12-economics

bihar board class 12 economics notes | परिचय

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bihar board class 12 economics notes | परिचय

 परिचय
                                           [Introduction]
                             स्मरणीय बिन्दु (Point of Remember)
1. अर्थव्यवस्था (Economy)-अर्थव्यवस्था एक ऐसी विधि है जिसके अन्तर्गत लोग
उत्पादन, विनिमय तथा वितरण प्रक्रिया के माध्यम से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के
लिए आजीविका अर्जित करते हैं।
2. अर्थव्यवस्था के प्रकार (Types of Economy)-(i) साधारण अर्थव्यवस्था, (ii) जटिल
अर्थव्यवस्था, (iii) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था तथा (iv) समाजवादी अर्थव्यवस्था ।
3. साधारण अर्थव्यवस्था (Simple Economy)-ग्रामीण अर्थव्यवस्था साधारण अर्थव्यवस्था
है।
4. जटिल अर्थव्यवस्था (Complex Economy)-आधुनिक अर्थव्यवस्था जटिल
अर्थव्यवस्था है।
5. वस्तुएँ (Goods)-लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मूर्त तथा स्पर्शनीय सामग्री
को वस्तु कहते हैं। खाद्य पदार्थ तथा कपड़े वस्तुओं के उदाहरण हैं।
6. सेवाएँ (Services)-ये अमूर्त तथा अदृश्य हैं । डॉक्टर तथा अध्यापक के कार्य सेवाओं
के उदाहरण हैं।
7. व्यक्ति (Individual)-यह एक व्यक्तिगत निर्णय लेने की इकाई है। यह एक व्यक्ति
या समूह हो सकता है।
8. ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारभूत आर्थिक समस्याएंँ (Basiceconomic problems
faced by the village economy)-(i) गाँव के सीमित साधनों का आबंटन तथा
(ii) अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का वितरण ।
9. ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारभूत समस्याओं के समाधान की विधियाँ (Methods
of solving the basic problems faced by the village economy)-कीमत तंत्र
तथा सरकार/पंचायत/सरकारी प्रतिनिधि ।
10. अर्थशास्त्र में मुख्य चिंताएँ (Main Concerns of Economy)-(i) वस्तुओं का
उपभोग, (ii) वस्तुओं का उत्पादन तथा (ii) वस्तुओं का विनिमय ।
11. पदार्थ या सामग्री (Commodities)-वस्तुओं तथा सेवाओं को सम्मिलित रूप से
सामग्री कहते हैं।
12. पदार्थ के प्रकार (Type of Commodities)-वस्तुओं तथा सेवाओं को सम्मिलित
रूप से सामग्री कहते हैं।
13. उपभोक्ता (Consumer)-आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं का उपभोग करने
वाले को उपभोक्ता कहते हैं।
14. उत्पादक (Producer)-उत्पादक वह व्यक्ति है जो किसी वस्तु या सेवा का उत्पादन
करता है।
15. दुर्लभता (Scarcity)-दुर्लभता से अभिप्राय आवश्यकताओं की तुलना में सीमित साधनों
का होना है। यह सभी आर्थिक समस्याओं की जननी है।
16. प्रत्येक व्यक्ति के द्वारा विविध उपभोग (Diversified Consumption of Every
Individual)-प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न प्रकार की वस्तुओं तथा सेवाओं का उपभोग
करता है।
17. मॉडल (Model)-यह वास्तविक विश्व बाजार की सरलीकृत तस्वीर है।
18. मध्यवर्ती वस्तुएँ (Intermediate Goods)-ये वे वस्तुएँ हैं जो अन्य वस्तुओं के
उत्पादन में प्रयोग की जाती हैं।
19. बाजार (Market)-बाजार का अर्थ क्रेताओं तथा विक्रेताओं के बीच किसी साधन या
वस्तु के लेन-देन के जाल-सूत्र से है।
20. बाजार के प्रकार (Types of Market)-(i) पूर्ण प्रतियोगिता, (ii) एकाधिकार प्रतियोगिता
तथा (iii) अपूर्ण प्रतियोगिता ।।
21. मांँग (Demand)-मांँग किसी वस्तु की वह मात्रा है जिसे एक व्यक्ति एक दिए हुए
मूल्य पर खरीदने के लिए तैयार होता है।
22. मांँग के प्रकार (Types of Demand)-(i) व्यक्तिगत मांग तथा (ii) बाजार मांँग।
23. व्यक्तिगत मांँग या उपभोक्ता मांँग (Consumer’s Demand)-उपभोक्ता माँग तालिका
ऐसी मांँग तालिका को कहते हैं जिसमें किसी वस्तु की उन विभिन्न मात्राओं को दर्शाती
है जो एक व्यक्तिगत उपभोक्ता द्वारा उसके विभिन्न मूल्यों पर क्रय की जाती है।
24. बाजार मांँग (Market Demand)-एक बाजार के विभिन्न उपभोक्ताओं की मांँग के
जोड़ को बाजार मांँग कहते हैं।
25. व्यक्तिगत या उपभोक्ता मांँग तालिका (Individual or Consumer’s Demand
Schedule)-व्यक्तिगत मांँग तालिका ऐसी मांँग तालिका को कहते हैं जिसमें किसी
वस्तु की उन विभिन्न माजाओं को दर्शाया जाता है जो एक व्यक्तिगत उपभोक्ता द्वारा
उसके विभिन्न मूल्यों पर क्रय की जाती है।
26. बाजार मांँग तालिका (Market Demand Schedule)-बाजार माँग तालिका ऐसी
माँग तालिका को कहते हैं जिसमें किसी वस्तु की उन विभिन्न मात्राओं को दर्शाया जाता
है जो सभी उपभोक्ताओं द्वारा कुल मिलाकर उसके विभिन्न मूल्यों पर क्रय की जाती है
27. व्यक्तिगत पूर्ति तालिका (Individual Supply Curve)-व्यक्तिगत पूर्ति तालिका
उस तालिका को कहते हैं जिसमें वस्तु की उन विभिन्न इकाइयों को दर्शाया जाता है जो
एक बाजार में एक निश्चित समय में विभिन्न मूल्यों पर बेची जाती हैं।
28. बाजार पूर्ति तालिका (Market Supply Schedule)-बाजार पूर्ति तालिका एक
वस्तु की उन विभिन्न मात्राओं को दर्शाती है जो एक निश्चित समय पर विभिन्न मूल्यों
पर बाजार में बेचे जाने के लिए उपलब्ध है।
29. साम्य बाजार (Equilibrium Market)-साम्य बाजार बाजार की उस स्थिति को
कहते हैं जिसमें बाजार मांँग बाजार पूर्ति के बराबर होती है।
