9th sanskrit

class 9 sanskrit book notes – ईदमहोत्सवः

ईदमहोत्सवः

class 9 sanskrit book notes

class – 9

subject – sanskrit

lesson 10 – ईदमहोत्सवः

ईदमहोत्सवः

( य महम्मीयाणा सवः उत्म्व अध्मिनू उत्सवे सामाजिक आवाक्षक दश् लभते। उत्सरथे ऽस्मन् सर्वे जनाः परस्पर मिलत्ति सहव खन उरथी थम् एकताया: प्रसन्नवाया: परिधायकः। आदिमन उल्पये एकतायाः यादृशम् अभिज्ञानं प्राप्यते तादृश्ण नान्येषु उत्क्देष)

(ईद मुलमानो का सबसे बडा पर्व है| इस पर्व में सामाजिक और मानवीय सद्भावना का अति आकर्षक दूश्य दिखता है। इस उत्सव में सभी लीग परस्थर मिल
है एक साथ खाना खाते हैं तथा आनन्द के सागर में डुक्की लगात हैं। वह उत्द एक प्रसम्नता तथा उदारता का यरिचायक है। इस उत्सव में एकता का जैसा ज्ञान प्रात होत है। बैसा अन्य उत्सवां में नहीं मिलता।)

1.रतदेशस्य परम्यरा धर्मप्रथाना । देशे स्मिन् नाना थर्मा: सन्ति। येन प्रकारेण हिन्दूनां मुख्योत्मवा: दीपावली-रक्षाबन्धन-दुर्गापूजा-प्रभृत्थ: सन्ति तथैव महम्मदीयानाम् उत्सवेषु सर्वोस्तयः ईद इति मन्यते। मूलत: उत्सवोऽयं तपस्यायाः उपासनायाश्च पर्व मन्यते।
सामाजिक मानवीय-सद्भावनाया: दृष्ट्या अपि अत्याकर्षकमिदं पर्व। अस्मिन् पर्वणि हम्मदीया स्मवानमासे चन्द्रमसं विलोक्य ‘रोजा’ इति व्रतं प्रारभन्ते। अस्यां रोजायां पूरण दिन चतधारिण उपवासं कुर्वन्ति। पुनः संध्याकाले सम्मिल्य ‘इफ्तार’ नामकम्
उपचासभग कुयन्ति। मासमेक वाबत् इदम् पर्व भवति।

संधि विच्छेद : ऐेशठरिमिन् = देशे +अस्मिन् मुख्योत्सवाः मुख्य + उत्सवाः। तथैव = तथा + एव उत्सवोदय = उत्सब: + अयं। अत्याकर्षकमिदम् = अति + आकर्षकम् +इदम्| मासमेकम् = मासम् + एकम्।

शब्दार्थ: देशेऽस्मिन् = इस देश में। येन ग्रकारेण = जिस प्रकार से। प्रभृत्य: = इत्यादि। महम्मदीयाः = मुसलमान (बहुवचन)। यावत् = जब तक। सम्मिलय = एकसाथ इकड्ठा हो कर! तथेव = उसी प्रकार ही।

हिन्दी अनुवाद : भारत देश की परम्परा धर्म प्रधान है। इस देश में अनेको धर्म स पार हिन्दुओं के मुख्य उत्सव दीपावली रक्षाबन्धन, दुर्गापूजा, इत्यादि हैं उसी हो मुसलबानों के उत्सवां में ईद सब्तम है, ऐसा माना जाता है। मूलतः यह सव तपस्या और इपसना का पर्व मना जाता है । सामाजिक तथा मानवीय सद् भावना से भी ह पवें अति आकर्षक है। हस पर्व में मुसलमान रमजान महीन मेंचन्द्रमा को देख कर ‘रोजा’ नामक व्रत आरम्भ करते हैं। इस रोजा में व्रतधारी पूुरा दिन उपवास करते हैं। पुनः सन्ध्या समय एकसाथ इकट्ठे होकर उपवास भंग करते हैं, जिसे इफ्तार’ कहते हैं। एक महीने तक यह पर्व होता है।

