12-political-science

bihar board class 12 political science | समकालीन दक्षिण एशिया

image

bihar board class 12 political science | समकालीन दक्षिण एशिया

                            (CONTEMPORARY SOUTH ASIA)
                                          याद रखने योग्य बातें
• भारत की विदेश नीति : यह परस्पर विश्वास, सौहार्द्र और सहयोग पर आधारित संबंध
स्थापित करने की है।
• भारत एवं पड़ोसी राष्ट्र : अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने का हमेशा
से इच्छुक रहा है और इसके लिए प्रयत्न भी करता रहा है।
• शीतयुद्ध के बाद पाकिस्तान की दो लोकतांत्रिक सरकारों को नेतृत्व प्रदान करने
वाले नेता थे : (i) बेनजरी भुट्टो, (ii) नवाज शरीफ।
• दक्षिण एशियाई देशों में आन्तरिक संघर्ष के सूचक तीन तथ्य : (i) आन्तरिक
विद्रोह, (ii) जातीय या साम्प्रदायिक संघर्ष तथा (ii) संसाधनों के बंटवारे के मामले।
• गणतंत्र : वह देश जिसका अध्यक्ष जनता या जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा
निर्वाचित होता है।
• बहुदलीय लोकतंत्रीय प्रणाली : जिस देश में दो से ज्यादा राजनीतिक दल लोकतंत्रीय
शासन प्रणाली के लिए कार्यरत है।
• संसदीय प्रणाली: जिस देश की शासन व्यवस्था में संसद सर्वोच्च हो।
• भारत और पाकिस्तान से ब्रिटिश राज की समाप्ति : 14 अगस्त, 1947
• पाकिस्तान सिएटो तथा सेटों में शामिल : 1945-55
• भारत और चीन के बीच सीमा-विवाद : 1962
• बांग्लादेश के नेताओं द्वारा आजादी की उद्घोषणा : मार्च 1971
• भारत-पाक युद्ध; बांगलदेश की मुक्ति : दिसंबर 1971
• भारत ने परमाणु-परीक्षण किए : मई 1974
• पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कूटनयिक संबंध बहाल हुए : 1976
• पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में लोकतंत्र की बहाली : 1988-91
• गंगा नदी के पानी में हिस्सेदारी के मसले पर भारत और बांग्लादेश के बीच
फरक्का संधि पर हस्ताक्षर हुए : दिसंबर 1996
• भारत और पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किए : मई 1998
• भारत और श्रीलंका ने मुक्त व्यापार संधि पर हस्ताक्षर किए : दिसंबर 1998
• भारत और पाकिस्तान के बीच करगिल-युद्ध : जून-जुलाई 1999
• पाकिस्तान का दूसरा सैनिक तानाशाह : याहिया खान।
• पाक के समक्ष बंग्लादेश संकट : 1971
• स्वतंत्र वांग्लादेश का निर्माण : 1971
• 2006 से पूर्व विश्व में एकमात्र हिन्दू राज्य : नेपाल।
• नेपाल की संसद (राजा द्वारा) भंग की गयी : 2002
• दुर्गा थापा : नेपाल में लोकतंत्र समर्थक नेता।
• लिट्टे का नियंत्रण : श्रीलंका के उत्तर पूर्वी भाग पर।
               एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक एवं अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न एवं उनके उत्तर
                                                  वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. देशों की पहचान करें-
(क) राजतंत्र, लोकतंत्र-समर्थक समूहों और अतिवादियों के बीच संघर्ष के कारण राजनीतिक
अस्थिरता का वातावरण बना।
(ख) चारों तरफ भूमि से घिरा देश।
(ग) दक्षिण एशिया का वह देश जिसने सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण
किया।
(घ) सेना और लोकतंत्र-समर्थक समूहों के बीच संघर्ष में सेना ने लोकतंत्र के ऊपर बाजी
मारी।
(ङ) दक्षिण एशिया के केन्द्र में अवस्थित। इन देशों की सीमाएँ दक्षिण एशिया के अधिकांश
देशों से मिलती हैं।
(च) पहले इस द्वीप में शासन की बागडोर सुल्तान के हाथ में थी। अब वह एक गणतंत्र है।
(छ) ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था के कारण इस देश को गरीबी
कम करने में मदद मिली है।
(ज) एक हिमालयी देश जहाँ संवैधानिक राजतंत्र है। यह देश भी हर तरफ से भूमि से
घिरा है।                                                  [NCERT T.B.Q.7]
उत्तर-(क) नेपाल, (ख) नेपाल, (ग) श्रीलंका, (घ) पाकिस्तान, (ङ) भारत, (च)
मालदीव, (छ) बांग्लादेश, (ज) भूटान।
2. दक्षिण एशिया के बारे में निम्नलिखित में कौन-सा कथन गलत है?
(क) दक्षिण एशिया में सिर्फ एक तरह की राजनीतिक प्रणाली चलती है।
(ख) बांग्लादेश और भारत ने नदी-जल की हिस्सेदारी के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर
किए हैं।
(ग) ‘साफ्टा’ पर हस्ताक्षर इस्लामाबाद के 12वें सार्क सम्मेलन में हुए।
(घ) दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका महत्त्वपूर्ण भूमिका
निभाते हैं।                                                                [NCERT T.B.Q.7]
उत्तर-(क) दक्षिण एशिया में सिर्फ एक तरह की राजनीतिक प्रणाली चलती है।
3. दक्षिण एशिया का वह कौन देश है जिसने सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का
उदारीकरण किया?                                                     [B.M. 2009A]
(क) श्रीलंका
(ख) बांग्लादेश
(ग) पाकिस्तान
(घ) भूटान                                   उत्तर-(क)
4. सार्क अथवा दक्षेस क्या है?                      [B.M. 2009A]
(क) यह राष्ट्रसंघ लीग और नेशन्स का एक अंग था जो समाप्त हो गया है।
(ख) यह संयुक्त राष्ट्रसंघ की एक एजेंसी है।
(ग) यह एक दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन अथवा संघ है।
(घ) यह भारत और चीन का सैन्य गुट है।
                                                उत्तर-(ग)
5. 1972 का शिमला समझौता किन दो देशों के बीच हुआ? [EM.2009A]
(क) भारत व नेपाल
(ख) भारत व पाकिस्तान
(ग) भारत व बांग्लादेश
(घ) पाकिस्तान व बांग्लादेश            उत्तर-(ख)
6. दक्षिण एशिया के किस राज्य में माओवादियों ने उथल-पुथल मचाई?     [B.M.2009A]
(क) भारत
(ख) पाकिस्तान
(ग) बांग्लादेश
(घ) नेपाल                                        उत्तर-(घ)
7. पंचायत व्यवस्था किस राज्य में स्थापित की गई?              [B.M. 2009A]
(क) बांग्लादेश
(ख) पाकिस्तान
(ग) नेपाल
(घ) भूटान                                      उत्तर-(ग)
8. भारत व पाकिस्तान के बीच ताशकन्द का समझौता कराने में किस सोवियत नेता
ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई?                                        [B.M. 2009A]
(क) स्टाल्नि
(ख) खुश्चेव
(ग) कोसीजिन
(घ) वेजनेव                                     उत्तर-(ग)
                                             अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
1. बीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में भारत और पाकिस्तान में ऐसी कौन-सी घटना हुई
जिससे सम्पूर्ण विश्व की दृष्टि में दक्षिण एशिया महत्त्वपूर्ण हो उठा?
What event had taken place in India and Pakistan during the last years of
the twentieth century, which drew the attention of entire world toward
South Asia, as an important region?
उत्तर-बीसवीं सदी के आखिरी सालों में जब भारत और पाकिस्तान ने खुद को परमाणु
शक्ति संपन्न राष्ट्रों की बिरादरी में बैठा लिया तो यह क्षेत्र अचानक पूरे विश्व की नजर में महत्त्वपूर्ण
हो उठा। स्पष्ट ही विश्व का ध्यान इस इलाके में चल रहे कई तरह के संघर्षों पर गया। इस क्षेत्र
के देशों के बीच सीमा और नदी जल के बँटवारे को लेकर विवाद कायम है।
2. दक्षिण एशिया की दो प्रमुख विशेषताओं-एक चिन्ताएँ उत्पन्न करने वाली तथा
एक प्रसन्नताजनक, का उल्लेख कीजिए।
Mention two main features related with south Asia-one worries creator
and one pleasure producer.
उत्तर-दक्षिण एशियाई क्षेत्र में आंतरिक विद्रोह, जातीय संघर्ष और संसाधनों के बँटवारे को
लेकर होने वाले झगड़े भी हैं। इन वजहों से दक्षिण एशिया का इलाका बड़ा संवेदनशील है और
अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि आज विश्व में यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से चिंता जगाने वाला
क्षेत्र है। साथ ही एक बात और है। इस इलाके के बहुत-से लोग इस तथ्य की निशानदेही करते हैं
कि दक्षिण एशिया के देश अगर आपस में सहयोग करें तो यह क्षेत्र विकास करके समृद्ध बन
सकता है।
3. दक्षिण एशिया के देशों की कुछ ऐसी विशेषताओं को बताइए जो इस क्षेत्र के देशों
में समान रूप से लागू होती हैं परंतु पश्चिमी एशिया अथवा दक्षिण पूर्व एशिया के
देशों पर लागू नहीं होती।
Identify some features common to all the South Asiancountries but different from countries in West Asia or South east Asia.
उत्तर-यह एक ऐसा क्षेत्र है कि जहाँ के सभी देशो में सद्भाव और शत्रुता, आशा और निराशा और पारस्परिक शंका तथा विश्वास साथ-साथ बसते हैं।
4. दक्षिण एशिया क्या है? (What is Southern Asia?)
उत्तर-सामान्यतया दक्षिण एशिया में नौ देशों को शामिल किया जाता है। इनमें सात
देश-(i) बांग्लादेश, (ii) भूटान, (iii) भारत, (iv) मालदीव, (v) नेपाल, (vi) पाकिस्तान
और, (vii) श्रीलंका को शामिल किया जाता है।
उत्तर की विशाल हिमालय पर्वत-श्रृंखला, दक्षिण का हिंदमहासागर, पश्चिम का अरब
सागर और पूरब में मौजूद बंगाल की खाड़ी से यह इलाका एक विशिष्ट प्राकृतिक क्षेत्र के रूप में
नजर आता है। यह भौगोलिक विशिष्टता ही इस उप-महाद्वीपीय क्षेत्र की भाषाई, सामाजिक तथा
सांस्कृतिक अनूठेपन के लिए जिम्मेदार है। इस क्षेत्र की चर्चा में जब-तब अफगानिस्तान और
म्यांमार को भी शामिल किया जाता है। चीन इस क्षेत्र का एक प्रमुख देश है लेकिन चीन को दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता।
5. दक्षिण एशिया को परिभाषित कीजिए? (Define the term South Asia.)
उत्तर-दक्षिण एशिया प्रदेश प्रयोग (इस अध्ययन अथवा पुस्तक के अनुसार) सात देशों
(बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका) के लिए किया गया है।
इस तरह परिभाषित दक्षिण हर अर्थ में विविधताओं से भरा-पूरा इलाका है फिर भी भू-राजनीतिक धरातल पर यह एक क्षेत्र है।
6. भारत और श्रीलंका की एक-सी विशेषताओं का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
Give a brief desention of common features related with adminstrative
system of India and Sri Lanka.
उत्तर-(i) भारत और श्रीलंका दोनों ही ब्रिटेन के अधीन रहे। दोनों को लगभग कुछ ही
महीनों के अन्तर के साथ क्रमश: 1947 तथा 1948 में आजादी मिली। (i) भारत और श्रीलंका में ब्रिटेन से आजाद होने के बाद, लोकतांत्रिक व्यवस्था सफलतापूर्वक कायम है।
भारत के लोकतंत्र की बहुत सारी सीमाओं की तरफ इंगित किया जा सकता है। लेकिन हमें
याद रखना चाहिए कि एक राष्ट्र के रूप में भारत हमेशा लोकतांत्रिक रहा है। यही बात श्रीलंका
पर भी लागू होती है।
7. पाकिस्तान और बांग्लादेश के एक जैसे शासकीय अनुभवों का उल्लेख कीजिए।
Mention the common (or same) administrative experiences realised by both Pakistan and Bangladesh.
