12-biology

bihar board 12 biology | मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

bihar board 12 biology | मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

  [ MICROBES IN HUMAN WELFARE ]
           महत्त्वपूर्ण तथ्य
• Bt कॉटन – एक पादप पीड़क प्रतिरोधक बैसीलस थूरिजिऐंसिस का प्रयोग बटरफ्लाई केटरपिलर नियंत्रण में किया जाता है ।
•सायनोबैक्टीरिया – स्वपोषित सूक्ष्मजीव हैं जो जलीय तथा स्थलीय वायुमंडल में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं ।
•ऐजोस्पाइरिलम तथा ऐजोबैक्टर – ऐसे जीवाणु जो मृदा में मुक्त अवस्था में रहते हैं । ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं ।
•दाइकोडर्मा – एक कवक जिसका प्रयोग पादप रोगों के उपचार में किया जाता है ।
•बैक्यूलोवायरेसिस – ऐसे रोगजनक हैं जो कीटों तथा संधिपादों पर हमला करते हैं ।
•बॉयोगैस – एक जैविक ऊर्जा स्त्रोता भारत में बॉयोगैस उत्पादन की प्रौद्योगिकी का विकास मुख्यतः भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग के परिणामस्वरूप हुआ । •गोबर गैस – गोबर में पादपों के सैल्यूयोजीय व्युत्पन्न प्रचुर मात्रा में होते हैं । अत : इनका प्रयोग बायोगैस को पैदा करने में किया जाता है जिसे सामान्यतः ‘ गोबर गैस ‘ भी कहते हैं ।
•मीथैबोजेन – कुछ बैक्टीरिया जो सैल्यूलोजीय पदार्थों पर अवायुवीय रूप से उगते हैं , वह CO2 , तथा H2 , के साथ – साथ बड़ी मात्रा में मीथेन भी उत्पन्न करते हैं । सामूहिक रूप से इन जीवाणुओं को मीथैनोजेन कहते हैं ।
• सक्रियीत आपंक – वाहितमल के बहिःस्राव को नि : सादन ( सैटलिंग ) टैंक में भेजते हैं , जहाँ जीवाणु झुंड ( फ्लॉक्स ) उसे अवसाद में परिवर्तित करते हैं । यह अवसाद सक्रियीत आपंक कहलाता है।
•अवायवीय आपंक संपाचित्र – सक्रियीत आपंक के छोटे से भाग को फिर से पीछे वायुवीय टैंक में पंप करते हैं । यह आपंक निवेद द्रव्य की तरह से कार्य करता है । आपंक का बचा – खुचा मुख्य भाग बड़े टैंक में पंप किया जाता है । जिसे अवायवीय आपंक संपाचित्र कहते हैं ।
• बी ओ डी – बॉयोकेमीकल ऑक्सिन डिमांड ( जल में ऑक्सीजन उद्ग्रहण ) की दर का मापन परीक्षण। • चैनीसिलीन – एक ऐंटीबॉयोटिक जो बहुत सी जानलेवा बीमारियों के उपचार में काम आता है ।
        NCERT पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर अभ्यास ( Exercises )
 1. जीवाणुओं को नग्न नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता , लेकिन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है । यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो , तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जायेंगे और क्यों ? उत्तर – हम प्रतिदिन सूक्ष्मजीवों अथवा उनसे व्युत्पन्न उत्पादों का प्रयोग करते हैं । इसका सामान्य उदाहरण दूध से दही का उत्पादन है । सूक्ष्मजीव जैसे लैक्टोबैसिलस तथा अन्य जिन्हें सामान्यतः लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ( एल ए बी ) कहते हैं , दूध में वृद्धि करते है और उसे दही में परिवर्तित कर देते हैं । इसी प्रकार एक बेकर यीस्ट
( सैकरोमाइसीज सैरीवीसी ) का प्रयोग ब्रेड बनाने में किया जाता है ।
     यदि हमको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को देखना हो तो हम एक सड़ी हुई ( खराब ) ब्रेड का टुकड़ा या फिर थोड़ी सी मात्रा में दही ले जायेंगे क्योंकि ये दोनों चीजें आसानी से उपलब्ध हैं और इनमें सूक्ष्मजीव आसानी से दिखाई दे जाते हैं । ब्रेड पर जो हरा – हरा सा रंग दिखाई देता है , वास्तव में वह फंजाई ( fungus ) है । उसके स्पोर वायु में उपस्थित रहते हैं जो खाद्य पदार्थ में वृद्धि करते रहते हैं ।
2. उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं । उदाहरण द्वारा सिद्ध करें ।
उत्तर – दाल – चावल का बना ढीला – ढाला आटा जिसका प्रयोग ‘ डोसा ‘ तथा ‘ इडली ‘ जैसे आहार को बनाने में किया जाता है , बैक्टीरिया द्वारा किण्वित होता है । इस आटे की फूली उभरी शक्ल CO2 , गैस के उत्पादन के कारण होती है ।
     स्विस चीज में पाए जाने वाले बड़े – बड़े छिद्र प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई नामक बैक्टीरियम द्वारा बड़ी मात्रा में उत्पन्न CO2 , के कारण होते हैं । ‘ रॉक्यूफोर्ट चीज ‘ एक विशेष प्रकार के कवक की वृद्धि से परिपक्व होते हैं जिससे विशेष सुगंध आने लगती हैं ।
3. किस भोजन ( आहार ) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं ? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन करें ।
उत्तर – लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ( एल ए बी ) दूध में मिलते हैं ।
  ये दूध में वृद्धि करते हैं और उसे दही में परिवर्तित कर देते हैं । वृद्धि के दौरान ये अम्ल उत्पन्न करते हैं जो दुग्ध प्रोटीन को स्कंदित तथा आंशिक रूप से पचा देते हैं । दही बनने पर विटामिन बी 12 की मात्रा बढ़ने से पोषण संबंधी गुणवत्ता में भी सुधार हो जाता है । हमारे पेट में भी , सूक्ष्मजीवियों द्वारा उत्पन होने वाले रोगों को रोकने में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया एक लाभदायक भूमिका का निर्वाह करते हैं ।
4. कुछ पारंपरिक भारतीय आहार जो गेहूँ , चावल तथा चना ( अथवा उनके उत्पाद ) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो , उनके नाम बताएँ ।
उत्तर – बहुत से पारंपरिक भारतीय आहार हैं जो गेहूँ , चावल तथा चना से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल होता है । उनके नाम इस प्रकार हैं-
दही , पनीर , चीज , डोसा , इडली , कुछ भारतीय ब्रेड जैसे ‘ भदूरा ‘ दक्षिण भारत के कुछ भागों में एक पारंपरिक पेय टोडी ‘ है । किण्वित मछली , सोयाबीन तथा बांस प्ररोह आदि का प्रयोग भोजन तैयार करने में किया जाता है ।
5. हानिप्रद जीवाणु द्वारा उत्पन्न करने वाले रोगों के नियंत्रण में किस प्रकार सूक्ष्मजीव भूमिका निभाते हैं ?
