11-Political Science

Bihar board notes class 11th civics chapter 6

Bihar board notes class 11th civics chapter 6

Bihar board notes class 11th civics chapter 6

 नागरिकता
                                               पाठ्यक्रम
• एक नागरिक कौन है?
•समावेश और अपवर्जन के प्रासंगिक आधार कौन-कौन से हैं ?
•नागरिकता के नए दावों का किस प्रकार प्रबंधन किया जाता है ।
•क्या हम वैश्विक नागरिकता रख सकते हैं?
                                                         स्मरणीय तथ्य
                                             (Points to be Remember)
नागरिक (Citizen)- नागरिक वह व्यक्ति होता है जो किसी राज्य का सदस्य होता है
और राजनीतिक अधिकारों का उपयोग करता है, उस राज्य के प्रति निष्ठावन होता है और
उसके शासन में भाग लेता है।
नागरिकता (Citizenship) – पूरे समाज के लिए किए जाने वाले निर्णयों में नागरिकों
की भागीदारी नागरिकता कहलाती है। नागरिकता को व्यक्ति और राज्य के बीच के कानूनी
संबंध के रूप में देखा जा सकता है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति राज्य के प्रति निष्ठा की शपथ
लेता है। बदले में राज्य व्यक्ति को संरक्षण देता है।
बाहरी व्यक्ति (Alien)-किसी भी देश में नागरिकों के अतिरिक्त भी अनेक व्यक्ति होते
हैं। ये विदेशी विद्यार्थी, पर्यटक अथवा उस देश में नियुक्त विदेशी अधिकारी हो सकते
हैं। ऐसे व्यक्तियों को बाहरी कहा जाता है। बाहरी व्यक्ति उस राज्य के सदस्य नहीं होते
जिसमें वह निवास कर रहे हैं। उन्हें उस देश के नागरिकों के समान राजनीतिक अधिकार
प्राप्त नहीं होते।
• नागरिकता के प्रकार (Types of Citizenship) – नागरिकता दो प्रकार की होती है :-
प्राकृतिक और देशीयकृत (ग्रहण की हुई)।
• प्राकृतिक नागरिक (Natural Citizen) – यदि कोई व्यक्ति राज्य में जन्मा है या
वंशानुगत है, तो उसे प्राकृतिक नागरिक कहा जाता है।
• देशीयकृत नागरिक (Indegenous Citizen) – जो व्यक्ति पाँच वर्ष तक भारत में रह
रहा हो, उसे कोई एक भारतीय भाषा आती हो, और वह अपने मूल देश की नागरिकता
छोड़ चुका हो, उसे देशीकृत नागरिक कहते हैं।
• उदासीनता (Indifference) – गलत रवैये का अपनाना और अपने दायित्व या कर्त्तव्य
में रुचि न लेना।
• निरक्षता (Illiteracy)- शिक्षा का अभाव।
• मौलिक कर्त्तव्य (Fundamental Duteis)- अधिकारों के साथ-साथ नागरिकों के
कुछ कर्त्तव्य भी होते हैं जिनके पालन की उनसे आशा की जाती है।
• एकल नागरिकता (Single Citizenship) – इसके अंतर्गत नागरिक को अपने देश की
नागरिकता प्राप्त होती है। जैसे-भारत में।
• दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) – इसके अंतर्गत नागरिक को अपने देश
के साथ-साथ अपने प्रांत जहाँ उसका जन्म हुआ है, की नागरिकता भी प्राप्त होती है।
जैसे अमेरिका में।
                                            पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. राजनीतिक समुदाय की पूर्ण और समान. सदस्यता के रूप में नागरिकता में
अधिकार और दायित्व दोनों शामिल हैं। समकालीन लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिक किन
अधिकारों के उपभोग की अपेक्षा कर सकते हैं ? नागरिकों केराज्य और अन्य नागरिकों
के प्रति क्या दायित्व है?
उत्तर-एक समय था जब सुविधाएंँ, अधिकार और महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व समाज के सीमित
वर्ग के उन लोगों को दिए गए थे जो इसके योग्य समझे जाते थे। इसका आधार जाति,
आनुवंशिकता और सामाजिक, आर्थिक स्तर था। समाज के अन्य लोग अधिकार और आभार
के अयोग्य समझे जाते थे। समाज पूर्ण रूप से पूरक होता था। अब सम्पूर्ण पर्यावरण में बदलाव
आ गया है और कोई भी बढ़ती हुई गतिशीलता और आवागमन के साधनों के कारण समाज स्थिर
नहीं है। ऐसी स्थिति में नागरिकता के विचार का अर्थ बदल जाता है। अब नागरिकता अपने अर्थ,
क्षेत्र और विस्तार की दृष्टि से विस्तृत अर्थ में स्वीकार किया जाता है। यह अनेक लोगों को
नागरिकता प्रदान करती है जिसमें जाति, रंग, सामाजिक-आर्थिक स्तर का ध्यान नहीं रखा जाता।
इसमें अधिकारों और आभार के साथ राजनीतिक समुदाय को पूर्ण एवं समान सदस्यता दी जाती है।
आधुनिक उदार प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओं में टी. एच. मार्शल (T.H. Marshal) के फार्मूला
के अनुसार नागरिकों को अधिकार एवं कर्त्तव्य प्रदान किए गए हैं। मार्शल ने तीन प्रकार के
अधिकारों का उल्लेख किया हैं :-
(i) नागरिक अधिकार, (ii) राजनीतिक अधिकार, (iii) सामाजिक अधिकार।
(i) नागरिक अधिकार-ये अधिकार व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता से सम्बन्धित हैं।
