Bihar Board Class 6th Social Science History Solutions Chapter 12 नए साम्राज्य एवं राज्य
Bihar Board Class 6th Social Science History Solutions Chapter 12 नए साम्राज्य एवं राज्य
Bihar Board Class 6th Social Science नए साम्राज्य एवं राज्य Text Book Questions and Answers
Notes
पाठ का सारांश
- समुद्रगुप्त को गुप्तवंश का सबसे महान् शासक, माना जाता है।
- चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की भी उपाधि धारण की।
- चन्द्रगुप्त द्वितीय के बाद इसका पुत्र कुमारगुप्त उत्तराधिकारी बना।
- कुमारगुप्त का उत्तराधिकारी स्कन्दगुप्त बना।
- गुप्तों ने एक प्रभावशाली शासन तंत्र की स्थापना की।
- हर्ष के संदर्भ में हमें उसके राजकवि बाणभट्ट की कृति हर्ष चरित, – मधुवन, बांसखेड़ा और संजान, ताम्रपत्र लेख एवं ह्वेनसांग के यात्रावृतांत आदि से जानकारी मिलती है।
- पुलकेशियन द्वितीय के संदर्भ में जानकारी हमें कई अभिलेखों से मिलती है। इनमें पुलकेशियन का दरबारी कवि रविकीर्ति द्वारा रचित एहोल अभिलेख जिससे हर्ष पर विजय आदि के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करते हैं।
- दक्षिण भारत के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास में पल्लवों का महत्वपूर्ण स्थान है। पल्लवों का प्रथम महत्वपूर्ण शासक महेन्द्रवर्मन प्रथम (600-630) हुआ। पल्लवों को द्रविड़ शैली के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। पल्लवकालीन वास्तुकला के उदाहरण राजधानी कांचीपुरम् एवं महाबलीपुरम् में पाये जाते हैं।
- प्राचीन भारत में शिक्षा के जितने भी केन्द्र थे उनमें नालन्दा का – स्थान सर्वोपरि है।
- भारत के अन्दर के पड़ोसी राज्यों ने ‘उपहार प्रदान कर एवं राजनिष्ठा का प्रमाण देकर’ समुद्रगुप्त के सामने आत्मसमर्पण किया।
- बाहरी क्षेत्रों के शासक, जो शायद शकों एवं कुषाणों के वंशज थे। इसमें (सिहल प्रदेश) श्रीलंका के भी शासक थे।
- समुद्रगुप्त के बाद रामगुप्त को हटाकर इसका योग्य पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय शासक बना।
- दक्षिण दिल्ली के मेहरौली स्थित लौहस्तंभ में चन्द्र नामक शासक का उल्लेख है जिसे चन्द्रगुप्त द्वितीय ही समझा जाता है।
- चन्द्रगुप्त द्वितीय का काल शक्ति और समृद्धि का सूचक था।
- गुप्त साम्राज्य का भारत के राजनीति एवं सांस्कृतिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है।
- आर्यावर्त क्षेत्र के शासकों को समुद्रगुप्त पराजित करके सीधे-सीधे अपने नियत्रंण में कर लिया। इस क्षेत्र में इसने नौ शासकों को पराजित किया।
अभ्यास
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प्रश्न 1. समुद्रगुप्त की प्रशस्ति किसने लिखी ?
(क) रविकीर्ति
(ख) हरिषेण
(ग) कालिदास
(घ) अमरसिंह
उत्तर- (ख) हरिषेण
प्रश्न 2. हर्षवर्धन किस वंश का राजा था?
(क) गुप्तवंश
(ख) मौर्यवंश
(ग) पुष्यभूति
(घ) मौखरी वंश
उत्तर- (ग) पुष्यभूति
प्रश्न 3. में हरौली के लौह स्तम्भ से किस राजा के बारे में जानकारी मिलती है?
(क) हर्षवर्धन
(ख) चन्द्रगुप्त द्वितीय
(ग) चन्द्रगुप्त मौर्य
(घ) चन्द्रगुप्त प्रथम
उत्तर- (ख) चन्द्रगुप्त द्वितीय
प्रश्न 4. नालन्दा विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को प्रवेश कैसे मिलता था?
(क) राजा के कहने पर
(ख) सवाल पूछकर (जाँच परीक्षा द्वारा)
(ग) पैसा लेकर
(घ) राजा के कर्मचारियों को
उत्तर- (ख) सवाल पूछकर (जाँच परीक्षा द्वारा)
प्रश्न 5. एहोल अभिलेख किस राजा की प्रशस्ति है ?