उत्तर – हानिप्रद जीवाणु द्वारा उत्पन्न करने वाले रोगों के नियंत्रण में सूक्ष्मजीव महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।
     प्रतिजैविक ( ऐंटीबायोटिक ) एक प्रकार के रासायनिक पदार्थ हैं , जिनका निर्माण कुछ सूक्ष्मजीवियों द्वारा होता है । यह अन्य ( रोग उत्पन्न करने वाले ) सूक्ष्मजीवियों की वृद्धि को मंद अथवा उन्हें मार सकते हैं ।
    पैनीसिलीन सबसे पहला ऐंटीबायोटिक था । इस ऐंटीबायोटिक का प्रयोग दूसरे विश्व युद्ध में घायल अमरीकन सिपाहियों के उपचार में व्यापक रूप से किया गया । पैनीसिलीन के बाद अन्य सूक्ष्मजीवियों से अन्य एंटीबायोटिकों को भी परिशुद्ध किया गया । प्लेग , काली खांसी , डिप्थीरिया ( गलघोटू ) , लैप्रोसी ( कुष्ठरोग ) जैसे भयानक रोग जिनसे संसार में लाखों लोग मरे हैं , के उपचार के लिए ऐंटीबायोटिकों ने हमारी क्षमता में वृद्धि करके वे एक शक्ति के रूप में उभरकर आये हैं ।
6. किन्हीं दो कवक प्रजातियों के नाम लिखें , जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों ( ऐंटीबायोटिकों ) के उत्पादन में किया जाता है ।
उत्तर – पैनीसिलीन , पैनीसीलियम नोटेटम और पैनीसिलीन कैरीसोगेनियम नामक मोल्ड से उत्पन्न होता है ।
7. वाहितमल से आप क्या समझते हैं , वाहितमल हमारे लिए किस प्रकार हानिप्रद हैं ?
उत्तर – प्रतिदिन नगर एवं शहरों से व्यर्थ जल की एक बहुत बड़ी मात्रा जनित होती है । इस व्यर्थ जल का प्रमुख घटक मनुष्य का मलमूत्र है । नगर के इस व्यर्थ जल को वाहितमल ( सीवेज ) भी कहते हैं । इसमें कार्यनिक पदार्थों की बड़ी मात्रा तथा सूक्ष्मजीव पाये जाते हैं जो अधिकांशत रोगजनकीय होते हैं ।
8. प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहितमल उपचार के बीच पाए जाने वाले मुख्य अंतर कौन – से हैं ?
उत्तर – प्राथमिक वाहितमल उपचार – वाहितमल से बड़े – छोटे कणों का निस्यंदन ( फिल्ट्रेशन ) तथा अवसादन ( सेडीमिंटेशन ) द्वारा भौतिक रूप से अलग कर दिया जाता है । इन्हें भिन्न – भिन्न चरणों में अलग किया जाता है । आरंभ में तैरते हुए कूड़े – करकट को अनुक्रमिक निस्पंदन द्वारा हटा दिया जाता है । इसके बाद शितवालुकाश्म ( ग्रिट ) ( मृदा तथा छोटे गुटिकाओं केवल ) को अवसादन द्वारा निष्कासित किया जाता है । सभी ठोस जो प्राथमिक आप्लावक ( स्लज ) के बैठे कण हैं , वह और प्लावी ( सुपरनैंटेंट ) बहिःस्त्राव ( इफ्लुएट ) का निर्माण करता है । बहिःस्त्राव को प्राथमिक निःसादन ( सेटलिग ) टैंक से द्वितीयक उपचार के लिए ले जाया जाता है ।
   द्वितीयक उपचार – प्राथमिक बहिःखाव को बड़े वायुवीय टैंकों में से गुजारा जाता है । जहाँ यह लगातार यांत्रिक रूप से हिलाया जाता है और वायु को इसमें पंप किया जाता है । इससे लाभदायक वायुवीय सूक्ष्मजीवियों की प्रवल सशक्त वृद्धि ऊर्णक के रूप में होने लगती है । वृद्धि के दौरान यह सूक्ष्मजीव बहिःस्राव में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों के प्रमुख भागों की खपत करता है । यह बहिःस्त्राव के बीओडी ( बॉयोकेमीकल ऑक्सीजन डिमांड ) को महत्त्वपूर्ण रूप से घर लगता है । बीओडी ऑक्सीजन की उस मात्रा को संदर्भित करता है जो जीवाणु द्वारा एक लीटर पा में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों की खपत कर उन्हें ऑक्सीकृत कर दे । वाहितमल का तब तक उपच किया जाता है जब तक बीओडी घट न जाए ।
9. सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है । यदि ह तो किस प्रकार से इस पर विचार करें ।