(ii) राजनीतिक अधिकार-ये अधिकार व्यक्ति को राजनीतिक प्रक्रिया और सरकार के
कार्यों में शामिल होने की प्रेरणा देता है।
(iii) सामाजिक अधिकार-ये अधिकार व्यक्ति के शैक्षिक उपलब्धि और रोजगार से
सम्बन्धित हैं।
राज्य और सभी राजनीतिक समुदाय नागरिकों से कुछ कर्तव्यों एवं आभार की आशा करते
हैं जो सरकार के प्रजातांत्रिक ढांचे में शामिल हैं। ये कानून और व्यवस्था, नैतिकता, राष्ट्रीय सेवा
और संस्कृति, ऐतिहासिक स्मारक और सामुदायिक समरसता का सुदृढीकरण का संरक्षण आदि है।
प्रश्न 2. सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए तो जा सकते हैं लेकिंन हो सकता
है कि वे इन अधिकारों का प्रयोग समानता से न कर सकें। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-अधिकांश समाज अधिक्रमिक व्यवस्था में संगठित हैं जो लोगों की योग्यताओं और
क्षमताओं पर आधारित होता है। यह उनके सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरण और मौलिक
आवश्यकताओं और सुविधाओं की दृष्टि से भिन्न हो सकते हैं। नागरिकता के परिवर्तित और
विस्तृत अवधारणा के अर्थ में और राजनीति के प्रजातांत्रिक ढांचे के दृष्टि से अधिक से अधिक
लोगों को नागरिक के रूप में राज्य के गतिविधियों में शामिल किया जाता है। नागरिक रूप में
वे अनेक अधिकार कर्त्तव्य और सम्बन्धित नैतिक बन्धन के लिए अधिकृत हैं। सार्वजनिक
नागरिकता में लोगों की सहभागिता और संलग्नता महत्वपूर्ण है।
सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर दिए जा सकते हैं परन्तु यह सामान्य प्रक्रिया
नहीं है। लोगों की विभिन्न समुदायों की विभिन्न आवश्यकताओं, समस्याएँ, योग्यताएँ और समताएंँ
हो सकती हैं, क्योंकि उनके सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दर्शाएं अलग होती हैं। विभिन्न
समुदाय के नागरिकों के अधिकार दूसरे समुदाय के नागरिकों के अधिकारों के विरोधाभासी हो
सकते हैं। समान अधिकार का तात्पर्य निश्चित नीति विभिन्न समुदायों के लिए नहीं होता। लोगों
को अधिक से अधिक समान बनाने के लिए लोगों के विभिन्न आवश्यकताओं और मांगों को भी
ध्यान में रखना चाहिए।
एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए जा सकते
हैं परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि सभी नागरिक इनका उपभोग समान रूप से कर सकते हैं।
भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समान मौलिक अधिकार प्रदान किए हैं परन्तु समाज के
कुछ ही वर्ग अपनी क्षमताओं और योग्यताओं से इसका उपभोग करते हैं।
प्रश्न 3. भारत में नागरिक अधिकारों के लिए हाल के वर्षों में किए गए किन्हीं दो
संघर्षों पर टिप्पणी लिखिए। इस संघर्षों में किन अधिकारों की मांग की गई थी?
उत्तर-हाल के वर्षों में अनेक ऐसे संघर्ष नागरिकों के अधिकारों के उपभोग के लिए हुए
हैं जिनका उद्देश्य लोगों की आवश्यकताओं में परिवर्तन करना है। ये संघर्ष निम्नलिखित हैं-
(i) महिलाओं के आन्दोलन, (ii) दलितों के आन्दोलन
(i) महिलाओं के आन्दोलन- यद्यपि भारत 15 अगस्त, 1947 ई० को आजाद हो गया
था तथापि अधिकांश महिलाएं अन्याय और भेदभाव की शिकार और आश्रित हैं। उन्हें पुरुष की
अपेक्षा निम्न माना जाता है और किसी भी कार्य के योग्य नहीं समझा जाता है। ग्रामीण महिलाओं
में चेतना आ गयी है और अपनी योग्यताओं और क्षमताओं को पहचानने लगी हैं। फलस्वरूप महिला
आन्दोलन का जन्म हुआ। इस आन्दोलन ने जनता और सरकार का ध्यान आकृष्ट किया जिससे
सरकार की नीतियां महिलाओं के पक्ष में बनायी गई। अब महिलाओं के आन्दोलन के फलस्वरूप
महिलाओं ने राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रवेश कर लिया है। महिलाओं को शक्तिशाली बनाने
और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए घोषणा हुई है। भारत में राष्ट्रीय महिला आयोग का निर्माण
महिलाओं की उन्नति और उनकी सुरक्षा के लिए किया गया है।
दलित आन्दोलन-दलित आन्दोलन शोषित वर्ग का एक अन्य आन्दोलन है। भारतीय समाज
में इस वर्ग को दवाया गया था। यह आन्दोलन स्वतंत्रता से पूर्व और बाद में भी हुआ। इस वर्ग
का लम्बे समय तक शोषण किया गया और वे अन्याय के शिकार रहे। अनेक सामाजिक सुधारकों
ने आन्दोलन शुरू किए जिसने पूरे दृश्य को बदल दिया। सरकार ने दलितों की दशा सुधारने के
लिए कई कदम उठाए। उनके लिए सरकारी नौकरियों में, शिक्षा और चुनावों में उनके लिए सीट
आरक्षित किया। इसके अलावा विधान सभा और सांसद के सीटों में भी इन्हें शामिल किया गया
और आज समाज के अंग बन गयी हैं। समाज, राजनीति और प्रशासन में उनकी स्थिति महत्वपूर्ण
हो गयी है।
प्रश्न 4. शरणार्थियों की समस्याएं क्या हैं ? वैश्विक नागरिकता की अवधारणा किस
प्रकार उनकी सहायता कर सकती है?
