11-geography

Bihar board class 11th notes geography chapter 13

Bihar board class 11th notes geography chapter 13

Bihar board class 11th notes geography chapter 13
जल महासागर
 WATER OCEANS]
 महासागरीय जल
( (WATER OCEANS)
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उसके आदर्श उत्तर
1. बहुवैकल्पिक प्रश्न
(i) उस तत्त्व की पहचान करें जो जलीय चक्र का भाग नहीं है-
(क) वाष्पीकरण
(खों वर्षन
(ग) जलयोजन
(घ) संघनन
उत्तर-(ग)
(ii) महाद्वीपीय ढाल की औसत गहराई निम्नलिखित के बीच होती है-
(क)2-20 मीटर
(ख) 20-200
(ग) 200-2,000 मीटर
(घ) 2,000-20,000 मीटर
उत्तर-(ग)
(iii) निम्नलिखित में से कौन की लघु उच्चावच आकृति महासागरों में नहीं पाई जाती है?
(क) समुद्री टीला
(ख) महासागरीय गंभीर
(ग) प्रवाल द्वीप
(घ) निमग्न द्वीप
उत्तर-(ग)
(iv) निम्न में से कौन-सा सबसे छोटा महासागर है?
(क) हिंद महासागर
(ख) अटलांटिक महासागर
(ग) आर्कटिक महासागर
(घ) प्रशात महासागर
उत्तर-(ग)
(v) लवणता को प्रति समुद्री जल में घुले हुए नमक (ग्राम) की मात्रा से व्यक्त
किया जाता है-
(क) 10 ग्राम
(ख) 100 ग्राम
(ग) 1,000 ग्राम
(घ) 10,000 ग्राम
उत्तर-(ग)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) हम पृथ्वी को नीला ग्रह क्यो कहते हैं?
उत्तर-जल हमारे सौरमंडल का दुर्लभ पदार्थ है। पृथ्वी को छोड़कर और किसी भी ग्रह पर जल उपलब्ध नहीं है। पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में जल उपलब्ध है। इसलिए पृथ्वी को ‘नीला ग्रह’ (Blue Planet) कहा जाता है।
(ii) महाद्वीपीय सीमांत क्या होता है?
उत्तर-महाद्वीपीय सीमा प्रत्येक महादेश का विस्तृत किनारा होता है जो कि अपेक्षाकृत छिछले समुद्रो तथा खाड़ियों का भाग होता है। यह महासागर का सबसे छिछला भाग होता है, जिसकी औसत प्रवणता 1 डिग्री या उससे भी कम होती है। इस सीमा का किनारा बहुत ही खडें ढाल वाला होता है।
(iii) विभिन्न महासागरों के सबसे गहरे गर्तो की सूची बनाइए।
उत्तर-ये महासागरो के सबसे गहरे भाग होते है। अभी तक लगभग 57 गर्मों को खोजा गया है, जिसमें से 32 प्रशांत महासागर में, 19 अंध महासागर में एवं 6 हिंद महासागर में है।
(iv) ताप प्रवणता क्या है?
उत्तर– महासागर के सतहीय एवं गहरी परतों वाले जल के बीच विभाजक रेखा होती है। विभाजक रेखा के इस क्षेत्र में जहाँ तापमान में तीव्र कमी आती है, उसे ताप प्रवणता कहा जाता है।
(v) समुद्र में नीचे जाने पर आप ताप की किन परतों का सामना करेंगे? गहराई के साथ तापमान में भिन्नता क्यों आती है?
उत्तर-महासागरीय जल की सबसे ऊपरी परत का तापमान 20 डिग्री से. से 25℃ के बीच होता है। गहराई के बढ़ने के साथ इसके तापमान में तीव्र गिरावट आती है।
क्योंकि समुद्रीय जल के कुछ आयतन का लगभग 90% भाग गहरे महासागर में ताप प्रवणता (थर्मोक्लाईन) के नीचे पाया जाता है।
बढ़ता हुआ तापमान = बढ़ती हुई गहराई
(vi) समुद्री जल की लवणता क्या है?
उत्तर-लवणता या खारापन वह शब्द है जिसका व्यवहार समुद्री जल में घुले हुए नमक की मात्रा को परिभाषित करने में किया जाता है। 1,000 ग्राम (1 किलोग्राम), समुद्री जल में घुले हुए नमक (ग्राम में) की मात्रा के द्वारा इसकी गणना की जाती है। यह प्राय. प्रति PPT के रूप मे व्यक्त की जाती है। खारापन समुद्री जल का महत्त्वपूर्ण गुण है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए-
(i) जलीय चक्र के विभिन्न तत्त्व किस प्रकार अंतर-संबंधित हैं?
