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bihar board class 8 science notes | बिजली और भूकम्प

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bihar board class 8 science notes | बिजली और भूकम्प

अध्ययन सामग्री-प्रकृति की लीला भी अपरमपार है। मानव कितना भी चाह ले इससे
छुटकारा पाना सम्भव नहीं है। इसके प्रभावों से कम किया जा सकता है न कि इसे खत्म किया
जा सकता है या रोका जा सकता है। प्राकृतिक परिघटनाएँ जैसे पवन, चक्रवात, तूफान, बाढ़,
भूकम्प, तड़ित इतनी विनाशकारी परिघटना है। इसका वर्णन शब्दों में करना असंभव प्रतीत होता
है। इन्हीं प्राकृतिक परिघटनाओं में से कुछ का अध्ययन इस अध्याय में करेंगे।
आम जीवन में हम आप बिजली के खंभों पर तारों के हिलने-डुलने के कारण चमक एवं
कड़कड़ाहट उत्पन्न होते देखते हैं। अंधेरे में ऊनी कपड़े उतारते समय चिट्-चिट् की आवाज सुनाई पड़ती और साथ ही छोटी-छोटी चिनगारी भी देखने को मिलती है। ठीक उसी प्रकार आसमान में आवेशित बादलों के आपसी रगड़ से विशाल चिनगारी देखने को मिलती है।
सर्वप्रथम बेंजामिन फ्रेंकलिन ने बादलों में रगड़ के कारण उत्पन्न होने वाली विद्युत की
उपस्थिति को दर्शाया। बेंजामिन के प्रयोग को आजमाने के क्रम में रूसी वैज्ञानिक रिचमैन आवेशों के झटके से जान गंँवा बैठे। इस बलिदान ने तड़ित चालक की आवश्यकता तथा आविष्कार के सोच को जन्म दिया।
काफी अध्ययन शोध तथा निष्कर्ष के बाद यह साबित हुआ कि रगड़ या घर्षण से आवेश
उत्पन्न होते हैं। यानि रगड़ से एक वस्तु से दूसरे वस्तु में इलेक्ट्रॉन का प्रवाह होता है। इस प्रवाह
के कारण एक वस्तु में इलेक्ट्रॉन की कमी होती है। जिसके कारण वह धनावेशित हो जाते हैं
तो दूसरे में इलेक्ट्रॉन की अधिकता हो जाती है जिसके कारण वह ऋणावेशित हो जाते हैं। इस
प्रकार आवेश दो प्रकार के होते हैं। असमान आवेश एक-दूसरे को आकर्षित और समान आवेश
एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
कोई वस्तु आवेशित है अथवा नहीं इसकी जाँच करने के लिए बनाई गई युक्ति को
विद्युतदर्शी कहा जाता है।
किसी आवेशित वस्तु से आवेश को पृथ्वी में भेजने की प्रक्रिया को भू-सम्पर्कन कहते हैं।
विद्युत परिपथ में किसी गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होनेवाले आघात से बचने के लिए हम घरों
में भू-सम्पर्कन की व्यवस्था करते हैं।
संघनित जलवाष्प तथा हवा के रगड़ के कारण बादल आवेशित हो जाते हैं। जब संचित
आवेशों का परिमाण अत्यधिक हो जाता है तो धनावेश और ऋणावेश के बीच विद्युत प्रवाह के
कारण चमकीली धारियाँ दिखती हैं और तीव्र ध्वनि सुनाई पड़ती है जिसे तड़ित कहा जाता है।
आवेशों के मिलने तथा पृथ्वी तक आ जाने की इस क्रिया को विद्युत विसर्जन कहते हैं।
ऊंँची इमारतों चिमनियों, भवनों, टावरों एवं अन्य बड़ी संरचनाओं को तड़ित के प्रभाव से
बचाने के लिए सरल एवं कारगर युक्ति तड़ित चालक कहलाता है। भवन के सबसे ऊपरी हिस्से
के ऊपर ताँबे की मोटी तार को त्रिशूल के आकार में बनाकर लगा दिया जाता है। इस नुकीली
संरचना से ताँबे के तार को जोड़कर जमीन के नीचे ताँबे के प्लेट से जोड़ देते हैं। इस संरचना
को तड़ित चालक कहते हैं।
पृथ्वी की परत टुकड़ों में विभाजित है जिसके प्रत्येक टुकड़े को प्लेट कहते हैं। ये प्लेटें निरंतर
गति करती रहती हैं। गति के कारण ये कभी एक-दूसरे से रगड़ खाती है अथवा एक-दूसरे से
