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bihar board class 10th biology notes | नियंत्रण एवं समन्वय

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bihar board class 10th biology notes | नियंत्रण एवं समन्वय

                                                क्रियाकलाप 7.1
प्रश्न 1. कुछ चीनी अपने मुंँह में रखिए । इसका स्वाद कैसा है ?
उत्तर-चीनी मीठी लगती है।
प्रश्न 2. अपनी नाक को अंगूठा तथा तर्जनी अंगुली से दबाकर बन्द कर लीजिए । अब
फिर से चीनी खाइए । इसके स्वाद में क्या कोई अन्तर है ?
उत्तर-हाँ, चीनी के स्वाद में अन्तर महसूस होता है।
प्रश्न 3. खाना खाते समय उसी तरह से अपनी नाक बन्द कर लीजिए तथा ध्यान दीजिए
कि जिस भोजन को आप खा रहे हैं, क्या आप उस खाने का पूरा स्वाद ले रहे हैं।
उत्तर-छात्र अपने आप महसूस करें।
प्रश्न 4. जब नाक बन्द होती है, तो क्या आप चीनी तथा भोजन के स्वाद में कोई
अन्तर महसूस करते हैं ? यदि हां, तो आप सोचते होंगे कि यह क्यों होता है ? इस तरह
के अन्तर जानने के लिए और उनके संभावित हल खोजने के लिए पढ़िए तथा चर्चा कीजिए।
जब आपको जुकाम हो जाता है तब भी आप इसी तरह की स्थिति का सामना करते हैं?
उत्तर-हाँ।
                                          पाठगत प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अन्तर है ?
उत्तर-प्रतिवर्ती क्रिया अवचेतन मस्तिष्क की अवस्था में मेरुरज्जु द्वारा संपादित होती है,
जबकि टहलना प्रमस्तिष्क के नियंत्रण में सोच-समझकर की गई क्रिया है ।
प्रश्न 2. दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अन्तर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या
होता है?
उत्तर-अन्तर्ग्रथन पर विद्युत तरंगों के रूप में आने वाला तन्त्रिका आवेग कुछ रसायन का
स्रावण को प्रेरित करता है। ये रसायन अन्तर्ग्रथन को पार करके अगली तत्रिका कोशिका में समान प्रकार का तन्त्रिका आवेग उत्पन करते हैं।
प्रश्न 3. मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण
करता है?
उत्तर-अनुमस्तिष्क ।
प्रश्न 4. हम एक अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं ?
उत्तर-अगरबत्ती की गंध का पता अग्रमस्तिष्क द्वारा लगाया जाता है । यहाँ गंध की संवेदना
के लिए अलग संवेदी केन्द्र होता है जहाँ सूचना प्राप्त होती है । इस प्रकार, हमें अगरबत्ती की
गंध का पता चलता है।
प्रश्न 5. प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है ?
उत्तर-शरीर के प्रत्येक भाग से आने वाली तन्त्रिकाएँ आकर मेरुरज्जु में मिलती हैं जहाँ
प्रतिवर्ती चाप बनता है । किसी संवेदना के प्रति अनुक्रिया की सूचना बाद में मस्तिष्क को दे दी
जाती है जहाँ उसका पुनः विश्लेषण होता है।
                                        क्रियाकलाप 7.2
• एक शंकु फ्लास्क को जल से भर लीजिए ।
• फ्लास्क की ग्रीवा को तार के जाल से ढक दीजिए।
• एक ताजा छोटा सेम का पौधा तार की जाली पर इस प्रकार रख दीजिए कि उसकी
जड़ें जल में भीगी रहें।
• एक ओर से खुला हुआ गत्ते का एक बॉक्स लीजिए ।
• फ्लास्क को बॉक्स में इस प्रकार रखिए कि बॉक्स की खुली साइड खिड़की की ओर
हो जहाँ से प्रकाश आ रहा है (चित्र 7.1) है।
• दो या तीन दिन बाद आप देखेंगे कि प्ररोह प्रकाश की ओर झुक जाता है तथा जड़ें
प्रकाश से दूर चली जाती हैं।
• अब फ्लास्क को इस प्रकार घुमाइए कि प्ररोह प्रकाश से दूर तथा जड़ प्रकाश की ओर
हो जाएँ । इसे इस अवस्था में कुछ दिन के लिए विक्षोभ रहित छोड़ दीजिए ।
              चित्र 7.1 प्रकाश की दिशा में पादप की अनुक्रिया
प्रश्न 1. क्या प्ररोह और जड़ के पुराने भागों ने दिशा बदल दी है ?