उत्तर-जल एक चक्रीय ससाधन है। इसका प्रयोग बार-बार किया जा सकता है। जल एक चक्र के रूप में महासागर से धरातल पर और धरातल से महासागर तक पहुंचता है। जलीय चक्र पृथ्वी की सतह के ऊपर, सतह पर एवं सतह के भीतर जल की गति की व्याख्या करता है। पृथ्वी पर जल का वितरण असमान है। जलीय चक्र जल का वह चक्र है जो पृथ्वी के जलमण्डल से गैस, तरल व ठोस-विभिन्न रूपों में प्राप्त होता है। यह जल के लगातार आदान-प्रदान से भी संबंधित है। यह आदान-प्रदान महासागर, धरातल. वायुमण्डल, अध: स्तल व जीवों के बीच लगातार होता रहता है।
पृथ्वी पर पाए जाने वाले जल का लगभग 71% भाग महासमुद्रो में पाया जाता है। शेष जल हिमानियों हिमछत्रों, भूमिगत जल, झीलो, आर्द्र मृदा, वायुमण्डल सरिताओं और जीवन में ताजा/मीठे जल के रूप में संग्रहित है। जल का लगभग 71% भाग महासागरों में पाया जाता है। शेष जल हिमानियों, हिमछत्रो, भूमिगत जल स्रोतो, झीलो, आर्द्र मृदा के रूप में सरिताओं तथा जीवन में मौजूद होता है। चूंकि धरातल पर गिरने वाले जल का लगभग 59 प्रतिशत भाग वाष्पीकरण के द्वारा वायुमंडल में चला जाता है। शेष भाग धरातल पर बह निकलता है; कुछ भूमि में रिस जाता है और कुछ भाग हिमानी का रूप ले लेता है।
(ii) महासागरों के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारको का निरीक्षण कीजिए।
उत्तर-महासागरीय जल के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारक है-(क) अक्षाश (Latitude)– महासागरों के ऊपरी जल का तापमान विषुवत् रेखा से ध्रुवों की तरफ विकिरण की मात्रा में कमी के कारण घटता जाता है।
(ख) स्थल एवं जल का असमान वितरण (Unequal Distribution of Land and Water)-उत्तरी गोलार्द्ध के महासागर दक्षिणी गोलार्द्ध के महासागरों की अपेक्षा स्थल के बहुत बड़े भाग से जुड़े होने के कारण अधिक मात्रा में ऊष्मा प्राप्त करते हैं।
(ग) प्रचलित हवाएँ (Prevailing Winds)-स्थलों से महासागरों की तरफ बहने वाली हवाएँ समुद्र की तरफ से गर्म जल को तट के दूर धकेल देती हैं, जिसके परिणामस्वरूप नीचे का ठंडा जल ऊपर की ओर आ जाता हे। परिणामस्वरूप तापमान में देशांतरीय अंतर आता है। इसके विपरीत, समुद्र से तट की ओर बहने वाली हवाएँ गर्म जल को तट पर जमा कर देती हैं एवं इसके कारण तापमान बढ़ जाता है।
(घ) समुद्री जलधाराएँ (Ocean Currents)-गर्म महासागरीय जलधाराएँ ठंडे क्षेत्रों में तापमान को बढ़ा देती हैं, जबकि ठंडी धाराएँ गर्म समुद्री क्षेत्रों के तापमान को घटा देती हैं। गल्फ स्ट्रीम (गर्म धारा) उत्तरी अमरीका के पूर्वी किनारे तथा यूरोप के पश्चिमी तट के तापमान को बढ़ा देती है, जबकि लेब्रोडोर जलधारा (ठंडी धारा) उत्तरी अमेरीका के उत्तर-पूर्वी किनारे के नजदीक के तापमान को कम कर देती है।
परियोजना कार्य:-
(i) विश्व की एटलस की सहायता से महासागरीय नितल के उच्चावच्चों को विश्व के मानचित्र पर दर्शाइए-
उत्तर
नोट-नीली पंक स्थलजात् निक्षेपों में विस्तृत रूप से तट के साथ-साथ महाद्वीपीय रोल्फ तथा महाद्वीपीय ढाल पर लगभग सभी स्थानों पर मिलती है। अत: मानचित्र पर इसको दर्शाया नहीं गया है।
(ii) एटलस की सहायता से हिन्द महासागर में महासागरीय कटकों के क्षेत्रों को पहचानिए।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. पृथ्वी पर शुद्ध जल की प्राप्ति कहाँ से होती है?
उत्तर-पृथ्वी पर शुद्ध जल की प्राप्ति वायुमंडल, नदी तथा झरनो के ताजा जल, समुद्री जल (लवण घुला जल). तथा लवणीय झीलों से संघनित हुई सूक्ष्म बूंदों से होती है।
2. वाप्पन-वाप्पोत्सर्जन किसे कहते हैं?
उत्तर-कुछ जल का वाष्पन एव अवशोषण पौधों की जड़ो द्वारा किया जाता है, परन्तु इसका वाष्पोत्सर्जन पौधों की पत्तियों द्वारा कर दिया जाता है। इसे वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन कहते है।
3. कैनियन का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर-जब जल का प्रवाह महासागरीय शेल्फ को काट देता है तब इससे अत: समुद्री कैनियन का निर्माण होता है।
4. तट की परिभाषा बताइए।
उत्तर-तट चौरस सतह वाला ऊँचा क्षेत्र है, जो अपेक्षाकृत कम गहराई होने के कारण मछली पकड़ने के लिए उपयोग किया जाता है।
5. महासागरीय कटक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-अंतः समुद्री पर्वत श्रृंखला जिसकी लंबाई लगभग 64000 कि॰मी॰ है।
महासागरीय कटक कहलाती है। इसकी खोज 20वीं शताब्दी में की गई।
6. महासागरीय खाई क्या होती है?