2. मासस्यान्तिमे शुक्रवारे ( जुमा इति ख्याते ) ते रमजानस्य मासावसाने च संध्यायां पुनः चन्द्र दृष्ट्वा अन्येद्युः प्रातःकाले ईदस्य ‘नमाज’ इति प्रार्थनां कुर्वन्ति। अनुष्ठानमिदं सामूहिकरूपेण पूर्ण क्रियते। एतदर्थमेव नमाजस्थानम् ‘ईदगाह’ कथ्यते। नैतादृशम्
आनन्ददायकम् अन्यत् पर्व। ईदमहोत्सवस्य दिने जना: नवानि वसनानि धारयन्ति। मधुराणि पक्वान्नानि च मिलित्वा खादन्ति। पक्वान्नेषु- सूत्रिका ( सेवई) प्रधाना। दुग्धयुक्तानि अन्यानि वस्तूनि च खाद्ययन्ते। चिकित्साशास्त्रदृष्ट्या मनसः वचसः कर्मणश्च शुद्ध्यर्थमिदं पर्व मन्यते। अवसरे ऽसि्मिन् प्रायः सर्वे जनाः निर्धना: धनिकाश्च यथाशक्ति दीनार्तानाम् सेवार्थं दानं कुर्वन्ति। तदेव दानं ‘जकात’ इति ‘फितरा’ ड़ति च कथ्यते। तद्दानम् अनिवार्य मन्यते। वर्षे वर्षे समागतस्य ईदमहोत्सवस्य प्रतीक्षा सर्वैः क्रियते। यतः सर्वांनपि आनन्दसागरेऽयं निमज्जयति । धन्योऽयमुत्सवः एकतायाः प्रसन्नतायाश्च औदार्यस्य च प्रतीक:।

संधि विच्छेद : मासस्यान्तिमे = मासस्य + अन्तिमे।मासावसाने = मास + अवसाने। अनुष्ठानमिदम् = अनुष्ठानम् + इदम्। एतदर्थमेव = एतत् + अर्थम् + एव। नैतादृशम् = न + एतादृशम्। पक्वान्नानि = पक्व + अन्नानि। शुद्ध्यर्थमिदम् = शुद्धि + अर्थम् + इदम्। अवसरेऽस्मिन् = अवसरे + अस्मिन्। धनिकाश्च = धनिकाः + च। दीनात्तानाम् = दीन + आतांनाम्। सेवार्थं = सेवा + अर्थम्। तदेव = तत् + एव। तद्दानम् = तत् + दानम्। सर्वानपि = सर्वान् + अपि।

शब्दार्थ : अवसाने = समाप्त होने पर। अन्येद्युः = दूसरे दिन। एतदर्थमेव = इस अर्थ में ही। एतादृशम् = इस प्रकार का। अन्यत् = दूसरा। वसनानि = वस्त्रों को।
मिलित्वा = मिलकर। शुद्ध्यर्यम् = शुद्धि के लिये दीनात्तानाम् = दीन दु:खियों का। तदेव = वह ही। समागतस्य = आने वाले की। निमज्जयति = इस अवसर। एकताया: = एकता का।

हिन्दी अनुवाद : महीने का अन्तिम शुक्रवार जुमा के नाम से जाना जाता है। और वे रमजान के महीने के समाप्त होने पर संध्या में पुनः चाँद देखकर दूसरे दिन ईंद की “नमाज’ नामक प्रार्थना करते हैं। यह अनुष्ठान सामूहिक रूप से पूरा किया जाता है। इसलिये ही नमाज के स्थान को ईदगाह कहते हैं। ऐसा आनन्ददायक दूसरा कोई पर्व नहीं है। ईद महोत्सव के दिन लोग नया वस्त्रधारण करते हैं। सुन्दर और स्वादिष्ट
पकवानों को मिलजुल कर खाते हैं। पकवानों में सेवई प्रधान होती है। दूधयुक्त अन्यवस्तुएँ भी खायी जाती है। चिकित्साशास्त्र की दृष्टि से मन, वाणी तथा कर्म की शुद्धि के लिये यह पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर दीन और दु:खियों की सेवा के लिये निर्धन और धनी सभी लोग यथाशक्ति दान करते हैं। और वह दान ही ‘जकात’ या फितरा’ कहा जाता है। वह दान अनिवार्य माना जाता है। हर वर्ष आनेवाले ईद महोत्सव की प्रतीक्षा सभी के द्वारा की जाती है। क्योंकि सभी लोग ही इस आनन्दसागर में डुबकी लगाते हैं। एकता, प्रसन्नता और उदारता का प्रतीक यह उत्सव धन्य है।