30. अवसर लागत (Opportunity Cost)-अवसर लागत वह लागत है जो उत्पादन के
एक विशेष साधन को उसके वर्तमान प्रयोग में बने रहने के लिए प्रेरित करती है।
31. उत्पादन संभावना (Production Possibility)-किसी वस्तु की अवसर लागत उस
विकल्प को त्यागने की लागत है जिसे वस्तु के उत्पादन में लगे साधनों द्वारा उत्पादित
किया जा सकता है।
   एन०सी०आर०टी० पाठ्यपुस्तक एवं परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
   (NCERT Textbook and Other Important Questions & Answer for Examination)
                                          रिक्त स्थान का पूर्ति
                                       (Fill up the Blanks)
(i) संसाधनों की किफायत से अभिप्राय साधनों के……….. प्रयोग से है।
(ii) आर्थिक समस्या संसाधनों की दुर्लभता तथा उसके…….. के कारण उत्पन्न होती है।
(iii) यदि एक अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी है तो हम उत्पादन संभावना वक्र………
उत्पादन कर रहे हैं।
(iv) उत्पादन के चार साधन हैं-(a) भूमि, (b) श्रम, (c) पूँजी तथा (d)…….. ।
(v) उत्पादन संभावना वक्र…………से दायें की ओर ढालू होता है।
(vi) यदि उत्पादन संभावना वक्र मूल बिन्दु के नातेदर (Concave) है तो सीमान्त अवसर
लागत……….रही है।
(vii) यदि सीमान्त अवसर लागत……….. है तो उत्पादन संभावना वक्र एक सरल रेखा है।
(viii) उत्पादन संभावना वक्र दाई ओर खिसकेगा जब अर्थव्यवस्था में………. होता है।
(ix) संसाधन के आबंटन की समस्या में…………समस्याएंँ निहित हैं।
(x) जब अर्थव्यवस्था उत्पादन संभावना वक्र पर स्थित किसी बिन्दु पर उत्पादन करती है तो
इसका अर्थ यह है कि अपने संसाधनों का………….उपयोग कर रही है।
(xi) उत्पादन संभावना वक्र को………….रेखा वक्र भी कहते हैं क्योंकि यह रेखा
दर्शाती है कि किसी एक वस्तु के स्थापन पर दूसरी वस्तु का अधिक उत्पादन किया जा
सकता है अर्थात् संसाधनों के हस्तांतरण द्वारा एक वस्तु को दूसरी वस्तु में परिवर्तित किया
जा सकता है।
उत्तर-(i) बुद्धिमत्तापूर्ण, (ii) वैकल्पिक प्रयोग, (iii) के अंदर, (iv) उद्यम, (v) नीचे,
(vi) बढ़, (vii) स्थिर, (viii) विकास, (ix) तीन, (x) सम्पूर्ण, (xi) परिवर्तन ।
                                         अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न
                          (Very Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1. अर्थशास्त्र क्या है।
उत्तर-अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो विभिन्न प्रयोगों वाले सीमित साधनों और उद्देश्यों से
संबंध रखने वाले मानवीय व्यवहार का अध्ययन करता है।
प्रश्न 2. दुर्लभ साधनों से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-दुर्लभ साधनों से अभिप्राय साधनों की पूर्ति का उनकी माँग से कम होना है।
                                 पूर्ति < मांँग
प्रश्न 3. असीमित आवश्यकताओं से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-असिमित आवश्यकताओं से यह अभिप्राय है कि माववीय, आवश्यकताओं की
कोई सीमा नहीं है। कोई भी मनुष्य अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकता।
प्रश्न 4. अर्थशास्त्र की कोई दो शाखाएँ लिखें।
उत्तर-व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र ।
प्रश्न 5.व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में मुख्य अन्तर क्या है ?
उत्तर-व्यष्टि अर्थशास्त्र में एक विशेष फर्म, गृहस्थ, व्यक्तिगत कीमत, मजदूरी तथा विशेष वस्तु का अध्ययन किया जाता है जबकि समष्टि अर्थशास्त्र में कुल औसतों तथा समूहों का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 8. विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई विभिन्न परिभाषाओं के नाम लिखें।
उत्तर-(i) धन की परिभाषा               :एडम स्मिथ
(ii) कल्याण की परिभाषा                :ए० मार्शल
(iii) दुलर्भता की परिभाषा               : एल० राबिन्सन
(iv) विकास की परिभाषा                : पाल० ए० सेम्युलसन
प्रश्न 9. व्यष्टि अर्थशास्त्र क्या है ?
उत्तर-इसे व्यक्ति अर्थशास्त्र भी कहते हैं। यह अर्थशास्त्र का वह भाग है जिसमें
व्यक्तिगत अर्थिक इकाइयों के व्यवहारों का अध्ययन किया जाता है। इसमें एक उपभोक्ता, एक
उत्पादक, एक फर्म या एक उद्योग की आर्थिक क्रियाओं, व्यक्तिगत आय, किसी विशेष साधन
की कीमत का निर्धारण आदि का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 10. समष्टि अर्थशास्त्र क्या है?
उत्तर-यह अर्थशास्त्र का वह भाग है जिसमें सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक
तथ्यों में पाये जाने वाले संबंधों की व्याख्या की जाती है । इसमें सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था से संबंधित
विभिन्न योगों और औसतों का अध्ययन किया जाता है। इससे राष्ट्रीय आय, रोजगार, सामान्य
कीमत स्तर आदि का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 11. आर्थिक समस्या क्या है?
उत्तर-आर्थिक समस्या चयन की समस्या है। यह उन साधनों की दुलर्भता के कारण
उत्पन्न होती है जिनके वैकल्पिक प्रयोग हैं।
प्रश्न 12. आर्थिक समस्या के उत्पन्न होने के मुख्य कारण कौन-से हैं ?
उत्तर-आर्थिक समस्या के उत्पन होने के मुख्य कारण हैं-(i) असीमित आवश्यकताएँ,
(ii) सीमित साधन, (iii) साधनों के वैकल्पिक प्रयोग।
प्रश्न 13. एक साधन को कब दुलर्भ कहा जाता है ?
