9th sanskrit

9 class sanskrit notes – वीर कुँवर सिंहः

9 class sanskrit notes

class – 9

subject – sanskrit

lesson 12 – वीर कुँवर सिंहः

वीर कुँवर सिंहः
(भारतस्य प्रथमे स्वतंत्रतासंग्रामे नेतृरूपेण वीर कुँवर सिंहः वृद्धोऽपि वीरतया भागं गृहीतवान्। धूर्ताः वैदेशिकास्तेन पराजिता:। तस्य वीरस्य चरित्रमयं पाठ: वर्णयति।)

(भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीर कुँवर सिंह ने वृद्ध होते हुए भी नेता के रूप में वीरतापूर्वक भाग लिया। धूर्त विदेशी उनके द्वारा पराजित हुए। यह पाठ उस वीर के चरित्र का वर्णन करता है।)

1. शौर्यस्य पराक्रमस्य धैर्यस्य च समन्वयरूपो वीरकुँवरसिंह देशस्य स्वतन्त्रतार्थम् आन्दोलनस्य अनुपमः सेनानी: आसीत् । बिहारराज्यस्य भोजपुरमंडलस्य जगदीशपुरग्रामेऽस्य जन्माभवत्। जनको ऽस्य साहेबजादासिंह: अतीव प्रभावशाली
पुरुषः। देवीभक्तः कुँवरसिंहः आखेटकुशलः आसीत् ।

संधि विच्छेद : स्वतन्त्रतार्थम् =.स्वतन्त्रता + अर्थम्। जगदीशपुरग्रामेऽस्य = जगदीशपुर ग्रामे + अस्य। जन्माभवत् = जन्म + अभवत्। जनकोऽस्य = जनक + अस्य।
शब्दार्थ : समन्वयरूपो = सम्मिलित रूप।
आखेटकुशल: = शिकार करने में कुशल। शौर्य =वीरता। अस्य = इसका, (आदरार्थ) इनका।

हिन्दी अनुवाद : शौर्य, पराक्रम तथा धैर्य के सम्मिलितरूप वीर कुँवर सिंह देश के स्वतन्त्रता आन्दोलन के अनुपम सेनानी थे। बिहार राज्य के भोजपुर जिला के जगदीशपुर गाँव में इनका जन्म हुआ था। इनके पिता साहेबजादा सिंह बहुत प्रभावशाली पुरुष थे। देवीभक्त कुँवर सिंह शिकार करने में दक्ष थे।
ही

2. तारुण्ये एतस्य विवाहः गयाप्रमण्डले स्थितस्य सूर्यतीर्थस्य ‘देव’ नामकस्य भूस्वामिनः फतेहनारायणसिंहस्य कन्यया जातः। कुँवरसिंहे सिंहासनमारूढे सति जगदीशपुरे अनेके जनकल्याणस्य कार्यक्रमाः सञ्चालिताः। अनेन उदारहृदयेन न्यायव्यवस्थायां सर्वेवां वर्गाणां प्रतिनिधित्वं नियोजितम्। सर्वत्र शान्तिः समृद्धिश्च संस्थापिते।

संधि विच्छेद : सिंहासनमारूढे = सिंहासनम् + आरूढे। समृद्धिश्च = समृद्धि: + च।

शब्दार्थ : तारुण्ये = जवानी में। कन्यया = पुत्री के साथ। भूस्वामिनः = जमींदार। अनेन = इसके (इनके) द्वारा। जात: = हुआ। सर्वेषां वर्गाणाम् = सबी वर्गों का।

हिन्दी अनुवाद : जवानी में इनका बिवाह गया प्रमण्डल में स्थित देव नामक सूर्यतीर्थ के जमींदार फतेहनारायण सिंह की ुत्री से हुआ। कुँवर सिंह के सिंहासन आरूढ़ होने पर अनेको जनकल्याण के कार्य आरम्भ हुए। इस उदारहृदय कुँवर द्वारा न्यायव्यवस्था में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व दिया गया। सब जगह शान्ति समृद्धि स्थापित हो गयी।

