10TH SST

bseb 10 class geography notes – जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन

जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन

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bseb 10 class geography notes

class – 10

subject – geography

lesson 4 – जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन

जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन

महत्वपूर्ण तथ्य – आपदा प्रबंधन दो चरणों में लागू होता है , पहला आकस्मिक प्रबंध तथा दुसरा दीर्घकालीन प्रबंधन । आकस्मिक प्रबंध का उद्देश्य आपदा के जाते ही लोगों को आपदा से निजात दिलाना होता है । दीर्घकालीन प्रबंधन का उद्देश्य संभावित आपदा के प्रभाव को कम करना होता है ।

बाढ़ की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन – बाढ़ में सबसे ज्यादा नुकसान जान – माल और मवेशी पर भारी संकट आता है , लोगों , मवेशियों तथा घर के सामानों को बाहर निकालना ही पहली प्राथमिकता होती है । सुरक्षित स्थान पर पहुँचने के बाद भोजन तथा पेयजल , बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था , महामारी से बचने के लिए गर्म जल , गर्म भोजन , आकस्मिक प्रबंधन का ही हिस्सा है । साँप – बिच्छू जैसे जहरीले जीवों तथा बाढ़ के पानी से फैलने वाली महामारी से बचने के लिए संबंधित जीवन रक्षक दवाई तथा छिड़काव की सामग्री का प्रबंध भी करना चाहिए ।

       भूकंप एवं सुनामी के स्थिति में सुनामी प्रबंधन —
भूकंप की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन का तीन प्रमुख कार्य होता है । पहला , विस्थापित लोगों को राहत कैंप में ले जाना तथा सभी सुविधाएँ उपलब्ध करवाना , दूसरा लोगों को मलवे से निकालना जो अभी दबे हुए हैं तथा तीसरा अकाल मृत्यु प्राप्त आम लोगों को और जानवरों को सही स्थानों पर दफनाकर या धार्मिक रीतियों के अनुरूप अंतिम संस्कार करना । सुनामी की स्थिति में पहली प्राथमिकता है घायल का प्राथमिक उपचार कर अस्पताल पहुंचाया तथा लापता की तलाश के लिए हेलीकॉप्टर तथा रडार जैसे यंत्रों की मदद की जाए । पुनः मृत लोगों की पहचान और संबंधित परिवारों को न सिर्फ सांत्वना वरन् सभी आवश्यक सहायता के साथ साथ परामर्श की भी आवश्यकता है ।
आग लगने की स्थिति में —  ऐसी आपाद में आकस्मिक प्रबन्धक की तीन बड़ी जिम्मेवारी होती है । ( क ) आग में फसे लोगों को बाहर निकालना । ( ख ) घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाया । ( ग ) आग के फैलाव को रोकना जिसके लिए नजदीक में बालू , मिट्टी या तालाब के जल का प्रयोग करना । ग्राम पंचायतों के द्वारा प्रत्येक गाँव में आपदा प्रबंधन समिति बनानी चाहिए ।

आकस्मिक प्रबंधन के तीन प्रमुख घटक हैं— ( 1 ) स्थानीय प्रशासन , ( 2 ) स्वयंसेवी संगठन , ( 3 ) गाँव अथवा मुहल्ले के लोग ।
स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए आवश्यक है कि चे युवकों को प्रेरित और प्रशिक्षित करें । ऐसे प्रबंधन में जाति , धर्म और लिंग का कोई महत्व नहीं है । कागजी प्रबंधन से ज्यादा आवश्यक है कि राहत राशि और सामग्री को पहुँचाकर आपदा प्रबंधन को सहज तथा सरल बनाया जा सकता है ।