उत्तर–पाकिस्तान और बांग्लादेश में लोकतांत्रिक और सैनिक दोनों तरह के नेताओं का
शासन रहा है। शीतयुद्ध के बाद के सालों में बांग्लादेश में लोकतंत्र कायम रहा है। पाकिस्तान में
शीतयुद्ध के बाद के सालों में लगातार दो लोकतांत्रिक सरकारें बनीं। पहली सरकार बेनजीर भुट्टो
के नेतृत्व में और दूसरी नवाज शरीफ के नेतृत्व में कायम हुई लेकिन इसके बाद 1999 में पाकिस्तान में सैनिक तख्तापलट हुआ। तब से यहाँ सैनिक-शासन है।
8. नेपाल में कैसी शासन व्यवस्था थी? बांग्लादेश एवं नेपाल के आधार पर दक्षिण
एशिया में किस तरह की शासकीय व्यवस्था के लिए प्रेम पाते हैं?
What type of administrative system was in Nepal? From the experiences
of Bangladesh and Napal what type of love we find in the entire region of
South Asia for administrative system?
उत्तर -सन् 2006 तक नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र था और इस बात का खतरा बराबर
बना हुआ था कि राजा अपने हाथ में कार्यपालिका की सारी शक्तियाँ ले लेगा लेकिन, 2006 में
एक सफल जन-विद्रोह हुआ और यहाँ लोकतंत्र की बहाली हुई। राजा की हैसियत न के बराबर रह गई। बांग्लादेश और नेपाल के अनुभवों के आधार पर हम कह सकते हैं कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्रीय शासन व्यवस्था एक स्वीकृत मूल्य बन चला है।
9. दक्षिण एशिया के दो सर्वाधिक लघु देशों में किस तरह के राजनीतिक बदलाव
दिखाई पड़ रहे हैं? इनका उल्लेख कीजिए।
What type or Political changes are being seen in the two smallest countries of the South Asia? Mention these changes.
उत्तर-दक्षिण एशिया के दो सबसे छोटे देशों में भी ऐसे ही बदलाव की बयार बह रही है।
भूटान में अब भी राजतंत्र है लेकिन यहाँ के राजा ने भूटान में बहुदलीय लोकतंत्र स्थापित करने
की योजना की शुरुआत कर दी है।
दूसरा द्वीपीय देश मालदीव 1968 तक सल्तनत हुआ करता था। 1968 में यह एक गणतंत्र बना
और यहाँ शासन की अध्यक्षात्मक प्रणाली अपनायी गयी। 2005 के जून में मालदीव की संसद ने
बहुदलीय प्रणाली को अपनाने के पक्ष में एकमत से मतदान किया। मालदीव में मालदीवियन
डेमोक्रेटिक पार्टी (एम.डी.पी.) का राजनीतिक मामलों में दबदबा है। 2005 के चुनावों के
बादमालदीव में लोकतंत्र मजबूत हुआ है क्योंकि इस चुनाव में विपक्षी दलों को कानूनी मान्यता दे
दी गई है।
10. 1965 के भारत-पाक संघर्ष के क्या कारण थे?
What was the causes of Indo-Pak conflict in 1965?    [B.M.2009A]
उत्तर-भारत और पाकिस्तान में संघर्ष विभाजन के साथ ही शुरू हो गया था। 1965 में
पाकिस्तान ने भारत पर हमले की योजना इस उद्देश्य से बनायी थी कि कश्मीर में बहुसंख्यक
मुस्लिम जनसंख्या का समर्थन उनकी सेनाओं को प्राप्त होगा परंतु यह आशा निर्मूल सिद्ध हुई।
नेहरू जी के उत्तराधिकारी शास्त्री जी का व्यक्तित्व पाकिस्तानी शासकों द्वारा दुर्बल समझ लिया
गया परंतु यह भी गलत साबित हुआ।
11. ताशकंद समझौते पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Write a short note on the Taskand Agreement.
                                           अथवा,
ताशकंद समझौता क्या है?                              [Board Exam.2009A]
उत्तर-ताशकंद समझौता (Taskand Agreement).-भारत और पाक के 1965 के
युद्ध के बाद दोनों के बीच एक संधि हुई है जिसे ताशकंद समझौता कहा गया। ताशकंद समझौता
सोवियत संघ के प्रभाव से हुआ था। इस समझौते पर भारत के प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री
तथा पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खाँ के हस्ताक्षर हुए और उसी 11 जनवरी, 1966 को लाल
बहादुर शास्त्री का हृदय गति रुकने से निधन हो गया।
12. बांग्लादेश के उदय के कारण बताइए।
Mention the causes of the emergence of Bangladesh.
उत्तर-अयूब खाँ के ‘बुनियादी लोकतंत्र’ के प्रति पाकिस्तानियों का मोहभंग हो चुका था।
पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान की भौगोलिक दूरी के कारण दोनों भागों की संस्कृति में भी अंतर
था। 1970 से चुनाव के बाद पाकिस्तान के सैनिक शासकों ने बंगालियों की न्यायोचित माँगों को
ठुकरा दिया था। 1971 में वहाँ गृहयुद्ध शुरू हो गया था लाखों शरणार्थी भारत आ गए। भारत ने
मानवीय आधार पर उनको शरण दी। इसके विरोधस्वरूप 3 दिसम्बर, 1971 को पाकिस्तान ने
भारत के हवाई अड्डों पर आक्रमण कर दिया भारतीय सेना ने बड़े वेग से जवाबी कार्यवाही की।
पाकिस्तान युद्ध हार गया और उसका पूर्वी बंगाल का भाग स्वतंत्र होकर बंगला देश के रूप में उदित हुआ।
13. शिमला समझौते की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए।        [B.M.2009A]
Mention two main characteristics of Shimla Agreement.
उत्तर―शिमला समझौते की दो प्रमुख विशेषताएँ अग्रलिखित हैं-(1) नियंत्रण रेखा से
दोनों देशों की सेनाओं की वापसी की जाए अर्थात् जीता हुआ प्रदेश वापस किया जाए। (2) भारत द्वारा बन्दी बनाए गए एक लाख सैनिकों की रिहाई। (3) पाकिस्तान द्वारा बंग्लादेश को मान्यता दी जाए।
14. कोलम्बो योजना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
Write a short note on ‘Colombo Plan’.
उत्तर-1962 की सैनिक भिड़न्त के कुछ समय बाद ही सीमा विवाद के हल के लिए छः
अफ्रो-एशियाई देशों ने कोलम्बो योजना पेश की। इसमें तत्कालीन मौजूदा स्थिति को समझौते का
आधार प्रदान करने पर बल दिया गया तथा चीन से कहा गया कि वह पश्चिमी क्षेत्र से अपनी
सेना 20 किमी पीछे हटा ले और इस क्षेत्र में दोनों देशों का नागरिक प्रशासन कायम हो। पूर्वी क्षेत्र
में यथास्थिति का सुझाव दिया गया। चीन ने इस योजना को मानने से इंकार किया यद्यपि भारत
मानने को तैयार था।
15. भारत-बांग्लादेश के बीच विवाद के मुख्य मुद्दे क्या हैं?
What are the main points of conflict between India and Bangladesh?
                                                                                 [B.M. 2009A]
उत्तर-भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-
(i) नदी जल विवाद, (ii)शरणार्थियों की समस्या, (iii) बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में
अवैध घुसपैठ, (iv) कांँटेदार बाड़ का विवाद, (v) चकमा शरणार्थियों की वापसी की समस्या।
16. सार्क के सदस्य देशों के नाम बताइए।
Mention the names of countries belonging to SAARC.
उत्तर-सार्क देशों में भारत, मालदीव, पाकिस्तान, बांग्ला देश, श्रीलंका, भूटान एवं नेपाल
सम्मिलित हैं। इनका मुख्यालय काठमांडू (नेपाल) में हैं।
17. सार्क को प्रभावशाली बनाने के लिए भारत द्वारा किए गए दो प्रयासों को बताइए।
State any two efforts made by India is making SAARC on effective
organisation.
उत्तर-सार्क की स्थापना और इसे सफल बनाने में भारत की अहम् भूमिका है। सार्क के
कार्यों में भारत ने अपनी क्षमता के अनुरूप अन्य सदस्यों की अपेक्षा अधिक सक्रिय भाग लिया
है और इसे दृढ़ बनाने के लिए सृजनात्मक भूमिका निभाई है। जब मालदीव पर कुछ लुटेरों ने
आक्रमण किया और वहाँ तख्ता पलटने की कोशिश की तो भारत ने शीघ्र ही सैनिक सहायता
भेजकर उसकी सहायता की।
तीसरे शिखर सम्मेलन में जब एक संरक्षित खाद्यान्न भंडार बनाए जाने का प्रस्ताव आया
तो भारत ने 1,53,200 टन खाद्यान्न भंडार का योगदान दिया जो कुल खाद्यान्न भंडार का
75% है।
                                                 लघु उत्तरीय प्रश्न
1. “दक्षिण एशियाई देशों की जनता लोकतंत्र की आकांक्षाओं की सहभागी है।” इस
कथन की व्याख्या कीजिए।
“The people of southern Asian countries of the partners of aspirations of
democracy.” Explain this statement.
उत्तर-(1) नेपाल एवं भूटान में संवैधानिक राजतंत्र का विरोध हुआ तथा लोकतंत्र की माँग
अनेक बार उठी। बांग्लादेश और पाकिस्तान में सैनिक शासन का विरोध हुआ तथा लोकतंत्र की
माँग निरन्तर उठती रहती है। भारत और श्रीलंका अपनी आजादी से ही लोकतंत्रीय देश बने हुए
हैं। संक्षेप में दक्षिण एशिया में लोकतंत्र का रिकार्ड मिला-जुला रहा है।
(2) इसके बावजूद दक्षिण एशियाई देशों की जनता लोकतंत्र की आकांक्षाओं में सहभागी है।
इस क्षेत्र के पाँच बड़े देशों में हाल ही में एक सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण से यह बात जाहिर
हुई कि इन पांँचों देशों में लोकतंत्र का व्यापक जन-समर्थन हासिल है।
(3) इन देशों के आम नागरिक, चाहे वे धनी हों या गरीब अथवा उनका धर्म कोई भी
हो-लोकतंत्र को अच्छा मानते हैं और प्रतिनिधित्वमूलक लोकतंत्र की संस्थाओं को समर्थन करते हैं।
(4) इन देशों के लोग शासन की किसी और प्रणाली की अपेक्षा लोकतंत्र को वरीयता देते हैं
और मानते हैं कि उनके देश के लिए लोकतंत्र ही ठीक है। ये निष्कर्ष बड़े महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि
पहले से माना जाता रहा है। कि लोकतंत्र सिर्फ विश्व के धनी देशों में फल-फूल सकता है। इस
लिहाज से देखें तो दक्षिण एशिया के लोकतंत्र के अनुभवों से लोकतंत्र की वैश्विक कल्पना का
दायरा बढ़ा है।
2. श्रीलंका के जातीय संघर्ष में किनकी भूमिका प्रमुख है? उनकी भूमिका पर
विचार-विमर्श कीजिए। (Name the principal players in the ethic conflict in
Sri Lanka. Discuss their role.)
उत्तर-(1) श्रीलंका के जातीय संघर्ष में भारतीय मूल के तमिल प्रमुख भूमिका निभा रहे
हैं। उनके संगठन लिट्टे की हिंसात्मक कार्यवाहियों तथा आंदोलन के कारण श्रीलंका को जातीय
संघर्ष का सामना करना पड़ता जिसकी मांग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया
जाये।
(2) श्रीलंका की राजनीति पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय का दबदबा रहा है। तथा तमिल
सरकार एवं नेताओं पर उनके (तमिलों के हितों की उपेक्षा करने का दोषारोपण करते रहे हैं।
(3) तमिल अल्पसंख्यक हैं। ये लोग भारत छोड़कर श्रीलंका आ बसी एक बड़ी तमिल आबादी
के खिलाफ हैं। तमिलों का बसना श्रीलंका के आजाद होने के बाद भी जारी रहा। सिंहली राष्ट्रवादियों का मानना था कि श्रीलंका में तमिलों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जानी चाहिए क्योंकि श्रीलंका सिर्फ सिंहली लोगों का है।
(4) तमिलों के प्रति उपेक्षा भरे बर्ताव से एक उग्र तमिल राष्ट्रवाद की आवाज बुलंद हुई।
1983 के बाद से उग्र तमिल संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम’ (लिट्टे) श्रीलंकाई
सेना के साथ सशस्त्र संघर्ष कर रहा है। इसने ‘तमिल ईलम’ यानी श्रीलंका के तमिलों के लिए एक
अलग देश की मांँग की है। श्रीलंका के उत्तर पूर्वी हिस्से पर लिट्टे का नियंत्रण है।
3. भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में क्या समझौते हुए?
