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bihar board class 10 physics notes | हमारा पर्यावरण

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bihar board class 10 physics notes | हमारा पर्यावरण

                                   क्रियाकलाप 15.1
• अपने घर से कचरा एकत्र कीजिए। इसमें पूरे दिन में उत्पन्न कूड़ा-कचरा जैसे कि
रसोई का कूड़ा (संदूषित भोजन, सब्जियों के छिलके, चाय की उपयोग की गई पत्तियाँ,
दूध की खाली थैली तथा खाली डिब्बे) रद्दी कागज, दवा की खाली बोतल/स्ट्रिप्स,
बबल पैक, पुराने फटे कपड़े तथा टूटे जूते आदि हो सकते हैं।
• इसे विद्यालय के बगीचे में एक गड्ढे में इसे दबा दीजिए, यदि ऐसा स्थान उपलव्य
न हो तो इस कचरे को किसी पुरानी बाल्टी अथवा गमले में एकत्र करके उसे 15
cm मोटी मिट्टी की पर्त से ढक दीजिए।
• इसे नम रखिए 15 दिनों के अंतराल पर इसका अवलोकन करते रहिए।
प्रश्न 1. वे कौन-से पदार्थ हैं जो लम्बे समय बाद भी अपरिवर्तित रहते हैं ?
उत्तर-दूध के पैकेट, खाली डिब्बे, खाली दवा की बोतलें, स्ट्रिप्स तथा टूटे जूते।
प्रश्न 2. वे कौन-से पदार्थ हैं जिनके स्वरूप में तथा संरचना परिवर्तन आता है ?
उत्तर-रसोई का कूड़ा, खराब भोजन, सब्जियों के छिलके, चाय उपयोग की गयी पत्तियाँ,
रद्दी कागज, पुराने फटे कपड़े।
प्रश्न 3. जिन पदार्थों के स्वरूप में समय के साथ परिवर्तन आया उनमें कौन-से पदार्थ
अतिशीघ्र परिवर्तित हुए हैं ?
उत्तर-संदूषित भोजन तथा सब्जियों के छिलके।
                                           क्रियाकलाप 15.2
• पुस्तकालय अथवा इंटरनेट द्वारा ‘जैव निम्नीकरणीय’ एवं ‘अजैव निम्नीकरणीय’ पदार्थों
के विषय में अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए।
प्रश्न 1. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कितने समय तक पर्यावरण में इसी रूप में बने
रह सकते हैं?
उत्तर-ये पदार्थ निष्क्रिय होते हैं तथा पर्यावरण में लम्बे समय तक रहते हैं। ये दशक से
शताब्दी तक में नष्ट होते हैं।
प्रश्न 2. आजकल ‘जैव निम्तीकरणीय प्लास्टिक’ उपलब्ध हैं। इन पदार्थों के विषय
में और अधिक जानकारी प्राप्त कीजिएं तथा पता लगाइए कि क्या उनसे पर्यावरण को हानि
हो सकती है अथवा नहीं।
उत्तर-आजकल बहुत-सी जैव प्लास्टिक समाचारों में हैं इनमें से कुछ हैं-फैब्रिक बहुलक
जैव निम्नीकरणीय प्लास्टिक अपेक्षाकृत जैव अनिम्नीकरणीय प्लास्टिक से कम हानि पहुंँचाते हैं।
फिर भी इनका अधिक उत्पादन व उपयोग लम्बे समय तक पदार्थों के चक्रण को प्रभावित करेगा
और इनके अपघटक उत्पाद भूमि तथा जल प्रदूषण कर सकते हैं।
                                       पाठगत प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ
 अजैव निम्नीकरणीय?
उत्तर-कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जिन पर सूक्ष्म जीव अपना प्रभाव डालते हैं और उन्हें सरल
पदार्थों में बदल देते हैं। सूक्ष्म जीवों का असर केवल कुछ पदार्थों पर ही होता है। अतः कुछ पदार्थ ही जैव निम्नीकरणीय होते हैं। कुछ पदार्थ ऐसे भी होते हैं जिन पर सूक्ष्म जीवों का असर नहीं होता और वे सरल पदार्थों में नहीं टूटते हैं। ऐसे पदार्थों को अजैव निम्नीकरणीय कहते हैं।
प्रश्न 2. ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को
प्रभावित करते हैं।
उत्तर-(i) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपघटित होकर दुर्गन्ध फैलाते हैं।
(ii) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपघटित होकर बहुत-सी विषैली गैसें वातावरण में मिलाते
हैं जिससे वायु प्रदूषण फैलता है।
प्रश्न 3. ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को
प्रभावित करते हैं?