उत्तर-शरणार्थी वे लोग होते हैं जो राज्यविहीन होते हैं और दूसरे राज्य में निवास करने के
लिए प्रयास करते हैं और अपनी बस्ती की खोज में रहते हैं। ये शरणार्थी (Refugees) या तो
युद्ध के कारण अथवा राष्ट्रीय संकट जैसे-अकाल, बाढ़ आदि से राज्यरहित हो जाते हैं। समान्यतः
लोग पड़ोसी देशों में शरणार्थी बन जाते हैं। शरणार्थियों को अनेक प्रकार सामाजिक, आर्थिक और
मानवतावादी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि कोई राज्य उन्हें अपने यहाँ रखने के
तैयार नहीं होता, वे अपने घर भी वापस नहीं जा सकते, क्योंकि वे प्रारम्भ से निवास रहित होते
हैं। वे निवासरहित, राज्यरहित और अनिश्चितता में होते हैं। इसलिए कैंप में गैर-कानूनी प्रवजन
कर्ता के रूप में रहने के लिए विवश होते हैं। बहुघा कानूनी तौर पर कार्य नहीं कर सकते हैं और
बच्चों को शिक्षा नहीं दे सकते। उनके बच्चों का भविष्य अनिश्चित होता है। वे किसी सम्पत्ति
को भी अपना नहीं सकते। उनकी समस्या इतनी गम्भीर है कि संयुक्त राष्ट्र (UNE) ने उनकी
सहायता के लिए एक उच्च आयोग (High Commission) नियुक्त किया है। 1947 ई० में भारत
विभाजन के समय हजारों लोग शरणार्थी बन गए। सभी शरणार्थियों को कोई भी राज्य अपने अन्दर
समंजित नहीं कर सकता। वस्तुत: इस समस्या का सामना केवल शरणार्थी ही नहीं कर रहे हैं अपितु
सम्पूर्ण विश्व समुदाय इससे जूझ रही है।
वैश्विक नागरिकता का विचार निश्चित रूप से इस समस्या को हल कर सकता है चाहे यह
पूर्ण रूप से या आशिक रूप से हो। संचार के नये साधन जैसे इंटरनेट, दूरदर्शन और सेलफोन
ने वैश्विक नागरिकता को पर्याप्त ग्रहणीय और अनुकूल बनाया है। वैश्विक नागरिकता के समर्थक
तर्क देते हैं कि यद्यपि एक विश्व, समुदाय और वैश्विक समाज आज भी विद्यमान नहीं है, परंतु
लोग राष्ट्रीय सीमा के बाहर के लोगों से जुड़े हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लोग विश्व के किसी
भी भाग के प्राकृतिक आपदा के समय एक साथ हो जाते हैं। यह वैश्विक विचार को मजबूत
करते हैं जो आगे चलकर शरणार्थियों की समस्या को हल कर सकते हैं।
प्रश्न 5. देश में अंदर एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में लोगों के आप्रवासन का आमतौर पर
स्थानीय लोग विरोध करते हैं। प्रवासी लोग अर्थव्यवस्था में क्या योगदान दे सकते हैं?
उत्तर-प्रवास की प्रक्रिया और फलस्वरूप शरणार्थियों की बढ़ती संख्या के अनेक समस्या
उत्पन्न होती है जिसको प्रतिक्रिया स्थानीय लोगों में दिखाई देती है। स्थानीय लोग इन्हें अपना
प्रतिद्वन्दी मानते हैं और इस प्रकार दोनों का विभाजन भीतरी और बाहरी (insiderst &
outsiders) के रूप में हो जाता है। बाहरी लोगों को अपने जीवन में खतरा दिखाई देता है। इसी
प्रकार की प्रवृतियाँ शहरी क्षेत्रों और यहां तक कि विभिन्न देशों में दिखाई देती हैं। फिलीस्तीनी
लोग अब तक भी व्यवस्थित नहीं हैं। इसी प्रकार का विवाद श्रीलंका में है। स्थानीय लोग हरेक
प्रकार का प्रयास बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए करते हैं। इस समस्या से जुड़े अनेक
प्रकार के नारे भी प्रचलित हो गए हैं जैसे मुम्बई, मुंबई वालों की है, हरियाणा, हरियाणवी के लिए
है। उत्तर-दक्षिण का भी विवाद है। इस सन्दर्भ में भूमि-पुत्र का सिद्धान्त भी विकसित हुआ है।
भीतरी लोगों और बाहरी लोगों, स्थानीय और शरणार्थियों के मध्य विवाद के कारण सभी
लोगों को पूर्ण और समान सदस्यता देने की आवश्यकता महसूस हुई है। इससे सम्बन्धित अनेक
संघर्ष उत्तर-पूर्व राज्यों, मुम्बई और पंजाब में हुए हैं। देश की विभिन्न भागों में बिहार के लोग
रोजगार की खोज में प्रवास किए हैं। ऐसे स्थानों पर उनके स्थानीय लोगों के मध्य संघर्ष हुए हैं।
लोगों का राज्य के एक भाग से दूसरे भाग में रोजगार की खोज में प्रवास करना नकारात्मक
एवं सकरात्मक दोनों पक्ष है। प्रवास करने वाले के उस स्थान पर बाहरी एवं भीतरी लोगों में
विभाजित हैं। उन्हें रोजगार एवं नागरिक सुविधाएं जैसे-शिक्षा, स्वास्थ्य, जल और विद्युत के लिए
धमकाया जाता है परन्तु सकारात्मक पहलू भी है। ऐसे प्रवासी लोग सामान्यतः कठोर परिश्रम करते
हैं और उस राज्य की अर्थव्यवस्था में उपयोगी योगदान देते हैं जहाँ वे बाहरी कार्यकर्ता के रूप
में कार्य करते हैं। वे वहाँ मजदूर, अमिक और विशेषज्ञ कारीगर के रूप में कार्य करते हैं। उत्तर
प्रदेश, बिहार और बंगाल के अकुशल श्रमिक हरियाणा, पश्चिमी उत्तरप्रदेश और पंजाब में काम
करके अपनी जीविका चला रहे हैं, उनको अपने राज्य में रोजगार उपलब्ध नहीं हैं। यहाँ तक कुछ
लोग जीविका के लिए विदेश जाते हैं। कुशल श्रमिकों के लिए देश के विभिन्न भागों में बाजार
विकसित हुए हैं। आई. . (प्रोफेशनल) अर्थात् कम्प्यूटर इंजीनियर बंगलोर में अच्छा कार्य कर
रहे हैं, केरल की नसें देश के विभिन्न भागों में कार्य कर रही हैं। वे उपयोगी और कीमती सेवा
मानव जाति को अपने राज्य की चिन्ता किए बिना कर रहीं हैं।
मुम्बई में भवन और रोड के विकास में शिक्षित और अशिक्षित लोग कार्य कर रहे हैं। वे
अपने लिए और अपने देश के लिए कार्य रहे हैं।
हमारे देश के आवागमन का अधिकार सविधान से मिला हुआ है जो अत्यन्त उपयोगी, सिद्ध
हुआ है।
प्रश्न 6. भारत जैसे समान नागरिकता देने वाले देशों में भी लोकतांधिक नागरिकता का
एक पूर्ण स्थापित तथ्य नहीं वरन एक परियोजना है। नागरिकता से जुड़े उन मुहे की चर्चा
कीजिए जो आजकल भारत में उठाए जा रहे हैं ?