Mention some of the recent agreements between India and Pakistan.
                                                                     [NCERT T.B.Q.6]
उत्तर―(1) 1960 में विश्व बैंक की सहायता से भारत और पाकिस्तान ने सिंधु-जलसंधि
पर हस्ताक्षर किए और यह संधि भारत-पाक के बीच अनेक सैन्य संघर्षों के बावजूद अब (मार्च,
2007) में भी कायम है। यद्यपि सिंधु जल संधि की व्याख्या और नदी-जल के प्रयोग को लेकर
अभी भी कुछ छोटे-मोटे विवाद हैं।
(2) अभी हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मामलों के बारे में वार्ताओं
के दौर चल रहे है। हालांकि भारत और पाकिस्तान के संबंध कभी खत्म न होने वाले झगड़ों और
हिंसा की एक कहानी जान पड़ते हैं फिर भी तनाव को कम करने और शांति बहाल करने के लिए
इन देशों के बीच लगातार प्रयास हुए हैं।
(3) दोनों देश युद्ध के जोखिम कम करने के लिए विश्वास बहाली के उपाय करने में सहमत
हो गये हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और महत्वपूर्ण हस्तियां दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती का माहौल बनाने के लिए एकजुट हुई हैं। दोनों देशों के नेता एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने और दोनों के बीच मौजूद बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सम्मेलनों में भेंट करते हैं। पिछले पाँच वर्षों के दौरान दोनों देशों के पंजाब वाले हिस्से के बीच कई बस-मार्ग खुले हैं। अब वीसा आसानी से मिल जाता है।
(4) 1971 के युद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों को सामान्य बनाने के लिए 3
जुलाई, 1972 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच शिमला में एक समझौता हुआ। दोनों देशों
ने यह करार किया कि भारत व पाकिस्तान के बीच डाक-तार सेवा फिर से चालू की जाएगी तथा
आर्थिक व सांस्कृतिक क्षेत्रों में दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की मदद करेंगे।
4. ऐसे दो मसलों के नाम बताएं जिन पर भारत-बंग्लादेश के बीच आपसी सहयोग
है और इसी तरह दो ऐसे मसलों के नाम बताएँ जिन पर असहमति है।
Mention two areas each of co-operation and disagreement between India and Bangladesh?                            [NCERT T.B.Q.7]
उत्तर-(अ) भारत-बांग्लादेश के बीच दो आपसी सहयोग के मसले (Two areas
of co-operation between India and Bangladesh)-भारत और बांग्लादेश कई मसलों पर सहयोग करते हैं पिछले दस वर्षों के दौरान दोनों के बीच आर्थिक संबंध ज्यादा बेहतर हुए हैं। बांग्लादेश भारत के ‘पूरब चलो’ की नीति का हिस्सा है। इस नीति के अन्तर्गत म्यांमार के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क साधने की बात है। आपदा प्रबंधन और पर्यावरण के मसले पर भी दोनों देशों ने निरंतर सहयोग किया है। इस बात के भी प्रयास किए जा रहे हैं कि साझे खतरों को पहचान कर तथा एक-दूसरे की जरूरतों के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता बरतकर सहयोग के दायरे को बढ़ाया जाए।
(ब) भारत-बांग्लादेश के बीच आपसी असहमति के मसले (Areas of
Disagreement between India and Bangladesh)-बांग्लादेश भारत के बीच गंगा
और ब्रह्मपुत्र नदी के जल में हिस्सेदारी सहित कई मुद्दों पर मतभेद हैं। भारतीय सरकारों के बांग्लादेश से नाखुश होने के कारणों में भारत में अवैध अप्रवास पर ढाका के खंडन, भारत-विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी जमातों को समर्थन, भारतीय सेना को पूर्वोत्तर भारत में जाने के लिए अपने इलाके से रास्ता देने से बांग्लादेश के इंकार, ढाका के भारत को प्राकृतिक गैस निर्यात न करने के फैसले तथा म्यांमार को बांग्लादेशी इलाके से होकर भारत को प्राकृतिक गैस निर्यात न करने देने जैसे मसले शामिल हैं। बांग्लादेश की सरकार का मानना है कि भारतीय सरकार नदी-जल में हिस्सेदारी के सवाल पर क्षेत्रीय दादा की तरह बर्ताव करती है। इसके अलावा भारत की सरकार पर चटगाँव पर्वतीय क्षेत्र में विद्रोह को हवा देने; बांग्लादेश के प्राकृतिक गैस में सेंधमारी करने और व्यापार में बेईमानी बरतने के भी आरोप हैं।
5. दक्षिण एशिया में द्विपक्षीय सम्बन्धों को बाहरी शक्तियाँ कैसे प्रभावित करती है?
अपने विचार के विश्लेषण हेतु कोई उदाहरण लीजिए।
How are the external powers influencing bilateral relations in South Asia? Take any one example to illustrate your point.
उत्तर-(1) चाहे कोई क्षेत्र अपने को गैर-क्षेत्रीय शक्तियों से अलग रखने की कितनी भी
कोशिश करे उस पर बाहरी ताकतों और घटनाओं का असर पड़ता ही है। चीन और संयुक्त राज्य
अमेरिका दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम् भूमिका निभाते हैं। पिछले दस वर्षों में भारत और
चीन के संबंध बेहतर हुए हैं।
(2) चीन की रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के साथ है और यह भारत-चीन संबंधों में एक
बड़ी कठिनाई है। विकास की जरूरत और वैश्वीकरण के कारण एशिया महादेश के ये दो बड़े
देश ज्यादा नजदीक आये है। सन् 1991 के बाद से इनके आर्थिक संबंध ज्यादा मजबूत हुए हैं।
(3) शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमेरिकी प्रभाव तेजी से बढ़ा है। अमेरिका ने शीतयुद्ध
के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों से अपने संबंध बेहतर किए हैं। वह भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों में आर्थिक सुधार हुए हैं और उदार नीतियाँ अपनाई गई हैं। इससे दक्षिण एशिया एशियाई मूल के लोगों की संख्या अच्छी-खासी है। फिर, इस क्षेत्र
की जनसंख्या और बाजार का आकार भी भारी भरकम है। इस कारण इस क्षेत्र की सुरक्षा और शांति के भविष्य से अमेरिका के हित भी बंँधे हुए हैं।
6. भारत और नेपाल के मध्य सम्बन्धों पर एक टिप्पणी लिखिए।
Write a short note on India’s relations with Napal.
उत्तर-भारत-नेपाल के सम्बन्ध (Relation between India and Nepal)-
(1) भारत और नेपाल के बीच बड़े मधुर संबंध हैं और पूरी दुनिया में ऐसे संबंधों के इक्के-दुक्के
उदाहरण ही मिलते हैं। दोनों देशों के बीच एक संधि हुई है। इस संधि के तहत दोनों देशों के
नागरिक एक-दूसरे के देश में बिना पासपोर्ट (पारपत्र) और वीजा के आ-जा सकते हैं और काम
कर सकते हैं। खास संबंधों के बावजूद दोनों देश के बीच अतीत में व्यापार से संबंधित मनमुटाव
पैदा हुए हैं।
(2) नेपाल की चीन के साथ दोस्ती को लेकर भारत सरकार ने अक्सर अपनी अप्रसन्नता
जतायी है। नेपाल सरकार भारत-विरोधी तत्त्वों के खिलाफ कदम नहीं उठाती। इससे भी भारत
नाखुश है।
(3) भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ नेपाल में चल रहे नक्सल आंदोलन को अपनी सुरक्षा के लिए
खतरा मानती हैं क्योंकि भारत में उत्तर के बिहार और दक्षिण में आन्ध्र प्रदेश तक विभिन्न प्रांतों
में नक्सलवादी समूहों का उभार हुआ है। नेपाल में बहुत-से लोग यह सोचते हैं कि भारत की
सरकार नेपाल के अंदरूनी मामले में दखल दे रही है और उसके नदी जल तथा पनबिजली पर
आँख गढ़ाए हुए हैं।
(4) चारों तरफ से जमीन से घिरे नेपाल को लगता है कि भारत उसको अपने भू-क्षेत्र से
होकर समुद्र तक पहुंँचने से रोकता है। बहरहाल भारत-नेपाल के संबंध एकदम मजबूत और
शांतिपूर्ण हैं। विभेदों के बावजूद दोनों देश व्यापार, वैज्ञानिक सहयोग, साझे प्राकृतिक संसाधन,
बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन ग्रिड के मसले पर एक साथ हैं। नेपाल में लोकतंत्र की बहाली
से दोनों देशों के बीच संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद बंँधी है।
7. भारत-श्रीलंका समझौता 1987 पर टिप्पणी लिखें।
Write a short note on India-Sir Lanka Pact 1987.
उत्तर-भारत-श्रीलंका समझौता 1987 (India Sri Lanka Pact 1987),-जुलाई
1987 में तमिलों की समस्या को सुलझाने के लिए भारत श्रीलंका समझौता हुआ। इन समझौते के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित थे―
(1) उत्तरी व पूर्वी दो प्रदेशों को, जहाँ तमिल बहुसंख्य हैं एकीकृत क्षेत्र बनाया जाएगा।
(2) उपर्युक्त क्षेत्र में विधानसभा की स्थापना की जाएगी तथा लोकप्रिय सरकार गठित की
जाएगी।
(3) जनमत संग्रह के माध्यम से यह ज्ञात किया जाएगा कि ये दोनों प्रान्त विलय के पक्ष में
हैं या नहीं। यदि ये प्रान्त इसके विरुद्ध ही निर्णय देते हैं तो उनकी सरकारें अलग ही रहेंगी। जनमत संग्रह 1988 तक करा लिया जाना तय हुआ।
(4) यदि तमिल उग्रवादी इस समझौते के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष बन्द नहीं करते तो श्रीलंका
सरकार शांति की स्थापना के लिए भारतीय सेना को आमंत्रित कर सकती है।
(5) श्रीलंका की अखण्डता पर सहमति प्रकट की गयी। उपर्युक्त समझौते के बाद भारतीय
सेना श्रीलंका के निमंत्रण पर वहाँ गयी। सेना ने सराहनीय कार्य किया। श्रीलंका के उत्तर व पूर्वी
प्रान्तों में लोकप्रिय सरकारें बनीं। तमिल उग्रवादी बाद में संघर्ष करते रहे।
(6) श्रीलंका की जनता के दबाव में श्रीलंका सरकार ने भारत से जुलाई 1989 तक सेना वापस
बुलाने का आग्रह किया। भारत सरकार का कहना था कि बिना शांति स्थापित किये सेना की वापसी उचित नहीं है किन्तु अन्तत: मार्च 1990 तक भारतीय सेना वापस बुला ली गयी। भारत की तमिलों के विरुद्ध सैनिक कार्यवाही में तमिल समाज में भारत सरकार के प्रति रोष उत्पन्न हो गया भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या इसी पृष्ठभूमि में रचित षड्यंत्र का परिणाम थी। आजकल दोनों देशों के सम्बन्ध मधुर बने हुए हैं।
8. ‘शिमला समझौते के बारे में आप क्या जानते हैं?
What do you know about ‘Simla Agreement’?
                                        अथवा,
शिमला समझौता क्या है?                      [Board Exam. 2009A]
उत्तर-(1) आधुनिक बांग्लादेश’ 1971 से पूर्व पाकिस्तान का एक भाग था। 1971 में वहाँ
गृहयुद्ध शुरू हो जाने के कारण लाखों की संख्या में शरणार्थी भारत आये। भारत ने मानवीय
आधार पर उनको शरण दी। इसके विरोधस्वरूप पाकिस्तान ने 3 दिसम्बर, 1971 को भारत के
हवाई अड्डों पर धावा बोल दिया। भारतीय सेना ने बड़े वेग से जवाबी कार्यवाही की। पाकिस्तान
युद्ध हार गया और उसका पूर्वी बंगाल का भाग स्वतंत्र होकर बांग्लादेश के रूप में उदित हुआ।
(2) युद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों को सामान्य बनाने के लिए 3 जुलाई,
1972 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच शिमला में एक समझौता हुआ। दोनों देशों ने यह
करार किया कि भारत व पाकिस्तान के बीच डाक-तार सेवा फिर से चालू की जाएगी तथा आर्थिक व सांस्कृतिक क्षेत्रों में दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की मदद करेंगे।
9. कश्मीर समस्या पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Write a short note on Kashmir Problem.
