8TH SST

bihar board class 8 social science history solutions chapter 1

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 कब, कहाँ और कैसे
अतीत से वर्तमान
पाठ का सारांश- हमारी दुनिया शुरू से लेकर आज तक कभी स्थिर नहीं रही। इन बदलावों के कारण हमारा समाज, उसकी अर्थव्यवस्था, राजनीति, कला, संस्कृति आदि प्रायः सारे क्षेत्रों में परिवर्तन होते रहे । ये परिवर्तन कब और कैसे शुरू हुए, प्रस्तुत पाठ इस पर प्रकाश डालता है।
पुनर्जागरण-यूरोप से आधुनिक युग में होनेवाले परिवर्तनों की शुरुआत हुई। पन्द्रहवीं शताब्दी में इटली में एक नया आंदोलन शुरू हुआ जिसे ‘पुनर्जागरण’ कहा गया। इसके तहत लोगों ने स्वतंत्र रूप से विचार करने की शुरुआत की और वैज्ञानिक पद्धति से सत्य को जानने के लिए राजव्यवस्था, शासकों और धार्मिक व्यवस्था व अंधविश्वास के खिलाफ प्रश्न चिह्न भी खड़े किये और गलत चीजों के विरुद्ध आवाज बुलंद किये । व्यापार-संबंधों व अन्य सम्पर्कों से इस विचारों का प्रसार दुनिया के अन्य भागों में फैल गया।
खोज यात्राएँ – नाविकों और समुद्री यात्रा करने वालों के द्वारा यूरोप के विचार अन्य विश्व-भाग में फैलने लगे। इसी बीच प्रसिद्ध नाविक कोलंबस ने 1492 ई. में अमेरिका महाद्वीप की खोज की।
पूँजीवाद एवं औद्योगिक क्रान्ति–समुद्री यात्राओं ने व्यापारिक संबंधों को बढ़ाया । पूँजी में बढ़ोतरी हुई। इससे यूरोप में ‘पूँजीवाद’ की व्यवस्था पनपी । पूँजीपति और श्रमिक दो वर्गों में समाज मुख्य तौर पर बंट गया। जहाँ मध्यकाल में जुलाहे हाथों से कपड़े बुनते थे । आधुनिक युग में मशीनों से ज्यादा कपड़े तैयार होने लगे। फलत: 18वीं सदी में मशीनीकरण की प्रक्रिया इंग्लैंड में, इस सदी के उत्तरार्द्ध में शुरू हुई जो अन्य देशों में भी फैल गयी। इसे ‘औद्योगिक क्रान्ति’ कहा गया।
उपनिवेशवाद एवं साम्राज्यवाद-तैयार माल को बेचने के लिए बाजार तलाश करने और अन्य देशों से सस्ते में कच्चा माल प्राप्त करने के लिए अन्य देशों को अपने अधीन कर, उन शासित देशों को ‘कॉलोनी’ या ‘उपनिवेश’ बनाया गया। इससे ‘औपनिवेशिक युग’ शुरू हुआ और साम्राज्यवादी व्यवस्था की शुरुआत हुई।
अमेरिकी एवं फ्रांसीसी क्रान्ति-अमेरिका की खोज के बाद वहाँ पर यूरोप के देशों ने अपना कब्जा जमा लिया था। कुछ समय बाद ही वहाँ के मूल निवासियों ने यूरोपीय देशों के शासन के विरुद्ध संघर्ष छेड़ दिया। उधर फ्रांस के नागरिकों ने अत्याचार व दमन के कारण राजपरिवार व सामंत के खिलाफ बिगुल बजा दिया। फिर अमेरिका और फ्रांस दोनों ही देशों में गणतंत्र प्रणाली की सरकार बनी। इसका अनुकरण धीरे-धीरे अन्य देशों ने भी किया और एक राष्ट्र के रूप में संगठित होने की परम्परा की शुरुआत हुई।
भारत को भी यूरोपीयों ने उपनिवेश बनाया। उन्होंने हमारे शासन-व्यवस्था को अपने अधीन कर लिया था। इंग्लैंड ने तो भारत पर दो सौ सालों तक शासन कर इसे उपनिवेश बना इसका जमकर शोषण किया। पर साथ ही वे यहाँ अपने साथ नवीन अंग्रेजी शिक्षा और नवीन विचारों को भी लाये । इनके फलस्वरूप भारतीय लोगों में भी जागृति आयी।
