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bihar board 9th class hindi note | मेरा ईश्वर

मेरा ईश्वर

bihar board 9th hindi class note

वर्ग – 9

विषय – हिंदी

पाठ 8 – मेरा ईश्वर

मेरा ईश्वर
                                 – लीलाधर जगूड़ी
                   कवि – परिचय

लीलाधर जगूही का जन्म धंगल गाँव , टिहरी , उत्तराखंड में 1 जुलाई , 1944 ई . को हुआ । ग्यारह वर्ष की अवस्था में घर से भागकर अनेक शहरों और प्रांतों में कई प्रकार की जीविकाएँ करते रहे । इसीलिए स्कूल और कॉलेज की शिक्षा में क्रमिकता का अभाव रहा । अंतत : उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य से एम . ए . किया । सन् 1966 से 1980 ई . तक उन्होंने उत्तर प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य किया । वे शिक्षक आंदोलन में सक्रिय रहे , शिक्षक संघ के अध्यक्ष भी रहे । सन् 1981 में उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से संबद्ध हुए और फिर यहाँ को मासिक पत्रिका ‘ उत्तर प्रदेश के प्रधान संपादक बने । संप्रति वे सेनामुक्त है और लेखन कार्य में सक्रिय हैं ।
लीलाधर जगूडो की प्रमुख काव्यकृतियाँ हैं- ‘ शंखमुखो शिखरों पर ‘ , ‘ नाटक जारी है ‘ , ‘ इस यात्रा में ‘ , ‘ रात अब भी मौजूद है ‘ , ‘ बची हुई पृथ्वी ‘ , ‘ घबराए हुए शब्द ‘ , ‘ भय भी शक्ति है . ‘ अनुभव के आकाश में चाँद ‘ , ‘ ईश्वर को अध्यक्षता में ‘ । जगूडी को ‘ अनुभव के आकाश में चाँद ‘ पर सन् 1997 ई . में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
लीलाधर जगूडौं मूलत : वामपंथी विचारधारा के कवि हैं । कहा जाता है कि उनकी कविताओं पर धूमिल के मुहावरेबाजी और खिलंदडापन का प्रभाव है । परन्तु दोनों कवि साथ लिख रहे थे । दोनों ही अकवितावाद से मुक्त नहीं हैं । दोनों ने मुख्यतः लोकतंत्र के विरुद्ध लिखा है । इस व्यवस्था में वस्तुतः व्यवस्था का हाल बेहाल है – नौकरी , गरोबी , कुर्सी , कानून सब अस्त – व्यस्त शास्तविकता तो यह है कि इस व्यवस्था में हर आदमी कहीं – न – कहीं चोर है किंतु इसे बदलने के लिए कोई कारगर संकेत नहीं देता है । आजादी की जूठी थाली का फैशन यहाँ भी है । जगूड़ी को स्वीकारोक्ति है – संशय की भाषा में बड़बड़ाता हूँ , जो न क्रांति होता है न नजरिया न विचार ।
जगूडी की कविता आधुनिक समय की जटिलता के बीचोबीच परंपरा की अनुगूंजों , स्मृतियों और स्वप्नों को भी संभव करती चलती है ।

कविता का भावार्थ

प्रस्तुत कविता ‘ मेरा ईश्वर ‘ लीलाधर जगूड़ी की कविता संग्रह ‘ ईश्वर की अध्यक्षता से ली गई है । कविता में कवि का ईश्वर एक प्रश्नचिह की वरह है । यहाँ अकल्पनीय मोड़ है , अनजानी उतारने हैं ; अछूती आकस्मिकताएँ हैं । दरअसल जो हमारे समाज में हर क्षण घटित हो रहा है , कविता उसे पकड़कर नए अर्थों में प्रकाशित कर देती है । जीवन की एक नई विपुलता का इतिवृत्ति पाने के साथ – साथ आधुनिक बाजार और वैश्वीकरण से पैदा हुए अवरोध , अनुरोध और विरोध की प्रामाणिक आवाज भी पाठक सुन पाएंगे ।
प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि ” ईश्वर की अवधारणा ” पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है । थकि मनुष्य दुख के क्षणों में ही ईत्वर को याद करता है । इसलिए कवि दुखो न रहने की ठानता है ।

कविता के साथ

प्रश्न 1 , मेरा इंग्वर मुहासे नाराज है । कति ऐसा क्यों चाहता है ?

