10TH SST

bihar board 10 class geography note book

 प्राकृतिक आपदा : एक परिचय

bihar board 10 class geography note book

class – 10

subject – geography

lesson 1 –  प्राकृतिक आपदा : एक परिचय

प्राकृतिक आपदा : एक परिचय

महत्वपूर्ण तथ्य – हर प्रकार की आपदाओं के लिए मनुष्य ही जिम्मेदार नहीं होता है । कई भयावह आपदाओं के लिए प्रकृति जिम्मेदार होती है जिसके आगे मनुष्य भी लाचार होता है ।
जब किसी कारणवश प्राकृतिक व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न होता है तो वे व्यवस्था ही प्राकृतिक आपदा के रूप में प्रकट होते हैं । प्राकृतिक आपदाओं के रूप में बाढ़ , सूखाड़ , भूकंप , सुनामी विनाशकारी हैं । इनके अलावा चक्रवात , ओलावृष्टि , हिमस्खलन जैसी घटनाएँ भी प्राकृतिक आपदा के ही अंग है लेकिन प्रभाव छोटे स्तर पर होता है ।
जब पृथ्वी में कोई कंपन होता है तो वही भूकंप कहलाता है जिसका मापन एक्ट स्केल पर होता है ।
जब औसत वार्षिक वर्षा की मात्रा में 25 % से अधिक की कमी आ जाती है तो उसे सुखाड़ की स्थिति मानी जाती है ।
उदाहरण के लिए 2008 की कोसी नदी की बाढ़ तथा 1934 का भूकम प्राकृतिक आपदा के हो उदाहरण हैं । कोशी की इसी विनाशलीला के कारण इसे ” बिहार का शोक ” कहते हैं । भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में भू – स्खलन और मृदा स्खलन जैसी घटनाएँ अक्सर होती हैं।
आपदाएँ विकास कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करती हैं । अत : उनका प्रबंधन अनिवार्य है । उत्तर बिहार के लोगों ने बाढ़ के अनुरूप ही जीवनशैली बना ली है । सुखाड़ के प्रबंधन हेतु सामूहिक प्रयास से कुएँ तथा तालाब की खुदाई की जाती है । भूकम्प के प्रबंधन के लिए भूकम्प निरोधी भवनों के निर्माण में वृत्ताकार या बहुभुजीय आकृति के बदले आयताकार अथवा वर्गाकार भवन आकृति को प्राथमिकता दी जाती है । इसी प्रकार से तटीय भागों में सुनामी की चेतावनी और प्रबंधन के लिए विशेष कार्य किए गए हैं ।
कोई भी प्रबंधन आमलोगों की सहभागिता के बगैर सफल नहीं हो सकता । आपदा प्रबंधन का मूल उद्देश्य अपने आस – पास घटनेवाले घटनाओं की पूर्व जानकारी लोगों को देनी होती है ।

I . वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1. इनमें से कौन प्राकृतिक आपदा नहीं है ?
( क ) सुनामी ( ख ) बाढ़ ( ग ) आतंकवाद ( घ ) भूकंप
उत्तर- ( ग )
2. इनमें से कौन मानवजनित आपदा है ?
( क ) सांप्रदायिक दंगे ( ख ) आतंकवाद ( ग ) महामारी ( घ ) सभी
उत्तर- ( घ )
3. सुनामी का प्रमुख कारण क्या है ?
( क ) समुद्र में भूकंप का आना ( ख ) स्थलीय क्षेत्र पर भूकम्प का आना ( ग ) द्वीप पर भूकम्प का आना ( घ ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- ( क )

II . लघु उत्तरीय प्रश्न :

1. आपदा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर — जब किसी सुचारू व्यवस्था में अकारण ही व्यववधान उत्पन होता है तो उसे आपदा कहते हैं ।
2. आपदा कितने प्रकार की होती है ?
उत्तर – आपदा दो प्रकार की होती है
( i ) मानव जनित आपदा , ( ii ) प्राकृतिक आपदा । मानव जनित आपदा – वैसी आपदा जो मनुष्यों की गलतियों की वजह से उत्पन्न होती हैं । मानव जनित आपदा कहलाती हैं । जैसे दुर्घटना , आग लगना इत्यादि ।
प्राकृतिक आपदा — प्रकृति की सुचारू व्यवस्था में जब किसी कारण से व्यवधान उत्पन्न होता है तो ये व्यवधान ही प्राकृतिक आपदा के रूप में हमारे सामने आते हैं जैसे — बाढ़ , सुखाड़ आदि ।

3. आपदा प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है ?
उत्तर– आपदा किसी भी प्रकार की हो , उससे न सिर्फ विकास कार्य अवरुद्ध होता है बल्कि जान – माल को क्षति भी होती है । अतः आपदा प्रबंधन की आवश्यकता होती है ।

III . दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :

1. प्राकृतिक आपदा तथा मानव जनित आपदा में अंतर सही उदाहरण के साथ प्रस्तुत करें ।
उत्तर – प्राकृतिक आपदा जब प्रकृति को सुचारू व्यवस्था में किसी कारणवश व्यवधान उत्पन्न होता है तो ये व्यवधान ही प्राकृतिक आपदा के रूप में हमारे सामने आते हैं । उदाहरण बाढ़ , सुखाड़ , भूकंप , सुनामी आदि । मानव जनित आपदा – जब मनुष्य की लापरवाही की वजह से आपदाएँ आती हैं तो इसे मनुष्य जनित आपदा कहते हैं । उदाहरण लापरवाही के कारण हुई दुर्घटना , अधिक लोड शेडिंग के कारण आग लग जाना ।
2.आपदा प्रबंधन की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए उसकी आवश्यकता तथा अनिवार्यता का वर्णन करें ।
उत्तर — आपदा मानव जनित हो या प्रकृति जनित उससे विकास कार्य अवरुद्ध होता है । जिस सम्पत्ति तथा समाज के विकास में सदियों बीत जाते हैं वही सम्पत्ति तथा समाज आपदाओं के कारण पलभर में नष्ट हो जाते हैं । जान – माल की भारी क्षति होती है जिसकी पूर्ति काफी कष्टकारी होती है । अत : इन आपदाओं का प्रबंधन अनिवार्य होता है । उत्तर बिहार के लोग और विशेषकर कोसी प्रदेश के लोग बाढ़ के कारण , बाढ़ के अनुरूप ही अपनी जीवनशैली बना लेते हैं । सुखाड़ के प्रबंधन हेतु सामूहिक प्रयास से कुएँ तथा तालाब की खुदाई की जाती है । भूकंप के प्रबंधन हेतु नए तकनीक आधारित आयताकार तथा वर्गाकार भवन आकृति को प्राथमिकता दी जाती है । 2002 में भारत के पूर्वी तट तथा अंडमान निकोबार द्वीप समूह के सुनामी के कारण हुई बर्बादी को देखते हुए इसे कम करने की नीति अपनाई गई है । अत : आपदा प्रबंधन कार्य की मुख्य उद्देश्य लोगों के अपने आस – पास होने वाले संभावित  खतरों की जानकारी तथा उससे निबटने के तरीके की जानकारी देना होता है ।

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