समय के साथ हमारे समाज में भी परिवर्तन होते रहे । ये परिवर्तन कभी शब्दों के अर्थ, कभी स्थानों के नाम, कभी भौगोलिक सीमाओं एवं जीवन शैली के संदर्भ में होते रहे।
पाठ के अन्दर आए प्रश्नों के उत्तर
आप कक्षा छह एवं सात में पढ़ी गई बातों के आधार पर चर्चा करें :
1. प्राचीन काल में मनुष्य की जिंदगी में आने वाले पाँच मुख्य परिवर्तन क्या हो सकते हैं। 
उत्तर-प्राचीन काल में मनुष्य का जीवन मुख्य रूप से कृषि पर आधारित था। धीरे-धीरे अन्य आर्थिक कार्यों का विस्तार हुआ जिससे वाणिज्य-व्यापार का विस्तार शुरू हुआ। इससे गांव
प्रधान विश्व में शहरी जीवन की स्पतार बढ़ने लगी। धीरे धीरे महत्वपूर्ण परिवर्तन के बतौर प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान का समाज में विस्तार हुआ। लोगों की विचारधारा व रहन सहन में भी बदलाव आये।
वस्तुतः हम कर सकते हैं कि प्राचीन काल में मनुष्य की जिंदगी में पाँच मुख्य परिवर्तन इस प्रकार है-
(1) वाणिज्य व्यापार का विस्तार, (II) शहरीकरण का बढ़ना, (iii) विश्व के अन्य भागों का समुद्री मार्ग से जुड़ना, (iv) प्रौद्योगिकी (v) विज्ञान व वैज्ञानिक सोच का विस्तार होना।
2. मध्य काल में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में आए पाँच मुख्य परिवर्तन क्या हो सकते हैं?
उत्तर– मध्य काल में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में कई परिवर्तन दृष्टिगोचर होते हैं।
मध्ययुगीन आर्थिक जीवन मुख्य रूप से कृषि पर आधारित था। पर, कृषि के साथ-साथ इस शुग में अन्य आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ने लगी। इससे वाणिज्य व्यापार व शहरी जीवन की रफ्तार बदने लगी। खेतों की पढ़ाई के लिए फावड़ा या कुदाल की जगह हल का उपयोग होने से कृषि कर्म को विकारा मिला। खेती में प्रौद्योगिकी के समावेश से कृषि से लाभ बढ़ गया। 13वीं
शताब्दी में परखे और धुनकी के प्रयोग से सूती कपड़े की गुणवत्ता व उत्पादन में वृद्धि हुई।
इस युग में कागज का व्यापक उपयोग शुरू होने की क्रान्तिकारी सामाजिक घटना घटी जिससे ज्ञान का आविष्कार और प्रसार सम्भव हुआ। समुद्री व्यापार में बढ़ोतरी हुई। इससे नयी विचारधारा और प्रौद्योगिकी का विश्व के अन्य भागों में प्रसार सम्भव हुआ। विश्व के लोगों के एक-दूसरे के सम्पर्क में आने से हर जगह नये रीति-रिवाज, पहनावा और खान-पान में परिवर्तन हुए।
इन सामाजिक बदलावों ने राजनीतिक क्षेत्रों को भी गहरे प्रभावित किया। अन्य देशों में व्यापार करने जाने के बहाने प्रबल यूरोपीय शासक अन्य विश्व के भू-भाग पर अपने उपनिवेश बसाने लगे। वे अन्य देशों की शासन व्यवस्था को अपने अधीन करने लगे। शोषित देशों के शासक आपसी झगड़े में व्यस्त होने से फूट के कारण अधीन हो गये। अपने देशों को विदेशी हुकूमत से मुक्ति दिलाने के लिए एकजुट होने लगे। फ्रांस और अमेरिका में हुए जन-विद्रोह के बाद वहाँ बनी गणतात्रिक सरकारों के प्रभाव से अन्य देश भी ‘राष्ट्र’ के रूप में संगठित होने लगे। इन अधीन देशों में भी जन-विद्रोह होने लगे और वहाँ के शासक-परिवार के लोग सामंत व आम जनता विदेशी शासन के खिलाफ विद्रोह कर अपने देश को स्वतंत्र करने में लग गये।
3. साम्राज्यवाद किसे कहते हैं?