उत्तर – हाँ , सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है । बॉयोग एक प्रकार से गैसों का मिश्रण है जो सूक्ष्मजीवी सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है । वृद्धि तथा उपापच के दौरान सूक्ष्मजीवी विभिन्न किस्मों के गैसीय अंतिम उत्पाद उत्पन्न करते हैं जैसे मिथेन , हाइड्रोज सल्फाइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड । ये गैसें बायोगैस का निर्माण करती हैं । चूँकि हैं य ज्वलनशील होती हैं इस कारण इनका प्रयोग ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा सकता है । बायोगे को सामान्यतः ‘ गोबर गैस ‘ भी कहते हैं ।
10. सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग को क करने के लिए भी किया जा सकता है । यह किस प्रकार संपन्न होगा ? व्याख्या कीजिए ।
उत्तर – आज पर्यावरण प्रदूषण चिंता का एक मुख्य कारण है । कृषि उत्पादों की बढ़ती मां को पूरा करने के लिए रसायन उर्वरकों का प्रयोग इस प्रदूषण के लिए महत्त्वपूर्ण है । जैव उर्वर एक प्रकार के जीव हैं , जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं । जैव उर्वरकों का मुख्य स्त्र जीवाणु , कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं । लैग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर स्थित ग्रंथियों के में हम पढ़ चुके हैं । इन ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम के सहजीवी संबंध द्वारा होता है । = जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं । पान इसका प्रयोग पोषकों के रूप में करते हैं । अन्य जीवाणु ( उदाहरण ऐजोस्पाइरिलम तथा ऐजेटोबैक्ट मृदा में मुक्तावस्था में रहते हैं । यह भी वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं । इस प्रक मृदा में नाइट्रोजन बढ़ जाती है ।
     कवक पादपों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं । ऐसे संबंधों से युक्त पादप कई अ लाभ जैसे मूलवातोढ़ रोगजनक के प्रति प्रतिरोधकता , लवणता तथा सूखे के प्रति सहनशीलत कुलवृद्धि तथा विकास प्रदर्शित करते हैं । सायनोबैक्टीरिया स्वपोषित सूक्ष्मजीव हैं जो जलीय ता स्थलीय वायुमंडल में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं । इनमें बहुत से वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर सकते हैं ।
   पादप रोगों तथा पीड़कों के नियंत्रण के लिए जैव वैज्ञानिक विधि का प्रयोग ही जैव नियंत्र है। आधुनिक समाज में यह समस्याएँ रसायनों , कीटनाशियों तथा पीड़कनाशियों के बढ़ते हुए प्रयो की सहायता से नियंत्रित की जाती हैं । ये रसायन मनुष्यों तथा जीव जंतुओं के लिए अत्यंत ही विषैः तथा हानिकारक हैं । ये पर्यावरण ( मृदा , भूमिगत जल ) को प्रदूषित करते हैं तथा फलों , साग – सब्जि और फसलों पर भी हानिकारक प्रभाव डालते हैं । खरपतवार नाशियों का प्रयोग खरपतवार को हट में किया जाता है । यह भी हमारी मृदा को प्रदूषित करते हैं ।
बैक्टीरिया वैसीलस थूरिजिऐंसिस ( Bt ) का प्रयोग बटरफ्लाई केटरपिलर नियंत्रण में कि जाता है । बैक्यूलोवायरेसिस ऐसे रोगजनक हैं जो कीटों तथा सधिपादों पर हमला करते है न्यूक्लिओपॉली हीड्रोसिस वायरस ( NPU ) प्रजाति विशेष , संकरे स्पैक्ट्रम कीटनाशीय उपचारों के लिए उत्तम माने गए हैं ।
11. जल के तीन नमूने लो एक नदी का जल , दूसरा अनुपचारित वाहितमल जल तथा तीसरा वाहितमल उपचार संयंत्र से निकला द्वितीयक बहिःस्राव , इन तीनों नमूनों पर ‘ अ ‘ , ‘ ब ‘ , ‘ स ‘ का लेबल लगाओ । इस बारे में प्रयोगशाला कर्मचारी को पता नहीं है कि कौन – सा क्या है ? इन तीनों नमूनों ‘ अ ‘ , ‘ ब ‘ , ‘ स ‘ का बीओडी का रिकार्ड किया गया जो क्रमश : 20mg / L , 8mg / L तथा 400 mg / L निकला । इन नमूनों में कौन – सा सबसे अधिक प्रदूषित नमूना है ? इस तथ्य को सामने रखते हुए कि नदी का जल अपेक्षाकृत अधिक स्वच्छ है । क्या आप सही लेबल का प्रयोग कर सकते हैं ?