उत्तर-महासागर के वे भाग, जो 6000 मी. से अधिक गहरे हैं, महासागरीय खाई कहलाते हैं। ये महासागरों में यत्र-तत्र पाए जाते है।
7. ‘थर्मोक्लाइन’किसे कहते हैं?
उत्तर-महासागरीय जल की तापमान संरचना का द्वितीय स्तर थर्मोक्लाइन या ताप प्रवणता कहलाता है। इसकी विशेषता गहराई बढ़ने के साथ तीव्र गति से तापमान का घटना है।
8. महासागरीय जल के तापमान को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं?
उत्तर-तापमान को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित -अक्षांश, स्थल एवं जल का असमान वितरण, प्रचलित पवनें, महासागरीय धाराएँ तथा अन्य गौण कारक, जैसे अंत: समुद्री कटक, स्थानीय मौसमी दशाएँ तथा समुद्र की आकृति एवं आकार।
9. रेजिडेंस या आवास काल किसे कहते हैं?
उत्तर-वह औसत समय जिसमें एक तत्त्व महासागरीय जल में वहाँ से बाहर निकलने से पहले घुला रहता है, उसे रेजिडेंस अथवा आवास काल कहते है।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्त उत्तर
1. महासागरीय नितलों पर पाए जाने वाली सबसे अधिक सामान्य आकृतियों के नाम लिखो।
उत्तर-महासागरीय तली पर महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, महासागरीय मैदान तथा गर्त के अतिरिक्त निम्नलिखित लक्षण पाए जाते हैं-
(i) उद्रेरव (Ridges)
(ii) पहाड़ियाँ (Hills).
(iii) टीले (Sea mounts)
(iv) निमग्न द्वीप (Guyots)
(v) खाइयाँ (Trenches)
(vi) कैनियन (Canyons)
(vii) प्रवाल भित्तियाँ (Coral reefs)
2. महासागरीय खाइयों तथा गर्तो को विवर्तनिक उत्पत्ति वाला क्यों समझा जाता है?
उत्तर-महासागरों में लम्बे, गहरे तथा संकरे खड्ड को महासागरीय गर्त कहा जाता है।
इनकी उत्पत्ति भूतल एवं दरारें पड़ने तथा मोड़ पड़ने की हलचल के कारण हुई है। ये अधिकतर उन क्षेत्रों में पाए जाते है जहाँ भूकम्प आते हैं तथा ज्वालामुखी स्थित हो। ये अधिकतर बलित पर्वतो तथा द्वितीय चापों के समानान्तर स्थित होते हैं। इसलिए इनका सम्बन्ध भूगर्भिक हलचलों से है। महासागरीय खाई का भाग 6000 मी० से अधिक गहरा होता है। अधिकांश खाइयाँ प्रशान्त महासागर की सीमाओं के समीप स्थित है।
3. महाद्वीपीय शेल्प किसे कहते हैं तथा विभिन्न प्रकारों के नाम बताएँ’
उत्तर-महादीपों के किनारे का विस्तृत क्षेत्र, जिसकी चौड़ाई कुछ किलोमीटर से 300 कि.मी. तक है, महासागरीय शेल्फ कहलाता है। यह महाद्वीपों के चारों ओर मंद ढाल वाला जलमग्न धरातल है। वास्तव में यह महाद्वीपीय खंड का ही जलमग्न किनारा है जो 150 से 200 मीटर तक गहरा होता है। प्रमुख नदियाँ समुद्र में पहुँचने के पश्चात् समुद्री जल से मिलते हुए अपने प्रवाह को महाद्वीपीय शेल्फ पर जारी रखती है। महाद्वीपीय शेल्फ निम्न प्रकार के है-
(i) हिमानीकृत शेल्फ, (ii) बड़ी नदियों के मुहानों पर शेल्फ, (iii) प्रवाल भित्ति शेल्फ, (iv) द्रुमाकृतिक घाटियों से युक्त शेल्फ, (v) नवीन बलित पर्वत के पार्श्व शेल्फ।
4. महासागरीय नितल की गहराई कैसे मापी जाती है तथा संसार में सबसे गहरा स्थान कौन-सा है?
उत्तर-महासागरीय नितल की गहराई गम्भीरता मापी यन्त्र से मापी जाती है। इस यंत्र से ध्वनि तरंगे महासागरीय नितल को प्रतिध्वनि के रूप में वापस आती है। इनकी गति व समय से गहराई ज्ञात की जाती है।
संसार में सबसे गहरा स्थान प्रशांत महासागर में गुआम द्वीपमाला के समीप मेरिआना गर्त है। इसकी गहराई 11022 मीटर है। यदि ऐवरेस्ट पर्वत को इस गर्त मे डुबो दिया जाए तो इसकी चोटी समुद्री जल से 2 किलोमीटर नीचे रहेगी।
5. जलमंडल किसे कहते हैं? हिन्द महासागर को आधा महासागर क्यों कहा जाता है?
