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9 class economics book solutions – बेकारी

बेकारी

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9 class economics book solutions

class – 9

subject – economics

lesson 4 – बेकारी

बेकारी
इकाई की मुख्य बातें-बेकारी देश की एक व्यापक एवं गंभीर समस्या है। देश का कोई भी क्षेत्र या समुदाय इससे अछूता नहीं है। इसमें काम चाहनेवाले व्यक्तियों की इच्छा व योग्यता होने पर भी जब प्रचलित मजदूरी पर काम रहने पर भी नहीं मिल पाये तो हम ऐसी स्थिति को बेकारी की स्थिति कहते हैं। इस प्रकार बेकारी एक आर्थिक समस्याहै।

बेरोजगारी के प्रकार
भारत एवं बिहार में बेरोजगारी के दो प्रकार प्रमुख हैं-
(i) ग्रामीण बेरोजगारी (ii) शहरी बेरोजगारी।

(i) ग्रामीण बेरोजगारी
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(क) मौसमी बेरोजगारी। ⬇️ (ग) प्रच्छन्न बेरोजगारी
(ख) छिपी हुई बेराजगारी

(क) मौसमी बेरोजगारी-मौसम में परिवर्तन द्वारा उत्पन्न बेकारी को मौसमी बेरोजगारी कहते हैं। खेती के मौसम में काम मिलना और खेती के मौसम न होने के कारण काम न मिलने की स्थिति को मौसमी बेरोजगारी माना जाता है। कृषि के प्रत्येक चरण के पश्चात् कृषक मजदूर बेकार बैठ जाते हैं क्योंकि गाँव में इस समय के लिए कृषकों के पास कोई काम नहीं होता है। ऐसी स्थिति में ही मौसमी बेरोजगारी का जन्म होता है।

(ख) छिपी बेरोजगारी-इस प्रकार की बेरोजगारी में वे लोग नियोजित होते हैं जो अपने भूखण्ड पर कम व्यक्ति की जगह अधिक व्यक्ति उस कार्य को करते हैं। ऐसी स्थिति में
ही छिपी हुई बेरोजगारी का जन्म होता है। इस प्रकार की बेरोजगारी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक पायी जाती है।

(ग) प्रच्छन्न बेरोजगारी-इस प्रकार की बेरोजगारी में कृषक परिवारों के बीच काम की शिथिलता को और अधिक बोझिल बना देती है। क्योंकि इसमें श्रम में उत्पादकता में कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। प्रच्छन्न बेरोजगारी की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है।

(ii) शहरी बेरोजगारी
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(क) शिक्षित बेरोजगारी। ⬇️ (ग) तकनीकी बेरोजगारी
(ख) औद्योगिक बेरोजगारी

(क) शिक्षित बेरोजगारी-जब पढ़े-लिखे लोगों को रोजगार नहीं मिलता है तो उसे शिक्षित बेरोजगारी की संज्ञा दी जाती है। यह शिक्षा सुविधाओं का प्रसार तथा दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति के कारण उत्पन्न होती है।

(ख) औद्योगिक बेरोजगारी-औद्योगिक प्रसार का ढाँचा आधुनिक तकनीक पर आधारित होने के कारण मानव श्रम-शक्ति का उपयोग कम होता है जिससे औद्योगिक बेरोजगारी पनपती है। प्रायः ग्रामीण क्षों से श्रम-शक्ति, रोजगार प्राप्ति हेतु शहर की ओर आते हैं पर उन्हें रोजगार नहीं मिल पाता है जिससे शहरों में औद्योगिक बेरोजगारी में इजाफा होती है।

(ग) तकनीकी बेरोजगारी-आधुनिक युग में नए-नए तकनीक के कारण पूर्व में कार्यरत कर्मियों की छंटाई कर दी जाती है। जैसे-कपड़ा मिलों ने बड़ी संख्या में हैण्डलूम बुनकरों को बेकार बना दिया है। वर्तमान समय में तकनीकी परिवर्तन के फलस्वरूप इस तरह की बेरोजगारी
शहरी क्षेत्रों में पायी जाती है।

