित कोशिका से बनती है।
(घ) एक कोशिकीय जीव अपने जीवन के कार्य एक कोशिका के भीतर करते हैं।
                                            उत्तर-(क)
2. नई कोशिका का निर्माण होता है-                [N.C.E.R.T.(Q.2)]
(क) जीवाणु किण्वन से
(ख) पुरानी कोशिकाओं के पुनरुत्पादन से
(ग) पूर्व स्थित कोशिकाओं से
(घ) अजैविक पदार्थों से                          उत्तर-(ग)
3. इनमें से कौन-सा सही है-                          [N.C.E.R.T.(Q.3)]
(क) सभी जीवित कोशिकाओं में केन्द्रक मिलता है।
(ख) जंतु व पादप कोशिकाओं में पुष्ट कोशिवाभिति होती है।
(ग) प्रोकैरियोटिक की झिल्ली में आवरित अंगक नहीं मिलते हैं।
(घ) कोशिका का निर्माण अजैविक पदार्थों से नए सिरे से होता है।
                                               उत्तर-(ग)
4. पादप कोशिका जंतु कोशिका से किसकी उपस्थिति के कारण भिन्न होती है?
(क) माइटोकॉन्ड्रिया
(ख) कोशिकाभित्ति
(ग) गॉल्जीकाय
(घ) राइबोसोम                          उत्तर-(ख)
5. Desmosome, किससे संबंधित होता है-
(क) साइटोलाइसिस
(ख) कोशिका विभाजन
(ग) कोशिका उत्सर्जन
(घ) कोशिकाससंजक                    उत्तर-(घ)
6. Tonoplast एक पारगम्य (Permeable) झिल्ली है जो निम्नलिखित में से किसके
चारों ओर उपस्थित होता है-
(क) केन्द्रक
(ख) लाइसोसोम
(गतारकाय
(घ) रिक्तिका                                उत्तर-(घ)
7. राइबोसोम किसका केन्द्र होता है-
(क) प्रकाश संश्लेषण
(ख) लाइसोसोम
(ग) श्वसन
(घ) रिक्तिका                                 उत्तर-(घ)
8. गॉल्जी काम्पलेक्स किसमें नहीं पाया जाता है-
(क) उच्च श्रेणी के पौधे
(ख) यीस्ट
(ग) लीवर कोशिका
(घ) नील हरित शैवाल                         उत्तर-(घ)
9. राइबोसोम का खोज किसने किया था?
(क) गॉल्जी
(ख) पोर्टर
(ग) पैलेड
(घ) राबर्टसन                                   उत्तर-(ग)
10. कोशिकाभित्ति की सबसे छोटी इकाई है-
(क) मिडिल लैमेला
(ख) माइक्रोफाइबिल
(ग) मिसेल
(घ) फाइब्रिल                                  उत्तर-(ग)
11. लाइसोसोम में पाया जाता है-
(क) कार्बोहाइड्रेट
(ख) केन्द्रक
(ग) हाइड्रोलाइएज
(घ) हॉर्मोन्स                                    उत्तर-(ग)
12. पादप कोशिकाभित्ति में पाया जाता है-
(क) हेमी सेलूलोज
(ग) पैक्टिन
(ख) सेलूलोज
(घ) ये सभी                                     उत्तर-(घ)
13. कोशिका झिल्ली का तरल मोजैक मॉडल किसने दिया था-
(क) वाटसन एवं क्रिक
(ख) सिंगर एवं निकॉलसन
(ग) डेनियलीव डेवसन
(घ) राबल्सन                                  उत्तर-(ख)
14. कोशिका का रसोईघर (kitchen) किसे कहा जाता है-
(क) लवक
(ख) लाइसोसोम
(ग) माइटोकॉड्रिया
(घ) केन्द्रिका                                     उत्तर-(क)
15. कुछ कवकों के कोशिकाभित्ति में पाया जाता है-
(क) लिगानिन
(ख) पेक्टिन
(ग) सुबेरिन
(घ) काइटिन                                      उत्तर-(घ)
16. Elementary Particles, उपस्थित होता है-
(क) राइबोसोम में
(ख) लाइसोसोम में
(ग) गॉल्जीकाय में
(घ) माइटोकॉड्रिया में                           उत्तर-(घ)
17. माइटोकॉंड्रिया किसमें नहीं पाया जाता है-
(क) मानव यकृत कोशिका (ख) मदक की यकृत कोशिका
(ग) मानव इरिथ्रोसाइट
(घ) मानव तंत्रिका कोशिका                    उत्तर-(ग)
18. कणयुक्त (Granular) अंत: प्रद्रव्यी जालिका पर पाया जाता है-
(क) राइबोसोम
(ख) लाइसोसोम
(ग) काइनेटोप्लास्ट्स
(घ) लवक                                            उत्तर-(क)
19. ऑक्सी श्वसन की क्रिया कहाँ होती है-
(क) राइबोसोम
(ख) केन्द्रक
(ग) माइटोकॉडिया
(घ) गॉल्जीकाय                                    उत्तर-(ग)
20. सौर ऊर्जा को ATP या रासायनिक ऊर्जा में बदलता है-
(क) हरितलवक
(ख) राबोसोम
(ग) परऑक्सीसोम
(घ) माइटोकॉड्रिया                                 उत्तर-(क)
                                                 □□□

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