3. 1845 तमे खीष्टवर्षे भारते प्रखररूपेण आंग्लशासनविरोधस्य ज्वाला प्रज्वलित, तदनीम् आंग्लशासकेषु भयं व्याप्तम्। आंग्लानां विरोधे प्रचलितेषु आन्दोलने। कुँवरसिंहस्य संक्रिया भूमिका बभूव। 1857 तमे ख़ीष्टवर्षे भारतस्य प्रथम स्वतंत्रतासंग्रामोऽभवत्। कुँवरसिंह : स्वसेनायां वीरयुवकान् गृहीतवान् । आंग्लाधि कारिणः आन्दोलनं विफलीकर्तु तथा आन्दोलनकारिणः अवरोद्धुं निग्रहीतुं, ताडयितं. च अनेकान् उपायान् अकुर्वन् 1857 तमे ख्रीष्टवर्षे जूनमास्य 19 तमे दिनाडके पाटलिपुत्रे स्वतंत्रतासेनानिनः त्रिरङ्गं ध्वजं समुत्तोलितवन्तः । तत्र टेलरस्य दमनचक्रेण
अनेके वीरपुत्राः निगृहीताः मृत्युदण्डं च प्राप्ताः।

संधि विच्छेद : स्वतन्त्रतासंग्रामोऽभवत् = स्वतन्त्रता + संग्राम: + अभवत्। आंग्लाधिकारिणः = आंग्ल + अधिकारिणः।

शब्दार्थ : तमे खीष्टवर्षे = ई० सन् में। प्रखररूपेण = उग्र रूप से। तदानीम् = उस समय। गृहीतवान् = लिये भरती किये, शामिल किये। अवरोद्धुम् = रोकने के लिये। ताडयितुम् = पीड़ित करने के लिये। बिफलीकर्तुम् = बिफल करने हेतु। निग्रहितुम = गिरफ्तार करने के लिये।

हिन्दी अनुवाद : 1845 ई० सन् में भारत में उग्र रूप से अंग्रेजी शासन के विरोध की ज्वाला प्रज्वलित हुई। उस समय ब्रिटिश शासकों में भय व्याप्त हो गया| अंग्रेजों के विरोध में प्रज्वलित आन्दोलन में कुँवर सिंह की सक्रिय भूमिका हुई। 1857 ई० सन् में भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम हुआ। कुँवर सिंह ने अपनी सेना में वीर युवकों को शामिल किया। ब्रिटिश अधिकारियों ने आन्दोलन को विफल करने, आन्दोलनकारियां को रोकने, पकड़ने तथा पीड़ित करने के लिये अनेको उपाय किया। 1857 ई सन् जून महीने की 19 तारिख को स्वतन्त्रता सेनानियों ने पाटलिपुत्र में तिरंगा ध्वज फहराया वहाँ टेलर के दमनचक्र द्वारा अनेकों वीर पुत्र पकड़े गये और मृत्युदण्ड प्राप्त किया।

4. तद्वर्षे जुलाईमासस्य 26 तमे दिनांके दानापुर-शिबिरस्य विद्रोहिणः सैनिकाः आरा प्रति प्रस्थातुम् आरब्धवन्तः कुँवरसिंहस्य नेतृत्वे आत्मनः उत्सर्गाय प्रस्तुता:। जुलाईमासस्य 29/30 दिनाङ्के 500 सेनिकैः सह डनवरनामक: आंग्लसैन्याधिकारी वीरकुँवरसिंहन पराजितोऽभवत्। अंनया घटनयाक्रोतिकारिषु उत्साहः वर्धितः। तदा सम्पूर्णे
प्राचीनशाहाबादमंडले कुँवरसिंहस्य अधिकारः सञ्जात: कुँवरसिंह: क्षेत्रात् क्षेत्रान्तर गत्वा विद्रोहम् उद्घोषयत् जनान् च संघटितान् अकरोत्। अस्मिन् क्रमे तेन रामगढस्य,मिर्जापरस्य, विजयगढस्य च यात्रा कृता। नवम्बरस्य सप्तमे दिनाङ्के ग्वालियरस्य सोना कैँवरसिंहस्य सेनायां समाविष्टा। कुँवरसिंहस्य विजयाभियानम् आजमगढे, गाजीपुरे, सिकन्दरपुरे च सफलतया सम्पन्नम्।

