11-biology

bihar board 11 biology solutions | श्वसन और गैसों का विनिमय

bihar board 11 biology solutions | श्वसन और गैसों का विनिमय

           (RESPIRATION AND EXCHANGE OF GASES)
                                         अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
1. फेफड़ों की कार्यकारी इकाई है।
उत्तर-कुपिकाएँ (Alveoli)।
2. जलीय जंतुओं का श्वसन अंग क्या होता है?
उत्तर-गलफड़ा (Gills)।
3. एडम्स सेब (Adam’s apple) क्या है?
उत्तर-नर मनुष्यों में कार्टिलेज का बना बॉक्स, जिसमें दो वाक्तंतु आपस में क्रॉस:
करते हैं, तथा जहां पर कंठ को काटते हैं, वहाँ से आवाज उत्पन्न होता है।
4. सामान्य अवस्था में श्वसन की दर कितनी होती है?
उत्तर-12 से 16 प्रति मिनट।
5. सामान्य निःश्वसन के उपरांत फेफड़ों में शेष वायु के आयतन को बतायें [N.C.E.R.T. (Q.2)]
उत्तर-1400 से 1900 ml।
6. Glottis (कंठद्वार) क्या है?
उत्तर-ग्रसनी (Pharynx) में उपस्थित वह छिद्र जिसमें श्वासनली (Trachea) जुड़ी
होती है।
7. फेफड़ों के चारों ओर स्थित पतली झिल्ली कहलाती है?
उत्तर-फुप्फुसावरणी झिल्ली (पेरिटोनियम)।
8. ज्वारीय आयतन (Tidal Volume) क्या है?
उत्तर-सामान्य श्वसन क्रिया के समय प्रतिश्वास में ग्रहण किया गया या छोड़ा गया
वायु का आयतन ज्वारीय आयतन कहलाता है।
9. सामान्य स्वस्थ मनुष्य का ज्वारीय आयतन कितना होता है?
उत्तर-6000-8000 मिली. वायु प्रति मिनट।
10. मनुष्य में गैसीय आदान-प्रदान का मुख्य स्थल क्या है?
उत्तर-फुफ्फस की वायु कुपिका (Alveoli of lungs)।
11. श्वसन गैसों का परिवहन किसके द्वारा होता है?
उत्तर-रक्त।
12. कीटों का श्वसन अंग क्या होता है?
उत्तर-ट्रैकिया एवं स्पाइरेकिल।
13. स्तनधारियों के रक्त के किस हिस्से को श्वसन वर्णक (Respiratory Pigment)
कहा जाता है?
उत्तर-हीमोग्लोबिन।
14. अंतःश्वसन एवं निःश्वसन का नियंत्रण किस पेशी द्वारा होता है?
उत्तर-इंटर कॉस्टल पेशी द्वारा।
15. श्वसन नियमन केन्द्र कहाँ स्थित होता है?
उत्तर-मस्तिष्क के मेडुला ऑब्लांगाटा में।
16. मानव के रक्त की सम्पूर्ण ऑक्सीजन धारण क्षमता कितनी होती है?
उत्तर-1200 ml.
17. CO2 की अधिकांश मात्रा का परिवहन किस रूप में होता है?
उत्तर-बाइकार्बोनट्स के रूप में।
18. मानव फेफड़े का वजन कितना होता है?
उत्तर-दायां फेफड़ा 625 gm बायां फेफड़ा 567 gm.
19. मोलस्का में श्वसन किस अंग के द्वारा होता है?
उत्तर-क्लोम (गिल) द्वारा।
20. श्वसन (Breathing) क्या है?
