11-geography

bihar board class 11 geography | भू-आकृति विज्ञान

bihar board class 11 geography | भू-आकृति विज्ञान

bihar board class 11 geography | भू-आकृति विज्ञान

संरचना और भू-आकृतियाँ
(STRUCTURE AND PHYSIOGRAPHY)
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उसके आदर्श उत्तर
1. बहुवैकल्पिक प्रश्न :
(i) हिमालय के किसी भाग में करेवा मिलते हैं-
(क) उत्तर-पूर्व
(ख) पूर्वी
(ग) हिमाचल-उत्तरांचल
(घ) कश्मीर हिमालय
उत्तर-(घ)
(ii) लोटक झील किस राज्य में स्थित है-
(क) केरल
(ख) मनीपुर
(ग) उत्तरांचल
(घ) राजस्थान
उत्तर–(ख)
(iii) अंडमान द्वीप तथा निकोबार द्वीप को कौन-सी रेखा पृथक् करती है-
(क) 110 चैनल
(ख) 10 चैनल
(ग) खाड़ी मनार
(घ) अडमान सागर।
उत्तर-(क)
(iv) डोडावेटा चोटी निम्नलिखित में से कौन-सी पहाड़ी श्रखला में स्थित हैं?
(क) नीलगिरी
(ख) कामिम
(ग) अनामलाई
(घ) नलामलाई।
उत्तर -(क)
(v) हिमालय किस प्रकार का पर्वत है?
(क) ज्वालामुखी
(ख) मोड़दार
(ग) अवशिष्ट
(घ) भ्रंशारेथ
उत्तर -(ख)
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए-
(i) यदि एक व्यक्ति को लक्षद्वीप जाना हो तो वह कौन से तटीय मैदान से होकर जायेगा और क्यों?
उत्तर- -लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित है। यह केरल तट से 280 किलोमीटर से 480 किलोमीटर दूर स्थित है। अतः केरल तट से इसकी दूरी सबसे कम 250 किलोमीटर है।
इसलिए केरल के तटीय मैदान से होकर हम लक्षद्वीप कम समय में पहुंच जायेगे।
(ii) भारत में ठण्डा मरुस्थल कहाँ स्थित है? इस क्षेत्र की मुख्य श्रेणियो के नाम बताएँ।
उत्तर-कश्मीर हिमालय का उत्तरी-पूर्वी भाग, जो बृहत् हिमालय और कराकोरम श्रेणियो के बीच स्थित है, एक ठण्डा मरुस्थल है। कश्मीर हिमालय में अनेक पर्वत श्रेणियाँ है जैसे-कराकोरम, लद्दाख, जास्कर और पीरपंजाल।
(iii) पश्चिमी तटीय मैदान पर कोई डेल्टा क्यों नहीं है?
उत्तर-पश्चिमी तटीय मैदान मध्य में सकीर्ण है लेकिन उत्तर और दक्षिण में चौड़े हो जाते हैं। इसलिए इस तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए-
(i) अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूहों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर-भारत में दो प्रमुख द्वीप समूह हैं- -एक बंगाल की खाड़ी और दूसरा अरब सागर में। बंगाल की खाड़ी के द्वीप समूह में लगभग 572 द्वीप हैं। ये द्वीप 6° उत्तर से 14° उत्तर और 92° पूर्व से 94° पूर्व के बीच स्थित हैं। रीची और लबरीन्थ द्वीप, यहाँ के दो प्रमुख द्वीप समूह हैं। बंगाल की खाड़ी के द्वीपों को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार। बैरन आइलैंड नामक भारत का एकमात्र जीवंत ज्वालामुखी भी निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है।
अरब सागर के द्वीपों में लक्षद्वीप और मिनिकॉय शामिल है। ये द्वीप 80° उत्तर से 12° उत्तर और 71° पूर्व से 74° पूर्व के बीच बिखरे हुए है।
ये केरल तट से 280 किलोमीटर से 480 किलोमीटर दूर स्थित है। पूरा द्वीप समूह प्रवाल निक्षेप से बना है। यहाँ 36 द्वीप हैं और इनमें से 11 पर मानव आवास हैं। मिनिकॉय सबसे बड़ा द्वीप है जिसका क्षेत्रफल 453 वर्ग किलोमीटर है। पूरा द्वीप समूह 11 डिग्री चैनल द्वारा दो भागों में बाँटा गया है, उत्तर में अमीनी द्वीप और दक्षिण में कनानोरे द्वीप। इस द्वीप समूह