सधि विच्छेद : तद्वर्षे = तत् + वर्षे। सैन्याधिकारी = सैन्य + अधिकारी। पराजितोऽभवत् = पराजितः + अभवत् । विजयाभियानम् = विजय + अभियानम्।

शब्दार्थ : प्रस्थातुम् = प्रस्थान करना। आरब्धवन्तः = आरम्भ कर दिया। उत्सर्गाय = बलिदान करने के लिये। अनया घटनया = इस घटना से। सञ्जात: = हो गया। उद्घोषयत् = घोषणा की। क्षेत्रात् क्षेत्रान्तरम् = एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र को, एक जगह से दूसरी जगह को। गत्वा = जाकर। समाविष्टा = सम्मिलित हो गयी।

हिन्दी अनुवाद : उसी वर्ष जुलाई मास के 26 तारिख को दानापुर सैनिक शिविर के विद्रोही सैनिक आरा के लिये प्रस्थान कर गये और अपने को बलिदान हेतु कुँवर सिंह के नेतृत्व में प्रस्तुत कर दिया। जुलाई माह के ही 29-30 तारिख को 500 सैनिकों के साथ डनवर नामक ब्रिटिश सैनिक अधिकारी कुँवर सिंह द्वारा पराजित हुआ । इस घटना से क्रान्तिकारियों में उत्साह बढ़ गया। तब पूरे प्राचीन शाहाबाद जिले पर कुँवर सिंह का अधिकार हो गया। कुँवर सिंह ने एक जगह से दूसरी जगह जाकर विद्रोह की घोषणा की और (लड़ाई के लिये) लोगों को संगठित किया। इस क्रम में उन्होंने रामगढ़, मिर्जापुर तथा विजयगढ़ की यात्रा की। 7 नवम्बर को ग्वालियर की सेना कुँवर सिंह की सेना में शामिल हो गयी। कुँवरसिंह का विजय अभियान आजमगढ़, और सिकन्दरपुर में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

5. 1858 तमे तमे खीष्टाब्दे अप्रैल मासस्य 22 तमे दिनाङ्के वीरकुँवरसिंहस्य स्वसैनिकैः सह गङ्गापारं गच्छतः आंग्लानां भुशुण्डीगोलिकाप्रहारेण दक्षिणहस्तो विकृतो जात:। सः स्वयमेव हस्तं खड्गेन खण्डयित्वा गड्गायै समर्पितवान्। ततो द्वितीये दिने 23 तमे दिनाङ्के ‘ले ग्रैण्ड’ नामकम् आंग्लसेनापतिं स पराजितवान् । अनेन सर्वत्र वीरकुँवरसिंहस्य जयघोषः समारब्धः। अप्रैलमासस्य अयमेव 23 तमो दिनाङ्कः
विजयदिवसः इति समुद्घोषितः।

संधि विच्छेद : स्वयमेव = स्वयम् + एव। समुद्घोषित = सम् उद्घोषितः।

शब्दार्थ : आंग्लानाम् = अंग्रेजों के भुशुण्डीगालिकाप्रहारेण = बन्दूक की गोली के लगने से। दक्षिणहस्तः = दाहिना हाथ। विकृतः = घायल। स्वयमेव = अपने से ही। खण्डयित्वा = घोषित हुआ।

हिंदी अनुवाद : 1858 ई० सन् में 22 अप्रैल को अपने सैनिकों के साथ गंगा पार करते समय अंग्रेजों की बन्दूक की गोली लगने से वीर कुँवर सिंह का दाहिना हाथ घायल हो गया। उन्होंने अपने से ही अपना घायल हाथ काट कर गंगा को समर्पित कर दिया। इसके दूसरे दिन 23 अप्रैल को ‘ले ग्रैन्ड’ नामक अंग्रेज सेनापति इनके द्वारा पराजित हुआ। इससे सब जगह कुँवर सिंह का जयघोष होने लगा। अप्रैल महीने का यही 23 तारिख विजय दिवस के रूप में घोषित हुआ।