बेकारी का जन्म : कारण
बेकारी के जन्म लेने के निम्नलिखित कारण हैं-
1. अत्यधिक जनसंख्या-बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण विभिन्न प्रकार की बेकारी का जन्म हो रहा है। जनसंख्या बढ़ने के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों लोग बेरोजगार हो रहे हैं जिसे ग्रामीण बेरोजगारी तथा शहरी बेरोजगारी कहते हैं।
2. अशिक्षा-अशिक्षा के कारण भी बेकारी की दर में वृद्धि देखी जाती है विशेषतः महिलाओं में शिक्षा की कमी के कारण महिला बेरोजगारों की संख्या अत्यधिक है।
3. कृषि का पिछड़ापन-भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यहाँ की कृषि पिछड़ी हुई है जिसका मुख्य कारण कृषि का मौनसून पर आधारित होना है जो प्रतिवर्ष बिल्कुल ही परिवर्तित और अनिश्चित रहती है। इसके साथ ही कृषि में अभी भी पुराने यंत्रों व मशीनों का प्रयोग हो रहा है जिसके कारण भी भारतीय कृषि में व्यापक रूप से बेकारी पनपती है।
4. कृषि पर जनसंख्या का अत्यधिक बोझ-भारत की जनसंख्या का आधे से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है जिसके कारण कृषि क्षेत्र में, छिपी बेरोजगारी देखी जाती है। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ती है।
5. औद्योगिकीकरण का अभाव-भारत कृषि प्रधान देश होने के कारण यहाँ उद्योगों का विस्तार विकसित देशों की तुलना में काफी कम हुआ है तथा संसाधनों की कमी इसके विकास की गति को धीमा बनाये हुए है जिसके कारण बेकारी भी उत्पन्न हुई है।
6. पूँजी का अभाव-भारत में प्रतिव्यक्ति आय के निम्न स्तर के कारण पूँजी का निर्माण दर भी काफी कम है जिसके कारण कृषि तथा अन्य उद्योगों में वांछित पूँजी का निवेश नहीं किया जा रहा है तथा प्रत्येक स्तर पर बेकारी देश एवं राज्यों में फैल रही है।
7. प्रशिक्षित श्रम-शक्ति का अभाव-अशिक्षा और प्रशिक्षण के अभाव में भारतीय मजदूर आधुनिक मशीनों से रू-ब-रू नहीं हो पाते हैं फलस्वरूप तकनीक आधारित रोजगार कार्य में आगे बढ़ नहीं पाते हैं जिससे बेकारी का जन्म होता है।

बेकारी समाप्त करने अथवा रोजगार बढ़ाने के उपाय
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(i) सरकारी प्रयास। (ii) गैर सरकारी प्रयास

(i) सरकारी प्रयास-चतुर्थ पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत न्यूनतम ‘आवश्यकता कार्यक्रम’, ‘क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम’, ‘काम के बदले अनाज’ तथा ‘निश्चित रोजगार योजना’ इत्यादि जैसे महत्त्वपूर्ण योजना चलायी गयी थी जिससे देश में निर्धनता की मात्रा घटी तथा रोजगार के नए-नए अवसर उपलब्ध हुए। 2006 में “सम्पूर्ण राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 2006” संचालित है जिसके कार्यांवयन से बेरोजगारी की संख्या में कमी आयी है।

(ii) गैर सरकारी उपाय-इसके अंतर्गत कुटीर उद्योगों का विस्तार तथा स्वरोजगार का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूह तथा गैर सरकारी संगठन भी बेकारी की समस्या को हल करने में जुटे हैं।

बेकारी का प्रभाव
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(क) सामाजिक प्रभाव (ख) आर्थिक प्रभाव

(क) सामाजिक प्रभाव
बेकारी का सीधा असर व्यक्ति के सामाजिक स्तर पर पड़ता है जो निम्न हैं-
(i) जनशक्ति संसाधन की बर्बादी-बेरोजगारी के कारण मानव शक्ति का दुरूपयोग होता है जैसे कृषि के क्षेत्र में एक परिवार के चार लोग खेत में काम कर रहे हैं और पुनः उसी परिवार के अन्य सदस्य काम करने के लायक हो जाते हैं तो वे भी उसी खेत में अपना सहयोग देना शुरू कर देते हैं जिसके कारण सीमांत उत्पादकता में वृद्धि नहीं होती है।

(ii) हीन भावना का जन्म-बेरोजगार व्यक्ति रोजगार में लगे रहने वाले लोगों की तुलना में अपने को हीन भावना से देखना शुरू कर देता है। फलस्वरूप उनका मनोवैज्ञानिक स्तर गिरता चला जाता है और वे अपने को समाज में एक बोझ समझता है जिसका प्रभाव अन्य सभी बेरोजगारों पर भी पड़ने लगता है।

(iii) सामाजिक कुरीतियों का बढ़ना-बेरोजगारी के कारण चोरी, डकैती, छीना-झपटी, ठगी, दहेज इत्यादि जैसे गलत प्रथाओं का जन्म बेरोजगारी के बीच हो जाता है जिसका प्रभाव समाज के ऊपर पड़ता है।