पर तूफान निर्मित पुलिन हैं जिस पर आबद्ध गुटिकाएं, शिगिल, गोलश्मिकाएँ तथा गोलाश्म पूर्वी समुद्र तट पर पाए जाते हैं।
(ii) नदी घाटी मैदान में पाए जाने वाली महत्त्वपूर्ण स्थलाकृतियाँ कौन-सी हैं? इनका विवरण दें।
उत्तर-प्रायद्वीप भाग में बहने वाली नदी घाटियाँ उथली और उनकी प्रवणता कम होती है। पूर्व की ओर बहने वाली अधिकांश नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले डेल्टा निर्माण करती हैं। महानदी, गोदावरी और कृष्ण द्वारा निर्मित डेल्टा इसके उदाहरण हैं।
हिमालय और अन्य अतिरिक्त-प्रायद्वीपीय पर्वतमालाओं में तेज बहाव वाली नदियों से अपरदित ये पर्वत गॉर्ज, V-आकार घाटियों, क्षिप्रिकाएँ व   जल -प्रपात इत्यादि इसका प्रमाण हैं। इस क्षेत्र के जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर है।
कश्मीर हिमालय में श्रीनगर का डल झील एक रोचक प्राकृतिक स्थल है। कश्मीर घाटी में झेलम नदी प्रौढ़ावस्था में निर्मित होने वाली विशिष्ट आकृति -विसर्पो का निर्माण करती है।
प्रदेश के दक्षिणी भाग में अनुदैर्ध्य घाटियाँ पाई जाती हैं जिन्हें दून कहा जाता है। हिमाचल हिमालय की दो महत्त्वपूर्ण स्थलाकृतियाँ शिवालिक और दून हैं।
दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय की पर्वत श्रेणियाँ उत्तर से दक्षिण दिशा में तेज बहती हुई गहरे गॉर्ज बनाने वाली नदियों द्वारा विच्छेदित होती है। कामेंग, सुबनसरी, दिहांग, दिबांग, लोहित और तीस्ता यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं, जो बहुत से जल-प्रपात बनाती हैं। मणिपुर घाटी के मध्य एक झील स्थित है जिसे ‘लोक ताक़’ झील कहा जाता है।
उत्तरी भारत के मैदान में हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे-शैल और गोलाश्म जमा कर देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती हैं। विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे सुंदर वन का डेल्टा।
प्रायद्वीपीय पठार में बहने वाली नदियाँ टार, ब्लॉक पर्वत, भ्रंश घाटियाँ, पर्वत स्कंध, नग्न चट्टान संरचना, टेकरी (hummocky) पहाड़ी शृंखलाएं और क्वार्ट्जाइट भित्तियाँ आदि का निर्माण करती हैं। प्रायद्वीपीय पूर्वी घाट अवतरित नहीं है और महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों द्वारा अपरदित हैं। यहाँ की कुछ श्रेण्यिाँ जावदी पहाड़ियाँ, पालकोण्डा श्रेणी, नल्लामाला पहाड़ियाँ और महेंद्रगिरि पहाड़ियाँ है।
मरुस्थल में बहने वाली नदियाँ थोड़ी दूरी तय करने के बाद लुप्त हो जाती हैं या किसी झील में या प्लाया में मिल जाती हैं। पश्चिमी तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ डेल्टा नहीं बनाती। पूर्वी तटीय मैदान में बहने वाली नदियाँ लम्बे-चौड़ें डेल्टा बनाती है। इसमें महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी का डेल्टा शामिल है।
(iii) यदि आप बद्रीनाथ से सुंदर वन डेल्टा तक गंगा नदी के साथ-साथ चलते हैं तो आपके रास्ते में कौन-सी स्थलाकृतियाँ आएंगी?