उत्तर-वायुमंडलीय O2 और कोशिकाओं में उत्पन्न CO2 के आदान-प्रदान की प्रक्रिया
को श्वसन कहते हैं।
                                       लघु उत्तरीय प्रश्न
1. जैव क्षमता की परिभाषा दें और इसका महत्व बतायें?    [N.C.E.R.T.(Q.1)]
उत्तर-जैव क्षमता (Vital capacity)-बलपूर्वक निःश्वसन के बाद वायु की वह
अधिकतम मात्रा जो एक व्यक्ति अंतःश्वासित कर सकता है अथवा निःश्वासित कर सकता
है जैव क्षमता कहलाता है।
धूम्रपान करने वालों के फेफड़े की जैवक्षमता कम और गायक एवं एथलीट्स की जैव
क्षमता अधिक होती है। अतः एक स्वस्थ मनुष्य की जैव क्षमता लगभग 4000 ml होती है।
जैव क्षमता के द्वारा हम किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं।
2. कुपिका वायु की तुलना में वायुमंडलीय वायु में PO2 तथा PCO2 कितनी होगी,
मिलान करें?                                                     [N.C.ER.T.(Q.5)]
3. PCO2 का ऑक्सीजन के परिवहन में क्या प्रभाव है?          [N.C.E.R.T. (Q.8)]
उत्तर-CO2 का दबाब (PCO2) हाइड्रोजन आयन की सांद्रता और तापक्रम कुछ ऐसे
कारक हैं जो हीमोग्लोबीन द्वारा ऑक्सीजन को पकड़ने में बाधा पहुँचते हैं।
PCO2 की वृद्धि होने पर हीमोग्लोबीन से O2 मुक्त होने की क्रिया में वृद्धि होती है।
इसे ‘बोर प्रभाव’ भी कहते हैं।
4. पहाड़ पर चढ़ने वाले व्यक्ति की श्वसन प्रक्रिया में क्या प्रभाव पड़ता है?
                                                                           [N.C.E.R.T.(Q.9)]
उत्तर-पहाड़ पर चढ़ते समय व्यक्ति की श्वसन की दर बढ़ जाती है। पहाड़ की उँचाई
पर वायु का दबाब घट जाता है, जिससे व्यक्ति को आवश्यक मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति
नहीं हो पाती। जिससे उसके श्वसन की दर बढ़ जाती है परंतु वह आवश्यक O2 को ग्रहण
नहीं कर पाता है जिससे सिरदर्द, Dizziners,irritatiltity,Nausea,vomiting, mental
Fatigue इत्यादि होने लगता है।
5. क्या आप ने अवकॉसीयता (हाइपोक्सिया) न्यून ऑक्सीजन के बारे में सुना है?
इस संबंध में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करें व साथियों के बीच चर्चा करें।
                                                                         [N.C.E.R.T.(Q.12)]
उत्तर-मानव के रक्त की सम्पूर्ण O2 क्षमता औसतन लगभग 1200 ml होती है और
प्रत्येक परिपथ में 100-350 ml O2 रक्त से ऊतकों में जाता है। मानव शरीर प्रति घंटा आराम
के वक्त 15 लीटर O2 और कठिन व्यायाम में 280 लीटर O2 व्यवहार करता है।
यदि शरीर को इतनी मात्रा में O2 की आपूर्ति नहीं हो पाती है तो उसे न्यून ऑक्सीजन
या हाइपोक्सिया कहा जाता है। यह स्थिति ऊँचाई पर चढ़ते समय, भारी वजन उठाते समय,
बहुत तेजी से दौड़ते समय इत्यादि समयों में उत्पन्न होता है इस स्थिति में सिरदर्द,
Dizziners,irritabilityNausea,vomiting,mental Fatigue इत्यादि बीमारियाँ उत्पन्न
होती हैं।
6. निम्न के बीच अंतर स्पष्ट करें।                              [N.C.E.R.T. (Q.13)]
