Biography

Kamala Surayya Biography in hindi – कमला सुरय्या का परिचय

Kamala Surayya Biography in hindi – कमला सुरय्या का परिचय

Kamala Surayya Biography in hindi

कमला दास अपनी रचनाओ के लिए काफी मशहूर थी. उनकी अधिकतर रचनाएँ महिलाओ की सेक्सुअल लाइफ और उनकी शादीशुदा जिंदगी में होने वाली परेशानियों पर आधारित होती थी. कमला दास देश की एकमात्र ऐसी महिला लेखिका है जिन्होंने अपनी रचनाओं में नारी पर खुलकर बाते की है. इसके साथ ही कमला दास अपनी बेबाकी कविताओं के लिए भी मशहूर है.कमला दास का जन्म केरल के एक हिन्दू साहित्यिक परिवार में हुआ था लेकिन जब वो 68 वर्ष की थी उस समय कमला ने इस्लाम कबूल कर लिया था इसके बाद से ही कमला दास को ‘कमला सुरैया’ नाम से जाना जाने लगा था. 15 साल की उम्र में ही कमला दास की शादी पेशे से बैंकर माधव दास से हुई थी. उनके पति ने ही कमला दास को लिखने के लिए प्रेरित किया था और धीरे-धीरे कमला अंग्रेजी और मलयालम भाषा में लिखने लगी और उनकी रचना भी इन दो भाषाओ में छपने लगी.

नाम कवयित्री कमला – Kamala Surayya (Kamala Das)
जन्म दिनांक 31 मार्च, 1934
जन्म स्थान केरल
मृत्यु 31 मई, 2009
पिता का नाम भी. एम. नायर
पति माधव दास
संतान माधव दास नालापत, चिन्नेन दास, जयसूर्या दास
कार्य क्षेत्र लेखक
नागरिकता भारतीय
भाषा इंग्लिश, मलयालम
प्रसिद्धि के कारण आत्मकथा ‘माय स्टोरी’

प्रारंभिक जीवन – Early Life of Kamala Das

कमला दस का जन्म 31 मार्च 1934 को केरल के त्रिचूर जिले में पुनयूकूलम कस्बे के एक बेहद सम्पन्न परिवार में हुआ था।

उनके पिता वीएम नायर उस वक्त की पोपुलर दैनिक अखबार मातृभूमि के कार्यकारी संपादक थे और उनकी माँ बलमानी अम्मा एक मलयाली कवयित्री थी।

कमला के चाचा नालपत नारायण मेनन भी एक प्रसिद्ध लेखक थे। जिनका उनके जीवन पर सकारात्मक असर हुआ और छोटी उम्र से इस कवितायों के प्रति रुचि जाग गई और अपनी माँ की तरह कवितायें लिखना और पढ़ना प्रारम्भ कर दी थी।

खैर जब कमला दास छोटी थी, तब उनके पिता कलकता स्थित वॉलफोर्ड ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते थे। जिस वजह से कमला की बचपन कलकता में गुजरा और वही उनकी शिक्षा भी हुई।जब वो 15 साल की हुई तो उनकी विवाह माधव दास से करा दिया गाय, जो एक बैंकर थे। जिसके कारण कमला ने लिखना बंद कर दिया। पर पति कमला की प्रतिभा को जानते थे, इसलिए उन्होंने अपने कमला को लिखने के लिए प्रेरित किया।

कमला सुरय्या का जीवन – Kamala Surayya Life History

कमला सुरय्या की विवादास्पद आत्मकथा ‘माय स्टोरी’ इतनी पढ़ी गई कि भारत की हर भाषा सहित इस पुस्तक का पंद्रह विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ था। अपनी आत्मकथा, ‘माई स्टोरी’ में कमला दास लिखती हैं, “एक बार गवर्नर की पत्नी मैविस कैसी हमारे स्कूल आईं। मैंने इस मौके पर एक कविता लिखी लेकिन हमारी प्रिंसिपल ने वो कविता एक अंग्रेज़ लड़की शर्ली से पढ़वाई। इसके बाद गवर्नर की पत्नी ने शर्ली को अपनी गोद में बैठा कर कहा कि तुम कितना अच्छा लिखती हो! मैं दरवाज़े के पीछे खड़ी वो सब सुन रही थी.”