उत्तर-(i) अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण में लम्बे समय तक रहते हैं और पर्यावरण
को प्रदूषित करते हैं। ये पदार्थों के चक्रण में बाधा पहुंचाते हैं।
(ii) ऐसे बहुत से पदार्थ जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण का कारण बनते हैं।
                                       क्रियाकलाप 15.3
• संभवतः आपने एक जल जीवशाला (aquarium) देखी होगी। आइए, इसे बनाने का
प्रयास करते हैं।
• जल जीवशाला बनाते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना होगा ? मछलियों को तैरने
के लिए पर्याप्त स्थान (एक बड़ा जार भी ले सकते हैं) जल, ऑक्सीजन एवं भोजन।
• हम एक वायु पंप (वातित्र) द्वारा ऑक्सीजन पंप कर सकते हैं तथा मछली का भोजन
बाजार में उपलब्ध होता है।
प्रश्न 1. यदि हम इसमें कुछ पौधे लगा दें तो यह एक स्वनिर्वाह तंत्र बन जाएगा।
क्या आप सोच सकते हैं कि यह कैसे होता है ? एक जल जीवशाला मानव-निर्मित पारितंत्र
का उदाहरण है।
उत्तर-पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में O2 गैस छोड़ते हैं। यह O2 पौधों तथा जन्तुओं
की श्वसन क्रिया में उपयोग की जाती है तथा इस क्रिया में CO2 गैस निकलती है। यह CO2
प्रकाश संश्लेषण में काम आती है। इस प्रकार की जल जीवशाली आत्मनिर्भर बन जाती है।
प्रश्न 2. क्या हम जल जीवशाला बनाने के उपरांत इसे ऐसे ही छोड़ सकते हैं ?
यदा-कदा इसकी सफाई की क्या आवश्यकता है ? क्या हमें इसी प्रकार तालाबों और झीलों
की सफाई भी करनी चाहिए ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-हम जल जीवशाला को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते। इसे कभी-कभी साफ करने की
आवश्यकता है क्योंकि यह पौधों तथा जन्तुओं की जैव प्रक्रियाओं द्वारा प्रदूषित हो जाती है। इसी प्रकार हमें तालाबों की सफाई की भी आवश्यकता है क्योंकि ये प्राकृतिक जल जीवशाला है। ये भी जीवों की प्रक्रियाओं द्वारा प्रदूषित होते रहते हैं।
                                     क्रियाकलाप 15.4.
प्रश्न 1. जल जीवशाला बनाते समय क्या आपने इस बात का ध्यान रखा कि ऐसे
जलीय जीवों को साथ न रखें जो दूसरों को खा जाएं। अन्यथा क्या हुआ होता ?
समूह बनाइए और चर्चा कीजिए कि उपरोक्त समूहों में जीव एक-दूसरे पर किस
प्रकार निर्भर करते हैं ?
उत्तर-यदि हम जल-जीवशाला में ऐसे जीव या जन्तु रखें जो एक-दूसरे को खा जाते हैं
तो जल-जीवशाला नष्ट हो जाते हैं क्योंकि वे एक-दूसरे को खा जाते हैं अतः हमें इस बात का
विशेष ध्यान रखना चाहिए।
समूहों की एक-दूसरे पर निर्भरता-पादप सूक्ष्म जीव तथा हरे शैवाल और हरे पौधे
उत्पादकों का समूह होता है जो कि उपभोक्ता समूह जन्तु सूक्ष्म जीव (जन्तु प्लवक) तथा मछली
आदि को O2 तथा भोजन प्रदान करते हैं। जन्तु का समूह CO2 अपमार्जक जन्तुओं के अपशिष्ट पदार्थों तथा मृतक शरीर को सरल पदार्थों में बदल देते हैं जो कि पौधे उपयोग करते हैं।
प्रश्न 2. जलीय जीवों के नाम उसी क्रम में लिखिए जिसमें एक-दूसरे जीव को खाता
है तथा एक ऐसी शृंखला की स्थापना कीजिए जिसमें कम-से-कम तीन चरण हों।
उत्तर-शैवाल → डाएटम – मछली
प्रश्न 3. क्या आप किसी एक समूह को सबसे अधिक महत्त्व का मानते हैं ? क्यों
एवं क्यों नहीं?