उत्तर-एक साधन को दुर्लभ तब कहा जाता है जब उसकी माँग उसकी पूर्ति से अधिक
होती है।
प्रश्न 14. क्या कोई ऐसी अर्थव्यवस्था हो सकती है जिसे केन्द्रीय समस्याओं का
सामना न करना पड़ता हो?
उत्तर-नहीं, क्योंकि सब अर्थव्यवस्थाओं में संसाधन दुर्लभ होते हैं।
प्रश्न 15. आर्थिक साधनों की एक विशेषता लिखें।
उत्तर-आर्थिक साधन दुर्लभ होते हैं।
प्रश्न 16. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्याओं का समाधान किस प्रकार
किया जाता है?
उत्तर- पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्याओं का समाधान कीमत तंत्र के द्वारा
किया जाता है।
प्रश्न 17. “क्या उत्पादन किया जाए” की समस्या बतायें ।
उत्तर-‘क्या उत्पादन किया जाए’ की समस्या से अभिप्राय यह निर्णय करना है कि
सीमित साधनों की सहायता से किन वस्तुओं को कितनी मात्रा में उत्पन्न किया जाए ताकि
मनुष्य की अधिकतम आवश्कताओं को संतुष्ट किया जा सके।
प्रश्न 18. “कैसे उत्पादन किया जाए” की समस्या से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-यह समस्या उत्पादन तकनीक के चुनाव से संबंधित है। उत्पादन की दो विधियाँ
हैं-श्रम प्रधान तथा पूँजी प्रधान । हमें यह निर्णय लेना है कि वस्तुओं का उत्पादन किस विधि
से किया जाए जिससे प्रति वस्तु लागत कम से कम हो।
प्रश्न 19. “किसके लिये उत्पादन किया जाए” की समस्या से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-“किसके लिये उत्पादन किया जाए” की समस्या राष्ट्रीय आय के विवरण की
समस्या है। उत्पादन उन लोगों के लिये किया जाता है जिनमें क्रय की क्षमता होती है और क्रम
क्षमता राष्ट्रीय आय के वितरण की प्रकृति पर निर्भर करती है।
प्रश्न 20. दुर्लभता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-दर्लभता वह स्थिति है जिसमें मनुष्य की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए
साधन काफी नहीं होते अर्थात् साधन में या दुर्लभ होते है।
प्रश्न 21. साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से अभिप्राय यह है कि साधनों का प्रयोग कई विधियों
से किया जा सकता है।
जैसे-दूध का प्रयोग दही, रसगुल्ला, चाय आदि के लिए किया जा सकता है।
-प्रश्न 22. साधनों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-साधनों से अभिप्राय उत्पादन के साधनों से है जिनके द्वारा वस्तुओं और सेवाओं का
उत्पादन होता है।
प्रश्न 23. आय के वितरण की समस्या को किस समस्या से जाना जाता है ?
उत्तर-आय के वितरण की समस्या को “किसके लिये उत्पादन किया जाए” की समस्या
से जाना जाता है।
प्रश्न 24. कीमत तंत्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर- कीमत तंत्र प्रणाली से अभिप्राय मांग तथा पूर्ति शक्तियों से है जो अर्थव्यवस्था
में एक वस्तु की साम्य कीमत निर्धारित करती है।
प्रश्न 25. उत्पादन सम्भावना वक्र का नीचे की ओर खिसकना किस बात का
संकेत देता है?
उत्तर-उत्पादन संभावना वक्र का नीचे की ओर खिसकना इस बात का संकेत देता है कि
साधनों का अल्प तथा अकुशल प्रयोग हो रहा है।
प्रश्न 26. आर्थिक नियोजन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-आर्थिक नियोजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उपलब्ध साधनों तथा निर्धारित
उद्देश्यों की पूर्ति को ध्यान में रखकर आर्थिक निर्णय लिये जाते हैं।
प्रश्न 27. समाजवादी अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्याओं का समाधान कैसे किया
जाता है?
उत्तर-समाजवादी अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्याओं का समाधान नियंत्रित कीमत
प्रणाली तथा केन्द्रीय नियोजन प्राधिकरण के द्वारा किया जाता है।
प्रश्न 28. समस्त अर्थव्यवस्थाओं की केन्द्रीय समस्याएँ एक समान क्यों होती हैं ?
उत्तर-सभी अर्थव्यवस्थाओं की केन्द्रीय समस्याएँ एक समान इसलिए होती हैं क्योंकि
सभी अर्थव्यवस्थाओं में संसाधनों की पूर्ति सीमित है।
प्रश्न 29. आर्थिक समस्या को कभी-कभी ‘मितव्ययता (किफायतीकरण) की
समस्या’ क्यों कहते हैं ?
उत्तर-क्योंकि उत्पादन के संसाधन दुर्लभ होते हैं अतः इन्हें मितव्ययता से खर्च करने की
आवश्यकता होती है।
प्रश्न 30. कोयला प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, परन्तु फिर भी यह दुर्लभ है और
कच्ची सब्जियाँ कम होती हैं फिर भी ये दुर्लभ नहीं हैं । क्यों ?
उत्तर-प्रचुर मात्रा में कोयला पाये जाने के बावजूद यह इसलिए दुर्लभ है क्योंकि इसकी
पूर्ति इसकी मांँग से कम है। इसके विपरीत कच्ची सब्जियों की पूर्ति इनकी माँग से अधिक है।
प्रश्न 31. सीमान्त अवसर लागत को उत्पादन संभावना बक्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर-किसी एक विशेष वस्तु की सीमान्त अवसर लागत किसी अन्य वस्तु की वह मात्रा
है जिसका त्याग किया जाता है। किसी दी हुई वस्तु की मात्रा का उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी
वस्तु का उत्पादन कम करना पड़ेगा । यदि अर्थव्यवस्था में क्रिकेट बैट का उत्पादन बढ़ाना है
तो साड़ियों का उत्पादन कम करना पड़ेगा।
प्रश्न 32. यदि साधनों की पूर्ति असीमित होती तो क्या अर्थिक समस्या उत्पन्न
होती?
उत्तर-संसाधनों की पूर्ति असीमित होने पर आर्थिक समस्या उत्पन्न न होती यदि साधनों
के वैकल्पिक प्रयोग न होते ।
प्रश्न 33. साधनों की मितव्ययता का क्या अर्थ है ?