6. युद्धे सततं संघर्षरतस्य वीरकुँवरस्य शरीरावयवाः विकृताः व्रणान्विताश्च जाता:। फलतः अप्रैलमासस्य 26 तमो दिनाङ्के भारतमातुः वीरपुत्रोऽयं दिवंगतः। सत्यमेव
भणितम्- ‘कीतिर्यस्य स जीवति।’

संधि विच्छेद : शरीरावयवाः = शरीर + अवयवा:। व्रणान्वितांश्च = व्रणान्विताः + च। वीरपुत्रोऽयम् = वीरपुत्रः + अयम्। सत्यमेव = सत्यम् + एव। कीतिर्यस्य = कीर्ति: + यस्य।

शब्दार्थ : सततम् = लगतार। अवयवा: = अंग। विकृताः = घायल। व्रणान्विताः = घावों से युक्त। दिवंगतः = मृत्यु को प्राप्त हुए। भणितम् = कहा गया है । यस्य = जिसकी। कीर्तिः = यश। जीवति = जीता है, अमर है।

हिन्दी अनुवाद : युद्ध में लगातार संघर्षरत वीरकुँवर सिंह के शरीर के अङ्ग घायल हो गये और घावों से भर गये। परिणामस्वरूप 26 अप्रैल को भारतमाता का यह
वीरपुत्र मृत्यु को प्राप्त हुआ। सत्य ही कहा गया हैं। जिसकी कीर्ति है, वही अमर है।
सारांश
शौर्य, धैर्य और पराक्रम से युक्त वीर कुँवर सिंह का जन्म बिहारराज्य के भोजपुर जिलान्तर्गत जगदीशपुर गाँव में हुआ था जवानी में इनका विवाह देव के फतेहनारायण सिंह की कन्या से हुआ। इनके सिंहासनारूढ़ होने के साथ ही जनकल्याण के कई कार्य आरम्भ हुए। न्यायव्यवस्था में इन्होंने सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व दिया। इस कारण सर्वत्र सुख-शान्ति तथा समृद्धि फैल गयी। 1845 ई० सन् में अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला भड़की। कुँवर सिंह ने
इसमें सक्रिय भूमिका निभाई। 1857 में प्रथम स्वतन्त्रता संघर्ष आरम्भ होते ही इन्होंने अपनी सेना में वीर युवकों को शामिल किया। 19 जुलाई 1857 को स्वतंत्रता सेनिनियां ने पटना में अपना ध्वज फहराया। इस प्रयास में अनेकों वीरपुत्र मारे गये। पुनः उसी वर्ष
26 जुलाई की दानापुर सैनिक छावनी के विद्रोही सैनिक आरा जाकर कुँवर सिंह का सेना के साथ मिल गये। 29-30 जुलाई को डनवर नामक अंग्रेज अधिकारी 500सैनिकों के साथ कुँवर सिंह द्वारा पराजित हुआ। इस घटना से क्रान्तिकारियों के उत्साहमें काफी वृद्धि हुई। कुँवर सिंह ने अनेक स्थानों पर जाकर युक्कों को संगठित किया और विद्रोह की घोषणा की। आजमगढ़, गाजीपुर और सिकन्दरपुर पर इनका विजय अभियान सफल रहा।
22 अप्रैल 1858 को अपने सैनिकों के साथ गंगा पार करते समय अंग्रेजों की बन्दुक की गोली लगने से इनका दाहिनां हाथ बेकार हो गया। इन्होंने स्वयं उस हाथ को काटकर गंगा को समर्पित कर दिया दूसरे दिन 23 अप्रैल को ‘ले ग्रैन्ड’ नामक अंग्रेज सेनापति भी इनके द्वारा पराजित हुआ । अब तो सर्वत्र कुँवर सिंह का जयघोष
होने लगा। यही 23 अप्रैल विजय दिवस घोषित हुआ। लगातार युद्धों के कारण अत्यधिक घायल होने से 26 अप्रैल 1858 को इनकी मृत्यु हो गयी । अपनी कीर्ति के कारण ये इतिहास में अमर हो गये। ‘यस्यकीर्तिः सः जीवति’ की उक्ति चरितार्थ हुई।