उत्तर-गंगा, हिमालय पर्वत में गोमुख हिमनदी से निकलती है। इस स्थान पर इसे गंगोत्री कहते है। 290 कि.मी. पर्वतीय प्रदेश से निकल कर हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। इलाहाबाद के बाद इसमें यमुना नदी आकर मिल जाती है। यह स्थान संगम के नाम से प्रसिद्ध है। इससे आगे उत्तर की ओर गोमती, घाघरा, गण्डक और कोसी की सहायक नदियाँ इसमें मिलती हैं। दक्षिण की ओर सोन नदी आकर मिलती है। बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले एक विशाल डेल्टा का निर्माण करती है। गंगा का डेल्टा सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है। उद्गम से लेकर डेल्टा तक इसकी लम्बाई 2525 किलोमीटर है। इसके किनारे पर हरिद्वार, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना, कोलकाता आदि महत्त्वपूर्ण नगर बसे हैं। यमुना भी गंगा के समानान्तर बहती है।
परियोजना/क्रियाकलाप
(i) एटलस की सहायता से पश्चिम से पूर्व की ओर स्थित हिमालय की चोटियों की एक सूची बनाएँ।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में कराकोरम, नंगा पर्वत तथा पूर्वी हिमालय में नामचा बरूआ, कचनजंगा, मकालू और ऐवरेस्ट आदि चोटियाँ पाई जाती हैं। (चित्र 2.2 एवं 24 देखें।)
(ii) आप अपने राज्य में पाई जाने वाली स्थलाकृतियों की पहचान करें और इन पर चलाए जा रहे मुख्य आर्थिक कार्यों का विश्लेषण करें।
उत्तर-उत्तरी भारत का मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा बहाकर लाए गए जलोढ़ निक्षेप से बना है। इस मैदान की पूर्व से पश्चिम लम्बाई लभग 3200 किलोमीटर है। इसकी औसत चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है। जलोढ़ निक्षेप की अधिकतम गहराई 1000 से 2000 मीटर है। उत्तर से दक्षिण दिशा में इन मैदानों को तीन भागों में बाँट सकते हैं-भामर, तराई और जलोढ़ मैदान। जलोढ़ मैदान को आगे दो भागों में बाँटा जाता है-खादर और बाँगर। भामर 8 से 10 किमी चौड़ाई की पतली पट्टी है जो शिवालिक गिरिपाद के समानांतर फैली हुई है। उसके परिणामस्वरूप हिमालय पर्वत श्रेणियों से बाहर निकलती नदियाँ यहाँ पर भारी जल-भार, जैसे-बड़े शैल और गोलाश्म जमा करा देती हैं और कभी-कभी स्वयं इसी में लुप्त हो जाती हैं।
तराई से दक्षिण में मैदान है जो पुराने और नए जलोढ़ से बना होने के कारण बाँगर और खादर कहलाता है। जैसे-बालू-रोपिका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित नदियाँ पाई जाती है। ब्रह्मपुत्र घाटी का मैदान नदीय द्वीप और बालू-रोधिकाओं की उपस्थिति के लिए जाना जाता है।
उत्तर भारत के मैदान में बहने वाली विशाल नदियाँ अपने मुहाने पर विश्व के बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जैसे-सुंदर वन डेल्टा। हरियाणा और दिल्ली राज्य सिंधु और गंगा नदी तंत्रों के बीच जल-विभाजक है। गंगा नदी द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदानों में गेहूँ, चावल, गन्ना और जूट उगाई जाती है।
[आर्थिक कार्यों का विश्लेषण अपने अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।]
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उसके आदर्श उत्तर
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
1. वृहद् स्तर पर भारत के धरातल को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर-तीन।
2. भारत का सबसे प्राचीन पठार कौन-सा है?
उत्तर ‘-दक्कन पठार।
3. दक्कन पठार के पूर्वी सीमाओं के नाम बताएं।
उत्तर-राजमहल की पहाडियां।
4. भारत का प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण कब हुआ?
उत्तर -पूर्व कैम्बरियन युग में।
5. अरावली पर्वत किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर- -विन्ध्य युग में।
6. दक्कन पठार में निर्मित लावा की सतहें कैसे बनीं?
उत्तर- -लावा बहने के कारण।
7. भारत में पाये जाने वाली दो रिफ्ट घाटियों के नाम लिखें।
उत्तर- नर्मदा तथा ताप्ती घाटिया।
8. अरब सागर कब अस्तित्व में आया?
उत्तर-प्लायोसीन युग में।
9. उस सागर का नाम बतायें जो हिमालय के किनारे पर स्थित था।
उत्तर-टैथीज सागर।
10. हिमालय किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर-टर्शियरी युग में।
11. हिमालय के उत्तर में कौन-सा भू-खण्ड स्थित है?
उत्तर- अगारालैण्ड।
12. टर्शियरी युग में हिमालय के दक्षिण में स्थित भू-खण्ड का नाम बताएं।
उत्तर- गोंडवानालैण्ड।
13. कश्मीर घाटी में पाई जाने वाली झील निक्षेप का नाम लिखो।
उत्तर- करेवा।
14. दक्कन पठार की पश्चिमी सीमा का नाम बताएं।
उत्तर-अरावली।
15. हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप बताओ।
उत्तर-जलोढ़ पंक।
16. चो के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र का नाम बताएं।
उत्तर- होशियारपुर (पंजाब)।
17. उस क्षेत्र का नाम बताएं जहां बरखान पाये जाते हैं।
उत्तर- जैसलमेर।
18. प्रायद्वीपीय भारत के उत्तर-पूर्व में पाये जाने वाले पठार का नाम बतायें।
उत्तर-शिलांग पठार।
19. दक्कन पठार के ढलान की दिशा बताओ।
उत्तर-दक्षिण-पूर्व।
20. भारत के उस क्षेत्र का नाम बताएं जहां ग्रेनाइट तथा नीस चट्टानें पाई जाती हैं।
उत्तर-कर्नाटक।
21. पश्चिमी घाट पर सबसे अधिक ऊंचाई कितनी है?