उत्तर-साधनों की मितव्ययता का अर्थ है साधनों को सर्वोत्तम विधि से प्रयुक्त करना
जिससे अधिकतम प्रतिफल प्राप्त हो।
प्रश्न 34. छोटे भारतीय गाँव की अर्थव्यवस्था किस प्रकार की अर्थव्यवस्था है?
उत्तर-यह एक सरल अर्थव्यवस्था है।
प्रश्न 35 उपभोग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-उपभोग से अभिप्राय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं का सेवन करना
है।
प्रश्न 36. उपभोक्ता वस्तुएँ किन्हें कहते हैं ?
उत्तर-उपभोक्ता वस्तुएँ उन वस्तुओं को कहते हैं जिनका सेवन उपभोग के लिए किया
जाता है।
प्रश्न 37. मध्यवर्ती वस्तुएंँ किन्हें कहते हैं?
उत्तर-उन उत्पादित वस्तुओं को मध्यवर्ती वस्तुएँ कहा जाता है जिनका सेवन किन्हीं
वस्तुओं के उत्पादन के लिए किया जाता है। डबल रोटी बनाने के लिए गेहूंँ का आटा मध्यवर्ती
वस्तु है।
प्रश्न 38. जीवन (अर्थव्यवस्था) की आधारभूत अर्थिक क्रियायें क्या हैं ?
उत्तर-जीवन की आधारभूत आर्थिक क्रियाएँ वस्तुओं का उत्पादन, उपभोग तथा विनिमय
है।
प्रश्न 39. किस रूप में उपभोक्ता विवेकशील हैं ?
उत्तर-उपभोक्ता इस रूप में विवेकशील हैं कि वे उपभोग के लिए वस्तुओं का चुनाव
करते समय अपने स्वाद तथा प्राथमिकताओं का ध्यान रखते हैं।
प्रश्न 40. किस रूप में विक्रेता विवेकशील हैं?
उत्तर-विक्रेता किसी वस्तु की मात्रा का विक्रय करने का निर्णय लेते समय इस बात का
ध्यान रखते हैं कि उन्हें अधिकतम लाभ हो।
प्रश्न 41. वास्तविक अर्थशास्त्र में किस बात का अध्ययन करते हैं ?
उत्तर-वास्तविक अर्थशास्त्र में हम वास्तविक स्थिति का अध्ययन करते हैं। दूसरे शब्दों
में इसमें “क्या है” का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 42. आदर्श अर्थशास्त्र किसे कहते हैं ?
उत्तर-आदर्श अर्थशास्त्र उस अर्थशास्त्र को कहते हैं जिसके अतंर्गत “क्या होना चाहिए
और क्या नहीं होना चाहिए” का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 43.अर्थशास्त्र की उत्पादन संभावनाओं से आपका क्या अभिप्राय है?[NCERT, T.B.Q.2.]
उत्तर-अर्थशास्त्र की उत्पादन संभावनाओं से अभिप्राय है कि कोई भी अर्थव्यवस्था,
सीमित संसाधनों तथा तकनीकी से दो वस्तुओं के विभिन्न संयोगों का उत्पादन कर सकती है।
प्रश्न 44. सीमान्त उत्पादन संभावना क्या है?               [NCERT T.B. Q.3]
उत्तर-सीमान्त उत्पादन संभावना दो वस्तुओं के उन संयोगों को दर्शाती है जिनका उत्पादन
अर्थव्यवस्था के संसाधनों को पूर्ण रूप से उपभोग करने पर किया जाता है।
प्रश्न 45. अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु की विवेचना कीजिए ? [NCERT T.B.Q.4]
उत्तर-अर्थशास्त्र की विषय-वस्तु है विभिन्न संभावित वस्तुओं तथा तथा सेवाओं के
उत्पादन के लिए दुर्लभ संसाधनों का विविधान (allocation) कैसे किया जाए और उन
व्यक्तियों के बीच जो अर्थव्यवस्था के अंग हैं, उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं का वितरण किस
प्रकार किया जाए।
प्रश्न 46. सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण से क्या अभिप्राय है ? (NCERT T.R.Q.6]
उत्तर-सकारात्मक विश्लेषण से अभिप्राय उस विश्लेषण से है जिसके अंतर्गत हम यह
अध्ययन करते हैं कि विभिन्न क्रियाविधियाँ किस प्रकार कार्य करती हैं।
प्रश्न 47. आदर्शक आर्थिक विश्लेषण से क्या अभिप्राय है ? [NCERT TB. Q.7],
उत्तर-आदर्शक आर्थिक विश्लेषण से अभिप्राय उस विश्लेषण से है जिसके अंतर्गत हम
इस बात का अध्ययन करते हैं कि कौन-सी कार्य विधियाँ हमारे अनुकूल हैं और कौन-सी
प्रतिकूल।
                                           लघु उत्तरात्मक प्रश्न
                             (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1. “क्या उत्पादन किया जाए” की समस्या समझाइए।
उत्तर-“क्या उत्पादन किया जाए” की समस्या (Problem ofWhat to Produce)-
प्रत्येक अर्थव्यवस्था की सबसे पहली समस्या यह है कि सीमित साधनों से किन वस्तुओं तथा
सेवाओं का उत्पादन किया जाए जिससे हम अपनी अधिकतम आवश्यकताओं की संतुष्टि कर
सकें। इस समस्या के उत्पन्न होने का मुख्य कारण यह है कि हमारी आवश्यकतायें अधिक
है और उनकी पूर्ति करने के लिये साधन सीमित हैं तथा उनके वैकल्पिक प्रयोग हैं। इस
समस्या के अंतर्गत दो बातों का निर्णय करना पड़ता है।
पहला निर्णय लेना पड़ता है कि हम किस प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन करें-उपभोक्ता
वस्तुओं (जैसे चीनी, घी आदि) का या पूँजीगत वस्तुओं (मशीनों, टैक्टर आदि या दोनों प्रकार
की वस्तुओं) का । दूसरा निर्णय यह लेना पड़ता है कि उपभोक्ता वस्तुओं का कितना उत्पादन
किया जाए और पूँजीगत वस्तुओं का कितना ।
प्रश्न 2. एक आर्थिक समस्या क्यों उत्पन्न होती है ? “कैसे उत्पादन किया जाए”