(iv) पलायन की प्रवृति का जन्म-व्यक्ति बेरोजगार होने के कारण रोजगार की खोज में पलायन करता है पर उनसे कई स्तर पर उपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है जिसके फलस्वरूप वे कम मजदूरी पर काम करने को विवश होते

(ख) आर्थिक प्रभाव
व्यक्ति पर आर्थिक रूप से बेरोजगारी का प्रभाव निम्न तरीके से पड़ता है-
(i) प्रति व्यक्ति आय की कमी-बेकारी की अवस्था में प्रति व्यक्ति आय कम रहती है जो व्यक्ति के आर्थिक पक्ष को प्रभावित करता है।
(ii) निम्न जीवन स्तर-प्रति व्यक्ति आय में कमी के कारण उसका रहन-सहन, खान-पान, वेष-भूषा निम्न स्तर का होता है। फलस्वरूप व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर हो जाता है।
(iii) आर्थिक मंदी का खतरा-किसी अर्थव्यवस्था के संपूर्ण विकास पर बेकारी का अहितकर प्रभाव पड़ता है। बेरोजगारी में वृद्धि मंदीग्रस्त अर्थव्यवस्था का सूचक है।
(iv) संसाधनों का उचित उपयोग न होना-कम पूँजी के कारण प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग अर्थव्यवस्था में व्यापक रूप से नहीं किया जा सकता है जो कि बेरोजगारी का मूल लक्षण है।

प्रश्न और उत्तर
I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न
सही उत्तर का संकेताक्षर (क, ख, ग, घ) लिखें।

1. देश की प्रमुख आर्थिक समस्या है-
(क) उच्च शिक्षा
(ख) खाद्यान्न की प्रचुरता
(ग) क्षेत्रीय समानता
(घ) गरीबी तथा बेकारी
उत्तर-(घ)
2.भारत में ग्रामीण क्षेत्र में पाई जाती है-
(क) शिक्षित बेरोजगारी
(ख) औद्योगिक बेकारी
(ग) अदृश्य बेकारी
(घ) चक्रीय बेकारी
उत्तर-(ग)

3.बेकारी वह स्थिति है जब
(क) पूर्णतः इच्छा से काम नहीं करते
(ख) हम आलस्य से काम नहीं करते
(ग) हमें इच्छा एवं योग्यता होते हुए भी काम नहीं मिलता
(घ) हम अशिक्षित एवं अपंग होते हैं।
उत्तर-(ग)

4.बिहार में पाई जाने वाली बेरोजगारी है-
(क) घर्षणात्मक
(ख) चक्रीय
(ग) अदृश्य
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-(ग)

5.बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में पाई जाती है-
(क) औद्योगिक बेकारी
(ख) चक्रीय बेरोजगारी
(ग) अदृश्य एवं मौसमी बेकारी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-(ग)

6.बिहार में अशिक्षितों की संख्या, करीब निम्न में कितना प्रतिशत है ?
(क) 53 प्रतिशत
(ख) 40 प्रतिशत
(ग) 65 प्रतिशत
(घ) 47 प्रतिशत
उत्तर-(क)

II.रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:

1.बेकारी वह स्थिति है जब काम चाहनेवाले तथा योग्य व्यक्ति को रोजगार…………नहीं होता।
2.गरीबी तथा………. भारत की प्रमुख समस्याएँ हैं।
3. ऐच्छिक बेकारी उस स्थिति को कहते हैं जब कोई व्यक्ति प्रचलित मजदूरी पर काम………… चाहता है।
4.छिपी हुई बेकारी की स्थिति में श्रमिक की सीमांत उत्पादकता नगण्य या………. होती है।
5. भारत में शिक्षित बेरोजगारी का एक प्रमुख कारण दोषपूर्ण……………. है।
6. बिहार में छिपी हुई एवं……….बेकारी पाई जाती है।
7.बिहार में बेरोजगारी का एक कारण……..शिक्षा का अभाव है।
उत्तर-1. उपलब्ध, 2. बेकारी, 3. नहीं, 4. शून्य, 5. शिक्षा प्रणाली, 6. मौसमी, 7. पेशेवर।