उत्तर-1600 मीटर।
22. पूर्वी घाट पर सबसे अधिक ऊंचाई कितनी है?
उत्तर-900 मीटर।
23. अरव सागर में पाये जाने वाले मूंगे के द्वीपों के समूह का नाम वताएं।
उत्तर-लक्षद्वीप समूह।
24. प्रायद्वीपीय भारत में सबसे ऊंची चोटी का नाम बताएं।
उत्तर-अनाईमुदी (2695 मीटर)।
25. पश्चिमी तटीय मैदान के दो विभागों के नाम लिखें।
उत्तर-कोंकण तट, मालबार तट।
26. यदि आपको लक्षद्वीप तक यात्रा करनी है तो किस तटीय मैदान से गुजरेंगे?
उत्तर-पश्चिमी तटीय मैदान।
27. भारत में शीत मरूस्थल कहां है?
उत्तर-लद्दाख में।
28. पश्चिमी तट पर डेल्टे क्यों नहीं है?
उत्तर- तीव्र गति वाली छोटी नदिया तलछट का जमाव नहीं करती।
29. सिन्धु गार्ज तथा ब्रह्मपुत्र गार्ज के मध्य हिमालय का क्या विस्तार है?
उत्तर-2400 किलोमीटर।
30. हिमालय में सबसे ऊंची चोटी माऊंट एवरेस्ट की कुल ऊंचाई वताएँ।
उत्तर -3200 किलोमीटर।
31. गंगा के मैदान में तलछट की अधिकतम ऊँचाई कितनी है?
उत्तर-2000 मीटर।
32. भारत के प्रायद्वीपीय पठार की औसत ऊँचाई बताएँ।
उत्तर-600-900 मीटर।
33. हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप का नाम वताएँ।
उत्तर- जलोढ़ पंक।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. भांगर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-प्राचीन जलोढ़ मिट्टी के बने ऊंचे मैदानी प्रदेशों को भांगर कहते हैं। इन उच्च प्रदेशों में नदियों की बाढ़ का जल पहुंच नहीं पाता। इस प्रदेश की मिट्टी में चीका मिट्टी, रेत तथा कंकड़ पाए जाते हैं। भारत के उत्तरी मैदान में नदियों द्वारा जलोढ़ मिट्टी के निक्षेप से भांगर प्रदेश की रचना हुई है।
2. भारत में भ्रंशन क्रिया (Faulting) के प्रमाण किन क्षेत्रों में मिलते हैं?
उत्तर-भू-पृष्ठीय भ्रंशन के प्रमाण सामान्य रूप से दक्षिणी पठार पर पाए जाते हैं। गोदावरी, महानदी तथा दामोदर घाटियों में भ्रंशन के प्रमाण पाए जाते है। नर्मदा तथा ताप्ती नदी घाटी दरार घाटिया हैं। भारत के पश्चिमी तट पर मालाबार तट तथा मेकरान तट के धरातल पर भ्रंशन क्रिया के प्रभाव देखे जा सकते हैं।
3. दून किसे कहते हैं? हिमालय पर्वत से तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर-हिमालय पर्वत की समानान्तर श्रेणियों के मध्य सपाट तलछटी वाली
संरचनात्मक घाटिया मिलती हैं। इन घाटियों द्वारा पर्वत श्रेणिया एक-दूसरे से अलग होती है। इन घाटियों को ‘दून’ (Doon) कहा जाता है। हिमालय पर्वत में इनके उदाहरण निम्नलिखित हैं।
(i) देहरादून (Dehra Dun),
(ii) कोथरीदून (Kothri Dun),
(iii) पाटलीदून (Patli Dun)।
कश्मीर घाटी को भी हिमालय पर्वत में एक दून की संज्ञा दी जाती है।
4. डेल्टा किसे कहते है? भारत से चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर-नदियों के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से एक त्रिभुजाकार स्थल रूप बनता है जैसे डेल्टा कहते हैं। डेल्टा नदी के अन्तिम भाग में अपने भार के निक्षेप से बनने वाला भू-आकार है। यह एक उपजाऊ समतल प्रदेश होता है। भारत में चार प्रसिद्ध डेल्टा इस प्रकार हैं-(i) गंगा नदी का डेल्टा,
(ii) महानदी का डेल्टा, (iii) कृष्णा नदी का डेल्टा,
