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9th hindi notes | आ रही रवि की सवारी

 आ रही रवि की सवारी

9th hindi notes

वर्ग – 9

विषय – हिंदी

पाठ 6 – आ रही रवि की सवारी

आ रही रवि की सवारी
                                    -हरिवंश राय बच्चन
                  कवि – परिचय

हरिवंश राय बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में 27 नवंबर 1907 ई . को हुआ था । ‘ बच्चन ‘ माता – पिता द्वारा प्यार से लिया जानेवाला नाम था जिसे इन्होंने अपना उपनाम बना लिया । बच्चन कुछ समय तक विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहने के बाद भारतीय विदेश सेवा में चले गए थे । इस दौरान उन्होंने कई देशों का प्रमण किया और मंच पर ओजस्वी वाणी में काव्यपाठ के लिए विख्यात हुए । बच्चन की कविताएँ सहज और संवेदनशील हैं । इनकी रचनाओं में व्यक्ति – वेदना , राष्ट्र – चेतना और जीवन – दर्शन के स्वर मिलते हैं । बच्चन की प्रमुख कृतियाँ हैं – मधुशाला , निशा – निमंत्रण , एकांत संगीत , मिलन – यामिनी , आरती और अंगारे , टूटती चट्टानें एवं तरंगिनी और आत्मकथा के खंड – क्या भूलूँ क्या करूँ , नीड़ का निर्माण फिर , बसेरे से दूर , दशद्वार से सोपान तक ।

बच्चन साहित्य अकादमी पुरस्कार , सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार और सरस्वती सम्मान से सम्मानित हुए ।
प्रस्तुत कविता ‘ आ रही रवि की सवारी ‘ बच्चन के कविता संकलन निशा – निमंत्रण से ली गई है । बच्चन ने यह कविता अपनी प्रथम पत्नी श्यामा की मृत्यु के बाद लिखी थी । युग – जीवन की निराशा को मस्ती में रूपांतरित कर लेनेवाले बच्चन के व्यक्तिगत जीवन में जब यह घटना घटी तो फिर वह मधु के गीत नहीं गा सके । धीरे – धीरे वच्चन निष्क्रियता की परिधि से बाहर निकले तो एक दिन अनायास कविता की पंक्ति उनके अंतस् से फूट निकली । यह दिशा – निमंत्रण की पहली पंक्ति थी और साथ ही कवि का अपनी काव्य – यात्रा के दूसरे चरण में प्रवेश । यह घोर विषाद और उन्माद का चरण था । निशा – निमंत्रण में बच्चन की काव्य – प्रतिभा का सहजतम और तीव्रतम विस्फोट हुआ है । ‘ दिन जल्दी – जल्दी ढलता है ‘ से निशा के आगमन की व्यथा – कथा शुरू होती है और जैसे – जैसे निशा गहराती है , अवसाद बढ़ता जाता है । फिर भोर में आया कि पहली किरण फूटती है और कुछ देर बाद क्षितिज पर संभावनाओं का सूरज झाँकता दिखाई देता है । ‘ निशा – निमंत्रण ‘ के गीतों में एक ऐसी उदासी समाई है , जो धीरे – धीरे पाठक अथवा श्रोता के मन की उदासी को सोखती रहती है और अंत तक पहुँचते – पहुँचते वह एकदम हल्का हो जाता है । इन्हें सुनते हुए लगता है जैसे कोई झरना बह रहा है और हम किनारे खड़े उसकी कल – कल ध्वनि सुन रहे हैं । यहाँ कवि का एकाकीपन – जनित विषाद बहुत तीखे ढंग से अभिव्यक्त हुआ है । लेकिन यह विषाद हताश नहीं करता , निराशा के तिमिर को विच्छिन्न करके आशा की किरण उगाने को प्रेरित करता है ।

आत्मकथा के चार खंड : क्या भूलूं क्या याद करूं ( 1969 ) , नीड़ का निर्माण फिर ( 1970 ) , बसेरे से दूर ( 1977 ) , दशद्वार से सोपान तक ।

कविता का भावार्थ

जिस प्रकार राजा के निकलने के पहले रथ को सजाया – संवारा जाता है , पथ को सजाया जाता है , अनुचर आगे – पीछे लगे रहते हैं । उसी प्रकार सूर्य रूपी राजा के लिए नये किरणों से रथ सजा है , सुबह होते ही कलियाँ खिल जाती हैं मानो वैसा लग रहा हो जैसे रास्ते में चिढ़ाया गया हो । बादल अनुचर के रूप में पीछे – पीछे चल रहे हैं । स्वर्ण – वर्णी प्रकाश के कारण स्वर्ण वर्ण की पोशाक धारण किये हुए प्रतीत होते हैं । पक्षियों का कलरव गान मानो बंदी और चारण राजा का पश गाते मालूम पड़ रहे हैं । सूर्य के प्रकाश के कारण तारे वैसे लग रहे हैं , जैसे युद्ध करने आये ये लेकिन राजा के आते ही मैदान छोड़कर भाग गए । यह विजय देखकर कवि ठिठक जाता है और सोचने पर विवश हो जाता है कि रात का राजा चन्द्रमा सूर्य के प्रकाश में भिखारी – सा प्रतीत होता है ।

कविता के साथ

प्रश्न 1. ‘ आ रही रवि की सवारी कविता का केंद्रीय भाव क्या है ?