उत्तर – बी ओ डी ऑक्सीजन की उस मात्रा को संदर्भित करता है जो जीवाणु द्वारा एक लीटर पानी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थो की खपत पर उन्हें ऑक्सीकृत कर दे । वाहितमल का तब तक उपचार किया जाता है जब तक बी ओ डी घट न जाए । जल के एक नमूने में सूक्ष्मजीवियों द्वारा ऑक्सीजन के उद्ग्रहण की दर का मापन बी ओ डी परीक्षण से किया जाता है ; अत : अप्रत्यक्ष रूप से जल में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों का गापन ही बी ओ डी है । जब व्यर्थ जल का बी ओ डी अधिक होगा , तब उसकी प्रदूषण क्षमता भी अधिक होगी । दिए गए जल के तीनों नमूनों में से नदी के जल के बी ओ डी ( अ ) 20 ml / L है ; अनुपचारित वाहितमल जल का बी ओ डी ( ब ) 8 ml / L तथा द्वितीयक बहिःस्राव के जल का बी ओ डी ( स ) 400 mg / L है । सही लेबल इस प्रकार है-
( अ ) नमूना – नदी का जल ( स्वच्छ जल ) ।
( ब ) नमूना – द्वितीवक बहिःस्त्राव ( उपाचरित वाहित जल ) ।
( ग )नमूना – दूसरा अनुपचारित ( वाहितमल जल )। 12. उस सूक्ष्मजीवी का नाम बताओ जिससे साइक्लोस्पोरिन – ए ( प्रतिरक्षा निषेधात्मक औषधि ) तथा स्टैटिन ( रक्त कोलेस्ट्रॉल लघुकरण कारक ) को प्राप्त किया जाता है ।
उत्तर – साइक्लोस्पोरिन – ए जिसका प्रयोग अंग प्रतिरोपण में प्रतिरक्षा निरोधक ( इम्युनोसप्रेसिव ) कारक के रूप में रोगियों में किया जाता है । इसका उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम नामक कवक से किया जाता है ।
   मोनॉस्कस परप्यूरीउस यीस्ट से उत्पन्न इस स्टैटिन का व्यापारिक स्तर पर प्रयोग रक्त – कॉलेस्ट्रॉल को कम करने वाले कारक के रूप में किया जाता है । 13. निम्नलिखित में सूक्ष्मजीवियों की भूमिका का पता लगाओ तथा अपने अध्यापक से इनके विषय में विचार – विमर्श करें-
( क ) एकल कोशिका प्रोटीन ( एस सी पी )
( ख ) मृदा ।
उत्तर- ( क ) एकल कोशिका प्रोटीन ( एस सी पी ) -पशु तथा मानव पोषण के लिए प्रोटीन के वैकल्पिक स्रोतों में से एक एकल कोशिका प्रोटीन है । सूक्ष्मजीवों का प्रोटीन के अच्छे स्रोत के रूप में बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है । वास्तव में , अधिकांश लोगों द्वारा मशरूम भोजन के रूप में खाए जाने लगे हैं । अत : बड़े पैमाने में मशरूम संवर्धन एक प्रकार से बढ़ता हुआ उद्योग है । जिससे अब विश्वास होने लगा है कि सूक्ष्मजीव आहार के रूप में स्वीकार्य हो जायेंगे । सूक्ष्मजीवी स्पाइरूलाइना में प्रोटीन , खनिज , वसा , कार्बोहाइड्रेट तथा विटामिन प्रचुर मात्रा में विद्यमान हैं । इसका उपयोग पर्यावरणीय प्रदूषण को भी कम करता है । सूक्ष्मजीव जैसे मिथावलोफिलस मिथायलोटोपस की वृद्धि तथा बायोमास उत्पादन की उच्च दर से संभावित 25 टन तक प्रोटीन उत्पन्न कर सकते हैं ।
( ख ) मृदा – जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव हैं , जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं । जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु , कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं । लैग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर स्थित ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम के सहजीवी संबंध द्वारा होता है । यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं । पादप इसका उपयोग पोषकों के रूप में करते हैं । यह भी वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते है । इस प्रकार मृदा में नाइट्रोजन अवयव बढ़ जाते हैं ।
14. निम्नलिखित को घटते क्रम में मानव समाज कल्याण के प्रति उनके महत्त्व के अनुसार संयोजित करें ; महत्त्वपूर्ण पदार्थ को पहले रखते हुए कारणों सहित अपना उत्तर लिखें ।
बायोगैस , सिट्रिक एसिड , पैनीसिलीन तथा दही । उत्तर – दी गई सूची में सबसे महत्त्वपूर्ण पदार्थ पैनीसिलीन है क्योंकि वह मानव सभ्यता के कल्याण के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है । यह कई जानलेवा बीमारियों को ठीक कर सकता है । उसके बाद सूची में बॉयोगैस का नम्बर आता है क्योंकि वह ईंधन का स्रोत है । उसके बाद सूची में दही का स्थान आता है क्योंकि वह हमें पोषक दुग्ध उत्पाद प्रदान करती है । उसके बाद सूची में ( अंत में ) सिट्रिक एसिड का नम्बर आता है जिसका उपयोग प्रोसेसिंग उद्योगों में किया जाता है ।
15. जैव उर्वरक किस प्रकार से मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं ?
उत्तर – जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव हैं , जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं । जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत कवक , जीवाणु तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं । दूसरे जीवाणु ऐजोस्पाइरिलम तथा ऐजटोबैक्टर भी वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर जाते हैं । धान के खेत में सायनोबैक्टीरिया महत्त्वपूर्ण जैव उर्वरक की भूमिका निभाते हैं । नील हरित शैवाल भी मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ा देते हैं , जिससे उसकी उर्वरता बढ़ जाती है ।
Photo…….1
Photo….2
     परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
 I. वस्तुनिष्ठ
प्रश्न : 1. निम्न में से कौन – सा जैव घटक है ?
( a ) मृदा
( b ) वाष्प
( c ) पानी
( d ) भाप
उत्तर- ( a ) मृदा ।
2. यदि एक नदी सीवेज से दूषित हो जाए तो मछलियाँ मर जायेंगी , क्योंकि
( a ) बुरी दुर्गंध
( b ) O2 , की कमी
( c ) सीवेज में उपस्थित रोगाणु
( d ) ठोस पदार्थों के गिलों में फंसने पर
उत्तर- ( b ) O2 , में कमी हो जाने के कारण ।
3. जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग उन पदार्थों के उत्पादन के लिए करना जिन्हें औषधियों के रूप में अथवा उद्योगों में प्रयोग किया जाता है , कहलाता है ( a ) जैव रासायनिकी
( b ) जैव तकनीक
( c ) जैव कार्यिकी
( d ) जैव भौतिकी
उत्तर- ( b ) जैव तकनीक ।
4. दूध को दही में परिवर्तित करने वाले जीवाणु का क्या नाम है ?