उत्तर-नागरिकता की आदर्श परिभाषा राजनैतिक समुदाय की पूर्ण एवं समान सदस्यता है।
यह परिभाषा एक लोकतांत्रिक राजनीतिक समुदाय में अधिकाधिक ऐच्छिक है। यह सन्तोष की
बात है कि लोकतांत्रिक नागरिकता अथवा पूर्ण और समान सदस्यता अधिक जागरुकता के साथ
विश्व के अधिकांश देशों में हैं। हालाकि इसकी अधिकांश पृष्ठभूमि अभी व्यवहार में नहीं है।
पूर्ण एवं समान नागरिकता के उद्देश्य को प्राप्त करना अभी दूर ही है। इसलिए यह ठीक ही कहा
जाता है कि लोकतांत्रिक नागरिकता का विचार अभी पूर्ण तथ्य की अपेक्षा एक परियोजना है। यहाँ
तक कि लोकतांत्रिक राजनीतिक समुदाय यथा भारत में भी अभी एक प्रयोग के रूप में है। भारत
ने 59 वर्ष से अधिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निभाया है जो वयस्क मताधिकार और लोगों की
सहभागिता पर आधारित है।
भारतीय संविधान में आवश्यक लोकतांत्रिक और समाविष्ट नागरिकता को अपनाया गया है।
भारत में नागरिकता जन्म से, निवास से, पंजीकरण से और प्राकृतिकरण से प्राप्त की जा सकती
है। नागरिकों के अधिकार एवं आभार को संविधान में उल्लेखित किया गया है। यह भी वर्णन
है कि राज्य को नागरिकों के विरुद्ध भेदभाव नहीं करना चाहिए। इस प्रकार के समाविष्ट अधिकार
एच्छिक अधिकार को जन्म नहीं देते। महिला आन्दोलन और दलित आन्दोलन धनी और गरीब
में गलतफहमी पैदा कर रहे हैं। ये सामाजिक समूह के पूरक का प्रभावी स्थिति को प्रकट करते
हैं। सामाजिक परिवर्तन के रूप में नये मुद्दे निरन्तर उठाए जा रहे हैं और समूहों के द्वारा नई मांगें
की जा रही हैं। वे अपने को तटस्थ मानने लगते हैं और समाज के मुख्य धारा से हटा दिए जाते
हैं। प्रजातात्रिक राज्य में इन मांगों को सामाजिक एकता के लिए ध्यान में रखना चाहिए।
                                          परीक्षोपयोगी महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
                                (Important Questions for Examination)
                                                       वस्तुनिष्ठ प्रश्न
                                           (Objective Questions)
1. नागरिकता निर्धारण का एक कौन सा तरीका सही नहीं है ? [B.M.2009 A]
(क) रक्त संबंध
(ख) जन्म स्थान
(ग) द्वैद्य सिद्धांत
(घ) पारिवारिक संबंध                               उत्तर-(घ)
                                                   अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न
                                    (Very Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1. नागरिकता अधिनियम, 1955 का निम्नलिखित में से किससे संबंध है?
(Which of the following does the Citizenship Act of 1955 deal with ?).
(क)नागरिक की परिभाषा,
(ख) बाहरी व्यक्ति की परिभाषा,
(ग) बाहरी व्यक्तियों के अधिकार,
(घ) नागरिकता को प्राप्ति तथा समाप्ति।                      उत्तर-(घ)
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन भारत में बाहरी व्यक्ति हैं ?
(From the option give below, choose which of the following are aliens in
India?)
(i) रीता जो भारत में जन्मे अपने पिता और फ्रांसीसी माँ के साथ रहती है।
(ii) जानकी जो भारत में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए भारीशस
से आई है।
(iii) श्री विलियम बेकर जो आस्ट्रेलिया के उच्चायोग में विदेश सेवा के अधिकारी
हैं।
(iv) लखनऊ का रहने वाला एक लड़का खालिद आमीर, अमेरिका में पढ़ाई कर रहा है।
उत्तर-(ii)-(iii)
प्रश्न 3. भारत की नागरिकता ग्रहण करने के गलत विकल्प को चुनिए :
(Select the incorrect option of acquiring Indian citizenship.)
(क) कोई एक भारतीय भाषा बोल सकता/सकती है।
(ख) कम से कम पांँच वर्ष तक भारत में रह चुका/चुकी है।
(ग) जिस देश का/की वह है, वहां की नागरिकता छोड़ चुका/चुकी है।
(घ) अच्छा वेतन अर्जित करने में सक्षम है।                        उत्तर-(घ)
प्रश्न 4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(Answer the following questions 🙂
(i) फिलिप टेलर का जन्म नई दिल्ली में हुआ था। उसके पिता एक अमेरिकी हैं, जो
नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में काम करते हैं। फिलिप किस देश का नागरिक होगा?
(Phillip Taylor was born in New Delhi. His father is an American working a
the American Embassy in New Delhi. Which country’s citizenship would Philip
have?)
उत्तर-फिलिप के पास भारतीय या अमेरिकी नागरिकता में से कोई एक चुनने का विकल्प है।
(ii) भारत के श्रीरामदीन को मलेशिया की न्यायपालिका में मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त
किया गया है। क्या वे देशीकृत नागरिक बन सकते हैं?
(Mr. Ram Deen of Indian has been appointed as a Magistrate in the Malay-
sian Judiciary.Can he become a naturalized citizen of the country?)
उत्तर-हाँ, यदि किसी विदेशी को किसी सरकारी पद पर नियुक्त किया जाता है तो वह उस
देश की नागरिकता ग्रहण कर सकता है जहाँ का वह लोकसेवक बना है।
(iii) पाकिस्तान का एक भाग, पूर्वी पाकिस्तान, 1971 ई० में मुक्त होकर स्वतंत्र देश,
बंगलादेश बन गया। भूतपूर्व पूर्वी पाकिस्तानियों की नागरिकता पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?