व्याकरण
1. समास विग्रहः
आखेट कुशलः = मृगयायां दक्षः (सप्तमी तत्पुरुष)
सिंहासनमारूढे =सिंहासने आरूढे (सप्तमी तत्पुरुष)
अनुपमः = न उपमा यस्य सेः (बहुव्रीहिः)
जनकल्याणम् = जनानां कल्याणम् (षष्टी तत्पुरुष)
क्षेत्रान्तरम् = अन्यत् क्षेत्रम् (कर्मधारय:)
उदारहदयेन = उदारहृदयं यस्य तेन(बहुव्रीहिः)
शरीरावयवाः = शरीरस्य अवयवाः (षष्ठी तत्पुरुष)
त्रिरङ्गः = त्रयो रङ्गा यस्मिन् (बहुव्रीहिः)
आंग्लाधिकारिणः = आंग्लानाम् अधिकारिण: (षष्ठी तत्पुरुष)

2. प्रकृति-प्रत्ययविभाग-व्युत्पतिः
शौर्यम् = शूर + ष्यञ्।
धैर्यम् = धीर + ष्यञ्।
तारुण्यम् = तरुण + ष्यञ्।
आरूढ: = आ + रुह + क्त।
विफलीकर्तुम् = विफल + च्वि + कृतुमुन्।
अवरोद्धुम् = अव + रुध् + तुमुन्।
निग्रहीतुम् = नि + ग्रह + तुमुन्।
समुत्तोलितवन्तः = सम् + उत् + तुल् + णिच् + क्तवतु।
खण्डयित्वा = खण्ड + णिचु + क्त्वा।
विकृत = वि + कृ + क्त।
गत्वा = गम् + क्तवा।

अभ्यास: (मौखिकः )

1. अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तरं वदत-
(क) भारतीय स्वतंत्रतान्दोलनस्य अनुपमः सेनानी क: आसीत्?
(ख) कुँवरसिंहस्य जन्म कस्मिन् ग्रामे अभवत् ?
(ग) कुँवरसिंहस्य पिता क: आसीत्?
(घ) कुँवरसिंहः कस्मिन् कुशलः ?
(ङ) कुँवरसिंहः कस्याः भक्तः आसीत्?
उत्तर-(क) भारतीय स्वतंत्रान्दोलस्य अनुपमः सेनानी वीरकुँवरसिंह : आसीत्।
(ख) कुँवरसिंहस्य जन्म जगदीशपुर ग्रामे अभवत्।।
(ग) कुँवरसिंहस्य पिता साहेबजादासिंह: आसीत्।
(घ) कुँवरसिंहः आखेटकुशल: आसीत्।
(ङ) कुँवरसिंहः देवीभक्तः आसीत्।

2. उत्तरं वदत
(क) कस्य कन्यया कुँवरसिंहस्य विवाहः अभवत्?
(ख) कुत्र कुँवर सिंहेन सर्वेषां प्रतिनिधित्वम् नियोजितम्?
(ग) आंग्लविद्रोहस्य का प्रज्वलिता?
(घ) कुँवरसिंहस्य सक्रिया भूमिका कुत्र बभूव?
(ङ) केषां दमनचक्रेण वीरपुत्रा: निगृहीता:?
उत्तर-(क) फतेहनारायणसिंहस्य कन्यया वीरकुँवररिंहस्य विवाह: अभवत्।
(ख) जगदीशपुरे न्यायव्यवस्थायां कुँवरसिंहेन सर्वेषां प्रतिनिधित्वम् नियोजितम्।
(ग) आंग्लविद्रोहस्य ज्वाला प्रज्वलिता।
(घ) कुँवरसिंहस्य सक्रिया भूमिका स्वतंत्रतासंग्रामे अभवत् ।
(ङ) टेलरस्य दमनचक्रेण वीरपुत्रा: निगृहीताः।

3. अधोलिखितानां पदानां प्रत्ययं वदत-
(क) ताडयितुम् = तुमुन्
(ख) अभियानम् = ल्युट्
(ग) खण्डडित्वा = णिच्+ क्ल्वा
(घ) विकृतः = क्त:
(ङ) पराजितवान् = क्तवतु

अभ्यासः (लिखितः )