उत्तर -कभी मानता है कि  आज का ईश्वर प्रभु वर्ग है  जो मनुष्य मनुष्य को  येन केन प्रकारेण अपने लपेटे में ले लेता है और जब मनुष्य या  श्रमजीवी वर्ग किसी तरह उसका विरोध करता है तो वह -नाराज हो जाता है । दूसरे अर्थ में मनुष्य द्वारा सिर्फ दुःख में ही याद करने के फलस्वरूप ईश्वर की नाराजगी का कारण बताया है । मनुष्य अपने दैनिक जीवन में सिर्फ दुःख के क्षणों में ही ईश्वर को याद करता है । यही नहीं एक मनुष्य के द्वारा दूसरे मनुष्य पर अपना विचार थोपना और विचार को न मानना नाराजगी का कारण है । प्रश्न 2. कवि ने क्यों दुखी न रहने की ठान ली है ? उत्तर – कवि ने इसलिए दुखी न रहने की ठाना है क्योंकि दुख के कारण ही व्यक्ति या मनुष्य अपना मूल्य खो देता है । वह कठपुतली बनने पर मजबूर हो जाता है । अतः यह किसी भी परिस्थिति में दुखी नहीं रहना चाहता है । वह प्रभु वर्ग की गुलामी , कठपुतली बनने से मुक्त होना चाहता है । अतः यह दखी न रहने की ठानता है ।

प्रश्न 3. कवि ईश्वर के अस्तित्व पर क्यों प्रश्नचिह्न खड़ा करता है ?

उत्तर – कवि सभी परिस्थितियों को पहचानकर यह मानता है कि यदि मनुष्य को दुःख होता है तब वह ईश्वर को याद करता है , यदि मुझे दुःख झेलना भी पड़े तब भी मैं ईश्वर को याद नहीं करूं तो क्या होगा ? यदि मैं जो जरूरी नहीं है उसे भी त्याग कर दूं तो निश्चित रूप से मैं दुःखी नहीं होगा और दुखो नहीं होंगे तो ईश्वर को याद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी । इस स्थिति में ईश्वर कौन है ; उसका आधार क्या होगा ? दुसा है तव इश्विर भी है । इसलिए कवि ईश्वर के अस्तित्व पर प्रश्नचिा खड़ा करता है कि यदि दुख ही नहीं रहेगा तो ईश्वर का अस्तित्व क्या होगा ?

प्रश्न 4. कवि दुख को ही ईश्वर की नाराजगी का कारण क्यों बताता है ?

उत्तर – मनुष्य दुख में ही ईश्वर को याद करता है , यही उसकी नियति है । यहाँ ईश्वर प्रभु वर्ग का प्रतीक के रूप में आया है । यदि मनुष्य ( श्रमजीवी ) वर्ग को दुख नहीं होगा तो वह प्रभुवर्ग के पास न जाएगा , न उसे याद करेगा । इसीलिए कवि ने ‘ दुख ‘ को ही ईश्वर की नाराजगी का कारण बताया है ।

प्रश्न 5. आशय स्पष्ट करें ।

( क ) मेरे देवता मुइरसे नाराज हैं क्योंकि जो जरूरी नहीं है मैंने त्यागने की कसम खा ली है ।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ लीलाधर जगूड़ी की कविता ‘ मेरा ईश्वर ‘ से उद्धृत हैं । इन पक्तियों में कवि का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति पर अपना विचार थोपना चाहता है , उस व्यक्ति के द्वारा उस विचार को अस्वीकार करने के फलस्वरूप जाहिर – सी बात है कि नाराजगी होगी ही । क्योंकि वह थोपा हुआ विचार उसके लिए जरूरी नहीं है तो वह क्यों माने , यदि वह पहले से मानता भी आया है तो अब वह मानने की स्थिति में नहीं है , उसे अस्वीकार कर देना चाहता है । व्याख्येय पंक्ति में देवता आज के प्रभुवर्ग का प्रतिबिम्ब है जो व्यक्ति पर अपना विचार थोपना चाहता है , न मानने पर वह नाराज हो जाता है ।

( ख ) पर सुख भी तो कोई नहीं है मेरे पास सिवा इसके कि दुखी न रहने की ठान ली है ।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ लीलाधर जगूड़ी की कविता ‘ मेरा ईश्वर ‘ से ली गई हैं । इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि मेरे पास सुख जैसी कोई वस्तु नहीं है । श्रमजीवी वर्ग के पास सुख जैसी कोई वस्तु नहीं होता है । फिर भी सुख के न रहने पर भी वह उसके लिए दुखी नहीं होना चाहता है । बल्कि वह दुखी न रहने के लिए संघर्ष ठानता है । जीवन का मूल ध्येय सुखी और दुखी रहना नहीं है बल्कि मानवीय मूल्यों को सजीवता के साथ जीवित रखना है । यदि उन मूल्यों पर किसी के द्वारा आघात होता है जो हमें चाहिए कि हम उसका प्रबल विरोध करें ।

( ग ) मेरी परेशानियाँ मेरे दुख ही ईश्वर का आधार क्यों थे ?