उत्तर-कश्मीर समस्या (Kashmir Problem)-(1) भारत और पाकिस्तान के बीच
कश्मीर विवाद बना रहा है। विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरिसिंह ने स्वंतत्र रहने का निर्णय लिया परंतु पाकिस्तान की ओर से कश्मीर पर हमला कर दिया गया और कबाइली घुसपैठ की गयी। महाराजा हरिसिंह द्वारा जम्मू-कश्मीर को भारत में मिलाने का निर्णय लिया गया और भारतीय फौजों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को रोक दिया। कश्मीर-विवाद को संयुक्त राष्ट्र में ले जाया गया। सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव द्वारा युद्ध विराम किया गया।
(2) पाकिस्तान ने अपने अधिकार में आये कश्मीर को आजाद कश्मीर का नाम दिया और
उस पर अपना कब्जा बनाए रखा। अभी तक भी कश्मीर विवाद बना हुआ है। 1947,1965,1971 तथा कारगिल युद्ध (1999) भारत और पाक की सेनाओं के बीच होते रहे हैं। इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता वार्ताएँ चल रही हैं जिसमें भारत और पाकिस्तान अपने विभिन्न मुद्दों पर बात करने को राजी हुए हैं जिनमें से कश्मीर मुद्दा भी एक है।
10. ‘सार्क’ की स्थापना के क्या उद्देश्य थे?
What were the objectives of the establishment of SAARC?
उत्तर-सार्क की स्थापना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे-
(1) दक्षिण एशिया के लोगों के कल्याण करने की कामना तथा उनके जीवन स्तर को
सुधारना।
(2) दक्षिण एशिया क्षेत्र में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति तथा सांस्कृतिक उन्नति की
प्राप्ति करना तथा इस क्षेत्र के सभी व्यक्तियों के लिए प्रतिष्ठा के अवसर प्रदान करना।
(3) दक्षिण एशिया के देशों में सामूहिक आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता पैदा करना तथा
उसको बढ़ावा देना।
(4) एक-दूसरे की समस्याओं को पारस्परिक विश्वास, सूझ-बूझ तथा अभिमूल्यन की दृष्टि से देखना।
11. क्षेत्रीय सहयोग के साधन के रूप में सार्क की प्रमुख उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
Explain the main achievements of SAARC as a forum of regione
co-operation.                                                  [B.M. 2009A]
उत्तर-दक्षिण एशियाई क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग के साधन के रूप में सार्क संगठन ने
निम्नलिखित उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं-
(1) इस क्षेत्र में सात देश एक-दूसरे के काफी समीप आए हैं और इससे उनमें दिखायी देने
वाला तनाव कम हुआ है।
(2) सार्क संगठन के कारण इस क्षेत्र के देशों में थोड़े-थोड़े अंतराल पर आपसी बैठकें होती
रहती हैं। जिसमें इनके छोटे-छोटे मतभेद अपने आप आसानी से सुलझ गए हैं और इनमें अपनापन विकसित हुआ है।
(3) इस क्षेत्र के देशों ने अपने आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए सामूहिक आत्मनिर्भरता
पर जोर दिया है जिससे विदेशी शक्तियों का इस क्षेत्र में प्रभाव कम हुआ है और ये देश अपने
को अधिक स्वतंत्र महसूस करने लगे हैं।
(4) सार्क ने एक संरक्षित अन्न भंडार की स्थापना की है जो इस क्षेत्र के देशों की आत्मसम्मान
व आत्मनिर्भरता की भावना के प्रबल होने का सूचक है।
12. दक्षेस की महत्त्वपूर्ण गतिविधियाँ क्या रही है? उनमें भारत की भूमिका क्या है?
What important activities SAARChas taken up during its existence? What
Thas been India’srole in them?
उत्तर-(1) सार्क संघ का गठन 1985 में ढाका में हुआ था। अभी तक इसके 11 शिखर
सम्मेलन हो चुके हैं। इसके शिखर सम्मेलनों में प्रादेशिक करने के प्रयास किए गए हैं। दक्षिण
एशिया के इन सातों देशों में मित्रता, पारस्परिक सहयोग, शांति तथा विकास में वृद्धि की गयी
है। प्रारंभ में सार्क ने तकनीकी सहयोग बल दिया। ग्यारह तकनीकी समितियाँ सार्क द्वारा स्थापित की जा चुकी हैं। इनमें कृषि, संचार पर शिक्षा, संस्कृति एवं खेल, वातावरण और मौसम विज्ञान, स्वास्थ्य एवं जनसंख्या, ड्रग्स, विज्ञान और तकनीकी, टूरिज्म, ट्रासपोर्ट और महिला विकास आदि समितियाँ बनायी गयी हैं। ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
(2) 1990 में सार्क का दूसरा एजेण्डा सोशल है। शिक्षा, गरीबी हटाना, स्त्री और बच्चों का
कल्याण आदि 1987 में सार्क फूड सिक्योरिटी रिजर्व पर हस्ताक्षर किये गये और 1988 में यह
लागू हो गया। माले में अक्टूबर 1997 में वातावरण का मुद्दा उठाया गया था। आतंकवाद तथा
नशीली दवाओं की तस्करी रोकने हेतु भी सहयोग करने का कार्यक्रम करना भारत ने दक्षेस देशों
को औद्योगिक, व्यापारिक, तकनीकी तथा वित्तीय सहयोग दिया। 11वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री वाजपेयी के सुझाव पर सभी सदस्य राष्ट्रों ने आतंकवाद को समाप्त करने का निर्णय लिया।
13. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें-
(i) दक्षेस का आठवाँ शिखर सम्मेलन।
(ii) दक्षिण एशियाई अधिमानिक व्यापर (साप्टा)।
(iii) दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्ता)।
Write a short notes on: (i) Eight SAARC SUMMIT (ii) SAPTA (1) SAFTA
उत्तर-(i) आठवाँ सार्क शिखर सम्मेलन (Eight SAARC SUMMIT)-आठवाँ
सार्क सम्मेलन 2-4 मई, 1995 को नई दिल्ली (भारत) में हुआ। राज्याध्यक्षों ने सार्क के प्रथम
दशक की उपलब्धियों पर संतोष प्रकट किया। दूसरे दशक में किन बिंदुओं पर कार्य हो इसके लिए क्षेत्र बुलाने की स्वीकृति दी गयी। दक्षिण एशिया से गरीबी समाप्त करने का दृढ़ निश्चय किया गया।
(i) SAPTA (साप्टा)―नौवां सार्क शिखर सम्मेलन कुरकुम्बा में 12 मई-14 मई, 1997
तक हुआ। इसमें दक्षिण एशिया में क्षेत्र को एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAPTA) के रूप में विकसित करने का लक्ष्य 2001 तय किया गया जो पहले 2005 तक तय किया गया था। सार्क देशों के
बीच व्यापार पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। South Asia Preferential Trade Agreement के अंतर्गत दसवें शिखर सम्मेलन में भारत में प्रधानमंत्री ने इसे 2001 तक प्रभावी बनाने के लिए
सभी सदस्य राष्ट्रों को आह्वान किया कि सभी मिलकर संघर्ष करें।
(ii) SAFTA दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र (South Asia Free Trade Area)-
दक्षिण एशिया के देशों के बीच व्यापार करने के लिए वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी से मुक्त किया
जाए। SAPTA के स्थान पर 21वीं सदी के शुरू से SAFTA को लाने की बात कही गयी। पहली
दक्षेस वाणिज्य मंत्रियों की कान्फ्रेंस नई दिल्ली में जनवरी 1996 में हुई। सार्क ट्रेडफेयर का आयोजन भी भारत में किया गया। ग्यारहवें शिखर सम्मेलन काठमांडू (2002) में तय किया गया कि वर्ष के अंत तक उसका प्रारूप तैयार कर लिया जाएगा। सार्क बीजा एक्जेम्पशन स्कीम लागू को गयी।
14. दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में आपसी सहयोग की अभिवृद्धि के लिए किए
गए विभिन्न प्रयासों का वर्णन कीजिए।
Examine the efforts made to promote the mutual co-operation of different South Asian countries.
उत्तर-अनेक समान विशेषताओं के होते हुए भी दक्षिण एशिया के देशों में परस्पर सहयोग
की भावना की कमी पायी जाती है। इसका प्रमुख कारण अंतर्राष्ट्रीय महाशक्तियों का इस क्षेत्र के
महत्त्व को जानते हुए उनका हस्तक्षेप है जिसके कारण उनमें संघर्ष की स्थिति बनी रहती है परंतु
अब कुछ वर्षों से इस क्षेत्र के देशों ने एकता एवं सहयोग की भावना को समझना शुरू कर दिया
है तथा इस विषय में कुछ प्रगति भी हुई है। इन्हीं प्रयत्नों के परिणामस्वरूप दिसम्बर, 1985 में
सार्क अर्थात् दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन नामक एक संघ की स्थापना हुई। दक्षिण एशिया के सात देश-भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव इसके
सदस्य हैं।
15. ‘दक्षेस का दूसरा शिखर सम्मेलन’ पर टिप्पणी लिखिए।
Write a note on Second SAARC Summit (1986).
उत्तर-दक्षेस का दूसरा शिखर सम्मेलन भारत में बंगलोर में 16 व 17 नवम्बर, 1986 को
हुआ। इस सम्मेलन में निम्नलिखित निर्णय लिए गए-
(1) सार्क के लिए एक सचिवालय की स्थापना की व्यवस्था की गयी। भारत ने इसके लिए
1.5 करोड़ रुपये अनुदान की घोषणा की। यह निर्णय किया गया कि सचिवालय काठमांडू में होगा।
विकास के लिए 9 क्षेत्र निश्चित किए गए। प्रत्येक प्रकार के विकास के लिए अलग-अलग राज्य
संयोजक नियुक्त किए गए। कृषि के लिए बंगला देश, स्वास्थ्य और जनसंख्या के लिए नेपाल
मौसम विज्ञान के लिए भारत, डाक सेवा के लिए भूटान, ग्रामीण विकास के लिए श्रीलंका, वैज्ञानिक सहयोग के लिए भारत, खेलकूद के लिए भारत, दूर संचार और यातायात के लिए पाकिस्तान।
(2) दूसरे शिखर सम्मेलन में सार्क देशों ने गैर-राजनीतिक क्षेत्रों में अधिक सहयोग करने का
निर्णय लिया।
(3) सार्क के सदस्य राज्यों ने आपसी मतभेदों को भूलाकर आपसी मेल से निर्णय करने का
निश्चय किया।
(4) आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए संयुक्त सहयोग पर बल दिया।
16. भारत के श्रीलंका, भूटान और मालदीव के संबंधों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Write short vote on India’s relation with Sri Lanka, Bluutan and Maldeev.
उत्तर-(1) भारत और श्रीलंका (India and Sri Lanka)―श्रीलंका और भारत की
सरकारों के संबंधों में तनाव इस द्वीप में जारी जातीय संघर्ष को लेकर है। जब तमिल आबादी
राजनीतिक रूप से नाखुश हो और उसे मारा जा रहा हो तो ऐसे में भारतीय नेताओं और जनता का तटस्थ बने रहना असंभव लगता है। 1987 के सैन्य हस्तक्षेप के बाद से भारतीय सरकार
श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में असलंग्नता की नीति पर अमल कर रही है। भारत सरकार ने श्रीलंका के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर दस्तखत किए हैं। इससे दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए हैं। श्रीलंका में ‘सुनामी’ से हुई तबाही के बाद के पुनर्निर्माण कार्यों में भारतीय मदद से भी दोनों देश एक-दूसरे के करीब आए हैं।
(2) भारत और भूटान (India and Bhutan)-भारत के भूटान के साथ भी बहुत अच्छे
रिश्ते हैं और भूटानी सरकार के साथ कोई बड़ा झगड़ा नहीं है। भूटान से अपने काम का संचालन
कर रहे पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादियों और गुरिल्लों को भूटान ने अपने क्षेत्र से खदेड़ भगाया। भूटान के इस कदम से भारत को बड़ी मदद मिली है। भारत भूटान में पनबिजली की बड़ी परियोजनाओं में हाथ बँटा रहा है। इस तरह हिमालयी देश के विकास कार्यों के लिए सबसे ज्यादा अनुदान भारत से हासिल होता है।
(3) भारत और मालदीव (India and Maldeev)-मालदीव के साथ भारत के संबंध
सौहाद्रपूर्ण तथा गर्मजोशी से भरे हैं। 1988 में श्रीलंका से आए कुछ भाड़े के तमिल सैनिकों ने
मालदीव पर हमला किया। मालदीव ने जब आक्रमण रोकने के लिए भारत से मदद मांँगी तो
भारतीय वायुसेना और नौसेना ने तुरंत कार्यवाही की। भारत ने मालदीव के आर्थिक विकास,
पर्यटन।
                                                 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. नेपाल के लोग अपने देश में लोकतंत्र को बहाल करने में कैसे सफल हुए?