1. एकपदेन उत्तरं दत्त-
(क) भोजपुरमण्डलं कुत्र विद्यते?
(ख) कुँवरसिंहस्य पिता क: आसीत्?
(ग) फतेहनारायण सिंह: कस्य भूस्वामी आसीत्?
(घ) कति सैनिकैः सह कुँवरसिंहः डनवरं पराजितवान्?
(ङ) कुँवरसिंह: कं खड्गेन खण्डितवान्?
उत्तर-(क) बिहारराज्ये
(ग) सूर्यतीर्थस्य देवस्य (घ) पञ्चशतै:
(ङ) स्वयंस्य दक्षिणहस्तम्
(ख) साहेबजादासिंहः

2. पूर्ण वाक्येन उत्तरं लिखत-
(क) कुँवरसिंहस्य विवाह: कया अभवत्?
(ख) भारते आंग्लविद्रोहस्य ज्वाला प्रखररूपेण कदा प्रज्वलिता आसीत्?
(ग) कुँवरसिंहस्य उदारता कुत्र वर्तते?
(घ) भारतस्य प्रथमस्वतंत्रतासंग्राम: कदा अभवत् ?
(ङ) कुँवरसिंहः कदा दिवंगतः?
(च) कुँवरसिंहः अप्रैल 1858 तमे कं पराजितवान्?
(छ) विजयविदसः कदा घोषित: ?
उत्तर-(क) कुँवरसिंहस्य विवाह: फतेहनारायणसिंहस्य कन्यया अभवत्।
(ख) भारते आंग्लविद्रोहस्य ज्वाला प्रखररूपेण 1845 तमे खीष्टवर्षे प्रज्वलिता आसीत्।
(ग) कुँवरसिंहस्य उदारता न्यायव्यवस्थायां जनकल्याणस्य कार्यक्रमे च वर्तते।
(घ) भारतस्य प्रथमस्वतंत्रतासंग्राम: 1857 तमे ख़ीष्टवर्षे अभवत्।
(ङ) कुँवरसिंहः 1858 तमे ख़ीष्टाब्दे अप्रैल मासस्य 26 तमे दिनांके दिवंगतः।
(च) कुँवरसिंहः अप्रैल 1858 तमे ‘ले ग्रैड’ नामकम् आंग्लसेनापति पराजितवान्।
(छ) विजयदिवसः अप्रैल मासस्य 23 तमे दिनांके घोषित:।

3. अधोलिखितानां पदानाम् प्रकृतिं प्रत्ययं च लिखत-
(क) धैर्यम् = धीर + ष्यञ्।
(ख) पराजितवान् = परा + जि + क्तवतु।
(ग) तारुण्यम् = तरुणे + ष्यञ्।
(घ) निग्रहीतुम = नि + ग्रह + तुमुन्।
(ङ) शौर्यम् = शूर + ष्यञ्।

4. कोष्ठकस्थेभ्यः धातुभ्यः उचितप्रत्ययं योजयित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(क) कुँवरसिंहस्य विवाहः…………..। (भू)
(ख) आंग्लशासकेषु आत्कः व्याप्तः……..।(अस्)
(ग) आंग्लाधिकारिणः उपायान्………..।(कृ)
(घ) छात्रा: अध्यापकम्…………।(प्र+ नम्)
(ङ) कुँवरसिंहः विद्रोहम्………..।(उत् + घुष् )
उत्तर-(क) अभवत्
(ख) आसीत्
(ग) अकुर्वन्
(घ) प्रनमन्ति
(ङ) उद्घोषयत्
5. कोष्ठकस्थेभ्यः शब्देभ्यः उचितप्रत्ययं योजयित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
(क) सेनायां………….नियोजितवान्। (युवक)
(ख) हस्तं……………खंडितवान् (खड्ग)
(ग) कुँवरसिंह:…….क्षेत्रान्तरं गत्वा विद्रोहस्य स्वरम् उदघोषयत् । ( क्षेत्र)
(घ) कुँवरसिंहस्य……..नाम साहेबजादासिंह: आसीत् (पितृ)
(ङ)………सह गडङ्गापारं गत:। (स्वसैनिक)
उत्तर-(क) युवकान्
(ख) खड्गेन
(ग) क्षेत्रात्
(घ) पितुः
(ङ) स्वसैनिकै:

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