उत्तर-पौधों के पुराने भाग जड़ और तने बहुत कम दिशा बदलते हैं जबकि नए भाग अधिक
दिशा बदलते।
प्रश्न 2. क्या ये अन्तर नयी वृद्धि की दिशा में है ?
उत्तर-हाँ, नयी वृद्धि की दिशा में अधिक परिवर्तन होता है।
प्रश्न 3. इस क्रियाकलाप से हम क्या निष्कर्ष निकालते हैं ?
उत्तर-उपर्युक्त क्रियाकलाप में तने द्वारा ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन और जड़ों द्वारा धनात्मक
गुरुत्वानुवर्तन प्रदर्शित होता है ।
                                    पाठगत प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. पादप हार्मोन क्या हैं ?
उत्तर-पौधे के विभिन्न भागों द्वारा स्रावित रासायनिक पदार्थ जो वृद्धि एवं अन्य गतिविधियों
का नियंत्रण व समन्वय करते हैं उन्हें पादप हॉर्मोन कहते हैं।
प्रश्न 2. छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस
प्रकार भिन्न है?
उत्तर-छुई-मुई पादप की गति एक अकुंचन गति है जो उद्दीपन की दिशा से प्रभावित नहीं
होती है जबकि प्रकाश की ओर प्ररोह की गति एक प्रकाशानुवर्तन गति है जिस पर प्रकाश उद्दीपन की दिशा का प्रभाव पड़ता है और गति प्रकाश की ओर होती है ।
प्रश्न 3. एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
उत्तर-(i) ऑक्सिन पौधे के तने की लम्बाई को बढ़ाता है ।
(ii) जिब्बेरेलिन पौधे के तने की वृद्धि करता है।
प्रश्न 4. किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार
सहायक है?
उत्तर-प्रतान स्पर्श के प्रति संवेदनशील होता है। प्रतान जैसे ही किसी स्पर्श के सम्पर्क में
आते हैं ऑक्सिन दूसरी और विसरित हो जाता है जिससे उस ओर की कोशिकाएँ अधिक लम्बी
होने लगती हैं और प्रतान विपरीत दिशा में मुड़ता है। इस प्रकार वह सहारे के चारों ओर लिपटका पौधे को सहारा देता है।
प्रश्न 5. जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए ।
उत्तर-जलानुवर्तन प्रदर्शित करने के लिए बीजों के अंकुरण एक ऐसी जमीन के ऊपर करवाते
हैं जो एक तरफ नम है तथा दूसरी तरफ सूखी ।
मूलांकुर पहले तो धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन दर्शाते हुए नीचे की ओर गति करते हैं परन्तु जल्दी
ही गीली जमीन की ओर मुड़ने लगते हैं । यह धनात्मक जलानुवर्तन गति को प्रदर्शित करता है
                                          क्रियाकलाप 7.3
प्रश्न 1. दिए गए चित्र में दी हुई ग्रन्थियों को पहचानिए ।
उत्तर-पीयूष ग्रन्थि, अवटु ग्रन्थि, परावटु ग्रन्थि, हाइपोथैलमस, थाइमस ग्रन्थि, अग्न्याशय
अधिवृक्क ग्रन्थि, वृषण और अण्डाशय ।
प्रश्न 2. मानव शरीर का रेखाचित्र बनाकर अंतःस्रावी ग्रन्थियों को दर्शाइए ।
उत्तर-चित्र 7.3 देखें।
चित्र 7.3 मनुष्य की अंतःस्रावी ग्रन्थियाँ (a) नर, (b) मादा
                                 पाठगत प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. जन्तुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है ?
उत्तर-जन्तुओं में रासायनिक समन्वय कुछ रासायनिक पदार्थ जिसे हॉर्मोन कहते हैं, के द्वारा
होता है। ये अंतःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित होते हैं । स्रावित होने वाले हॉर्मोन का समय और
मात्रा का नियंत्रण पुनर्भरण क्रिया विधि से किया जाता है।
प्रश्न 2. आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है ?