III. सही कथन में टिक (√) तथा गलत कथन में क्रॉस (x) करें-
1.भारत में बेकारी गंभीर रूप धारण कर रही है।
2. बेकारी वह स्थिति है जब व्यक्ति की इच्छा एवं योग्यता रहते हुए भी रोजगार प्राप्त नहीं होता।
3. भारत में शिक्षित लोगों में बेकारी नहीं है।
4. भारत में रोजगार में लगे व्यक्ति भी न्यून रोजगार के शिकार हैं।
5.भारत में पिछले वर्षों में रोजगार का अस्थायीकरण हुआ है।
6. भारत में ग्रामीण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अदृश्य बेकारी वर्तमान है।
7. भारत में शिक्षित लोगों में बढ़ती हुई बेकारी चिंता का विषय नहीं है।
8. बेकारी दूर करने की दिशा में पंचवर्षीय योजना आंशिक रूप से सफल हुई है।
9. बिहार में लोग छिपी हुई बेकारी एवं न्यून रोजगार के शिकार हैं।
10. बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अदृश्य बेकारी वर्तमान है।
11. बिहार में बेकारी की समस्या लगातार घट रही है।
12. पेशेवर शिक्षा स्वरोजगार एवं कृषि आधारित उद्योगों के विकास द्वारा बेकारी दूर करने में मदद मिलेगी।
उत्तर-1. सही, 2. सही, 3. गलत, 4. सही, 5. सही, 6. सही, 7. गलत, 8. सही, 9. सही, 10. सही, 11. गलत, 12. सही।

IV. लघु उत्तरीय प्रश्न (उत्तर 20 शब्दों में दें)
प्रश्न 1. आप बेरोजगारी से क्या समझते हैं ?
उत्तर-बेरोजगारी उस परिस्थिति को कहते हैं जब प्रचलित मजदूरी की दर पर काम के इच्छुक, योग्य लोगों को रोजगार नहीं मिलता हो। अर्थात् जब व्यक्ति काम चाहता हो किन्तु उसे काम नहीं मिले तो उसे बेकार या बेरोजगार कहा जाता है।

प्रश्न 2. छिपी हुई बेकारी से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर-जब पाँच लोगों के काम की आवश्यकता है और तीन अतिरिक्त लोग इस काम में लगे रहकर नियोजित होते हैं। इन तीनों द्वारा किया गया अंशदान पाँच लोगों द्वारा की गयी योजना में वृद्धि नहीं करता यानि कुल उत्पादकता में वृद्धि नहीं हो पाती है तो ऐसी स्थिति को छिपी हुई बेरोजगारी कहा जाता है।

प्रश्न 3. न्यून रोजगार की समस्या का वर्णन करें।
उत्तर-भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में न्यून रोजगार की समस्या विद्यमान है। इसमें खासकर कृषि कार्य के प्रत्येक चरण में कृषक मजदूर बेकार बैठ जाते हैं क्योंकि उस समय उनके पास कोई कार्य नहीं होता है। फलत: वे न्यून रोजगार के शिकार हो जाते हैं।

प्रश्न 4. भारत में रोजगार प्राप्ति की समस्या का वर्णन करें।
उत्तर-भारत में रोजगार प्राप्ति की समस्या विकराल रूप से फैली हुई है। इसकी मुख्य वजह अत्यधिक जनसंख्या, निरक्षरता, कृषि का पिछड़ापन तथा इसपर जनसंख्या का अत्यधिक बोझ, पूँजी का अभाव, औद्योगिकीकरण का अभाव तथा प्रशिक्षित श्रम-शक्ति का अभाव है।

प्रश्न 5. शिक्षित लोगों में बढ़ती हुई बेकारी के मुख्य कारण क्या हैं ?
उत्तर-शिक्षा सुविधाओं का प्रसार तथा दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति के कारण शिक्षित बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न होती है। अर्थात पढ़े-लिखे लोगों को जब रोजगार नहीं मिलता है तो शिक्षित बेरोजगारी की संज्ञा दी जाती है।

प्रश्न 6. शिक्षा को पेशेवर बनाने से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-शिक्षा को विभिन्न व्यवसायों से जब जोड़ते हैं तो एक प्रकार का पेशेवर रूप सामने आता है जिससे शिक्षित व्यक्ति को तुरंत रोजगार मुहैया हो जाता है।

प्रश्न 7. बेरोजगारी के चार कारणों का वर्णन करें।
उत्तर-बेरोजगारी के चार कारण निम्नलिखित हैं-
(i) अत्यधिक जनसंख्या का होना।
(ii) निरक्षरता का व्याप्त होना।
(iii) कृषि का अति पिछड़ापन होना।
(iv) औद्योगिकीकरण का अभाव होना।
प्रश्न 8. बिहार में ग्रामीण बेकारी के समाधान के लिए कुछ उपाय बताएँ।
उत्तर-बिहार में ग्रामीण बेकारी के समाधान के कुछ उपाय निम्न हैं-
(i) गाँवों में सामुदायिक स्तर पर समूह बनाकर स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न किये जा सकते हैं।
(ii) गाँवों में कुटीर उद्योगों का विकास कर ग्रामीण बेकारी को कम किया जा सकता है।
(iii) स्वयं सहायता समूह से सहायता प्राप्त कर स्वयं रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।

v. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (उत्तर 100 शब्दों में दें)