( a ) लैक्टोबैसिलस
( b ) सैकरोमाइसीज सैरीविसी
( c ) प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई
( d ) साइक्लोस्पोरिन – ए
उत्तर- ( a ) लैक्टोबैसिलस
5. डोसा तथा इडली के ढीले – ढाले आटे की फूली उभरी शक्ल किस कारण से होती है ?
( a ) O2
( b ) CO2
( c ) H2 ,
( d ) N2 ,
उत्तर- ( b ) CO2
6. वाइन , बियर , ह्विस्की , बांडी या रम जैसे पेयों के उत्पादन में कौन से सूक्ष्मजीवी का प्रयोग किया जाता है ?
( a ) सैकरोमाइसीज सैरीविसी
( b ) लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया
( c ) स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया
( d ) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर- ( a ) सैकरोमाइसीज सैरीविसी ।
7. पैनीसिलिन कौन – सा ऐंटीबॉयोटिक था ?
( a ) सबसे पहला
( b ) सबसे आखरी
( c ) दूसरा
( d ) चौथा
उत्तर- ( a ) सबसे पहला ।
8. अपमार्जक संरूपण तथा घुलाई में कपड़ों से तेल के धब्बे हटाने के लिए किस सूक्ष्मजीवी का प्रयोग किया जाता है ?
( a ) सैकेरोमाइसीज सैरीविसेई
( b ) लाइपेज
( c ) स्ट्रेप्टोकोकस जीवाणु
( d ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- ( b ) लाइपेजा
9. बोतल वाले रस को अधिक साफ एवं स्वच्छ रखने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है ?
( a ) पैक्टीनेजिज
( b ) प्रोटीऐजिज
( c ) ( a ) और ( b ) दोनों का
( d ) प्रोमेटो
उत्तर- ( c ) ( a ) और ( b ) दोनों का ।
10. रक्त के कॉलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए स्टैटिन का प्रयोग किया जाता है ? ये किससे उत्पन्न होती है ?
( a ) मोनॉस्कस परप्यूरीअस यीस्ट
( b ) ट्राइकोडर्मा कवक
( c ) स्ट्रेप्टोकोकस जीवाणु
( d ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- ( a ) मोनॉस्कस परप्यूरीअस यीस्ट ।
11. एक नदी के जल का बी ओ डी लगभग कितना होगा ?
( a ) 8
( b ) 20
( c ) 400
( d ) 500
उत्तर- ( a ) 8
12. सूक्ष्मजीवी प्रतिदिन विश्वभर में व्यर्थ जल के कितने गैलन पानी के उपचार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ?
( a ) 100
( b ) 1000
( C ) एक लाख
( d ) करोड़ों गैलन
उत्तर- ( d ) करोड़ों गैलना
13. प्रमुख नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए कौन – सी एक्शन प्लान सरकार द्वारा चलाई जा रही है ? ( a ) गंगा एक्शन प्लान
( b ) यमुना एक्शन प्लान
( c ) ( a ) और ( b ) दोनों
( d ) इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर- ( c ) ( a ) और ( b ) दोनों ।
II . रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
1…………………तथा …………………. रसायन मनुष्यों तथा जीव जंतुओं के लिए अत्यंत ही विषैले तथा हानिकारक हैं।
2. बॉयोगैस को………….. भी कहते हैं ।
3. मिथेनोजेन में सामान्य जीवाणु……………हैं।
4. बायोगैस एक प्रकार के गैसों का मिश्रण है जो……….. सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है ।
5. एक बार वाहितमल का…………. पर्याप्त मात्रा में घट जाए , तब बहिःस्त्राव को निःसादन टैंक में भेजते हैं ।
उत्तर -1 कीटनाशी , पीड़कनाशी , 2 . गोबर गैस , 3. मिथेनोबैक्टीरियम . 4 . सूक्ष्मजीवी 5.बीओडी ।
III . निम्नलिखित में से कौन – सा कथन सत्य है और कौन – सा असत्य है :
1. एल ए बी दूध में वृद्धि करके उसे दही में परिवर्तित कर देते हैं ।
2. हमारे पेट में भी सूक्ष्मजीवियों द्वारा उत्पन्न होने वाले रोगों को रोकने में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया एक लाभदायक भूमिका का निर्वाह करते हैं ।
3. दाल – चावल का बना ढीला – ढाला आटा जिसका प्रयोग डोसा ‘ तथा इडली ‘ जैसे आहार को बनाने में किया जाता है , वह भी बैक्टीरिया द्वारा किण्वित होता है ।
4. पनीर को तैयार करने में भी सूक्ष्मजीवियों का प्रयोग किया जाता है ।
5. यीस्ट का प्रयोग बेड बनाने तथा माल्टीकृत धान्यों तथा फलों के रसों में ऐवेनॉल उत्पन्न करने में प्रयोग किया जाता है ।
6.लाइपेज का प्रयोग अपमार्जक संरूपण द्वारा धुलाई में कपड़ों से तेल के धब्बे हटाने में किया जाता है ।
उत्तर – 1. सत्य .2 . सत्य , 3सत्य , 4 . सत्य , 5. सत्य , 6. सत्या
IV . स्तंभ -1 में दिए गए पदों का स्तंभ- ।। पदों के साथ सही मिलान करें :
स्तम्भ -1 स्तम्भ- II
( a ) लैक्टोबैसिलस ( i ) सबसे पहला
                                    ऐटीबायोटिका
( b ) दूध को दही में बदलने पर ( 2 ) CO2 , गैस
                                का निर्माण करते हैं ।
( c ) बैक्टीरिया ( 3 ) रक्त – कॉलेस्ट्रॉल को
                                 कम करने के लिए ।
( d ) बेंड बनाने में ( 4 ) अंग प्रतिरोपण में
                                  प्रतिरक्षा निरोधक ।
( e ) स्विस चीज में पाए जाने वाले ( 5 ) विटामिन
                                     बी 12 की मात्रा
                                  बढ़ाने से पोषण
                                   संबंधी गुणवत्ता
                                में सुधार हो जाता है।
( f ) पैनीसिलिन ( 6 ) सैकरोमाइसीज
                                 सैरीविसी का प्रयोग
                                 किया जाता है।
( g ) स्टैटिन का प्रयोग (8) प्रोपिओनिबैक्टीरियम
                         शारमैनाई नामक बैक्टीरियम
                           के द्वारा उत्पन्न होते हैं ।
( h ) साइक्लोस्पोरिन – ए. ( 9 ) लैक्टिक एसिड
                                   बैक्टीरिया ।
( i ) बी ओ डी परीक्षण ( 10 ) जल के एक नमूने
                                 में सूक्ष्मजीवियों द्वारा
                             ऑक्सीजन के उद्ग्रहण
                             की दर का मापनों
उत्तर- ( a ) -9 , ( b ) -5 , ( c ) -2 . ( d ) -6 . ( e ) -8 , ( f ) -1 , ( g ) -3 , ( h ) – 10 ( i ) – ( 10 ) .
             अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. दूध से दही कैसे बनती है ?
उत्तर – दही की थोड़ी – सी मात्रा निवेश दव्य अथवा आरंभिक रूप में ताजे दूध में मिलाया जाता है । इस निवेश द्रव्य में लाखों – करोड़ों की संख्या में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया होते हैं जो उपयुक्त ताप पर कई गुना वृद्धि करते हैं और परिणामस्वरूप दूध को दही में बदल देते हैं ।
प्रश्न 2. दूध को दही में परिवर्तित करने के लिए कौन से बैक्टीरिया जिम्मेदार है ?
उत्तर – लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ।
प्रश्न 3. दूध से दही , अधिक पोषक समझी जाती है , क्यों ?
उत्तर – क्योंकि दही में विटामिन बी 12 की मात्रा बढ़ने से पोषण संबंधी गुणवत्ता में भी सुधार हो जाता है । इसलिए वह दूध से अधिक पोषक समझी जाती है ।
प्रश्न 4. स्विस चीज में किस बैक्टीरिया का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर – स्विस चीज में प्रोपिओनिबैक्टीरिया शारमैनाई नामक बैक्टीरिया का प्रयोग किया जाता है ।
प्रश्न 5. दक्षिण भारत के कुछ भागों में पारंपरिक पेय ‘ टोडी ‘ का प्रयोग किया जाता है । ये पेय कैसे तैयार होता है ?
उत्तर – टोडी को ताड़वृक्ष के तने के स्त्राव को किण्वित कराकर तैयार किया जाता है ।
प्रश्न 6. फारमैंटर या किण्यक किसे कहते हैं ? ….. उत्तर – व्यावसायिक पैमाने पर सूक्ष्मजीवियों को पैदा करने के लिए बड़े बर्तन की आवश्यकता होती है जिसे पुरमैटर या किण्वक कहते हैं ।
प्रश्न 7. सैकरोमाइसीज सैरीविसी यीस्ट का प्रयोग किन – किन पदार्थों के बनाने में किया जाता है ? उत्तर – सैकरोमाइसीज सैरीविसी यीस्ट का प्रयोग वाइन , बियर , ह्विस्की , बांडी या रस , मल्टीकृत धान्यों तथा फलों के रसों में ऐथेनॉल उत्पन्न करने के लिए किया जाता है । प्रश्न 8. पैनीसिलीन किस जीवाणु से तैयार किया जाता है ? उत्तर – पैनीसिलीन नोटेटम नामक मोल्ड से उत्पन्न होता है । प्रश्न 9. काली खांसी , डिप्थीरिया तथा टिटनेस के लिए कौन – सा एंटीबॉयोटिक टीका उपचार के लिए दिया जाता है ?
उत्तर – डी . पी . टी . टीका ।
प्रश्न 10. लैक्टिक अम्ल कौन – सा जीवाणु उत्पन्न करता है ?
उत्तर – लैक्टोबैसिलस ।
प्रश्न 11. एसीटिक अम्ल कौन – सा जीवाणु उत्पन्न करता है ?
उत्तर – एसीटोवैवटर एसिटाई ।
प्रश्न 12. ऐथानॉल के बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए कौन – से यीस्ट का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर – सैकेरोमाइसीज सैरीबिसेएई ।
प्रश्न 13. कपड़ों पर लगे तेल के धब्बे हटाने के लिए अपमार्जक के रूप में किसका प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर – लाइपेज ।
प्रश्न 14. स्ट्रेप्टोकाइनेज स्ट्रेप्टोकोकस जीवाणु द्वारा उत्पन्न होता है और जो आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा रूपांतरित किया जाता है । इसका प्रयोग कहाँ पर किया जाता है ?
उत्तर – इसका प्रयोग उन रोगियों में रक्त वाहिकाओं से थक्का ( क्लॉट ) हटाने के लिए ” थक्का स्फोटन ‘ के रूप में किया जाता है ।
प्रश्न 15. साइक्लोस्पोरिन – ए का प्रयोग किस रूप में किया जाता है ?
उत्तर – साइक्लोस्पोरिन – ए का प्रयोग अंग प्रतिरोपण में प्रतिरक्षा निरोधक ( इम्युनोस्प्रेसिंव ) कारक के रूप में रोगियों में किया जाता है ।
प्रश्न 16. वाहितमल से आपका क्या तात्पर्य है ?
उत्तर – प्रतिदिन नगरों एवं शहरों में बहने वाले व्यर्थ जल को वाहितमल ( सीवेज ) कहते हैं ।
प्रश्न 17.बी ओ डी से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – बी ओ डी का पूरा नाम है ‘ बायोकेमीकल ऑक्सीजन डिमांड ‘ । यह जल के एक नमूने में सूक्ष्मजीवियों द्वारा ऑक्सीजन के उद्ग्रहण की दर को मापने की एक परीक्षण विधि है । अतः जल में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों का मापन ही बी ओ डी है ।
प्रश्न 18. प्रतिदिन बहने विश्वभर में व्यर्थ जल का उपचार कौन करता है ?