How did the people of Napal get success in establishing democracy in
their country?
उत्तर-नेपाल में लोकतंत्र की बहाली (Establishment of democracy in
Napal)-(1) नेपाल अतीत में एक हिन्दू-राज्य था फिर आधुनिक काल में कई सालों तक यहाँ
संवैधानिक राजतंत्र रहा। संवैधानिक राजतंत्र के दौर में नेपाल की राजनीतिक पार्टियाँ और आम
जनता एक ज्यादा खुले और उत्तरदायी शासन की आवाज उठाती रही लेकिन राजा ने सेना की
सहायता से शासन पर पूरा नियंत्रण कर लिया और नेपाल में लोकतंत्र की राह अवरुद्ध हो गई।
(2) लोकतंत्र-समर्थक मजबूत आंदोलन की चपेट में आकर राजा ने 1990 में नए लोकतांत्रिक
संविधान की मांग मान ली, लेकिन नेपाल में लोकतांत्रिक सरकारों का कार्यकाल बहुत छोटा और
समस्याओं से भरा रहा। 1990 के दशक में नेपाल के माओवादी नेपाल के अनेक हिस्सों में अपना प्रभाव जमाने में कामयाब हुए। माओवादी, राजा और सत्ताधारी अभिजन के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करना चाहते थे। इस वजह से राजा की सेना और माओवादी गुरिल्लों के बीच हिंसक लड़ाई छिड़ गई।
(3) कुंछ समय तक राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय
संघर्ष हुआ। 2002 में राजा ने संसद को भंग कर दिया और सरकार को गिरा दिया। इस तरह नेपाल में जो भी थोड़ा-बहुत लोकतंत्र था उसे राजा ने खत्म कर दिया।
(4) अप्रैल 2006 में यहाँ देशव्यापी लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन हुए। संघर्षरत लोकतंत्र-समर्थक
शक्तियों ने अपनी पहली बड़ी जीत हासिल की जब राजा ज्ञानेन्द्र ने बाध्य होकर संसद को बहाल
किया। इसे अप्रैल 2002 में भंग कर दिया गया था। मोटे तौर पर अहिंसक रहे इस प्रतिरोध का
नेतृत्व सात दलों के गठबंधन (सेवन पार्टी अलाएंस), माओवादी तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने
किया।
(5) नेपाल में लोकतंत्र की आमद अभी मुकम्मल नहीं हुई है। फिलहाल, नेपाल अपने इतिहास
के एक अद्वितीय दौर से गुजर रहा है क्योंकि वहाँ संविधान-सभा के गठन की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। यह संविधान-सभा नेपाल का संविधान लिखेगी। नेपाल में कुछ लोग अब भी मानते हैं कि अलंकारिक अर्थों में राजा का पद कायम रखना जरूरी है ताकि नेपाल अपने अतीत से जुड़ा रहे। माओवादी समूहों ने सशस्त्र संघर्ष की राह छोड़ देने की बात मान ली है। माओवादी चाहते हैं कि संविधान में मूलगामी सामाजिक, आर्थिक पुनर्रचना के कार्यक्रमों को शामिल किया जाय। सात दलों के गठबंधन में शामिल हरेक दल को यह बात स्वीकार हो-ऐसा नहीं लगता। माओवादी और कुछ अन्य राजनीतिक समूह भारत की सरकार और नेपाल के भविष्य में भारतीय सरकार की भूमिका को लेकर बहुत शंकित हैं।
2. पाकिस्तान में सेना और लोकतंत्र का कैसा अनुभव रहा? विवरण दीजिए।
Describe what type of the experience was realised of the military and
democracy in Pakistan?
उत्तर -पाकिस्तान में सैन्य शासन और लोकतंत्र का अनुभव (Experience of the
Military Rule and Democracy in Pakistan)-(1) पाकिस्तान में पहले संविधान के
बनने के बाद देश के शासन की बागडोर जनरल अयूब खान ने अपने हाथों में ले ली और जल्दी
ही अपना निर्वाचन भी करा लिया। उनके शासन के खिलाफ जनता का गुस्सा भड़का और ऐसे में
उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। इससे एक बार फिर सैनिक शासन का रास्ता साफ हुआ और जनरल याहिया खान ने शासन की बागडोर संँभाली।
(2) याहिया खान के सैनिक-शासन के दौरान पाकिस्तान को बांग्लादेश-संकट का सामना
करना पड़ा और 1971 में भारत के साथ पाकिस्तान का युद्ध हुआ। युद्ध के परिणामस्वरूप पूर्वी
पाकिस्तान टूटकर एक स्वतंत्र देश बना और बांग्लादेश कहलाया।
(3) इसके बाद पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो के नेतृत्व में एक निर्वाचित सरकार बनी
जो 1971 से 1977 तक कायम रही। 1977 में जनरल जिया-उल-हक ने इस सरकार को गिरा
दिया।
(4) 1982 के बाद जनरल जिया-उल-हक को लोकतंत्र-समर्थन आंदोलन का सामना करना
पड़ा और 1988 में एक बार फिर बेनजीर भुट्टो के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सरकार बनी। पाकिस्तान में इसके बाद की राजनीति बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम लीग के आपसी होड़ के इर्द-गिर्द घूमती रही। निर्वाचित लोकतंत्र की यह अवस्था 1999 तक कायम रही।
(5) 1999 में एक बार फिर सेना ने दखल दिया और जनरल परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री
नवाज शरीफ को हटा दिया। 2001 में परवेज मुशर्रफ ने अपना निर्वाचन राष्ट्रपति के रूप में
कराया। पाकिस्तान पर अब भी सेना की हुकूमत है हालाँकि सैनिक शासकों ने अपने शासन को
लोकतांत्रिक जताने के लिए चुनाव कराए हैं।
(6) पाकिस्तान में लोकतंत्र के स्थायी न बन पाने के कई कारण है। यहाँ सेना, धर्मगुरु और
भूस्वामी अभिजनों का सामाजिक दबदबा है। इसकी वजह से कई बार निर्वाचित सरकारों को गिराकर सैनिक शासन कायम हुआ। पाकिस्तान की भारत के साथ तनातनी रहती है। इस वजह से सेना-समर्थक समूह ज्यादा मजबूत हैं और अक्सर ये समूह दलील देते हैं कि पाकिस्तान के
सजनीतिक दलों और लोकतंत्र में खोट है। राजनीतिक दलों के स्वार्थ साधन तथा लोकतंत्र की
धमाचौकड़ी से पाकिस्तान की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी। इस तरह ये ताकतें सैनिक शासन को जायज ठहराती हैं। लोकतंत्र तो खैर पाकिस्तान में पूरी तरह सफल नहीं हो सका है लेकिन इस देश में लोकतंत्र का जज्बा बहुत मजबूती के साथ कायम रहा है।
(7) पाकिस्तान में अपेक्षाकृत स्वतंत्र और साहसी प्रेस मौजूद है और वहाँ मानवाधिकार
आंदोलन भी काफी मजबूत है।
(8) पाकिस्तान में लोकतांत्रिक शासन चले-इसके लिए कोई खास अंतर्राष्ट्रीय समर्थन नहीं
मिलता। इस वजह से भी सेना को अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए बढ़ावा मिला है। संयुक्त
राज्य अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों ने अपने-अपने स्वार्थों से गुजरे वक्त में पाकिस्तान में
सैनिक शासन को बढ़ावा दिया। इन देशों को उस आतंकवाद से डर लगता है जिसे ये देश
‘विश्वव्यापी इस्लामी आतंकवाद’ कहते हैं। इन देशों को यह भी डर सताता है कि पाकिस्तान के परमाण्विक हथियार कहीं इन आतंकवादी समूहों के हाथ न लग जाएँ। इन बातों के मद्देनजर
पाकिस्तान को ये देश ‘पश्चिम तथा दक्षिण एशिया में पश्चिमी हितों का रखवाला मानते हैं।
3. ‘बांग्लादेश में लोकतंत्र’ विषय पर एक लेख लिखिए।
Write an essay on Democracy in Bangladesh’.
उत्तर-बांग्लादेश में लोकतंत्र (Democracy in Bangladesh)-
(I) (क) पृष्ठभूमि (Background)-1947 से 1971 तक बांग्लादेश पाकिस्तान का अंग
था। अंग्रेजी राज के समय के बंगाल और असम के विभाजित हिस्सों से पूर्वी पाकिस्तान का यह
क्षेत्र बना था। इस क्षेत्र के लोग पश्चिमी पाकिस्तान के दबदबे और अपने ऊपर उर्दू भाषा को लादने के खिलाफ थे। पाकिस्तान के निर्माण के तुरंत बाद ही यहाँ के लोगों ने बंगाली संस्कृति और भाषा के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ विरोध जताना शुरू कर दिया। इस क्षेत्र की जनता ने प्रशासन में अपने समुचित प्रतिनिधित्व तथा राजनीतिक सत्ता में समुचित हिस्सेदारी की मांँग भी उठायी।
(ख) पश्चिमी पाकिस्तान के प्रभुत्व के खिलाफ जन-संघर्ष का नेतृत्व शेख मुजीबुर्रहमान ने
किया। उन्होंने पूर्वी क्षेत्र के लिए स्वायत्तता की माँग की। शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व वाली अवामी लीग को 1970 के चुनावों में पूर्वी पाकिस्तान के लिए प्रस्तावित संविधान सभा में बहुमत हासिल हो गया लेकिन सरकार पर पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं का दबदबा था और सरकार ने इस सभा को आहूत करने से इंकार कर दिया।
(ग) शेख मुजीब को गिरफ्तार कर लिया गया। जनरल याहिया खान के सैनिक शासन में
पाकिस्तानी सेना ने बंगाली जनता के जन-आंदोलन को कुचलने की कोशिश की। हजारों लोग
पाकिस्तानी सेना के हाथों मारे गए। इस वजह से पूर्वी पाकिस्तान से बड़ी संख्या में लोग भारत
पलायन कर गए। भारत के सामने इन शरणार्थियों को संभालने की समस्या आ खड़ी हुई।
(2) भारत का समर्थन (Support of India)-भारत की सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान के
लोगों की आजादी की मांँग का समर्थन किया और उन्हें वित्तीय और सैन्य सहायता दी। इसके
परिणामस्वरूप 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया। युद्ध की समाप्ति पूर्वी
पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण तथा एक स्वतंत्र राष्ट्र ‘बांग्लादेश के निर्माण के
साथ हुई। बांग्लादेश ने अपना संविधान बनाकर उसमें अपने को एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा समाजवादी देश घोषित किया। बहरहाल, 1975 में शेख मुजीबुर्रहमान ने संविधान में संशोधन पर्णाली को मान्यता मिली। शेख मुजीब ने अपनी पार्टी अवामी लीग को छोड़कर अन्य सभी पार्टियों को समाप्त कर दिया। इससे तनाव और संघर्ष की स्थिति पैदा हुई।
(3) सैनिक विद्रोह (1975) अन्तत: लोकतंत्र की पुनः स्थापना (Military Revolt
(1975) and at less democracy was re-stablished)-(क) 1975 के अगस्त में सेना ने उनके खिलाफ बगावत कर दिया और इस नाटकीय तथा त्रासद घटनाक्रम में शेख मुजीब सेना के हाथों मारे गए। नये सैनिक-शासन जियाऊर्रहमान ने अपनी बांग्लादेश नेशनल पार्टी बनायी और 1979 के चुनाव में विजयी रहे। जियाऊर्रहमान की हत्या हुई और लेफ्टिनेंट जनरल एच. एम. इरशाद के नेतृत्व में बांग्लादेश में एक और सैनिक-शासन ने बागडोर संभाला।
(ख) बांग्लादेश की जनता जल्दी ही लोकतंत्र के समर्थन में उठ खड़ी हुई। आंदोलन में छात्र
आगे-आगे चल रहे थे। बाध्य होकर जनरल इरशाद ने एक हद तक राजनीतिक गतिविधियों की
छूट दी। इसके बाद के समय में जनरल इरशाद पांच सालों के लिए राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। जनता
के व्यापक विरोध के आगे झुकते हुए लेफ्टिनेंट जनरल इरशाद को राष्ट्रपति का पद 1990 में
छोड़ना पड़ा। 1991 में चुनाव हुए। इसके बाद से बांग्लादेश में बहुदलीय चुनावों पर आधारित
विनिधिमूलक लोकतंत्र कायम है।
4. दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक सहयोग की राह तैयार करने में दक्षे
(सार्क) की भूमिका और सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। दक्षिण एशिया
की बेहतरी में ‘दक्षेस’ (सार्क) ज्यादा बड़ी भूमिका निभा सके, इसके लिए आप
क्या सुझाव देंगे?