उत्तर– -पृथ्वी के तल के जल से डूबे हुए भाग को जलमंडल कहते हैं। यह धरातल पर लगभग 361,059,000 वर्ग किलोमीटर में फैले हुए है। जो पृथ्वी के धरातल के कुल क्षेत्र का 71% भाग है। उत्तरी गोलार्द्ध का 61% भाग तथा दक्षिणी गोलार्द्ध का 81% भाग महासागरों से घिरा हुआ है। उत्तरी गोलार्द्ध की अपेक्षा दक्षिणी गोलार्द्ध में जल का विस्तार अधिक है,
इसलिए इसे वाटर हेमिस्फेयर (Water Hemisphere) कहते हैं।
अन्ध महासागर तथा प्रशांत महासागर उत्तर-दक्षिण में दोनों ओर खुले हैं। ये भूमध्य रेखा के दोनों ओर समान रूप से फैले हुए हैं, परन्तु हिन्द महासागर उत्तर की ओर बन्द है। एशिया महाद्वीप इसके विस्तार को रोकता है। एक प्रकार से इसका विस्तार अधिकतर दक्षिण की ओर है। इसलिए इसे आधा महासागर कहते है।
6. गम्भीर समुद्री उद्रेरव (Submarine Ridges) किसे कहते हैं तथा गम्भीर समुद्री पहाड़ियों (कटकों) का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर-महासागरीय तल पर ऊँचे उठे हुए भाग को गम्भीर उद्रेरव कहते है। यह प्राय 60 हजार किलोमीटर लम्बे और 100 किमी चौड़े हो सकते है। इनकी विश्वव्यापी स्थिति किसी भूमंडलीय हलचल का संकेत देती है। प्राय: यह महासागरों के मध्य में या धरती पर पाई जाती है। इनकी रचना के कई कारण हैं- (i) दरारों के साथ बेसाल्ट का फैलना।
(ii) संवाहिक धाराओं द्वारा भूपटल का ऊँचा उठना तथा नीचे धँसना।
कटकों का निर्माण- गम्भीर समुद्री तल पर कई पहाड़ियों, टीले तथा निमग्न द्वीप पाए जाते हैं। ये प्राय: 300 मीटर तक ऊँचे है। इनकी रचना ज्वालामुखी क्रिया तथा भूपटल में विरूपण से होती है। समुद्री टीले और द्वीप प्रशांत महासागर में काफी पाए जाते है।
7. प्रति ध्रुवीय स्थिति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर-धरती पर जल और स्थल का वितरण प्रति ध्रुवीय है। महाद्वीपों और महासागर एक-दूसरे के विपरीत स्थित है। यह संयोजन इस प्रकार है कि जल और स्थल एक-दूसरे से एक व्यास के विपरीत कोनों पर (Diametrically opposite) स्थित है, जैसे आर्कटिक महासागर अण्टार्कटिक महाद्वीप के विपरीत स्थित है। यूरोप तथा अफ्रीका प्रशांत महासागर के विपरीत स्थित है। उत्तरी अमेरिका हिन्द महासागर के विपरीत स्थित है।
8. अंतः समुद्री कैनियन की विशेषताओं एवं निर्माण को स्पष्ट करें।
उत्तर-महासागरीय निमग्न तट तथा ढाल पर तंग, गहरी तथा ‘V’ आकार की घाटियों को कैनियन कहा जाता है। ये घाटियाँ विश्व के सभी तटों पर नदियों के मुहानों पर पाई जाती है। जैसे-हडसन, सिन्धु, गंगा, कांगो नदी। यह कैनियन नदी द्वारा अपरदन तथा सागरीय अपरदन से बनी है।
कैनियनों के प्रकार (Types of Conyons)-ये घाटियाँ मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है-
(i) वे कैनियन, जो छोटे, गार्ज के रूप में महाद्वीपीय शेल्फ से शुरू होकर ढाल पर काफी गहराई तक विस्तृत होते हैं। जैसे न्यू इंग्लैण्ड तट पर ओशनोग्राफर कैनियन।
(ii) वे कैनियन, जो नदियों के मुहानों से शुरू होकर केवल शेल्फ तक ही पाए जाते हैं जैसे-मिसीसिपी तथा सिन्धु नदी के कैनियन, हडसन कैनियन।
(iii) वे कैनियन, जो तट व ढाल पर काफी कटे-फटे होते हैं, जैसे दक्षिणी कैलिफोर्निया के तट पर, बेरिंग कैनियन तथा जेम चुंग कैनियन।
9. समुद्री खाई तथा समुद्री कैनियन में अन्तर बताओ।
उत्तर-समुद्री खाई तथा समुद्री कैनियन में अन्तर-
समुद्री खाई:-
(i) ये समुद्र के गहरे भागों में पाई जाती है।