प्रश्न 1. बेकारी की परिभाषा दें। भारत में बेकारी के प्रमुख कारण क्या हैं ? समाधान के सुझाव दें।
उत्तर-काम चाहनेवाले व्यक्तियों की इच्छा व योग्यता होने पर जब प्रचलित मजदूरी पर काम रहने पर भी नहीं मिल पाये तो हम ऐसी स्थिति को बेकारी की स्थिति कहते हैं।
भारत में बेकारी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
(i) अत्यधिक जनसंख्या-बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण विभिन्न प्रकार की बेकारी जन्म ले रही है। जनसंख्या बढ़ने के कारण गाँवों और शहरों में भी बेकारी तेजी से बढ़ रही है जिससे ग्रामीण तथा शहरी बेरोजगारी पनपती है।
(ii) अशिक्षा-वर्तमान में भारत में 34.62 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैं। इसके कारण ही बेकारी की दर में वृद्धि देखी जाती है विशेषतः महिलाओं में शिक्षा की कमी के कारण बेरोजगारों की संख्या अत्यधिक है।
(iii) कृषि का पिछड़ापन-भारत में कृषि के परंपरागत रूप तथा सिंचाई के साधनों की कमी पुराने यंत्रों व मशीनों का प्रयोग हो रहा है जिसके कारण भी भारतीय कृषि में व्यापक रूप से बेकारी पनपती है।
(iv) कृषि पर जनसंख्या का अत्यधिक बोझ-कृषि पर भारत की आधे से अधिक जनसंख्या का बोझ है जिससे अन्य व्यवसायों के अन्य क्षेत्रों पर जनसंख्या का बोझ काफी कम है। इससे बेकारी की स्थिति उत्पन्न होती है।
(v) औद्योगिकीकरण का अभाव-भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ पर उद्योगों का विस्तार अन्य देशों की तुलना में कम हुआ है पर जनसंख्या की वृद्धि दर अधिक है। इससे बेकारी की समस्या उठ खड़ी होती है।
(vi) पूँजी का अभाव-भारत में प्रतिव्यक्ति आय के निम्न स्तर के कारण ‘पूँजी का निर्माण-दर’ भी काफी कम है, जिसके कारण कृषि तथा अन्य उद्योगों में वांछित पूँजी का निवेश नहीं हो पा रहा है जिससे देश में बेकारी फैल रही है।
(vii) प्रशिक्षित श्रमशक्ति का अभाव-अशिक्षा और प्रशिक्षण के अभाव में भारतीय मजदूर तकनीक आधारित रोजगार में भागीदारी नहीं कर पाते हैं जिससे बेकारी का जन्म होता है।
भारत में बेकारी के समाधान हेतु निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत हैं-
(i) सरकार के द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न प्रकार की महत्त्वपूर्ण योजनाओं को लागू किये जाएँ।
(ii) ग्रामीण क्षेत्र में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाय।
(iii) इसके साथ ही लोगों को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पूँजी और प्रशिक्षण प्रदान किया जाय।
(iv) बेरोजगारों को स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जाय।

प्रश्न 2. भारत में बेकारी की समस्या पर एक लेख लिखें। बेकारी की समस्या को कैसे किया जा सकता है ?
उत्तर-रोजगार के माध्यम से व्यक्ति जीवन यापन के लिए साधन अर्जित करता है। जो व्यक्ति ऐसे क्रियाकलाप करने में असफल रहते हैं उन्हें बेकार या बेरोजगार कहते हैं।
बेकारी की समस्या तथा गरीबी साथ-साथ चलते हैं क्योंकि जो व्यक्ति जीविकोपार्जन में असमर्थ होते हैं, वे निश्चय ही गरीब होते हैं । जब व्यक्ति को कार्य करने की इच्छा हो और उसे मनपसंदे कार्य नहीं मिल पाताहै तो वे बेकारी का दंश झेलते हैं। कभी-कभी इच्छानुसार काम न मिलना भी बेकारी को प्रकट करता है।
भारत में बेकारी की समस्या दो स्तरों पर व्याप्त हैं-(i) ग्रामीण बेरोजगारी, (ii) शहरी बेरोजगारी।
गाँवों में बेरोजगारी मुख्यतः कृषि केन्द्रित है जबकि शहरों में बेकारी उद्योग केन्द्रित होती है। बेकारी की समस्या का मुख्य कारण-अत्यधिक जनसंख्या, अशिक्षा, कृषि का पिछड़ापन, कृषि पर जनसंख्या का अत्यधिक बोझ, औद्योगिक तथा पूँजी का अभाव तथा प्रशिक्षित श्रम-शक्ति
का अभाव है।