3. सर्वधर्मसमत्वेन भारतेऽपि महोत्सवः ।
ईदाख्यो वार्षिकोऽप्येष परमानन्ददायकः ।॥

संधि विच्छेद : भारतेऽपि = भारते + अपि । ईदाख्यो = ईद + आख्य:। वार्षिकोऽप्येष = वार्षिक: + अपि + एष।

शब्दार्थ : सर्वधर्मसमत्वेन = सर्वधर्म समभाव से। आख्यः = नामक, कहा जानेवाला।

अन्वय : भारतेऽपि सर्वधर्मसमत्वेन (आयोजित:) एष ईद आख्यः वार्षिक: महोत्सवः अपि परम आनन्ददायकः (भवति)।

हिन्दी अनुवाद : भारत में सर्वधर्मसमभाव से मनाया जाने वाला यह ईद नामक वार्षिक महोत्सव भी परम आनन्ददायक होता है। भाव : भारत हर धर्म के प्रति समभाव रखता है। हर धर्म के उत्सवों के प्रति यहाँ
समान भाव एवं श्रद्धा होती है। यह ‘ईद’ नाम वार्षिक महोत्सव भी सबके प्रति एकता तथा भाईचारे का संदेश देता है। अत: यह सबके लिये परमआनन्ददायक होता है।

सारांश
ईद मुसलमानों का सर्वोत्तम उत्सव है। मूलतः यह उत्सव तपस्या एवं उपासना का पर्व है। रमजान के महीने के आरम्भ में चन्द्रमा को देख कर रोजा व्रत का आरम्भ होता है। और शाम को ‘इफ्तार’ नाम से उपवास भंग होता है। यह व्रत एक मास तक चलता है। रमजान महीने की समाप्ति के बाद पुनः चाँद देखकर दूसरे दिन ‘ईद’ का उत्सव मनाया जाता है। सुबह में ईदगाह में सामूहिक रूप से ईद की नमाज अदा की जाती है। लोग नये वस्त्र धारण करते हैं तथा एकसाथ मिलजुल कर स्वादिष्ट पकवानों को खाते हैं। पकवानों में सेवई मुख्य होती है। इस अवसर पर धनी तथा निर्धन सभी दीन-दुःखियों की सेवा के लिये दान करते हैं जिसे ‘जकात’ या ‘फितरा’ कहते हैं। यह
अनिवार्य होता है। भारत में भी यह ‘ईद’ नामक परमआनन्ददायक वार्षिक महोत्सव सर्वधर्मसमभाव से मनाया जाता है।

व्याकरण
1. प्रकृति-प्रत्ययविभाग-व्युत्पतिः
विलोक्य = वि + √लोक् + ल्यप्।
दृष्ट्वा = √दृश् + क्तवा।
मूलत = √मूल + तसिल्।
मिलित्वा = √मिल + क्तवा|
जना। = √जन + घञ्
बहुधा = √बहु + धा।
तथा = √तत् + थाल्।
निर्धना: = √निर्धन + घञ्।
सम्मिल्य = सम + √मिल् + ल्यप्।

अभ्यासः (मौखिकः)
1. अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि एकवाक्येन संस्कृतभाषया वदत-
(क) हिन्दूनाम् मुख्योत्सवाः के के सन्ति?
(ख) महम्मदीयानां सर्वोत्तमः उत्सवः क: मन्यते?
(ग) ईदपर्व कीदृशम् पर्व अस्ति?
(घ) ईदपर्वणि महम्मदीयाः किम् विलोक्य ‘ रोजा’ प्रारभन्ते?
(ङ) ‘ईदगाह:’ क: कथ्यते?
उत्तर-(क) हिन्दूनाम् मुख्योत्सवः दीपावली, रक्षाबन्धन, दुर्गापूजादयः सन्ति।
(ख) महम्मदीयानां सर्वोत्तमः उत्सवः ‘ईद:’ मन्यते।
(ग) ईदपर्वम् तपस्याया: उपासनाया:च पर्व: सन्ति
(घ) ईदपर्वणि महम्मदीयाः चन्द्रमसं विलोक्य ‘रोजा’ प्रारभन्ते।।
(ङ) ईदगाहः नमाज-स्थानं कथ्यते ।