(a) IRV एवं ERV, (b) अंतः श्वसन क्षमता (IC) एवं निःश्वसन क्षमता,
(c) जैव क्षमता तथा फेफड़ों की कुल धारिता।
उत्तर-(a) IRV एवं ERV-
(b) अंतःश्वसन क्षमता (IC) एवं निःश्वसन क्षमता-
(c) जैव क्षमता तथा फेफड़ों की कुल धारिता-
7. ज्वारीय आयतन क्या है? एक स्वस्थ्य मनुष्य के लिए एक घंटे के ज्वारीय आयतन
(लगभग मात्रा) को आकलित करें।                      [N.C.E.R.T. (Q.141]
उत्तर-ज्वारीय आयतन (Tidal volume) (TV)― सामान्य श्वसन क्रिया के समय
प्रतिश्वास अंतःश्वासित या निःश्वासित वायु का आयतन ही ज्वारीय आयतन कहलाता है।
यह लगभग 500 मिली• होता है। अर्थात् स्वस्थ मनुष्य लगभग 6000 से 8000 मिली• वायु
प्रति मिनट की दर से अंतःश्वासित/निःश्वासित कर सकता है। अतः एक घंटे में मनुष्य
60×6000 = 36000 मिली. से 60×8000 = 480000 मिली. वायु अंतः श्वासित या
निःश्वासित कर सकता है। यही इसका एक घंटे का ज्वारीय आयतन होता है।
8. श्वसन क्रिया के विभिन्न चरणों का उल्लेख करें।
उत्तर-श्वसन में निम्नलिखित चरण सम्मिलित हैं-(i) श्वसन या फुप्फुसीय संवातन
जिसमें वायुमंडलीय वायु अंदर खींची जाती है और CO2 से भरपूर कूपिका की वायु को
बाहर मुक्त किया जाता है। (ii) कूपिका झिल्ली के आर-पार गैसों (O2 और CO2) का
विसरण। (iii) रुधिर द्वारा गैसों का परिवहन। (iv) रुधिर और ऊतकों के बीच O2 और
CO2 का विसरण। (v) अपचयी क्रियाओं के लिए कोशिकाओं द्वारा O2 का उपयोग और
उसके फलस्वरूप CO2 का उत्पन्न होना।
9. हीमोग्लोबिन के साथ ऑक्सीजन के संयोग को प्रभावित करने वाले कारक
कौन-कौन हैं?
उत्तर-(i) H+ आयन-रक्त में H+ की वृद्धि होने पर हीमोग्लोबिन का O2 के प्रति
आकर्षण घट जाता है और H+ में कमी होने पर O2 के प्रति लगाव बढ़ जाता है।
(ii) तापक्रम-तापमान बढ़ने पर हीमोग्लोबिन का O2 के प्रति आकर्षण घटता है
और तापमान बढ़ने पर आकर्षण बढ़ जाता है।
(iii) D.G.P. (2,3 Diphashoglycerate)-R.B.C. में ग्लाइकोलाइसिस के कारण
D.G.P. का निर्माण होता है। ऊतकों में O2 की कमी होने से D.G.P. का निर्माण अधिक
होता है। अतःअधिक D.G.P.ऑक्सिीहीमोग्लेबिन से O2 मुक्त होने की क्रिया को बढ़ाता है।
10. श्वसन के विभिन्न विकार द्वारा उत्पन्न बीमारियों का वर्णन करें।
उत्तर-(i) दम्मा (Asthma)-इसमें श्वसनी और श्वसनिकाओं की शोथ के कारण
श्वसन के समय घरघराहट होती है तथा श्वास लेने में कठिनाई होती है।
(ii) श्वसनी शोथ (Bronchitis)-इसके कारण श्वसनी (Bronchus) में सूजन तथा
जलन होता है, जिससे लगातार खांसी होती है।
(iii) वातस्फीति (Emphysema)-यह एक चिरकालिक रोग है जिसमें कूपिका भित्ति
क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे गैस विनिमय सतह घट जाती है। धूम्रपान इसका एक मुख्य कारणों में से एक है।
(iv) व्यावसायिक रोग (Occupational Respiratory Disease)-कुछ उद्योगों में
विशेषकर जहाँ पत्थर की घिसाई-पिसाई या तोड़ने का कार्य होता है, वहाँ इतने धूल कण