(ii) ये लम्बे गहरे तथा संकरे खड्ड होते है।
(iii) यह महासागरों के किनारों पर तथा वलित पर्वतों के साथ-साथ स्थित है।
(iv) मैरियाना गर्त सबसे गहरी खाई है जो 11 किमी गहरी है।
समुद्री कैनियन:-
(i) ये महाद्वीपीय मग्नतट तथा ढाल पर पाई जाती हैं।
(ii) ये तंग, गहरी ‘V’ आकार की घाटियाँ होती हैं।
(iii) ये समुद्री तटों पर नदियों के मुहानों पर पाई जाती हैं।
(iv) बेरिंग कैनियन संसार में सबसे बड़ी कैनियन है, जो 400 किमी लम्बी है।
10. महासागरों का आर्थिक महत्त्व क्या है? वर्णन करें।
उत्तर-(i) समुद्री पर्यावरण पौधों तथा पशु जीवन के बहुत समृद्ध स्रोत है। (ii) तटीय क्षेत्रों के निवासी मुख्य रूप से अपने निर्वाह तथा व्यापार के लिए समुद्रों पर ही निर्भर करते है। (iii) महाद्वीपीय सीमांतो का दोहन खनिज उत्पादन के लिए भी किया जा रहा है। (iv) उथले महाद्वीपीय शेल्फ तथा आंतरिक समुद्र प्लैटिनम, सोने तथा टिन के प्लेसर निक्षेप के लए जाने जाते है। (v) पेट्रोलियम संसाधनों के लिए भी महाद्वीपीय शेल्फ का दोहन कि जा रहा है। (vi) समुद्री सतह पर मैगनीज की ग्रंथिकाएं पाई गई है। ये ग्रथिकाएँ, निकिल, तांबा तथा कोबाल्ट के स्रोत भी हो सकते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
1. अन्ध महासागर की स्थल रूपरेखा के प्रमुख लक्षणों को वर्णन करो।
उत्तर-अन्ध महासागर-
(i) विस्तार तथा आकार-यह महासागर पृथ्वी के 1/6 भाग को घेरे हुए है। इसका आकार ‘S’ अक्षर की तरह है। यह महासागर भूमध्य रेखा पर लगभग 2560 किमी चौड़ा है.परन्तु दक्षिण में इसकी चौड़ाई 4800 किलोमीटर है।
(ii) समुद्रतली-इस महासागर के तटों पर चौड़ा महाद्वीपीय निमग्न तट पाया जाता है। यूरोप तथा उत्तरी अमेरिका के तटों पर इसकी चौड़ाई 400 किलोमीटर है। यहाँ प्रसिद्ध मछली क्षेत्र पाये जाते हैं।
(iii) उद्रेरव (Ridges),-
(क) मध्य एटलांटिक उद्रेरव उत्तर से दक्षिण तक ‘S’ आकार में फैला हुआ है। यह उद्रेव 14 हजार किलोमीटर लम्बा है, जिसकी ऊँचाई लगभग 4 हजार मीटर है।
(ख) डालफिन उद्रेरव तथा वेलविस उद्रेव उत्तरी भाग में।
(ग) दक्षिण भाग में चेलेंजर उद्रेरव।
(घ) उत्तरी भाग में टेलीग्राफ पठार।
(iv) सागरीय बेसिन-अन्ध महासागर में कई छोटे-छोटे बेसिन पाए जाते हैं,
जैसे-(a) लेब्रेडोर बेसिन, (b) स्पेनिश बेसिन, (c) उत्तरी अमेरिकन बेसिन, (d) कोपवर्ड बेसिन, (e) गिन्नी बेसिन, (f) ब्राजील बेसिन।
(v) सागरीय गर्त-मोटे तौर पर अन्ध महासागर में गर्त कम है। मुख्य गर्त
निम्नलिखित हैं-
(क) प्यूर्टोरिको गर्त- -जो इस सागर का सबसे गहरा स्थान है तथा 4812 फैदम गहरा है।
(ख) रोमाशे गर्त-4030 फैदम गहरा है।
(ग) दक्षिणी सेण्डविच गर्त-जो फाकलैंड द्वीप के निकट 4575 फैदम गहरा है।
(vi) तटीय सागर-उत्तरी भाग में कई छोटे सागर पाये जाते हैं, जैसे-बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर, हडसन खाड़ी, बेफिन खाड़ी, मेक्सिको तथा कैरेबियन सागर।
(vii) द्वीप-इस महासागर में ग्रेट ब्रिटेन तथा नयू फाउंडलैंड जैसे महाद्वीपीय द्वीप है। निमग्न तट पर पश्चिमी द्वीप समूह आइसलैंड आदि द्वीप पाए जाते हैं। मध्य  उद्रेरव पर एरजोस द्वीप, सेन्टहेलना, बरमूदा द्वीप स्थित है। अफ्रीका तट पर कई ज्वालामुखी द्वीप केपवर्ड द्वीप तथा कमेरी द्वीप स्थित हैं।
2. महासागरों की तली के उच्चावच के सामान्य लक्षणो का वर्णन करें।