(iv)काबेरी नदी का डेल्टा।
5. तराई से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-हिमालय पर्वत के दामन में भाबर के मैदान के साथ-साथ का संकारा मैदान स्थित है। यह मैदान लगभग 30 किमी चौड़ा है। इस मैदान का अधिकतर भाग दलदली है क्योंकि भाबर प्रदेशों में लुप्त हुई नदियों का जल रिस-रिस कर इस प्रदेश को अत्यधिक आर्द्र कर देता है। इस प्रदेश में ऊची घास तथा वन पाए जाते है। भाबर के दक्षिण में स्थित ये मैदान बारीक कंकड़,तेल, चिकनी मिट्टी से बना है। उत्तर प्रदेश में इस क्षेत्र में बड़े-बड़े फार्म बना कर कृषि की जा रही है।
6. भाबर क्या है? भाबर पट्टी के दो प्रमुख लक्षण बताओ।
उत्तर-बाह्य हिमालय की शिवालिक श्रेणियों के दक्षिण में इनके गिरिपद प्रदेश को भाबर का मैदान कहते हैं। पर्वतीय क्षेत्र से बहने वाली नदियों के मन्द बहाव के कारण यहां बजरी, कंकड़ का जमाव हो जाता है। इस क्षेत्र में पहुंच कर अनेक नदियां लुप्त हो जाती हैं। क्योंकि यह प्रदेश पारगम्य चट्टानों (Pervious Rocks) करक बना हुआ है। भाबर का मैदान एक संकरी पट्टी के रूप में 8 से 16 किमी की चौड़ाई तक पाया जाता है।
भाबर पट्टी के प्रमुख लक्षण- -(i) यह प्रदेश पारगम्य चट्टानों का बना हुआ है जिस में छोटी-छोटी नदियों का जल भूमिगत हो जाता है। (ii) इसमें बजरी और पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़ों के निक्षेप जमा होते हैं। (iii) यह प्रदेश हिमालय पर्वत तथा उत्तरी मैदान के संगम पर स्थित है।
7. दोआब से आप क्या समझते हैं? भारतीय उपमहाद्वीप से पांच उदाहरण दीजिए।
उत्तर-दो नदियों के मध्य के मैदानी भाग को दोआब कहते हैं। नदियों द्वारा निक्षेप से पुरानी कांप मिट्टी के प्रदेश इन नदियों को एक-दूसरे से अलग करते हैं। भारतीय उप-महाद्वीप में निम्नलिखित दोआब मिलते हैं-
(i) गंगा-यमुना नदियों के मध्य दोआब।
(ii) ब्यास-समलुज नदियों के मध्य जालन्धर दोआब।
(iii) ब्यास-रावी के मध्य बारी दोआब।
(iv) रावी-चनाब के मध्य रचना दोआब।
(v) चनाब-झेलम के मध्य छाज दोआब।
8. वृहत् स्तर पर भारत को कितनी भू-आकृतियों इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है? उनके नाम लिखिए।
उत्तर-भारत की तीन भू-आकृतियों विभागों के उच्चावच के लक्षणों का विकास एक लम्बे काल में हुआ है।
(i) उत्तर में हिमालय पर्वतीय श्रृंखला।
(ii) उत्तरी भारत का मैदान।
(iii) प्रायद्वीपीय पठार।
9. भारतीय पठार के प्रमुख भौतिक विभागों के नाम बताइए।
उत्तर-प्रायद्वीपीय पठार की भौतिक स्थलाकृतियों में बहुत विविधता है। फिर भी इसे मोटे तौर पर निम्नलिखित भौतिक इकाइयों में बाँटा जा सकता है-
(i) दक्षिणी पठारी खंड,
(ii) दक्कन का लावा पठार,
(iii) मालवा का पठार,
(iv) अरावली पहाड़ियाँ,
(v) नर्मदा तथा तापी की द्रोणियां,
(vi) महानदी, गोदावरी तथा कावेरी की नदी घाटिया,
(vii) संकरे तटीय मैदान।
10. हिमालय पर्वत को किन-किन श्रेणियों में बांटा जाता है?
उत्तर-हिमालय पर्वत को कई श्रेणियां एक-दूसरे के समानान्तर पाई जाती है। ये श्रेणिया एक-दूसरे से ‘दून’ नामक घाटियों द्वारा अलग-अलग हैं। भौगोलिक दृष्टि से हिमालय पर्वत के केन्द्रीय अक्ष के समानान्तर तीन पर्वत श्रेणियाँ हैं.