निकलते है कि शरीर की सुरक्षा प्रणाली उन्हें पूरी तरह निष्प्रभावी नहीं कर पाती। दीर्घकालीन
प्रभावन शोथ उत्पन्न कर सकता है जिनसे रेशमयता (रेशीय ऊतकों में प्रचुरता) होती है,
जिसके फलस्वरूप फेफड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
                                              दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. गैसों का विसरण केवल कूपकीय क्षेत्र में होता है, श्वसन तंत्र के अन्य किसी भाग
में नहीं क्यों?                                                       [N.C.E.R.T. (Q.3)]
उत्तर-कूपिकाएँ (Alveoli) गैसों के विनिमय के लिए प्राथमिक स्थल होती हैं। गैसों
का विनिमय रक्त और ऊतकों के बीच भी होता है। इन स्थलों पर O2 और CO2 का विनिमय
दाब अथवा सांद्रता प्रवणता के आधार पर सरल विसरण द्वारा होता है। गैसों की घुलनशीलता
के साथ-साथ विसरण में सम्मिलित झिल्लियों की मुटाई भी विसरण की दर को प्रभावित करने
वाले कुछ महत्वपूर्ण घटक हैं।
कूपिकाओं से रक्त और रक्त से ऊतकों में जाने के लिए O2 की सांद्रता प्रवणता और
ऊतकों से रक्त और रक्त से कूपिकाओं की तरफ जाने के लिए CO2 की सांद्रता प्रवणता
अनुकूल होती है।
चूँकि CO2 की घुलनशीलता O2 की घुलनशीलता से 20-25 गुना अधिक होती है,
अंतः विसरण झिल्लका में से प्रति इकाई आंशिक दाब के अंतर की विसरित होने वाली
CO2 मात्रा O2 की तुलना में बहुत अधिक होती है जो श्वसन तंत्र के अन्य भागों में नहीं
मिलती।
कूपिकाओं की झिल्ली की मुटाई एक मिमी से बहुत कम होती है जो गैसों के विसरण
के लिए उपयुक्त होता है। इन्हीं सब कारणों से 0, के कूपिकाओं से ऊतकों और CO, के
ऊतकों से कूपिकाओं में विसरण के लिए अनुकूल होते हैं।
2.CO2 के परिवहन की मुख्य क्रियाविधि क्या है, व्याख्या करें। [N.C.ER.T. (Q.4)]
उत्तर-कोशिकाओं के भीतर स्वांगीकृत भोज्यपदार्थों का ऑक्सीकरण होता है। जिसमें
उर्जा के अतिरिक्त CO2 तथा जल का निर्माण होता है।
CO2 कोशिकाओं से बाहर निकल आती है और विसरण के जरिए रक्त कोशिकाओं के
रक्त में चली जाती है जहाँ यह रक्त प्लाज्मा के जल से मिलकर कार्बोनिक अम्ल बनती है।
CO2 + H2O→H2CO3
मानव शरीर में लगभग 100-200 C.C.CO2 प्रति मिनट बनती है। अगर यह सभी
CO2 कार्बोनिक अम्ल के रूप में रहें तो इतनी अम्लीयता बढ़ जाएगी कि कोशिकाएँ अपना
कार्य बंद कर देगी और मनुष्य मर जाएगा। इस हेतु कोशिकाय श्वसन के उपरान्त निकली
हुई समस्त CO2,H2CO3 के रूप में नहीं बदलती। CO2 मुक्त होकर कूपिकाओं की वायु
में जाकर मिल जाती है।
(i) H2CO3 के रूप में-CO2 का 5-10% भाग कोशिकाओं से रक्त में आकर
H2CO3 के रूप में फेफड़े में पहुँचता है जहाँ वह कूपिकाओं में चला जाता है।
(ii) कार्बएमिनो यौगिक के रूप में-CO2 का कुछ भाग लगभग 10% R.B.C. के
अन्दर हीमोग्लोबीन के स्वतंत्र-NH2 ग्रुप से जुड़कर H b CO2 अर्थात कार्ब-एमिनो यौगिक
के रूप में फेफड़े में पहुँचता है।
(iii) बाइकार्बनिट्स के रूप में-CO2 जब ऊतकों से रक्त में जाता है तो जल से