(In 1971, East Pakistan, a part of Pakistan, was liberated and became an
independent country Bangladesh. How did this affect the citizenship of the
formet East Pakistanis ?)
उत्तर-उन्होंने बंगलादेश की नागरिकता ग्रहण कर ली।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से किसे अपनी भारतीय नागरिकता छोड़नी पड़ेगी ?
(Which of the following would have to surrender their Indian citizenship ?)
(क) ज्योत्सना सिंह, जिसे आस्ट्रेलिया में अध्ययन के लिए शोधवृत्ति मिली है।
(ख) जग्गू, जिसे डकैती डालते हुए पकड़ा गया।
(ग) राधिका, जो छुट्टियां मनाने स्वीडेन गई है।
(घ) सिद्धार्थ मेहता, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति का सलाहकार नियुक्त किया गया है।
उत्तर-(घ)
प्रश्न 6. सही विकल्प चुनिए :
(Choose the correct option 🙂
अर्थहीन प्रथाओं और अंधविश्वासों को दूर किया जा सकता है:
Meaningless social customs and superstitions can be removed by:
(क) अधिक शहरीकरण से
(ख) अधिक व्यक्तियों को रोजगार देने से
(ग) गरीबी दूर करके
(घ) शिक्षा के प्रसार से                                उत्तर-(घ)
प्रश्न 7. श्री अनिल अभी-अभी एक व्यस्त कारोबारी दौरे से लौटकर आए थे। अगले
दिन उसका कार्यालय चुनाव के कारण बंद था। उन्होंने पूरा दिन फिल्म देखने और सोने
में बिताया। श्री अनिल रवैये में क्या गड़बड़ हैं?
(Mr. Anil had just come from a busy business tour. The next day the office
was closed because of elections. He spent the whole day watching a film and
sleeping. What is wrong with Mr. Anil’s attitude ?)
उत्तर-उदासीनता अर्थात् गलत रवैये (Wrong attitude) का पनपना या नागरिकता के प्रति
अस्वस्थ दृष्टिकोण।
प्रश्न 8. पचास शब्दों के बीच भेद कीजिए :
(Answer in about 50 words 🙂
(i) निम्नलिखित के बीच भेद कीजिए :
(Distinguish between :
(क) नागरिक और बाहरी व्यक्ति। (ख) जन्मजात और देशीयकृत नागरिकता।
उत्तर-(क) नागरिक और बाहरी व्यक्ति के भेद-नागरिक वह व्यक्ति है जो किसी देश
या राज्य का सदस्य होता है, वह उसके प्रति निष्ठावान होता है। वह नागरिक तथा राजनीतिक
अधिकारों का उपयोग करता है। वह देश के शासन संचालन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग
लेता है।
बाहरी व्यक्ति-द्वारा किसी अन्य राज्य (देश) में अस्थाई रूप में निवास किया जाता है।
वह नागरिकों की भांति राजनीतिक अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकता और न ही देश के शासन
(Administration) में भाग ले सकता है।
(ख) जन्मजात और देशीयकृत नागरिकता में भेद-जन्मजात नागरिक वह कहलाता है,
जो किसी देश में पैदा या उसके माता-पिता उस देश के नागरिक होते हैं।
देशीयकृत नागरिक वह होता है, जो किसी अन्य देश की नागरिकता कुछ आवश्यक शर्तों
को पूर्ण करके प्राप्त करता है।
(ii) गोआ के लोग भारत के नागरिक कैसे बने ?
(How did the people of Goa become Indian citizens?)
उत्तर-गोआ सन् 1961 ई० में पुर्तगाल से स्वतंत्र होकर भारत का हिस्सा बन गया। अत:
गोआवासी भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अंतर्गत भारतीय बन गए।
(iii) यदि कोई व्यक्ति अपने देश से कई वर्षों तक बाहर रहे, तो क्या होगा?
(What would happen if a person stayed away from his/her country for
many yeras ?)
उत्तर-उस व्यक्ति को दीर्घकालीन अनुपस्थिति के कारण उसे अपने देश की नागरिकता
खोनी पड़ेगी।
प्रश्न 9. नागरिकता से क्या अभिप्राय है?
(What is meant by citizenship ?)
उत्तर-नागरिकता (Citizenship) – नागरिकता नागरिक की वह विशेषता अथवा गुण
है जिसके कारण उसे राज्य से राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं और वह राज्य का नागरिक
कहलाता है।
प्रश्न 10. नागरिक व विदेशी में क्या अन्तर है?                 [B.M.2009A]
(What is the difference between a citizen and a foreigner?)
उत्तर-नागरिक तथा विदेशी में निम्नलिखित अंतर हैं:-
(i) नागरिक उस राज्य का स्थायी निवासी होता है और विदेशी दूसरे राज्य का होता है।
(ii) दोनों के अधिकारों में भी भिन्नता होती है। नागरिकों को राजनीतिक व सामाजिक
अधिकार प्राप्त होते हैं, विदेशियों को नहीं।
(iii) अपने राज्य के प्रति वफादारी रखना नागरिक का कर्त्तव्य है परन्तु विदेशी अपने राज्य
(जिसका वह नागरिक है) के प्रति वफादार होता है।
(iv) युद्ध के समय विदेशियों को राज्य की सीमा से बाहर जाने के लिए कहा जा सकता
है परन्तु नागरिकों को नहीं।
(v) नागरिक अपने राज्य की दीवानी तथा फौजदारी न्यायालयों के क्षेत्राधिकार के अधीन
होता है जबकि विदेशो अस्थायी से निवास वाले राज्य के दीवानी, फौजदारी न्यायालयों के
क्षेत्राधिकार के अधीन होता है।
                                                    लघु उत्तरात्मक प्रश्न
                                     (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1. नागरिकता ग्रहण करने के कौन-कौन से तरीके हैं ?     [B.M.2009A]
(What are the different ways of acquiring citizenship ?)