बेकारी की समस्या को दूर करने हेतु दो तरह के प्रयास किए जा रहे हैं-(क) सरकारी
प्रयास तथा (ख) गैर सरकारी प्रयास। सरकारी प्रयास के अंतर्गत सरकार के द्वारा चलाये गए विभिन्न प्रकार की योजना से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। गैर सरकारी प्रयास के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के गैर सरकारी संगठन तथा स्वयं सहायता समूहों को बनाकर किया जा सकता है। इसके अंतर्गत कुटीर उद्योगों का विकास तथा स्वरोजगार को प्रोत्साहन दिया जा सकता है।

प्रश्न 3. भारत में पाई जानेवाली विभिन्न प्रकार की बेकारी का विवरण दें। इसके समाधान के लिए आप क्या सुझाव देंगे?
उत्तर-भारत में पाई जानेवाली बेकारी दो प्रकार की है जो निम्नलिखित है-
(क) मौसमी बेरोजगारी
1. ग्रामीण बेकारी। (ख) छिपी हुई बेरोजगारी
(ग) प्रच्छन्न बेरोजगारी

(क)शिक्षित बेरोजगारी
2. शहरी बेकारी (ख)औद्योगिक बेरोजगारी
(ग)तकनीकी बेरोजगारी

1. ग्रामीण बेकारी-भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में तीन प्रकार की बेकारी पाई जाती है जो निम्न हैं-
(क) मौसमी बेरोजगारी-मौसम में परिवर्तन द्वारा उत्पन्न बेकारी को मौसमी बेरोजगारी कहते हैं। खेती के मौसम में काम मिलना और खेती के मौसम न होने के कारण काम न मिलने की स्थिति को मौसमी बेरोजगारी माना जाता है।
(ख) छिपी हुई बेरोजगारी-छिपी हुई बेरोजगारी में आवश्यकता से अधिक व्यक्ति को काम में मजबूरी वश रखा जाता है पर उनसे उत्पादकता में कोई वृद्धि नहीं होती है ऐसी बेरोजगारी छिपी. हुई बेरोजगारी कही जाती है।
(ग) प्रच्छन्न बेरोजगारी-प्रच्छन्न बेरोजगारी के अंतर्गत लोग नियोजित प्रतीत होते हैं, उनके पास काम करने की कोई तयशुदा उपयोगिता नहीं होती है सिर्फ उनका नियोजन होता है
जैसे-कोई काम 2 व्यक्ति कर सकते हैं पर एक व्यक्ति और उस काम में लगे हैं तो इस एक व्यक्ति से उत्पादकता में कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसकी उत्पादकता शून्य होती है।
2. शहरी बेरोजगारी-भारत के शहरों में तीन प्रकार की बेरोजगारी व्याप्त है जो निम्न हैं-
(क) शिक्षित बेरोजगारी-शिक्षा सुविधाओं का प्रसार तथा दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति के कारण शिक्षित बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न होती है।
(ख) औद्योगिक बेरोजगारी-शहरों में तकनीक पर आधारित उद्योगों में मानव श्रम-शक्ति का उपयोग कम होता है जिससे औद्योगिक बेरोजगारी पनपती है।
(ग) तकनीकी बेरोजगारी-वर्तमान समय में तकनीकी परिवर्तन के फलस्वरूप इस तरह की बेरोजगारी शहरी क्षेत्रों में पायी जाती है। आधुनिक युग में नए-नए तकनीक के कारण पूर्व में कार्यरत कर्मियों की छंटाई कर दी जाती है जिससे तकनीक बेरोजगारी पनपती है।
भारत में पाई जानेवाली बेकारी की समस्या के समाधान के लिए निम्न सुझाव हैं-
(i) सरकारी योजनाओं को अमल में लाया जाय।
(ii) सर्वशिक्षा अभियान के तहत लोगों को शिक्षित किया जाय।
(iii) शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के संसाधनों का उचित मात्रा में उपयोग किया जाय।
(iv) देश से पलायन की प्रवृत्ति को कम किया जाय।
(v) सरकारी के साथ-साथ गैर सरकारी उपायों का सहारा लिया जाय।