उत्तर-प्रथम पोषी स्तर में पौधे आते हैं। ये स्वपोषी होते हैं। बिना पौधों के खाद्य शृंखला
नहीं चल सकती। अतः पौधों को महत्त्व दिया जाता है।
                                       क्रियाकलाप 15.5
• समाचार पत्रों में, तैयार खाद्य सामग्री अथवा भोज्य पदार्थों में पीड़क एवं रसायनों की
मात्रा के विषय में अकसर ही समाचार छपते रहते हैं। कुछ राज्यों ने इन पदार्थों पर
रोक भी लगा दी है। इस प्रकार की रोक के औचित्य पर चर्चा कीजिए।
प्रश्न 1. आपके विचार में इन खाद्य पदार्थों में पीड़कनाशियों का स्रोत क्या है ? क्या
यह पीड़कनाशी अन्य खाद्य स्रोतों के माध्यम से हमारे शरीर में पहुंच सकते हैं ?
उत्तर-हमारे भोज्य पदार्थों में थोड़ी या अधिक मात्रा में पीड़कनाशी होते हैं जो खाद्य श्रृंखला
द्वारा इनमें प्रवेश करते हैं। पीड़कनाशी दूसरी वस्तुओं द्वारा भी हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। इस
प्रकार पीड़कनाशी थोड़े या अधिक खाद्य श्रृंखला द्वारा हमारे शरीर में पहुंचते हैं और जैव आवर्धन द्वारा इनकी मात्रा बढ़ती जाती है।
प्रश्न 2. किन उपायों द्वारा शरीर में इन पीड़कनाशियों की मात्रा कम की जा सकती
है ? चर्चा कीजिए।
उत्तर-1. पीड़कनाशियों का उपयोग कम से कम तथा आवश्यक होने पर ही करना चाहिए।
2. फल तथा सब्जियों को साफ पानी में अच्छी प्रकार साफ कर लेना चाहिए।
23. पीड़कनाशियों को पीने के पानी से दूर कर लेना चाहिए।
                                           पाठगत प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. पोषी स्तर क्या हैं ? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें
विभिन्न पोषी स्तर बनाइए।
उत्तर-किसी खाद्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों या स्तरों को पोषी स्तर कहते हैं।
खाद्य श्रृंखला का उदाहरण
घास → हिरण → शेर
इस खाद्य श्रृंखला में विभिन्न पोषी स्तर निम्नलिखित हैं :
(i) प्रथम, पोषी स्तर घास है यह उत्पादक है।
(ii) द्वितीय पोषी स्तर हिरन है यह प्रथम उपभोक्ता है इसे शाकाहारी भी कहते हैं।
(iii) तृतीय पोषी स्तर शेर है यह उच्च मांसाहारी है।
प्रश्न 2. पारितंत्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है ?
उत्तर-अपमार्जकों को प्राकृतिक सफाई एजेन्ट कहते हैं। अपमार्जकों का कार्य जैव
निम्नीकरणीय पदार्थों पर होता है। ये उन पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं। इस प्रकार                      अपमार्जक वातावरण में संतुलन बनाने का कार्य करते हैं तथा एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
                                    क्रियाकलाप 15.6
प्रश्न 1. पुस्तकालय, इंटरनेट अथवा समाचार पत्रों से पता लगाइए कि कौन-से
रसायन ओजोन परत के अपक्षय के लिए उत्तरदायी हैं ?
उत्तर-ओजोन परत को हानि पहुँचाने वाले पदार्थ (रसायन) क्लोरोफ्लोरो कार्बन के यौगिक,
ऐरोसोल, स्प्रे ऊँचाई पर उड़ने वाले जैट प्रोपेलर से निकले उत्पाद, आदि।
प्रश्न 2. पता लगाइए कि इन पदार्थों के उत्पादन एवं उत्सर्जन के नियमन संबंधी कानून
से ओजोन क्षरण कम करने में कितने सफल रहे हैं। क्या पिछले कुछ वर्षों में ओजोन-छिद्र
के आकार में कुछ परिवर्तन आया है ?