उत्तर-नागरिकता ग्रहण करने के तरीके निम्नलिखित हैं :-
(i) विवाह-कोई विदेशी स्त्री भारतीय पुरुष से विवाह करने के बाद भारत की नागरिकता
ग्रहण कर सकती है। जापान में नागरिकता कानून भिन्न हैं। यदि कोई जापानी स्त्री भारतीय या
किसी अन्य राष्ट्र के पुरुष से विवाह करती है, तो वह व्यक्ति जापान की नागरिकता ग्रहण कर
सकता है।
(ii) सरकारी पद पर कर्मचारी या अधिकारी के रूप में नियुक्ति-यदि किसी विदेशी
को किसी सरकारी पद पर नियुक्त किया जाता है, तो वह उस देश की नागरिकता ग्रहण कर
सकता / सकती है, जहाँ का वह लोक सेवक बना / बनी है।
(iii) अचल संपत्ति की खरीद या क्रय करके-कुछ देशों में यदि किसी व्यक्ति को अचल
संपत्ति जैसे घर या जमीन खरीदने का अनुमति है, तो वह नागरिकता भी ग्रहण कर सकता
सकती है।
(iv) भूमि का अधिग्रहण-यदि किसी देश की भूमि अन्य देशों के द्वारा अधिग्रहीत कर
ली जाती है, तो उस क्षेत्र के सभी निवासी उस देश के नागरिक बन जाते हैं।
प्रश्न 2. किसी नागरिक की नागरिकता कैसे समाप्त हो सकती है ? [B.M.2009A)
(How can acitizen lose her/his citizenship?)
उत्तर-(i) देशद्रोह या निरंतर विद्रोही गतिविधियां-यदि कोई नागरिक देश के साथ
गद्दारी करते हुए संविधान का अनादर करे तथा देश की शांति और व्यवस्था को लगातार भंग
करे तो उसे देश की नागरिकता से वंचित किया जा सकता है।
(ii) किसी भू-भाग के पृथक् होने पर-यदि देश का कोई हिस्सा किसी समझौते या संधि
द्वारा अलग हो जाए, तो वहाँ के सभी नागरिक दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त करेंगे, व उन्हें पहले
देश की नागरिकता छोड़नी होगी।
(iii) विदेशी में सरकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त-जब कोई व्यक्ति किसी विदेशी
सरकार की सेवा में पद ग्रहण करता है, तो उसकी मूल नागरिकता समाप्त हो सकती है।
(iv) विदेश सेना, नौसेना या वायुसेना में सेवा-रक्षा सेवाएँ किसी देश के संवेदनशील
अंग होता हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश की रक्षा सेवाओं में पद ग्रहण करता है, तो उसकी
मूल नागरिकता समाप्त हो सकती है।
(v) विदेशी से विवाह-यह नागरिकता समाप्त होने के सबसे प्रचलित कारणों में से एक
है।यदि कोई भारतीय स्री किसी विदेशी से विवाह करती है,तो वह भारतीय नागरिकता
छोड़कर अपने पति के देश की नागरिकता ग्रहण कर सकती है।
(vi)विदेश में स्थायी निवास-यदि कोई भारतीय किसी अन्य देश में जाकर रहने लगे,
तब वह अपने देश की नागरिकता खो देता है।
प्रश्न 3. एक आदर्श नागरिक के गुणों का वर्णन कीजिए।
(Describe the merits of a good citizen.)
उत्तर-(i) सुशिक्षित (Educated)-सुशिक्षित होना आदर्श नागरिक के लिए परमावश्यक
है। शिक्षा के अभाव में वह अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को नहीं समझ सकता। अत: प्रजातंत्र
की सफलता के लिए अच्छे नागरिकों का सुशिक्षित होना आवश्यक है।
(ii) स्वस्थ (Healthy) – एक आदर्श नागरिक का स्वस्थ होना आवश्यक है। स्वस्थ
नागरिक ही देश व समाज की भली-भाँति सेवा कर सकता है।
(iii) मताधिकार का उचित प्रयोग (Proper use of vote) – आदर्श नागरिक अपने
मताधिकार का सही प्रयोग कर सकता है और अपना मूल्यवान वोट योग्य, शिक्षित, नि:स्वार्थ एवं
देशभक्त को दे सकता है।
(iv) अधिकारों तथा कर्तव्यों का ज्ञान (Awaknes about their rights and dities)-
एक आदर्श नागरिक अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों का प्रयोग ठीक से करता है।
(v) देशभक्त (Partiot)- एक आदर्श नागरिक को देशभक्त होना चाहिए। देश के प्रति
स्वाभाविक अनुराग होना चाहिए।
(vi) परिश्रमी (Hardworkers)- एक अच्छे नागरिक को परिश्रमी एवं फुर्तीला होना
चाहिए, जिससे वह सफलतापूर्वक सामाजिक कार्य कर सके।
प्रश्न 4. आधुनिक राज्य अपने नागरिकों को कौन-कौन से राजनैतिक अधिकार प्रदान
करते हैं?                                                                                 [B.M.2009A]
(Which type of political rights are given to the citizens by the Modern
States?)
उत्तर-आधुनिक युग में अधिकतर देश प्रजातन्त्रीय हैं। ये देश अपने नागरिकों को बहुत से
राजनीतिक अधिकार प्रदान करते हैं। उनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं-
(i) मतदान का अधिकार (Right to Vote)-जिन देशों में प्रजातन्त्रात्मक शासन की
स्थापना की जाती है, उनमें वहाँ के वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार प्रदान किया जाता
है। इस अधिकार के अनुसार लोग समय-समय पर होने वाले चुनावों के द्वारा अपने प्रतिनिधियों
को चुनते हैं। जनता के प्रतिनिधि ही सरकार का निर्माण करते हैं और शासन चलाते हैं।
(ii) चुनाव लड़ने का अधिकार (Right to Contest Election)- प्रजातंत्रीय शासन में,
प्रत्येक व्यक्ति जो यह समझता है कि उसके सहयोगी उसे अपना प्रतिनिधि चुनना चाहते हैं, उसे
निर्वाचन में खड़ा होने का अधिकार है। निर्वाचित होने के बाद व्यक्ति नागरिकों के प्रतिनिधि के
रूप में सरकार का निर्माण करते हैं।
(iii) सरकारी नौकरी प्राप्त करने का अधिकार (Right to hold public office)-
आधुनिक युग में नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के सरकारी नौकरियां पाने का अधिकार है।
(iv) कानून के समक्ष समानता का अधिकार (Right to equality before Law) –
आधुनिक राज्यों में नागरिकों को कानून के सम्मुख समानता का अधिकार प्रदान किया जाता है।
प्रश्न 5. किसी राज्य की नागरिकता के लिए आवश्यक शर्तें क्या हैं ?