मिलकर H2CO3 बनाता है। H2CO3 तेजी से H+ तथा तथा HCO3 में टूट जाता है। यह
क्रिया R.B.C. के अन्दर कार्बोनिक एनाहड्रेज एंजाइम की उपस्थिति में संपन्न होता है।
अधिकांश HCO3, R.B.C. से विसरित होकर पुनः प्लाज्मा में आ जाता है और इसी
रूप में फेफड़े में पहुंच जाता है अथवा Na’ से जुड़कर NaHCO3 के रूप में फेफड़े में
पहुँचता है। कुछ HCO3K से जुड़कर KHCO3 भी बनता है।
कुछ कार्बोनिक अम्ल NaCI से प्रतिक्रिया कर सोडियम बाईकानिट बनता है। प्लाज्मा
अधिकांशतः Na+ से जुड़ा रहता है।
3. सामान्य स्थिति में अंतःश्वसन प्रक्रिया की व्याख्या करें।        [N.C.E.R.T. (Q.6)]
उत्तर-अंतःश्वसन (Inspiration) का अर्थ होता  है वायुमंडतीय वायु का अंदर
खींचा जाना।
अंतःश्वसन तभी होता है जब वायुमंडलीय दाब से फेफड़ों की वायु का दाब कम हो
अर्थात् फेफड़ों का दाब वायुमंडलीय दाब के सापेक्ष कम होता है।
फेफड़ा वक्ष गुहा के भातर स्थित शता ह। वक्ष गुहा एक बक्से के समान रचना है जिसके
पृष्ठ भाग पर कशेरुक दण्ड पार्श्वभा पर पसलियाँ, अधर भाग पर स्टर्नम एवं पीछे की
ओर डायफ्राम रहता है। पसलियों कशेरुकी (vertebrae) से दो संधितलों के द्वारा इस प्रकार
जुड़ी रहती हैं कि वह केवल आगे पीछे खिसक सकती है। पसलियों के बीच बाह्य एवं अंतः
इंटरकोस्टल पेशी जुड़ी रहती है।
जब बाह्य इंटरकोस्टल पेशी सिकुड़ती है तो पसलियाँ आगे तथा पार्श्व भाग की ओर
खिसकती है और स्टर्नम नीचे झुक जाता है जिससे वक्ष गुहा (Thoraciccavity)नीचे तथा
बाहर की ओर बढ़ जाती है। डायफ्राम चिपटा हो जाता है जिसके कारण फुफ्फुस गुहा (Pleural cavity) एवं फेफड़े का आयतन बढ़ जाता है और उसके भीतर वायु का दबाव कम जाता है जिसे भरने के लिए वायुमंडलीय हवा भीतर प्रवेश कर जाती है।
4. श्वसन का नियमन कैसे होता है                              [N.C.E.R.T. (Q.7.]
उत्तर-मानव शरीर में ऊतकों की मांग के अनुरूप श्वसन की लय को संतुलित और
स्थिर बनाए रखने की एक महत्वपूर्ण क्षमता है। यह नियमन तंत्रिका तंत्र द्वारा संपन्न होता है।
मस्तिष्क के मेडुला ऑब्लांगाटा में एक विशिष्ट श्वसन लयकेन्द्र उपस्थित होता है जो
मुख्य रूप से श्वसन के नियमन के लिए उतरदायी होता है। मस्तिष्क के पोंस क्षेत्र में एक
अन्य केन्द्र होता है जिसे Pneumotaxic (श्वास प्रभावी) केन्द्र कहते हैं जो श्वसन लयकेन्द्र
के कार्यों को संयत करता है। इस केन्द्र के तंत्रिका का संकेत अंतःश्वसन की अवधि को कम
कर सकते हैं और इस प्रकार श्वसन दर को परिवर्तित कर देता है। लय केन्द्र के पास एक
रसोसंवेदी (chemosensitive) केन्द्र लयकेन्द्र के लिए अतिसंवेदी होता है जो
CO2 और हाइड्रोजन आयनों के लिए अति संवेदी होती है। इन पदार्थों की वृद्धि से यह केन्द्र सक्रिय होकर श्वसन प्रक्रिया में आवश्यक समायोजन करता है, जिससे ये पदार्थ निष्कासित किये
जा सकें। महाधमनी चाप (Aortic Arch) और ग्रीवा धमनी (Carotid artery) से जुड़ी
संवेदी संरचनाएँ भी CO2 और H+ सान्द्रता के परिर्वतन को पहचान सकते हैं तथा