Write a short note on the role and the limitations of SAARC as a forum fo facilitating economic co-operation among the South Asian countries.
                                                                                      [NCERT T.B.Q.10
उत्तर-(I) दक्षेस (सार्क) की भूमिका (The role of SAARC)-(क) अनेक संघर्षों
के बावजूद दक्षिण एशिया (या दक्षेस अथवा सार्क) के देश परस्पर में मित्रवत् सम्बन्ध तथा सहयोग के महत्त्व को पहचानते हैं। शांति के प्रयास द्विपक्षीय भी हुए हैं और क्षेत्रीय स्तर पर भी। दक्षेस (साउथ एशियन एसोशियेशन फॉर रीजनल कोपरेशन (SAARC) दक्षिण एशियाई देशों द्वारा बहुस्तरीय साधनों से आपस में सहयोग करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। इसके
शुरुआत 1985 में हुई। दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज्यादा सफलता नहीं
मिली है। दक्षेस के सदस्य देशों ने सन् 2002 में ‘दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार-क्षेत्र समझौते
(साउथ एशियन फ्री ट्रेड एरिया एग्रीमेंट SAFTA) पर दस्तखत किये। इसमें पूरे दक्षिण एशिय
के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने का वायदा है।
(ख) यदि दक्षिण एशिया के सभी देश अपनी सीमारेखा के आर-पार मुक्त-व्यापार पर सहमत
हो जाएँ तो इस क्षेत्र में शांति और सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। दक्षिण
एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते (SAFTA) के पीछे यही भावना काम कर रही है। इस समझौते पर 2004 में हस्ताक्षर हुए और यह समझौता 1 जनवरी, 2006 को प्रभावी हो गया। इस समझौते का लक्ष्य है कि इन देशों के बीच आपसी व्यापार में लगने वाले सीमा शुल्क को 2007 तक बीस प्रतिशत कम कर दिया जाए।
(II) सीमाएँ (Limitations)-(क) कुछ छोटे देश मानते हैं कि ‘साफ्टा’ की ओट लेकर
भारत उनके बाजार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक उद्यम तथा व्यावसायिक मौजूदगी
के जरिये उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है।
(ख) भारत सोचता है कि ‘साफ्टा’ से इस क्षेत्र के हर देश को फायदा होगा और क्षेत्र में
मुक्त व्यापार बढ़ने से राजनीतिक मसलों पर सहयोग ज्यादा बेहतर होगा।
(III) सुझाव (Suggestions)-दक्षेस (सार्क) के सदस्य देशों में भारत आकार तथा
शक्ति के आधार पर सबसे महत्त्वपूर्ण देश है। भारत में कुछ लोगों का मानना है कि ‘साफ्टा’ के
लिए परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि भारत भूटान, नेपाल और श्रीलंका से पहले ही द्विपक्षीय व्यापार समझौता कर चुका है। वह इसी तरह की शक्तियाँ शेष तीनों देशों या दक्षिण एशिया के अन्य तीन देशों (अफगानिस्तान, म्यांमार, चीन) से भी कर सकता है। संधि एवं मित्रता का आधार समानता (या समान स्तर) होना चाहिए।
5. दक्षिण एशिया के देश भारत को एक बाहुबली समझते हैं जो इस क्षेत्र के छोटे देशों
पर अपना दबदबा जमाना चाहता है और उनके अंदरूनी मामलों में दखल देता है।
इन देशों की ऐसी सोच के लिए कौन-कौन-सी बातें जिम्मेदार हैं? क्या उनकी यह
सोच ठीक है?
India’s neighbours often think thank the Indian Government tries to
dominate and interfere in the domestic affairs of the smaller countries of the region is this a correct impression?
उत्तर-(1) दक्षिण एशिया के छोटे-छोटे पड़ोसियों के साथ भारत को कई समस्याओं का
सामना करना पड़ता है। भारत का आकार बड़ा है और वह शक्तिशाली है। इसकी वजह से
अपेक्षाकृत छोटे देशों का भारत के इरादों को लेकर शक करना लाजिमी है।
(2) दूसरी तरफ, भारत सरकार को अक्सर महसूस होता है कि उसके पड़ोसी देश उसका
बेजा फायदा उठा रहे है। भारत नहीं चाहता कि इन देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो। उसे
भय लगता है कि ऐसी स्थिति में बाहरी ताकतों को इस क्षेत्र में प्रभाव जमाने में मदद मिलेगी।
छोटे देशों को लगता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपना दबदबा कायम करना चाहता है।
(3) दक्षिण एशिया के सारे झगड़े सिर्फ भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच ही नहीं है।
नेपाल-भूटान तथा बाग्लादेश-म्यांमार के बीच जातीय मूल के नेपालियों के भूटान अप्रवास तथा
रोहिंग्या लोगों के म्यांमार में अप्रवास के मसले पर मतभेद रहे है। बाग्लादेश और नेपाल के बीच
हिमालयी नदियों के जल की हिस्सेदारी को लेकर खटपट है। यह बात सही है कि इस इलाके के
सभी बड़े झगड़े भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच है।
(4) इसका एक कारण दक्षिण एशिया का भूगोल भी है जहां भारत बीच में स्थित है और
बाकी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते है।
(i) मेरे विचारानुसार उन देशों की भारत के बारे में सोच गलत है क्योंकि भारत वस्तुतः एक
शांतिप्रिय देश है। वह सारे विश्व को एक कुटुम्ब के समान समझता रहा है।
(ii) भारत परस्पर प्रेम तथा सहयोग का पक्षधर है। भारत हर वक्त सहर्ष सभी देशों से
प्राकृतिक विपत्ति में सहयोग लेता भी रहा है और देता भी रहा है। चाहे वह सुनामी का अवसर हो
या भूकम्प अथवा किसी अन्य बाते या दुर्घटनाओं से किसी देश पर अचानक विपत्ति आ जाये?
भारत धन तथा मानव स्रोतों (सेवाओ) एवं अन्य संसाधनों से तुरंत सहयोग देता रहा है।
(iii) भारत में समय-समय पर बोग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका, फिलिस्तीन आदि देशों
से शरणार्थी आये है तथा भारतवासियों ने उनको पूर्ण सहयोग दिया है।
(iv) भारत उदारीकरण, वैश्वीकरण एवं नई आर्थिक अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था तथा उदार
लोकतंत्रीय व्यवस्था का समर्थक है। वह संयुक्त राष्ट्र एवं गुटनिरपेक्षता का समर्थक राष्ट्र है।
6. ‘श्रीलंका में जातीय संघर्ष और लोकतंत्र’ विषय पर एक लेख लिखिए।
Write an essay on the ‘Ethnic conflict and Democracy in Sri Lanka’.
उत्तर-श्रीलंका में जातीय संघर्ष और लोकतंत्र (Ethnic Conflict and Democracy
in Sri Lanka)-(1) ब्रिटेन से आजादी प्राप्त (1948) के बाद से लेकर अब तक श्रीलंका में
लोकतंत्र कायम है। लेकिन, श्रीलंका को एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा। यह चुनौती न तो सेना की थी और न ही राजतंत्र की। श्रीलंका को जातीय संघर्ष का सामना करना पड़ा जिसकी मांँग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया जाय।
(2) आजादी के बाद से (श्रीलंका को उन दिनों सिलोन कहा जाता था) श्रीलंका को राजनीति
पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय के हितों की नुमाइंदगी करने वालों का दबदबा रहा है। ये लोग
भारत छोड़कर श्रीलंका आ बसी एक बड़ी तमिल आबादी के खिलाफ हैं। तमिलों का बसना श्रीलंका के आजाद होने के बाद भी जारी रहा। सिंहली राष्ट्रवादियों का मानना था कि श्रीलंका में तमिलों के साथ कोई ‘रियायत’ नहीं बरती जानी चाहिए क्योंकि श्रीलंका सिर्फ सिंहली लोगों का है। तमिलों के प्रति उपेक्षा भरे बर्ताव से एक उग्र तमिल राष्ट्रवाद की आवाज बुलंद हुई।
(3) 1983 के बाद से उग्र तमिल संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम (लिट्टे)
श्रीलंकाई सेना के साथ सशस्त्र संघर्ष कर रहा है। इसने ‘तमिल ईलम’ यानी श्रीलंका के तमिलों के
लिए एक अलग देश की मांँग की है। श्रीलंका के उत्तर पूर्वी हिस्से पर लिट्टे का नियंत्रण है।
(4) श्रीलंका की समस्या भारतवंशी लोगों से जुड़ी है। भारत की तमिल जनता का भारतीय
सरकार पर भारी दबाव है कि वह श्रीलंकाई तमिलों के हितों की रक्षा करे। भारत सरकार ने
समय-समय पर तमिलों के सवाल पर श्रीलंका की सरकार से बातचीत की कोशिश की है।
(5) 1987 में भारत सरकार श्रीलंका के तमिल मसले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुई। भारत
की सरकार ने श्रीलंका से एक समझौता किया तथा श्रीलंका सरकार और तमिलों के बीच रिश्ते
सामान्य करने के लिए भारतीय सेना को भेजा। आखिर में भारतीय सेना लिट्टे के साथ संघर्ष में
फंँस गई। भारतीय सेना की उपस्थिति को श्रीलंका की जनता ने भी कुछ खास पसंद नहीं किया।
श्रीलंकाई जनता ने समझा कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है। 1989 में भारत ने अपनी ‘शांति सेना’ बिना लक्ष्य हासिल किए बिना वापस बुला ली।
(6) श्रीलंका के इस संकट का हिंसक चरित्र बरकरार है। बहरहाल, अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ के
रूप में नार्वे और आइसलैंड जैसे स्केंडिनेवियाई देश युद्धरत दोनों पक्षों को फिर से आपस में
बातचीत करने के लिए राजी कर रहे हैं। श्रीलंका का भविष्य इन्ही वार्ताओं पर निर्भर करेगा।
(7) संघर्षों की चपेट में होने के बाद भी श्रीलंका ने अच्छी आर्थिक वृद्धि और विकास के
उच्च स्तर को हासिल किया है। जनसंख्या की वृद्धि-दर पर सफलतापूर्वक नियंत्रण करने वाले
विकासशील देशों में श्रीलंका प्रथम है। दक्षिण एशिया के देशों में सबसे पहले श्रीलंका ने ही अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया। गृहयुद्ध से गुजरने के बावजूद कई सालों से इस देश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है। अंदरूनी संघर्ष के झंझावतों को झेलकर भी श्रीलंका ने लोकतांत्रिक राजव्यवस्था कायम रखी है।
7. भारत-पाकिस्तान के मध्य हुए संघर्ष के प्रमुख चरण लिखिए।
Write main phases of India-Pakistan conflicts.              [B.M.2009A]
उत्तर-भारत-पाकिस्तान संघर्ष (India Pakistan Conflicts)
(1) प्रस्तावना (Introducton)-दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति केन्द्रीय है और इस
वजह से इनमें अधिकांश संघर्षों का रिश्ता भारत से है। इन संघर्षों में सबसे प्रमुख और सर्वग्रासी
संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच का संघर्ष है।
(2) प्रथम चरण या घटना (First Phase or Event)-अगस्त 1947 में विभाजन के
तुरंत बाद दोनों देश कश्मीर के मसले पर लड़ पड़े। पाकिस्तान की सरकार का दावा था कि कश्मीर पाकिस्तान का है। भारत और पाकिस्तान के बीच 1947-48 तथा 1965 के युद्ध से इस मसले का समाधान नहीं हुआ। 1948 के युद्ध के फलस्वरूप कश्मीर के दो फाड़ हुए। एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहलाया जबकि दूसरा हिस्सा भारत का जम्मू-कश्मीर प्रान्त बना। दोनों के बीच एक नियंत्रण-सीमा रेखा है। 1971 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध जीता लेकिन कश्मीर मसला अनसुलझा ही रहा।
(3) दूसरा युद्ध (Second War)-सन् 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर फिर आक्रमण
कर दिया परंतु भारत ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया और पाकिस्तान को बुरी तरह हराया। ताशकन्द (Tashkand) समझौता हुआ जिसके परिणामस्वरूप भारत ने पाकिस्तान के जीते हुए क्षेत्र उसे वापस लौटा दिए।
(4) तीसरा युद्ध (Third War)-सन् 1971 में बांग्लादेश की समस्या को लेकर भारत