की समस्या को समझाइए।
उत्तर-आर्थिक समस्या असीमित आवश्यकताओं तथा सीमित साधनों , (जिनके वैकल्पिक
प्रयोग भी हैं) के कारण उत्पन्न होती है।
कैसे उत्पादन किया जाए? (How to Produce)-यह अर्थव्यवस्था की दूसरी मुख्य
केन्द्रीय समस्या है। इस समस्या का संबंध उत्पादन की तकनीक का चुनाव करने से है। इसके
लिए श्रम-प्रधान तकनीक (Labour-intensive technique) काम में ली जाए या पूँजी-प्रधान तकनीक (Capital-intensive technique) प्रयोग में लाई जाए। एक अर्थव्यवस्था को यह चुनाव करना पड़ता है कि वह कौन-सी तकनीक का प्रयोग किस उद्योग में करे । सबसे कुशल तकनीक वह है जिसके प्रयोग से समान मात्रा का उत्पादन करने के लिए सीमित साधनों की सबसे कम आवश्यकता होती है। उत्पादन न्यूनतम लागत पर करना संभव होता है। उत्पादन कुशलतापूर्वक किया जा सकता है। एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों की उपलब्धता और उनके मूल्यों पर उत्पादन की तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए।
प्रश्न 3. एक अर्थव्यवस्थाएंँ की तीन आधारभूत आर्थिक क्रियायें लिखें।
उत्तर-एक अर्थव्यवस्था की आधारमूल्य मूलभूत आर्थिक क्रियाएँ (Basiceconomic
ativities of an economy)-(i) उत्पादन, (ii) उपभोग तथा (iii) पूँजी निर्माण या निवेश ।
(i) उत्पादन (Production)-उत्पादन से अभिप्राय उस क्रिया से है जिसके फलस्वरूप
मूल्य का निर्माण होता है या वर्तमान वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि होती है। वस्तुओं के रूप
परिवर्तन, स्थान परिवर्तन आदि से उनके मूल्यों में वृद्धि होती है। इसे ही उत्पादन कहा
जाता है।
(ii) उपभोग (Consumption)-व्यक्तिगत अथवा सामूहिक मानवीय आवश्यकताओं
की प्रत्यक्ष पूर्ति के लिए वस्तुओं तथा सेवाओं के प्रयोग को उपभोग कहते हैं।
(iii) पूँजी निमार्ण (Capital Formation)-एक लेखा वर्ष में अर्थव्यवस्था की
भौतिक पूँजी के स्टॉक में वृद्धि को पूँजी निर्माण या निवेश कहते हैं। दूसरे शब्दों में एक लेखा
वर्ष में “उपभोग पर उत्पादन का आधिक्य” पूँजी निर्माण कहलाता है।
प्रश्न 4. एक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं के नाम लिखें । ये समस्याएँ क्यों
उत्पन्न होती हैं ?
उत्तर-एक अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ ( Central problems of an
economy)- (i) क्या उत्पन्न किया जाए ? (ii) कैसे उत्पन्न किया जाए और (iii) किसके
लिए उत्पन्न किया जाए।
केन्द्रीय समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण (Causes of arising of economic
problems)-(i) मनुष्य की आवश्यकताओं का असीमित होना ।
(ii) असीमित आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये सीमित साधनों का होना ।
(iii) सीमित साधनों के वैकल्पिक प्रयोग होना।
प्रश्न 5. उत्पादन सम्भावना वक्र की विशेषतायें लिखें।
उत्तर-(i) उत्पादन संभावना वक्र की विशेषतायें (Properties of P.P.C)-उत्पादन
संभावना वक्र की विशेषताएँ निम्नलिखित है-
(i) उत्पादन संभावना वक्र का ढलान नीचे की ओर दाई तरफ होता है (Down:vard
sloping of PPC)-उत्पादन संभावना वक्र का ढलान ऊपर से नीचे की ओर बाएंँ से दाएँ
होता है। इसका कारण यह है कि पूर्ण रोजगार की स्थिति में दोनों वस्तुओं के उत्पादन को
एक साथ नहीं बढ़ाया जा सकता है। यदि एक वस्तु जैसे Y का उत्पादन अधिक किया जाए
तो दूसरी वस्तु जैसे Y का उत्पादन कम हो जाएगा।
(ii) उत्पादन संभावना वक्र मूल बिन्दु के
अवतल (Concave to Origin)-यह वक्र बिन्दु
के नतोदर (Concave) होता है। इसका कारण
यह है कि X वस्तु की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई का
उत्पादन करने के लिए Y वस्तु की पहले की
तुलना में अधिक इकाइयों का त्याग करना होगा
अर्थात् X वस्तु की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई का
उत्पादन करने की अवसर लागत Y वस्तु के
उत्पादन में होने वाली हानि के रूप में बढ़ने की
प्रवृत्ति प्रकट होता है अर्थात् उत्पादन बढ़ती अवसर
लागत के नियम के आधार पर होता है।
प्रश्न 6. अवसर लागत की परिभाषा दीजिए । एक उदाहरण की सहायता से इसकी
व्याख्या करें।
अथवा, अवसर लागत का अर्थ बताइए।
उत्तर-अवसर लागत (Opportunity Cost)- “किसी साधन के प्रयोग करने की
अवसर लागत, अन्य वस्तु की वह मात्रा है जिसका त्याग करना पड़ता है।” किसी वस्तु की
अवसर लागत अगले सर्वश्रेष्ठ विकल्प को त्यागने की लागत है। संसाधन सीमित होते हैं और
उनके प्रयोग वैकल्पिक होते हैं। एक विशिष्ट साधन को एक ही समय पर विभिन्न उपयोगों
में प्रयोग नहीं किया जा सकता। एक भूमि के टुकड़े पर यदि 10 क्विंटल गेहूँ या 8 क्विटल
चावल पैदा होता है तो 10 क्विंटल गेहूँ की अवसर लागत 8 क्विंटल चावल है। उत्पादन
