10th sanskrit

sanskrit objective question class 10 2020 – ” भवान्यष्टकम् “

” भवान्यष्टकम् “

sanskrit objective question class 10 2020

class – 10

subject – sanskrit

lesson 1 – ” भवान्यष्टकम् ”

sabdekho.in

 ” भवान्यष्टकम्

sanskrit objective question class 10 2020 

न तातो न माता न बन्धुर्न दाता न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता ।
न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ।। 1 ।।

भवाब्धावपारे महादुःखभीरू : पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः ।
कुसंसारपाशप्रबद्ध सदाहं । गतिस्त्वं ।। 2 ।।

न जानामि दानं न च ध्यानयोगं न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम् ।
न जानामि पूजां न च न्यासयोगम । गतिस्त्वं ।। 3 ।।

न जानामि पुण्यं न जानामि तीर्थ न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित् ।
न जानामि भक्तिं ब्रतं वापि मातर्गतिस्त्वं ।। 5।।

प्रजेशं रमेशं महेशः सुरेशः दिनेशः निशीथेश्वरं वा कदाचित् ।
न जानामि चान्यत् सदाहं शरण्ये । गतिस्त्वं ।।6 ।।

अर्थ – हे भवानी ! मेरा न ही पिता है , न ही माता है , नहीं मेरा कोई बान्धव है , न ही कोई दाता है , न ही पत्नी है , न ही विद्या है और न ही कोई मेरा पेशा ही है । तुम ही मेरी गति हो , तुम ही एक मेरी गति हो ।

भवसागर में पड़ा मैं भयंकर दुःख से डर रहा हूँ , मैं गिरा हुआ , अत्यन्त कामी , महालोभी अत्यन्त घमण्डी हूँ । इस सांसारिक मोह – माया के पाश से मैं जकड़ा हुआ सदैव रहता हूँ । हे भवानी ! तुम ही एक गति हो ( सहारा हो ) ।

मैं दान देना भी नहीं जानता हूँ और ध्यान – योग करना भी नहीं जानता हूँ । मैं तंत्र भी नहीं जानता हूँ और स्रोत – मन्त्र भी नहीं जानता हूँ । न ही पूजा जानता हूँ और न ही न्यास – योग जानता हूँ लेकिन यह जानता हूँ कि तुम ही एक गति हो ।

हे माते । मैं पुण्य करना नहीं जानता हूँ , तीर्थ करना नहीं जानता हूँ । मुक्ति का मार्ग भी नहीं जानता हूँ और कभी लयबद्ध स्वर में गाना भी नहीं जानता हूँ । मैं भक्ति और व्रत भी करना नहीं जानता हूँ । लेकिन इतना जानता हूँ कि आप ही एक गति देने वाली हैं ।

मैं कुकर्मी हूँ , कुसंगी हूँ , कुबुद्धि वाला हूँ , कुदास ( खराब मालिक वाला ) हूँ । कुल के आचरण से भी मैं होन हूँ , सदैव कदाचार में लगा रहता हूँ , मेरी दृष्टि और बोलने का तरीका भी खराब है । हे भवानी ! मेरे जैसा कर्मी आदि को गति देने वाली मात्र आप ही हैं ।

मैं प्रजेश ( प्रजा के मालिक ) को , रमेश को , महेश को , सुरेश को निशीथेश्वर को या अन्य किसी को कभी नहीं जानता हूँ लेकिन मैं इतना जानता हूँ कि आप ही सबको शरण देने वाली हैं । आप ही सद्गति देने वाली हैं ।

अभ्यास

प्रश्न : 1. सर्वेषां शरण्या का अस्ति ?
उत्तरम् – सर्वेषां शरण्या एका भवानी अस्ति ।
प्रश्न : 2 , सर्वेषां गतिः का अस्ति ?
उत्तरम् – सर्वेषां गति : भवानी अस्ति ।

इस प्रार्थना को इस लय – स्वर में गावें- ” तुम्हीं मेरे मन्दिर , तुम्हीं मेरी पूजा , तुम्ही देवता हो । “

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