अभ्यासः (लिखितः)
1. अधोलिखित प्रश्नानामुत्तराणि एकवाक्येन संस्कृतभाषया लिखत-
(क) धर्मप्रधान देश: क:?
(ख) ईदपर्वणि व्रतधारिण: किं कुर्वन्ति?
(ग) नमाजस्थानं किं कथ्यते?
(घ) ईदपर्वणि निर्धना: धनिकाश्च किं कुर्वन्ति?
(ङ) ईदावसरे यत् दानं भवति तम् किं कथ्यते?
उत्तर-(क) भारतवर्षः धर्मप्रधान देश: अस्ति।
(ख) ईदपर्वणि व्रतधारिणः पूर्ण दिनं उपवासं कु्वन्ति।
(ग) नमाजस्थानं ‘ईदगाह’ कथ्यते।
(घ) ईदपर्वणि निर्धना: धनिकाश्च यथाशक्ति दानं कुर्वन्ति।
(ङ) ईदावसरे यत् दानं भवति तम् जकात-फितरा च कथ्यते।

2. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधारीकृत्य प्रश्निर्माणं कुरुत-
(क) भारतदेशोऽयं धर्मप्रधानः ।
(ख) अस्मिन् देशे बहवः धर्मा: सन्ति।
(ग) महम्मदीयानां सर्वोत्तमः उत्सवः ‘ईद’ इति मन्यते।
(घ) ईदानुष्ठानम् सामूहिकरूपेण पूर्ण क्रियते।
(ङ) ईदपर्व एकस्मिन् वर्षे एक वारम् आयाति।
उत्तर-(क) क: देश: धर्मप्रधानः ?
(ख) कस्मिन् देशे बहवः धर्मा: सन्ति?
(ग) महम्मदीयानां सर्वोत्तम: उत्सवः क: इति मन्यते?
(घ) ईदानुष्ठानम् कीदृशेन पूर्ण क्रियते?
(ङ) किम पर्व एकस्मिन् वर्षे एक वारम् आयाति।

3. संधि-विच्छेदं कुरुत-
(i) देशोऽयम् = देशः + अयम्
(ii) देशेऽस्मिन् = देशे + अस्मिन्
(iii) मुख्योत्सवाः = मुख्य + उत्सवा:
(iv) उत्सवोऽयम्। = उत्सवः + अयम्
(v) अत्याकर्षकम् = अति + आकर्षकम्
(vi) मासावसाने = मास + अवसाने
(vii) अनुष्ठानमिदं = अनुष्ठानम् + इदम्
(vill) नैतादृशम् = न + एतादृशम्
(1x) कर्मणश्च = कर्मणः + च
(x)धनिकाश्च = धनिका: + च

4. रेखाङ्गितपदेषु विभक्तिकारणं लिखत–
(क) अत्याकर्षकम् इदम् पर्व अस्ति।
(ख) महम्मदीयाः चन्द्रमसं विलोक्य ‘रोजा’ इति रमजानमासें प्रारभन्ते।
(ग) मासमेकं यावत् इदम् पर्व भवति।
(घ) चिकित्साशास्त्रदृष्ट्या मनसेः वचसः कर्मणश्च शुद्ध्यर्थम् इदम् पर्व मन्यते।
उत्तर-(क) प्रथमा विभक्ति।
(ख) द्वितीया विभक्ति।
(ग) द्वितीया विभक्ति
(घ) तृतीया विभक्ति
5. ‘क’ स्तम्भस्य प्रकृति-प्रत्ययां-योगः ‘ख’ स्तम्भे दत्तः / तयोः समुचितमेलनं कुरूत-
क ख
(i)मिल् + क्त्वा (क) बहुधा
(ii)बेहु + धा (ख) तथा
(iii)तत् + थाल् (ग) मिलित्वा
(iv)दृश् + क्त्वा (घ) विलोक्य
(v)वि + लोक् + ल्यप् (ङ) दृष्ट्वा
उत्तराणि- मिल् + क्त्वा – मिलितवा
बहु + धा – बहुधा
तत् + थाल – तथा
दृश् + क्त्वा – दृष्ट्वा
वि + लोक् + ल्प्य – विलोक्य

भाव
सामाजिक मानवीय सद्भावना की दृष्टि से भी ईद एक अति आकर्षक पर्व है । इस पर्व में सभी लोग सम्मिलित होकर इफ्तार नाम से उपवास भंग करते हैं। इस महोत्सव के दिन सभी लोग एक साथ मिलते हैं और खाना खाते हैं।

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