टक्कर के कारण भूपर्पटी में विक्षोभ उत्पन्न होता है। यही विक्षोभ पृथ्वी की सतह पर भूकम्प
के रूप में दिखाई देता है। पृथ्वी के भूपर्पटी पर कम्पन, ज्वालामुखी के फटने, उल्का पिण्ड के
पृथ्वी से टकराने अथवा किसी भूमिगत नाभिकीय विस्फोट के कारण भी उत्पन्न हो जाते हैं।
विज्ञान एवं तकनीकी विकास के क्रम में राबर्ट-मैलेट, जॉन मिल्व, थूइंग और ग्रे के सहयोग से
सतह भूकम्प-मापी बनाया गया । भूकम्प आने की संभावना की भविष्यवाणी संभव नहीं हो पायी है।
पृथ्वी के अचानक काँपने अथवा थरथराने को भूकम्प कहते हैं। इसके प्रभाव को कम किया जा
सकता है। भूकम्प या अन्य प्राकृतिक परिघटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए।
                                                            अभ्यास
1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
(क) सजातीय आवेश एक-दूसरे को………….करते हैं।
(ख) विजातीय आवेश एक-दूसरे को………….करते हैं
(ग) तड़ित चालक तड़ित से भवन को…………..करते हैं।
(घ) भूकम्प की तीव्रता का मापन…………….स्केल से किया जाता है।
उत्तर-(क) विकर्षित, (ख) आकर्षित, (ग) सुरक्षा, (घ) भूकम्पमापी ।
2. सर्दियों में स्वेटर उतारते समय चिट्-चिट् की आवाज होती है । क्यों ?
उत्तर-स्वेटर तथा शरीर के रगड़ से आवेश उत्पन्न होता है। आवेश के प्रवाह के कारण
विद्युत उत्पन्न होती है। इस प्रवाह को विद्युत उत्सर्जन कहा जाता है। जिस कारण तीव्र प्रकाश चिनगारी के रूप में उत्पन्न होती है जो हमें चिट्-चिट् की आवाज तथा चिनगारी के रूप में मालूम पड़ता है।
3. जब हम विद्युतदर्शी के ऊपरी भाग को छूते हैं तो वह अपना आवेश खो देती है।
व्याख्या कीजिए।
उत्तर-जब हम विद्युतदर्शी के ऊपरी भाग को छूते हैं तो उसके पत्ती में मौजूद आवेश हमारे
शरीर में प्रवाहित होकर चली आती है और पुनः हमारे शरीर से आवेश प्रवाहित होकर पृथ्वी में
चली जाती है। क्योंकि शरीर विद्युत् का सुचालक होता है। परिणामस्वरूप विद्युतदर्शी अपना
आवेश खो देती है।
4. भूकम्पमापी का चित्र बनाकर उसके मापन विधि को लिखिए।
उत्तर-छात्र शिक्षक की मदद से भूकम्पमापी की विधि को लिखें।
5. तड़ित तथा भूकम्प से अपनी सुरक्षा के उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर—तड़ित से सुरक्षा के उपाय–(i) तड़ित झंझा अथवा तूफान के समय खुले स्थान
में नहीं रहना चाहिए । (ii) बिजली तथा टेलीफोन के तारों या खम्भों स दूरी बनाए रखना चाहिए।
क्योंकि तड़ित एक विद्युत विसर्जन है। (iii) किसी भी बिजली से चलने वाले उपकरणों के प्रयोग
से बचना चाहिए । (iv) तड़ित अथवा तूफान के समय नदी, तालाब आदि में स्नान नहीं करना
चाहिए। (v) वातावरण शांत होने पर ही सुरक्षित स्थान से बाहर आना चाहिए।
भूकम्प से सुरक्षा के उपाय-भूकम्प से बचने के लिए आवश्यक सावधानियांँ बरतनी
चाहिए जो इस प्रकार हैं।
(i) गड्ढे वाली जगहों को भरकर, तालाबों एवं पोखरों के समीप घर बनाने से बचना
चाहिए। (ii) घर की बनावट भूकम्परोधी होना चाहिए। (iii) घर-घर के बीच दूरी होनी चाहिए।
(iv) भूकम्प के समय मजबूत चौकी या पलंग या टेबुल के नीचे झटकों के रूकने तक छिपे रहना
चाहिए । (v) संभव हो तो सर के ऊपर तकिया आदि गद्देदार चीज रख लेना चाहिए। (vi) भारी
वस्तुओं से दूर हटकर रहने का प्रयास करना चाहिए । (vii) भवनों, बिजली के तारों तथा वृक्षों
से दूर खुले स्थान में लेट जाना चाहिए।
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