उपचारात्मक कार्यवाही हेतु लयकेन्द्र को आवश्यक संकेत दे सकते हैं। श्वसन लय के नियमन
में ऑक्सीजन की भूमिका बहुत ही महत्वहीन है।
5. कीटों में श्वसन क्रियाविधि कैसी होती है?                   [N.C.E.R.T.(Q.10)]
उत्तर-कीटों (टिड्डे, मक्खी, तिलचट्टे इत्यादि) में श्वासनली ही श्वसन अंग का कार्य
करती है।
श्वासनलियों का तंत्र शरीर के प्रत्येक हिस्से तक पहुँचता है। शरीर के बाहरी हिस्से पर
अनेक सूक्ष्म छिद्र होते है, जिन्हें spiracle (रंध्र)कहते हैं। इसी से ऑक्सीजन श्वासनलियों
में पहुँचता है। जहाँ से पूरे शरीर में वितरीत हो जाता है, क्योंकि श्वासनलियाँ शाखित होकर कई पतली-पतली नालियाँ बनाती हैं। इस प्रकार प्रत्येक कोशिका सीधे ऑक्सीजन प्राप्त करती है तथा इन्ही छिद्रों से सीधे कार्बन डाइऑक्साइड निकाल भी देती हैं।
6. ऑक्सीजन वियोजन वक्र की परिभाषा दें, क्या आप इसकी सिग्माभ आकृति का
कोई कारण बता सकते हैं?                                       [N.C.E.R.T. (Q.11)]
उत्तर-अधिक PO2 पर हीमोग्लोबिन,O2 से जुड़कर ऑक्सी-हीमोग्लोबीन बनाता है।
हीमोग्लोबिन का चारों आयरन परमाणु O2 से जुड़ जाने के बाद यह पूर्णरूपेण संतृप्त हो
जाता है किन्तु O2 के निम्न PO2 पर HbO2 से मुक्त हो जाता है।
38°C तापमान और 30 Hg के PCO2 पर विभिन्न PO2 और हीमोग्लोबिन (Hb) को
प्रतिशत O2 संतृप्तता का ग्राफ बनाने पर एक सिग्मा जैसी वक्र रेखा प्राप्त होती है जिसे
ऑक्सीजन वियोजन वक्र कहते हैं।
O2 के 100 mmHg PO2 पर पूर्णरूपेण संतृप्त हो जाता है निम्न PO2 पर HbO2
को मुक्त करने लगता है। 30 mmHg पर Hb 50% संतृप्त रहता है और शून्य PO2 पर
Hb पूर्ण रूप से O2 को त्याग देता है। इसी कारण इसकी आकृति सिग्माभ जैसी होती है।
7. सामान्य स्थिति में निःश्वसन प्रक्रिया का वर्णन करें।
उत्तर-निःश्वसन (Expiration) का अर्थ होता है फुफ्फुसी वायु को बाहर मुक्त
करना। निःश्वसन तब होता है, जब अंतर फुप्फुसी दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक होता है।
फेफड़ा वक्ष गुहा के भीतर स्थित होता है। वक्षगुहा एक बक्से के समान की रचना है,
जिसके पृष्ठभाग पर कशेरुदण्ड, पार्श्वभाग पर पसलियाँ, अधर भाग पर स्टर्नम एवं पीछे
की ओर डायफ्राम रहता है। पसलियाँ कशेरुकी से दो संधितलों के द्वारा इस प्रकार जुड़ी रहती
हैं कि वह केवल आगे पीछे खिसक सकती हैं। पसलियों के बीच बाहा एवं अंतः इंटरकोस्टल
पेशी जुड़ी रहती है।
जब बाह्य इंटरकोस्टल पेशी ढीली पड़ती है तो पसलियाँ एवं स्टर्नम सामान्य स्थिति में
आ जाते हैं (जो अंतःश्वसन के समय परिवर्तित हो जाते हैं)। डायफ्राम पुनः गुम्बजनुमा
हो जाता है। उदरीय डायफ्राम गुम्बजनुमा होने में सहायता करती है। जब उदरीय पेशी
सिकुड़ती है तो आंतरिक अंग दबकर डायफ्राम को वक्षगुहा की ओर दबाता है जिससे उसका
आयतन घट जाता है जिसका दबाब फेफड़े पर पड़ता है और उसमें स्थित हवा बाहर निकल
जाती है। जिसे निःश्वसन नहीं होता है।
8. ऑक्सीजन के परिवहन की मुख्य क्रियाविधि क्या है? व्याख्या करें। [N.C.ER.T.]