उत्तर-महासागरों की गहराई तथा उच्चावच में काफी विभिन्नता है जिसे उच्चतादर्शी वक्र से दिखाया जाता है। बनावट तथा गहराई के अनुसार सागरीय तल को चार भागों में बाँटा जाता है-
(i) महाद्वीपीय मग्न तट (Continental Shelry-महाद्वीपों के चारो ओर सागरीय तट का वह भाग जो 150 से 200 मीटर तक गहरा होता है, महाद्वीपीय चबूतरा कहलाता है। वास्तव में यह महाद्वीप का जलमग्न भाग होता है। महाद्वीपीय निमग्न तट का सबसे अधिक विस्तार अन्ध महासागर है। इसकी औसत चौडा़ई 70 किमी तथा गहराई 72 फैदम होती है।आर्कटिक सागर के तट पर इसका विस्तार 1000 किमी से भी अधिक है। पर्वत श्रेणियों वाले तटों पर संकरे महाद्वीपीय मग्न तट पाए जाते है। समुद्र तल के ऊपर उठने से या स्थल भाग के नीचे धंस जाने से निमग्न तट की रचना होती है। ये शेल्फ मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाते है।
(ii) महाद्वीपीय ढाल-महाद्वीपीय निमग्न तट के बाहर का ढाल जो महासागर की ओर तीव्र गति से नीचे उतरता है, महाद्वीपीय ढाल कहलाता है। इसकी गहराई 3600 मीटर तक है। इसका सबसे अधिक विस्तार अंध महासागर में 12.4% क्षेत्र पर है। यह ढाल वास्तव में गहरे समुद्रो तथा महाद्वीपो के स्तर को पृथक् करती है। जहाँ महाद्वीपीय ढाल का अंत होता है वहाँ मन्द ढाल को महाद्वीपीय उत्थान कहते हैं।
(iii) महासागरीय मैदान-महाद्वीपीय ढाल के पश्चात् समुद्र मे चौड़े तथा समतल क्षेत्र को महासागरीय मैदान कहते हैं। इसकी औसत गहराई 3000 से 6000 मीटर तक है इसे नितल मैदान भी कहते हैं। इन मैदानों पर कई भू-आकृतियाँ पाई जाती है; जैसे-समुद्री उद्रेरव द्वीप, समुद्री टीले, निमग्न द्वीप आदि। इन मैदानों पर स्थल जल तथा उथले जल से उत्पन्न तलछट पाए जाते हैं। नितल मैदान पर जलमग्न कटक पाए जाते हैं, जो महासागरों के मध्य क्षेत्र में हैं। इन कटकों की लम्बाई 75000 कि.मी. है। ये मन्द ढाल वाले चौड़े पठार के समान हैं।
(iv) महासागरीय गर्त-ये समुद्र तल पर गहरे खड्डे होते हैं। इनका विस्तार बहुत कम होता है जबकि लम्बे, गहरे तथा संकरे खड्ड को खाई कहते हैं। इनकी औसत गहराई 5500 मीटर है। संसार में सबसे अधिक गहरा गर्त प्रशांत महासागर में है जिसकी गहराई 11022 मीटर है। यह गर्त द्वीपीय चापों के सहारे मिलता है। ये भूकम्पीय तथा ज्वालामुखी क्षेत्रों से संबधित हैं।
(v) अन्य विशेष आकृतियाँ-महासागरों में उच्चावच में विविधता के कारण कई भू-आकृतियाँ जैसे द्वीप, उद्रेरव, अटोल, समुद्री कैनियन भी पाई जाती है।
3. निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखिए-
(i) महाद्वीपीय उत्थान;
(ii) मध्य महासागरीय कटक;
(iii) महासागरीय द्रोणी;
(iv) अंतः समुद्री कैनियन।
उत्तर-(i) महाद्वीपीय उत्थान-महाद्वीपीय शेल्फ के बाद महाद्वीपीय ढाल स्थित होता है, जो अचानक महाद्वीपीय उत्थान में प्रतिस्थापित हो जाता है, जिसका ढाल पर्याप्त मंद होता है। सामान्यतः महाद्वीपीय उत्थान मध्यम से निम्न उच्चावच का होता है। महासागरीय उत्थान सैकड़ों किलोमीटर चौड़ाई का क्षेत्र है, जिसका धरातल समीप के वितलीय मैदान से सैकड़ों मीटर ऊपर उठा होता है। महासागरीय उत्थान का उच्चावच अल्प से अत्यधिक असम
हो सकता है। बरमूडा महासागरीय उत्थान का एक अच्छा उदाहरण है।