संभावना वक्र पर एक विशेष वस्तु की सीमान्त अवसर लागत किसी दूसरी वस्तु की वह मात्रा
है जिसका त्याग करना पड़ता है।
क्रिकेट बैट का उत्पादन (हजारों में)        0    1    2    3     4   5
साड़ी का उत्पादन (लाखों में)               75  70  62  50    30  0
तालिका के अनुसार यदि एक हजार क्रिकेट बैट का उत्पादन बढ़ाना है तो ( 70-62)8
लाख साड़ियों का उत्पादन कम करना होगा। 1000 क्रिकेट बैट की सीमान्त अवसर लागत
8 लाख साड़ियों के बराबर है।
प्रश्न. 7. एक अर्थव्यवस्था दो वस्तुओं टी-शर्ट और सेल-फोन का उत्पादन करती
है। नीचे दी गई तालिका में इसके उत्पादन करती है। नीचे दी गई तालिका में इसके
उत्पादन की विभिन्न संभावनाओं को अभिव्यक्त किया गया है। सीमान्त अवसर लागत
की गणना विभिन्न संयोगों के संदर्भ में कीजिए।
 
प्रश्न 8. निम्नलिखित में अन्तर बताएंँ-उत्पादन वक्र के अंदर बिन्दु का उत्पादन
संभावना वक्र पर बिन्दु की ओर खिसकाव तथा निचले उत्पादन संभावना वक्र से बिन्दु
का ऊपरी उत्पादन संभावना वक्र पर बिन्दु की ओर खिसकाव ।
उत्तर-पहली अवस्था (First Situation)-
चित्र से पता चलता है कि पहला बिन्दु x का यह
बिन्दु दर्शाता है कि साधनों का अल्प तथा अकुशल
प्रयोग हो रहा है। जब यह बिन्दु खिसककर उत्पादन
संभावना वक्र पर स्थिर बिन्दु A या B पर आता है
कि साधनों का पूर्णता तथा कुशलता से प्रयोग किया
जा रहा है।
दूसरी अवस्था
(Second’Situation)-
A विन्दु का B बिन्दु की
ओर खिसकना वृद्धि
(Growth) को इंगित करता
है।
प्रश्न 9. एक अर्थव्यवस्था सदैव उत्पादन  संभावना वक्र पर ही उत्पादन करती है,
उसके अंदर नहीं । इस कथन के पक्ष-विपक्ष में तर्क दें।
उत्तर-यह कहना गलत है कि एक
अर्थव्यवस्था सदैव उत्पादन संभावना वक्र पर ही
उत्पादन करती है। यह तभी हो सकता है जब
अर्थव्यवस्था में साधनों का पूर्णतः तथा कुशलता
से प्रयोग किया जा रहा हो । यदि साधनों का अल्प
प्रयोग, अकुशलता से किया जा रहा है तो उत्पादन
संभावना वक्र के अंदर ही होगा न कि उत्पादन
संभावना वक्र पर।
प्रश्न 10. एक काल्पनिक उत्पादन संभावना अनुसूची बनायें ताकि उत्पादन
संभावना वक्र एक सरल रेखा में हो।
उत्तर-उत्पादन संभावना वक्र एक सरल रेखा में होगा यदि सीमान्त अवसर लागत स्थिर
होगी। अतः हम सीमान्त अवसर लागत स्थिर लेकर उत्पादन संभावना अनुसूची बनाते हैं।
प्रश्न 11. एक काल्पनिक उत्पादन संभावना अनुसूची बनायें ताकि उत्पादन संभावना
वक्र मूलबिन्दु के उत्तल (Convex) हो।
उत्तर-उत्पादन संभावना वक्र मूल बिन्दु के उन्नतोदर या उत्तल होगा यदि सीमान्त अवसर
लागत कम हो रही है। अतः उत्पादन सभावना अनुसूची बनाने के लिये हम कम होती हुई
सीमान्त अवसर लागत लेंगे।
प्रश्न 12. उत्पादन संभावना वक्र की धारणा किन मान्यताओं पर आधारित है ?
उत्तर-उत्पादन संभावना वक्र की धारणा निम्नलिखित मान्यताओं पर आधारित है-
(i) उत्पादन के साधनों की स्थिर मात्रा (Fixed Amount of Resources)-उत्पादन
के साधनों की मात्रा स्थिर है परंतु सीमित मात्रा में उन्हें एक प्रयोग से दूसरे प्रयोग में हस्तांतरित
किया जा सकता है।
(ii) उपलब्ध साधनों का पूर्ण एवं कुशल उपयोग (Efficient use of resources)-
अर्थव्यवस्था में उपलब्ध सभी साधनों का पूर्ण एवं कुशलता पूर्वक प्रयोग किया किया जा रहा है।
(ii) स्थिर तकनीक (Fixed technology)-उत्पादन की तकनीक स्थिर है अर्थात्
उसमें कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है।
(iv) दो वस्तुएँ (Two products)-अर्थव्यवस्था में केवल दो वस्तुओं या वस्तुओं के
दो संयोगों का उत्पादन किया जाता है जैसे गेहूँ तथा कपड़ा या पूँजीगत वस्तु तथा उपभोक्ता
वस्तु।
प्रश्न 13. एक काल्पनिक उत्पादन संभावना अनुसूची बनायें ताकि उत्पादन
संभावना वक्र मूल बिन्दु के उत्तल (Convex) हो।
उत्तर-इस स्थिति में सीमान्त अवसर लागत बढ़ती जाएगी।
प्रश्न 14. एक देश में भूकंप से बहुत से लोग मारे गए
उनके कारखाने ध्वस्त हो गए। इसका अर्थव्यवस्था के उत्पादन
     
संभावना वक्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-बहुत से लोगों के मरने तथा कारखानों के ध्वस्त होने से
संसाधनों में कमी होगी। संसाधनों की कमी होने पर संभावना वक्र
बाई ओर खिसक जाता है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
प्रश्न 15. एक डॉक्टर का मुम्बई में निजी क्लीनिक है और उसकी कमाई 10 लाख
रुपये वार्षिक है। मुंबई में क्लीनिक रखने के दो अन्य विकल्प हैं-(i) वह मुंबई में
राजकीय क्लीनिक में नौकरी कर ले जहाँ से उसे 6 लाख रुपये वार्षिक वेतन मिलेगा
(ii) वह मुंबई शहर में अपने घर में अपना नया क्लीनिक खोले जिससे उसे 8 लाख
रुपये वार्षिक आय होगी। मुंबई में क्लीनिक रखने की अवसर लागत क्या है ?