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति लीलाधर जगूडी की कविता ‘ मेरा ईश्वर ‘ से ली गयी है । इस पंक्ति में कवि कहना चाहता है कि व्यक्ति जब सुखी होता है तो उसमें अहम् का भाव आ जाता है । वहीनितांत दुस्ख के गहन घोर अंधकार से जब उसका पाला पड़ता है तो वह ईश्वर को याद करता है । कवि इन परिस्थितियों से ईश्वर के अस्तित्व पर ही प्रश्न खड़ा कर देता है कि हम दुख और परेशानियों में ईश्वर को याद क्यों करें । क्या दुख नहीं रहने पर ईश्वर नहीं है । इन तमाम तरह के प्रश्नों से कवि प्रभुवर्ग के साथ ईश्वर के अस्तित्व को नकारता है ।

प्रश्न 6. कविता का केंद्रीय भाव स्पष्ट करें ।

उत्तर – कविता में कवि ईश्वर के अस्तित्व को चुनौती देता है , उसे अस्वीकार करता है कि मैं प्रभु वर्ग द्वारा थोपे हुए विचार मानूँगा । जो मेरे लिए जरूरी नहीं है उसे त्यागने का कसम खा लिया है । सुखी रहने के व्यसन को छोड़ दिया है । यह कविता उस प्रभु वर्ग पर गहरी चोट करती है जो मनुष्य को येन केन प्रकारेण अपने लपेटे में ले लेता है और उसे अपने हाथ की कठपुतली बनाए रखता है ।

प्रश्न 7. कविता के आधार पर यह स्पष्ट करें कि सुख – दुःख और ईश्वर के बीच क्या संबंध बताया गया है ?

उत्तर – कविता में ईश्वर दो अर्थ रखता है । एक ईश्वर , जब मनुष्य गहन दुख या परेशानी की अवस्था में होता है या किसी संकट की अवस्था में होता है तब उसे बचाने के लिए याद करता है । दूसरा ‘ ईश्वर ‘ प्रभुवर्ग ( पूंजीपति वर्ग ) का प्रतीक है जो मनुष्य को येन – केन प्रकारेण अपने लपेटे में लेकर हाथ की कठपुतली बनाये रखना चाहता है । जब मनुष्य सुखी होता है तो ईश्वर को याद नहीं करता , अर्थात् ईश्वर रूपी प्रभु वर्ग के लपेटे में दुखा के समय ही आता है । इस प्रकार कवि द्वारा सुख – दुख के संबंधों को ईश्वर के साथ दो रूपों में बताया गया है , जिसका उपर्युक्त विवेचन किया गया है ।

भाषा की बात

प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें ।

उत्तर – ईश्वर -भगवान , प्रभु , परमात्मा , खुदा , अल्लाह ।
दुख-व्यथा , पीड़ा , कष्टा , शोक , संकट , क्लेश । सरस्वती- वीणापाणि , पुस्तक धारणी , कमल आसनी , भारती , शारदा , वागीशा ।
चंद्रमा -शशि , मयंक , चन्द्र , हिमांशु , राकेश , सुधांशु । ‘
शिव -चंद्रशेखर , मंगल , महादेव , शंकर , कैलाश , भूतनाथ ।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के लिंग निर्णय करते हुए वाक्य बनाएँ ।

उत्तर – कसम -( स्वी . ) तुझे अपना बनाने की कसम खायो ।
नाराज- ( पु . ) अनिल पुष्येन्दु से नाराज रहता है । कारोबार- ( पु . ) दीपू और प्रमोद का कारोबार बहुत बड़ा है ।
परेशानियाँ- ( स्त्री . ) उसे ढेर सारी परेशानियों से सामना करना पड़ता है ।

प्रश्न 3. निम्नलिखित वाक्यों में से कारक पद चिह्नित करते हुए स्पष्ट करें कि वे किस कारक के पद हैं ? ( क ) मेरा ईश्वर मुझसे नाराज है ।

उत्तर – मुझसे ( कर्म कारक ) ।
( ख ) मैंने त्यागने की कसम खा ली है ?
उत्तर – की ( संबंध कारक ) ।
( ग ) ईश्वर का आधार क्यों थे ?
उत्तर – का ( संबंध कारक ) ।
( घ ) कविता में से निजवाचक शब्दों को लिखें ।
उत्तर – मेरा , मुझसे , मैंने ।।

 

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