उत्तर-छोटे-छोटे जन्तुओं में O2 शरीर के अंदर बाहरी सतह द्वारा अवशोषित हो जाता
है और CO2 शरीर से सीधे बाहर निकल जाता है किन्तु अधिकांश जन्तुओं में O2 श्वसन
अंगों से लेकर कोशिकाओं तक पहुँचाने का कार्य करता है और इस क्रिया में मदद करने के
लिए रक्त में हीमोग्लोबिन नामक लौहयुक्त यौगिक रहता है।
कशेरुकी तथा मनुष्य के रक्त में हीमोग्लोबिन R.B.C. के अन्दर रहता है जबकि
अकशेरुकी जंतुओं में यह रक्त प्लाज्मा में घुला होता है।
हीमोग्लोबिन का अणु चार पालीपेप्टाइड इकाइयों से बना होता है जिनमें से दो अल्फा
शृंखला एवं दो बीटा-शृंखला रहती है और शृंखला एक हीम अणु से जुड़ी रहती है। हीम अणु
एक आयरन पारफाइरिन है जिसमें चार Pyrole Rings होते हैं और केन्द्र में आयरन का एक
परमाणु फेरस (Fe++ ) अवस्था में पाया जाता है। हीमोग्लोबिन का लगभग 95% भाग रंगहीन
पॉलीपेप्टाइड अथवा ग्लोबीन का और 5% भाग हीम से बना होता है। हीमोग्लोबीन का
अणुभार 67000-72000 तक होता है। हीमोग्लोबिन का हीम अणु O2 से जुड़कर अस्थायी
यौगिक ऑक्सी हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है। हीमोग्लोबिन में चार हीम अणु होते हैं
अतः एक साथ इसमें चार O2 अणु जुड़ सकते हैं। Hb के साथ O2 का जुड़ना या अलग
होना ऑक्सीजन के आंशिक दाब (PO2) पर निर्भर करता है। फेफड़े के कूपिकाओं (Alveoli)
में जहाँ PO2 बहुत अधिक होता है लगभग 100 mmHg वहीं O2 Hb
ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है किन्तु जब रक्त ऊतकों में पहुँचता है तो वहाँ O2 का आंशिक
दबाव (PO2)मात्रा 1 से 40mmHg होता है, O2 मुक्त होकर कोशिकाओं में चला जाता है।
हीमोग्लोबीन के एक हीम इकाई के ऑक्सीजिनेशन से बाकी तीनों हीम इकाईयों द्वारा
ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्रिया में तेजी आ जाती है। यह हीम प्रभाव कहलाता है जो रक्त
द्वारा O2 ग्रहण करने की दक्षता बढ़ाता है।
मानव में प्रति 100 ml रक्त O2 के 100 mmHg पर अधिक से अधिक 20 mlO2 का अवशोषण कर सकता है और हीमोग्लोबिन 100% ऑक्सीजन संतृप्त कहलाता है।
9. मानव के फेफड़े का सचित्र वर्णन करें।
उत्तर-मानव के शरीर में श्वसनतंत्र के अंग निम्नलिखित होते हैं-
बाह्य नासिका छिद्र, नासिका मार्ग, अंतःनासिका छिद्र, ग्रसनी, स्वरयंत्र (Larynx),
ट्रैकिया, ब्राँक्स एवं फेफड़ा। इनमें से श्वसन क्रिया सिर्फ फेफड़े में होती है शेष अंग
अंतःश्वसन (Inspiration) एवं निःश्वसन (Expiration) के लिए वायु का मार्ग बनाते हैं।
मनुष्य का फेफड़ा मुलायम, लचाला तथा स्पजा होता है। बच्चे के फेफड़े जहाँ गुलाबी
रंग के होते हैं, वहीं धीरे-धीरे वह भूरे रंग के हो जाते हैं, प्रत्येक फेफड़ा उपर की ओर पतला
और पिछले सिरे पर चौड़ा तथा डायफ्राम के कारण अवतल (Concave) हो जाता है। फेफड़ा
बाहर की ओर उतल (Convex) तथा भीतर की ओर अवतल होता है। दायां फेफड़ा अपेक्षाकृत
बड़ा और तीन पिण्डों में बँटा रहता है जिसे Superior middle एवं inferior Lobe कहते
हैं। बायां फेफड़ा छोटा, पतला किन्तु अधिक लम्बा होता है और Superior एवं Lobes में
बँटा रहता है। बायें फेफड़े का वजन लगभग 625 ग्राम और दायें फेफड़े का वजन लगभग
567 ग्राम होता है।
फेफड़ा वक्ष गुहा में स्थित होता है, प्रत्येक फेफड़े के चारों ओर पेरिटोनियम की दोहरी
परत होती है। एक फेफड़ा से चिपका हुआ और दूसरा वक्ष गुहा से चिपका हुआ। इन दोनों
के बीच का भाग Pleural Cavity कहलाता है, जिसमें लसिका भरा रहता है।
                                         वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. सांस लेने और छोड़ने की क्रिया को कहा जाता है?