प्रश्न 4. ‘समेकित ग्रामीण विकास कार्यक्रम’ के विशेष संदर्भ में विभिन्न रोजगार सृजन कार्यक्रमों का परीक्षण करें। इसके क्रियान्वयन में सुधार के उपाय बताएँ।
उत्तर-बेकारी की समस्या के प्रति सरकार प्रारंभ से ही बेहद गंभीर है। चतुर्थ पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत ‘न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम’, ‘क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम’, ‘काम के बदले अनाज कार्यक्रम’ तथा निश्चित रोजगार योजना इत्यादि जैसे महत्त्वपूर्ण योजना चलायी गयी। पुनः छठी पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत निर्धनता संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों को मिलाकर कई कार्यक्रम चलाए गए थे जिनमें समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार कार्यक्रम तथा जवाहर रोजगार योजना जैसे कई कार्यक्रम चलाये गए जिसका सीधा प्रभाव बेकारी कम करने पर पड़ा जिसके फलस्वरूप देश में निर्धनता घटी तथा रोजगार के नए-नए अवसर उपलब्ध हुए। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों में बेकारी खत्म करने हेतु निम्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
1. ग्रामीण युवा स्वरोजगार प्रशिक्षिण योजना
2. ग्रामीण महिला एवं बाल विकास योजना
3. जवाहर ग्राम समृद्धि योजना 2006 से उपरोक्त तीनों को मिलाकर संपूर्ण राष्ट्रीय, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 2006, संचालित है जिसके कार्यान्वयन से बेरोजगारी की संख्या में कमी आयी है।
इस विभिन्न योजनाओं में सुधार हेतु निम्न उपाय किए जा सकते हैं-
(i) इन योजनाओं की जानकारी को आम जनता में पहुँचायी जाए।
(ii) इनके बारे में जनता से सहयोग ली जाय।
(iii) जनता को जागरूक कर सफलता को सुनिश्चित किया जाए।
(iv) इन योजनाओं में आरक्षण की व्यवस्था को लागू की जाये।
(v) इन योजनाओं में समाज के हाशिये पर खड़े लोगों को ध्यान में रखकर कार्यान्वित किया जाय।

प्रश्न 5. भारत में शिक्षित बेरोजगारी के कारणों का वर्णन करें। इस समस्या का निराकरण कैसे किया जा सकता है ?
उत्तर-भारत में शिक्षित बेरोजगारी के निम्नलिखित कारण हैं-
(i) दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति-भारत में शिक्षा पद्धति की प्रणाली ब्रिटेन के द्वारा थोपी गई जो भारतीय परिस्थिति के सर्वथा प्रतिकूल साबित हुई है। यही दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति के कारण परंपरागत विषयों को प्रमुखता मिल गई है जिससे अधिक से अधिक लोग बेरोजगार हो रहे हैं।
(ii) तकनीकी शिक्षाओं की उपेक्षा-भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तकनीकी शिक्षा की उपेक्षा की गई है जिससे शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में वृद्धि हुई है।
(ii) व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का अभाव-भारत में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का अभाव है जिससे व्यक्ति परंपरागत पाठ्यक्रमों में नामांकन कराते हैं फलतः उन्हें शिक्षित बेरोजगारी का दंश झेलना पड़ता है।
(iv) शिक्षा सुविधाओं का अभाव-भारत में जिस गति से जनसंख्या वृद्धि हुई है उस गति से शिक्षा सुविधाओं में वृद्धि नहीं हुई है जिससे शिक्षित बेरोजगारी को बढ़ावा मिला है।
(v) सरकार की उदासीनता-सरकार शिक्षित बेरोजगारों के प्रति उदासीन रवैया अपनाये हुए है इससे भी शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में वृद्धि हुई है।
इस समस्या का निराकरण निम्न है-
(i) शिक्षित बेरोजगार को रोजगार मुहैया कराया जाय।
(ii) इन्हें आसान शर्तों पर उदार ऋण की सुविधाओं को मुहैया कराया जाय।
(iii) शिक्षा के पाठ्यक्रम को रोजगारोन्मुख बनाया जाय।
(iv) भारत में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाय।
(v) शिक्षा के पाठ्यक्रम को समयानुकूल बनाया जाय।
(i) सरकारी योजना के द्वारा इन्हें शत्-प्रतिशत रोजगार की गारंटी दी जाए ताकि उनका सरकार के प्रति विश्वास पैदा हो सके।

