History

चंगेर-खान कौन था?

चंगेर-खान कौन था?

चंगेर-खान कौन था?

चंगेर खान का जन्म 1162 AD में आधुनिक मंगोलिया देश की ओनोन नदी के किनारे एक यायावर(खानाबदोश)कबीले में हुआ। इनके बचपन का नाम तेमुजिन था।इनके पिता येसूजेई उस समय कियात कबीले के सरदार थे। चंगेर खान के जन्म के समय पूरा मंगोलिया क्षेत्र अनेक छोटे-छोटे कबीलों में बंटा था।

ये खानाबदोश कबीले भोजन और चारे के लिए एक- दूसरे पर हमला करते रहते थे। दूसरे कबीले की हार पर उस कबीले की लड़कियों, बच्चो औऱ महिलाओं को शोषण के लिए रख लेते थे। यह इनकी संस्कृति एक हिस्सा था।

चंगेर खान का बचपन बड़े ही कठिन सँघर्ष में बिता बचपन मे ही उनके पिता को पड़ोसी कबीले ने मार दिया था। जिससे उनकी विधवा मां ने बड़ी कठिनाई से उनके और उनके भाइयों की परिवरिश की। जब चंगेर खान 12 बर्ष के थे तो उनका विवाह बोरेते नाम की लड़की से कर दिया। विवाह के चंद सालो के बाद उसके पड़ोसी ततार कबीले ने उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया। जिसे पाने के लिए चंगेर को सँघर्ष करना पड़ा।

उसने अपने कबीले के अपने कुछ भरोसे मंद साथियों जिसमे उसके भाई तथा कबीले के कुछ और साथी थे, के साथ मिलकर ततार कबीले पर हमला कर दिया। जिसमें ततार कबीला हार गया। इस जीत के बाद तेमुजिन का कद कबीले में काफी बढ़ गया। जल्द ही उसने कबीले का सरदार बनने के लिए अपने ही सक्के भाइयों को मार डाला।

चंगेर खान ने अपने सक्के चाचा के कबीले पर 1203 में हमला कर दिया और उसका कत्ल कर दिया। इस युद्ध के बाद उसने अपने पिता के हथियारे यूसई कबीले को युद्ध मे चुनौती दी। यूसई क़बीले इस जंग में हार गया। इस जंग से आत्मविश्वास में भर कर उसे आस-पास के सभी कबीलो पर हमले छेड़ दिए। जल्द ही अपने कुशल नेतृत्व के कारण तेमुजिन ने सभी कबीलो को एक ध्वज के निचे ला खड़ा कर दिया।

जब सभी कबीलो पर तेमुजिन ने अपनी प्रभुत्व बना दिया। तो कबीलाई सरदारों ने उन्हें चंगेर खान की उपाधि दी। जिसका मंगोलियाई मतलब होता है समुद्र का राजा।

जल्द ही चंगेर खान ने राज्य विस्तार की लालसा से अपनी सेना को मजबूर करना शुरू कर दिया। 1209 में उसने तिब्बत पर हमला कर दिया तिब्बत सेना संख्या में बड़ी होने के कारण खराब नेतृत्व के कारण ,चंगेर खान के घोड़ो ने रौंद डाली। उसने पूरे तिब्बत मे भारी लूटपाट की। इस जीत ने चंगेर खान को काफी धन-लाभ करवाया। और एक बड़ी सेना खड़ी करने में मदद की ।इस जीत से आत्मविश्वास पाकर 1213 AD में उसने चीन की महान दीवार को 100000 की फौज लेकर तोड़ दिया। औऱ चीन की राजधनी बिंजिंग शहर को तहस-नहस कर दिया। यह जीत मंगोल सम्राज्य की महत्वपूर्ण जीत थी। क्योंकि इसने उसे रातो-रात दुनिया के एक महत्वपूर्ण व्यापार यानी रेशम का एकाधिकार दे दिया था। अब उसने मध्य एशिया के कई महत्वपूर्ण शहरों को रौंद डाला। उस समय के मुस्लिम साम्राज्य का गढ़ कहा जाने वाले ईरान को उसने घेर दिया। और पूरे ईरानी सम्राज्य को जला दिया। इतिहासकार मानते है कि इस जंग में ईरान की 75% आबादी को चंगेर खान ने मार डाला था। जिसमे 6 माह के बच्चे से लेकर बजुर्ग तक शामिल थे। केवल औरतों को अपनी हवस के कारण छोड़ दिया था। आप को हैरानी होंगी ईरान को अपनी इसी आबादी को प्राप्त करने के लिए 750 बर्ष का समय लगा था। ईरान होता हुआ उसने यूरोप के बड़े हिस्से को कब्जे में ले लिया। हालांकि भारत चंगेर खान की मारकाट और लूटपाट से बच गया। इसकी बड़ी बजह थी दिल्ली के तत्कालीन बादशाह इल्तुतमिश द्वारा बिना युद्ध के चंगेर खान से हार मान लेना। चंगेर खान चाहता था कि वह भारत होता हुए असम के रास्ते से मंगोल जाएं। पर अचानक सिंधु नदी के किनारे मौसम की प्रतिकूलता और बीमार होने के कारण गिलगित स्थान के रास्ते से वापिस मंगोल जाना पड़ा। जिससे भारत चंगेर खान के हमले से बच गया।

चंगेर खान ने एक अनुमान के अनुसार उस समय की दुनिया की आबादी के एक चौथाई हिस्से को नष्ट करा दिया था। जो इतिहास में किसी भी राजा द्वारा किया गया सबसे बड़ा रक्तपात था।

चंगेर खान ने अपनी विजय यात्रा के दौरान कई औरतों का शोषण किया था । जिसे आज की दुनिया की 1.5 करोड़ आबादी का किसी न किसी तरीके से चंगेर खान से सबंध बनता है। जिसकी पुष्टि विज्ञानिक आधार पर भी DNA की जांच द्वारा की जा चुकी है। पूरी दुनिया चंगेर खान को एक क्रूर पर सफल रणनीतिकार के रूप में याद करती है।

पर मंगोलिया में चंगेर खान को एक हीरो की तरह देखा जाता है। चंगेर खान बचपन मे बौद्ध धर्म का अनुयायी था । पर जब वह सम्राज्य विस्तार के लिए मध्य एशिया की तरफ बढ़ा। तो उस समय वह इस्लाम धर्म के सम्पर्क में आया और बाद में उसने इस्लाम धर्म को अपनी मृत्यु (1227 AD) के समय से कुछ पहले अंगीकार कर लिया था।

चंगेर खान को कहाँ पर दफनाया गया है यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है। चंगेर खान की कब्र की खोज मंगोलिया सरकार आज भी जारी रखे हुए है इसके पीछे मान्यता यह है कि चंगेर खान की कब्र में उसके द्वारा लूटा गया हजारो टन बेशकीमती हीरे-मोती और सोना-चांदी तथा उस समय के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी दफनाए गए थे। इसकी खबर इतने गोपनीय तरीके से दफनाया गया था कि इसकी जानकारी बाहर न जाये इसलिये जो व्यकि चंगेर खान के जनाजे में गए थे उन्हें भी बाद में मार दिया गया था। कुछ विद्वानों का मत है यह कब्र गोबी मरुस्थल के नीचे कहीं रेत में दफन है। जो आज भी एक रहस्य है।

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