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bihar board class 8th biology notes | जन्तुओं में प्रजनन

bihar board class 8th biology notes | जन्तुओं में प्रजनन

अध्ययन सामग्री―एक जीव से दूसरे जीव का जन्म लेना तथा यह प्रक्रिया निरंतर चलती
रहती है। सजीवों में अपनी जैसी संतति उत्पन्न करने के लक्षण पाए जाते हैं। अपने वंशवृद्धि
एवं जाति की निरंतरता बनाए रखने के लिए सभी जीव एक विशेष क्रिया करते हैं जिसे प्रजनन
कहते हैं यानि अपनी जाति या वंश की निरंतरता को बनाये रखने के लिए प्रत्येक जीवधारी अपने
ही समान जीवों को पैदा करता है। जीवों में होने वाली इस क्रिया को जनन या प्रजनन कहते हैं।
जीवों में प्रजनन में भाग लेने वाले अंगों को प्रजनन अंग तथा एक जीव के सभी प्रजनन अंगों
को सम्मिलित रूप से प्रजनन तंत्र कहते हैं।
पौधों की तरह जन्तुओं में भी प्रजनन की दो विधियाँ हैं―
(i) अलैंगिक प्रजनन (A sexual reproduction) तथा (ii) लैंगिक प्रजनन (Sexual
reproduction)।
अलैंगिक प्रजनन―अपनी जाति या वंश की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक ही जनक
द्वारा प्रजनन की क्रिया सम्पन्न होती है तथा इसमें किसी प्रजनन अंग की आवश्यकता नहीं होती
है। यही कारण है कि प्रजनन की इस क्रिया को अलैंगिक प्रजनन कहते हैं। अलैंगिक प्रजनन
हाइड्रा, अमीबा में होता है। हाइड्रा के अलैंगिक जनन को मुकुलन तथा ‘अमीबा के अलैंगिक जनन को द्विखण्डन’ कहते हैं।
परिपक्व हाइड्रा के शरीर में एक या अधिक उभार दिखाई देती है। यह मुकुल होता है।
मुकुल विकसित होता हुआ संतति होता है। यह परिपक्व होकर जनक हाइड्रा से विलग हो जाता
है। विलग होकर मुकुल नवजात हाइड्रा का रूप ले लेता है। इस प्रकार अपनी जाति की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक ही जनक द्वारा प्रजनन की क्रिया सम्पन्न होती है।
अमीबा एककोशिकीय सूक्ष्मजीव है। इसमें कोशिका के मध्य में केन्द्रक होता है। केन्द्रक
परिपक्व होकर दो भागों में बँटने लगते हैं जिससे प्रजनन की क्रिया प्रारंभ हो जाती है। अंत में
अमीबा का शरीर भी दो भगों में बँट जाता है। प्रत्येक भाग में विभाजित केन्द्रक मौजूद रहते
हैं। इस प्रकार एक ही अमीबा अलैंगिक प्रजनन के माध्यम से दो संतति उत्पन्न करता है। अलैंगिक प्रजनन के इस प्रक्रम को ‘द्विखंडन’ कहते हैं।
लैंगिक प्रजनन-प्रजनन का वह रूप जिसमें नर तथा मादा के जननांग भाग लेते हों उसे
लैंगिक प्रजनन कहते हैं। उदाहरण-मानव, कुत्ता, बिल्ली, चूहा, पक्षी, मछली, गाय इत्यादि ।
मानव प्रजनन तंत्र―पुरुषों में उदर के नीचे अण्डा के आकार का एक जोड़ा वृषण होता
है जो नर युग्मक अर्थात् शुक्राणु (Sperm) उत्पन्न करता है। इससे जुड़ी हुई एक जोड़ा
शुक्रनलिका होती है जिससे शुक्राणु गति करता हुआ शिश्न (Penis) के माध्यम से बाहर निकलता हैं। शुक्राणु सूक्ष्म, एक कोशिकीय तथा लाखों की संख्या में निकलते हैं।
स्त्रियों में नाभि के नीचे शरीर के अन्दर मादा प्रजनन अंग स्थित होते हैं। इसमें एक जोड़ा
अण्डाशय, एक जोड़ा अण्डवाहिनी तथा एक गर्भाशय (Uterus) होता है। नर और मादा के
मिलन के समय शुक्राणु एवं अण्डाणु आपस में संलयित हो जाते हैं। संलयन की यह क्रिया