उत्तर-आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि आयोडीन,
अवटु ग्रन्थि जो कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के उपापचय हेतु थायरॉक्सिन हॉर्मोन स्रावित करती है, के लिए आवश्यक है। यह हॉर्मोन संतुलित वृद्धि व विकास के लिए उत्तरदायी है । आयोडीन की कमी से घेघा रोग हो जाता है।
प्रश्न 3. जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया
होती है ?
उत्तर-एड्रीनलीन सीधे रक्त में स्रावित होता है तथा शरीर के विभिन्न भागों में रुधिर प्रवाह
के साथ फैलता है। यह मुख्य रूप से हृदय पर प्रभाव डालता है, जिससे हृदय तेजी से धड़कनें
लगता है और पेशियों में ऑक्सीजन अधिक मात्रा में पहुंचना शुरू करता है जिससे पेशियाँ अधिक सक्रिय हो जाती हैं । ये पेशियाँ शरीर की विभिन्न क्रियाविधियों को नियंत्रित करती हैं।
प्रश्न 4. मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की
जाती है?
उत्तर-इंसुलिन हॉर्मोन रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है । मधुमेह के रोगी में अग्न्याशय
ग्रन्थि के अल्प सक्रियता के कारण यह हॉर्मोन कम मात्रा में स्रावित होता है जिससे रक्त शर्करा
बढ़ जाती है । इसके शरीर पर घातक परिणाम होते हैं । इसलिए इंसुलिन का इंजेक्शन देकर रोगी की रक्त शर्करा को नियमित किया जाता है।
                                            अभ्यास
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है?
(a) इंसुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकाइनिन              उत्तर-(d) साइटोकाइनिन
प्रश्न 2. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं-
(a) दुमिका
(b) सिनेप्स
(c) एक्सॉन
(d) आवेग                 उत्तर-(b) सिनेप्स
प्रश्न 3. मस्तिष्क उत्तरदायी है
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपरोक्त सभी                      उत्तर-(d) उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है ? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ
ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों । क्या समस्या उत्पन्न हो सकती है?
उत्तर-वातावरण से सूचनाएँ प्राप्त करना ग्राही अंगों का मुख्य कार्य होता है । ये ग्राही
हमारे संवेदी अंगों में स्थित होते हैं । कुछ ऐसी अवस्थाएँ जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य
न करें जैसे भूखे व्यक्ति के मुँह में पानी का आना, घुटने की प्रतिक्षेप आदि जो कि तुरन्त मेरुरज्जु द्वारा होती है, तब मस्तिष्क द्वारा संपादित होने में काफी समय लग जाएगा जिससे कुछ दुर्घटनाएँ हो सकती हैं।
प्रश्न 5. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का
वर्णन कीजिए।
उत्तर-
तंत्रिका कोशिका के कार्य-न्यूरॉन या
तंत्रिका कोशिका तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक
एवं क्रियात्मक इकाई है। इसके मुख्य तीन
भाग होते हैं-
(i) दुमिका, (ii) कोशिकाय, (iii) एक्सॉन ।
सूचनाओं का आवेग दुमिका से कोशिकाय
की ओर चलती है तथा फिर एक्सॉन में से
होता हुआ सिनेप्स तक पहुंचता है। फिर इसे
पार करता हुआ एक न्यूरॉन से दूसरे से गुजरता
हुआ मेरुरज्जु तक पहुंचता है । इसी प्रकार
सूचनाएँ मस्तिष्क से कार्यकारी अंग (पेशी,
ग्रन्थि) तक पहुंँचती है।
                                                                      चित्र 7.4 तंत्रिकोशिका की संरचना
प्रश्न 6. पौधों में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है ?
उत्तर-दिशिक या अनुवर्तन गति
जो प्रकाश उद्दीपन के प्रभाव में,
प्रकाश की ओर अथवा उसके विपरीत
होती है उसे प्रकाशानुवर्तन कहते हैं।
तने प्रकाश की ओर मुड़ते हैं जब
जड़ें प्रकाश के विपरीत मुड़कर
धनात्मक
अनुक्रिया करती हैं
                                                             चित्र 7.5 गुरुत्वानुवर्तन दिखाता पादप
प्रश्न 7. मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों के आवागमन में व्यवधान होगा?
उत्तर-(i) सभी संकेत जो मस्तिष्क से दूर या मस्तिष्क की ओर मेरुरज्जु से होकर चलते
हैं, उनके आवागमन में व्यवधान उत्पन्न होगा ।
(ii) प्रतिवर्ती क्रिया नहीं संपादित होगी ।
प्रश्न 8. पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है ?