(ii) मध्य महासागरीय कटक-महासागरीय कटक एक अंतःसमुद्री पर्वत श्रृंखला है। इसकी लम्बाई लगभग 64,000 कि.मी. है तथा इसकी खोज बीसवीं शताब्दी में महासागरीय खोजों के दौरान हुई। यह कटक उत्तरी एवं दक्षिणी अटलांटिक महासागरीय द्रोणियों के मध्य से गुजरता हुआ हिंद महासागरीय द्रोण और फिर आस्ट्रेलिया तथा अंटार्कटिका के बीच से दक्षिणी प्रशात द्रोणी में प्रवेश करता है। यह कटक एक पट्टी की भाँति फैला हुआ है। इसकी चौड़ाई 2000 से 2400 किमी है। वितलीय मैदान से यह सीढ़ियों के क्रम में ऊपर उठता है।
(iii) महासागरीय द्रोणी-महासागरीय द्रोणी महासागरीय सतह का एक विशाल क्षेत्र है जो सामान्यतः 2500 से 6000 मीटर की गहराई तक स्थित होता है। यह महासागरीय क्षेत्रफल के लगभग 76.2 प्रतिशत भाग पर विस्तृत है। महासागरीय द्रोणी सतह पर तीन प्रकार के लक्षण पाए जाते हैं-(i) वितलीय मैदान एवं पहाड़ियाँ, (ii) महासागरीय उत्थान,
(iii) समुद्री टीला।
वितलीय मैदान गहरे महासागरीय सतह का एक भाग है, जिनकी तली सपाट और ढाल पर्याप्त मंद होता है। यह महाद्वीपीय उत्थान के आधार तल पर स्थित होता है और सभी महासागर द्रोणियों में पाया जाता है। इनकी रचना लम्बे समय तक जमने वाले अवसाद के कारण हुई है। वितलीय पहाड़ियाँ महासागरीय द्रोणी सतह से ऊपर उठी हुई छोटी-छोटी पहाड़ियाँ है, जिनकी ऊँचाई कुछ मीटर से लेकर सैकड़ों मीटर तक होती है। समुद्री टीला एक शिखर है, जो समुद्र सतह से 1000 मीटर अथवा इससे अधिक ऊँचे होते हैं। अनेक समुद्री टीलों का ऊपरी भाग आश्चर्यजनक रूप से सपाट तथा अत्यधिक तीव्र ढाल वाला होता है। महासागरीय उत्थान सैकड़ों किलोमीटर चौड़ाई का क्षेत्र है, जिसका धरातल समीप के वितलीय मैदान से सैकड़ों मीटर ऊपर उठा होता है। महासागरीय उत्थान का उच्चावच अल्प से अत्यधिक असम हो सकता है।
(iv) अंतः समुद्री कैनियन-जल का प्रवाह महाद्वीपीय शेल्फ को काट देता है, जिससे अंतः समुद्री कैनियन का निर्माण होता है। इनकी तुलना स्थलीय धरातल पर बनी गहरी अवनलिकाओं से की जा सकती है। अत: समुद्री कैनियन महाद्वीपीय शेल्फ एवं ढाल के प्रमुख लक्षण हैं। ये खड़ी ढाल वाली गहरी घाटियाँ है जो लम्बी अवतल परिच्छेदिका बनाती हैं। कुछ कैनियन देखने में द्रुमाकृतिक होते हैं। महाद्वीपीय सीमाओं की विशेषता कुछ छोटे-छोटे समुद्री लवण, जैसे तट, शेल्फ तथा भित्ति है। तट एक चौरस सतह वाला ऊंचा क्षेत्र है, जो अपेक्षाकृत कम गहराई होने के कारण मत्स्य पालन के लिए उपयोग किया जाता है। भित्ति एक जैविक निक्षेप है, जो मृत अथवा जीवित प्रवाल द्वारा बनाया जाता है।
4. अंटलांटिक महासागरीय सतह का मानचित्र बनाइए और उसमें महासागरीय द्रोणियों तथा मध्य अटलांटिक कटक दिखाइए।
उत्तर
5. हिन्द महासागरीय सतह के उच्चावच का वर्णन कीजिए।
उत्तर -हिन्द महासागर की औसत गइराई 4000 मीटर है। हिंद महासागर के महाद्वीपीय शेल्फ में बड़ा भिन्नता है। यह प्रशांत एव अटलांटिक महासागर से छोटा है। अरब सागर  बंगाल की खाड़ी के सीमांतों पर यह बड़ी विस्तार वाली है। अफ्रीका के पूर्वी तट तथा मैडागास्कर में यह लगभग 640 कि॰मी॰ चौड़ी है, लेकिन जावा एवं सुमात्रा के तट के साथ यह संकीर्ण है। अंटार्कटिका के उत्तरी तट के पास भी यह संकीर्ण है। हिन्द महासागर में सीमांत सागरों की संख्या कम है। यहाँ कुछ महत्त्वपूर्ण सीमांत सागर, जैसे-मोजाविक चैनल, लाल सागर, ईरान की खाड़ी, अंडमान सागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी आदि मौजूद हैं।