(i) बृहत् हिमालय (Greater Himalayas),
(ii) लघु हिमालय (Lesser Himalayas),
(iii) उप-हिमालय (Sub-Himalayas) या शिवालिक श्रेणी (Siwaliks)।
उक्त पर्वत श्रेणियों को तीन अन्य नामों से भी पुकारा जाता है-
(i) आन्तरिक हिमालय (Inner Himalayas),
(ii) मध्य हिमालय (Middle Himalayas),
(iii) बाह्य हिमालय (Outer Himalayas)।
11. हिमालय पर्वत में मिलने वाले ऊँचे पर्वत शिखर तथा उनकी ऊंचाई बताओ।
उत्तर-बृहत् हिमालय में संसार के 40 ऐसे पर्वत शिखर मिलते हैं जिनकी ऊंचाई 7000 मीटर से भी अधिक है। जैसे-
(i) एवरेस्ट (Everest)
(ii) कंचनजंगा (Kanchenjunga)
(iii) नंगा पर्वत (Nanga Parbat)
(iv) नंदा देवी (Nanda Devi)
(v) नामचा बरवा (Namcha Barwa)
(vi) धौलागिरी (Dhaulagiri)
(i)8848 मीटर
(ii)8598 मीटर
(iii)8126 मीटर
(iv)7817 मीटर
(v)7756 मीटर
(vi)8172 मीटर।
‘पश्चिमी हिमालय में पर्वत श्रेणियों की एक क्रमिक शृंखला पाई जाती है।”
व्याख्या करो।
उत्तर-हिमालय पर्वत में कई पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे के समानान्तर पाई जाती है। ये श्राणया एक-दूसरे से ‘दून’ या घाटियों द्वारा अलग-अलग है। पश्चिमी हिमालय में ये श्रेणियां स्पष्ट क्रम से दिखाई देती हैं। पंजाब के मैदानों के पश्चात् पहली श्रेणी शिवालिक की पहाड़ियों के रूप में या बाह्य हिमालय के रूप में मिलती है। इसके पश्चात् सिन्धु नदी की सहायक नदियों की घाटियों है। दूसरी वेदी (stage) के रूप में पीर-पजाल तथा धौलागार की लघु हिमालयी श्रेणियां मिलती है। पीर-पंजाली तथा महान् हिमालय के मध्य कश्मीर घाटी है। तीसरी वेदी के रूप में महान् हिमालय की जास्कर श्रेणी पाई जाती है। इससे आगे लद्दाख तथा कारकोरम की पर्वत श्रेणियां है जिसके मध्य सिन्धु घाटी मिलती है।
13. भारतीय पठार तथा हिमालय पर्वत के उच्चावच के लक्षणों में वैषम्य वताइए।
उत्तर-हिमालय पर्वत तथा भारतीय पठार की भू-आकृतियों की इकाइयों के भौतिक लक्षणों में काफी अन्तर पाए जाते है।
                            हिमालय पर्वत
(i) हिमालय पर्वत एक युवा, नवीन मोड़दार पर्वत है।
(ii) इन पर्वतों का निर्माण विभिन्न हलचलों द्वारा वलन क्रिया से हुआ है।
(iii) हिमालय पर्वत का धरातल युवा| लक्षण प्रकट करता है।
(iv) हिमालय पर्वत पर ऊँची तथा समानान्तर पर्वत श्रेणियाँ पाई जाती हैं।
(v) इन पर्वतों पर गहरे गार्ज पाए जाते हैं। तथा यू-आकार की श्रेणियाँ पाई जाती है।
(vi) ये पर्वत एक चाप के रूप में फैले हुए हैं।
(vii) इन पर्वतों में संसार के ऊंचे शिखर पाए जाते हैं।
(viii) यह तलछटी चट्टानों से बने हुए हैं।
(ix) इनकी रचना आज से 2760 लाख वर्ष पूर्व Mesozoic Period में हुई है।
                             भारतीय पठार
(i) भारतीय पठार कठोर चट्टानों का बना प्राचीन भूखण्ड है।
(ii) इस पठार का निर्माण एक उत्खण्ड (Horst) के रूप में हुआ है।
(iii) इस पठार का धरातल जीर्ण तथा घर्षित है।
(iv) इस पठार पर दरारों के कारण दरार घाटियाँ मिलती है।
(v) इस पठार पर गहरी नदी घाटियाँ पाई जाती है।
(vi) इस पठार का आकार तिकोना है।
(vii) इस पठार पर अपरदित पहाड़ियाँ पाई जाती है।
(viii) यह आग्नेय चट्टानों से बने है।
(ix) इनकी रचना आज से 16000 लाख पूर्व Pre-cambrian Period में हुई है।
14. तराई तथा भाबर प्रदेश में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर-तराई तथा भाबर प्रदेश में अन्तर-
                             तराई (Terai)
(i) भाबर प्रदेश के साथ-साथ दक्षिण में तराई क्षेत्र स्थित है।
(ii) यह एक नम, दल-दली तथा जगलो से ढंका प्रदेश है। जहाँ कंकड़ जमा होते है।
(iii) इसकी चौड़ाई 20 से 30 किमी है।
(iv) भबर प्रदेश से रिस-रिस कर आने वाला जल नदियों का रूप धारण कर लेता है।
(v) यह प्रदेश कृषि के उपयुक्त है।
                          भावर (Bhabar)
(i) शिवालिक पहाडियों के तटीय क्षेत्र में| भाबर प्रदेश स्थित है।
(ii) यह प्रवेशीय चट्टानों से बना क्षेत्र है| जहाँ भारी पत्थर तथा कंकड़ जमा होते हैं।
(iii) इसकी चौड़ाई 8 से 16 किमी है।
(iv) प्रवेशीय चट्टानों के कारण यहा नदिया विलीन हो जाती है।
(v) यह प्रदेश कृषि के उपयुक्त नहीं है।
15. बांगर तथा खादर प्रदेश में क्या अन्तर है?