(क) नरसिंह वर्मन
(ख) पुलकेशिन द्वितीय
(ग) हर्षवर्धन
(घ) समुद्रगुप्त
उत्तर- (ख) पुलकेशिन द्वितीय
आओ याद करें
प्रश्न 1. समुद्रगुप्त एवं पुलकेशिन द्वितीय की प्रशस्ति के बारे में तीन-तीन पंक्ति लिखें।
उत्तर- समुद्रगुप्त गुप्तवंश का सबसे महान शासक था। ये वीणा और अश्वमेघ यज्ञ करते थे। लगभग सम्पूर्ण भारत पर उसका नियंत्रण था। पुलकेशिन द्वितीय चालुक्य वंश का महान राजा था। मालवा और गजरात के राजा के अलावा हर्ष को हराने के बाद परमेश्वर की उपाधि मिली।
प्रश्न 2. हर्ष के बारे में हमें किन स्रोतों से जानकारी मिलती है ? हर्ष के बारे में पाँच पंक्ति लिखें।
उत्तर- हर्ष के बारे में हमें राजकवि वाणभट्ट की कृति हर्ष चरित, मह वन ताम्रपत्र लेखों और हवेनसांग की यात्रा वृतांत से मिलती है। हर्षवर्धन पुष्यभूति वंश का महान शासक था। पिता का नाम प्रभाकरवर्धन था। भाई राजवर्द्धन की हत्या के बाद शशांक से बदला लेने के लिए गद्दी की बागडोर संभाली। बहन राजश्री को सती होने से बचाया। कन्नौज राजधानी बनाया और राज्य का विस्तार पंजाब, बंगाल, मिथिला और बिहार तक किया।
प्रश्न 3. पुलकेशिन द्वितीय ने हर्ष को क्यों पराजित किया ? इसकी जानकारी हमें कैसे मिलती है ?
उत्तर- हर्षवर्धन अपने विजय अभियान को जारी रखना चाहता था। वह दक्षिण की ओर के राज्यों को हराना चाहता था। पुलकेशिन द्वितीय को खतरा था। अतः उसने हर्ष को पराजित किया। पुलकेशिन द्वितीय का हर्ष पर विजय की जानकारी उसके दरबारी कवि रविकीर्ति द्वारा रचित एहोल अभिलेख से मिलती है।
आओ करके देखें
प्रश्न 4. समुद्रगुप्त ने जीते हुए राज्यों (राजाओं) के साथ अलग-अलग नीतियों को क्यों अपनाया ? वर्ग में अलग-अलग समूह बनाकर चर्चा करें और प्रत्येक ग्रुप के दो-दो कारणों को ढूँढें।
उत्तर- छात्र शिक्षक की मदद से स्वयं करें।
प्रश्न 5. समुद्रगुप्त के सिक्के को देखकर जैसा कि पुस्तक में दिया हुआ हैं यह जानने की कोशिश करें कि उसके अन्दर कौन-कौन गुण थे।
उत्तर- समुद्रगुप्त के सिक्के को देखकर पता चला – कला के क्षेत्र पर ध्यान देना, कर्मकाण्डों पर विश्वास करना।
प्रश्न 6. दक्षिण भारत के राजवंशों के बारे में लिखें। उनका ग्राम प्रशासन कैसे चलता था? क्या आपके गाँव और शहर में भी वैसी व्यवस्था है ?
उत्तर- दक्षिण भारत में चालुक्य वंश और पल्लव राजवंशों का शासन था। चालुक्य वंश के राजा पुलकेशिन द्वितीय महान राजा था. जिसने राज्य का विस्तार किया और हर्ष को पराजित किया। पल्लव राजवंश के नरसिंह वर्मन एक महान योद्धा था। उसने पुलकेशिन द्वितीय को हराया और राजधानी वातापी पर अधिकार किया। ग्राम प्रशासन को चलाने के लिए संगठन थे. जिसे उर सभा और नगरम् कहते थे। उर सभा के सदस्य होते. सभा समितियों में बँटा होता, सिंचाई, कृषि व्यवस्था, सड़क, मंदिरों की देख-रेख करता।
प्रश्न 7. आप अपने पिताजी की मदद से / परिवार के किसी सदस्य की मदद से परिवार या पड़ोस के एक परिवार की पाँच पीढ़ी के सदस्यों के नाम लिखें।
उत्तर- छात्र शिक्षक की मदद से स्वयं करें।
प्रश्न 8. राजा के लिए सेना क्यों आवश्यक थी ? सेनाओं के राजा के साथ चलने से कौन-कौन-सा लाभ एवं हानियाँ थीं। वर्ग में समूह बनाकर चर्चा करें।
उत्तर- सेना राजा के लिए आवश्यक अंग था। इतने बड़े राष्ट्र को चलाने के लिए शांति व्यवस्था, बाहरी हमलों से बचाने, साम्राज्य का विस्तार करने के लिए सेना की आवश्यकता थी। सेना से राज्य की सुरक्षा होती है। राजा का मान और सम्मान बढ़ता हानि -सेना रखने पर धन का व्यय अधिक होता है। राज्य की आमदनी का ज्यादा हिस्सा सेना पर खर्च होता है जिससे दूसरे क्षेत्रों में विकास में कमी आ जाती है।