निषेचन कहलाता है। निषेचित अण्डाणु युग्मनज (Zygote) कहते हैं। युग्मज गर्भाशय में जाकर
विभाजित होने लगती है जो परिवर्धित होकर भ्रूण (Embryo) में परिवर्तित हो जाता है। भ्रूण
विकसित होकर शरीर के सभी अंगों का निर्माण कर लेती है तब यह अवस्था गर्भ कहलाती है।
गर्भ का विकास पूरा हो जाने पर मांँ शिशु को जन्म देती है।
नवजात शिशु में माता एवं पिता दोनों के लक्षण पाए जाते हैं। निषेचन की क्रिया मादा के
शरीर के अन्दर सम्पन्न होती है तथा मादा के शरीर के बाहर भी सम्पन होती है।
आंतरिक निषेचन →मानव, पशु, पक्षी इत्यादि ।
बाह्य निषेचन →मछली, मेढ़क इत्यादि।
कृत्रिम निषेचन―किसी कारण स्त्री बच्चे को जन्म देने में सक्षम नहीं हो पाती है। ऐसी
स्त्रियों को हमारे घर-परिवार या समाज में बाँझ कहते हैं। इस गंभीर समस्याओं से निजात पाने
के लिए डॉक्टर ने एक विशेष उपाय अपनाते हैं जिसे कृत्रिम निषेचन कहते हैं। कृत्रिम निषेचन
में ताजा अण्डाणु एवं शुक्राणु एकत्र करके उचित माध्यम में कुछ समय के लिए एक साथ रखते
हैं। निषेचन हो जाने पर माता के गर्भाशय में रोपित कर दिया जाता है। अन्ततः सामान्य शिशु
का जन्म होता है। इस तकनीक से जन्मे शिशु को परखनली-शिशु कहते हैं। परन्तु वास्तव में
शिशु का विकास परखनली में नहीं होता है। बल्कि संतान चाहनेवाली माँ के गर्भ में होता है।
लिंग निर्धारण―मानव के प्रत्येक कोशिकाओं में 23 जोड़ा = 46 गुणसूत्र होते हैं। 22
जोड़े गुणसूत्र नर तथा मादा में समान होते हैं जो शिशु में रंग, लम्बाई एवं शारीरिक बनावट के
लिए उत्तरदायी होते हैं। दो गुणसूत्र यानि 23वाँ जोड़ा भिन प्रकृति के होते हैं। ये गुणसूत्र स्त्री
में XX तथा पुरुष में XY के रूप में पाए जाते हैं जो बच्चे के लिंग निर्धारण के लिए उत्तरदायी
होते हैं। नर के शुक्राणु में दो X तथा Y लिंग गुणसूत्र पाए जाते हैं जबकि मादा में अण्डाणु
में सिर्फ X लिंग गुणसूत्र पाए जाते हैं। यदि Y गुणसूत्र वाले शुक्राणु तथा X गुणसूत्र वाले
अण्डाणु निषेचित होते हैं तो नवजात लिंग पुरुष होगा । यदि X गुणसूत्र वाले शुक्राणु तथा X गुणसूत्र वाले अण्डाणु निषेचित होते हैं तो नवजात का लिंग मादा होता है। अत: लिंग निर्धारण में मादा की कोई भूमिका नहीं होती है क्योंकि मादा के पास XX गुणसूत्र वाले ही अण्डाणु होते हैं।
इस प्रकार इस अध्याय से यौवन शिक्षा, प्रजनन तंत्र, प्रजनन के प्रकार, लिंग निर्धारण एवं
कृत्रिम प्रजनन के बारे में विस्तृत अध्ययन किया और साथ ही स्त्री के बारे में फैली भ्रांतियों की
वास्तविकता के बारे में जानकारी मिली।
                                                     अभ्यास
1. सही विकल्प पर (√) निशान लगाइए-
(क) जीवों में निरन्तरता के लिए आवश्यकता है-
(i) पाचन
(ii) श्वसन
(iii) प्रजनन
(iv) संचरण
(ख) अलैंगिक प्रजनन में भाग लेते हैं-
(i) दो जीव
(ii) तीन जीव
(iii) कोई जीव नहीं
(iv) एक जीव
(ग) लैंगिक प्रजनन में भाग लेते हैं-
(i) दो नर जीव
(ii) एक नर एवं एक मादा अथवा एक उभयलिंगी
(iii) दो मादा जीव
(iv) इनमें से कोई नहीं
(घ) आंतरिक निषेचन होता है-
(i) मादा शरीर के बाहर
(ii) नर शरीर के बाहर
(iii) मादा शरीर के अन्दर
(iv) नर शरीर के अन्दर
(ङ) मादा जननांग है-
(i) वृषण
(ii) गर्भाश्य
(iii) शिश्न