उत्तर– सैनिकों के द्वारा अथवा अन्य तरीकों से विदेशी भू-भाग के प्रदेशों को अपने अधीन कर अपना राजनीतिक प्रभुत्व स्थापित करने को ही साम्राज्यवाद कहते हैं।
4. अत्याचार और शोषण के शिकार हमारे देश में किस प्रकार की सरकार है ? उसके नीति निर्देशक सिद्धान्तों पर चर्चा करें।
उत्तर– हमारे देश में वैसी राज्य सरकारें अत्याचार और शोषण की शिकार हैं, जो केन्द्र में बनी सरकार की पार्टी या राजनीतिक संगठन से अलग हैं। यानी केन्द्र में जिस पार्टी की सरकार है उस पार्टी से जुड़े लोग अन्य राज्यों में भी सरकार बनाए हैं तो उनको तो सारी सुविधाएं मिलती हैं पर जिन राज्यों में केन्द्र में सरकार बनाये पार्टी से अलग दल की सरकार है तो उसे केन्द्र अत्याचार और शोषण का शिकार बनाता है। ऐसा राजनीतिक प्रतिद्विता के कारण होता है जिससे देश के हो हिस्से, उन राज्यों की दशा खराब होने लगती है।
वैसे हर राज्य के मुख्य नीति-निर्देशक सिद्धान्त जनता को बेहतर शासन देने से सम्बन्धित होता है।
5. आधुनिक काल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर– प्राय: अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध को (1750 ई. के बाद) आधुनिक काल का प्रारंभ माना जाता है। आधुनिक शब्द का इस्तेमाल जब समय सन्दर्भ में किया जाता है तो इसका अर्थ अतीत का सबसे नजदीक का हिस्सा होता है जो पिछले लगभग तीन सौ वर्षों से संबंधित है।
6. क्या आप भारतीय इतिहास को समझने के इस तरीके से सहमत हैं ? कक्षा में चर्चा करें।
उत्तर– कक्षा में चर्चा स्वयं करना है आपको । नहीं, मैं भारतीय इतिहास को समझने के इस तरीके से सहमत नहीं हूँ। धर्म के आधार पर किसी भू-भाग की शासन-व्यवस्था, आम जनता का जीवन या वहाँ के इतिहास को समझने की कोशिश करना मेरी दृष्टि से गलत है। किसी फालखंड को धर्मों के आधार पर बाँटना मेरी दृष्टि से संकीर्ण विचारधारा है।
7. इतिहास को हम अलग-अलग कालखंडों में बाँटने की कोशिश क्यों करते हैं? चर्चा करें।
उत्तर– इतिहास एक अति व्यापक विषय व विचार-क्षेत्र है। अतः अध्ययन की सुविधा से व विचार-विनिमय की सुविधाओं के लिए हम इतिहास को भिन्न कालखंडों में बाँटने की कोशिश करते हैं।
8. स्रोतों का स्मरण करते हुए निम्न तालिका को भरने का प्रयास करें-
प्राचीन काल:-
स्रोत-1. शिलालेख
2.
3.
4.
5.
उत्तर,-
1.  शिलालेख
2. चट्टानें
3. सिक्के
4. ताम्रपत्र
5. गुफा चित्र
मध्यकाल:-
स्रोत -1 पांडुलिपि
2
3
4
5
उत्तर:-
1. पांडू लिपि
2. अभिलेख
3. मिनीचेयर( लघु चित्र)
4. साहित्यिक रचनाएं
5. ऐतिहासिक लेखन संस्मरण व यात्रा वृतांत
9. आप अपने जिले के रिकार्ड रूम में जाकर अपने जिले से संबधित बया-क्या जानकारियाँ प्राप्त करना चाहेंगे? इन जानकारियों को एक सूची बनाएँ ।
उत्तर-मैं अपने जिले के रिकार्ड रूम से इन जानकारियों को प्राप्त करना चाहूँगा-
(1) मेरे जिले को आर्थिक विकास दर क्या है?
(2) यहाँ कितने प्रतिशत लोग साक्षर हैं।
(3) निरक्षरों का प्रतिशत क्या है?
(4) स्वास्थ्य के क्षेत्र में जन-धनत्य के अनुपात में सरकारी सुविधाएँ किस प्रतिशत में हैं तथा किन हालात में है ?
(5) गरीबी-रेखा के नीचे रहने वाले लोग कितने है?