उत्तर – कवि घोर निराशा से उबरता है तो उसके नये जीवन की शुरुआत होती है । जैसे सुबह का सूर्य अपने दल – बल के साथ पृथ्वी पर पड़ा अंधेरा छौटते हुए नया जीवन देता है उसी प्रकार कवि के जीवन में भी नये आशा का संचार होता है । यहीं ‘ आ रही रवि की सवारी ‘ कविता का केन्द्रीय भाव है ।

प्रश्न 2. कवि ने किन – किन प्राकृतिक वस्तुओं का मानवीकरण किया है ?

उत्तर – कवि ने बादल , तारा , चंद्रमा आदि का मानवीकरण किया है जिसमें बादल अनुचर के रूप में , तारे फौज के रूप में और चन्द्रमा जो रात का राजा है सूर्य के उदय होने से मानो वह भिखारी जैसा खड़ा प्रतीत होता है ।

प्रश्न 3. ‘ आ रही रवि की सवारी कविता में चित्रित सवारी का वर्णन करें ।

उत्तर – नये किरण से रथ सजा है , कलियों और फूलों की तरह नये किरण सूर्य के रास्ते में सजे हैं । बादल अनुचर के रूप में है जो स्वर्ण किरणों के कारण स्वर्ण पोशाक धारण किये हुए मालूम पड़ते हैं । सूर्य के उदय होने के साथ ही तारे के विशाल फौज मानो छिप गये हों और रात का राजा चन्द्रमा भिखारी के रूप में राह में खड़ा हो ।

प्रश्न 4. भाव स्पष्ट करें । चाहता उछयूँ विजय कह , पर ठिठकता देखकर यह रात का राजा खड़ा है , राह में बनकर भिखारी ।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ हरिवंश राय बच्चन ‘ की कविता ‘ आ रही रवि की सवारी ‘ से उद्धृत हैं । यहाँ कवि का आशय यह है कि सूर्य के उदय होने के साथ ही जिस तरह चन्द्रमा छिप जाता है , वह बेबस भिखारी की तरह दिखलाई पड़ता है उसी तरह उसके जीवन से अब अवसाद के क्षण खत्म होते हैं तो उसे लगता है कि उसने जीवन पर विजय पा लिया हो । नये जीवन का संचार हुआ हो।

प्रश्न 5. रवि की सवारी निकलने के पश्चात् प्रकृति उसका स्वागत किस प्रकार से करती है ?

उत्तर – रवि की सवारी निकलने के पश्चात् प्रकृति उसका स्वागत राजा की तरह करती है । जिस प्रकार राजा निकलता है तो उसके जाने वाले पथ सजे रहते हैं , उसके चारों तरफ अनुचर पोशाक धारण कर उसका स्वागत करते हैं । बंदी और चारण के रूप में चिड़िया उनका कीर्ति ( यश ) गान करते हैं । उसके आने के डर से तारों के फौज मैदान छोड़कर भाग गये हैं ।

प्रश्न 6. रात का राजा भिखारी कैसे बन गया ?

उत्तर – सूर्य के उदय होने के कारण उसके प्रकाश से रात का राजा चन्द्रमा आकाश में मानो कहीं खो जाता है । चूँकि चंद्रमा का प्रकाश सूर्य के प्रकाश के सामने तुच्छ जान पड़ता है क्योंकि चंद्रमा का अपना स्वयं प्रकाश नहीं होता है इसलिए वह भिखारी प्रतीत होता है । सूर्य के प्रकाश में मानो वह भिखारी है । प्रकाश लेने के लिए वह खड़ा हो या उसका स्वागत करने के लिए ।

प्रश्न 7. इस कविता में रवि को राजा के रूप में चित्रित किया गया है । अपने शब्दों में यह चित्र पुनः स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर – कविता में रवि को राजा के रूप में इसलिए चित्रित किया गया है क्योंकि पूरे आकाश में सूर्य के समान तेज प्रकाश पुंजोंवाला कोई तारा नहीं है । वह जब उदित होता है तो सबसे पहले उसके डर से अंधेरा भाग जाता है । सुबह – सुबह ही फूल और कलियाँ खिलती हैं , वे ऐसे मालूम पड़ती हैं मानो राजा के पथ का स्वागत करने के लिए बिछ गयी हों । सूर्य के प्रकाश का रंग पीले होने के कारण पूरा बादल स्वर्णवर्णी प्रतीत होता है । चिड़ियाँ चहचहाने लगती हैं तो ऐसा लगता है कि उसके यश का गान कर रही हों । यह सब एक राजा के स्वागत की तरह प्रतीत होते हैं ।

प्रश्न 8. कवि क्या देखकर ठिठक जाता है ? और क्यों ?