(iv) शुक्रवाहिनी
उत्तर-(क) (iii), (ख) (iv), (ग) (ii), (घ) (iii), (ङ) (ii) ।
2. सत्य कथन के सामने (√) तथा असत्य कथन के सामने (x) का चिह्न लगाइए-
उत्तर-
(i) अमीबा मुकुलन द्वारा प्रजनन करता है।                             (x)
(ii) मेढ़क में बाह्य निषेचन होता है।                                      (√)
(iii) अलैंगिक प्रजनन की क्रिया में निषेचन होता है।                 (×)
(iv) शुक्राणु नर युग्मक है।                                                   (√)
(v) अण्डाशय से शुक्राणु निकलते हैं।                                     (×)
3. प्रजनन से क्या समझते हैं ?
उत्तर–सजीवों में अपनी जैसी संतति उत्पन्न करने के लक्षण पाए जाते हैं अपने वंशवृद्धि एवं
जाति की निरंतरता बनाए रखने के लिए सभी जीव एक विशेष क्रिया करते हैं जिसे ‘प्रजनन’ कहते हैं।
यानि अपनी जाति या वंश की निरंतरता को बनाए रखने के लिए प्रत्येक जीवधारी अपने
ही समान जीवों को पैदा करता है। जीवों में होने वाली इस क्रिया को जनन या प्रजनन कहते हैं।
जीवों के प्रजनन में भाग लेने वाले अंगों को प्रजनन अंग तथा एक जीव के सभी प्रजनन अंगों
को सम्मिलित रूप से प्रजनन तंत्र कहते हैं।
प्रजनन की दो विधियाँ हैं—(i) अलैंगिक प्रजनन, (ii) लैंगिक प्रजनन।
4. अलैंगिक प्रजनन तथा लैंगिक प्रजनन में विभेद समझाइए।
उत्तर-प्रजनन की दो विधियाँ होती हैं-(i) अलैंगिक प्रजनन, (ii) लैंगिक प्रजनन ।
अपनी जाति या वंश की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक ही जनक द्वारा प्रजनन की क्रिया
सम्पन्न होती है। इस क्रिया में प्रजनन अंग की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
परिपक्व हाइड्रा के शरीर में एक या अधिक उभार दिखाई देती है यह मुकुल होता है मुकुल
विकसित होता हुआ संतति है। यह परिपक्व होकर जनक हाइड्रा से विलग हो जाता है। अलैंगिक प्रजनन की यह विधि मुकुलन कहलाता है। अलैंगिक प्रजनन में कोई एक जीव
विभाजित होकर दो संतति उत्पन करता है। “द्विखंडन” कहलाता है। यह प्रक्रम अमीबा में होता है।
प्रजनन की वह विधि जिसमें नर एवं मादा दोनों के जननांग भाग लेते हैं। उसे लैंगिक प्रजनन
कहते हैं। मानव प्रजनन लैंगिक प्रजनन का उदाहरण है। इस प्रजनन में पुरुष के जननांग तथा
मादा के जननांग भाग लेते हैं। लैंगिक प्रजनन में नरयुग्मक तथा मादा युग्मक संलयित होते हैं।
5. आंतरिक निषेचन तथा बाह्य निषेचन में अन्तर बताइए।
उत्तर-शुक्राणु और अण्डाणु लैंगिक प्रजनन के द्वारा निषेचित होकर या संलयित होकर मादा
गर्भाशय में रोपित हो जाता है। यानि निषेचन की क्रिया जब मादा शरीर के अन्दर होती है तब
निषेचन, आंतरिक निषेचन कहलाता है।
मछली, मेढ़क इत्यादि जलीय जीव जल में एक बार में सैकड़ों अण्डे देती है। ये अण्डे
जेली जैसी परत  से बंधे रहते हैं। मादा जैसे हो अण्डे देती है। उसी समय नर मेढक शुक्राणुओं
को जल में छिड़क देता है। शुक्राणु तैरते हुए अण्डों से जा मिलते हैं। इस तरह अण्डे निषेचित
हो जाते हैं। जल में सभी अण्डे निषेचित नहीं हो पाते हैं। यानि अण्डाणु एवं शुक्राणु का निषेचन
जब मादा के शरीर के अन्दर नहीं होता है तो ऐसे निषेचन को बाह्य निषेचन कहते हैं।
6. शिशु के लिंग निर्धारण का क्या अर्थ है ?