(6) अचानक जिनकी संपत्ति कई गुना बढ़ गई उनकी आमदनी का जरिया क्या है तथा क्या उन्होंने सरकार को उचित टैक्स दिया है?
10. आत्मकथा एवं जीवनी के संबंध में अपने शिक्षक की सहायता से चर्चा करें । 
उत्तर-अपनी स्वयं की कथा लिखना जहाँ ‘आत्मकथा’ कहलाती है, वहीं अन्य किसी व्यक्ति के जीवन की कथा का संकलन ‘जीवनी’ कहलाती है।
11. अगर आपने कुछ कहानियों एवं ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्म देखी है तो वर्ग में साथियों के बीच चर्चा करें।
उत्तर-हाँ मैंने सिनेकार रिचर्ड एटेनबरो की फिल्म ‘गांधी’ देखी थी। उसमें भारतीय जीवन की बदहाली और उसके संपर्क में आकर विकसित होते, एक मानव से महामानव के रूप में विकसित होते, संघर्षशील, विचारवान और ऊर्जावान व्यक्ति के रूप में गाँधीजी का चित्रण व मूल्यांकन किया गया है।
12. कैमरे का आविष्कार कब हुआ और ऐतिहासिक स्रोत के रूप में फोटो का क्या महत्व है? (पृष्ठ-10)
उत्तर-करीब 200 साल पहले कैमरे का आविष्कार हुआ था। भारत में इसका इस्तेमाल 1850 ई. के दौरान शुरू हुआ। मुगल साम्राज्य के अंतिम वादशाह बहादुरशाह द्वितीय का फोटो  उपलब्ध है। वह पहला और आखिरी मुगल बादशाह था जिसकी फोटो कैमरे से खींची गई थी।
ऐतिहासिक स्रोत के रूप में व्यक्तियों, स्थानों और वस्तुओं के फोटो बहुत उपयोगी जीवित होते हैं। इससे इतिहास को समझने में मदद मिलती है।
अभ्यास
आइए फिर से याद करें-
1. रिक्त स्थानों को भरिए-
(क) पूँजीपतियों का मुख्य उद्देश्य था अधिक-से-अधिक,______ कमाना
उत्तर-मुनाफा।
(ख) पंद्रहवीं शताब्दी में एक नये आंदोलन की शुरुआत हुई जिसे—— कहते हैं।
उत्तर-पुनर्जागरण।
(ग) मशीनों से वस्तुओं के उत्पादन की प्रक्रिया को ——- क्रांति कहते हैं।
उत्तर- औद्योगिक 
(घ)——-  में सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाता है।
उत्तर-अभिलेखागारों।
(ङ) समय के साथ देश और राज्य की—— सीमाओं में परिवर्तन होते रहते हैं।
उत्तर-भौगोलिक।
2. सही और गलत बताइए।
(क) वैज्ञानिक पद्धति का अर्थ है-प्रश्न प्रस्तुत कर प्रयोग द्वारा ज्ञान प्राप्त करना ।
उत्तर-सही।
(ख) अंग्रेज इतिहासकार जेम्स मिल का भारतीय इतिहास का धर्म के आधार पर बाँटना उचित था।
उत्तर-गलत।
(ग) ‘अमरीकी स्वतंत्रता संग्राम’ के बाद वहाँ के लोगों ने गणतंत्र प्रणाली की शुरूआत नहीं की।
उत्तर-गलत।
(घ) ऐतिहासिक स्रोतों से एक आम आदमी के बारे में भी जानकारी मिलती है।
उत्तर-गलत।
(ङ) आजादी के पहले हमारे देश की जो भौगोलिक सीमा की आजादी के बाद भी वही रह गई।
उत्तर-गलत
आइए विचार करें-
(i) मध्यकाल और आधुनिक काल के ऐतिहासिक स्रोतों में आप क्या फर्क पाते हैं ? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर-मध्यकाल के ऐतिहासिक स्रोत जैसे अभिलेख पत्थरों, चट्टानों, ताम्रपत्रों, पाण्डुलिपियों की मदद से कुछ खास लोगों, विशेषतः शासकों के बारे में कुछ ही जानकारियाँ मिलती हैं। पर आधुनिक काल में ऐतिहासिक स्रोतों की संख्या अधिक व व्यापक जानकारी वाले और अधिक प्रमाणिक हो गये । आधुनिक युग में इन स्रोतों की संख्या और विविधता में और भी वृद्धि हुई ।
एक स्पष्ट उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। मध्यकाल में हाथ से पाण्डुलिपियाँ बनती थीं जिनकी संख्या बेहद सीमित होती थी। पर आधुनिक युग में छापेखाने (प्रेस) के आविष्कार से सरकारी विभाग की कार्रवाइयों तक के दस्तावेज की कई प्रतियाँ बनना संभव हो गया। इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतियाँ को अभिलेखागारों एवं पुस्तकालयों में देखा जा सकता है। अब