तथा पाकिस्तान के बीच पुनः युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में पाकिस्तान की फिर पराजय हुई और
पाकिस्तान का एक बहुत बड़ा भाग उससे अलग हो गया अर्थात् बांग्लादेश नामक एक स्वतंत्र
राज्य की स्थापना हुई।
(5) भारत-पाक के संघर्ष के अन्य क्षेत्र (Other Areas of conflicts of India and
Pakistan)-(क) भारत और पाकिस्तान के बीच नदी-जल के बंँटवारे के सवाल पर भी तनातनी
हुई है। 1960 तक दोनों के बीच सिन्धु नदी के इस्तेमाल को लेकर तीखे विवाद हुए। संयोग से,
1960 में विश्व बैंक की मदद से भारत और पाकिस्तान ने ‘सिंधु-जल संधि’ पर दस्तखत किए
और यह संधि भारत-पाक के बीच कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है। हालांकि सिंधु
जल-संधि की व्याख्या और नदी-जल के इस्तेमाल को लेकर अभी भी कुछ छोटे-मोटे विवाद हैं।
(ख) कच्छ के रन में सरक्रिक की सीमारेखा को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। यह
विवाद छोटा जान पड़ता है लेकिन इसके साथ एक चिन्ता जुड़ी है। इस विवाद का समाधान जिस
ढंग से किया जाएगा उसका असर सरक्रिक इलाके से सटे समुद्री-संसाधन के नियंत्रण पर भी
पड़ेगा। भारत और पाकिस्तान के बीच इन सभी मामलों के बारे में वार्ताओं के दौर चल रहे है।
(ग) सामरिक मसलों जैसे सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण तथा हथियारों की होड़ को लेकर
भी भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी रहती है। 1990 के दशक में दोनों देशों ने परमाणु
हथियार और ऐसे हथियारों को एक-दूसरे पर दागने की क्षमता वाले मिसाइल हासिल कर लिए।
इससे दोनों देशों के बीच हथियारों की होड़ ने एक नया चरित्र ग्रहण किया है।
(घ) 1998 में भारत ने पोखरण में और इसके कुछ दिनों के अंदर ही पाकिस्तान ने चगाई
पहाड़ी पर परमाणु परीक्षण किए। इसके बाद से ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान एक
सैन्य-संबंध में बंँध चुके हैं और इनके बीच सीधे और सर्वव्यापी युद्ध छिड़ने की आशंका कम हो
गई है।
(6) उपसंहार (Conclusion)-दोनों देशों की सरकारें लगातार एक-दूसरे को संदेह की
नजर से देखती हैं। भारत सरकार का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार ने लुके-छुपे ढंग से हिंसा
की रणनीति जारी रखी है। आरोप है कि वह कश्मीरी उग्रवादियों को हथियार, प्रशिक्षण और धन
देता है तथा भारत पर आतंकवादी हमले के लिए उन्हें सुरक्षा प्रदान करता है। भारत सरकार का
यह भी मानना है कि पाकिस्तान ने 1985-95 की अवधि में खालिस्तान-समर्थक उग्रवादियों को
हथियार तथा गोले-बारुद दिए थे। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस
(आईएसआई) पर बांग्लादेश और नेपाल के गुप्त ठिकानों से पूर्वोत्तर भारत में भारत-विरोधी
अभियानों में संलग्न होने का आरोप है। इसके जवाब में पाकिस्तान की सरकार भारतीय सरकार
और उसकी खुफिया एजेंसियों पर सिंध और बलूचिस्तान में समस्या को भड़काने का आरोप
लगाती है।
8. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ पृष्ठभूमि एवं इसकी स्थापना के लिए प्रयासों
का वर्णण कीजिए।
Describe the background and efforts made for the establishment of South- Asian Association for Regional Cooperation (SAARC).
उत्तर-दक्षेस की पृष्ठभूमि (Background of SAARC)-
(1) दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ सात देशों का एक संगठन है। ये सातों ही देश
दक्षिण एशिया में स्थित हैं। नेपाल, भूटान, भारत, मालदीव, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा श्रीलंका
के लोगों के कल्याण के लिए आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा वैज्ञानिक सभी क्षेत्रों में सक्रिय सामंजस्य एवं सहयोग के लिए दक्षेस की स्थापना की गयी। यह 8 दिसम्बर, 1985 को स्थापित किया गया ये सातों देश अपने सामान्य हितों की पूर्ति के लिए एक-दूसरे को सहयोग देने को प्रेरित हुए थे। इस प्रकार के संघ की स्थापना का सुझाव सबसे पहले नेपाल के राजा वीरेन्द्र ने दिया था।
(2) तत्काली बांग्लादेश के राष्ट्रपति जियाउर्रहमान ने भी इस बात पर बल दिया कि दक्षिण
एशिया के राज्यों में सहयोग पैदा करने के लिए दक्षिण एशियाई राज्यों का एक संघ गठित किया
जाए। सहयोग की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए। 1980 में सातों देशों में मई 1980 में
विचार विमर्श हुआ। अप्रैल 1981 में कोलम्बो में 7 राज्यों की बैठक हुई नवम्बर 1981 मे काठमांडू में 1982 में इस्लामाबाद मार्च 1983 में ढाका में तथा जुलाई 1983 नई दिल्ली में सातों राज्यों के विदेश सचिवों की बैठकें हुई। इन बैठकों के बाद एक घोषणा-पत्र स्वीकार किया गया जिसमें सभी राज्यों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। विदेश मंत्रियों की बैठक अगस्त 1983 में नई दिल्ली में हुई तथा सार्क के उद्देश्यों और सिद्धातों को निश्चित किया गया।
(3) 8 दिसम्बर, 1985 को ढाका में दक्षेस को गठित किया गया। दिसम्बर 1986 में यह
निर्णय लिया गया कि दक्षेस का सचिवालय काठमांडू (नेपाल) में होगा। फरवरी 1987 में सार्क
का सचिवालय जिसमें एक महासचिव (Secretarty General) तथा चार निदेशक (Four
Directors) सार्क का संगठन चार स्तरीय बनाया गया। निम्न स्तर पर तकनीकी समिति, दूसरे
स्तर पर विदेश सचिवों की स्थायी समिति तथा तीसरे स्तर पर विदेश मंत्रियों की समिति तथा
सबसे ऊपर चौथे स्थान पर शिखर सम्मेलन रखा गया।
                              शिखर सम्मेलन (Summit Meeting)
                                                         ↓
          विदेश मंत्रियों का सम्मेलन (Foreign Ministers Conference)
                                                         ↓
 विदेश सचिवों की स्थायी समिति (Standing Committee of Foreign Secretaries)
                                                         ↓
                           तकनीकी समिति (Technical Committee)
9. ‘दक्षिण एशिया के देशों में शांति और सहयोग’ विषय पर एक आलोचनात्मक
निबंध लिखिए।
Write a critically essay on the Peace and Co-operation South Asian
Countries.
उत्तर-(I) दक्षिण एशिया के देशों में शांति और सहयोग (Peace and
Co-operation among Countries of South Asia)-आज का विश्व एक बड़ा बाजार हो
गया है। एशिया के अधिकांश देश भी यह मानते हैं कि विश्व में सभी देशों के लिए शांति और
पारस्परिक सहयोग, विकास और समृद्धि के लिए अनिवार्य है। दक्षिण एशिया के लोग परस्पर
अनेक मतभेद और मसलों के बावजूद वे आपसी मैत्रीपूर्ण रिश्ते और सहयोग को पहचानते हैं।
गत अनेक वर्षों से शांति और सहयोग के लिए प्रयास द्विपक्षीय और क्षेत्रीय स्तर पर भी हुए हैं।
(II) दक्षेस (सार्क) की स्थापना और प्रगति (Establishment and Progress of
SAARC)-दक्षेस (साउथ एशियन एसोशियेशन फॉर रीजनल कोपरेशन) (SAARC) दक्षिण
एशियाई देशों द्वारा बहुस्तरीय साधनों से आपस में सहयोग करने की दिशा में उठाया गया बड़ा
कदम है। इसकी शुरुआत 1985 में हुई। दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज्यादा सफलता नहीं मिली है। दक्षेस के सदस्य देशों ने सन् 2002 में ‘दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार-क्षेत्र समझौते’ (साउथ एशियन फ्री ट्रेड एरिया एग्रीमेंट SAFTA, पर दस्तखत किये।) इसमें पूरे दक्षिण एशिया के लिए मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने का वायदा है।
(III) सीमा के आर-पार मुक्त व्यापार (Free Trace across the Border)-
(क) यदि दक्षिण एशिया के सभी देश अपनी सीमारेखा के आर-पार मुक्त-व्यापार पर सहमत
हो जाएंँ तो इस क्षेत्र में शांति और सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। दक्षिण
एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते (SAFTA) के पीछे यही भावना काम कर रही है।
(ख) इस समझौते पर 2004 में हस्ताक्षर हुए और यह समझौता 1 जनवरी, 2006 से प्रभावी
हो गया। इस समझौते का लक्ष्य है कि इन देशों के बीच आपसी व्यापार में लगने वाले सीमा
शुल्क को 2007 तक बीस प्रतिशत कम कर लिया जाए। कुछ छोटे देश मानते हैं कि ‘साफ्टा’
की ओट लेकर भारत उनके बाजार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक उद्यम तथा व्यावसायिक मौजूदगी के जरिये उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है।
(ग) भारत सोचता है कि ‘साफ्टा’ से इस क्षेत्र के हर देश को फायदा होगा और क्षेत्र में मुक्त
व्यापार बढ़ने से राजनीतिक मसलों पर सहयोग ज्यादा बेहतर होगा। भारत में कुछ लोगों का मानना है कि ‘साफ्टा’ के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि भारत भूटान, नेपाल और श्रीलंका से पहले ही द्विपक्षीय व्यापार समझौता कर चुका है।
(IV) दो प्रमुख सार्क के देश-भारत और पाकिस्तान के प्रगतिशील निर्णय या कदम
(Progressive decision or steps taken by two major powers-India and Pakistan of the SAARC)-हालांँकि भारत और पाकिस्तान के संबंध कभी खत्म न होने वाले झगड़ों और हिंसा की एक कहानी जान पड़ते हैं फिर भी तनाव को कम करने और शांति बहाल करने के लिए इन देशों के बीच लगातार प्रयास हुए हैं। दोनों देश युद्ध के जोखिम कम करने के लिए विश्वास बहाली के उपाय करने पर सहमत हो गये हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और महत्त्वपूर्ण हस्तियाँ दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती का माहौल बनाने के लिए एकजुट हुई है। दोनों देशों के नेता एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने और दोनों देशों के बीच मौजूद बड़ी समस्याओं के समाधान
के लिए सम्मेलनों में भेंट करते हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान दोनों देशों के पंजाब वाले हिस्सा के बीच कई बस-मार्ग खुले हैं। अब वीसा आसानी से मिल जाते हैं।
(V) दक्षिण एशिया में दो महाशक्तियाँ-चीन और अमेरिका (Two great powers
of South Asia-China and America)-कोई भी क्षेत्र हवा में नहीं होता। चाहे कोई क्षेत्र अपने को गैर इलाकाई ताकतों से अलग रखने की जितनी भी कोशिश करे उस पर बाहरी ताकतो और घटनाओं का असर पड़ता ही है।
(क) चीन-(याद रहे चीन सार्क का सदस्य नहीं है। उसे दक्षिण एशिया में भी प्राय: नहीं
शामिल किया जाता है।) चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम
भूमिका निभाते हैं। पिछले दस वर्षों में भारत और चीन के संबंध बेहतर हुए हैं। चीन की रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के साथ है और यह भारत-चीन संबंधों में एक बड़ी कठिनाई है। विकास की जरूरत और वैश्वीकरण के कारण एशिया महादेश के ये दो बड़े देश ज्यादा नजदीक आये हैं। सन् 1991 के बाद से इनके आर्थिक संबंध ज्यादा मजबूत हुए हैं।
अमेरिका-शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमेरिकी प्रभाव तेजी से बढ़ा है। अमेरिका