उत्तर-बांगर तथा खादर प्रदेश में अन्तर
                     बांगर (Bangar)
(i) पुराने जलोढ़ निक्षेप से बने ऊँचे प्रदेश  को बागर कहते हैं।
(ii) यह प्रदेश बाढ़ के मैदान के तल से ऊँचे होते है।
(iii) यह प्रदेश चूनायुक्त कंकड़ों से बने होते हैं।
(iv) यहां बाढ़ का पानी नहीं पहुंच पाता।
(v) कई प्रदेशों में इन्हें ‘धाया’ कहा जाता है।
                    खादर (Khaddar)
(i) बाढ़ की नवीन मिट्टी से बने निचले प्रदेश को खादर कहते है।
(ii) यहां नदियां बाढ़ के कारण प्रति वर्ष जलोढ़ की नई पर्त बिछा देती हैं।
(iii) यह उपजाऊ चीका मिट्टी से बने प्रदेश होते हैं।
(iv) यह वास्तव में नदियों के बाढ़ के मैदान
(v) कई प्रदेशों में इन्हें ‘बेट’ कहा जाता है।
16. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ सततवाहिनी क्यों हैं?
उत्तर-(i) हिमालय से निकलने वाली नदियों का उदगम् बर्फीले प्रदेशों में होते हैं।
(ii) इन निकलने वाली नदियों में सालोंभर जल प्रवाहित होते है?
(iii) हिमालय से निकलने वाली नदियाँ वर्षा द्वारा भी जल ग्रहण करती है। जैसे गगा सिन्धु, ब्रह्मपुत्र प्रमुख सततवाहिनी नदियाँ हैं, जिनके किनारे भारी मानव बसे हुए है और प्रमुखता से कृषि कार्य के साथ उद्योगो ने भी अपनी महत्ता बनायी है।
17. भारत के किसी एक भौतिक विभाग का वर्णन करें।
उत्तर-भू- -वैज्ञानिक संरचना तथा धरातलीय स्वरूप के आधार पर भारत के तीन भौतिक विभागों में वर्गीकृत किया जाता है—(1) दक्षिण का प्रायद्वीप पठार। (2) उत्तर की विशाल पर्वतमाला। (3) दोनों के बीच स्थित विस्तृत समतल मैदान।
18. जलचक्र का सचित्र वर्णन करें।
उत्तर- -सूर्य ताप से महासागरों के जल वाष्पित होकर वायुमंडल द्वारा उठा लिया जाता है। यह जल अंततोगत्वा संघनित होता है और भूपृष्ठ को वर्षा, ओले, ओस, हिम अथवा बजरी के रूप में लौटा दिया जाता है।
19. पश्चिमी तट पर अच्छी बंदरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा क्यों है?