उत्तर-पौधों की विशेष कोशिकाओं द्वारा कुछ रासायनिक पदार्थ स्रावित होते हैं जिन्हें पादप
हॉर्मोन कहते हैं । विभिन्न प्रकार के पादप हॉर्मोन वृद्धि व विकास तथा बाह्य वातावरण के साथ
समन्वय स्थापित करते हैं । ये पादप हॉर्मोन क्रिया स्थान से दूर कहीं स्रावित होकर विसरण द्वारा
उस स्थान तक पहुँचकर कार्य करते हैं।
प्रश्न 9. एक जीव में नियंत्रणं एवं समन्वय के तंत्र की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-प्रत्येक प्रकार के वातावरणीय परिवर्तन का अनुक्रिया पर प्रभाव पड़ता है। जैसे कक्षा
में हम धीरे-धीरे फुसफुसाकर बात करते हैं, चिल्लाकर बात नहीं करते । इस प्रकार हम वह क्रिया करते हैं जिससे यह कार्य पूरा हो सके । इसलिए वातावरण की विभिन्न क्रियाओं को पहचानने के लिए इस प्रकार की निर्यात्रत क्रियाविधि की आवश्यकता होती है। यह क्रियाविधि उस क्रिया के प्रति ठीक-ठीक अनुक्रिया है । दूसरे शब्दों में जीवों को नियंत्रण व समन्वय के लिए अंगों का प्रयोग करना आवश्यक है । बहुकोशिकीय जीवों में विशिष्ट ऊतक उपस्थित होते हैं जो
नियंत्रण एवं समन्वय क्रियाओं के संपादन में प्रयुक्त होते हैं ।
प्रश्न 10. अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न ह?
उत्तर-
प्रश्न 11. जन्तुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन की क्रियाविधि
की तुलना तथा व्यतिरेक (Contrast) कीजिए ।
उत्तर-मनुष्य में विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण तंत्रिका तंत्र की तंत्रिकाओं द्वारा होता है। संवेदी
तत्रिकाएँ सूचनाएँ प्राप्त करती हैं तथा प्रेरक तंत्रिकाओं द्वारा भेजती हैं।
इनके अतिरिक्त कुछ महत्वपूर्ण कार्य जैसे रक्त शर्करा स्तर उपापचय, वृद्धि एवं विकास आदि
अंत:स्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं । इस प्रकार मानव में नियंत्रण एवं
समन्वय, तंत्रिका तंत्र एवं हॉर्मोन तंत्र एक साथ मिलकर करते हैं।
प्रश्न 12. छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में क्या
अन्तर है?
उत्तर-छुई-मुई पौधे में गति-छुई-मुई में स्पर्श उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया के फलस्वरूप गति
होती है। जब पत्ती को छूते हैं तब उद्दीपन पत्ती के आधार तक संचरित हो जाता है और पत्तियाँ
नीचे झुक जाती हैं। यह आधार कोशिकाओं में परासरणीय दाब कम होने के कारण होता है।जब
उद्दीपन समय समाप्त हो जाता है तब परासरणीय दाब पुनः स्थापित हो जाता है तथा पत्तियाँ
सामान्य अवस्था में आ जाती हैं । यह वृद्धि अनाश्रित गति है।
छुई-मुई में स्पर्श बिन्दु (उद्दीपन) से अलग भाग में गति होती है । इसमें सूचना विशिष्ट
ऊतकों से होकर नहीं बल्कि विद्युत रासायनिक संकेतों के रूप में एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक संचरित होती है। पादप कोशिकाओं की रचना (आकार) उनमें पानी की मात्रा के परिवर्तन से परिवर्तित होती हैं जिसके परिणामस्वरूप गति होती है।
हमारे पैर की गति-हमारे पैर की पेशियाँ तत्रिकाओं से सम्बद्ध होती हैं जिनमें गति करने
हेतु आवश्यक सूचनाएँ मस्तिष्क द्वारा भेजी जाती हैं।
सूचनाएँ विद्युत रासायनिक संकेतों के रूप में संचरित होती हैं । ये पेशियों तक पहुंचकर
रासायनिक संकेतों में बदल जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप पैर में गति होती है। अत: पैर में गति पेशियों के सिकुड़ने एवं फैलने से होती है जो मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती है।
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