उत्तर – सूक्ष्मजीवी व्यर्थ जल के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।
प्रश्न 19. पर्यावरण तथा वन मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही देश की प्रमुख नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए , योजनाओं के क्या नाम है ?
उत्तर – गंगा एक्शन प्लान तथा यमुना एक्शन प्लान। प्रश्न 20. गोबर गैस से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर – बायोगैस को ही गोबर गैस कहा जाता है ।
प्रश्न 21. ऐफिडों तथा मच्छरों से छुटकारा दिलवाने में कौन – सा जीव लाभप्रद है ?
उत्तर – ड्रेगनफ्लाई ( व्यथ पतंग ) ।
प्रश्न -22 . बटरफ्लाई केटरपिलर जैसे जीवों को नियंत्रण करने में कौन – सा जीवाणु कारगर है ? उत्तर – वैसीलस थूरिजिऍसिस ( Bt ) का प्रयोग बटरफ्लाई केटरपिलर आदि जीवों के नियंत्रण में किया जाता है ।
             लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. ( BOD ) तथा ( COD ) क्या हैं , वर्णन करें । उत्तर – कार्बनिक अवशिष्ट की सवा बढ़ने से अपघटन की दर बढ़ती है तथा ( O2 ) का उपयोग बढ़ता है । जल में घुल गई O2 , ( DO ) की मात्रा घटती है ।
     जैव रासायनिक ऑक्सीजन माँग ( BOD ) ऑक्सीजन मापक है । इससे जल में कार्बनिक पदार्थों के अपघटन की दर का पता चलता है । जहाँ उच्च BOD है वहाँ DO निम्न होगा ।
 रासायनिक ऑक्सीजन मांग ( COD ) – यह जल में प्रदूषण के मानक का मापक है । जल में कार्बनिक पदार्थो के ऑक्सीकरण हेतु आवश्यक O2 , की मात्रा के बराबर है ।
प्रश्न 2. जल प्रदूषक के कितने प्रकार हैं ? वर्णन करें। उत्तर – जल प्रदूषक तीन प्रकार के होते हैं-
( i ) जैविक – रोगाणु जैसे वायरस , बैक्टीरिया , प्रोटोजोआ , शैवाल , हैलमिथिस आदि ।
( ii ) रासायनिक – कार्बनिक रसायन – जैव नाशक , पॉलोक्लोरीनेटेड बाईफिडायल या ( PCB ) I अकार्बनिक रसायन – फॉस्फेट , नाइट्रेट , फ्लोराइड तथा भारी तत्त्व जैसे As . Pb , Cd , Hg आदि । ( iii ) भौतिक – उद्योगों से निकले गर्म जल , तेल वाहक से गिरा हुआ तेल आदि ।
प्रश्न 3. मृदा प्रदूषण को रोकने के लिए क्या विधि अपनाई जाती है ?
उत्तर – इसके अंतर्गत निम्न प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं-
( i ) सुरक्षित भूमि उपयोग ,
( ii ) योजनाबद्ध शहरीकरण ,
( iii ) नियंत्रित विकास कार्यक्रम ,
( iv ) सुरक्षित डिस्पोजल तथा मानव आवास स्थलों एवं उद्योगों के ठोस अपशिष्टों का प्रबंधना
( v ) भस्पीकरण तथा ताप अपघटन द्वारा ठोस अपशिष्टों का नाश करना ।
प्रश्न 4. पेय पदार्थ जैसे वाइन , बियर , ह्विस्की , बांडी , फलों के रस तथा बेंड बनाने में सूक्ष्मजीवी कैसे हमारी मदद करते हैं ?
उत्तर – सूक्ष्मजीव विशेषकर यीस्ट का प्रयोग प्राचीन काल से वाइन , बियर , डिस्को , ब्रांडी या रम जैसे पेयों के उत्पादन में किया जाता आ रहा है । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वही यीस्ट सैकेरोमाइसीज सैरीविसी ( जो सामान्यतः ब्रीवर्स यीस्ट के नाम से भी प्रसिद्ध है ) ब्रेड बनाने तथा माल्टीकृत धान्यों तथा फलों के रसों में ऐथेनॉल उत्पन्न करने में प्रयोग किया जाता है । किण्वन तथ विभिन्न प्रकार के संसाधन ( आसवन अथवा उसके बिना ) कच्चे पदार्थों पर निर्भर करती है , वाइन तथा बियर का उत्पादन बिना आसवन के , जबकि ह्विस्की , ब्रांडी तथा रम किण्वित रस के आसवन द्वारा तैयार किए जाते हैं ।
प्रश्न 5. कुछ विशेष प्रकार के रसायनों , जैसे कार्बनिक अम्ल , ऐल्कोहल तथा एंजाइम आदि के व्यावसायिक तथा औद्योगिक उत्पादन में सूक्ष्मजीवों के महत्त्वपूर्ण योगदान का वर्णन कीजिए ।
उत्तर – कुछ विशेष प्रकार के रसायनों , जैसे कार्बनिक अम्ल , ऐल्कोहल तथा एंजाइम आदि के व्यावसायिक तथा औद्योगिक उत्पादन में सूक्ष्मजीवों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है । आलीय उत्पादकों सिट्रिक अम्ल का ऐस्परजिलस नाइगर ( एक कवक ) , एसीटिक अम्ल का एसीटोबैक्टर एसिटाई ( जीवाणु ) , ब्युट्रिक अम्ल का क्लोस्ट्रीडियम ब्यूटायलिकम ( एक जीवाणु ) तथा लैक्टिक अम्ल का लैक्टोबैसिलस आदि हैं । ऐथेनॉल के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए यीस्ट ( सैकेरोमाइसीज सैरीविसेएई ) का प्रयोग किया जाता है । लाइपेज का प्रयोग