(What are the essential conditions for the citizenship of a state ?)
उत्तर-नागरिकता के लिए चार चीजों की आवश्यकता होती है :-
ईमानदारी के साथ नियमित रूप से कर चुकाते हैं। उपने कर्तव्यों को वे निष्ठापूर्वक रहकर निभाते
हैं। वे उच्च नैतिक चरित्र का पालन करते हैं। हर सार्वजनिक गतिविधि की जानकारी रखते हैं।
बुरे कानूनों का शांतिपूर्ण उपायों से विरोध करते हैं। वे देशभक्त होते हैं तथा अपने देश को अपने

(i) राज्य की सदस्यता-वर्तमान में प्रत्येक मनुष्य किसी न किसी राज्य का सदस्य अवश्य
होता है। राज्य की सदस्यता ही व्यक्ति को उस राज्य की नागरिकता दिलाती है और वह उक्त
समाज का अंग बन जाता है।
(ii) राज्य के प्रति भक्ति-राज्य के प्रति भक्ति होना अत्यन्त आवश्यक है। 1999 ई० ।
जब पाकिस्तान के कारगिल में सैनिकों ने घुसपैठ की तो सारे भारत में विरोध के बदले की भावना
उत्पन्न हुई तथा जनवरी 2001 ई० में गुजरात में जब भूकम्प से जान व माल को नुकसान हुआ
तो भारतीयों में सहयोग की भावना उत्पन्न हुई। यह समाज के प्रति भक्ति का अच्छा उदाहरण है।
(iii) नागरिक, राजनीतिक तथा सामाजिक अधिकारों की प्राप्ति-किसी राज्य का
नागरिक किसी व्यक्ति को उसी दशा में कहा जा सकता है जबकि उसे राज्य की ओर से नागरिक
राजनीतिक तथा सामाजिक अधिकार प्राप्त हों। प्रारम्भ से आज तक किसी न किसी रूप में राज्य
ने अपने नागरिकों को ये अधिकार प्रदान किए हैं।
(iv) कर्तव्य-पालन-राजनीतिक तथा सामाजिक अधिकारों की प्राप्ति के बदले में नागरिक
में कर्तव्य पालन की भावना होना आवश्यक है। नागरिक को चाहिए कि वह राज्य के प्रति अपने
कर्तव्यों को अवश्य पूरा करे तथा राज्य की सुरक्षा, उन्नति एवं विकास में सभी प्रकार का सहयोग
प्रदान करे।
                                                      दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
                                       (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 1. लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
(Explian the role of a citizen in a democracy.)
उत्तर-लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका-
(i) लोकतंत्र लोगों की, लागों द्वारा तथा लोगों के लिए कार्य करने वाली सरकार है। आजकल
राज्यों का आकार (जनसंख्या तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से) बहुत बड़ा है। नागरिक समय-समय
पर मतदान में भाग लेकर, चुनाव लड़कर या अपने दल गठन करने एवं चुनाव के बाद उसके
कार्यों में रुचि लेकर एवं सहयोग देकर अपनी भूमिका का निर्वाह करते हैं।
(ii) अपने कर्तव्यों का पालन करके तथा दायित्वों का निर्वाह करके-लोकतंत्र में हर
नागरिक अपने कार्यों तथा दायित्वों की जिम्मेदारी निष्ठा से निभा कर लोकतंत्रीय सरकार में
योगदान देते हैं या अपनी भूमिका का निर्वाह करते हैं।
(iii) अनुशासनबद्धता का पालन एवं सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करके-नागरिक
लोकतंत्र की सफलता के लिए शाति तथा अनुशासन को जरूरी मानते हैं। वे कानून को अपने हाथ
में नहीं लेते तथा अपने विचारों को समाचारपत्रों, टेलीविजन, रेडियो, सभाओं, प्रदर्शनों द्वारा
अभिव्यक्त करते हैं। वे सार्वजनिक संपत्ति तथा राष्ट्रीय विरासत की रक्षा में भाग लेते हैं।
(iv) शिक्षा प्राप्त करना तथा संकीर्ण भावनाओं में न बहना-लोकतंत्र में नागरिक शिक्षा
प्राप्त करके तथा ज्ञान प्राप्ति की प्रक्रिया को जीवन भर जारी रखते हैं तथा सदैव ही स्वयं को
तंग दृष्टिकोण जैसे जातिवाद, सांप्रदायिकता, संकीर्ण भाषायी नजरिया, क्षेत्रवाद से बचा कर रखते
हैं क्योंकि वे मानते और जानते हैं कि संकीर्ण भावनाएं लोकतंत्र की सफलता की
ही शक्तिशाली अवरोधक (Hindrances) हैं।
(v) कर भुगतान तथा उच्च नैतिक मूल्यों को बनाए रखना-लोकतंत्र में नागरिक प्रायः
ईमानदारी के साथ नियमित रूप से कर चुकाते हैं। उपने कर्तव्यों को वे निष्ठापूर्वक रहकर निभाते
हैं। वे उच्च नैतिक चरित्र का पालन करते हैं। हर सार्वजनिक गतिविधि की जानकारी रखते हैं।
बुरे कानूनों का शांतिपूर्ण उपायों से विरोध करते हैं। वे देशभक्त होते हैं तथा अपने देश को अपने
निजी स्वार्थों से ऊपर रखते हैं।
प्रश्न 2. ‘नागरिक’ शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए। भारतीय संविधान नागरिकों के बारे
में क्या कहता है? भारत की नागरिकता ग्रहण करने की पाँच पद्धतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-(क) नागरिक शब्द का अर्थ-नागरिक वह व्यक्ति है जो किसी राज्य का सदस्य
होता है, वह देश प्रति निष्ठावान होता है, उसे नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं,
और वह देश के शासन में भागीदारी करता है।
(ख) भारत का संविधान एवं नागरिक-भारत का संविधान कहता है कि निम्नलिखित
व्यक्ति संविधान लागू होने के साथ ही भारत का नागरिक बन जाता है-