उत्तर-मुंबई में क्लीनिक के दो विकल्प हैं-(i) राजकीय क्लीनिक में नौकरी करना जहाँ
से उसे 6 लाख रुपये वार्षिक वेतन मिलेगा और (ii) अपने घर में क्लीनिक खोलना जहाँ से
उसे 8 लाख रुपये की कमाई होगी। अत: अपने घर में क्लीनिक खोलना अच्छा विकल्प है
अतः उसकी अवसर लागत 8 लाख रुपये होगी।
प्रश्न 16. केन्द्रीकृत अर्थव्यवस्था तथा योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था तथा बाजार अर्थव्यवस्था
के भेद को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था तथा बाजार अर्थव्यवस्था में अंतर-
प्रश्न 17.एक उत्पादन संभावना वक्र खींचिये और निम्नलिखित दर्शाईए- (1) संसाधनों
का पूरी तहर प्रयोग (ii) संसाधनों का अल्प प्रयोग (1) संसाधनों का विकास ।
उत्तर-
                                           दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
                          (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 1. एक व्यक्ति के उत्पादन संभावना वक्र पर विचार करें। मान लें कि
आपको दो विषयों के प्रश्नोत्तर तैयार करने हैं-(i) गणित और (ii) सामाजिक विज्ञान ।
आपके पास केवल 8 घंटे का समय है। मान लेते हैं कि गणित की तैयारी करने में आप तेज
हैं। एक घंटे में इसके 20 बहुविकल्पी प्रश्नों के उत्तर तैयार कर सकते हैं, पर सामाजिक विज्ञान
के ऐसे ही आप केवल 12 प्रश्न प्रति घंटा तैयार कर पाते हैं। अपनी उत्पादन संभावना तालिका
की रचना कर उसका चित्रांकन करें। (यह दो वस्तुएँ हैं-(i) गणित के प्रश्नोत्तरों की तैयारी
तथा (ii) सामाजिक विज्ञान की प्रश्नोत्तरों की तैयारी ।)
गणित                              सामाजिक अध्ययन
प्रश्नों की संख्या                   प्रश्नों की संख्या
160                                    0
140                                  12
120                                  24
100                                  36
  80                                  48
  60                                  60
  40                                  72
  20                                  84
    0                                  96
उत्तर-8,7,6,5,4,3,2,1 तथा
0 घंटे में गणित तथा सामाजिक विज्ञान में
क्रमश: 160,(20×8)140,120, 100,
80,60.40,20 तथा 0 और 96 (12x
8), 84,72,60,48,36,24,12 तथा 0
गणित के प्रश्नों की संख्या
प्रश्न हल किये जा सकेंगे।
प्रश्न 2. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर स्पष्ट कीजिए। [NCERT T.B. Q. 8)
उत्तर-
प्रश्न 3. संसाधनों के बँटवारे (आबंटन) से संबंधित केन्द्रीय समस्याओं का संक्षेप
में विवरण दीजिए।                                    [NCERT T.B. Q. 1]
अथवा, अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर-संसाधन के आबंटन से संबंधित तीन केन्द्रीय समस्यायें हैं-(i) क्या उत्पादन किया
जाए और कितनी मात्रा में (ii) कैसे उत्पादन किया जाए और (iii) किसके लिये उत्पादन किया
जाए।
(i) क्या उत्पादन किया जाए और कितनी मात्रा में (What to Produce and
Which Quantity ?)-प्रत्येक अर्थव्यवस्था के पास साधन सीमित हैं और उनके वैकल्पिक
प्रयोग होते हैं। समाज को लाखों वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता होती है। अत:
अर्थव्यवस्था को यह निर्णय लेना होता है कि उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन किया जाए या
पूँजीगत वस्तुओं का, विलासितापूर्ण वस्तुओं का उत्पादन किया जाय या अनिवार्य वस्तुओं का,
युद्धकालीन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए या शांतिकालीन वस्तुओं का। इसके बाद यह
निर्णय लिया जाएगा कि कितनी मात्रा में इन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए।
(ii) कैसे उत्पादन किया जाए (How to Produce)-इस समस्या का संबंध उत्पादन
की तकनीक के चयन से है। उत्पादन करने की तकनीक और पूँजी-प्रधान तकनीक । उत्पादन
की बेहतर तकनीक वही है जिसमें दुर्लभ संसाधनों का कम-से-कम उपयोग हो ।
(iii) किसके लिए उत्पादन किया जाए (For whom to Produce)-अर्थव्यवस्था
को यह निर्णय लेना होता है कि उत्पादित वस्तुओं का उपभोक्ताओं के बीच किस प्रकार
वितरण किया जाए। अर्थव्यवस्था उन्हीं लोगों के लिए उत्पादन करती है जिनके पास पर्याप्त
मात्रा में क्रय शक्ति होती है। क्रय शक्ति आय पर निर्भर करती है अर्थात् अर्थव्यवस्था को
यह निर्णय लेना पड़ना है कि राष्ट्रीय आय का वितरण किस प्रकास किया जाए।
प्रश्न 4. उत्पादन संभावना वक्र अनुसूची के साथ उत्पादन वक्र की अवधारणा
समझायें।
उत्तर-उत्पादन संभावना वक्र (Production Possibility Cure)-उत्पादन संभावना
वह वक्र है जो दो वस्तुओं या सेवाओं के उन सभी संयोगों को प्रकट करता है जिनका अधि
कतम उत्पादन एक अर्थव्यवस्था में दिये गये साधनों तथा तकनीक के द्वारा साधनों के पूर्ण
रोजगार की स्थिति को संभव बनाता है। (Production Possibility Curve is that curve which represents the maximum amount of a produced with an economy’s given resources and technique assuming that all resources are fully employed.) उत्पादन संभावना वक्र की ऊपर दी गई परिभाषा से यह स्पष्ट होता है कि उत्पादन संभावना वक्र की रचना निम्नलिखित मान्यताओं के आधार पर की जाती है-