उत्तर – कवि रात का राजा चन्द्रमा को सूर्य के प्रखर किरणों में छुप जाने का कारण चन्द्रमा उसे भिखारी सा प्रतीत होता है क्योंकि उसके पास अपना प्रकाश नहीं होता है । यही देखकर कवि ठिठक जाता है ।
प्रश्न 9. सूर्योदय के समय आकाश का रंग कैसा होता है ? पाठ के आधार पर बताएँ ।

उत्तर – सूर्योदय के समय आकाश का रंग स्वर्णवर्णी ( सोने के रंग के समान ) होता है । कवि ने लिखा है कि ‘ बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी । ‘ सूर्य के प्रकाश के कारण बादल स्वर्णवर्णी नजर आता है जिसके कारण सारा आकाश स्वर्णवर्णी हो जाता है ।

प्रश्न 10. ‘ चाहता उछा विजय कह ‘ में कवि की कौन – सी आकांक्षा व्यक्त होती है ?

उत्तर – जिस प्रकार राजा के आने से उसके पूरे साम्राज्य में भय व्याप्त हो जाता है , सभी उसका स्वागत अपने – अपने ढंग से करने में लग जाते हैं । तब उसे लगता है कि मेरी विजय पताका फहरा रही है । सभी ओर नया जीवन दस्तक दे रहा है । उसी तरह कवि को भी अपने जीवन में आशा की किरण फूटती है तो वह उल्लसित होकर उछल जाता है और उसे लगता है कि उसने जीवन पर विजय पा लिया हो । आशा ही जीवन का मूल उत्स है।

प्रश्न 11. राह में खड़ा भिखारी किसे कहा गया है ?

उत्तर – राह में खड़ा भिखारी रात का राजा ‘ चन्द्रमा ‘ को कहा गया है ।

प्रश्न 12. ‘ छोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी ‘ का काव्य – सौन्दर्य स्पष्ट करें ।

उत्तर – बच्चन की कविताओं में व्यक्ति – वेदना , राष्ट्र – चेतना और जीवन – दर्शन के स्वर मिलते हैं । सूर्य के उदय होने के साथ ही प्रखर किरणों के प्रकाश से तारे नहीं दिखलाई पड़ते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है कि तारों की फौज मैदान छोड़कर भाग गयी है । कवि के जीवन में जब प्रकाश की किरण दिखलाई पड़ी तो सारे अवसाद फुटते गये ।

भाषा की बात

प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें ।

उत्तर – रवि- सूर्य , दिनकर ।
किरण -प्रभा , रश्मि , अंशु ।
कुसुम- पुष्प , फूल ।
स्वर्ण -सोना कनक ।
विहग -खग , पक्षी ।
रात -रात्रि , निशा ।

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों का वाक्य – प्रयोग द्वारा लिंग निर्णय करें ।

उत्तर – सवारी ( स्त्री . )- राजा की सवारी आ रही है । कली ( स्त्री . )- कली – कली खिल गयी ।
पोशाक ( स्त्री . ) -बादलों ने स्वर्णवर्णी पोशाक धारण कर ली है ।
मैदान ( पृ . ) -मैदान गीला है ।
फौज ( स्त्री . ) -सारी फौज सीमा से लौट आयी है । भिखारी ( पु-) द्वार पर भिखारी खड़ा।

प्रश्न 3. कविता में प्रयुक्त उपमानों को चुनें ।

उत्तर – कली – कुसुम
नव – किरण ।

प्रश्न 4. कली – कुसुम , कीर्ति – गायन में कौन – सा समास है ?

उत्तर – द्वन्द्व समास ।

प्रश्न 5. कविता में आए देशज और विदेशज शब्दों को चुनें ।

उत्तर – पोशाक , भिखारी , फौज , मैदान ।

प्रश्न 6. निम्नलिखित पंक्तियों से विशेषण चुनें । नवकिरण का रथ सजा है । कली – कुसुम से पथ सजा है बादलों के अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी ।

उत्तर – नव , स्वर्ण ।

प्रश्न 7. ” विहग , बंदी और चारण ‘ में कौन – सा अलंकार है ?

उत्तर – उपमा ।

प्रश्न 8. निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखें ।

उत्तर – किरण किरणें कली कलियाँ पोशाक पोशाके सवारी सवारियाँ ।

 

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