उत्तर-इन सभी प्रयासों के बाद भी अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में छिद्र बना हुआ है।
                                 क्रियाकलाप 15.7
प्रश्न 1. पता लगाइए कि घरों में उत्पादित कचरे का क्या होता है ? क्या किसी स्थान
से इसे एकत्र करने का कोई प्रबंध है?
उत्तर-हाँ, कचरे का एक विशेष स्थान पर एकत्र करने का प्रबन्ध है।
प्रश्न 2. पता लगाइए कि स्थानीय निकायों (पंचायत, नगरपालिका, आवास कल्याण
समिति) द्वारा इसका निपटान किस प्रकार किया जाता है ? क्या वहाँ जैव अपघटित तथा
अजैव अपघटित कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था है ?
उत्तर-जैव अपघटित तथा अजैव अपघटित कचरे की अलग व्यवस्था है तथा इनका निपटान
अलग-अलग तरीकों से किया जाता है।
जैव अपघटित कचरे को खाद में बदल दिया जाता है। अजैव अपघटित कचरे तथा पदार्थों
को पुनः चक्रण के लिए भेज दिया जाता है जिसमें बहुत अधिक समय (वर्षों) लगता है। यह
गड्ढों, नीचे धंसी भूमि (Lowland area) आदि को भरने में काम आता है।
                                   क्रियाकलाप 15.8
प्रश्न 1. गणना कीजिए कि एक दिन में घर से कितना कचरा उत्पादित होता है ?
उत्तर-लगभग 2 kg से 4kg रोजाना।
प्रश्न 2. इसमें से कितना कचरा जैव निम्नकरणीय है ?
उत्तर-लगभग 2kg से 3kg रोजाना।
प्रश्न 3. गणना कीजिए कि कक्षा में प्रतिदिन कितना कचरा उत्पादित होता है ?
उत्तर- 1.5 kg से 2 kg रोजाना।
प्रश्न 4. इसमें कितना कचरा जैव निम्नीकरणीय है ?
उत्तर- 1 kg से 1.5 kg रोजाना।
प्रश्न 5. इस कचरे के निपटान के कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर-कक्षा के कचरे में अधिकतर कागज, फलों के छिलके, बची हुई सब्जी तथा ब्रेड
के टुकड़े होते हैं।
ये अधिकतर जैव अपघटित पदार्थ हैं और इनका कम्पोस्ट बनाकर स्कूल बगीचे में उपयोग
किया जा सकता है।
                                     क्रियाकलाप 15.9
प्रश्न 1. पता लगाइए कि आपके क्षेत्र में मल व्ययन की क्या व्यवस्था है ? क्या वहाँ
इस बात का प्रबंध है कि स्थानीय जलाशय एवं जल के अन्य स्रोत अनउपचारित वाहित
मल से प्रभावित न हों ?
उत्तर-शहर के विभिन्न भागों से प्रदूषित जल को इकट्ठा किया जाता है तथा इसे जल
चक्रण केन्द्रों पर भेज दिया जाता है। यह सीवेज को एक बड़े टैंक में एकत्र किया जाता है तथा
आधुनिक तकनीकी से इसका उपचार किया जाता है। जैसे-ग्राइंडिंग, सैटलिंग, उदानीकरण, जैविक उपचार तथा क्लोरीनीकरण आदि।
उचित उपचार के बाद जल को नदी अथवा दूसरे स्रोतों में छोड़ दिया जाता है जहाँ इसका
पुन:चक्रण किया जाता है।
प्रश्न 2. अपने क्षेत्र में पता लगाइए कि स्थानीय उद्योग अपने अपशिष्ट (कूड़े-कचरे
एवं तरल अपशिष्ट) के निपटान का क्या प्रबंध करते हैं ? क्या वहाँ इस बात का प्रबंधन
है जिससे सुनिश्चित हो सके कि इन पदार्थों से भूमि तथा जल का प्रदूषण नहीं होगा ?