प्रश्न 6. आप अदृश्य बेकारी से क्या समझते हैं ? समाधान के लिए उपाय बताएँ।
उत्तर-अदृश्य बेकारी के अन्तर्गत लोग नियोजित प्रतीत होते हैं, पर वास्तव में उत्पादकता के ऊपर कोई सक्रिय प्रभाव नहीं पड़ता है। अदृश्य बेकारों के पास भूखण्ड होता है, जहाँ उन्हें काम मिलता है। ऐसा प्रायः कृषिगत काम में लगे परिजनों में होता है। जैसे किसी काम में पाँच लोगों की आवश्यकता होती है लेकिन उनमें आठ लोग लगे होते हैं। इसमें तीन लोग अतिरिक्त हैं, ये तीनों उसी खेत में काम करते हैं जिस पर पांच लोग काम करते हैं। इन तीनों द्वारा किया गया अंशदान पाँच लोगों द्वारा किये गये योगदान में वृद्धि नहीं करता यानि कुल उत्पादकता में कोई वृद्धि
नहीं होती है।
अगर उन पाँच लोगों में से तीन लोगों को हटा भी दिया जाए तो खेत की उत्पादकता में कोई कमी नहीं आएगी। खेत में पांच लोगों के काम की आवश्यकता है और तीन अतिरिकत लोग अदृश्य रूप से लगे रहकर नियोजित होते हैं। अदृश्य बंकारी की सीमान्त उपयोगिता शून्य होती है।

अदृश्य बेकारी की समस्या के समाधान के लिए निम्न उपाय किए जा सकते हैं-
(i) ग्रामीण क्षेत्र में अधिक से अधिक कुटीर उद्योगों की स्थापना की जाय।
(ii) ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वरोजगार हेतु आसान शर्तों पर ऋण की सुविधा मुहैया. कराया जाय।
(iii) शिक्षा को कृषि से संबंधित किया जाए ताकि रोजगार के अधिक अवसर पैदा हो सके।
(iv) जनसंख्या नियंत्रण के प्रभावशाली तरीके अपनाये जाएँ।
(v) ग्रामीण संसाधनों के आधार पर कुटीर उद्योगों की स्थापना कर रोजगार का सृजन किया जाए।
(v) सरकारी योजनाओं को अमल में लाया जाय।
प्रश्न 7. बिहार में ग्रामीण बेरोजगारी की समस्या के प्रमुख कारण क्या हैं ? आप इसे कैसे दूर करेंगे?
उत्तर-बिहार में ग्रामीण बेरोजगारी की समस्या के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
(i) अत्यधिक जनसंख्या-बिहार की जनसंख्या भी तीव्र गति से बढ़ रही है पर उस तेजी से रोजगार का सृजन नहीं हो पा रहा है फलतः लोग बेकार हो रहे हैं।
(ii) निरक्षरता-वर्तमान में बिहार शिक्षा में सबसे नीचे पायदान पर है जहाँ निरक्षरों की संख्या 53.0% है। इस कारण भी बेकारी में वृद्धि हो रही है।
(ii) कृषि का पिछड़ापन-बिहार में कृषि के परंपरागत तरीकों को अपनाया जा रहा है जिससे कृषि पिछड़ी हुई दशा में है तथा इससे रोजगार की दर में धीमी गति कायम है।
(iv) कृषि पर जनसंख्या का अत्यधिक बोझ-बिहार में कृषि पर अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा जनसंख्या का अत्यधिक बोझ है। इस कारण भी ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ती है।
(v) औद्योगिकीकरण का अभाव-बिहार में अन्य राज्यों की तुलना में औद्योगिकीकरण का अभाव है जिससे रोजगार के अवसर ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
(vi) पूँजी का अभाव-बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में पूँजी का अभाव है जिससे कृषक नयी तकनीक को नहीं अपना रहे हैं जिसके फलस्वरूप ग्रामीण बेकारी बढ़ रही है।
(vii) प्रशिक्षित श्रम-शक्ति का अभाव-प्रशिक्षित श्रम-शक्ति के अभाव के कारण मशीन आधारित उद्योगों को ग्रामीण क्षेत्रों में लाभ नहीं मिल पाता है जिससे ग्रामीण बेकारी को
बढ़ावा मिलता है।
बिहार में ग्रामीण बेकारी को निम्न प्रकार से दूर किया जा सकता है-
(i). ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम चलाकर।
(ii) ग्रामीण क्षेत्रों में पूँजी की उपलब्धता कराकर।
(iii) ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों का विकास कर।
(iv) ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर।
(v) ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि की दशा को सुधारकर।

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