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न :
1. बाढ़ के समय निम्नलिखित में से किस स्थान पर जाना चाहिए ?
( क ) ऊँची भूमि वाले स्थान पर ( ख ) गाँव के बाहर ( ग ) जहाँ हैं उसी स्थान पर ( घ ) खेतों में
उत्तर- ( क )
2. मलवे के नीचे दबे हुए लोगों का पता लगाने के लिए किस यंत्र की मदद ली जाती है ?
(क) दूरबीन ( ख ) इंफ्रारेड कैमरा ( ग ) हेलीकॉप्टर ( घ ) टेलीस्कोप
उत्तर  (ख)
3. आग से जलने की स्थिति में जले हुए स्थान पर क्या प्राथमिक उपचार करना चाहिए ?
( क ) ठंडा पानी डालना ( ख ) गर्म पानी डालना ( ग ) अस्पताल पहुँचाना ( घ ) इनमें से कोई नहीं उत्तर- ( क )
4. बस्ती / मकान में आग लगने की स्थिति में क्या करना चाहिए ?
( क ) अग्निशामक यंत्र को बुलाना ( ख ) दरवाजे – खिड़कियाँ लगाना ( ग ) आग बुझने तक इंतजार करना ( घ ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- ( क )
5. सुनामी किस स्थान पर आता है ?
( क ) स्थल ( ख ) समुद्र ( ग ) आसमान ( घ ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- ( ख )

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – आपदा की घड़ी में आकस्मिक प्रबंधन को जीवन रक्षक प्रबंध कहते हैं । यह किसी प्रशासन की सफलता की कसौटी होती है । इसके अंतर्गत आपदा के जाते ही प्रभावित लोगों को आपदा से निजात दिलाना ही प्रमुख उद्देश्य होता है ।

2. बाढ़ की स्थिति में अपनाये जाने वाले आकस्मिक प्रबंधन का संक्षेप में वर्णन कीजिए ।
उत्तर – बाढ़ की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन की आवश्यकता अलग तरीके की होती है । बाढ़ के आते ही जान – माल और मवेशी पर भारी संकट आ जाता है । अतः मछली प्राथमिकता बाढ़ रोकना नहीं बल्कि बाढ़ से लोगों को बचाना है । उसी प्रबंधन की तारीफ होती है जो लोगों को नाव पर बैठाकर या तैरने वाले व्यक्ति द्वारा रबर के गुब्बारे के साथ दूसरे को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के बाद भोजन तथा पेयजल , बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था , भूकंप एवं सुनामी की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन की चर्चा संक्षेप में कीजिए । भी खींचते हुए सुरक्षित जगह पर ले जाए । महामारी से बचने के लिए गर्म जल , गर्म भोजन आदि की व्यवस्था ।
3 . भूकंप व सुनामी की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन की चर्चा संक्षेप में कीजिए | 

उत्तर – भूकंप की स्थिति में आकस्मिक प्रबंधन का तीन प्रमुख कार्य होता है बचे हुए विस्थापित लोगों को राहत कैंप में ले जाना या उसे सभी प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध करवाना , मलवे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकालना , अकाल मृत्यु प्राप्त लोगों को और जानवरों का अंतिम संस्कार करना ।   ऐसा न करने से महामारी फैलने की संभावना रहती है । सुनामी की स्थिति में पहली प्राथमिकता घायल का उपचार कर अस्पताल पहुंचाना तथा लापता लोगों का  पता लगाने के लिए रडार की मदद लेना होता है । मृत लोगों की पहचान तथा संबंधित परिवारों को सांत्वना तथा सभी प्रकार की आवश्यक सहायता प्रदान करना होता है पुनः खोए हुए व्यक्तियों का पता लगाने में शक्ति चालित नाव की मदद रडार हेलीकॉप्टर और कृत्रिम उपग्रहों की आवश्यकता भी लेनी चाहिए|
4. आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन की भूमिका का वर्णन कीजिए|
उत्तर– आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है । इसके लिए आवश्यक है कि वे राहत शिविर का निर्माण करें । वहाँ सभी उपकरण तथा प्राथमिक उपचार की सामग्रियाँ उपलब्ध कराएँ । एम्बुलेंस , डॉक्टर , अग्निशामक इत्यादि की व्यवस्था करनी चाहिए । कागजी दाव पेंच में न पड़कर राहत राशि और राहत सामग्री को पहुंचाकर आपदा प्रबंधन को सहज तथा सरल बना सकते हैं ।
5. आग लगने की स्थिति में क्या प्रबंध करना चाहिए ? उल्लेख करें ।
उत्तर – शुष्क गर्मी ऋतु में गाँव के गाँव का आग से जल जाना आपदा का ही रूप है । ऐसी आपदा प्रबंधन को तीन प्रमुख कार्य होते हैं ( i ) आग में फंसे लोगों को बाहर निकालना । ( ii ) घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाना । ( iii ) आग के फैलाव को रोकने के लिए बालू गिट्टी / जल का उपयोग करना , अग्निशामक दस्ते को बुलाना । आग के समय यदि कोई व्यक्ति छत के ऊपर फंसा हो तो उसे बाहर से सीढ़ी लगाकर उतारने या ढेलने या अग्नि प्रतिरोधी जैकेट पहनकर उसे बाहर निकालने का कार्य करना ।

II . दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :
1. जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन के अंतर्गत आपदा के आते ही प्रभावित लोगों को आपदा से निजात दिलाना ही प्रमुख उद्देश्य होता है । अलग – अलग प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं के आकस्मिक प्रबंधन में अलग – अलग प्रकार की प्राथमिकताएँ होती हैं –
( i ) बाढ़ की स्थिति में— ( क ) लोगों , मवेशियों तथा घर के सामानों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाना । ( ख ) सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद भोजन तथा पेयजल की व्यवस्था करना । ( ग ) खाद्य पदार्थ के अतिरिक्त पशुचारा , महामारी से संबंधित जीवन रक्षक दवाई , छिड़काव की सामग्री इत्यादि का पूर्व प्रबंधन आदि ।
( ii ) भूकंप की स्थिति में— ( क ) बचे हुए विस्थापित लोगों को राहत कैंप में ले जाना या उसे सी प्रकार की आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना । ( ख ) बे हुए लोगों को मलवे से निकालना । ( ग ) अकाल मृत्यु प्राप्त आम लोगों को और जानवरों को सही स्थानों पर दफनाकर या धार्मिक रीतियों के अनुरूप अंतिम संस्कार करना ।
( iii ) सुनामी की स्थिति में— ( क ) घायल का प्राथमिक उपचार का अस्पताल पहुंचाया जाए तथा लापता की पता लगाने के लिए हेलीकॉप्टर और रडार जैसे यंत्रों की मदद ली जाए । ( ख ) शक्तिचालित समुद्री नौकाएँ भी सुनामी के बाद इस कार्य में लगायी जानी चाहिए । ( ग ) मृत लोगों की पहचान और संबंधित परिवारों को न सिर्फ सांत्वना वरन् सभी प्रकार की आवश्यक सहायता के साथ – साथ परामर्श की भी आवश्यकता है । ( घ ) अकाल मृत्यु प्राप्त आम लोगों को और जानवरों को सही स्थानों पर दफनाकर या धार्मिक रीतियों के अनुरूप अतिम संस्कार करना ।
( iv ) आग की स्थिति में— ( क ) आग में फंसे हुए लोगों को बाहर निकालना । ( ख ) घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाना । ( ग ) आग में फैलाव को रोकना , जिसके लिए नजदीक में उपलब्ध बालु , मिट्टी , जल का उपयोग करना , अग्निशामक दल को बुलाना आदि ।

2. आकस्मिक प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन एवं स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका का विस्तार से उल्लेख कीजिए ।
उत्तर – आकस्मिक प्रबंधन के मुख्य घटकों में स्थानीय प्रशासन एवं स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है । स्थानीय प्रशासन की मदद से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में शिविर को निर्माण , प्राथमिक उपचार , एम्बुलेंस , डॉक्टर , अग्निशामक इत्यादि सुविधा प्रदान किया जाता है जिससे आपदा प्रबंधन को सरल एवं सहज बनाया जा सके । वहीं स्वयंसेवी संगठनों का मुख्य कार्य आपदा क्षेत्र के गाँव मुहल्लों के युवकों को मानसिक रूप से सुदृढ़ और तकनीक रूप से प्रशिक्षित किया जाता है । इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के आपदा से संबंधित विडियो फिल्म इत्यादि दिखाकर जगजागरूकता फैलाने का भी कार्य किया जाता है ।

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