(क) श्वसन
(ख) श्वासन
(ग) प्रश्वास
(घ) उच्छ्वास                                        उत्तर-(ख)
2. श्वासन केन्द्र (Breathing Centre) कहाँ स्थित होता है?
(क) मध्य मस्तिष्क
(ख) सेरीबेलम
(ग) सेरीब्रम
(घ) मेडुला ऑब्लांगाटा                          उत्तर-(क)
3.फेफड़ा चारों ओर से किसको ढंँके रहता है-
(क) पेरिकर्डियम
(ख) प्लूरा
(ग) पेरिऑस्टियम
(घ) पेरिकार्डियम                                  उत्तर-(ख)
4. मेढ़क में श्वसन होता है-
(क) त्वचा द्वारा
(ख) मुखग्रसनी द्वारा
(ग) फुप्फुस द्वारा
(घ) ये सभी                                   उत्तर-(घ)
5. कुपिका भित्ति क्षतिग्रस्त होने से गैप्तीय विनिमय सतह कम हो जाती है, इस बीमारी
को कहते हैं-
(क) एम्फाइसेमा
(ख) ब्राँकाइटिस
(ग) दम्मा
(घ) उपर्युक्त सभी                               उत्तर-(क)
6. मनुष्य में वातावरण एवं गैसीय विनिमय होता है-
(क) ब्रोंकाई में
(ख) लैरिक्स में
(ग) एल्वियोलाई में
(घ) ट्रैकिया में                                  उत्तर-(ग)
7. फेफड़ा स्थित होता है-
(क) वक्षगुहा में
(ख) हृदयावरणी गुहा में
(ग) सोलोम में
(घ) कोई नहीं                                    उत्तर-(क)
8. मानव फेफड़े में पिण्ड होते हैं-
(क) 2 बायें एवं 3 दायें
(ख) प्रत्येक में 3
(क) प्रत्येक में 2
(घ) 3 बायें और 2 दायें                        उत्तर-(घ)
9. निम्न में से कौन श्वसन की प्रक्रिया नहीं है?
(क) श्वासोच्छवास
(ख) उर्जा का उत्पादन
(ग) ऊतकों से रक्त में O2 विसरण
(घ) O2 का विसरण                            उत्तर-(क)
10. ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन का योग होने से किस यौगिक का निर्माण होता है?
(क) ऑक्सीहीमोग्लोबीन
(ख) कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन
(ग) ऑक्सोहीमोसायनिक
(घ) कोई नहीं                                      उत्तर-(क)
11. औसतन एक स्वस्थ मनुष्य कितनी बार श्वसन करता है?
(क) 12-16 बार
(ख) 18-20 बार
(ग) 30-35 बार
(घ) 16-32 बार                                   उत्तर-(क)
12. होमोग्लोविन के साथ 0, का संयोग तब होता है जब PO2 का मान होता है-
(क) कम
(ख) अधिक
(ग) दोनों
(घ) PO2 की आवश्यकता नहीं होती        उत्तर-(ख)
13. तापक्रम के बढ़ने पर हीमोग्लोबिन के प्रति आकर्षण
(क) घटता है
(ख) बढ़ता है
(ग) कोई प्रभाव नहीं पड़ता
(घ) कभी घटता है कभी बढ़ता है                  उत्तर-(क)
14. श्वासनली (Trachea) खुलती है-
(क) ग्लॉटिस में
(ख) गलेट में
(ग) क्लोएकल छिद्र में
(घ) इनमें से किसी में नहीं                              उत्तर-(क)
15. निःश्वसन और अंतःश्वसन का नियंत्रण होता है-
(क) इंटर कॉस्टलपेशी द्वारा
(ख) हृदय पेशी द्वारा
(ग) पसली द्वारा
(घ) सभी के द्वारा                                        उत्तर-(क)
                                                          □□□

Leave a Comment

error: Content is protected !!