(i) भारत के क्षेत्र में जन्मा कोई भी व्यक्ति।
(ii) भारत में निवास कर रहा व्यक्ति या जिसके माता-पिता का जन्म भारत में
हुआ हो।
(iii) कोई व्यक्ति जिसके माता-पिता भारत में नहीं जन्मे किन्तु वे संविधान लागू होने के
कम से कम पाँच वर्ष पहले से भारत में रह रहे हों।
(ग) भारत की नागरिकता ग्रहण करने की पांच पद्धतियाँ निम्न हैं-
(i) जन्म के आधार पर नागरिकता-भारत में जन्मा हर व्यक्ति जन्म से भारत का नागरिक
होगा।
(ii) वंशानुगत आधार पर नागरिकता-किसी व्यक्ति का जन्म भारत के बाहर हुआ है पर
यदि उसके पिता उसके जन्म के समय भारत के नागरिक हैं तो वह वंशानुगत आधार पर भारत
का नागरिक होगा या होगी।
(iii) पंजीकरण द्वारा नागरिकता-व्यक्तियों के कुछ वर्ग जिन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं
है, निर्धारित अधिकारियों के समक्ष पंजीकरण करवा कर इसे ग्रहण कर सकते हैं। उदाहरण के
लिए भारत के किसी नागरिक से विवाहित कोई स्त्री अपना पंजीकरण करवा कर भारतीय
नागरिकता ग्रहण कर सकती है।
(iv) देशीयकरण के आधार पर नागरिकता-कोई विदेशी व्यक्ति भारत सरकार को
देशीयकरण के लिए आवेदन करके भारत की नागरिकता ग्रहण कर सकता है। देशीयकरण का
अर्थ है कुछ शर्तों का पालन करके किसी देश की नागरिकता लेना।
(v) क्षेत्र के समावेशन के आधार पर नागरिकता-यदि कोई क्षेत्र भारत का भाग बन जाता
है, तो भारत सरकार उस क्षेत्र को लोगों के नागरिकता दे देगी।
प्रश्न 3. एक नागरिक के तीन प्रमुख कर्तव्यों की व्याख्या करें। [B.M. 2009 A]
(Explian three primary duties of a citizen.)
उत्तर-कर्त्तव्य का अर्थ (Meaning of Duty)-साधारण शब्दों में किसी काम को करने
या न करने के दायित्वों को कर्तव्य कहत हैं। कर्त्तव्य सकारात्मक या नकारात्मक कार्य है जो व्यक्ति
को दूसरों के लिए करना पड़ता है, चाहे उसकी इच्छा उस कार्य को करने की हो या न हो। संक्षेप
में, कर्त्तव्य कुछ ऐसी निश्चित और अवश्य किए जाने वाले कार्यों को कहते हैं जो कि सभ्य समाज
और राज्य में रहते हुए व्यक्ति को प्राप्त किए गए अधिकारों के बदले में करने पड़ते हैं।
नागरिकों के कानूनी कर्तव्य (Legal Duties of the Citizens)-
ऐसे कर्त्तव्य जिनको करने के लिए प्रत्येक नागरिक बाध्य होता है, कानूनी कर्त्तव्य कहलाते
हैं। जो व्यक्ति कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं करता, राज्य उन्हें दण्ड दे सकता है। देश के प्रति
वफादार रहना, सैनिक सेवा कर देना इत्यादि नागरिकों के कानूनी कर्तव्यों की श्रेणी में आते हैं।
(i) राज्य के प्रति वफादारी (Loyalty towards the State)- राज्य प्रत्येक नागरिक को
अनेक प्रकार के अधिकार प्रदान करता है व कई प्रकार की सुख-सुविधाएं भी प्रदान करता है।
राज्य अपने नागरिकों की बाहरी आक्रमणों से तथा प्राकृतिक विपत्तियों से भी रक्षा करता है और
उनके विकास के लिए प्रयत्नशील रहता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति से राज्य के प्रति निष्ठा व भक्ति
की आशा की जाती है। प्रत्येक नागरिक का यह कानूनी कर्त्तव्य है कि वह देशद्रोह न करे और
देश पर आए संकट के समय अपना तन-मन-धन न्यौछावर करने को तैयार रहे।
(ii) कानूनों का पालन करना (Obedience of Laws) – कानून-पालन की भावना से
राज्यों में शांति व व्यवस्था व्यवस्थित हो सकती है। आजकल के प्रजातांत्रिक देशों में कानूनों का
निर्माण जनता के प्रतिनिधि करते हैं। जिस देश में नागरिकों की प्रकृति कानूनों का उल्लंघन करने
की होती है उस देश में शान्ति व व्यवस्था विद्यमान नहीं रहती। अतः कानूनों का पालन करना
प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
(iii) टैक्स देना (Payment of taxes)- सरकार को अपने कार्यों को सुचारु रूप से चलाने
के लिए धन की आवश्यकता होती है। सरकार धन की प्राप्ति कर लगाकर करती है। अत: नागरिकों
का यह कानूनी कर्तव्य है कि वे अपने हिस्से के करों को ईमानदारी से चुकाएँ। करों को ईमानदारी
से न चुकाने पर राज्य द्वारा दण्ड भी दिया जा सकता है।
(iv) राजनीतिक अधिकारों का उचित प्रयोग करना (Proper use of the Political
Rights)- प्रजातंत्रीय शासन में नागरिकों को बहुत से राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं। उनमें
से प्रमुख हैं-मत देने का अधिकार, निर्वाचित होने का अधिकार व सरकारी नौकरी प्राप्त करने
का अधिकार। प्रत्येक अधिकार का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह अपने मत का सदुपयोग करे
और किसी अच्छे उम्मीदवार को ही देश का शासन चलाने के लिए अपना प्रतिनिधि चुने। इसके
साथ-साथ अपने निर्वाचित होने के अधिकार का भी ईमानदारी से प्रयोग करे।
(v) सैनिक सेवा में भाग लेना (To take in defence service)- नागरिकों का यह भी
कर्तव्य है कि आवश्यकता पड़ने पर देश की सुरक्षा हेतु सेना में भर्ती हो।

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