उत्तर-पश्चिमी तट पर अच्छी बन्दरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा होने के
मुख्य कारण निम्नलिखित है-(i) पश्चिमी तट अधिक कटा-फटा है जबकि पूर्वी तट कम कटा-फटा है। (ii) पश्चिमी तट पर अधिक लैगून है जबकि पूर्वी तट पर कम है। (iii) यहाँ तीव्रगामी नदियाँ बहती है जबकि पूर्वी तट पर महानदी, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी जैसी बड़ी नदी है जो डेल्टाओं का निर्माण करती है। (iv) यहाँ संकड़ा मैदान है जबकि पूर्वी तट पर चौड़ा मैदान है।
इसलिए पश्चिमी तट पर अच्छी बन्दरगाहों तथा पूर्वी तट पर बड़े-बड़े डेल्टा है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. “उप-महाद्वीप के वर्तमान भू-आकृतिक विभाग एक लम्बे भूगर्भिक इतिहास के दौरे में विकसित हुए हैं।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-भारतीय उपमहाद्वीप की तीनों भू-आकृतिक इकाइयां इतिहास के लम्बे उतार- चढाव के दौरे में विकसित हुई है। इनके निर्माण के सम्बन्ध में अनेक प्रकार के भू-वैज्ञानिक प्रमाण दिए जाते हैं फिर भी अतीत अपना रहस्य छिपाए हुए है। इनकी रचना प्राचीन काल से लेकर कई युगों में क्रमिक रूप में हुई है।
(i) प्रायद्वीपीय पठार-इस पठार की रचना कैम्ब्रियन पूर्व युग में हुई है। कुछ विद्वानों की धारणा है कि यह एक उत्खण्ड (HORST) है जिसका उत्थान समुद्र से हुआ है। इस पठार के पश्चिमी भाग में अरावली पर्वत का उत्थान दक्षिण में नाला मलाई पर्वतमाला का एक उत्थान विंध्य-महायुग में हुआ। इस स्थिर भाग में एक लम्बे समय तक भू-गर्भिक हलचलों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कुछ भागों में धरातल पर भ्रंश पड़ने के कारण धसाव के प्रमाण मिलते हैं। हिमालय के निर्माण के पश्चात् पठार के उत्तर-पश्चिमी भाग के धंसने के कारण अरब सागर का निर्माण प्लीओसीन युग में हुआ। इस पठार को विशाल गोंडवाना महाद्वीप का भाग माना जाता है। इसका कुछ भाग अब भी उत्तरी मैदान के नीचे छिपा हुआ है।
हिमालय के उत्थान के समय पठार के उत्तर-पश्चिमी भाग में विस्तृत रूप से ज्वालामुखी उदगार हुए जिससे दक्कन लावा क्षेत्र (Deccan Trap) का निर्माण हुआ। पठार के पश्चिम भाग में निमज्जन से पश्चिमी घाट ऊपर उभरे। दूसरी ओर पूर्वी तट शान्त क्षेत्र रहे।
(ii) हिमालय पर्वत-यह एक युवा तथा नवीन मोड़दार पर्वत है। मध्यजीवी काल तक यह पर्वत एक भू-अभिनति द्वारा घिरा हुआ था। इसे ‘टैथीस सागर’ कहते हैं। टर्शियरी युग में टैथीस सागर में जमा तलछटों में बलन पड़ने से हिमालय पर्वत तथा इसकी शृंखलाओं का निर्माण हुआ। उत्तरी भू-खण्ड अंगारालैण्ड की ओर से दक्षिणी भू-खण्ड गोंडवाना लैण्ड की ओर दबाव पड़ा। दक्षिणी भू-खण्ड के उत्तर अभिमुखी दबाव ने टथीस सागर में जमा तलछट को ऊँचा उठा दिया जिससे हिमालय पर्वत में वलनों का निर्माण हुआ। हिमालय पर्वत में पर्वत निर्माण कार्य हलचल की पहली अवस्था अल्प नूतन युग में, दूसरी अवस्था मध्य नूतन युग में तथा तीसरी अवस्था उत्तर अभिनूतन युग में हुई।
आधुनिक प्रमाणों के आधार पर ये पर्वत निर्माणकारी हलचलें (Mountain Building) प्लेट-विर्तनिकी (Plate tectonics) से सम्बन्धित हैं। भारतीय प्लेट उत्तर की ओर खिसकी तथा यूरेशिया प्लेट को नीचे से धक्का देने से हिमालय पर्वतमाला की उत्पत्ति हुई।
(iii) उत्तरी मैदान-भारत का उत्तरी मैदान हिमालय पर्वत तथा दक्षिण पठार के मध्यवर्ती क्षेत्र में फैला है। यह मैदान एक समुद्री गर्त के भर जाने से बना है। इस गर्त में हिमालय पर्वत तथा दक्षिणी पठार से बहने वाली नदियां भारी मात्रा में मलवे का निक्षेप करती रही हैं। इस गर्त का निर्माण हिमालय पर्वत के उत्थान के समय एक अग्रगामी गर्त (Fore-deep) के रूप में हुआ। इसका निर्माण प्रायद्वीपीय पठार के उत्तर अभिमुख दबाव के कारण हिमालय पर्वत के समान हुआ। यह सम्पूर्ण क्षेत्र निक्षेप क्रिया द्वारा लगातार पूरी होता रहा है। यह क्रिया चतुर्थ महाकल्प तक जारी है। इस प्रकार लम्बी अवधि में भारत के वर्तमान भौगोलिक स्वरूप का विकास हुआ है।
2. भारत के मानचित्र में निम्नलिखित की स्थिति दिखाएँ-
(i) थार मरुस्थल
(ii) तटीय मैदान
(iii) कंचनजंगा
(iv) नाथुला और कराकोरम
(v) शिवालक पर्वत श्रेणी
(vi) मेघालय का पठार
(vii) दक्कन ट्रैप
(viii) विंध्य और सतपुड़ा की पर्वत श्रेणियाँ।
उत्तर-

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