ने शीतयुद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों से अपने संबंध बेहतर किए हैं। वह भारत-पाक
के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों में आर्थिक सुधार हुए हैं और उदार
नीतियाँ अपनाई गई हैं। इससे दक्षिण एशिया में अमेरिकी भागीदारी ज्यादा गहरी हुई है। अमेरिका में दक्षिण-एशियाई मूल के लोगों की संख्या अच्छी-खासी है। फिर, इस क्षेत्र की जनसंख्या और बाजार का आकार भी भारी भरकम है। इस कारण इस क्षेत्र की सुरक्षा और शांति के भविष्य से अमेरिका के हित भी बंँधे हुए हैं।
संक्षेप में, दक्षिण एशिया को संघर्षों की आशंका वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहेगा
अथवा यह एक ऐसे क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरेगा जिसके सांस्कृतिक गुण-धर्म तथा व्यापारिक
हित एक है-यह बात किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा यहाँ के लोगों को सरकारों पर निर्भर है।
10. श्रीलंका के जातीय संघर्ष के कारणों को लिखें                   [B.M.2009A]
उत्तर-आजादी के बाद से लेकर अब तक श्रीलंका में लोकतंत्र कायम है, लेकिन श्रीलंका
को एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा है। यह चुनौती है श्रीलंका में जातीय संघर्ष की,
जिसकी मांँग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया जाय।
आजादी के बाद से श्रीलंका की राजनीति पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय के हितों की नुमाइंदगी
करने वालों का दबदबा रहा है। ये लोग भारत छोड़कर श्रीलंका आ बसी एक बड़ी तमिल आबादी के खिलाफ है। सिंहली राष्ट्रवादियों का मानना था कि श्रीलंका में तमिलों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जानी चाहिए क्योंकि श्रीलंग सिर्फ सिंहली लोगों का है। तमिलों के प्रति उपेक्षा भरे वरताव से एक उग्र तमिल राष्ट्रवाद की आवाज बुलंद हुई। 1983 के बाद से उग्र तमिल संगठन लिबरेशन टाइगर्स आफ तमिल ईलम’ (लिट्टे) श्रीलंकाई सेना के साथ सशस्त्र संघर्ष कर रहा है। इतने ‘तमिल ईलम’ यानी श्रीलंका के तमिलों के लिए एक अलग देश की मांँग की है।
1987 में भारतीय सरकार श्रीलंका के तमिल मसले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुई। भारत को
सरकार ने श्रीलंका से एक समझौता किया तथा श्रीलंका सरकार और तमिलों के बीच रिश्ते सामान्य करने के लिए भारतीय सेना को भेजा। भारतीय सेना की उपस्थिति को श्रीलंका की जनता ने कुछ खास पसंद नहीं किया और 1989 में भारत ने अपनी शांति सेना लक्ष्य हासिल किए बिना वापस बुला ली।
श्रीलंका के इस संकट का हिंसक चरित्र बरकरार है। बहरहाल, अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ के कर
में नार्वे और आइसलैंड, जैसे स्केंडिनेवियाई देश युद्धरत दोनों पक्षों को फिर से आपस में बातचीत करने के लिए राजी कर रहे है। श्रीलंका का भविष्य इन्हीं वार्ताओं पर निर्भर है।
11. भारत और अमरीका के संबंधों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अवलोकन करें। [B.M.2009A]
उत्तर-श्रीलंका के इस संकट का हिंसक चरित्र बरकरार है। बहरहाल, अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ
के रूप में नार्वे और आइसलैंड, जैसे स्केंडिनेवियाई देश युद्धरत दोनों पक्षों को फिर से आपस में
बातचीत करने के लिए राजी कर रहे हैं। श्रीलंका का भविष्य इन्हीं वार्ताओं पर निर्भर है।
वर्तमान समय में भारत और अमेरिका के संबंधों के मध्य दो नई बातें सामने आयी हैं। इन
दोनों बातों में प्रमुख प्रौद्योगिकी व अमेरिका में रह रहे अनिवासी भारतीय हैं। वास्तव में, इन दोनों
बातों का आपस में गहरा संबंध है, जिनका वर्णन निम्नलिखित है-
(i) बोइंग के 35 प्रतिशत तकनीकी कर्मचारी भारतीय मूल के हैं।
(ii) सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत के कुल निर्यात का 65 प्रतिशत अमेरिका को जाता है।
(iii)3 लाख भारतीय सिलीकन वैली में रहते हैं।
(iv) उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र की 15 प्रतिशत कम्पनियों की शुरुआत उन भारतीयों ने की
है, जो अमेरिका में रह रहे है।
चूंँकि आज विश्वभर में अमेरिकी वर्चस्व का दौर है, ऐसे समय में भारत को भी सोच-समझ
लेना चाहिए कि उसे अमेरिका के साथ किस प्रकार के संबंध कायम करने हैं। भारत या किसी अन्य देश के लिए यह तय कर पाना कोई आसान काम नहीं है। फिर भी भारत को ऐसी रणनीति अपनानी होगी, जिससे भारत अमेरिकी वर्चस्व का लाभ उठा सके। कुछ विद्वानों का मानना है कि भारत अमेरिका से अपना अलगाव बनाए रखे तथा अपना ध्यान अपनी राष्ट्रीय शक्ति को बढ़ाने में केन्द्रित करें।
निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि भारत व अमेरिकी संबंध अधिक जटिल हैं।
इनको किसी रणनीति पर निर्भर नहीं किया जा सकता। अत: भारत को अमेरिका के साथ संबंधों
के लिए रणनीतियों का एक मिश्रित रूप तैयार करना होगा।
12. स्वतंत्रता के बाद भारत के समक्ष राष्ट्र निर्माण की चुनौतियों पर एक निबंध लिखिए।
                                                        [Board Exam. 2009A; B.M.2009A]
उत्तर-ऐसे तो स्वतंत्र भारत के समक्ष अनेक समस्याएँ और चुनौतियाँ थीं, उनमें से तीन
प्रमुख चुनौतियाँ, जिन पर काबू पाए बिना हम अपने देश की एकता को बचाने में कामयाब नहीं
रह सकते थे, निम्नलिखित हैं-
(क) राष्ट्र की एकता और अखण्डता को बनाए रखने की चुनौती-स्वतंत्रता प्राप्ति
के बाद देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने का प्रश्न भारत के लिए प्राथमिक चुनौती
बन गया। देश विभाजन के समय ऐसा लगा कि भारतवर्ष की समग्रता समाप्त हो जाएगी। स्वतंत्र
भारत के लिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने का प्रश्न एकमात्र उद्देश्य हो गया।
स्वतंत्रता के बाद लगी सांप्रदायिक आग को यदि नहीं बुझाया जाता तो सदियों पुरानी भारत की
‘विविधता में एकता’ का सिद्धांत समाप्त हो जाता और आज तक जिस हैसियत से अन्तर्राष्ट्रीय
जगत में हम अपनी पहचान बनाए हैं, वह आज संभव नहीं रहता।
(ख) देश में लोकतंत्र बहाल करने की चुनौती–देश विभाजन के चलते हिंसा और
सांप्रदायिक दंगों के बाद देश को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया था जहाँ हम महसूस करने लगे थे कि देशांतर्गत लोकतंत्र को बहाल करके ही राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की रक्षा की जा सकती है। इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए संसदीय शासन-प्रणाली के आधार पर देश में प्रतिनिध्यात्मक लोकतंत्र की स्थापना की गई।
(ग) सम्पूर्ण समाज के विकास और भलाई को सुनिश्चित करने की चुनौती-स्वतंत्र
भारत की यह भी जिम्मेवारी थी कि वह संपूर्ण समाज की भलाई के लिए ऐसी कार्य योजनाओं को संचालित करे जिससे देश का सम्यक विकास हो सके। कार्य योजनाएँ ऐसी होने चाहिए जिससे पूरे देश के नागरिकों के बीच समानता स्थापित होने के साथ-साथ सामाजिक रूप से वंचित समूहों के हितों की रक्षा सहित धार्मिक एवं सांस्कृतिक संप्रदायों के हितों की भी विशेष रूप से रक्षा हो।
स्वतंत्र भारत के सम्मुख संपूर्ण समाज के विकास और भलाई को सुनिश्चित करना एक ऐसी जिम्मेवारी थी जिसे भारत को चुनौती के रूप में स्वीकार करना था।
13. भारत वांग्लादेश संबंधों में गतिरोध की वजह क्या है?             [B.M.2009A]
उत्तर-(i) भारत और बांग्लादेश के बीच गतिरोध का मुख्य कारण फरक्का बांध और
उसके जल बंटवारे को लेकर है। इस बांध को बनाकर भारत हुगली नदी में पानी के स्तर को
बढ़ाये रखना चाहता है, जबकि इस बांध के कारण बांग्लादेश का मानना है कि उसे उचित पानी
नहीं मिल पायेगा। साथ ही बांग्लादेश का कहना है कि भारत द्वारा मानसून के समय पानी छोड़ने
की स्थिति में बांग्लादेश में बाढ़ की स्थिति पैदा होगी। गंगा जल के बंटवारे को लेकर भी दोनों
देशों के बीच विवाद कायम है।
(ii) बांग्लादेश को ‘तीन बीघा कॉरीडोर’ के स्थानांतरण को लेकर भी दोनों देशों में
मतभेद है। कारण 26 जून, 1992 ई. को भारत ने तीन बीघा जमीन बांग्लादेश के इस क्षेत्र को
मैनलैण्ड से जोड़ने के लिए लीज पर दिया था। लीज से संबंधित कार्रवाई को लेकर मतभेद है।
(iii) भारतीय जनमानस बांग्लादेशी शरणार्थियों को लेकर भी चिंतित है। उन्हें लगता है कि
इस पलायन से भारत के जनसांख्यिकी पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
(iv) भारत में बांग्लादेश के रास्ते घुसपैठ करनेवाले हूजी आतंकियों द्वारा फैलाये जा रहे
आतंकी घटनाओं का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच विवाद पैदा करता है।
(v) बांग्लादेश में उत्तर-पूर्व के आतंकी संगठन उल्फा को प्रश्रय दिए जाने के कारण
भारत-बांग्लादेश के संबंधों में खटास विद्यमान है।
(vi) भारत-बांग्लादेश सीमा से पार करनेवाले लोगों को भारतीय सेना द्वारा मार गिराये जाने
का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच मतभेद रखा करता है।
14. 1962 में हुए चीन-भारत युद्ध के कारणों का वर्णन करें।
                                                          [Board Exam.2009A; B.M.2009A]
उत्तर-भारत ने चीन के साथ अपने रिश्तों की शुरूआत बड़े दोस्ताना ढंग से किया। सन्
1949 में चीन में साम्यवादी शासन की स्थापना हुई और भारत उसे मान्यता देने वाले देशों में
प्रथम था। उसके काफी बाद तक चीन-भारत के संबंध मित्रतापूर्ण रहे। लेकिन 1958 के बाद इस
संबंधों में दरार पड़ने लगी जब चीन ने भारत के समक्ष सीमा विवाद का प्रश्न उठा दिया और
1962 में चीन ने भारत पर अचानक आक्रमण कर दिया तथा नेफा एवं लद्दाख के बहुत बड़े क्षेत्र
को अपने कब्जे में कर लिया। इस आक्रमण के पीछे निम्न प्रबल कारण थे-
(i) चीन द्वारा अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना।
(ii) चीनी शासकगण एशिया के अन्य देशों को प्रभावित करके, इस क्षेत्र में अपना नेतृत्व
स्थापित करना चाहता था।
(iii) भारत की निर्बलता को उजागर करके उसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपमानित करना।
(iv) विश्व में चीन की आर्थिक व राजनीतिक प्रणाली की सर्वोच्चता प्रदर्शित करना।
(v) सोवियत संघ को यह दिखाना कि भारत की गुटनिरपेक्षता एक दिखावा है।
(vi) चीन की जनता को आंतरिक समस्याओं से ध्यान हटाकर दूसरी ओर आकृष्ट करना।
(vii) चीनी शासकों को अनुमान था कि युद्ध से भारत का आर्थिक विकास प्रभावित होगा
जिससे असंतोष फैलेगा। नेहरू के नेतृत्व का पतन होगा। साम्यवादी लोग सत्ता प्राप्त करेंगे।
इस युद्ध में चीन ने भारत को हराया और युद्ध के कारण दोनों देशों के संबंध टूट गये। भारत
को अमेरीका व सोवियत संघ की सहायता मिली और युद्ध रुक गया। चीन ने भारत के 30,000
वर्ग मील भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया जो आज भी कायम है। इसी अपमानजनक पराजय के बाद भारत ने अपनी सैनिक शक्ति बढ़ाने का संकल्प लिया।
                                                   ★★★

Leave a Comment

image
error: Content is protected !!