उत्तर-विभिन्न औद्योगिक इकाइयाँ अपने, अपशिष्ट जल का उपचार विभिन्न तरीकों से
करते हैं। इसके बाद इसे नदी आदि में छोड़ दिया जाता है। उपचार की विधियाँ अपशिष्ट जल
में उपस्थित रसायनों पर निर्भर करती हैं।
                                       क्रियाकलाप 15.10
प्रश्न 1. इंटरनेट अथवा पुस्तकालय की सहायता से पता लगाएँ कि इलेक्ट्रॉनिक
वस्तुओं के निपटान के समय किन खतरनाक वस्तुओं से आपको सुरक्षापूर्वक छुटकारा पाना
है। ये पदार्थ पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-हानिकारक व खतरनाक पदार्थ : इलेक्ट्रॉनिक आइटम तार, काँच के टुकड़े,
प्लास्टिक आदि के साथ लैड सिलिकॉन तथा कैडमियम भी होते हैं। ये बहुत विषैले होते हैं। ये
मानव व दूसरे जन्तुओं की जनसंख्या को प्रभावित करते हैं। ये जल व भूमि प्रदूषण के कारण
होता है। इनके कारण फेफड़े परिसंचरण एवं वृक्क की गम्भीर बीमारी उत्पन्न करते हैं।
पर्यावरण में इन रसायनों का जैविक आवर्धन होता है तथा यह अधिक मात्रा में मानव शरीर
में एकत्र हो जाते हैं। परिणामस्वरूप शरीर को मेटाबोलिज्म प्रभावित होती है जिससे गम्भीर
बीमारियाँ हो जाती हैं।
प्रश्न 2. पता लगाइए कि प्लास्टिक का पुनः चक्रण किस प्रकार होता है ? क्या
प्लास्टिक के पुनः चक्रण का पर्यावरण पर कोई समाघात होता है ?
उत्तर-प्लास्टिक के चक्रण में प्लास्टिक को पिघलाकर कुछ रसायनों जैसे सल्फर तथा
एस्फाल्ट में मिलाकर सड़क बनाने के काम आता है। इस प्रक्रिया में हानिकारक गैसें वायु में मिल
जाती हैं तथा वायु प्रदूषण होता है। कभी-कभी प्लास्टिक को विलायकों में घोल दिया जाता
तब यह रंगहीन हो जाता है या विभिन्न रंगों में मिला देते हैं। अन्त में प्लास्टिक अलग कर लिया
जाता है तथा पुनः चक्रण को भेज देते हैं। इस प्रकार विलायक वाष्पित हो जाता है और वायु प्रदूषण फैलता है।
                                         पाठगत प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. ओजोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर-ओजोन ऑक्सीजन का एक अपर रूप हैं। इसका एक अणु ऑक्सीजन के तीन
परमाणुओं से मिलकर बना होता है। इसका अणुसूत्र 03 है।
यह ऑक्सीजन के तीन अणुओं की सूर्य के प्रकाश (uvrays) की उपस्थिति में अभिक्रिया
द्वारा बनती है।
ओजोन पृथ्वी की सतह पर एक आवरण बनाती है जो पराबैंगनी विकिरणों से बचाती है।
यदि पराबैंगनी विकिरण हमारे लिए बहुत हानिकारक है। इस प्रकार यह पारितंत्र को नष्ट होने से
बचाती है।
प्रश्न 2. आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं ?
किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-(i) पदार्थ दो प्रकार के होते हैं-जैव निम्नीकरणीय तथा अजैव निम्नीकरणीय। इनमें
से हमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
(ii) जैव निम्नीकरणीय पदार्थों को खाद में बदल देना चाहिए तथा अजैव निम्नीकरणीय
अपशिष्टों को चक्रण के लिए फैक्ट्री में भेज-देना चाहिए।
                                      अभ्यास
प्रश्न 1. निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं-
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास         उत्तर-(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा।
प्रश्न 2. निम्न में से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं-
(a) घास, गेहूँ तथा आम (b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बकरी, गाय तथा हाथी (d) घास, मछली तथा बकरी
            उत्तर-(b) घास, बकरी तथा मानव।
प्रश्न 3. निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं-
(a) बाजार.जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बन्द करना
(c) माँ द्वारा स्कूटर से विद्यालय छोड़ने के बजाय तुम्हारे विद्यालय तक पैदल जाना
(d) उपरोक्त सभी             उत्तर-(d) उपरोक्त सभी
प्रश्न 4. क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार
डालें) ?