उत्तर-मानव के प्रत्येक कोशिकाओं में 23 जोड़ा अर्थत् 46 गुणसूत्र होते हैं। जिनमें से
22 जोड़े अर्थात् 44 गुणसूत्र पुरुष तथा स्त्रियों में समान प्रकृति के होते हैं और संतति में रंग,
लम्बाई एवं शारीरिक बनावट के लिए उत्तरदायी होते हैं। 23वांँ जोड़ा अर्थात् दो गुणसूत्र इससे
भिन्न प्रकृति के होते हैं। ये गुणसूत्र पुरुष में XY तथा स्त्री में XX के रूप में पहचाने जाते
हैं और यही गुणसूत्र लिंग निर्धारण के लिए उत्तरदायी होते हैं। शुक्राणु में X तथा Y दो प्रकार
के लिंग गुणसूत्र होते हैं जबकि अण्डाणुओं में केवल X प्रकार के ही गुणसूत्र पाए जाते हैं। यदि
Y गुणसूत्र वाले शुक्राणु तथा अण्डाणु (X गुणसूत्र) के साथ निषेचित होते हैं तो युग्मनज XY
 प्रकृति की होगी और नवजात शिशु लड़का होगा। जबकि X गुणसूत्र वाले शुक्राणु के साथ
निषेचन होने पर युग्मनज XX प्रकृति की होगी और नवजात शिशु लड़की होगी।
7. क्या होगा यदि शुक्राणु के अंडाणु से नहीं मिलने दिया जाए।
उत्तर सजीवों में अपनी जैसी संतति । शिशु उत्पन्न करने के लक्षण पाए जाते हैं। अपने वंश
वृद्धि एवं जाति की निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रत्येक जीवधारी एक विशेष क्रिया करते हैं जिसे प्रजनन कहते हैं। प्रजनन की प्रक्रिया में अण्डाणु तथा शुक्राणु आपस में निषेचित होकर शिशु के जन्म देता है। यदि शुक्राणु को अंडाणु से मिलने नहीं दिया जाए तो इस सजीव जगत का धीरे-धीरे समाप्ति हो जाएगा। सभी जीव विलुप्त हो जाएंगे। सृष्टि का नामोनिशान मिट जाएगा।
8. क्या शिशु के लिंग निर्धारण के लिए स्त्री उत्तरदायी है। यदि नहीं, तो समाज एवं
परिवार में लोगों को आप कैसे समझाएंँगे?
उत्तर-पुरुष में XY प्रकृति के गुणसूत्र पाए जाते हैं। जबकि स्त्री में XX प्रकृति के गुणसूत्र
पाए जाते हैं। यही गुणसूत्र लिंग निर्धारण के लिए उत्तरदायी होते हैं। शुक्राणु में X तथा Y
दो प्रकार के लिंग गुणसूत्र होते हैं। जबकि अण्डाणु में केवल X प्रकार के ही गुणसूत्र होते हैं।
यदि Y गुणसूत्र वाले शुक्राणु तथा अण्डाणु (X गुणसूत्र) के साथ निषेचित होते हैं तो युग्मनज
XY प्रकृति की होगी और नवजात शिशु लड़का होगा जबकि X गुणसूत्र वाले शुक्राणु के साथ
निषेचन होने पर युग्मनज XX प्रकृति की होगी और नवजात शिशु लड़की होगी। इस प्रकार लिंग
निर्धारण में स्त्री उत्तरदायी नहीं होती है। समाज और परिवार में लोगों को इसी प्रकार समझाएँगे।
                                                 ◆◆◆

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