अपमार्जक संरूपण तथा धुलाई में कपड़ों से तेल के धब्बे हटाने में किया जाता है । हम देखते हैं कि बाजार में बिकने वाली फल – रस की बोतल का रस घर में बने रस की तुलना में अधिक साफ दिखाई पड़ता है । पैक्टीनेजिज तथा प्रोटीऐजिज के प्रयोग के कारण बोतल वाला रस अधिक स्वच्छ एवं साफ होता है । स्ट्रैप्टोकाइनेज स्टैप्टोकोकस जीवाणु ( बैक्टीरियम ) द्वारा उत्पन्न होता है जो आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा रूपांतरित किया जाता है । इसका प्रयोग उन रोगियों में रक्त वाहिकाओं से थक्का ( क्लॉट ) हटाने में यानि ‘ थक्का स्फोटन ‘ के रूप में प्रयोग किया जाता है । हृदयाघात के रोगी मायोकार्डिल इंफैक्शन से गुजरते हैं ।
  अन्य जैव सक्रिय अणु ‘ साइक्लोस्पोलिन – ए ‘ है। जिसका प्रयोग अंग प्रतिरोपण में प्रतिरक्षा निरोधक ( इम्युनोसप्रेसिव ) कारक के रूप में रोगियों में किया जाता है । इसका उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम नामक कवक से किया जाता है । मोनॉस्कस परप्यूरीअस यीस्ट से उत्पन्न इस स्टैटिन का व्यापारिक स्तर पर प्रयोग रक्त – कॉलिस्ट्रॉल को कम करने में किया जाता है ।
             दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मृदा प्रदूषण किस प्रकार के होते हैं ? वर्णन करें ।
उत्तर- ( i ) अपशिष्ट – औद्योगिक अपशिष्ट , नगरीय अपशिष्ट तथा मेडिकल एवं अस्पतालों के अपशिष्ट को फेंकने से भूमि प्रदूषित हो जाती है । औद्योगिक ठोस अपशिष्ट , औद्योगिक उत्सर्जन के गिरने तथा ताप ऊर्जा संयंत्र से निकलने वाला फ्लाई ऐश आस – पास के पर्यावरण को दूषित करता है । रेडियो विकिरण पदार्थ , नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र से निकल कर मृदा को संक्रमित करते हैं ।
( ii ) नगरीय अपशिष्ट – इसके अंतर्गत घरेलू तथा रसोई के अपशिष्ट , बाजार के अपशिष्ट , अस्पताल , पशुओं एवं पोल्ट्री के अपशिष्ट , कसाईखानों के अपशिष्ट आते हैं । पोलिथिन बैग , प्लास्टिक शीट , प्लास्टिक तथा शीशे की बोतलें , धातु सुईयाँ आदि नगरीय अपशिष्ट के उदाहरण हैं ।
( iii ) कृषि रसायन – कीटनाशक , खरपतवार नाशक , अत्यधिक अकार्बनिक उर्वरक आदि मृदा के रासायनिक गुणों को बदल देते हैं ।
( iv ) खनन ऑपरेशन – विकृत खनन से ऊपरी भूमि का पूरी तरह नुकसान होता है तथा पूरा क्षेत्र जहरीली धातु एवं रसायन से संक्रमित हो जाता है । प्रश्न 2. ( 1 ) भूमिगत जल के प्रदूषण के कारण होने वाले तीन रोगों का नाम लिखें ।
( ii ) मृदा में उपस्थित ठोस अपशिष्टों के प्रबंधन के बारे में संक्षिप्त विवरण दें ।
उत्तर -( i ) औद्योगिक तथा नगरीय अपशिष्टों , उत्सर्जन , सीवेज चैनलों तथा कृषि से बहकर आए जलों द्वारा भूमिगत जल का दूषित होना कई बीमारियों को जन्म देता है । जैसे-
( क ) पेयजल में नाइट्रेट की अधिकता – पेयजल में नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है । नवजात शिशुओं की मृत्यु भी हो सकती है । यह हीमोग्लोबिन के साथ प्रतिक्रिया कर इसे मिथेमोग्लोबिन बनाता है जो ( O2 , ) रक्त को विकृत बना देते हैं । इसे ब्लू बेबी सिंड्रोम कहते हैं । ( ख ) पेयजल में फ्लूराइड की अधिकता – फ्लूराइड अधिक होने पर दाँतों की विषमताएँ जन्म लेती हैं । हड्डी में कड़ापन तथा अकड़न आ जाती है । जोड़ों का दर्द होता है जिसे कंकार फ्यूरोसिस कहते हैं । ( ग ) भारत में कई जगहों पर आर्सेनिक भूमिगत जल संक्रमित किए हुए हैं । खासकर प्रकृति में पाए जाने वाले बैडरॉक में । भूमिगत जल के अत्यधिक उपयोग से भूमि तथा चट्टानों के स्रोतों से आर्सेनिक का निक्षालन शुरू हो सकता है तथा भूमिगत जल संक्रमित हो सकता है । आर्सेनिक के लगातार संपर्क से ब्लेकफुट बीमारी हो जाती है । आर्सेनिक से डायरिया , पेरिफेरल न्यूरीटिस तथा हाइपर केराटोसिस तथा फेफड़े एवं त्वचा का कैंसर हो सकता है ।
( ii ) मृदा में उपस्थित ठोस अपशिष्टों के प्रबंधन के अन्तर्गत निम्नलिखित बातें आती हैं
( क ) अपशिष्टों को एकत्र करना तथा उसका वर्गीकरण करना ।
( ख ) खराब धातुओं तथा प्लास्टिकों जैसे संसाधनों को इकट्ठा कर उसे पुनः चक्रण के बाद फिर से उपयोग करना ।
( ग ) पर्यावरण का कम से कम नुकसान करते हुए उसे फेंकना ।

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