(i) साधन दिये गये हैं और उनका पूर्ण रूप से प्रयोग किया जा रहा है।
(ii) तकनीकी दी गई है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता। उत्पादन संभावना वक्र नीचे
की ओर झुकता है क्योंकि एक वस्तु के अधिक उत्पादन से दूसरी वस्तु का उत्पादन कम हो
जाता है। सीमान्त अवसर लागत में वृद्धि होने के कारण उत्पादन संभावना वक्र मूल बिन्दु के
नतोदर (Concave) होता है
अब हम उत्पादन संभावना तालिका की सहायता से उत्पादन संभावना वक्र खींचेंगे।
उत्पादन संभावना तालिका वह तालिका है जो दी गई तकनीकी के अंतर्गत सीमित साधनों से
उत्पादन की विभिन्न संभावनाओं को दर्शाती है। इस तालिका में हम देखेंगे कि एक वस्तु के
उत्पादन बढ़ाने से दूसरी वस्तु का उत्पादन भी कम हो जाता है। इसका मुख्य कारण साधनों
की दुलर्भता है।
ऊपर दी गई तालिका इस मान्यता
के आधार पर बनाई गई है कि एक
अर्थव्यवस्था में केवल दो वस्तुओं का
उत्पादन किया जा सकता है- क्रिकेट
बैट तथा (ii) साड़ियाँ । समस्या को सरल                   
बनाने के लिये केवल दो वस्तुएँ ली गई
हैं। अब तालिका में दिये विभिन्न संयोगों
की सहायता से हम उत्पादन संभावना
वक्र खींचेंगे।x-अक्ष पर हमने क्रिकेट
बैट लिये हैं और Y-अक्ष पर साड़ियाँ ।
उत्पादन संभावना वक्र पर दिये गये बिन्दु इस बात की ओर इंगित करते हैं कि साधनों
का पूर्ण और कुशल प्रयोग किया गया है परन्तु उत्पादन संभावना वक्र हमें यह नहीं बताता कि
अर्थव्यवस्था किस बिन्दु पर वास्तव में कार्य करेगी। यह संभव है कि अर्थव्यवस्था वक्र पर
काम कर रही हो। यदि अर्थव्यवस्था में साधनों का पूर्ण प्रयोग हो रहा है तब अर्थव्यवस्था
संभावना वक्र के अंदर कार्य करेगी अर्थात् G बिन्दु पर जो उत्पादन संभावना वक्र के अंदर
है। जैसे कि नीचे चित्र में दिखाया गया है। इसके अतिरिक्त अर्थव्यवस्था उत्पादन संभावना
वक्र के बाहर भी कार्य नहीं कर सकती अर्थात् H बिन्दु पर ।
अर्थव्यस्था में तकनीकी विकास
या उपलब्ध साधनों में वृद्धि के
फलस्वरूप उत्पादन संभावना वक्र दाई
ओर खिसक जाता है और उपलब्ध
साधनों के कम होने पर यह बाई ओर                 
‘खिसक जाता है जैसा कि नीचे चित्रों में
दिखाया गया है-
उत्पादन संभावना वक्र को परिवर्तन
रेखा का वक्र भी कहते हैं। इसे उत्पादन
सीमा भी कहा जाता है क्योंकि यह
दिये गये साधनों तथा तकनीकी में
अधिकतम उत्पादित वस्तुओं की सीमा
को दर्शाता है।
प्रश्न 5. उत्पादन संभावना वक्र के साथ सीमान्त अवसर लागत की अवधारणा
समझायें। सीमान्त अवसर लागत में वृद्धि क्यों होती है ?
उत्तर-उत्पादन संभावना वक्र के साथ सीमान्त अवसर लागत (Marginal
opportunity cost alongwith PPC) : उत्पादन संभावना वक्र के साथ एक वस्तु के
उत्पादन से अभिप्राय दूसरी वस्तु का कुछ त्याग करना है। त्याग की इस दर को सीमान्त
अवसर लागत कहते है। निम्न तालिका तथा रेखाचित्र से सीमान्त अवसर लागत की अवधारणा
को समझाने का प्रयत्न किया गया है-
तालिका तथा चित्र से पता चलता है कि दिये हुए साधन तथा तकनीकी के साथ हम
केवल 7.5 लाख साड़ियों का उत्पादन कर सकते हैं। यदि हम एक हजार क्रिकेट बैट का भी
उत्पादन करना चाहते हैं, तब हमें 5 लाख (75-70) साड़ियों का त्याग करना पड़ेगा। अतः एक
हजार क्रिकेट बैट की सीमान्त अवसर लागत 5 लाख साडियाँ होंगी। इसी प्रकार यदि हम एक
हजार और क्रिकेट बैट बनाना चाहेंगे तो हमें 8 लाख और साड़ियों का त्याग करना पड़ेगा। अब
एक हजार क्रिकेट बैट की सीमान्त अवसर लागत लाख साड़ियाँ होंगी और इसी प्रकार क्रमशःएक हजार क्रिकेट बैट की सीमान्त लागत बढ़ती जाएगी (5 से 8, 8 से 12, 12 से 20 तथा 20 से 30)।
सीमान्त अवसर लागत में वृद्धि का कारण (Reason for increasing of marginal
opportunity cost)-सीमान्त अवसर लागत में वृद्धि का कारण यह है कि उत्पादन के
साधन सभी वस्तुओं के उत्पादन में समान रूप से कार्यकुशल नहीं होते । जब क्रिकेट बैट का
अधिक उत्पादन करने के लिये साधनों को साड़ियों में उत्पादन में हस्तान्तरित किया जाता है
तो इसका अर्थ हुआ कि साधन की क्रिकेट बैट के उत्पादन में कुशलता साड़ियों की तुलना
कम है। दूसरे शब्दों में जब किसी वस्तु का अधिकाधिक उत्पादन किया जाता है तो इससे
संलग्न उत्पादन के साधनों की सीमान्त उत्पादकता क्रमशः घटती जाती है।
                                           संख्यात्मक प्रश्न
                                    (Numerical Questions)
प्रश्न 1. एक किसान के पास जोतने के लिए 50 एकड़ भूमि है। मान लो एक
एकड़ भूमि पर वह 2500 कि.ग्राम गेहूं का उत्पादन कर सकता है या 80 टन गन्ने का।
यदि वह अपनी सारी भूमि पर गेहूँ पैदा करता है तो वह 125 टन गेहूँ पैदा कर सकता
है तथा यदि वह सारी भूमि पर गन्ना पैदा करता है तो 400 टन गना पैदा करता है।
इस सूचना के आधार पर उत्पादन संभावना वक्र बनायें।
उत्तर-एक उत्पादन संभावना वक्र बनाने के लिये पहले हमें एक उत्पादन संभावना
अनुसूची बनानी पड़ेगी।
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
उत्तर-
प्रश्न 3. नीचे दी तालिका से विभिन्न संयोगों पर x की सीमान्त अवसर लागत
ज्ञात करें-
उत्तर-

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