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8th class hindi note | राह भटके हिरन के बच्चे को ( कविता )

राह भटके हिरन के बच्चे को ( कविता )

8th class hindi note

वर्ग – 8

विषय – हिंदी

पाठ २३ – राह भटके हिरन के बच्चे को

 राह भटके हिरन के बच्चे को ( कविता )
   -डॉ ० नि ० ( वियतनाम ) ( जाड़े की रात …….से मत , मत रो , नन्हें हिरण । )

भावार्थ – 
कवि ने देखा एक हिरण का छोटा बच्चा खेलने के चक्कर में मस्त होकर राह भटककर पहाड़ पर रो रहा है । उसके आँखों में माँ से बिछुड़ने की वेदना है । कवि उस छोटे हिरन छौने से कहता है । अरे हिरन – शावक मत रोओ , सो जाओ , तेरी माँ तुझे अवश्य मिलेगी ।
बाँस के वन में अकवन के वन में रात को ठंडी हवा तुझे लोरी सुनाकर सुलायेगी । बेहिचक सो जा ।
ऊपर आकाश में तारे , नीचे गिरे नरम – नरम पत्ते के ढेर पर सो जा । सुबह होते ही जब सूर्योदय होगा , किरणें फैल जायेगी तो तुम्हारी माँ तुझे मिले जायेगी ।

शब्दार्थ –
मदमस्त = डूबा जाना , लीन हो जाना । वेदना = दुःख पीड़ा । बेहिचक = बिना रूकावट के ।।

 

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