ये भी बड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत साबित हो रहे हैं।
(ii) जेम्स मिल ने भारतीय इतिहास को जिस प्रकार काल खंडों में बाँटा, उससे आप कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर-1817 ई. में स्कॉटलैंड के अर्थशास्त्री, इतिहासकार और राजनीतिक दार्शनिक जेम्स मिल ने तीन खंडों में (हिस्ट्री ऑफ ब्रिटिश इंडिया) ब्रिटिश भारत का इतिहास नामक एक पुस्तक लिखी। अपनी इस किताब में जेम्स मिल ने भारत के इतिहास को हिन्दू-मुस्लिम और ब्रिटिश इन तीन काल खंडों में बाँटा । यह विभाजन इस विचार पर आधारित था कि शासकों का धर्म ही
एकमात्र महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परिवर्तन होता है। कालखंड के इस निर्धारण को उस वक्त लोगों ने मान भी लिया। पर ऐसा करना गलत था। किसी भी स्थान या देश के इतिहास का निर्धारण मात्र उस देश के शासक के धर्म पर नहीं होता। इसके पीछे कई कारक होते हैं जिनमें आर्थिक, सांस्कृतिक, वैचारिक और राजनीतिक आदि कारण शामिल होते हैं। जेम्स मिल का भारतीय इतिहास के कालखंड को बांटने का जो आधार है यानी शासकों का धर्म ही ऐतिहासिक परिवर्तन का आधार है—बेहद दकियानूसी विचार है और मैं ऐसे संकीर्ण विचार से सहमत नहीं हूँ।
(iii) सरकारी दस्तावेजों को हम कैसे और कहाँ-कहाँ सुरक्षित रख सकते हैं ?
उत्तर-अभिलेखागारों एवं पुस्तकालयों में हम सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रख सकते हैं। साथ ही तहसील के दफ्तर, कलेक्टरेट, कमिश्नर के दफ्तर, कचहरी आदि के रिकॉर्ड रूमों में भी सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाता है। अब तो सीडी बनाकर भी सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाने लगा है।
(iv) यूरोप में हुए परिवर्तन किस प्रकार आधुनिक काल के निर्माण में सहायक हुए?
उत्तर-आधुनिक काल के निर्माण में, यूरोप में हुए परिवर्तनों ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूरोप में ‘पुनर्जागरण’ का आंदोलन फैला । इसके तहत लोगों ने आंदोलन कर स्वतंत्र रूप से सोचना शुरू किया और राजनीतिक व धार्मिक सत्ता के खिलाफ आवाज उठाकर गणतंत्र की
ओर दिशा बढ़ाई। इसका असर विश्व के अन्य भागों में भी हुआ। जिसके परिणमस्वरूप आधुनिक युग के कई देशों में गणतांत्रिक सरकारों की स्थापना संभव हुई। साथ ही, यूरोप में शुरू हुई औद्योगिक क्रान्ति का असर पूरे विश्व पर पड़ा । लगभग हर देश इससे प्रभावित हुआ । इससे अन्य देशों में भी औद्योगिकरण हुआ जिससे शहरों की संख्या बढ़ने लगी। व्यापार फलने-फूलने लगा और मशीनों पर और उससे बने सामानों पर लोग निर्भर होने लगे। इन यूरोपीय घटनाओं ने आधुनिक काल की प्रगतिशील दुनिया के निर्माण में महती भूमिका निभाई।
आइए करके देखें-
(i) भारत में पहली और आखिरी जनगणना कब हुई पता करें ? इसके द्वारा कुछ ऐसे तथ्यों एवं सूचनाओं का संकलन करें जिसका उपयोग हम ऐतिहासिक स्रोत के रूप में कर सकें।
 उत्तर-(यह परियोजना कार्य है। अपने शिक्षक की सहायता से आप स्वयं करें।)
भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी जबकि आखिरी जनगणना 2011 में हुई।

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