“इतना ही नहीं गवर्नर की पत्नी ने शर्ली के दोनों गालों पर चुंबन लिए और उनकी देखादेखी हमारी प्रिंसिपल ने भी मेरी आखों के सामने उसको चूमा। पिछले साल मैंने लंदन के रॉयल फ़ेस्टिवल हॉल में अपनी कविताओं का पाठ किया। आठ बजे से ग्यारह बजे तक मैं मंच पर थी. जब मैं स्टेज से नीचे उतरी तो कई अंग्रेज़ों ने आगे बढ़ कर मेरे गालों को चूम लिया। मेरे मन में आया कि शर्ली, मैंने तुमसे अपना बदला ले लिया।”।

मलयालम में माधवी कुट्टी नाम से मशहूर कमला दास ने रचनाएँ की। कमला दास का लेखन अंतरराष्ट्रीय साहित्य जगत् में भी ध्यान खींचता रहा। नोबेल की दावेदारी के लिए भी 1984 में नामांकित किया गया था। उन्हें कुछ जानकार सिमोन द बोउवार जैसी लेखिका के समकक्ष मानते हैं। उत्तर औपनिवेशिक काल में कमला दास ने नारीवादी लेखकों में अपना अलग मुकाम हासिल किया।

उनकी कई पुस्तकें ऐसी हैं जिसमें उन्होंने महिलाओं की समस्याओं को केंद्र में रख कर नारीवादी विषय उठाए। नतीजतन घरेलू और सेक्सुअल हिंसा से परेशान महिलाओं ने कमला दास को अपना आदर्श माना। कविता की दुनिया में दास के योगदान को देखते हुए देश ने उन्हें ‘मदर ऑफ मॉडर्न इंडियन इंग्लिश पोएट्री’ से नवाजा।

भारतीय अंग्रेजी कविता की मार्गदर्शिका, कमला दास अंग्रेजी में लिखने वाली पहली भारतीय महिला थी, जिन्होंने अपनी कविताओं में मुख्य रूप से भारतीय महिलाओं के अनुभव और की यौन इच्छाओं के बारे में विस्तार से वर्णन किया है। कमला दास ने किशोरों के निर्दोषित एकतरफे प्यार के बारे में लिखना अपनी इच्छा से त्याग दिया था। उनके अनुसार समर इन कलकत्ता कविता की लाइन “एक संतरे के रस जैसा अप्रैल का सूर्य” को पढ़ने से लोगों के दिमाग में एक उत्तेजना भर देती है। संवेदनशीलता उनकी कविताओं की शक्ति है।

कमला की अंग्रेजी में ‘द सिरेंस’, ‘समर इन कलकत्ता’, ‘दि डिसेंडेंट्स’, ‘दि ओल्डी हाउस एंड अदर पोएम्स ’, ‘अल्फाेबेट्स ऑफ लस्ट’’, ‘दि अन्ना‘मलाई पोएम्सल’ और ‘पद्मावती द हारलॉट एंड अदर स्टोरीज’ आदि बारह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। मलयालम में ‘पक्षीयिदू मानम’, ‘नरिचीरुकल पारक्कुम्बोल’, ‘पलायन’, ‘नेपायसम’, ‘चंदना मरंगलम’ और ‘थानुप्पू’ समेत पंद्रह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

एक रूढ़िवादी हिंदू परिवार में जन्मीं, कमला दास ने 65 साल की उम्र अचानक धर्मांतरण कर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया. बाद में अभिव्यक्ति की मांग को लेकर कट्टर मुल्लाओं से भी उनकी ठनी। अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले उन्होंने दिल्ली में एक मार्मिक संस्मरण सुनाया था। उनका निधन 31 मई, 2009 को पुणे में हुआ था।

पुरस्कार/सम्मान – Kamala Surayya Awards

  • Award of Asian PEN anthology – 1964
  • Kerala Sahitya Academy Award– 1969 (for Cold)
  • Sahitya Academy Award– 1984
  • Asian World Prize-1985
  • Asian Poetry Prize – 1998
  • Kent Award for English Writing from Asian Countries – 1999
  • Vayalar Award– 2001
  • Honorary Littby University of Calicut – 2006
  • Muttathu Varkey Award– 2006
  • Ezhuthachan Puraskaram– 2009

Leave a Comment

error: Content is protected !!