मध्य हिन्द महासागरीय कटक उत्तर में भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे से दक्षिण में अंटार्कटिका तक फैला हुआ है। यह कटक उच्च भूमियों के एक अविच्छिन्न श्रृंखला का निर्माण करता है। हिन्द महासागर के प्रमुख कटक है-सोकोत्राचागोस, मालदीव, चागोस-सेंटपॉल, इंडियन-अंटार्कटिक, मैडागास्कर, अटलांटिक तथा अंटार्कटिका कटक।
मध्य हिन्द महासागरीय कटक तथा अन्य कटक हिन्द महासागर को नेक महासागरीय द्रोणियों में विभक्त करती है।
इनके नाम हैं-ओमान द्रोणी, अरेबियन द्रोणी, सोमाली द्रोणी, अगुल्हास-नटाल द्रोणी, अटलांटिक-हिन्द-अंटार्कटिक द्रोणी, पूर्वी हिन्द-अंटार्कटिक द्रोणी तथा पश्चिमी आस्ट्रेलिया द्रोणी।
हिन्द महासागर में बहुत कम महासागरीय खाइयाँ है। जावा तथा सुंडा खाई (7450 मी.) सबसे गहरी है।
हिन्द महासागर के प्रमुख गहरे वितलीय मैदान हैं-सोमाली, श्रीलंका तथा हिन्द वितलीय मैदान। हिन्द महासागर में मैदानों की ऊंचाई 3600 मी से 5400 मी है।
6. अंतर स्पष्ट कीजिए-
(i) महाद्वीपीय शेल्फ एवं महाद्वीपीय ढाल,
(ii) तट एवं भित्ति;
(iii) महासागरीय जल के प्रथम एवं तृतीय स्तर;
(iv) थर्मोक्लाइन एवं हैलोक्लाइन।
उत्तर-(i) महाद्वीपीय शेल्फ एवं महाद्वीपीय ढाल में अंतर-
महाद्वीपीय शेल्फ:-
(i) महाद्वीपीय के चारों ओर विस्तृत क्षेत्र को महाद्वीपीय शेल्फ कहते हैं।
(ii) इसकी औसत गहराई 200 मीटर होती
(iii) समस्त महासागरों के 7.5 प्रतिशत भाग पर इसका विस्तार है।
(iv) इसका औसत ढाल 1° से कम है।
(v) मछली क्षेत्रों तथा पेट्रोलियम के कारण इसका आर्थिक महत्त्व है।
महाद्वीपीय ढाल:-
(i) महाद्वीपीय शेल्फ से महासागरों की ओर ढाल को महाद्वीपीय ढाल कहते है।
(ii) इसकी औसत गहराई 200 मीटर से 3000 मीटर तक होती है।
(iii) समस्त महासागरों के 8.5 प्रतिशत भाग पर इसका विस्तार है।
(iv) इसका औसत ढाल 2° से 5° है।
(v) इस पर कई समुद्री कैनियन स्थित है।
(ii) तट एवं भित्ति में अंतर-
तट:-
(i) यह एक चौरस सतह वाला ऊँचा क्षेत्र है।
(ii) यह मत्स्यन के लिए उपयोग किया जाता है। यह कम गहराई वाला क्षेत्र है
भित्ति:-
(i) यह उथली गहराई वाला ऊँचा क्षेत्र है।
(ii) भित्ति एक जैविक निक्षेप है, जो मृत अथवा जीवित प्रवाल द्वारा बनाई जाती है।
(iii) महासागरीय जल के प्रथम एवं तृतीय स्तर में अंतर-
महासागरीय जल के प्रथम स्तर:-
(i) जल का सबसे ऊपरी गर्म स्तर है।
(ii) यहाँ तापमान 20° से 25° से के मध्य रहता है।
(iii) उष्ण कटिबंध में यह स्तर वर्ष भर उपस्थित रहता है।
(iv) मध्य अक्षांशों में यह केवल गर्मियों के मौसम में विकसित होता है।
महासागरीय जल के तृतीय स्तर:-
(i) सर्द स्तर है और महासागरों की सतह तक पहुँच जाती है।
(ii) यहाँ तापमान 0° से के पास रहता है।
(iii) यहाँ सर्द जल की केवल एक ही परत है, जो ऊपर से नीचे महासागरीय सतह पर मौजूद रहती है।
(iv) महासागरीय जल के तापमान का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है।
(iv) थर्मोक्लाइन एवं हैलोक्लाइन में अंतर-
थर्मोक्लाइन:-
(i) इसे ताप प्रवणता कहते हैं।
(ii) इसकी विशेषता गहराई के बढ़ने के साथ तीव्र गति से तापमान का घटना है।
(iii) यह स्तर 500 से 1000 मीटर मोटा है।
(iv) निम्न अक्षांशों में तापमान धीरे-धीरे घटता है।
हैलोक्लाइन:-
(i) पानी का खरापन कम होने को हैलोक्लाइन कहते हैं।
(ii) हैलोक्लाइन के नीचे खारेपन में बहुत | कम भिन्नता होती है।
(iii) लवणता अधिकांश समुद्री जल 34.6 से 34.9 प्रति हजार के आस-पास रहती है।
(iv) गहराई बढ़ने के साथ लवणता कम होती जाती है।

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