उत्तर-खाद्य शृंखला के सभी पोषी स्तरों के जीव भोजन के लिए एक-दूसरे पर निर्भर करते.
हैं। यदि किसी एक पोषी स्तर के सभी जीव मार दिए जाएँ तो पूरी खाद्य श्रृंखला नष्ट हो जाएगी।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इससे खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है।
प्रश्न 5. क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव,भिन्न-भिन्न पोषी
स्तरों के लिए अलग-अलग होगा ? क्या किसी पोषो स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित
किए बिना हटाना संभव है ?
उत्तर-नहीं, सभी पोषी स्तरों के लिए प्रभाव अलग-अलग नहीं होते। यह सभी पर
समान प्रभाव डालता है। किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना
हटाना संभव नहीं है। इनका हटाना पारितंत्र में विभिन्न प्रकार के प्रभाव डालता है
तथा असंतुलन पैदा करता है।
प्रश्न 6. जैविक आवर्धन (Biological magnification) क्या है? क्या पारितंत्र के
विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा ?
उत्तर-जब कोई हानिकारक रसायन जैसे डी. डी. टी. किसी खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करता
है तो इसका सान्द्रण धीरे-धीरे प्रत्येक पोषी स्तर में बढ़ता जाता है। इस परिघटना को जैविक
आवर्धन कहते हैं। इस आवर्धन का स्तर अलग-अलग पोषी स्तरों पर भिन्न-भिन्न होगा। जैसे-
प्रश्न 7. हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न
होती हैं ?
उत्तर-अजैव निम्नीकरणीय कचरे के ढेर पर्यावरण में बहुत लम्बे समय तक रहते हैं और
नष्ट नहीं होते। अतः वे बहुत-सी समस्याएंँ उत्पन्न करते हैं;
(i) ये जल प्रदूषण करते हैं जिससे जल पीने योग्य नहीं रहता।
(ii) ये भूमि प्रदूषण करते हैं जिससे भूमि की सुन्दरता नष्ट होती है।
(iii) ये नालियों में पानी के प्रवाह को रोकते हैं।
(iv) ये वायुमंडल को भी विषैला बनाते हैं।
प्रश्न 8. यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो क्या इनका
हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा?
उत्तर-जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट लम्बे समय तक नहीं रहते हैं। अत: उनका हानिकारक
प्रभाव वातावरण पर पड़ता तो है पर केवल कुछ समय के लिए ही रहता है। ये पदार्थ लाभदायक
पदार्थों में बदले जा सकते हैं तथा सरल पदार्थों में तोड़े जा सकते हैं। अतः हमारे वातावरण पर
इनका भी प्रभाव पड़ता है लेकिन केवल कुछ समय तक ही रहता है।
प्रश्न 9. ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों है ? इस क्षति को
सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ?
उत्तर-ओजोन परत की क्षति हमारे लिए अत्यंत चिंता का विषय है क्योंकि यदि क्षति अधिक
होती है तो अधिक-से-अधिक पराबैंगनी विकिरणें पृथ्वी पर आएँगी जो हमारे लिए निम्न प्रकार
से हानिकारक प्रभाव डालती हैं।
(i) इनका प्रभाव त्वचा पर पड़ता है जिससे त्वचा के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
(ii) पौधों में वृद्धि दर कम हो जाती है।
(iii) ये सूक्ष्म जीवों तथा अपघटकों को मारती हैं इससे पारितंत्र में असंतुलन उत्पन्न हो
जाता है।
(iv) ये पौधों में पिगमेंटों को नष्ट करती हैं।
ओजोन परत की क्षति कम करने के उपाय : (i) एरोसोल तथा क्लोरोफ्लोरो कार्बन
यौगिक का कम-से-कम उपयोग करना।
(ii) सुपर सोनिक विमानों का कम-से-कम उपयोग करना।
(iii) संसार में नाभिकीय विस्फोटों पर नियंत्रण करना।
                                                   ◆◆◆

 

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